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पांच मुखी रुद्राक्ष

पांच मुखी रुद्राक्ष
पांच मुखी रुद्राक्षइस रुद्राक्ष को रुद्र का स्वरूप कहा गया है। बृहस्पति ग्रह की प्रतिकूलता को दूर करने के लिए इसको धारण करना चाहिए। इसे धारण करने से निर्धनता, दाम्पत्य सुख में कमी, जांघ व कान के रोग, मधुमेह जैसे रोगों का निवारण होता है। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों को सुख, शांति व प्रसिद्धि प्राप्त होते हैं। इसमें पुखराज के समान गुण होते हैं। यह हृदय रोगियों के लिए उŸाम है। इससे आत्मिक विश्वास, मनोबल तथा ईश्वर के प्रति आसक्ति बढ़ती है। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन वाले जातक इसे धारण कर सकते हैं। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र: ऊँ ह्रां क्रां वां हां। सोमवार की सुबह मंत्र एक माला जप कर, इसे काले धागे में विधि पूर्वक धारण करना चाहिए।

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रुद्राक्ष के तंत्र प्रयोगों से दूर करें परेशानी

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रुद्राक्ष का नाम लेते ही सहसा भगवान शंकर

का स्वरूप मन-मनस्तिष्क में उभर जाता है चूंकि रुद्राक्ष भगवान

शंकर का मुख्य आभूषण है। रुद्राक्ष के अनेक प्रकार होते हैं।

इनमें कई चमत्कारिक शक्तियां होती हैं। रुद्राक्ष

का उपयोग तंत्र प्रयोगों में भी किया जाता है। रुद्राक्ष के

कुछ साधारण तंत्र प्रयोग इस प्रकार है- 1- एक ही जैसे मुख वाले रुद्राक्ष

की शुद्ध व शोधित माला पहनने से भगवान शिव

की कृपा प्राप्त होती है।

2- यदि रुद्राक्ष को गले में धारण करें तो भूत, प्रेत,

हवा आदि नकारात्मक शक्तियां इसके प्रभाव से पास

भी नहीं फटकती।

3- एक लोटा पानी में ऊँ नम: शिवाय का जप करते हुए

पांच रुद्राक्ष डालकर शाम को रख दें। सुबह वह

पानी पीने से पेट

की सभी बीमारियां दूर

हो जाएंगी। यदि ऐसा रोज करें तो शरीर

की दुर्बलता दूर हो जाएगी।

4- जिस बच्चे को रात में डर लगता है या जो रात में चिहुंक कर उठ

जाता है उसे रुद्राक्ष पहनने से यह समस्या दूर

हो जाती है।

5- रुद्राक्ष को चंदन की तरह घीस लें

और उसका तिलक करें। इस तिलके के प्रभाव से आप जिससे

भी बात करेंगे वह आपसे प्रभावित हुए

बिना नहीं रहेगा।




रुद्राक्ष की माला निम्न प्रकार से फल प्रदान करने में सहायक होती है जो इस प्रकार है-

रुद्राक्ष के सौ मनकों की माला धारण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष के एक सौ आठ मनकों को धारण करने से समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. इस माला को धारण करने वाला अपनी पीढ़ियों का उद्घार करता है

रुद्राक्ष के एक सौ चालीस मनकों की माला धारण करने से साहस, पराक्रम और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष के बत्तीस दानों की माला धारण करने से धन, संपत्ति एवं आय में वृद्धि होती है.

रुद्राक्ष के 26 मनकों की माला को सर पर धारण करना चाहिए

रुद्राक्ष के 50 दानों की माला कंठ में धारण करना शुभ होता है.

रुद्राक्ष के पंद्रह मनकों की माला मंत्र जप तंत्र सिद्धि जैसे कार्यों के लिए उपयोगी होती है.

रुद्राक्ष के सोलह मनकों की माला को हाथों में धारण करना चाहिए.

रुद्राक्ष के बारह दानों को मणिबंध में धारण करना शुभदायक होता है.

रुद्राक्ष के 108, 50 और 27 दानों की माला धारण करने या जाप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष की माला को धारण करने पर इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है कि कितने रुद्राक्ष की माला धारण कि जाए. क्योंकि रुद्राक्ष माला में रुद्राक्षों की संख्या उसके प्रभाव को परिलक्षित करती है. रुद्राक्ष धारण करने से पापों का शमन होता है. आंवले के सामान वाले रुद्राक्ष को उत्तम माना गया है. सफेद रंग का रुद्राक्ष ब्राह्मण को, रक्त के रंग का रुद्राक्ष क्षत्रिय को, पीत वर्ण का वैश्य को और कृष्ण रंग का रुद्राक्ष शुद्र को धारण करना चाहिए.

रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को लहसुन, प्याज तथा नशीले भोज्य पदार्थों तथा मांसाहार का त्याग करना चाहिए. सक्रांति, अमावस, पूर्णिमा और शिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है.

सभी वर्ण के मनुष्य रुद्राक्ष को पहन सकते हैं. रुद्राक्ष का उपयोग करने से व्यक्ति भगवान शिव के आशीर्वाद को पाता है. व्यक्ति को दिव्य-ज्ञान की अनुभूति होती है. व्यक्ति को अपने गले में बत्तीस रुद्राक्ष, मस्तक पर चालीस रुद्राक्ष, दोनों कानों में 6,6 रुद्राक्ष, दोनों हाथों में बारह-बारह, दोनों भुजाओं में सोलह-सोलह, शिखा में एक और वक्ष पर एक सौ आठ रुद्राक्षों को धारण करता है, वह साक्षात भगवान शिव को पाता है.


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!!! रुद्राक्ष का अदभुत रहस्य !!!

शिव पुराण के अनुसार शिवजी ने ही इस सृष्टि का निर्माण ब्रह्माजी द्वारा करवाया है। इसी वजह से हर युग में सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शिवजी का पूजन सर्वश्रेष्ठ और सबसे सरल उपाय है।इसके साथ शिवजी के प्रतीक रुद्राक्ष को मात्र धारण करने से ही भक्त के सभी दुख दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

भारत वर्ष में तो रुद्राक्ष से सभी परिचित हैं. यह आस्था के केंद्र के साथ अनेकों प्रकार से उपयोगी हैं. आजकल तो यूरोप और अमेरिका के लोग भी रुद्राक्ष से परिचित हो चले है.,सनातन धर्म में रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व है ,इससे वातावरण में शुद्धता आती है। प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्यो में रुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में जांच के बाद सिद्ध किया है इसे धारण करने से शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है।

रुद्राक्ष के पीछे कई कथाएं प्रचलित है त्रिपुरासुर वध के समय रुद्रावतार धारण किए महादेव की आंखों से बहने वाला जल रुद्राक्ष के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुआ। सती के देह त्याग के उपरांत महादेव ने रौद्र रूप धारण किया और सती के शव को कंधे पर लेकर तीनों लोकों में विचरण करने लगे, जिससे तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। इस विनाश को रोकने के लिए कमल नयन ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे सती के शरीर के कई टुकड़े हो गए । जब केवल भस्म ही शेष रह गयी तो वह फूट-फूट कर रो पड़े। इस तरह भगवान शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई।

रुद्राक्ष विभिन्न प्रकार के होते है 1 से लेकर 35 मुंह तक के सभी का अपना-अपना महत्व है। गौरी-शंकर नामक संयुक्त रुद्राक्ष, पैंतीस मुखी एवं एकमुखी रुद्राक्ष प्राप्त होना र्दुलभ है। जितना पुराना रुद्राक्ष होगा उतना ही अधिक प्रभावशाली होगा।यह दिमागी शांति, धैर्य और सामाजिक दबदबे में वृद्धि करता है। रुद्राक्ष कई प्रकार के रहते हैं। सभी का अलग-अलग महत्व होता है।

इन्हें धारण करने के लिए कई प्रकार के नियम बताए गए हैं, नियमों का पालन करते हुए रुद्राक्ष धारण करने पर बहुत जल्द सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। वैसे तो रुद्राक्ष अपने आप में ही बहुत महत्वपूर्ण है मगर इसे विधि-विधान से धारण करने पर अत्यधिक फल देता है।युवा वर्ग के जीवन को सही दिशा देता है, धन और मान-सम्मान दिलाता है, हाई ब्लड प्रैशर को भी कंट्रोल करता है। विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग रुद्राक्ष को उपयोग में लाया जाता है। माला के रूप में 108 या 32 रुद्राक्षों की माला पहनने का विधान है, कलाई में 27, 54 या 108 रुद्राक्षों की माला पहनी जा सकती है।

रुद्राक्ष कहां से और कैसे प्राप्त होता हैं

रुद्राक्ष कहां से और कैसे प्राप्त होता है रुद्राक्ष मूलतः एक जंगली फल है, इसकी पैदावार समुद्र तल से लगभग दो हजार मीटर तक की ऊंचाई वाले पर्वतीय व पठारी क्षेत्रों में होती है। रुद्राक्ष के मूल फल को प्रयोग में लाने के लिए पानी में गलाकर साफ करना पड़ता है।

इस आलेख में भारत और विदेशों में पाये जाने वाले रुद्राक्षों की जानकारी दी जा रही है.... रुद्राक्ष के वृक्ष सामान्यतः आम के वृक्षों की तरह घने एवं ऊंचे होते हैं। इनकी ऊंचाई 50 फुट से 200 फुट तक होती है। रुद्राक्ष वृक्ष के पत्ते लगभग 3 से 6 इंच तक लंबे होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के तथा फल गोलाकार हरी आभायुक्त नील वर्ण के आधे से एक इंच व्यास तक के होते हैं। रुद्राक्ष वृक्ष के फल खाने में कुछ मीठे व कुछ कसैले, खटास भरे होते हैं।

जंगल में पैदा होने वाले इस पेड़ पर फल कार्तिक मास के अंत में या मार्गशीर्ष में लगने लगते हंै। इसके फलों को अनेक पक्षी, विशेषकर नीलकंठ, बड़े चाव से खाते हैं। रुद्राक्ष का वृक्ष बारहों मास हरा-भरा रहता है, इसमें हमेशा फूल और फल लगे रहते हैं। इसका फल 8-9 मास में सूखकर जब स्वतः पृथ्वी पर गिरता है, तब इसके ऊपर छिलके का आवरण चढ़ा रहता है, जिसे एक विशेष प्रक्रिया द्वारा पानी में गलाकर साफ किया जाता है और इससे मजबूत गुठली के रूप में रुद्राक्ष प्राप्त होता है।

रुद्राक्ष के ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से संतरे के समान फांकें बनी होती हैं, जिन्हें आध्यात्मिक भाषा में मुख कहा जाता है। कुछ रुद्राक्षों में प्राकृतिक रूप से छिद्र पाए जाते हैं, जो कि उत्तम कहलाते हैं। रुद्राक्षों का मूल्यांकन उनमें पाए जाने वाले छिद्र, मुख, आकार आदि के अनुरूप किया जाता है। रुद्राक्ष की जाति के समान दूसरे फल है- भद्राक्ष एवं इंद्राक्ष। भद्राक्ष में रुद्राक्ष के समान मुखजनित धारियां नहीं होतीं और इंद्राक्ष वर्तमान में लुप्तप्राय हो चुका है और कहीं देखने को नहीं मिलता। इसकी पैदावार हेतु उष्ण व सम शीतोष्ण जलवायु एवं 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान अनुकूल माना गया है। इसी कारणवश रुद्राक्ष के वृक्ष समुद्र तल से 2000 मीटर तक की ऊंचाई पर पर्वतीय व पठारी क्षेत्रों तथा नदी या समुद्र के तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।




राशियों के अनुरूप रुद्राक्ष

१. मेष ;राशि के स्वामी ग्रह मंगल है,इसलिए ऎसे जातक तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें । 

२. वृषभ ;राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है । अतः इस राशि के जातकों के लिए छह मुखी रुद्राक्ष फायदेमंद होता है । 

३. मिथुन ;राशि के स्वामी ग्रह बुध है । इस राशि वालों के लिए चार मुखी रुद्राक्ष है । 

४. कर्क ;राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा है । इस राशि के लिए दो मुखी रुद्राक्ष लाभकारी है । 

५. सिंह ;राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है । इस राशि के लिए एक या बारह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा । 

६. कन्या ;राशि के स्वामी ग्रह बुध है । इनके लिए चार मुखी रुद्राक्ष लाभदायक है । 

७. तुला ;राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है । इनके लिए छह मुखी रुद्राक्ष व तेरह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा । 

८. वृश्चिक ;राशि के स्वामी ग्रह मंगल है । इनके लिए तीन मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होगा । 

९. धनु ;राशि के स्वामी ग्रह (गुरु )वृहस्पति है। ऎसे जातकों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष उपयोगी है । 

१०. मकर ;राशि के स्वामी ग्रह शनि है । इनके लिए सात या चौदह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा । 

११. कुंभ ;राशि के स्वामी ग्रह शनि है । इनके लिए सात या चौदह मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होगा । 

१२. मीन ;राशि के स्वामी ग्रह गुरु है । इस राशि के जातकों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा । 

राहु ; के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष और केतु के लिए नौ मुखी रुद्राक्ष का वर्णन किया गया है 




छः मुखी रुद्राक्ष

छः मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का स्वरूप है। शुक्र ग्रह की प्रतिकूलता होने पर इसे अवश्य धारण करना चाहिए। नेत्र रोग, गुप्तेन्द्रियों, पुरुषार्थ, काम-वासना संबंधित व्याधियों में यह अनुकूल फल प्रदान करता है। इसके गुणों की तुलना हीरे से होती है। यह दाईं भुजा में धारण किया जाता है। इसे प्राण प्रतिष्ठित कर धारण करना चाहिए तथा धारण के समय ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। इसे हर राशि के बच्चे, वृद्ध, स्त्री, पुरुष कोई भी धारण कर सकते हैं। गले में इसकी माला पहनना अति उŸाम है। कार्तिकेय तथा गणेश का स्वरूप होने के कारण इसे धारण करने से ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। इसे धारण करने वाले पर माँ पार्वती की कृपा होती है।

आरोग्यता तथा दीर्घायु प्राप्ति के लिए वृष व तुला राशि तथा मिथुन, कन्या, मकर व कुंभ लग्न वाले जातक इसे धारण कर लाभ उठा सकते हैं। छः मुखी रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र: ‘ऊँ ह्रीं क्लीं सौं ऐं’। इसे धारण करने के पश्चात् प्रतिदिन ‘ऊँ ह्रीं हु्रं नमः’ मंत्र का एक माला जप करें।


सात मुखी रुद्राक्ष

इस रुद्राक्ष के देवता सात माताएं व हनुमानजी हैं। यह शनि ग्रह द्वारा संचालित है। इसे धारण करने पर शनि जैसे ग्रह की प्रतिकूलता दूर होती है तथा नपुंसकता, वायु, स्नायु दुर्बलता, विकलांगता, हड्डी व मांस पेशियों का दर्द, पक्षाघात, सामाजिक चिंता, क्षय व मिर्गी आदि रोगों में यह लाभकारी है। इसे धारण करने से कालसर्प योग की शांति में सहायता मिलती है। यह नीलम से अधिक लाभकारी है तथा किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं देता है। इसे गले व दाईं भुजा में धारण करना चाहिए। इसे धारण करने वाले की दरिद्रता दूर होती है तथा यह आंतरिक ज्ञान व सम्मान में वृद्धि करता है। इसे धारण करने वाला उŸारोŸार उŸाम प्रगति पथ पर चलता है तथा कीर्तिवान होता है। मकर व कुंभ राशि वाले, इसे धारण कर लाभ ले सकते हैं। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र: ‘ऊँ ह्रं क्रीं ह्रीं सौं’। इसे सोमवार के दिन काले धागे में धारण करें।



चमत्कारी फलदायी एक मुखी काजू दाना रुद्राक्ष )

रुद्राक्ष......रुद्राक्ष की उत्त्पत्ति रूद्र देव के आंसुओं से हुई है। रुद्राक्ष का प्रयोग दो रूपों में किया जाता है। एक आध्यात्मिक और दूसरा वैज्ञानिक और स्वास्थवर्धक।

एस्ट्रोलॉजर अंकुर नागौरी ने रुद्राक्ष का अध्यात्मिक प्रभाव बताते हुए कहा की एक मुखी रुद्राक्ष का प्रतीक भगवान शिव को माना जाता है तथा इस एक मुखी रुद्राक्ष का सतारुढ़ ग्रह सूर्य है अत: सूर्य द्वारा शुभ फलों की प्राप्ति तथा सूर्य की अनुकूलता हेतु इसे धारण किया जाता हैl एक मुखी रुद्राक्ष आध्यात्मिकता का प्रकाशक बनकर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता हैl इसे पूजने तथा धारण करने से व्यक्ति के समस्त दुखों एवं पापों का शमन होता है तथा शांति एवं सुख प्राप्त होता है l 

उनके इर्द गिर्द अष्ट सिद्धियाँ भ्रमण करती रहती हैं। और मोक्ष कों प्राप्त करते है और जन्म जन्म के चक्कर से मुक्त हो जाते है। शास्त्रों में वर्णित है की एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति कों कभी भी धन - धन्य की कमी नहीं होती है और आकस्मित मौत भी नहीं हो सकती l

वैज्ञानिक और स्वास्थवर्धक प्रभाव......जो व्यक्ति पागल हो जाते हैं वैसे व्यक्ति कों एकमुखी रुद्राक्ष घिस कर मक्खन के साथ सुबह शाम देने से उसका मानसिक संतुलन ठीक हो जाता है।

जो व्यक्ति कोमा में चले जाते हैं वैसे व्यक्ति कों एक मुखी रुद्राक्ष का एक बीज निकाल कर, पीस कर पिलाने से वह कोमा से बहार आ जाते हैं।

नेत्रों की ज्योती, सिरदर्द , हृदय रोग , नजर दोष ,उदर संबंधी रोग जैसी अनेक व्याधियों से छुटकारा मिलता है. स्नायु रोग,अतिसार,ह्रदय गति से संबंधित रोगों को दूर करने में एक मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता हैl

घर मे मंदिर मे भगवान शिव को अपर्ण करने पर घर कलेश और वास्तु दोष दूर होते हैl

सोमवार के दिन इसको धारण करने से अनेकोनेक लाभ मिलते हैl

एक मुखी रूद्राक्ष गोलाकार रूप में तथा काजू दाना रूप वाला भी होता है. गोलाकार रूपी रुद्राक्ष मिलना दुर्लभ होता हैl 

एक मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ॐ नमः शिवाय ,

ॐ नमः ह्रीम











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