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सच्चे किस्से


सच्चे किस्से शराबखाने में सुने वो भी हाथ मे जाम लेकर...
झूठे किस्से अदालत में सुने वो भी हाथ मे गीता-कुरान लेकर...!!
किस्मत अपनी अपनी है किसको क्या सौगात मिले...
किसी को खाली सीप मिले किसी को मोती साथ मिले...!!
हथेलियों पर खींचने से लकीरें, मुक़दर नहीं बदलता...
सोच से ही है सब कुछ, बिन सोचे कुछ नहीं बदलता...!!
किरदार ही कुछ ऐसा लोग मुरीद हो जाते है...
जबरदस्ती हम दिलों पर कब्ज़ा नही करते...!!
ज़िंदगी की उलझने शरारतो को कम कर देती है...
और हम समझते है हम समझदार हो गए...!!

ये नर्म मिज़ाजी है कि फूल कुछ कहते नहीं...
वरना कभी दिखलाइये काँटो को मसलकर...!!
माँ सही या गलत नहीं होती है...
माँ सिर्फ और सिर्फ माँ होती है...!!
पापा से ही बच्चों के ढेर सारे सपने है...
पापा है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं...
वो खुशनसीब होते है जिनके पापा साथ होते है...
क्योंकि पापा के आशीषों के हजार हाथ होते है...!!
अहम ने एक वहम पाल रखा है...
सारा कारवां मैंने ही संभाल रखा है...!!
सौ गुना बढ़ जाती है खूबसूरती, महज़ मुस्कराने से...
फिर भी बाज नही आते लोग मुँह फुलाने से...!!!
बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे जहां चाहा रो लेते थे...

पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसूओं को तनहाई...!!
लोग रह गए इतराते अपनी चालाकियों पर...
वो समझ ही न पाये कि वो क्या गँवा बैठे हैं...!!
जब तक हम चुप रहकर सब बर्दास्त कर लेते है...
तब तक ही हम दुनिया को अच्छे लगते है...!!
शीशा और पत्थर संग रहे तो बात नही घबराने की...
शर्त इतनी है कि बस दोनों ज़िद ना करे टकराने की...!!
तीज है उमंगो का त्यौहार...
फूल खिले है बागों में बारिश की है फुहार...
दिल से आप सब को हो मुबारक प्यारा ये तीज का त्यौहार...!!


बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे जहां चाहा रो लेते थे...
पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसूओं को तनहाई...!!


लोग रह गए इतराते अपनी चालाकियों पर...
वो समझ ही न पाये कि वो क्या गँवा बैठे हैं...!!


जब तक हम चुप रहकर सब बर्दास्त कर लेते है...
तब तक ही हम दुनिया को अच्छे लगते है...!!


शीशा और पत्थर संग रहे तो बात नही घबराने की...
शर्त इतनी है कि बस दोनों ज़िद ना करे टकराने की...!!



तीज है उमंगो का त्यौहार...
फूल खिले है बागों में बारिश की है फुहार...
दिल से आप सब को हो मुबारक प्यारा ये तीज का त्यौहार...!!



कभी फुर्सत में अपनी कमियों पर गौर करना...
दूसरों के आईने बनने की ख्वाहिश मिट जायेगी...!!





वो मुझ को आज़माता ही रहा है ज़िंदगी भर...
मगर ये दिल अब उस को आज़माना चाहता है...!!





हर बार मेरी गल्तियों का हिसाब करते हो...
बेहिसाब प्यार जो किया तुमसे उसका क्या...!!


रहे न कुछ मलाल बड़ी शिद्दत से कीजिये...
नफरत भी कीजिये तो ज़रा मुहब्बत से कीजिये...!!


कभी कभी हाथ छुड़ाने की ज़रूरत नहीं होती...
लोग साथ रह कर भी बिछड़ जाते है...!!



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