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कैसे तय करें फैट टमी से फ्लैट टमी का सफर?


कैसे तय करें फैट टमी से फ्लैट टमी का सफर?

Fat tummy to flat tummy
एक जमाना था जब बाहर निकले हुए पेट का मतलब होता था कि बंता खाते-पीते घर का है। अब जमाना सिक्स पैक्स का है। पेट से पैक्स तक की आपकी जर्नी को एक्सपर्ट्स की मदद से कुछ आसान बना रही हैं नीतू सिंह :
शरीर के कुल फैट की मात्रा से ज्यादा जरूरी फैक्ट है फैट का शरीर में सही डिस्ट्रिब्यूशन। यानी पूरे शरीर में फैट ज्यादा होना उतना खतरनाक नहीं है जितना सिर्फ पेट के आसपास जमा होना। पुरुषों के लिए 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं के लिए 35 इंच से ज्यादा कमर का साइज मोटापे से जुड़ी बीमारियों का कारण बनता है।
क्या है पॉट बेली ओबेसिटी
यह पेट का मोटापा है जिसे सेंट्रल ओबेसिटी भी कहते हैं। इसमें पेट के आसपास एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है।
हमारे शरीर में तीन तरह के फैट होते हैं:
1. ब्लड लिपिड्स यानी खून में फैट 2. सबक्युटेनियस फैट यानी स्किन के नीचे वाला फैट 3. विसरल फैट यानी अंदरूनी अंगों के बीच वाला फैट किसी भी वयस्क इंसान में विसरल फैट की आदर्श मात्रा 12 फीसदी तक होती है।
पेट का फैट है टफ
हमारे शरीर के फैट में 'बीटा 3' और 'अल्फा 2' नाम के रिसेप्टर होते हैं। शरीर के जिन हिस्सों में अल्फा 2 रिसेप्टर से ज्यादा बीटा 3 रिसेप्टर होते हैं, वहां का फैट घटना आसान होता है। पेट, कमर और हिप्स के आसपास के फैट में अल्फा 2 रिसेप्टर ज्यादा होते हैं, इसलिए वहां का फैट सबसे देर में घटना शुरू होता है। ऐसे में पेट का फैट पूरी तरह तभी घटेगा, जब बाकी शरीर से भी फैट घटना शुरू हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि सिर्फ पेट को कम करने की एक्सर्साइज (क्रंच आदि) ही न करें बल्कि पूरे शरीर से फैट कम करें।
पेट के मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य

 समस्याएं
विसरल फैट कोशिकाएं त्वचा के नीचे वाले फैट की तुलना में ज्यादा सक्रिय होती हैं। ये फैट कोशिकाएं ज्यादा मात्रा में विभिन्न तरह के मेटाबॉलिक प्रॉडक्ट रिलीज करती हैं जिनका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने में पेट के मोटापे की भूमिका सामान्य मोटापे कहीं ज्यादा होती है।


ऐसे नापें पेट का मोटापा
पेट के मोटापे का अंदाजा घर में उपलब्ध साधारण इंच टेप से पेट के घेरे को नाप कर भी लगाया जा सकता है। पेट की माप के लिए 5 रूल फॉलो करें:
1- शीशे के सामने खड़े होकर सबसे पहले पेट को ढकने वाले सभी कपड़ों को हटा दें। कपड़े की कोई भी लेयर पेट के साइज की सही माप में दिक्कत हो सकती है। 2- आपके कमर की हड्डी ऊपर की ओर जहां खत्म होती है और पसलियों की हड्डी (चेस्ट रिब्स) नीचे की ओर जहां खत्म होती है, दोनों के बीच का हिस्सा पेट कहलाता है। 3 - इंच टेप को जीरो की तरफ के छोर को नाभि के बीच में इस तरह से रखें कि वह जमीन के पैरलल हो। 4- टेप को इस तरह से पेट के आसपास घुमाएं कि वह पेट में धंसे बिना पूरा घूम जाए। अब माप को दर्ज करें। 5- दोबारा माप लें। अक्सर एक बार लिया गया माप सटीक नहीं होता इसलिए 3 बार माप लेना बेहतर रहता है।
नोट: पुरुषों में अगर कमर का घेरा 40 इंच (102 सेंटीमीटर) से ज्यादा है और महिलाओं में 35 इंच (88 सेंटीमीटर) से ज्यादा है, तो समझ जाएं कि वे पेट के मोटापे से पीड़ित हैं।
बड़े पेट की हमजोली बीमारियां:
पेट पर जमा चर्बी कई बीमारियों को साथ लेकर आती है। ये मुख्य हैं:
- टाइप-2 डायबीटीज - हाई बीपी - सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ या स्लीप एप्निया - दिल की बीमारियां - महिलाओं में मेंसेस से जुड़ी परेशानियां, चेहरे पर एक्स्ट्रा बाल और इनफर्टिलिटी की समस्याएं - गाउट - कुछ तरह के कैंसर, जैसे कि मीनोपॉज के बाद महिलाओं में गर्भाशय और स्तन कैंसर
पेट के मोटापे की आम वजहें
- पेट का मोटापा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा परेशान करता है, क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोंस पेट की कैविटी में फैट जमा नहीं होने देते। हालांकि, मीनोपॉज के बाद महिलाओं में भी पेट के मोटापे की आशंका पुरुषों जितनी ही हो जाती है। यही वजह है कि अक्सर 40-45 की उम्र तक बिल्कुल स्लिम दिखने वाली कुछ महिलाएं अचानक 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पेट और हिप के मोटापे की शिकार हो जाती हैं। लाइफ स्टाइल और जेंडर के अलावा, चंद आदतें भी पेट के मोटापे के लिए जिम्मेदार होती हैं, जो हैं:
- किसी भी

 तरह की एक्सर्साइज न करना - ज्यादा कैलरी वाला खाना - स्मोकिंग - ज्यादा शराब पीना
पेट तेरे रूप अनेक
1. उभर हुआ पेट
- पेट ऊपर से नीचे तक फूला हुआ रहता है। - यह हजम न हो सकने वाला खाना ज्यादा खाने से होता है। ऐसा खाना, जिसमें विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम होती है।
क्या करें 
- ऐसे मामलों में हल्की एक्सर्साइज और बैलेंस डाइट से पेट कम करना आसान होता है। - साथ ही, ऐसे ड्रिंक्स लें, जिनसे डाइजेशन ठीक रहे। मिसाल के तौर पर छाछ, नींबू पानी आदि। इससे आपके पेट का उभार कम होगा।
2. टायर बेली फैट
- इस तरह के मोटापे में साइड से पेट टायर की शक्ल में बाहर की ओर निकलता है। - पेट का यह मोटापा घंटों एक जगह बैठे रहकर काम करने और फिजिकली एक्टिव न होने की वजह से होता है। - ऐसे लोगों में मीठी चीजें खाने की आदत समस्या को और बढ़ा सकती है।
क्या करें 
अगर आपका मोटापा इस कैटिगरी में आता है तो सबसे पहले आप अल्कोहल और सोडा वाले कोल्ड ड्रिंक्स फौरन बंद कर दें।
- इस समस्या से निजात पाने के लिए हेल्दी डाइट लें और फिजिकली एक्टिव हो जाएं। रोज तकरीबन 1 घंटे की ब्रिस्क वॉक करें।
3. लो बेली फैट
- पेट ऊपर की बजाय नीचे की ओर से ज्यादा निकला रहता है। पेट के निचले हिस्से का मोटापा अक्सर एक जगह बैठकर लगातार काम करने की आदत और एक ही तरह का खाना खाने की वजह से होता है। इस तरह के मोटापे से पीड़ित लोग शरीर के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से स्लिम दिखते हैं, लेकिन पेट के निचले हिस्से में फैट जमा होने की वजह से मोटे नजर आते हैं।
क्या करें
इस समस्या से निजात का सबसे आसान तरीका है, अपनी दिनचर्या में एक्सर्साइज शामिल करें। खाने में वैरायटी रखें, संतुलित आहार लें और अनार, गाजर, मौसमी जैसे फलों के जूस पिएं, जो पेट से फैट हटाने में मददगार साबित होते हैं।
4. स्ट्रेस बेली ओबेसिटी
इस कंडिशन में पेट नीचे की तरफ लटका हुआ गोल होता है। इस समस्या के शिकार ज्यादातर लोग परफेक्शनिस्ट होते हैं, लेकिन उन्हें पाचन संबंधी समस्या होती है, जिसके चलते अक्सर पेट फूला रहता है।
क्या करें
वक्त पर खाना खाएं, जंक फूड और ज्यादा मात्रा में कैफीन (चाय, कॉफी, चॉकलेट ड्रिंक्स आदि) वाली चीजें लेने से बचें।
मोटापे पर पहले वार में खानपान हथियार:
कार्बोहाइड्रेट्स घटाएं
- कार्बोहाइड्रेट 2 रूपों मे आते है। पहले वे, जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम (अच्छा) होता है, इन्हें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट भी कहा जाता है और दूसरे ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं, जो सिंपल कार्बोहाइड्रेट भी कहे जाते हैं।
- ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खून में तेजी से ग्लूकोज का लेवल बढ़ाती हैं और टाइप-2 डाइबीटीज (प्रौढ़ होने पर सामने आने वाली), हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा जैसी कई बीमारियों को बढ़ावा देते हैं।
- पास्ता, शहद और टेबल शुगर, मैदे और चावल से बनी चीजों से जहां तक हो सके, बचें। ये सब चीजें ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स हैं।
-एनर्जी के लिए कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स का इस्तेमाल करें जो कि साबुत अनाज, दालों, ओटमील और ज्वार आदि से मिलता है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
प्रोटीन बढ़ाएं
- पानी के बाद शरीर में सबसे ज्यादा जो तत्व होता है, वह है प्रोटीन।
- प्रोटीन टूटकर अमीनो एसिड में बादल जाता है, जो कि शरीर में प्रोटीन्स बनने के लिए जरूरी होता है।
- प्रोटीन मेटाबॉलिजम बढ़ता है और खुराक घटाता है। प्रोटीन की वजह से बढ़े हुए मेटाबॉलिजम के साथ आपका शरीर पहले जैसे कार्बोहाइड्रेट और फैट खाने के बावजूद ज्यादा कैलरी बर्न कर पाएगा। इससे मसल्स बनने में मदद मिलेगी और पेट घटने लगेगा।
- प्रोटीन हरी मटर, ड्राई फ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोया मिल्क, दही, मछली और अंडे में होता है।
फाइबर जरूरी 
- फाइबर सॉल्युबल और इनसॉल्युबल यानी घुलनशील व अघुलनशील, दो तरह के होते हैं।
- सॉल्युबल फाइबर मोटापा कम करता है क्योंकि इससे बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
- ओट्स यानी जई में दूसरे अनाजों के मुकाबले सबसे ज्यादा सोल्यूबल फाइबर होता है।
- सॉल्युबल फाइबर के अच्छे स्रोतों में ओटमील, बीन्स, मटर, रेशेदार फल, स्ट्रॉबेरी और सेब आदि शामिल हैं। -अच्छा फाइबर जल्द ही आपको पेट भर जाने का एहसास कराते हैं, ऐसे में आप कम कैलरी खाते हैं।
भरपूर पानी पिएं
- पानी आपका मेटाबॉलिजम ठीक करता है और पेट भरा होने का एहसास कराता है। रोज 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं
- अगर आपको स्वीटेंड ड्रिंक्स (कोक आदि) पीने की आदत है, तो इसे पानी से रिप्लेस कर दें।
- खाना खाने से आधा घंटा पहले एक गिलास पानी पिएं। इससे आपको कम खाने में पेट भरने का एहसास होता है।
- गुनगुना पानी पीने से मेटाबॉलिजम अच्छा होता है। इसकी वजह से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है।
- शरीर में अगर पर्याप्त नमी नहीं होगी तो आप लंबे वक्त तक बिना थके एक्सर्साइज नहीं कर पाएंगे।
एक्सर्साइज: ये एक्सर्साइज हो सकती हैं कारगरः
एरोबिक एक्सर्साइजः पेट का मोटापा कम करने के लिए एक्सर्साइज बहुत जरूरी है।
टहलना- पेट का मोटापा कम करने के लिए सबसे असरदार एक्सर्साइज है तेज कदमों से रोजाना 45-50 मिनट तक टहलें।
तैराकी- तैराकी पूरे शरीर के लिए एक अच्छी एक्सर्साइज होती है। इससे बहुत ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। यह मेटाबोलिजम रेट बढ़ाता है, इसलिए काफी फायदेमंद साबित होता है।
जॉगिंग- यह एक अन्य लोकप्रिय एरोबिक एक्सर्साइज है जो आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। इससे आपके दिल की पंपिंग की क्षमता बढ़ती है और आपका मेटाबोलिजम बेहतर होता है। रोज तकरीबन 2 किलोमीटर जॉगिंग से काफी फैट बर्न होता है।
साइकलिंग- एक्स्ट्रा वजन हटाने के लिए साइकलिंग काफी कारगर है। रोज तकरीबन 1 घंटे तक खुले में साइकल चलाने से 300 कैलरी बर्न होती है।
इनसे मिलेगा फ्लैट टमी
वर्टिकल लेग क्रंच
जिसे आप क्रंच कहते हैं यह वही है। इसमें बस आपको अपनी टांगें एकदम सीधी ऊपर की ओर करनी हैं और धीरे-धीरे नीचे लानी हैं। ऐसा करते वक्त हाथों को सिर के पीछे रखें। इससे जोर पेट पर पड़ेगा। 10-10 के दो सेट से शुरुआत करके धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 20-20 तक जाएं।
रिवर्स क्रंच
कोर मसल्स मजबूत करने के बेहतरीन एक्सर्साइज माना गया है। पीठ के बल लेट कर पैरों को ऊपर की ओर उठाएं और 90 डिग्री पर रोकें। इसके बाद सिर के पीछे हाथों को रखें पेट का जोर लगा कर उठने की कोशिश करें। शुरुआत में 5 बार राइट और 5 बार लेफ्ट की तरफ जाएं। धीरे-धीरे 15-15 के सेट लगाने की कोशिश करें।
मिक्स करें एक्सर्साइज: हफ्ते में 5 दिन 20 मिनट
कार्डियो (ऐसी एक्सर्साइज जिनमें दिल सामान्य से तेज होकर तकरीबन 145 धड़कन प्रति मिनट तक धड़कने लगता है), 15 मिनट मसल बिल्डिंग (डंबल के 10-10 के 2 सेट लगाना, बेंच पर लेट कर वजन उठाना, मल्टी जिम में चेस्ट और पीठ की एक्सर्साइज करना आदि) और 10 मिनट ऐब्स एक्सर्साइज (क्रंच) के जरिए पेट कम हो सकता है।
योग का लें सहारा: अगर आपके पास जिम में पसीना बहाने का वक्त नहीं है तो योगासन भी पेट कम करने का बेहतरीन तरीका साबित हो सकते हैं।
1. ताड़ासन यानी माउंटेन पोज - इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और आपका शरीर गंभीर एक्सर्साइज के लिए तैयार हो जाता।
2. सूर्य नमस्कार- इसमें 12 योग पोजिशन होती हैं और हर एक पोज का आपके शरीर पर अलग असर पड़ता है। आगे और पीछे झुकने वाली पोजीशन से शरीर की स्ट्रेचिंग होती है। इसके साथ डीप ब्रीदिंग से डीटॉक्सिफिकेशन होता है। इसे रोज सुबह, जब सूर्य की रोशनी तीखी नहीं होती की तरफ मुंह करके करने से ज्यादा लाभ होता है।
3. पादहस्तासन यानी आगे की ओर झुकना- इसमें फर्श पर बैठकर पैर को आगे की ओर फैलाकार नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करते हैं। इससे बहुत ज्यादा फैट बर्न होता है, खासतौर से पेट का फैट।
4. पवनमुक्तासन- इससे गैस्ट्रिक, अपच और कब्ज की परेशानी कम होती है। चूंकि इस आसन में आपके घुटने पेट पर दबाव बनाते हैं ऐसे में इससे पूरे एरिया से कुछ मिनटों में ही अच्छा खासा फैट बर्न होता है।
5. नौकासन- पेट का मोटापा कम करने में यह बेहद कारगर होता है। इस पोजीशन में एक मिनट भी रहने से पेट की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है और आपके ऐब्स की टोनिंग होती है।
6. उष्ट्रासन यानी कैमल पोज - यह पोज नौकासन के उलट होता है। इससे नौकासन के दौरान आपके पेट की मासंपेशियों पर पड़ी टेंशन कम होगी और मांसपेशियों की अच्छी टोनिंग होगी।
7. उत्तानपादासन- इससे पेट के निचले हिस्से, जांघ और हिप से फैट हटाने में मदद मिलती है। प्रेग्नेंसी के बाद कमर के आस-पास जमा फैट हटाने में यह बेहद कारगर आसन है।
8. भुजंगासन यानी कोबरा पोज- इस आसन से आपके पेट में अच्छा खासा स्ट्रेच पड़ता है। रेग्युलर इसे करने से पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि बच्चे के जन्म के बाद कमर दर्द से राहत के लिए भी यह आसन करने की सलाह दी जाती है।
9. धनुरासन- यह पोज आपके पेट की बढ़िया टोनिंग करता है। पेट की स्ट्रेचिंग के साथ-साथ इससे पीठ, जांघों, भुजाओं और छाती की मसल्स की भी टोनिंग होती है और आपका पॉश्चर सुधरता है।
फ्लैट टमी के सुपर सिक्स


1. सुबह उठने के बाद और वर्क आउट से पहले ओटमील या कॉर्नफ्लैक्स जैसा कुछ हेल्दी खाएं। इससे आपके मेटाबॉलिजम को अच्छी शुरुआत मिलेगी।
2. सलाद को अपने भोजन का मुख्य हिस्सा बनाएं। इससे बेहद कम कैलरी में आपका पेट भर जाएगा और जरूरी न्यूट्रिशन भी मिल जाएंगे।
3. दिन भर 8-10 गिलास पानी पिएं। इससे आपके शरीर से टॉक्सिन निकलता रहेगा।
4. कार्बोहाइड्रेट्स से पूरी तरह परहेज न करें। शरीर की एनर्जी की जरूरतें पूरी करने के लिए रोज 50-100 ग्राम तक कार्बोहाइड्रेट्स जरूर लें। अगर आप रोटी खाना पसंद करते हैं, तो दो या तीन की जगह एक रोटी खाएं। रोटी खाना बंद न करें।
5. डिनर में हमेशा हल्का खाना खाएं। ऐसे में अपने पेट को दिन भर की थकान के बाद थोड़ा आराम दे सकते हैं। रात के लिए कुछ हल्का खाएं, जैसे कि क्लियर सूप, एक पीस चिकन के साथ आधा कप सलाद या सिर्फ कुछ फल या एक गिलास दूध भी ले सकते हैं।
6. एक जरूरी बात यह भी है अगर पेट कम रखना है तो रात में 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।

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