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ब्रेस्ट कैंसर से बचना है तो म‌हिलाएं न करें शर्म


ब्रेस्ट कैंसर से बचना है तो म‌हिलाएं न करें शर्म




महिलाओं का शर्म और अपने शरीर के प्रति लापरवाही दे रहा हैं, ब्रेस्ट कैंसर को दावत। कई महिलाएं प्रेगनेंसी के बाद बच्चों को अपना दुध तक नहीं पितालाती। ऐसी महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैसर की संभावन बढ़ जाती है।
पंचकूला जनरल अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. विकेक भादु के अनुसार अब कम उम्र की महिलाएं भी ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही है। 

पहले ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादातर केस 40-45 वर्ष आयुवर्ग की महिलाओं में देखने को मिलते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षो से अस्पताल में कैंसर से पिड़ित महिला मरीजों में 25-30 साल तक की महिलाओं की तादात बढ़ी है। 

इसके अलावा ब्रेस्ट कैंसर की रिस्क की संभावना अनुवांशिकता पर भी निर्भर करता है। यदि घर में किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर है, तो आने वाली पिढ़ी भी प्रभावित हो सकती है। 

इसलिए चालीस साल के बाद या उससे पहले, जब किसी महिला पेसेंट को स्तन पर गाठ जैसी समस्या की आसंका हो या स्तन से पानी डिसचार्ज हो तो डाक्टर से चेकअप कराए नहीं तो आपकी हल्की सी लापरवाही ब्रेस्ट कैंसर जैसे बिमारी को दावत दे सकती है। 

युवतियां और महिलाएं फास्ट फुड का सेवन कम करें। ब्रेस्ट कैंसर के कारणों में यह भी हाई रिस्क में सामिल है। पंचकूला सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल के आकड़े के अनुसार साल में ब्रेस्ट कैंसर से पिड़ित महिलाओं की संख्या 24-30 के बीच है। 

डाक्टर के अनुसार साल में 10-12 महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर के केस जनरल अस्पताल में ऑपरेट किए जाते है। डाक्टर के अनुसार यह बिमारी ला ईलाज नहीं है, प्रथम और द्वितीय स्टेज पर पता चलने पर इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।

सबसे बड़ी बात यह की महिलाओं को अपनी ब्रेस्ट को खुद एक्जामिन करने की जरूर है। अल्की संभावन लगे तो तुरंत जांच कराएं।

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