Header Ads

अगर आपको कई बार लगता है कि "ऐसा पहले भी हो चुका है"


अगर आपको कई बार लगता है कि "ऐसा पहले भी हो चुका है" तो ये हैं इसके कारण
किसी जगह पर पहुंचने पर होता है ऐसा अहसास।
Healths Is Wealth  ·

SPONSORED



जहाँ मौज-मस्ती की बात होती है तो मुझे घूमना-फिरना याद आ जाता है। यह मेरा शौक है। गर्मी की छुट्टियों में मैं कभी नानी के घर तो कभी चाचा के घर चली जाती थी। पिछले साल पापा ने तय किया कि हम इस बार छुट्टियों में मैसूर जाएंगे। मैं बहुत खुश हो गई। वहाँ जाकर बहुत मजा आया। मगर कुछ अजीब सा भी महसूस हुआ। कारण कि कुछ स्थानों पर जाने के बाद ऐसा लगा कि मैं पहले भी वहां जा चुकी हूं। यह सुनने में अजीब जरूर है मगर कुछ जगहों पर मुझे बिल्कुल ऐसा ही महसूस हुआ। 

पहले लगा कि यह इत्तेफाक है। मगर जब कई बार ऐसा ही महसूस होने लगा तो मन में ख्याल आया कि ये कोई बीमारी तो नहीं है। फिर दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात की। 

आखिरकार जब बात नहीं बन पाई तो रिसर्च शुरू की। इसके बाद सवालों के जवाब मिल गए। हो सकता है कि आपको भी इससे किसी उलझन का जवाब मिल जाए। आइए जानते हैं पूरा मामला।
Healths Is Wealth  ·



ये कोई बीमारी नहीं है


अगर आपको भी अनजान जगह पर जाकर ऐसा लगता है कि आप पहले भी वहां जा चुके हैं तो यह सोचना बिल्कुल गलत है कि आपको कोई बीमारी है। असल में ऐसा ' डेजा वू' की वजह से होता है। ये एक फ्रेंच शब्द है। इसका मतलब होता है कि 'पहले देखा गया'।



Healths Is Wealth  ·

दो तरह की याद होती है 


डेजा वू की बात करें तो यादों का उल्लेख करना वाजिब है। असल में हमारे दिमाग में दो तरह की याद होती है। एक वो यादें जिन्हें हम अच्छी तरह से याद कर पाते है कि वो घटना कब, कहां, और कैसे घटी। दूसरी वो जिनके होने का एहसास तो हमें होता है पर हमें ये याद नहीं आता कि ये कब, कैसे और कहां हो चुकी है। डेजा वू के कितने प्रकार हैं, बात उन्हीं की।

Healths Is Wealth  ·
विज्ञान के मुताबिक दो तरह का डेजा वू होता है


विज्ञान के मुताबिक डेजा वू दो तरह का होता है। एक डेजा वू वो होता है जो एपिलेप्सी नाम की बीमारी से पीड़ित लोगों को होता है। दूसरा डेजा वू वो होता है जो बिना किसी बीमारी से पीड़ित सामान्य लोगों को होता है। किस उम्र में होता है डेजा वू, आइये जानते हैं अगली स्लाइड में।

Healths Is Wealth  ·

15 से 25 साल के बीच आशंका ज्यादा



15 से 25 साल की उम्र के लोगों में डेजा वू होने की आशंका ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इससे छोटे बच्चों को इतनी समझ नहीं होती कि वो डेजा वू को समझ पाए।

Healths Is Wealth  ·
डेजा वू के पीछे है कई थ्योरी


डेजा वू को समझाने के लिए कई थ्योरी सामने रखी गई है। हालांकि इससे कई लोगों को संतोषप्रद उत्तर नहीं मिले। पुनर्जन्म, भ्रम, ध्यान भटकना जैसी बातें बताती है कि ऐसी 40 थ्योरी मौजूद है जो डेजा वू को समझाती है।

Healths Is Wealth  ·
पिछला जन्म तो कारण नहीं 


भारतीय सभ्यता हो या दक्षिणी, मगर बहुत से लोग ऐसे हैं जो पुनर्जन्म के होने और इससे जुड़ी घटनाओं पर विश्वास करते हैं। कुछ लोगों के मुताबिक डेजा वू का कारण हमारा पुनर्जन्म हो सकता है। हमें अपनी इस ज़िन्दगी में जब कोई जगह जानी-पहचानी लगती है तो हो सकता है कि आप अपने पिछले जन्म में वहाँ जा चुके हैं।


समानांतर ब्रह्माण्ड भी हो सकता है डेजा वू का कारण


जिस प्रकार हमारी एक दुनिया है और उसका एक ब्रह्माण्ड है। उसी तरह इतने बड़े अंतरिक्ष में और भी ब्रह्माण्ड हो सकते हैं। हालांकि हर ब्रह्माण्ड का अपना समय, अंतर और फ्रीक्वेंसी होती है। जब दो ब्रह्मांड की समय रेखा एक दूसरे को काटती है तो हमें दूसरे ब्रह्माण्ड की घटनाएं डेजा वू के तौर पर दिखाई देती हैं। ऐसा होने के पुख्ता सबूत तो नहीं है पर कई शोधकर्ताओ का विश्वास है कि डेजा वू को समझाने वाली ये थ्योरी सही है। 



Glitch theory 


इस थ्योरी की बात करे तो इसके मुताबिक समय और कुछ नहीं बल्कि एक धोखा या झूठ है। इसे इंसान ने ही अपनी दुनिया को चलाने और अपने कामों को सही तरह से करने के लिए बनाया है। इस थ्योरी के हिसाब से डेजा वू कोई सपना नहीं बल्कि सच्चाई है। इसमें हम भूत, भविष्य और वर्तमान को साथ में जीते है। 


जब सपनों की दुनिया हकीकत से टकराती है 


हम सपनों में चाहे तो पानी पर चल सकते हैं या हवा से भी बातें कर सकते हैं। हम सपने में बहुत सी ऐसी जगहों पर जाते हैं जहाँ पर हम असल ज़िन्दगी में कभी गए ही नहीं। अक्सर हमें हमारे सपने याद नहीं रहते हैं। जैसे ही हम जागते हैं तो उन जगहों को भूल जाते हैं। फिर जब हम हकीकत में ऐसी किसी मिलती-जुलती जगह पर जाते हैं तो हमें हमारी सपनों की यादों की वजह से डेजा वू का अनुभव होना संभव है। 


दो तरह के मन होते हैं 


विज्ञान के मुताबिक सचेत मन के साथ-साथ हमारा अचेत मन भी होता है। हमारे सचेत मन के अलावा हमारे अचेत मन में भी कई यादें कैद रहती है। अगर हम किसी जगह पर जाते हैं या किसी घटना को देखते हैं तो हमारे अचेत मन में उसकी याद रहती है। अगर हम वैसी ही किसी जगह पर दोबारा जाते हैं तो यूँ लगता है मानो पहले भी ये घटना या जगह देख चुके हैं। अचेत मन, डेजा वू को और कैसे प्रभावित करता है। आइये पढ़ते है अगली स्लाइड में। 


डेजा वू से जुड़ी डरावनी मान्यताए भी है 


डेजा वू का अनुभव होने पर हमें उस घटना के आगे पीछे की जानकारी याद नहीं रहती इसलिए ऊपर दी गई थ्योरी के अलावा कुछ आम लोगो का ये भी मानना है कि इसके पीछे भूत-प्रेत और आत्माओ का भी हाथ हो सकता है। 


दो मन की उलझन है ध्यान-विभाजन 


कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.