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तुलसी का काढ़ा फायदा ही फायदा


तुलसी का काढ़ा फायदा ही फायदा



तुलसी का काढ़ा पीने से निकलती है किडनी की पथरी बाहर, ये हैं 10 फायदे

भारत के हर हिस्से में तुलसी का पौधा पाया जाता है। इसका पौधा केवल डेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तुलसी को हिन्दू संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं। यह हवा को भी शुद्ध बनाने का कार्य करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं। आज हम तुलसी से जुडे आदिवासियों के ऐसे 10 हर्बल नुस्खों के बारे में बता रहे है जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो।

तुलसी का काढ़ा पीने से निकलती है किडनी की पथरी बाहर, ये हैं 10 फायदे
तुलसी के इन फायदों के बारे में विस्तार से जानिए।

1- किडनी की पथरी बाहर निकल सकती है
किडनी की पथरी हो, तो तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 महीने सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।

2- पानी की शुद्धता के लिए
आदिवासी अंचलों मे पानी की शुद्धता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते हैं और कम से कम एक से सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा जाता है। कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और फिर यह पीने योग्य माना जाता है।

3- त्वचा संक्रमण से बचाव
औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए, तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।
4- दिल की बीमारी में वरदान
दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। जिन्हें हार्ट अटैक हुआ हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी व्यक्ति सेवन में ला सकता है।

5- झाइयां कम करने के लिए
इसकी पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं और रात को चेहरे पर लगाएं, तो झाइयां नहीं रहतीं, फुंसियां ठीक होती हैं और चेहरे की रंगत में निखार आता है।

6- फ्लू से बचाव
फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है। डांग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लू के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।

7- थकान मिटाने के लिए
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि मानते हैं। इनके अनुसार अत्यधिक थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है।

8- माइग्रेन से बचाव
इसके नियमित सेवन से 'क्रोनिक-माइग्रेन' के निवारण में मदद मिलती है। प्रतिदिन दिन में 4-5 बार तुलसी से 6-7 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।

9- संतान सुख
आदिवासियों द्वारा शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाता है, तो महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।

10- घमौरियों का इलाज
गर्मियों में घमौरियों के इलाज के लिए डांग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को सुखाकर पाउडर बना लेते हैं और इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते हैं। ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है
लौकी के गुण




सब्जी के रुप में खाए जाने वाली लौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। यह बेल पर पैदा होती है और कुछ ही समय में काफी बड़ी हो जाती है। वास्तव में यह एक औषधि है और इसका उपयोग हजारों रोगियों पर सलाद के रूप में अथवा रस निकालकर या सब्‍जी के रुप में एक लंबे समय से किया जाता रहा है। 

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लौकी को कच्‍चा भी खाया जाता है, यह पेट साफ करने में भी बड़ा लाभदायक साबित होती है और शरीर को स्‍वस्‍य और शुद्ध भी बनाती है। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्य वर्धक , पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट करने वाली होती है। आइए इसके औषधीय गुणों पर एक नज़र डालते हैं- 

1. हैजा होने पर 25 एम.एल. लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है। 

2.खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। 

3.हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 

4.लौकी में श्रेष्‍ठ किस्म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है। 

5.लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलते है। 

6.लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्‍ति देता है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी तंदुरस्त बनाता है। लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है।


डाइट में छुपा है राज वजन घटानें का



कामकाजी हो या गृहिणी, घर-बार के अलावा उन्हें खुद को संभालने का वक्त बहुत कम मिल पाता है। कम वक्त और सही जानकारी के अभाव में, सैकड़ों बार कोशिश करने के बावजूद हमारा वजन कभी कम नहीं हो पाता। लेकिन इस बार होगा, कैसे? आइए जानते हैं वजन कम करने के सही तरीके, बता रही हैं रुचि गुप्ता
आमतौर पर हम लोग अपने वजन को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान रहते हैं और साल में दो-चार बार अपने वजन को कम करने की कोशिश भी करते हैं, खासतौर पर महिलाएं। लेकिन हमारी यह कोशिश अकसर नाकामयाब रहती है। वजह, सिर्फ एक। मेहनत तो बहुत की, खाना भी कुछ खास नहीं खाया, पर... पर इन दोनों के बीच तालमेल सही नहीं बिठाया। अगर आपको वजन सच में कम करना है तो एक्सरसाइज और खानपान के बीच सही तालमेल के साथ ही अपने शब्दकोश से न, नहीं कर सकती, नहीं होगा, जैसे शब्दों को भी मिटा देना होगा। हर सुबह उठिए और खुद से कहिए कि मैं अपना वजन कम कर सकती हूं। मैं आज 30 मिनट सैर कर सकती हूं। आइए जानें ऐसी बातें, जिन्हें अपनाकर आप सेहतमंद रहेंगी और वजन भी कंट्रोल में रहेगा:

डाइट में छुपा है राज
अकसर महिलाओं को जैसे ही वजन बढ़ने का कमेंट मिलता है, उनका सबसे पहला हथियार होता है, भोजन। सबसे पहले वे अपने खाने पर रोक लगाने लगती हैं, वह भी बिना किसी प्रोफेशनल सलाह के। न्यूट्रीशनिस्ट एवं न्यूट्रीहेल्थ की संस्थापक डॉं. शिखा शर्मा का कहना है, ‘हमें वजन घटाने के लिए कभी क्रैश डाइट या खाने की मात्रा को कम नहीं करना चाहिए। आपको जितना वजन घटाना है उसे ध्यान में रखते हुए अपने भोजन को सही मात्रा में लेना चाहिए। हमारा पेट खुद ही हमारे भोजन की मात्रा के लिए संकेत देता है। वैसे भी कहा जाता है कि सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करना चाहिए।’

कब करें भोजन
माना जाता है कि एक सेहतमंद महिला को हर रोज 1800 से 2000 कैलोरी की जरूरत होती है। इस कैलोरी सेवन को अगर आप सही प्रकार से बांट लें तो, इन्हें खर्च करने में आपको अधिक श्रम भी नहीं करना पड़ेगा। वजन घटाने को ध्यान में रखते हुए अगर आप हर दो घंटे में कम मात्रा में भोजन करें, तो इससे आपको खाना पचाने में मुश्किल भी नहीं होगी। आप दिन की शुरुआत नाश्ते से कर सकती हैं। उसके दो घंटे के बाद फिलर के तौर पर दोपहर के खाने से पहले फल खा सकती हैं। दोपहर के भोजन के बाद शाम को चाय के समय पर आप प्रोटीन स्नैक का सेवन करें। फिर रात को सोने से लगभग तीन घंटे पहले भोजन करें। ध्यान रहे, यह भोजन काफी हल्का हो।

व्यायाम से हल होगी समस्या
खाने में हम भले कितनी भी कटौती कर लें, लेकिन अगर हमने उसके साथ शारीरिक व्यायाम पर ध्यान नहीं दिया तो वजन घटाना एक मुश्किल चुनौती साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो हमें सप्ताह में कम से कम 6 दिन और दिन में कम से कम 1 से 1-1/2 घंटे तो व्यायाम करना ही चाहिए। जरूरी नहीं है कि आप एक साथ समय निकालें। आप चाहें तो कुछ समय सुबह तो बाकी शाम को भी एक्सरसाइज कर सकती हैं। अपने लिए ऐसा एक्सरसाइज चुनें, जिसे आप आसानी से और लंबे समय तक कर सकें। कुछ दिन एक्सरसाइज करना और उसके बाद एक्सरसाइज करने की इच्छाशक्ति का खत्म हो जाना आम बात है। अगर वजन घटाना है तो ऐसी गलती करने से बचें और अपने एक्ससाइज के वक्त को भी रोचक बनाने की कोशिश करें।

व्यायाम आप चाहें घर पर करें या किसी प्रोफेशनल की देख-रेख में जिम में, उसकी शुरुआत वॉर्म-अप सेशन से ही होती है। आमतौर पर वॉर्म-अप सेशन में हम हल्के-फुल्के बॉडी स्ट्रेच और जंप के साथ शुरुआत करते हैं। साथ ही सैर भी एक अच्छा वॉर्म-अप एक्सरसाइज है।

दिल का ख्याल रखेगा कार्डियो 
दिल्ली के गोल्ड जिम, पूसा रोड के महा प्रबंधक और मास्टर ट्रेनर अभिषेक चटर्जी का कहना है, ‘आपको एक सप्ताह में 6 दिन और हर रोज कम से कम 20 मिनट कार्डियो सेशन जरूर करना चाहिए। दिल तंदरुस्त रहेगा तो शरीर भी तंदरुस्त रहेगा। कार्डियो सेशन की शुरुआत ट्रेडमिल, साइकलिंग, स्ट्रेर्प्स और क्रॉस ट्रेनर से कर सकती हैं। आम तौर पर कार्डियो सेशन को वेट ट्रेनिंग के पहले और बाद में दो भागों में बांट के किया जाता है।’

वेट ट्रेनिंग से घटाएं वजन
अभिषेक का कहना है, ‘वजन घटाने के लिए वेट ट्रेनिंग के दौरान किए गए स्ट्रेचिंग, लेग प्रेस, डेड लिफ्ट, लेग एक्सटेंशन और पुश-अप जैसे एक्सरसाइज और पावर योगा बेहद कारगर हैं। जहां पाइलेट्स एक्सरसाइज में योगा मैट या जिम बॉल पर लेट कर अपने पेट, जांघों और टांगों की मांसपेशियों की कसरत की जाती है, वहीं वेट ट्रेनिंग के बाद स्ट्रेचिंग खुली मांसपेशियों को सुंदर और सुडौल बनाने में मददगार साबित होती है। इसी के साथ आपको कम्पाउंड एक्सरसाइज, जिसमें एक से अधिक जोडमें पर ध्यान दिया जाता है, करनी चाहिए। इसके अलावा आप पावर योगा के सेशन भी ले सकती हैं। एक बार में 20 मिनट तक आप वेट ट्रेनिंग कर सकती हैं। आप एक्सरसाइज के अपने पूरे टाइम को तीन-तीन के दो सेटों में बांट सकती हैं। ताकि किसी एक एक्सरसाइज से आपको बोरियत भी न होने लगे। इस दौरान आप बीच में दो-दो मिनट का ब्रेक भी लें।

क्या खाएं, क्या न खाएं
जो महिलाएं अपना वजन घटाना चाहती हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें खाने में वसायुक्त भोजन कम करना चाहिए और फाइबरयुक्त भोजन अधिक खाना चाहिए। डॉं. शर्मा बताती हैं, ‘आप अपने भोजन में आम चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें, जिनमें फाइबर बहुत है। ठीक ऐसे ही आप सामान्य ब्रेड की जगह ब्राउन ब्रेड और अपने गेहूं के आटे को मल्टीग्रेन आटे से बदल दें। जहां तक मीठे की बात है तो उसके लिए जितना भी कृत्रिम मीठा या चीनी है, उसे आप प्राकृतिक मीठे से बदलें। यानी आप नीबू पानी में चीनी की जगह शहद और चाय में गुडम् का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर की मीठे की आवश्यकता भी पूरी होगी और कैलोरीज में कटौती भी होगी।’
चलते-चलते
हर दो घंटे पर आप पांच मिनट की सैर करें। ध्यान रहे आप ब्रिस्क वॉक या तेज कदमों से चलें।
सैर को बनाए रखने के लिए आप लिफ्ट या एस्कलेटर की जगह सीढियों का इस्तेमाल करें। अपनी कार या स्कूटर को पार्किंग में थोड़ा दूर लगाएं ताकि आप अधिक से अधिक कदम चल सकें।
हर रोज आधे घंटे की सैर की जगह 45 मिनट की सैर करें। रोज आधे घंटे की सैर से जहां बढ़ते वजन पर नियंत्रण लगेगा, वहीं 45 मिनट की वॉक से आप रोज 300 कैलोरी तक अधिक खर्च कर पाएंगी। तो जाहिर है, कम कैलोरी यानी शरीर में कम वसा।
प्रसंस्कृत या ऐसे प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें, जिसमें शुगर, फ्रूक्टोस या कॉर्न सिरप का इस्तेमाल हो। सूखे मेवे खाएं, जिनसे आपको कैलोरीज के साथ-साथ प्राकृतिक तेल और फाइबर भी मिले।
शाम को पांच बजे से पहले कैफीनयुक्त उत्पादों का सेवन कर लें ताकि रात को नींद में कोई बाधा न आए।
फेसबुक और ट्विटर पर रिश्तेदारों से मिलने की बजाए सप्ताह में एक बार दोस्त-रिश्तेदारों से मिलें। इसके लिए आप किसी पार्क में मिलने का कार्यक्रम रखें, जहां आप फास्ट फूड या तले और मसालेदार भोजन से भी दूर रहेंगी।
बाहर के खाने की जगह घर पर बने और पोषक तत्वों से भरपूर खाने को तरजीह दें। 
दोपहर तक अधिक कैलोरी वाला भोजन खाएं, उसके बाद कम से कम कैलोरीज लें, ताकि आप रात तक अपनी कैलोरीज का इस्तेमाल भी कर पाएं और वह शरीर में वसा का रूप न ले पाए।



गैस बनने वाली परेशानी को दूर करे ये योग आसान



सान हम आपको बताने वाले हैं, उससे आपको गैस तथा एसीडिटी दोनों से राहत मिलेगी। एक बात जिसका आपको खास ख्‍याल रखना है, वह ये कि योगा करने से पहले पानी बिल्‍कुल भी ना पियें। इस योगा से आपके पेट पर गहरा असर पडे़गा। इन नीचे दिये योग आसन को रोजाना सुबह के समय करें, जिससे आपको कभी पेट में गैस की समस्‍या ना झेलनी पडे़

पश्चिमोत्तानासन चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैर को फैलाकर रखें। दोनों पैरों को आपस में परस्पर मिलाकर रखें तथा अपने पूरे शरीर को बिल्कुल सीधा तान कर रखें। दोनों हाथों को सिर की ओर ऊपर जमीन पर टिकाएं। अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए एक झटके के साथ कमर 
हस्तपदासन इसको करने के लिये पहले सीधे खडे़ हों, फिर अपने पैरों को हल्‍का ऊपर उठा कर नीचे आते हुए अपने पांव को छुएं। 

सर्वांग आसन चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनो पैरों को मिलाकर व पूरे शरीर को सीधा तान कर रखें। अब सांस अन्दर लेकर धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। फिर कमर और छाती को भी धीरे धीरे ऊपर उठाएं। अपने हाथों से कमर को पकड़ कर रखें। कुछ देर इसी अवस्‍था में रहें और फिर नीचे आ 

अनुलोम विलोम दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को 

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बाहर निकालें। अब दायीं नासिका से ही सांस को 4 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें।

सन भूमि पर चटाई बिछा कर चित्त होकर लेट जायें। पूरक करके फेफड़ों में श्वास भर लें। अब किसी भी एक पैर को घुटने से मोड़ दें। दोनों हाथों की अंगुलियों को मिलाकर उसके द्वारा मोड़े हुए घुटनों को पकड़कर पेट के साथ लगा दें। फिर सिर को ऊपर उठाकर मोड़े हुए घुटनों पर नाक लगाएं। दूसरा पैर ज़मीन पर सीधा रखें। इस क्रिया के दौरान श्वास को रोककर कुम्भक चालू रखें। सिर और मोड़ा हुआ पैर भूमि पर पूर्ववत् रखने के बाद ही रेचक करें। दोनों पैरों को बारी-बारी से मोड़कर यह क्रिया करें।


स्प्राउट्स- सेहत से भरपूर आहार


अंकुरित अनाज हमें सेहतमंद रखते हैं’, ‘इसे रोज ब्रेकफास्ट में खाना चाहिए’, ‘हमारी रोग-प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है’ आदि… ये सारी बातें हम बचपन से अपने बड़ों से सुनते आए हैं। जी हां, अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स एक शुद्ध और स्वस्थ नाश्ता है। यह रोग-प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर कई रोगों से भी बचाता है। प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान में इसे दवा का दर्जा दिया गया है।

फायदे ही फायदे
दूसरे स्नैक्स की तुलना में कम कैलोरी होती है। ये वजन नियंत्रित रखता है।
सोडियम की अधिक मात्रा अक्सर हृदय और रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं पैदा करती हैं। स्प्राउट्स में सोडियम नहीं होता, जिससे रक्तचाप का स्तर नियंत्रण में रहता है और शरीर उच्च रक्तचाप के स्तर को कम करता है। हाइपरटेंशन और हृदय से जुड़ी अन्य समस्याओं से भी दूर रखता है।
स्प्राउट्स खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है, शरीर से गंदगी निकलती है। खून से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं।
स्प्राउट्स में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रैडिकल्स को नष्ट करते हैं ताकि त्वचा को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और त्वचा कैंसर की संभावना खत्म हो सके।
स्प्राउट्स क्यों है बेहतर
विशेषज्ञों की मानें तो कच्चे फल और सब्जियों से 100 गुना ज्यादा एन्जाइम्स अनाज को अंकुरित करने पर होते हैं। एन्जाइम्स वे प्रोटीन होते हैं, जो शरीर को सही तरह से कार्य करने के लिए जरूरी होते हैं।
अनाज को भिगोने और अंकुरण की प्रक्रिया के दौरान उनमें मौजूद प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ जाती है।
अंकुरण पर फाइबर की मात्रा तुरंत बढ़ जाती है।
अनाज को अंकुरित करने से विटामिन बी, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और विटामिन ई की मात्रा लगभग 20 गुना ज्यादा बढ़ जाती है। रिसर्च के मुताबिक अंकुरण की प्रक्रिया के दौरान मूंग या बीन्स में विटामिन बी1 की मात्रा 285 फीसदी, विटामिन बी 2 की मात्रा 515 तक बढम् जाती है और नीयासिन की 256 फीसदी तक बढ़ जाती है।
एशेनशियल फैट अक्सर हमारी डाइट का हिस्सा नहीं होते। स्प्राउट्स इस फैट के अच्छे स्रेत हैं।

अंकुरण का तरीका
अनाज को रात भर पानी में भिगोने के बाद सुबह किसी साफ कपड़े में बांध दें या फिर किसी जार में रख दें। दिन में दो बार साफ पानी छिड़कें।

इन बातों का ध्यान रखें
खाने से पहले स्प्राउट्स को जरूर धो लें। इससे किसी तरह का फंगस या पेस्टीसाइड के कण होंगे तो धुल जाएंगे।
आग पर पकाने, भूनने या तलने से स्प्राउट्स का पोषण नष्ट होता है। अगर पका कर ही खाना पसंद करते हैं तो भाप पर पका कर खाएं। भाप पर पकाने के लिए उबलते पानी में अंकुरित अनाज डाल कर ढक दें। दो मिनट पकाने के बाद बर्तन से ढक्कन हटा दें। फिर से 15 मिनट के लिए ढक कर पकाएं। मुलायम होने तक पकाएं।
सलाद के रूप में खाने से स्प्राउट्स के गुण कई गुना बढ़ जाते हैं। टमाटर, ब्रोकली, प्याज, मूली और खीरे के साथ खाया जाए तो स्प्राउट्स का स्वाद और पोषण बढ़ता है।
अगर आप बाजार से खुले अंकुरित अनाज खरीदते हैं तो जांच कर लें।
इनसे बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है



भारत में मोटे लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। आज करीब 4 करोड़ 10 लाख ऐसे लोग भारत में मौजूद हैं, जिनका वजन सामान्य से कहीं ज्यादा है। अधिकांश लोग शुरुआत में मोटापा बढ़ने पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन जब मोटापा बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे घटाने के लिए घंटों पसीना बहाते रहते हैं।
मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। इसीलिए यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो अपनाएं आगे बताए गए छोटे-छोटे उपाय। ये आपके बढ़ते वजन को कम कर देंगे।
- ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
- केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
- रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
- पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।

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- दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
- छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
- आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
- मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
- एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
- सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।
- खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
- सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से वसा में कमी होती है।

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