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Amazing benefits of Pregnancy


Amazing benefits of Pregnancy



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Pregnancy के दौरान स्त्री का शरीर कई बदलावों से गुजरता है लेकिन अनेक परेशानियों के बाद pregnancy के कई आश्च र्यजनक लाभ भी होते हैं जो हार्मोन में बदलाव के कारण होता है। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बदलाव होते हैं।
Pregnant होने के बाद स्त्री के कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जैसे - वजन बढ़ना, मॉर्निंग सिकनेस, मितली आना, अटपटा खाने की इच्छास आदि। Pregnancy के बाद ऐसे परिवर्तन सामान्य, हैं। आइए हम आपको pregnancy के कुछ आश्चार्यजनक लाभों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में आप नही जानते। 
Pregnancy के आश्चर्यजनक लाभ

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मानसिक स्वस्थता 
प्रेग्नेंवट होने के बाद मॉर्निंग सिकनेस, थकान, स्ट्रेेच मार्क्सं, लेग क्रैंप्स जैसी समस्या यें होती हैं, लेकिन इन तकलीफों के बाद भी स्त्री को मानसिक रूप से मजबूत बनती है। न्यूटयार्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये एक शोध के मुताबिक, 'pregnancy के दौरान मतली, थकान जैसी समस्या्ओं के बावूजद भी दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टgर में स्त्रीयें खुद को ज्यायदा ऊर्जावान महसूस कर रही थीं।'
यौन इच्छाम का बढ़ना 


Pregnant होने के बाद स्त्रीओं में यौन संबंध बनाने की इच्छाे प्रबल हो जाती है। pregnancy के दौरान यौन संबंध बनाने के कई फायदे होते हैं। यदि दूसरी तिमाही में यौन संबंध बनाया जाये तो गर्भाशय के आस-पास के क्षेत्र में रक्तस संचार अच्छें से होता है। कुछ स्त्रीओं को इस समय यौन संबंध बनाने में चरम आनंद मिलता है। इसके अलावा pregnancy के दौरान यौन संबंध बनाना एक अच्छा व्यादयाम भी है।
स्वास्थ्य बनाये रखने की चाहत 


Pregnant होने के बाद स्त्री को अतिरिक्तध देखभाल की जरूरत पड़ती है, इसलिए स्त्री खान-पान और दिनचर्या के प्रति ज्याादा सजग हो जाती है। pregnancy के बाद स्त्री को ज्यािदा पोषणयुक्तम आहार खाना जरूरी होता है। इसके साथ ही नियमित रूप से जांच भी जरूरी हो जाता है। pregnancy के दौरान धूम्रपान और शराब पीने जैसी बुरी आदतें छूट जाती हैं और यही आदत बाद में भी बनी रहती है। जिसके कारण प्रसव के बाद भी स्त्री अपने स्वाआस्थ के प्रति जागरुक रहती है।
कैंसर का खतरा कम होना 
जो स्त्री pregnant होती है उसे स्त न और डिंबग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर के होने का खतरा कम होता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कू ल द्वारा कराये गये अध्य यन में यह बात सामने आयी है कि तीन महीने से ज्याैदा स्तिनपान कराने वाली स्त्रीओं को कैंसर (खासकर ब्रेस्टय कैंसर) होने की संभावना कम होती है।
इंद्रियो में बदलाव 
Pregnancy में हार्मोंस में बदलाव के कारण इंद्रियो में भी बदलाव होता है। pregnant स्त्री की सूंघने क्षमता बढ़ जाती है। स्त्री की स्वा द लेने वाली ग्रंथि भी प्रभावित होती है। एस्ट्रो जन हार्मोन के कारण सूंघने की क्षमता बढ़ती है।
आत्माविश्वा्स बढ़ना 


Pregnancy के दौरान स्त्री का कांफिडेंस का स्त र बढ़ जाता है, pregnancy को 'यूनीक कांफीडेंस बिल्डaर' भी कहा जाता है। Pregnancy के दौरान स्त्रीयें कई प्रकार के घरेलू कामकाज करती हैं जिससे उनकी काम करने की क्षमता बढ़ती है।
Pregnancy के दौरान होने वाले परिवर्तनों और जटिलतओं के अलावा भी गर्भधारण करना अपने आप में अच्छा एहसास है। लेकिन pregnancy के दौरान होने वाले किसी भी परिवर्तन के बारे में अपने चिकित्स क से सलाह अवश्यह लें। 

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गर्भावस्था में भारतीय किस्म के शौच का प्रयोग करने से सामान्यभ प्रसव की बढ़ती है संभावना 

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Pregnant होने के बाद न केवल खान-पान का ध्या न रखना पड़ता है बल्कि दिनचर्या भी बदल जाती है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक आपको हर बात का ध्यायन रखना पड़ता है। इस दौरान स्त्री वाशरूम का भी प्रयोग ज्याकदा करती है।

आजकल पश्चिमी स्टाइल के शौच हर घर में देखने को मिलते हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इस तरह के शौचालय का इस्तेमाल नुकसानदेह साबित हो सकता है। गर्भावस्था ऐसा समय होता है जब आपको कई सावधानियां बरतनी होती हैं। इस समय आपको सब कुछ अपने बदलते शरीर के अनुसार ही करना पड़ता है। भारतीय शौचालय के इस्तेमाल से आपको डिलवरी के समय कम समस्या होती है।

क्यों सुरक्षित है भारतीय शौच

भारतीय शौचालय के इस्तेमाल में आप पैरों के सहारे उकडूं स्थिति में बैठते हैं जिससे उत्सर्जन अधिक तेज, और सरल ढंग से पूरा होता है। इस स्थिति में श्रोणि को आराम मिलता है और उत्सर्जन के लिए पर्याप्त दाब लग पाता है। भारतीय शौच से गर्भावस्था में होने वाली आम समस्या जैसे कब्ज़ और बवासीर की समस्या में भी आराम मिलता है।

डिलवरी में आसानी

रोजाना भारतीय शौच का इस्तेमाल करने पर डिलवरी में आसानी होने की संभवाना बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टरर्स भी pregnant स्त्री को इसकी सलाह देते हैं।पैरों पर बैठने से जननमार्ग उचित ढंग से खुल जाता है और शिशु नीचे की ओर खिसकता जाता है और ऊपर नहीं जाता। साथ ही इससे पेट और जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आपका शरीर प्रसव पीड़ा के लिए तैयार हो जाता है।

यह भी ध्यान दें

• शौचालय के आसपास पानी नहीं हो। इससे फिसलने का डर होता है।

• ऐसी चप्पलें पहनें जो फिसलें नहीं।

• शौचालय हवादार व रोशनीयुक्त होना चाहिए।

• यदि आपको बड़े पेट के साथ बैठने में असुविधा हो रही है तो शौच स्थल के निकट दीवार पर हैंडल लगवाएं।

• यदि आपकी गर्भावस्था में कोई परेशानी है तो भारतीय किस्म के शौच का इस्तेमाल न करें।

• यदि आपको भारतीय किस्म का शौच इस्तेमाल करने की आदत नहीं है तो इसका इस्तेमाल शुरू करने से पहले अपनी डाक्टर से बात करें।

• यदि आप शौचालय में असुविधा महसूस कर रही हैं जैसे चक्कर आना, दर्द महसूस होना तो तुरंत अपनी डॉक्टर से बात करें।

• शौचालय पर बैठे हुए टॉयलेट पेपर या पानी लेने के लिए शरीर पर खिंचाव न डालें।

Pregnancy के बाद ढीली त्वचा के लिए व्यायाम और खानपान

Pregnancy के बाद ढीली त्वचा से निजात पाने के लिए व्यायाम और खानपान पर दीजिए ध्यान

गर्भावस्था के बाद स्त्रीओं की त्वचा में स्ट्रेच मार्क्स व ढीलापन होना सामान्य बात है। अक्समर नौ महीने बाद जब स्त्रीएं अपनी त्वचा में आए इस बदलाव को देखती हैं तो वे परेशान हो जाती हैं। इससे निजात पाने के लिए वे कई तरह के नुस्खे आजामाने लगती हैं।

ज्यादातर स्त्रीओं के साथ यह समस्या आती है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान पेट की त्वचा सामान्य से ज्यादा फैलती है इसलिए शिशु के जन्म के बाद त्वचा में ढीलापन व स्ट्रेच मार्क्स आ जाते हैं, जो समय के साथ धीरे-धीरे जाते हैं। गर्भावस्था के बाद अक्सर स्त्रीएं अपने बढ़े हुए वजन को लेकर भी टेंशन में आ जाती हैं। यह सारी समस्याओं को आप चाहें तो आसानी से खत्म कर सकती हैं। इसके लिए जरूरी है खुद के लिए थोड़ा समय निकालने की। व्यायाम व कुछ आसान उपायों से आप फिर से पहले जैसी त्वचा पा सकती है। जानिए क्या हैं वे उपाय।

डिलीवरी के बाद फिट रहने के टिप्से 

खाने पर दें ध्यान

गर्भावस्था के बाद अपनी आहार योजना में पोषक तत्वोंै को शामिल करें। खाने में फाइबर युक्त आहार व प्रोटीन से भरपूर ची चीजें खाएं। ताजे फल व हरी सब्जियां आपको चुस्त दुरुस्त रखेंगे। लो फैट वाले डेयरी उत्पाद का प्रयोग करें। शाम के समय स्नैक्स का चुनाव करते हुए सावधानी बरतें। इस बात का खयाल रखें कि जो आहार आप ले रही हैं वो फैट फ्री हो। पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं इसे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और शरीर से फैट व टॉक्सीन आसानी से बाहर निकलेंगे।

स्तनपान कराएं

स्तनपान आपको अपना पुराना फिगर हासिल करने में मदद करता है। यह धारणा बिल्कुल गलत है कि स्तनपान से आपके शरीर पर असर होगा। गर्भावस्था के दौरान जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है गर्भाशय फैलने लगता हैजिससे त्वचा फैलती है। स्तनपान कराने से शरीर में ऑक्सीटोसीन नामक हार्मोंन बनता है जिससे गर्भाशय सिकुड़ता और वह गर्भावस्था के पहले के आकार में आ जाता है और आपको पहली जैसी त्वचा पाने में मदद मिलती है।

व्यायाम भी जरूरी

गर्भावस्था के बाद आप डॉक्टर की सलाह पर व्यायाम कर सकती हैं। अगर आपका ऑपरेशन हुआ है तो घाव भरने तक व्यायाम नहीं करना चाहिए। नियमित रुप से आधा से एक घंटा एरोबिक्स करनी चाहिए। आप चाहें तो हल्के व्यायाम से शुरुआत कर सकती हैं जैसे टहलना, स्वीमिंग आदि। व्यायाम से शरीर पर जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगा और आप पहले जैसी दिख सकें।

मल्टीविटामिन लें 

डॉक्टर की सलाह से आप मल्टीविटामिन दवाएं भी ले सकती हैं जैसे विटामिन ए, विटामिन सी व विटामिन ई। इसमें कोलेजन होता है जिससे त्वचा में कसाव आता है। ये विटामिन त्वचा को स्वस्थ रखता है साथ ही त्वचा की नई कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है जिससे त्वचा सुंदर दिखती है।


जन्म के बाद छह महीने तक स्तेनपान बच्चे के लिए जरूरी

अक्सर देखा गया है कि डिलीवरी के बाद मां का खान-पान का ध्यान नहीं रखा जाता जो न केवल मां बल्कि बच्चे दोनो के लिए ही उचित नहीं है। प्रसव के बाद भी मां को स्वोस्थ आहार की जरूरत होती है क्योंकि प्रसव के बाद मां का शरीर कमजोर होता है और उसे स्त नपान भी कराना होता है जो बच्चे के लिए सबसे उचित आहार है।

प्रसव के समय खून का अधिक स्राव होता है इसलिए प्रसव के बाद मां को अधिक पोषणयुक्त आहार लेना चाहिए। मां को खाने में ताजे फल और हरी सब्जियों के साथ-साथ साबुत अनाज और दालें खाना चाहिए। इसके साथ ही मां को बच्चे के पोषण का भी ध्याकन रखना पड़ता है। जैसे ही बच्चाे 6 महीने का होता है स्त‍नपान के अलावा उसे अन्यो पूरक आहार भी देना शुरू कर देना चाहिए।

छह महीने तक 

बच्चे के जन्म से लेकर अगले 6 महीने तक मां का दूध ही सबसे अच्छा आहार है क्योंकि मां का दूध बच्चे के पोषण की सभी जरूरतों को पूरा करता। स्तनपान करने वाले बच्चे दूध पीने के हर दो से तीन घंटे के बाद भूख महसूस करते हैं क्योंकि मां का दूध आसानी से पच जाता है जबकि दूसरे स्रोत पर पले बच्चों को जल्दी भूख महसूस नहीं होती। यदि बच्चे के जन्म के पहले हफ्तों में वजन नहीं बढ़ता है तो आपको बच्चे को बार-बार खिलाना चाहिए। 

छह महीने बाद 

छह महीने के बाद आप अपने बच्चें को स्तनपान के साथ उसे अर्द्ध ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं। इस दौरान बच्चेब को दाल का पानी पिला सकते हैं। दाल के पानी में विटामिन और कैल्शियम होता है जो बच्चेच के विकास के लिए जरूरी है।

कब दें ठोस आहार

ठोस आहार की शुरुआत का समय हर बच्चे में भिन्न हो सकता है। यदि बच्चे को दूध पिलाने के बीच में भूख लगने लगे और निगलने लगे, साथ ही आपको लगे कि वह ठीक से पचाने में सक्षम है तो आप यह जान जाऐंगे कि अपका बच्चा अर्द्ध ठोस के लिए तैयार है। नए खाद्य पदार्थों की शुरुआत के साथ स्तनपान की आदत को बदलना नहीं चाहिए। अर्द्ध ठोस आहार मैश्ड या शोरबे के रूप में होना चाहिए। शिशुओं को एक घटक वाली दाल भी दी जा सकती है। अपने बच्चे को खिलाना एक झंझट वाला काम हो सकता है जिसमें अधिकतर खाना बच्चे के खाने की बजाय उस पर गिर सकता है।

बच्चे के विकास के साथ खिलायें 

बच्चे को खिलाते समय एक बिब का प्रयोग करें और खिलाने के लिए एक छोटे से चम्मच का ध्यान रखें। बच्चेम को जल्दीग में न खिलायें, बल्कि उसे आराम से धीरे-धीरे खिलायें। शुरू में वह केवल कुछ चम्मच खाना ही खाएगा या उसे खाने के लिए भी मना कर सकता है। बच्चे पर खाने के लिए दबाव न डालें इसके बजाय कुछ दिनों के बाद कोशिश करें। छह महीने की उम्र तक आपके बच्चे को दूध पीने के साथ तीन बार भोजन देना शुरू करना चाहिए। आप अपने बच्चे को फल और सब्जियां देना शुरू कर सकते हैं।

छह से नौ महीने के बच्चे 

बच्चे के सात से आठ माह का होने पर आप जो भोजन उसे दे रहे हैं उसकी बनावट बदल सकते हैं। इस दौरान बच्चेा को दलिया भी दिया जा सकता है। नौ महीने तक बच्चा् हल्के खाने को आसानी से पचा सकता है। लकिन ध्याआन रहे इस दौरान ज्याैदा गरिष्ठन और मसालेदार आहार बिलकुल न दें।

नौ महीने से एक वर्ष 

अपने बच्चे को दिन में तीन बार भोजन खिलाना जारी रखें। जब आपका बच्चा एक वर्ष का हो जाए तो आप अपने बच्चे को गाय का दूध भी पिला सकते हैं। अपने बच्चे को सभी स्वस्थ भोजन के विकल्प उपलब्ध कराएं और उसे अपने आप खाने के लिए प्रोत्साहित करें और इस समय आप उसकी निगरानी कर सकते हैं। ठोस आहार खाने से आपके बच्चे को प्यास अधिक लग सकती है। उसके एक वर्ष का होने के बाद एक सिपर लेने का विचार कर सकते हैं।
योग टिप्स : शरीर से प्यार करना सीखें

शरीर और मन को यंत्र की तरह चलाते रहने में हम खुद को भी भूले रहते हैं। आज के व्यस्त जीवन शैली में व्यक्ति सेहत के प्रति तो लापरवाह रहता ही है साथ ही वह खुद क्या है यह भी भूलकर बेहोशी में ही जीवन व्यतित कर रहे हैं। जो लोग यह समझते हैं कि हम होश में जी रहे हैं उन्हें होश के स्तर का शायद ही पता हो। जीवन के ऐसे ही स्थिति के लिए हम यहां शरीर से प्यार करने का एक छोटा से योगा टिप्स बताने जा रहे हैं।

कभी कभी आपको लगता होगा कि अरे! कैसे वक्त गुजर गया पता ही नहीं चला। कभी लोगों को गौर से देखना वे किस तरह व्यस्तता से काम कर रहे हैं। योग इस व्यस्त जीवन के खिलाफ है। यम, नियम, योगासन और प्राणायाम से यह व्यस्त जीवन शैली खत्म हो जाती है और व्यक्ति के होश का स्तर बढ़ जाता है। फिर उसे शरीर और मन की हर हरकत का ध्यान रहता है।

हालांकि योग कहता है कि सेहत पाना है या मोक्ष- सबसे पहले शरीर को ही साधना होगा। इसीलिए योगासन किए जाते हैं। शरीर को साधने के पहले क्या आपने कभी स्वयं के शरीर से प्यार किया है? यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है। लोग अपने अपनों से प्यार जरूर करते होंगे लेकिन खुद से प्यार करना भी जरूरी है।

सचमुच ही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत तो आपका शरीर ही है और आप मन के पीछे भागते रहते हैं। जरा शरीर की भी तो खैर खबर लें। जब रोग होता है तभी शरीर के होने का पता चलता है, तभी उसकी की याद आती है। लोग शरीर में सिर्फ चेहरे की ही देखरेख करते हैं बाकी अंग तो सभी उपेक्षा के शिकार हैं।

ऐसे करें शरीर से प्यार : कभी शरीर को दर्पण के सामने खड़े होकर निहारें और सचमुच ही उसका सम्मान करें। कभी दाएं हाथ से बाएं हाथ को छूकर प्यार करें, फिर बांएं से दाएं को। इसी तरह पैरों को एक दूसरे से छूकर प्यार करें। दाएं कंधे को बाएं हाथ से और बाएं कंधे को दाएं हाथों की हथेलियों से छूकर दबाएं और सहलाएं। इसी तरह चेहरे को और फिर अन्य अंगों को छूकर उन्हें प्यार करें। यह कारगर स्पर्श योगा है।

शरीर को बाचाएं कष्टों से : शरीर को हर तरह के कष्टों से बचाने का प्रयास करें- जैसे धूल, धुंवा, प्रदूषण, तेज धूप, ठंड, गलत खानपान आदि। खासकर शरीर मन के कष्टों से बहुत प्रभावित होता है। योग में कहा गया है कि क्लेश से दुख उत्पन्न होता है दुख से शरीर रुग्ण होता है। रुग्णता से स्वास्थ्य और सौंदर्य नष्ट होने लगता है।

तो शरीर को प्रतिदिन प्यार करें, दुलार करें और उसे हर तरह के कष्टों से बचाएं। सचमुच दवा से ज्यादा असर इस प्यार में हैं।
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इसके अलावा यदि ये नियम पालना चाहें तो....

आहार : पानी का अधिकाधिक सेवन करें, ताजा फलों के जूस, दही की छाछ, आम का पना, इमली का खट्टा-मीठा जलजीरा, बेल का शर्बत आदि तरल पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, बेल तथा पुदीने का भरपूर सेवन करते हुए मसालेदार या तैलीय भोज्य पदार्थ से बचें।

योगा पैकेज : नौकासन, हलासन, ब्रह्म मुद्रा, पश्चिमोत्तनासन, सूर्य नमस्कार। प्राणायम में शीतली, भ्रामरी और भस्त्रिका या यह नहीं करें तो नाड़ी शोधन नियमित करें। सूत्र और जल नेति का अभ्यास करें। मूल और उड्डीयन बंध का प्रयोग भी लाभदायक है। पांच मिनट का ध्यान अवश्य करें।

कुछ इस तरह रखें गर्मियों त्वचा का ख्याल

गर्मी बहुत तेज पड़ रही हैं और इसका साफ-साफ असर हमारी त्वचा पर दिखने लगा है। ऐसे में आपको अपनी त्वचा के लिए थोड़ा सा समय निकालना होगा। गर्मियों में त्वचा की देखभाल करना बहुत ही जरुरी है। धूप हमारे चेहरे की रंगत छीन लेती है। गर्मियों में कैसे करें सौंदर्य की देखभाल, आइये जानें-

-चंदन को प्राकृतिक और सौंदर्यवर्धक माना जाता रहा है, क्योंकि यह ठंडा होता है। इसके अलावा यह सनबर्न से बचाव करता है। चंदन का तेल एक प्राकृतिक सनस्क्रीन होता है।

-गर्मी के दिनों में चेहरे पर खीरे का रस लगायें। झुलसी हुई त्वचा के लिए यह फायदेमंद है।


-गर्मियों में त्वचा की देखभाल के लिए एक चुटकी कपूर को थोड़े से शहद में मिलाकर इससे चेहरा धोयें, चेहरा खिल उठेगा।

-गर्मी के मौसम में नहाने से पहले फेस पर नीम या गुलाब का फेस पैक लगाएं और सूख जाने पर ताजे पानी से साफ कर लें।

-त्वचा पर बर्फ रगडऩे से चेहरे से धब्बे और पिंपल दूर होते हैं।

-गुलाब जल को आईस-ट्रे में जमाकर बर्फ की क्यूब्स को आंखों के इर्द-गिर्द रगडऩा चाहिए। गुलाब जल थकी हुई त्वचा को तरोताजा करता है।

-गर्मी के समय दिन में अगर आप 4 घंटे से भी ज्यादा धूप में रहती हैं, तो फेस पर अच्छी तरह सनस्क्रीन लोशन लगाएं

लाभदायक योगासन



यह कुछ आसनों का क्रम है। इसे क्रम से करने से सभी तरह के रोगों में लाभ पाया जा सकता है। जिन्हें अपनी बॉडी को फिट रखकर सेहतमंड बने रहना है वह इन आसनों को क्रम से नियमित करते रहेंगे तो हमेशा तरोजाता बने रहेंगे।

स्टेप 1- नमस्कार मुद्रा करते हुए नटराजासन, एकपाद आसन, कटि चक्रासन, उत्कटासन करने के बाद पुन: नमस्कार मुद्रा में लौटकर, चंद्रासन, अर्ध उत्तनासन और फिर पादस्तासन करते हुए पुन: चंद्रासन करके नमस्कार की मुद्रा में लौट आएँ।

स्टेप 2- नमस्कार मुद्रा के बाद अर्ध उत्तनासन और फिर दाएँ पैर को पीछे ले जाकर हनुमान करें फिर अधोमुख श्‍वानासन करते हुए बाएँ पैर को आगे रखते हुए पुन: हनुमानासन करते हुए विरभद्रासन-1 करें। फिर प्रसारिता पादोत्तनासन करें। प्रसारिता पादोत्तनासन के बाद फिर कोहनी को घुटने पर टिकाते हुए उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन करें।

स्टेप 3- उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन के बाद फिर पुन: हनुमानासन करते हुए अधोमुख श्वानासन करें। अब दाएँ पैर को सामने रखते हुए पुन: हनुमान आसन करते हुए विरभद्रासन-1 करें। विरभद्रासन के बाद फिर प्रसारिता पादोत्तनासन करें। फिर कोहनी को घुटने पर टिकाते हुए उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन करें।

स्टेप 4- उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन के बाद पुन: हनुमान आसन में लौटकर अधोमुख श्‍वानासन में आकर मार्जायासन और फिर बिटिलियासन करें।

स्टेप 5- बिटिलियासन के बाद, वज्रासन में बैठ जाएँ। वज्रससन में बैठकर योग मुद्रा, उष्ट्रासन, भारद्वाजासन, आंजेनेय आसन, दंडासन, बंधकोणासक, वक्रासन, पवन मुक्तासन और नौकासन करें।

स्टेप 6- नौकासन के बाद पुन: नमस्कार मुद्रा में लौट आएँ और फिर चतुरंग दंडासन, भुजंगआसन, धनुरासन करते हुए मकरासन में लेट जाएँ।

स्टेप 7- मकरासन के बाद शवासन करते हुए पादअँगुष्‍ठासन, विपरितकर्णी आसन, आनंद बालासन, हलासन, पवन मुक्तासन, सेतुबंध आसन, मत्स्यासन करते हुए पुन: शवासन में लौट आएँ। शवासन में कुछ देर आराम करने के बाद उठ जाएँ।

कुल आसन : 36

अवधि : 30 मिनट 

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A. खड़े होकर किये जाने वाला व्यायाम :
नटराजासन, 
एकपाद आसन, 
कटि चक्रासन 
उत्कटासन 
चंद्रासन, 
अर्ध उत्तनासन, 
पादहस्तासन 
हनुमान आसन 
अधोमुख श्‍वानासन 
विरभद्रासन 
प्रसारिता पादोत्तनासन 
उत्थिष्ठ पार्श्वकोणासन। 
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B. बैठकर किये जाने वाला व्यायाम :
मार्जायासन 
बिटिलियासन 
वज्रासन 
योग मुद्रा, 
उष्ट्रासन 
भारद्वाजासन 
आंजेनेय आसन, 
दंडासन, 
बंधकोणासक 
वक्रासन 
पवन मुक्तासन 
नौकासन। 


C. लेटकर किये जाने वाला व्यायाम :

चतुरंग दंडासन 
भुजंगआसन 
धनुरासन 
मकरासन 
शवासन 
पादअँगुष्ठासन, 
विपरितकर्णी आसन, 
आनंद बालासन, 
हलासन 
सेतुबंध आसन 
मत्स्यासन 
शवासन। 

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