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फलों से ज्यादा फायदेमंद है इनके छिलके,


फलों से ज्यादा फायदेमंद है इनके छिलके, जानिए छिलकों के गुण




फलों से ज्यादा फायदेमंद है इनके छिलके, जानिए छिलकों के गुण

1.आम के छिलके में फैट बर्न करने वाले तत्व होते हैं जबकि आम के गूदे में नहीं होते। इसे कच्चा भी खा सकते हैं या पका कर भी। ये छिलके कैंसर, डायबटीज और दिल की बीमारियों से लड़ने में भी मदद करते हैं।

2.केले के छिलके में ज्यादा फाइबर होता है बजाए उसके गूदे के। इसमें पोटाशियम भी अच्छी मात्रा में होता है। छिलके में ल्यूटिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है जो आंखों की सेहत के लिए जरूरी होता है। केले के छिलके में ट्रिपटोफैन नाम का एमीनो एसिड होता है जो डिप्रेशर कम करता है। इसिलए इन चीजों के छिलके फेंकने के बजाए खाना शुरू कीजिए और सेहत बनाइए।

3.जितना फाइबर सेब में होता है उसका आधा सेब के छिलके में भी होता है। इसीलिए कहा जाता है कि सेब को छिलके समेत खाना चाहिए। जबकि छिलके में सेब के गूदे से चार गुना ज्यादा विटामिन के होता है।
4.जितना विटामिन सी संतरे में होता है उसका दुगना उसके छिलके में होता है। छिलके में कैंसर और शरीर में जलन पैदा करने वाले तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। पूरा छिलका खाना मुश्किल है क्योंकि वो कड़वा होता है इसलिए इसे कद्दूकस से घिस कर खा सकते हैं।

5.आलू के छिलके में आयरन, कैल्शियम, पोटाशियम, मैगनीशियम, विटामिन सी और विटामिन बी6 होता है। इसलिए आलू के छिलके को भी खाना चाहिए। कई बार सब्जी छिलके के साथ भी बनानी चाहिए।

6.खीरे के छिलके में सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट, पोटाशियम और फाइबर होता है। चाहें तो इसे भी कभी कभी तो खा ही सकते हैं।

7.गाजर के छिलके औऱ खुद गाजर का रंग चूंकि एक ही होता है इसलिए इनके पोषक तत्व भी एक ही जैसे होते हैं। इसलिए इसे धो कर बिना छीले आराम से खा सकते हैं।


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क्‍या आपके बाल मात्र 20 या 30 की उम्र में ही सफेद होना शुरु हो चुके हैं?




क्‍या आपके बाल मात्र 20 या 30 की उम्र में ही सफेद होना शुरु हो चुके हैं?

अगर हां, तो यह इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब लाइफस्‍टाइल या फिर भोजन में सही प्रकार का पोषण ना मिलना। अगर आप अपने सफेद बालों को काला करने के लिये हेयर डाई का प्रयोग करते हैं, तो उसे तुरंत ही बंद कर दें और प्राकृतिक नुस्‍खे आजमाएं। बालों में अगर साधारण तेल लगाते हैं तो उसकी जगह पर कडी पत्‍ते और आमले के तेल का प्रयोग करें। कडी पत्‍ते वाला तेल बालों को काला करने में मददगार साबित होता है। आइये जानते हैं कि कडी पत्‍ते और आमले का तेल बनाया कैसे जाता है। इन तेलों का नियमित प्रयोग करने से आपके बालों में जान आएगी और वह काले बनेगें।

1 → कडी पत्‍ता तेल तेल बनाने की विधि – कडी पत्‍ते का एक गुच्‍छा ले कर उसे साफ पानी से धो लें और सूरज की धूप में तब तक सुखा लें, जब तक कि यह सूख कर कड़ी ना हो जाए। फिर इसे पाउडर के रूप में पीस लें अब 200 एम एल नारियल के तेल में या फिर जैतून के तेल में लगभर 4 चम्‍मच कडी पत्‍ती मिक्‍स कर के उबालिये। 2 मिनट के बाद आंच बंद कर के तेल को ठंडा होने के लिये रख दीजिये। तेल को छान कर किसी एयर टाइट शीशी में भर कर रख प्रयोग करने का तरीका हफ्ते में एक या दो बार इस कडी पत्‍ते का तेल जरुर लगाएं। अपनी दीजिये। उंगलियों को सिर पर हल्‍के हल्‍के घुमाते हुए सिर पर तेल फैलाएं। सिर धोने से 40 मिनट पहले यह तेल लगाएं। इस विधि से यह तेल सफेद हो रहे बालों को काला करने में मदद करेगा।

2 → आमला तेल आमला एक प्राकृतिक डाई के रूप में पुराने जमाने की महिलाओं दृारा प्रयोग किया जाता था।

● इस तेल को बनाने की विधि – ताजा आमला ले कर उसे छोटे टुकड़ों में काट लें और उसका बारीक पेस्‍ट बना लें। पेस्‍ट बनाते वक्‍त उसमें रोज वॉटर का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस पेस्‍ट को अपने हेयर ऑयल के साथ मिक्‍स कर के किसी कपड़े या फिर ढक्‍कन से बिल्‍कुल कस के बांध दीजिये। अब आमला को तेल के साथ बिल्‍कुल मिक्‍स हो जाने दीजिये, ऐसा होने में लगभर 1 हफ्ता लगेगा। एक हफ्ते के बाद तेल को छान कर किसी साफ शीशी में भर लीजिये।

● प्रयोग करने की विधि :- सोने से पहले रोज रात को यह तेल लगाएं और इससे अपने सिर की अच्‍छे से मसाज करें। अगर इस तेल को हल्‍की आंच पर गरम कर के लगाया जाए तो जल्‍दी असर दिखेगा। अगली सुबह सिर को शैंपू से धो लें। इस आमला ट्रीटमेंट को आप रोज या फिर हर दूसरे दिन आजमां सकती हैं। इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा।

टिप्‍स :- अपने भोजन में नियमित रूप से कडी पत्‍ता शामिल करें और जितना हो सके तनाव से दूर रहें। इससे आपके बालों को काला होने में मदद मिलेगी।




नीम की उपयोगीता




नीम की उपयोगीता

नीम भारतीय मूल का एक सदाबहार वृक्ष है। यह सदियों से समीपवर्ती देशों-पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यानमार (बर्मा), थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता रहा है। लेकिन विगत लगभग डेढ़ सौ वर्षों में यह वृक्ष भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक सीमा को लांघ कर अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एवं मध्य अमरीका तथा दक्षिणी प्रशान्त द्वीपसमूह के अनेक उष्ण तथा उप-उष्ण कटिबन्धीय देशों में भी पहुँच चुका है। इसका वानस्पतिक नाम ‘Melia azadirachta अथवा Azadiracta Indica’ है।

नीम एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है जो की भारतीय पर्यावरण के अनुकूल है और भारत में बहुतायत में पाया जाता है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है लेकिन इसके फायदे तो अनेक और बहुत प्रभावशाली है।

1- नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म रोगों और घावों के निवारण में सहायक है।

2- नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

3- नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और कांतिवान होती है। हां पत्तियां अवश्य कड़वी होती हैं, लेकिन कुछ पाने के लिये कुछ तो खोना पड़ता है मसलन स्वाद।

4- नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं और ये खासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।

5- नींबोली (नीम का छोटा सा फल) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है।

6- नीम के द्वारा बनाया गया लेप बालो में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।

7- नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी (नेत्रशोथ या कंजेक्टिवाइटिस

8- नीम की पत्तियों के रस और शहद को 2: 1 के अनुपात में पीने से पीलिया में फायदा होता है और इसको कान में डालने से कान के विकारों में भी फायदा होता है।


अगर आप दर्द से तुरंत आराम के लिए पेनकिलर दवाओं का विकल्प खोज रहें तो अपने किचन में झांकिए, आपका किचन भी प्राकृतिक पेनकिलर के खजाने से कम नहीं है – दांतों में दर्द हो या सिर दर्द से फटा जा रहा हो, पेनकिलर दवाएं घर हों ही, ऐसा जरूरीनहीं। ऐसे में दर्द से तुरंत आराम के लिए आपका किचन भी प्राकृतिक पेनकिलर के खजाने से कम नहीं है। अगर आप भी किसी दर्द से परेशान हैं तो अपने किचन में मौजूद इन सात पेनकिलर को ट्राइ करें, जिनसे दर्द से राहत तो मिलेगी ही साथ ही कोई साइडएफेक्ट भी नहीं होगा।
1. लौंग
दांतों का दर्द हो या मसूड़े में सूजन, लौंग के सेवन से दर्द से तुरंत राहत मिलती है। इसमें मौजूद यूजेनॉल नामक तत्व प्राकृतिक पेनकिलर का काम करता है, यही वजह है कि डेन्टिस्ट में दांतों के दर्द में लौंग का तेल लगाने की सलाह देते हैं।
2. अदरक
मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों में अकड़न और शरीर जकड़ने पर अदरक का सेवन बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद जिन्जेरॉल नामक तत्व में मांसपेशियों और जोड़ों से दर्द में आराम दिलाने की शक्ति होती है।
3. लहसुन
लहसुन में मौजूद जर्मेनियम, सेलेनियम और लस्फर जैसे तत्व कान के दर्द में राहत पहुंचाते हैं। आयुर्वेद में लहसुन को तेल के साथ उबालकर कानों पर लगाने की सलाह दी जाती है। इससे कानों के पकने या सूजन से होने वाले दर्द में भी तुरंत आराम मिलता है।
4. नमक
गले में खराश या दर्द से तुरंत आरामके लिए नमक बहुत काम की चीज है। गर्म पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करने से गले में होने वाले दर्द से तुरंत आराम मिलता है और संक्रमण खत्म होता है।
5. हल्दी
चोट पर एंटीसेप्टिक से लेकर जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए हल्दी से बढ़िया कुछ और नहीं। हल्दी से न
सिर्फ दर्द दूर होता है बल्कि सूजन भी कम होती है। खासतौर पर गठिया के दर्द में यह बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद कुरक्यूमिन नामक तत्व प्राकृतिक पेनकिलर है।
6. ओट्स
ओट्स मैग्नीशियम का बड़ा स्रोत हैं जो पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और दर्द को कम करने में मददगार है। इसलिए जिन्हें पीरियड्स में दर्द अधिक होता है वे अपनी डाइट में ओट्स जरूर शामिल करें।
7. पेपरमिंट
शरीर के दर्द और ऐंठन में आराम पहुंचाने के लिए पेपरमिंट बहुत फायदेमंद है। गर्म पानी में पेपरमिंट तेल
की कुछ बूंदे डालकर सेंकाई करने से शरीर की जकड़न खुल
जाती है और दर्द में तुरंत आराम होता है।
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ठंड की इन 10 प्रॉब्लम्स मे बहुत उपयोगी व रामबाण है, सरसो तेल
ठंड के मौसम में सरसों के तेल का उपयोग खाने में करें या दवा के रूप में यह बहुत लाभदायक होता है। सरसों तेल में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो हमारी सेहत, बाल और त्वचा आदि पर जादुई असर छोड़ते हैं।
इसलिए सरसों के तेल का उपयोग प्राचीन समय से ही खाने व शरीर पर लगाने में भी किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सरसों का तेल बहुत ही अच्छे पेनकिलर की तरह भी काम करता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सरसों के तेल के कुछ ऐसे ही नुस्खों के बारे में जो बहुत उपयोगी व रामबाण माने जाते हैं….
1. सरसों के तेल में दर्दनाशक गुण हैं, यदि कान का दर्द सताए तो दो बूंद गुनगुना सरसों का तेल कान में टपकाएं, चाहे तो इसमें दो चार कलियां लहसुन की भी मिला सकते हैं।
2. सरसों का तेल सौंदर्य बढ़ाता है, रूप निखारने के लिए गौरा रंग चाहने वाले बेसन हल्दी में सरसो का तेल डालकर लगाएं।
3. सरसों का तेल दिल को चुस्त-दुरुस्त रखता है, कुछ समय पूर्व एम्स, हावर्ड स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस व सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज में एक साथ शोध की गई जिससे पता चला कि सरसों का तेल खाने वाले 71 प्रतिशत लोगों को दिल की बीमारी नहीं हुई।
4. यदि गठिया से परेशान हों तो सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है।
5. यदि कमर दर्द हो तो सरसों के तेल में थोड़ी हींग, अजवाइन और लहसुन मिलाकर गर्म कर लें और उसे कमर पर लगाएं, पिंडलियों का दर्द हो तो सरसो के तेल को गुनगुना करके मालिश करना चाहिए।
6. नवजात शिशु और प्रसूता दोनों की मालिश करने के लिए सरसों का तेल सबसे अच्छा रहता है। सरसों के तेल से मालिश करने के बाद नहाने से शिशु को सर्दी होने का खतरा नहीं रहता, अपितु यदि बच्चे का सर्दी लग गई हो तो सरसों के तेल से मालिश करने से दूर हो जाती है।
7. चमड़ी के रोगों में भी सरसों का तेल लाभदायक है, इसके तेल में आक पत्तों का रस और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर गर्म करके ठंडा होने पर लगाने से दाद, खाज, खुजली आदि नाश होता है। सरसों का तेल पाइरिया मिटाने वाला है। इसमें सेंधा नमक मिलाकर दांतों और मसूड़ों पर लगाना चाहिए।
8. यदि चेहरे पर कील मुंहासे, झाइयां, झुर्रियां हो तो सरसों का तेल बड़े काम की चीज है सरसों के तेल से मालिश करने से शरीर पर झुर्रियां नहीं पड़ती।
9. सरसों के तेल में थोड़ा हिना पाउडर मिलाकर कुछ देर उबालकर छानकर बालों में लगाने से बाल झड़ना कम हो जाते हैं।
10. सरसों के तेल से मालिश करने पर खून बढ़ता है। शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति आती है। इससे शारीरिक थकान भी दूर होती है।



1. एड़ी का फटना:
आम के ताजे कोमल पत्ते तोड़ने से एक प्रकार का द्रव पदार्थ निकलता है इस द्रव पदार्थ को एंड़ी के फटे हिस्से में भर देने से तुरन्त लाभ होता
है।

एड़ी फटने में एलोवेरा का ताजा गुदा अत्यंत लाभकारी होता है

2. आम की चाय :
आम के 10 पत्ते, जो पेड़ पर ही पककर पीले रंग के हो गये हो, लेकर 1 लीटर पानी में 1-2 ग्राम इलायची डालकर उबालें, जब पानी आधा
शेष रह जाये तो उतारकर शक्कर और दूध मिलाकर चाय की तरह पिया करें। यह चाय शरीर के समस्त अवयवों को शक्ति प्रदान करती है।

3. सूतिकृमि (पेट के कीड़े):
कच्चे आम की गुठली का चूर्ण 250 से 500 मिलीग्राम तक दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से सूत जैसे कृमि नष्ट हो जाते हैं।


दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..

गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

१०
शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

११
चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

१२
लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

१३
प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

१४
सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

१५
सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

१६
तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

१७
थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

१८
अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

१९
ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..

२०
दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..

२१
मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक दूर होय तत्काल..

२२
कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

२३
बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

२४
बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

२५
नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

२६.
मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.

२७.
पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

२८
ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

२९
कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

३०
अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

३१
छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।


मान्यता है कि जब देवता और दानव अमृत कलश को लेकर झगड़ा कर रहे थे तब अमृत की कुछ बुँदे धरती पर गिरी और उनसे गिलोय उत्पन्न हुई
हो सकता है कुछ बुद्धिजीवी सेकुलर प्राणी इसमें विश्वास न करे
पर आज अगर हम गिलोय को विज्ञानं की कसोटी पर कसते हैं तो सच लगता है कि गिलोय वास्तव में धरती पर अमृत है
मेरे एक मित्र की धर्मपत्नी को गंभीर आर्थराइटिस हो गया अर्थराइटिस के कारन उसको लगातार हल्का हल्का बुखार 24 घंटो सातो दिन रहता था
सभी इलाज करवाये फायदा नहीं मिला बुखार अपनी जगह छोड़ने को तैयार ही नहीं था
तो उन्होंने गिलोय दी पहले उन्होंने गिलोय उबालकर दी उससे थोडा लाभ हुआ पर बाद में उन्होंने गिलोय को रत को मिटटी के बर्तन में भिगो दिया क्रश करके । बाद में उसको सुबह छानकर पी लिया चमत्कार हो गया जो बुखार किसी भी तरह नहीं जा रहा था वह केवल गिलोय लेने से चला गया।
आयुर्वेद में जब किसी औषधि के ज्यादा लाभ लेना ही तो उसका सत्व बनाते हैं गिलोय का सत्व इस धरती पर अमृत है
आइये सिखते हैं घर पर गिलोय सैत्व बनाने की विधि
गिलोय को लेकर अच्छी तरह कूटकर किसी बर्तन में डालकर पानी में अच्छी तरह डुबो देंवे
72 घंटे तक ऐसे ही छोड़ देंवे आप देखेंगे की पानी लिसलिसा हो गया 72 घंटे बाद पानी को छानकर रख देंवे छाल को निकाल कर फेक दे या पशुओं को खिला देंवे कुछ घंटे बाद पानी के निचे सफ़ेद पाउडर इकट्ठा हो जायेगा
यही धरती का अमृत है इसको एक चावल के दाने के बराबर या चिकित्सक की सलाह से रोगी व्यक्ति या स्वस्थ व्यक्ति सेवन करे
रोग प्रतिरोधक ताकत बढ़ जायेगी
सर्दियों में अंजीर खाना है लाभकारी



अंजीर एक ऐसा फल है जिसका उत्पादन मनुष्य द्वारा बहुत पहले से हो रहा है। अंजीर साल भर नहीं उगता है इसलिए इसके सूखे रूप का ही ज़्यादातर इस्तेमाल होता है, जो हमेशा बाजार में उपलब्ध होता है। अंजीर किसी भी व्यंजन में इस्तेमाल करने पर एक अलग ही स्वाद ला देता है। क्या आपको पता है कि अंजीर के कितने स्वास्थ्यवर्द्धक गुण हैं-
• हजम शक्ति को बढ़ाता है
अंजीर में फाइबर उच्च मात्रा में होता है, जैसे- अंजीर में तीन टुकड़ों में 5 ग्राम फाइबर होता है, जो रोज के 20त्न ज़रूरत को पूरा करने में समर्थ होता है। इसके नियमित सेवन से कब्ज़ की बीमारी और पेट संबंधी समस्या से राहत मिलती है।
• वज़न घटाने में सहायता करता है
अंजीर में फाइबर उच्च मात्रा में होने के साथ-साथ कैलोरी कम होता है। अंजीर के एक टुकड़े में 47 कैलोरी होता है और फैट 0.2 ग्राम होता है। इसलिए वज़न घटाने वालों के लिए यह एक आदर्श स्नैक्स बन सकता है।
• उच्च रक्तचाप से बचाता है
अगर आप आहार में नमक ज़्यादा लेते हैं तो वह शरीर में सोडियम के स्तर को बढ़ाने में सहायता करता है। इससे शरीर में सोडियम-पोटाशियम के स्तर का संतुलन बिगड़ जाता है जिसके कारण उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है। अंजीर इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है क्योंकि एक सूखे अंजीर में 129 मिलीग्राम पोटाशियम और 2 मिलीग्राम सोडियम होता है।
• एन्टीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है
सूखे अंजीर में एन्टीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। विनसन जे.ए. और उनके सहयोगियों के एक अध्ययन के अनुसार प्राकृतिक अंजीर में सूखे अंजीर के तुलना में कम एन्टीऑक्सिडेंट्स के गुण होते हैं। इसमें दूसरे एन्टीऑक्सडेंट प्रदान करने वाले खाद्द पदार्थों की तुलना में ज़्यादा एन्टीऑक्सिडेंट होता है।
• दिल को स्वस्थ रखता है
इसमें उच्च मात्रा में एन्टीऑक्सडेंट गुण होने के कारण यह शरीर से फ्री-रैडिकल्स को दूर करने में मदद करता है जिससे रक्त कोशिाकाएं स्वस्थ रह पाती है और दिल की बीमारी का खतरा कुछ हद तक कम हो जाता है।
• कैंसर से रक्षा करता है
एन्टीऑक्सिडेंट गुण से भरपूर अंजीर फ्री-रैडिकल्स के क्षति से डी.एन.ए. की रक्षा करता है जिससे कैंसर होने की संभावना कुछ हद तक कम हो जाती है। पढ़े-� ऑस्टियोपोरोसिस की दवा गर्भाशय कैंसर के खतरे को करता है कम
• हड्डियों को शक्ति प्रदान करता है
एक सूखे अंजीर में 3त्न कैल्सियम होता है जो शरीर के लिए कैल्सियम के ज़रूरत को पूरा करने में सहायता करता है। दूसरे कैल्सियम युक्त खाद्द पदार्थों के साथ यह मिलकर हड्डियों को शक्ति प्रदान करता है।
• प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य को उन्नत करता है
प्राचीन काल से सेक्स के लिए उत्तेजना प्रदान करने के लिए अंजीर का सेवन किया जाता रहा है। अंजीर फर्टिलटी में सहायता करता है। क्योंकि इसमें जो जिन्क, मैंगनीज, और मैग्नेशियम होता है वह प्रजनन स्वास्थ्य को उन्नत करने में बहुत सहायता करता है।



रूसी को जड़ से मिटाने के लिये लगाएं एलोवेरा

रूसी एक ऐसी समस्‍या है जिससे काफी लोग परेशान रहते हैं और उससे छुटकारा पाने के लिये किसी भी प्रकार का घरेलू नुस्‍खा अपनाने से नहीं चूकते हैं। अगर आपके सिर में भी भयंकर रूसी की समस्‍या पैदा हो गई है तो इधर उधर बेकार के घरेलू नुस्‍खे आजमाने से अच्‍छा है कि आप सिर पर एलोवेरा लगाएं।
सिर पर एलोवेरा लगाने से सिर की खुशकी दूर होती है क्‍योकि यह त्‍वचा को नमी पहुंचाता है। इसमें कीटाणुओं को नाश करने के गुण होते हैं जो रूसी पैदा करने वाले इंफेक्‍शन को दूर करता है। इसके अलावा एलोवेरा बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाता है तथा बालों में शाइन भी भरता है।
आज बोल्‍डस्‍काई आपको बताएगा कि अगर सिर में रूसी है तो उसे एलोवेरा जैल और अन्‍य प्राकृतिक सामग्रियां मिला कर कैसे दूर करें। आइये जानते हैं…
ताजा एलोवेरा जैल इसे लगाने के लिये आप सीधे एलोवेरा की पत्‍ती से जैल को छील कर निकाल सकते हैं। फिर इसे सिर पर लगाएं और रातभर ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद दूसरे दिन सुबह सिर धो लें।
एलोवेरा और टी ट्री ऑयल
टी ट्री ऑयल लगाने से सिर में कभी रोगाणु नहीं पैदा होंगे क्‍योंकि यह एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा है। एलोवेरा जैल में अगर 5 बूंद टी ट्री ऑयल मिक्‍स कर के सिर पर लगाएं तो रूसी की समस्‍या नहीं होगी। इसे रात में लगा कर सो जाइये और दिन में सिर धो लीजिये।
एलोवेरा और नीम तेल
नीम का तेल एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा है जो सिर में पपड़ी नहीं जमने देता। इसे लगाने से सिर की खुजली भी बंद हो जाती है। 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल ले कर उसमें 9 बूंद नीम की बूंद मिक्‍स करें। फिर इसे सिर पर लगाएं और थोड़ी देर के बाद सिर धो लें।
कपूर के साथ एलोवेरा जैल
कपूर को सिर पर लगाने से सिर को ठंडक मिलती है और संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणुओं का भी नाश होता है। इस पेस्‍ट को बनाने के लिये 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल में थोड़ा सा कपूर पीस कर मिक्‍स करें और सिर पार लगा कर कुछ घंटों में सिर धो लें।
एलोवेरा और नींबू नींबू में अम्लीय गुण रूसी पैदा करने वाले फंगस को खतम कर देते हैं। जब इसे एलोवेरा के साथ मिक्‍स किया जाता है तो रूसी तुरंत ही खतम होनी शुरु हो जाती है। 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल में 2 चम्‍मच नींबू का रस मिलाएं और सिर पर 20 मिनट तक लगाए रखने के बाद सिर धो लें।

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