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सुबह जल्दी उठना है परेशानी


सुबह जल्दी उठना है परेशानी
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ये तो सभी जानते हैं कि रोज सुबह जल्दी उठने के बहुत सारे फायदे होते हैं. सुबह जल्दी उठने वाले लोग आम तौर पर ज्यादा सक्रिय और अधिक उत्पादक होते हैं. सुबह जल्दी उठने से आप स्वस्थ, धनी, और बुद्धिमान बनते है. लेकिन क्या हमेशा आप सुबह जल्दी उठ पाते हैं. सुबह बहुत जल्दी उठना तो जैसे अपने आप में एक भारी काम है.


इस बात में तो शत-प्रतिशत सच्चाई है कि सुबह जल्दी उठने से आपके शरीर को और आपके जीवन शैली को कई फायदे होते हैं. सुबह जल्दी उठने की आदत आपके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी अच्छा रखती है और आपको आपके आगे के जीवन में अधित उत्पादक और सफल बनाती है.


अगर आप रोज रात को ये सोच कर सोते हैं कि सुबह जल्दी उठ ही जाएंगे, पर अक्सर या हर रोज ऐसा हो नहीं पाता तो, यहां हम आज हम आपको हर रोज सुबह जल्दी उठने के कुछ अच्छे और उपयोगी टिप्स व सुझाव बताने जा रहे हैं.


1. सबसे आसान और सर्वविदित उपाय जो सबसे सामान्य भी है कि सुबह जल्दी उठने के लिए अलार्म सेट कर लें. ये आपकी सहायता करेगा.


2. रोजाना उठने के समय से 10-15 मिनट पहले जागें और दिन ब दिन ये कोशिश जारी रखें. ये खुद को समायोजित करने में सहायता करेगी.


3. अगर अलार्म लगाने और आपकी बड़ी अलार्म क्लॉक से भी आपको जल्दी उठने में दिक्कत होती है तो आप एक उपाय ये भी कर सकते हैं कि आपके परिवार के सदस्य या जहां भी आप रहते हैं वहां जो भी व्यक्ति सुबह जल्दी उठ जाता है, उनसे उठाने के लिए बोलें.


4. सोने और सुबह जागने की आदत को नियमित रखें. सोने और उठने के लिए एक रेगुलर समय सेट करें और सप्ताहांत हो या छुट्टी का दिन, ये आदत बरकरार रखें. ये कड़ा शेड्यूल आपको सुबह जल्दी उठने में खासी मदद करेगा.


5. हर रोज एक पर्याप्त नींद लें ताकि आप हमेशा तरोताजा महसूस कर सकें, हर रोज कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेना उचित माना गया है और ऐसा होगा तो आपको सुबह-सुबह जल्दी उठने में भी आलस नहीं लगेगा.
भोजन के साथ सलाद जरूर खाएं


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सलाद हमें ताकत तो देता ही है और साथ ही पेट के लिये भी बहुत अच्छा होता है. क्या आप जानते हैं कि आपके सलाद में क्या-क्या शामिल होना चाहिए. सलाद में कई सब्जियां और फल शामिल होते हैं और ये हमें कई प्रकार से स्वास्थ्य वर्धक लाभ पहुंचाते हैं.


हमेशा ताजे सलाद का ही सेवन करना चाहिए. सलाद आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाता है. सलाद में कच्चे फल और सब्जियों का सेवन करने से आप वाकई बेहतर महसूस करेंगे. आज हम आपको बताऐंगे हमेशा भोजन के साथ सलाद खाने से क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ होते हैं.

1. कब्ज दूर करता है


सेहतमंद भोजन आपके शरीर को ऊर्जा देता है और इसके साथ सलाद खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है. सलाद हमारे भोजन में फाइबर की मात्रा को बढ़ाता है जिससे कोलेस्ट्राल और कब्ज की समस्या दूर होती है.


इसके अलावा भोजन करने से पहले उच्च फाइबर युक्त आहार या सलाद का सेवन करने से आपको वजन घटाने में भी मदद मिलती है.


2. वजन कम करता है


सलाद में कैलोरीज कम होते हैं, इसीलिए इससे आपका वजन नियंत्रित रहता है. आपको अपने सलाद में फल, ऑलिव ऑयल और ऐवाकाडो आदि को शामिल करना चाहिए. ये सभी शरीर को आयरन, लिकोपिन, ल्यूटिन जैसे अन्य कई पोषक तत्त्वों को अवशोषित करने में मदद करते हैं.


3. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाता है


आप जानते हैं कि सलाद विटामिन, मिनरल्स से भरपूर होता है. इसमें विटामिन, इम्यूनिटी, विटामिन सी, संक्रमण से बचाव, आयरन अवशोषण, स्वस्थ हड्डियां, मसूड़ों और त्वचा को रोगों से बचाना, जख्मों को भरने और रक्त को गाढ़ा बनाने जैसे तत्व होते हैं. इनके अलावा कैल्शियम और अन्य कई सारे पोषक तत्व भी सलाद में होते हैं.


4. पोषक तत्वों से है भरा


कई स्वास्थ्य सलाहकारों की माने तो गहरे रंग के फल और सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते हैं. दरअसल बात ये है कि गहरे रंग के फल और सब्जियों में कैल्शियम और मैग्निश्यिम काफी मात्रा में पाया जाता है. ब्रोकली, सलाद पत्ता, पत्ता गोभी और दूसरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं. चुकंदर खून को बढ़ाने का काम करता है, इसके अलावा इसमें प्रचुर मात्रा में फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम भी पाया जाता है और मूली में विटामिन सी, सोडियम और कैल्शियम पाया जाता है, आप इन सभी को अपने सलादमें शामिल कर सकते हैं.


5. बार बार भूख लगने से बचाता है


अगर आपको हमेशा कुछ न कुछ खाने का मन करता रहता है और आपका मन ज्यादातर कुछ मीठा खाने को करता है तो कैंडीज या चॉकलेट्स खाने की जगह आपको फलों के सलाद का सेवन करना चाहिए. इससे न सिर्फ आपकी भूख शांत होगी, बल्कि मुंह का स्वाद भी अच्छा होगा और यह आपके शरीर में ऊर्जा और ताजागी का संचार भी होगा.
हीमोग्लोबिन की कमी को ऐसे पूरा करें




क्या आप आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की पर्याप्त और सही मात्रा के बारे में जानते हैं. पुरुषों में हीमोग्लोबिन की सही मात्रा 14 से 17 ग्राम/100 मिली. रक्त होती है, वहीं स्त्रियों में ये मात्रा 13 से 15 ग्राम/100 मिली. रक्त होती है. शिशुओं के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा लगभग 14 से 20 ग्राम/100 मिली. रक्त होनी चाहिए.

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यहां हम आपको एक बहुत ही साधारण सी बात बता देना चाहते हैं कि दिन में एक सेब अवश्य खाकर आप आपके शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को सामान्य बनाए रख सकते हैं. इसके अलावा इन बातों का ध्यान रख कर भी आप अपने शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से रोक सकते हैं.


स्वास्थ्यवर्ध्क गुणों से भरपूर लीची, रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया में सहायक होती है. लीची में बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेबिन, नियासिन और फोलेट जैसे विटामिन बी उचित मात्रा में पाया जाता है. इसमें मौजूद विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है.


शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए चुकंदर सबसे अच्छा खाद्य प्रदार्थ है. चुकंदर पोषक तत्वों की खान है. इसमें आयरन, फोलिक एसिड, फाइबर, और पोटेशियम ये सभी सही मात्रा में पाया जाता है. ये शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि करता है.


इनके अलावा अनार हीमोग्लोबिन बढ़ाने में बहुत लाभकारी होता है. अनार में आयरन और कैल्शियम के साथ-साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर जैसे तत्व होता हैं, जिनसे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है.
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गुड़ का सेवन करना भी एक बेहद उत्तम तरीका है. गुड़ में आयरन फोलेट और कई विटामिन बी शामिल हैं जो हीमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाने के लिए और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मददगार होते हैं.


शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को रोकने के लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए. जब आप व्यायाम करते हैं तब आपका शरीर खुद-ब-खुद हीमोग्लोबिन पैदा करता है.


हम आपको बता देना चाहते हैं कि कॉफ़ी, चाय, कोला, वाइन, बियर, ओवर-द-काउंटर एंटाएसिड, कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ और डेयरी उत्पाद या कैल्शियम सप्लीमेंट्स वाली चीजें शरीर में आयरन सोखने की क्षमता को कम देते हैं. इसीलिए अगर आपका हीमोग्लोबिन स्तर कम हो गया है तो है तो आपको इन खाद्य प्रदार्थों के सेवन से बचना चाहिए.


विटामिन सी की कमी हो जाने के कारण भी हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है. जब शरीर में विटामिन सी की कमी होती है तो इस कारण आपका शरीर सही मात्रा में आयरन को सोख नहीं पाता. इसीलिए विटामिन सी से भरपूर खाद्य प्रदार्थों के सेवन से आप हीमोग्लोबिन का स्तर सही कर सकते हैं.
हंस...खुल कर हंस


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जब हम छोटे थे तो पहली अप्रैल को अपनी बचकानी हरकतों से अप्रैल फूल बनते और बनाने का मजा लेते. फूल बनने के बाद भी किस तरह से चेहरे पर मुसकान बिखरती थी, यह तो उसी वक्त का मजा था. इतना ही नहीं, कुछ बातें तो आज भी हमारे दिलोदिमाग में बसी रहती हैं और याद आने पर चेहरे पर फिर वही मुसकान ले आती हैं. कुछ ऐसी ही होती है हंसी...


अकसर कहा जाता है कि फलां बहुत ही हंसमुख इंसान है यानी हंसी व्यक्तित्व को एक पहचान देती है. हंसने-हंसाने से जीवन खुशहाल बन जाता है. यदि लोगों पर सर्वे किया जाए, तो शतप्रतिशत लोग ऐसे ही लोगों का साथ या दोस्ती चाहते हैं, जो जीवन के हर पल को हंस कर जीते हैं. आजकल के मशीनी युग में हंसी कहीं खो सी गई है, हंसी की महफिलें, गपगोष्ठियां और परिवारों की सम्मिलित हंसी की बैठकें अब लगभग गायब हो गई हैं.


वह पेट पकड़ कर हंसना और हंसते-हंसते आंखें छलकने का मंजर अब कहां देखने को मिलता है. बस, कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग जैसी एक हलकी सी मुसकराहट आ कर रह जाती है. हर समाचारपत्र और पत्रिका में हंसने के लिए जोक्स और हंसी का कोना दिया होता है कि पढ़ने वाला उसे पढ़ कर हंस सके, लेकिन 100 में से 80 लोगों के पास तो समय ही नहीं होता उसे पढ़ने के लिए और 10 प्रतिशत लोग पढ़ तो लेते हैं पर गौर नहीं फरमाते और बाकी बचे 10 प्रतिशत लोग ही ऐसे होते हैं, जो उन चुटकुलों का आनंद ले कर हंस पाते हैं.


कुछ कहती भी है यह हंसी


किसी से मिलते ही उस का स्वागत करते हैं तो चेहरे की भावभंगिमाओं में मुसकराहट छिपी होती है, उस से स्पष्ट हो जाता है कि आप ने दिल की गहराई से अपने दोस्त का स्वागत किया है. जिस हंसी से किसी का दिल दुखे वह हंसी नहीं है. वह हंसी का निकृष्टतम रूप है. आत्मसंतोष और आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनेआप पर भी हंसता है, यही कारण है कि जिंदादिल इंसान कई बार जटिल स्थितियां भी सहज कर देता है. घर के तनाव में यदि कोई हंसी की बात आ जाती है तो उसे उसी वक्त स्वीकार कर के हंस लीजिए, क्योंकि हंसी भरे व्यवहार से बहुत सी स्थितियां अपनेआप ही सहज हो जाती हैं.


इलाज भी है हंसी

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खुल कर हंसने वालों को डाक्टर के पास जाने की कम जरूरत पड़ती है. कहा जाता है कि खुल कर हंसने से शरीर में कंपन होता है और आंतरिक अंगों की मालिश होती है. हंसने से हमारा ड्रायफाम फैलनेसिकुड़ने लगता है, जिस से आंतरिक अंगों जैसे लिवर, गुरदा, किडनी, आंतें, बाहरी त्वचा बारबार खुलती व सिकुड़ती है, जिस से इन अंगों का व्यायाम होता है. हंसी से सेरोटिन की मात्रा भी बढ़ जाती है, जिस से हमारे अंदर पौजिटिव ऐनर्जी आ जाती है जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है. कई बार हम बीमार होते हुए भी किसी उत्सव में जाते हैं और वहां का माहौल प्रसन्नता, हास्य का भाव, खुशीउमंग से भरा देख कुछ सुकून महसूस करते हैं. हंसने के दौरान हमारे मस्तिष्क में इस तरह के हारमोंस पैदा होते हैं, जिस से कोरटीसोल की मात्रा कम होती है. कोरटीसोल हमारे मस्तिष्क में से निकलता हारमोन है, जो नकारात्मक सोच को मजबूत करता है और हंसने से हमारे मस्तिष्क में इस तरह के हारमोंस पैदा होते हैं, जिन से कोरटीसोल की मात्रा कम होती है, जिस कारण सकारात्मक सोच हम पर प्रभावी हो जाती है.


फिल्म ‘आनंद’ के जिंदादिल राजेश खन्ना और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ में संजय दत्त हंसीखुशी के कारण ही अपनी और दूसरों की बीमारी को भुला कर जिंदादिली का सबक सिखाते हैं और स्वस्थ होने में हंसी का भी योगदान है, इस की भी सीख देते हैं. चिकित्सकों का मानना है कि हंसना हमारे स्नायु संबंधी और अन्य शारीरिक रोगों से बचने का सर्वोत्तम साधन है.


जरूरी है हंसी


हंसना कितना महत्त्वपूर्ण है, इसे ध्यान में रखते हुए आजकल तमाम टीवी चैनल रोनेधोने वाले सीरियलों की जगह हंसी पर आधारित कार्यक्रमों को ज्यादा महत्त्व दे रहे हैं. कई स्थानों पर मौर्निंग वौक वाले क्लब में लाफ्टर क्लब स्थापित होने लगे हैं, जिन में लोग सुबह किसी पार्क में इकट्ठा हो कर जोरजोर से हंसते हैं और भी लोग उन की हंसी की आवाजों पर हंसते हैं. कुल मिला कर माहौल हंसी का हो जाता है और सुबहसुबह की ताजगी दिनभर कायम रहती है.
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ये चीजें खाते हैं तो कैंसर है आपके इंतजार में


विश्वभर में कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है. आज विश्वभर में सबसे ज्यादा मरीज इसकी चपेट में हैं. कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिससे मरने वालों की संख्या AIDS जैसी घातक बीमारी से भी ज्यादा है.


कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो जेनेटिक कारणों के अलावा खान-पान और जीवन शैली का भी नतीजा होती है. आज हम आपको ऐसी कुछ खाने की आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कैंसर के लिए खुला निमंत्रण साबित हो सकती हैं.

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कैन में पैक्ड फूड: हार्ड प्लास्टिक की केन में जो पैक्ड फूड प्रोडक्ट मार्किट में उपलब्ध हैं उनमें bisphenol-A (BPA) नाम का एक ऐसा तत्व पाया जाता है जो कि कैंसर का एक बड़ा कारक है. हालांकि इस तरह के प्रोडक्ट्स पर अक्सर BPA Free लिखा होता है लेकिन इसके बावजूद भी इस पैकिंग के बाद पैक्ड फूड में इसका पाया जाना सामान्य बात है.


स्मोक्ड फूड्स: इस तरह के सभी खाद्य पदार्थों में नाइट्रेट्स और नाइट्राइट सामान्य से बेहद ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. इनमें बड़ी मात्र में रंग और मसाले भी इस्तेमाल किये जाते हैं. इन्हें जब पकाया जाता है तो नाइट्रेट्स और नाइट्राइट ऐसे कैमिकल कमपाउंड्स में बदल जाते हैं जो कैंसर के रिस्क को और भी बड़ा देते हैं.


फार्म्ड फूड: फूड एंड वाटर वॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक तालाब में पाली गई मछलियों में इंसानी शरीर में कैंसर पैदा करने वाले तत्व जंगली मछलियों की अपेक्षा ज्यादा पाए जाते हैं. मछलियों की पैदावार अच्छी करने के लिए भी कुछ ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो इंसानी शरीर के लिए खास अच्छे नहीं माने जाते.


जेनेटिक मोडिफाइड फूड्स: रिसर्च में पाया गया है कि वो सभी खाद्य पदार्थ जो कि जेनेटिकली मोडिफाइड बीजों के जरिये उगाये जाते हैं उनमें कैसर पैदा करने वाले तत्व प्राकृतिक बीजों के मुकाबले काफी ज्यादा होते हैं. इसके आलावा नॉन आर्गेनिक फूड्स जो कि पेस्टीसाइड के जरिये उगाए जाते हैं वो भी शरीर में कैंसर की संभावनाओं को जन्म देते हैं.


ग्रिल्ड मीट: मीट को लकड़ी या कोयले पर पकाने से उसमें ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन और PAHs काफी मात्रा में बढ़ जाते हैं जो कि शरीर के लिए काफी हानिकारक साबित होते हैं. मीट में मौजूद फैट आग के सीधे संपर्क में आने से जलकर जो धुंआ बनाता है वो इस तरह के फूड प्रोडक्ट को और भी खतरनाक बना देता है.


हाइड्रोजेनेटेड तेल: हारवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एक रिसर्च में सामने आया है कि हाइड्रोजेनेटेड तेल या ट्रांस फैट प्रोडक्ट्स का कैमिकल स्ट्रक्चर ऐसा होता है जो कि कैंसर सेल्स के लिए प्रेरक का काम करता है. ये शरीर के इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचता है और दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और डायबिटीज के खतरे को भी पहले से कई गुना बढ़ा देता है.


माइक्रोवेव पॉपकोर्न: ऐसे रेडीमेड पॉपकोर्न जो कि माइक्रोवेव के जरिये बनाए जाते हैं उनमें जिस तेल का इस्तेमाल किया जाता है उसे भी वैज्ञानिकों ने सेहत के लिए खतरनाक बताया है.


प्रोसेस्ड फूड: कर्ड मीट जैसे दूसरे प्रोसेस्ड फूड में भी हाई नाइट्रेट्स और नाइट्राइट जैसे तत्व पाए जाते हैं. ये पेट और आतों के कैंसर की प्रमुख वजह होते हैं. इनमें आमतौर पर सफ़ेद आटा, शूगर, तेल, अप्राकृतिक रंग और फ्लेव्रिंग का इस्तेमाल किया जाता है जो कि शरीर के लिए और भी घटक साबित होते हैं.


सोडा और एनर्जी ड्रिंक: सोडा पीना या बाकी एनर्जी/स्पोर्ट्स ड्रिंक्स की न्यूट्रीशियन वैल्यू जीरो होती है लेकिन इनमें मौजूद शुगर और बाकी तत्व शरीर के लिए काफी हानिकारक होते हैं. इनमें भारी मात्रा में कैमिकल्स पाए जाते हैं और शरीर में मौजूद विटामिन बैलेंस को बिगाड़ देते हैं




बार-बार होने वाली थकान बढ़ाती है परेशानी
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थकान मानसिक या शारीरिक दोनों तरह की हो सकती है. आपके शरीर में होने वाली थकावट कई तरह के कारणों की वजह से होती है. थकान या सुस्ती होने से आलस का अनुभव होता है. जिस व्यक्ति को हर समय थकान होती है, उसे अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगर आपको भी थकान रहती है, तो इससे निजात पाना बहुत मुश्किल होता है. आज हम आपको बताना चाहते हैं कि वास्तव में थकान से उत्पन्न होने वाले लक्षणों को पहचानना एक बहुत मुश्किल काम है.


आपने यह देखा तो होगा कि आप में से कई लोग एक ही समय में दस काम बेहतर तरीके से कर लेते हैं पर आप में पहले जितनी एनर्जी बाकी नहीं रह पाती और थकान के बाद आप उतने ही समय में सही तरीके से अपना काम पूरा नहीं कर पाते हैं. इसे ही शारीरिक या मानसिक थकान भी कहते हैं.


कई बार थोड़े आराम और सही पौष्टिक आहार की कमी से भी ऐसा होता है. यहां हम थकान की मुख्य वजहों और उनके निवारण के उपाय बता रहे हैं.
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1. पर्याप्त नींद न होने की वजह से थकान


अगर आप देर तक बिस्तर में केवल सोये रहने हैं तो ये थकान भगाने का सही तरीका नहीं है. रात की नींद पूरी न होने की वजह से आपको थकान का सामना करना पड़ता है. कम नींद की वजह से आपको बहुत सी दिक्कतें होती हैं. नींद पूरी न हो तो एक जगह ध्यान केन्द्रित करने में भी मुश्किल होती है और फिर इस कारण मानसिक थकान का अनुभव भी होने लगता है.


समाधान


अपना बिस्तर में जाने का और नींद का या सोने का समय सुनिश्चित करे लें. एक समय सारिणी सीमा बनाकर उसका पालन करें और नींद भी अच्छे से पूरी करें. नींद पूरी होगी तो सुबह उठकर आप अपने सभी कामों को फुर्ती के साथ आसानी से करेंगे. रात की नींद ठीक तरह से न होना थकान का एक मुख्य कारण है.


2. स्लीप एप्नीय

नींद के वक्त होने वाला एक स्लीपिंग डिसऑर्डर है स्लीप एप्नीय. इस बिमारी में नींद की अवस्था में अपने आप सांस रुक जाने की वजह से नींद खुल जाती है और ऐसा बार बार होने के कारण आपकी नींद पूरी नहीं हो पाती और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक थकान से परेशान रहता है.

समाधान

जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने और अत्यधिक मोटापे की वजह से यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा बहुत धूम्रपान करने वाले लोगों को भी इस परेशानी से गुजरना पड़ता है. इस परेशानी से बचने के लिए एक्सरसाइज और वर्कआउट आदि की शुरुआत करें और धूम्रपान करने की बुरी आदत से छुटकारा पाएं.


3. उचित और संतुलित आहार

शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए और खुद को थकान से दूर रखने के लिए सही और उपयुक्त भोजन करना बहुत जरूरी है. भोजन में कम पोषण की वजह से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है, जिसके कारण थकान होती है. यह बात ध्यान रखें कि आपके भोजन में सभी प्रकार के पोशाक तत्वों का सही अनुपात में होना जरूरी है और साथ ही नमक और चीनी की भी उचित मात्रा में होनी चाहिए. आलस को शरीर से दूर रखने के लिए ये आवश्यक होते हैं.

समाधान

नाश्ता करना कभी भी नहीं भूलना चाहिए. सुबह का नाश्ता शरीर के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है. सुबह की यह एक और पहली खुराक शरीर को दिन भर ऊर्जा देने में मदद करती है और यह भी आवश्यक ध्यान में रखें कि आप जो कुछ भी नाश्ते के वक्त ले रहे हैं वह पर्याप्त पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए. नाश्ते के अलावा भोजन में सभी प्रकार के प्रोटीन, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट भी उचित मात्रा में होना चाहिए. ये सभी आपकी एनर्जी को ज्यादा से ज्यादा समय तक बनाए रखने में मदद करते हैं और साथ ही आपका प्रतिरोधी तंत्र भी मजबूत करता है जो थकान से बचने के लिए बहुत जरूरी है.




वजन बढ़ाने के लिए अपनाएं ये उपाय






जिस तरह वजन का बढ़ना एक बीमारी है, उसी तरह से वजन का जरुरत से ज्यादा कम होना भी एक बीमारी ही है. अगर शरीर बहुत कमजोर और दुबला-पतला हो तो आपका हर कोई मजाक उड़ाता है और आप हर जगह हंसी का पात्र बनते हैं.


वजन की कमी को दूर करने के लिए आपको कुछ खास खाद्य पदार्थ को अपने रोज के भोजन में शामिल करना चाहिए. हम आपको बताएंगे कि किन चीजों को खाने से आप आसानी से अपने आपको चुस्त-दुरुस्त और हष्ट-पुष्ट बना सकते हैं.

1. आलू
आलू कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा और संपूर्ण स्रोत है, आलू खाने से मोटापा बढ़ता है. आपको आलू को उबालकर उसे दूध के साथ खाना चाहिए, इससे आपको जल्दी फायदा होगा.


2. अनार

अनार विटामिन का अच्छा स्रोत माना जाता है. बहुत से गुणों से भरपूर अनार आपके शरीर में खून को बढ़ाता है. कई स्वास्थ्य सलाहकर, अच्छे स्वास्थ्य की दृष्टि से इसे एक महत्त्वपूर्ण फल मानते हैं. अनार का नियमित रूप से सेवन करने से रक्त संचार की गति भी बढ़ती है और आपका मोटापा बढ़ता है.

3. बादाम

रोज रात को बादाम की पांच से सात गिरी को पानी में भिगो कर रख दें और सुबह उनका छिलका उतारकर उन्हें पीसकर, उसमें लगभग 30 ग्राम मक्खन और मिश्री मिलाकर इस मिश्रण को डबल रोटी या सामान्य रोटी के साथ खाएं. वजन बढ़ाने के लिए आप इसे खाने के बाद फिर एक गिलास गर्म दूध भी पी सकते हैं. नियमत ऐसा करने से वजन बढ़ने के साथ-साथ आपकी स्मरण शक्ति भी तेज होती है.

4. दूध और रोटी

जो लोग मोटे नहीं है और अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं उन्हें रोजाना दूध के साथ रोटी खानी चाहिए.

5. घी

मोटापे के लिए घी बहुत ही फायदेमंद और आवश्यक है. वजन बढ़ाने और मोटे होने के लिए आपको गर्म रोटी और दाल में घी मिलाकर खाना चाहिए. इसके अलावा शक्कर में घी मिलाकर खाने से भी मोटापा बढ़ता है.

6. पनीर

पनीर खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ वाला प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत है, इसलिए अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं तो नियमित रूप से पनीर खाना शुरू कर दें.

7. छुहारा

पौष्टिक तत्वों से भरपूर छुहारा आपके शरीर में रक्त बनाता है और इसे बढ़ाने में भी मदद करता है. रोज रात सोने से पहले, एक ग्लास दूध में छुहारे को उबाल कर उसे पीने से चर्बी बढ़ती है और शरीर स्वस्थ्य दिखाई देता है.

8. दालें और सब्जियां

मोटे होने की इक्षा रखने वाले लोगों को छिलके वाली उड़द की दाल, अंकुरित दाले, काले चने, मूंगफली, मटर, गाजर का रस, आंवला आदि का अधिक सेवन करना चाहिए. ये सभी वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ हैं.

9. सोयाबिन

सोयाबिन कैलोरी, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन बी और आयरन से भरपूर होता है. सोयाबिन एक ऐसा पदार्थ है, जो मोटापा बढ़ाने और कम करने दोनों काम करती है.

10. केला

कैलोरीज, कार्बोहाइड्रेट्ज और पोटेशियम आदि उर्जा के स्रोत केले में भरपूर मात्रा में होते हैं, अगर आप वाकई अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं तो रोजाना एक ग्लास गर्म दूध के साथ दो केले अवश्य खाएं.


क्या आपके जोड़ो में भी है दर्द!





ये बात तो आप जानते ही हैं कि शरीर के वे हिस्से जहां हड्डियां आपस में मिलती हैं, उन्हें ही जोड़ कहते हैं. जैसे घुटने, कंधे, कोहनी आदि-आदि. अगर शरीर के इन जोड़ों में कठोरता या सूजन जैसी किसी भी तरह की तकलीफ हो जाती है तो इससे आपको दर्द शुरू हो जाता है और इसे ही जोड़ों में दर्द होने की शिकायत कहा गया है. आजकल देखा गया है कि शरीर में जोड़ों के दर्द की समस्या एक आम सी समस्या बनती जा रही है और इस कारण से लगातार अस्पताल जाते रहने और दवा खाना की मजबूरी हो ही जाती है. 


एक बात जो आपके जाननी चाहिए कि


‘अर्थराइटिस’ की शिकायत, जोड़ों में दर्द होने का सबसे आम कारण है. पर इसके अलावा जोड़ों में दर्द होने की कई और भी अन्य वजहे होती हैं, जैसे कि लिगामेंट, कार्टिलेज या छोटी हड्डियों में से किसी की भी रचना में चोट लग जाने के कारण भी आपके जोड़ों में दर्द हो सकता है. ये शरीर का बहुत अहम हिस्सा होते हैं. इनके कारण ही आप उठना, बैठना, चलना, शरीर को मोड़ना आदि कर पाते हैं और ऐसा सब करना संभव हो पाता है. इसीलिए जोड़ों में दर्द होने पर पूरे आपके शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित हो जाता है. 


आज हम आपको जोड़ों में दर्द से जुडी कई महत्वपूर्ण बातें बताएंगे. इनके कारण जानने के बाद आप इनसे परहेज कर सकेंगे. यहां हम आपको जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए कुछ उपचार भी बता रहे हैं. इन्हें अपनाकर आप इस दर्द से जल्दी छुटकारा पा सकते हैं.


कारण : 


1. कई बार उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है. 


2. आपकी हड्डियों में जब रक्त की पूर्ति होने में रूकावट आती है तब भी जोड़ों में दर्द से तकलीफ होने लगती है. 


3. ये बात आप नहीं जैनते होंगे कि रक्त का कैंसर, जोड़ों में दर्द के लिए जिम्मेदार होता है. 


4. हड्डियों में मिनरल्स यानि की शरीर में खनिज पदार्थों की कमी हो जाने पर भी जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है. 


5. कभी-कभी, जल्दी-जल्दी चलने या भागने पर जोड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ जाता है और जोड़ों में दर्द शुरू हो तातो है. 


6. आपके जोड़ों में इंफेक्शन होना भी जोड़ों में दर्द का कारण है. 


7. कई बार तो मोच आ जाने और चोट लगने से भी एसी शिकायत हो जाती है. 


8. शरीर में कई बार हड्डियों के टूटने से जोड़ों में दर्द होता है. 


9. अगर आपको हड्डियों में ट्यूमर आदि किसी भी प्रकार की शिकायत है तो जोड़ों में दर्द होने की संभावना होती है. 


10. इनके अलावा अर्थराइटिस, बर्साइटिस, ऑस्टियोकोंड्राइटिस, कार्टिलेज का फटना, कार्टिलेज का घिस जाना आदि जोड़ों में दर्द की समस्या के प्रमुख

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 कारण हैं. 




निवारण : 


1. जोड़ों को चोट से बचाना चाहिए 


अगर जोड़ों पर चोट लगती है तो वो हड्डी को तोड़ भी सकती है, इसलिए कोशिश करें कि जोड़ों को चोट से बचाकर रख सकें. जब भी कोई ऐसा खेल खेलें जिसमें जोड़ों पर चोट लगने का डर रहता हो तब शरीर पर ज्वाइंट सेफ्टी पेड्स पहनकर रखें. 


2. गतिशील रहना चाहिए 


जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सदैव गतिशील रहें. अगर जोड़ों की मूवमेंट होती रही तो आपको लंबे समय किसी भी प्रकार का कोई दर्द नहीं सताएगा. बहुत देर तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से भी जोड़ों में कठोरता महसूस होती है. 


3. वजन को नियंत्रित रखना चाहिए 


यदि आपका वजन नियंत्रण में रहेगा तो आपका शरीर और शरीर के सारे जोड़ भी स्वास्थ्य रहेंगे. शरीर का ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है और इससे आपके शरीर के कार्टिलेज के टूटने का डर बना रहता है. अब ऐसे में आपको अपने वजन को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है. 


4. ज्यादा स्ट्रेच नहीं करना चाहिए 


अगर आप नियमित व्यायाम करते हैं तो, व्यायाम के साथ आपको स्ट्रेचिंग करने की भी सलाह दी जाती है, तब ये बात हमेशा ध्यान में रखें कि व्यायाम करते समय स्ट्रेचिंग हफ्ते में केवल तीन बार करें. स्ट्रेचिंग को एकदम शुरू नहीं करना चाहिए. ऐसा करने की जगह पहले थोड़ा वार्म अप भी करें. 


5. दूध पीएं 


दूध में कैल्श्यिम और विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो जोड़ों को मजबूत रखने के बेहद जरुरी होता है. इसीलिए हर रोज दूध जरूर पीना चाहिए. जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं. अगर आपको दूध पसंद नहीं है तो दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे पनीर, दही आदि. 


6. सही आसन बनाकर रखें 


जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए सही पोश्चर या आसन में उठना, बैठना और चलना बेहद आवश्यक है. आपका सही पोश्चर ही गर्दन से लेकर घुटनों तक शरीर के सभी जोड़ों की रक्षा करता है. 


7. व्यायाम करें 


जोड़ों के दर्द से निजात के लिए और अपने स्वास्थ्य की सही देखभाल के लिए आपको, व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए. तैराकी करना जोड़ों के दर्द के लिए सबसे फायदेमंद व्यायाम होता है. 
अब तनाव भूल जाइए

Healths Is Wealth

आज की बिगड़ती जीवनशैली और भागती जिंदगी में हर कोई किसी न किसी तनाव से गुजर रहा है. फिर चाहे ये तनाव मानसिक हो या कोई और. कभी कभी वो व्यक्ति जो तनावग्रस्त है उसे भी पता नहीं चलता और वह कब समस्या से ग्रसित हो गया. जब आपके मन में उलजुलूल या बिना मतलब की बातें घर कर लेती है और इससे एक नकारात्मक सोच उतपन्न होती है और यही बाद में आपके तनाव का कारण बनती है. 


तनाव दूर करने के लिए उपयोगी हैं ये योग

यदि आप लगातार और नियमित रूप से हमारे द्वारा बताए गए योग करते हैं तो आप तनाव से दूर रह सकते हैं. योग में कुछ खास अभ्यास ऐसे हैं जो आपको तनावमुक्त करेंगे. 


सुखासन

तनाव को दूर करने का एक अच्छा उपाय है सुखासन. योग की इस अवस्था को सरल भाषा में मेडिटेशन भी कहते हैं. इस योग से आप मानसिक और शारीरिक थकावट दोनों को आसानी से दूर कर सकते हैं. ध्यान लगाने की शुरुआत सुखासन की अवस्था से ही होती है. 


पश्चिमोत्तानासन

यह आसन विचलित मन को शांत रखने और तनाव से राहत पाने के लिए ही किया जाता है. इस एक आसन के करने से न केवल तनाव से मुक्ति मिलेती है बल्कि आपका शरीर भी स्वस्थ्य रहता है.


शवासन

इस आसन से मानसिक और शारीरिक थकावट के साथ साथ सिरदर्द और अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है. शवासन से आप अपनी मस्तिष्क की चेतना का विकास और कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं. इस एक आसन से तनाव में बहुत राहत मिलती है. इस आसन के जरिए आप शरीर को उस अवस्था तक पहुंचा देते हैं जहां तनाव नहीं होता. 


जानुशीर्षासन

जानुशीर्षासन योग को एक आसान आसन है. इस आसन से अवसाद, चिंता, थकान, सिर दर्द, और अनिद्रा में मदद मिलती है. तनाव की स्थिति में इस आसन को जरूर करना चाहिए. 


बालासन

बालासन शरीर और दिमाग की शांति के लिए किया जाने वाला सबसे अच्छा योग है. यह घुटनों और मासपेशियों को खींचता है और जकड़न से राहत देता है. इसके अलावा यह शरीर के भीतरी अंगों में लचीलापन लाता है, जिससे आप तनाव से दूर जाने लगते हैं.

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