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लैट्रिन में ब्लड आना


लैट्रिन में ब्लड आना इन हिंदी | बवासीर के कारण लक्षण और घरेलू इलाज
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लैट्रिन में ब्लड आना इन हिंदी | बवासीर के कारण लक्षण और घरेलू इलाज: लैट्रिन में खून या ब्लड आना एक चिंता का होना स्वाभविक है. वैसे लैट्रिन के साथ खून आना आमतौर पर बवासीर का एक लक्षण हो सकता है. परन्तु यह अनिवार्य नहीं. यदि आपको गुदा या मल त्याग के समय मल के साथ खून यदाकदा आ रहा है तो अधिक घबराने की जरुरत नहीं है क्योंकि ऐसा मल त्याग के समय अधिक जोर लगाने के कारण भी हो सकता है परन्तु यदि खून बार बार और अधिक मात्रा में आ रहा हो तो निश्चित रूप से आपको इसके प्रति सजग होकर किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
लैट्रिन में ब्लड आना

मल का रंग जब लाल होता है तब यह ब्लड गुदा के आस पास से आता है परन्तु ब्लड जब आंत से स्रावित होता है तो मल का रंग गहरा और भूरा लिए हुए होता है. डॉक्टर मल को देखकर यह बता देंगें की ब्लड कहाँ से आ रहा है. इस लेख के माध्यम से लैट्रिन में ब्लड आने के लक्षण, मल के साथ खून आने का कारण, लैट्रिन में ब्लड आने का घरेलू इलाज, मल में ब्लड आने का आयुर्वेदिक उपचार एवं घरेलू उपाय से अवगत करा रहें है. मल त्याग के समय ब्लड आने या बवासीर का अचूक इलाज आप घरेलू नुस्खे के माध्यम से भी कर सकते हैं. और
बवासीर के लक्षण
लैट्रिन में लाल रंग का खून या ब्लड आना गुदा और उसके आस पास के स्थान से रक्त स्राव होने का संकेत करता है.
लैट्रिन में ब्लड आना के लिए इमेज परिणाम
जबकि गहरे लाल रंग का मल छोटी आंत और बड़ी आंत से रक्त स्राव होने का संकेत देता है.
जब लैट्रिन का रंग काला हो तो समझना चाहिए कि यह रक्त स्राव stomach और छोटी आंत के ऊपरी सिरे से हो रहा है.
गुदा से खून बहने पर लोगों में चक्कर आना या बेहोशी छाना जैसे भी लक्षण दिखाई देते हैं.
लैट्रिन में मल से साथ ब्लड आने के कारण
बवासीर होने के कारण
गुदा के आस पास घाव होना
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गुदा या बड़ी आंत में polyps होने पर जिनसे मल त्याग के समय खून बहने लगता है
कब्ज और सूखे मल द्वारा घाव होने पर
बड़ी आंत का कैंसर (colon cancer)
आंत में इन्फेक्शन का होना
गुदा का कैंसर
किसी भोज्य पदार्थ से एलर्जी का होना
बवासीर का अचूक इलाज
मल त्याग के समय खून आना आमतौर पर बवासीर होने के कारण हो सकता है. फिशर होने के कारण भी शौच के समय ब्लड आ सकता है. लैट्रिन के समय तीव्र दर्द भी हो सकता है. अधिक तीखा मिर्च मसाला खाने की वजह से भी मल त्याग के समय दर्द या जलन हो सकता है. ऐसे में रोगी को तुरई की सब्जी अधिक खानी चाहिए, और पेट में कब्ज नहीं रहने देनी चाहिए. 
बेलगिरी (बेल – बिल्व का फल) और सुखी धनिया दस-दस ग्राम तथा मिश्री को बीस ग्राम लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. नियमित रूप से दिन में तीन बार इस चूर्ण को एक- एक चम्मच ताजे पानी के साथ लेने से बहुत शीघ्र ही लाभ मिलेगा.
नारियल पानी और मौसमी फ्रूट और सब्जियों के जूस पीते रहना चाहिए.इनसे आपको पोषण और बेहतर स्वास्थ्य मिलेगा और आपका पेट भी स्वस्थ रहेगा|
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फ़ास्ट Food, अधिक मिर्च मसालेदार और ऑयली खाने से परहेज करें
भोजन में फाइबर युक्त चीजों को अधिक मात्रा में लें ताकि आपको कब्ज, बवासीर आदि की समस्या ना हो.
पानी का सेवन अधिक से अधिक करें ताकि आपका पेट साफ़ रहे और सभी हानिकारक पदार्थ शरीर से बहार निकलते रहें.
गुदा के आस पास की त्वचा को साफ़ रखें|
नियमित व्यायाम और कपाल भाती प्राणायाम करें.
 बवासीर का घरेलू ईलाज
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बवासीर को मेडिकल में Piles या Hemorrhoids कहा जाता है. यह बीमारी ज्यादातर 45 से 65 के बीच की उम्र के लोगों को होती हैं. जब गुदा और मलाशय की नसों में किसी कारण बस सूजन और इन्फ्लामेशन होने लगता है तो उसे बवासीर कहते है. बवासीर होने के कई कारण हैं.

लम्बे समय से कब्ज का रहना
भोजन में फाइबर की मात्रा की कमी होना
फूड एलर्जी, मोटापा का होना
गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) के कारण भी बवासीर की शिकायत होती है.
शारीरिक गतिविधि का कम होना
लम्बे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहना
रात को अधिक देर तक जागना
धूम्रपान और शराब का सेवन
शरीर में पानी की कमी
डिप्रेशन या तनाव का होना
फैमिली हिस्ट्री और अत्यधिक तले-भुने खाने का सेवन करना

बवासीर के प्रकार

बवासीर के रोगी के गुदा द्वार में जब मस्से हो जाते हैं तब लैट्रिंग करते समय मल के कडा होने के कारण ये मस्से छिल जाते हैं जिसके कारण लैट्रिन के साथ और बाद में भी निरंतर खून बहने लगता है और अत्यधिक दर्द भी होने लगता है.

बवासीर दो प्रकार की होती है
बाहर की बवासीर (External Hemorrhoid)
अन्दर की बवासीर
बवासीर का घरेलू इलाज | Piles Bleeding Home Remedies
बवासीर में बर्फ गुदा में ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है, सूजन को कम करता है और दर्द में तुरंत आराम प्रदान करता है. इसके लिए बर्फ के टुकड़ों को एक साफ कपड़े में बांध लो और उसे गुदा के मस्सों पर 10-15 मिनट के लिए रखें. इस क्रम को दिन में कम से कम तीन चार बार करें जब तक कि बवासीर पूरी तरह से ठीक न हो जाये.
एलोवेरा में एंटी-इन्फ्लामेट्री और चिकित्सकीय गुण पाए जाते हैं. जो बवासीर की जलन, दर्द और खुजली को कम करने में मदद करते हैं. एलोवेरा जेल को अपने गुदा में लगायें और धीरे-धीरे मालिश करें. बवासीर के इस घरेलू इलाज से दर्द और जलन में राहत मिलेगी.
रुई के फाये को नींबू के रस से भिगो लें और गुदा के पास के मस्सों पर लगाने से बवासीर में आराम मिलेगा. हालांकि शुरुआत में इससे हल्की-हल्की जलन महसूस हो सकती है. 
एक कप दूध में आधा नींबू निचोड़ कर पीने से बवासीर में आराम मिलेगा. इस क्रिया को हर तीन चार घंटे में करें.
नियमित रूप से डेढ़-डेढ़ चम्मच नींबू, अदरक और पुदीना के रस को दो चम्मच शहद में मिलाकर पीएं. इसे दिन में दो से तीन बार करें.

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