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गर्भधारण में समस्या उम्र और प्रजनन क्षमता |





गर्भधारण में समस्या उम्र और प्रजनन क्षमता |  भौतिकवाद की चकाचौंध, बदलती जीवनशैली और भाग दौड़ भरी दिनचर्या के बीच आज एक नई समस्या बहुत तेजी से समाज में अपनी जड़ मजबूत करती जा रही है. जिसका नाम है फर्टिलिटी या गर्भधारण की समस्या (Problems of Pregnancy). गर्भधारण की समस्या के कारण अनेक दम्पतियों की शादीशुदा जिंदगी दुर्भर तो हो ही जाती है साथ ही वे जीवन के एक सबसे बड़े सुख, संतानोत्पति के सुख को भोगने से भी वंचित रह जाते हैं. यही नहीं गर्भधारण न हो पाने से परिवार पड़ोस और समाज के ताने सुनते- सुनते कान भर जाते हैं.
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गर्भधारण की समस्या के कई कारण हो सकते है. जिनमें भाग दौड़ भरी जिंदगी, उम्र और प्रजनन क्षमता, समय का अभाव, असंतुलित खान पान आदि शामिल हैं. आज के नव विवाहित जोड़ों में एक प्रवृति यह भी देखी गई है कि वे विवाह के बाद कई वर्षों तक संतान नहीं चाहते. इस लिए वे अनेक प्रकार के गर्भनिरोधक संसाधनों का उपयोग करते हैं. और वे यह भी सोचते हैं कि सही समय आने पर हम गर्भधारण कर लेंगें. परन्तु यही सोचते-सोचते उनकी उम्र 28 -30 को क्रास करने लगती है जो गर्भधारण में मुश्किल पैदा करती है. इस उम्र के बाद जब आप गर्भधारण करने का प्रयास करते हैं तो पता चलता है कि अब गर्भधारण में समस्या आ रही है.

 बढ़ती उम्र में गर्भधारण करना अत्यंत मुश्किल होता है. 
गर्भधारण में समस्या या मुश्किलें | गर्भाधान न कर पाने की समस्या 

मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर, दिल्ली की डॉक्टर शोभा गुप्ता बताती हैं कि जब आपकी उम्र 35 साल से अधिक हो गई हो और पिछले एक वर्ष से गर्भधारण की योजना बना रहीं हों तथा कोई भी सकारात्मक परिणाम न दिख रहा हो तो आपको तुरंत फर्टिलिटी एक्सपर्ट (Fertility Expert ) से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर के अनुसार ऐसे कुछ लक्षण हैं, जिनसे पता चलता है कि आपको गर्भाधारण में समस्या हो सकती हैं. यह भी हो सकता है कि आप में प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) कमजोर हो गई हो.

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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार 20 से 29 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं में सर्वाधिक जननक्षमता (फर्टाइल) होती हैं. जैसे जैसे उम्र बढ़ती वैसे-वैसे प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) प्रभावित होती है. इस लेख के माध्यम से हम आपको यह अवगत कराना चाहते हैं कि उम्र का प्रजनन क्षमता पर क्या असर पड़ता है.
आपकी उम्र और प्रजनन क्षमता
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार महिलाओं में 30 वर्ष की अवस्था के आसपास उनकी प्रजनन क्षमता (Fertility) कम होने लगती है जो कि 35 वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते इसकी गति और तेज हो जाती है. अर्थात महिला की उम्र बढ़ने के साथ साथ उनके गर्भवती होने की संभावना घटती जाती है और प्रजनन अक्षमता (Infertility, इनफर्टिलिटी) उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती जाती है. हालांकि व्यवहार में यह देखा गया है कि अधिकांश महिलाएं 35 वर्ष की उम्र में या उसके बाद भी प्राकृतिक तौर से गर्भवती होकर स्वस्थ शिशु को जन्म भी दे सकती हैं. 35 वर्ष की उम्र के बाद इनफर्टिलिटी (Infertility, प्रजनन अक्षमता), समय पूर्व प्रसव, गर्भपात या शिशु में समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जाती है. 40 वर्ष की उम्र तक आते-आते गर्भधारण की इच्छा रखने वाली पांच महिलाओं में से केवल दो महिलाएं ही वांछित सफलता प्राप्त कर पाती हैं.
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इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आई.वी.एफ.) करवाने वाली महिलाओं की उम्र बढ़ने से भी यह स्पष्ट हो रहा है कि प्रजनन अक्षमता उम्र के साथ -साथ बढ़ती है अर्थात महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता उम्र के साथ घटती जाती है. हालांकि, पुरुष प्रजनन क्षमता भी उम्र के साथ घटती है, मगर इसकी घटने की दर काफी मंद होती है. जबकि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में प्रजनन क्षमता घटने की दर काफी धीमी रहती है. पुरुषों में प्रजनन क्षमता 50 से 60 वर्ष के बाद भी रह सकती है, परन्तु शुक्राणुओं (स्पर्म) से जुड़े विकारों का अनुपात उम्र के साथ बढ़ने लगता है. पुरुष प्रजनन क्षमता में कमी का प्रभाव होने वाले शिशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.

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जुड़वां बच्चे कब होते है?

यदि आप 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भवती होने के प्रयास कर रही हैं, तो आपको जुड़वां या इससे ज्यादा शिशु होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है. वास्तव में, उम्र बढ़ने के साथ साथ आपके शरीर को फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच) का उत्पादन अधिक करना पड़ता है क्योंकि आपके अंडाशयों में काफी कम जननक्षमता वाले डिंब बचे होते हैं. यह हार्मोन डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) को प्रेरित करता है. फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच) के अधिक उत्पादन की वजह से हो सकता है कि एक से ज्यादा फॉलिकल परिपक्व हों और डिंब जारी करें. ऐसी दशा में जब एक से अधिक डिंब निषेचित हो जाते हैं तो जुड़वां या अधिक शिशुओं का जन्म होता है. जुड़वा शिशुओं के पैदा होने से कभी कभी महिलाएं काफी उत्साहित महसूस करती हैं. परन्तु, यह भी ध्यान रखने योग्य बात है कि एक शिशु की देखभाल की तुलना में जुड़वा या उससे अधिक शिशुओं की देखभाल में अधिक समय, भावनाएं और पैसा लगता है.

क्या उम्र बढ़ने पर गर्भाधान करने में अधिक समय लगता है?
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जी हाँ! उम्र बढ़ने के साथ साथ गर्भाधान होने की क्षमता घटने लगती है अर्थात आपकी उम्र 24 वर्ष से कम है तो आप बहुत जल्दी ही गर्भाधान कर पाती हैं क्योंकि 20 से 24 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं में सबसे ज्यादा जननक्षमता होती है. वे महिलाएं जिनकी उम्र 30 से 36 वर्ष की है उन्हें गर्भाधान करने में तुलनात्मक रूप से अधिक समय लगने की संभावना होती है. जबकि 40 से 44 वर्ष की उम्र में गर्भाधान करने में और अधिक समय लग सकता है. इसके आलावा आपको गर्भाधान में सम्सयाएं या मुश्किलें भी आ सकती हैं.

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आंकड़ों के अनुसार कम उम्र के अधिकांश दंपत्ति (लगभग 85 प्रतिशत) जो नियमित रूप से संभोग (गर्भनिरोधक संसाधनों का इस्तेमाल किए बिना) करते हैं वे एक वर्ष के अंदर गर्भधारण करने में सफल हो सकते हैं. ध्यान रहे कि यहाँ नियमित संभोग का आशय अपने पूरे मासिक चक्र (माहवारी) में हर दूसरे या तीसरे दिन संभोग करने से है. मासिक चक्र के दौरान आपको गर्भधारण करने की संभावनाएं सबसे अधिक होती हैं.

आंकड़ों के अनुसार जो दम्पति एक साल में गर्भवती नहीं हो पातीं, उनमें से 50% महिलाऐं अगले वर्ष गर्भधारण कर लेती हैं. अन्य एक प्रतिशत महिलाएं अगले वर्ष अर्थात तीसरे वर्ष गर्भाधान करने में सफल हो जाती हैं, यदि प्रयासरत रहती हैं तो. आंकड़ों के अनुसार ऐसे में सामान्य जनसंख्या में करीब 7% दंपत्ति ही ऐसे होते हैं, जो तीन साल तक प्रयास करने के बावजूद भी गर्भाधान नहीं कर पाते. आंकड़ों के अनुसार 94 % महिलाएं जिनकी उम्र 35 वर्ष या उससे कम है तीन साल के अंदर गर्भधारण कर लेती हैं जबकि 38 वर्ष की उम्र तक केवल 77 % महिलाएं ही तीन वर्ष में गर्भवती हो पाती हैं. यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है और गर्भवती नहीं हो पा रही हैं तो बेहतर है कि आप बिना समय गवाएं अच्छे डॉक्टर से सलाह लें.
प्रजनन क्षमता का तेजी से कम होना 

महिलाओं में प्रजनन क्षमता के कम होने का दो प्रमुख कारण है. 1. डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) में समस्या 2. डिंबवाही नलिकाओं (फैलोपियन ट्यूब) का अवरुद्ध होना.
गर्भधारण करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिम्ब की आवश्यकता होती है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त डिंबों की संख्या कम हो जाती है. ऐसा डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) में समस्या आने के कारण होती है.
कुछ महिलाओं में सामान्य समय से पहले ही रजोनिवृति हो जाती है और वे 40 वर्ष की उम्र तक पहुंचने से पहले ही डिंबोत्सर्जन करना बंद कर देती हैं.

महिलाओं में जैसे-जैसे रजोनिवृति नजदीक आती है वैसे-वैसे आपकी माहवारी या मासिक धर्म भी अनियमित हो जाती है. इस कारण भी डिंबोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) भी अनियमित होती जाती है.
जब डिंबवाही नलिकाओं में संक्रमण के कारण या फिर किसी अन्य स्थिति के कारण अवरोध उत्पन्न हो जाता है तो भी गर्भधारण में समस्या पैदा हो जाती है.

उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की डिंबवाही नलिका अनुपचारित क्लामिडिया संक्रमण के कारण अवरुद्ध हो सकती है जिसके कारण निषेचन पूरी तरह से रुक सकती है या फिर अस्थानिक (एक्टोपिक) गर्भावस्था की संभावना बढ़ सकती है. अनुपचारित क्लामिडिया संक्रमण के कारण श्रोणि प्रदाहक रोग हो सकता है.
प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले करक
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यदि आपको एंडोमेट्रियोसिस नामक रोग है तो यह उम्र के साथ साथ और बढ़ सकता है. एंडोमेट्रियोसिस फैलोपियन ट्यूब्स को स्कार टिशू के कारण मोटा कर देता हैं. इससे फैलोपियन ट्यूब को क्षति पहुंच सकती है जिससे अस्थानिक गर्भावस्था की संभावना भी बढ़ जाती है.
30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में फायब्राइड काफी आम हैं जो महिलाओं में प्रजनन क्षमता की समस्या का कारण बन सकता है.
अधिक वजन होने पर महिलाओं को गर्भवती होने समस्या आ सकती है.

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