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बहुत गुणकारी है अनार, रोजाना इसका सेवन करने से नहीं होते मुंहासे!






अनार में सैकड़ों लाल रंग के छोटे-छोटे रसहले दाने होते हैं। हेल्थ की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण फल है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरे साल उपलब्ध रहता है।
मुंहासों से बचाव:
रोजाना अनार खाने से पाचन तंत्र और हार्मोन सिस्टम दुरुस्त रहता है। इससे मुंहासे नहीं होते। अनार आयरन से भरपूर होता है। यह रक्त में ज्यादा ऑक्सीजन को एब्जॉर्ब करने की क्षमता बढ़ाता है। मुंहासों पर रोजाना अनार का रस लगाने से जल्दी ठीक हो जाते हैं।

अनार रखे शरीर को स्वस्थ:
विटामिन ए और सी से भरपूर अनार स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है, यह तो सब जानते हैं। यह न सिर्फ शरीर में रक्त संचार को दुरुस्त करता है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।


एंटीएजिंग:
अनार में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा काफी ज्यादा होती है। रेड वाइन और ग्रीन टी के मुकाबले इसमें 3 गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसमें टैनिन्स, एंथोस्यानिंस और एलर्जिक एसिड पाया जाता है। इस वजह से यह हमारी त्वचा के लिए बेहतरीन एंटी एजिंग का काम करता है। सूरज की किरणों से होने वाले नुकसान को भी यह 45 प्रतिशत तक कम करता है। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से त्वचा मुलायम बनती है।


चोट के दाग:
यदि किसी एक्सीडेंट की वजह से त्वचा पर कोई दाग बन गया है और हम इसे प्राकृतिक तरीके से कम करना चाहते हैं तो अनार बहुत काम की चीज है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलंबिया में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि अनार के बीजों का तेल, त्वचा के घाव और उनके निशानों को बहुत जल्दी ठीक करता है।

सेल रीजेनरेशन:
रोजाना अनार खाने से हमारी त्वचा की बाहरी परत यानी एपिडर्मिस के ऊपर एक सुरक्षा परत बनती है। यह एपिडर्मिस में नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को बढ़ाता है। यह रक्त संचार को तेज करने के साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाता है। इससे शरीर में मौजूद हानिकारक पदार्थ दूर होते हैं।

सूरज से बचाव:
अनार में धूप से सुरक्षा प्रदान करने वाले तत्व मौजूद होते हैं। ये फ्री रैडिकल्स से त्वचा को मुक्त रखते हैं। इससे त्वचा सनबर्न व टैनिंग से सुरक्षित रहती है और स्किन कैंसर से भी बचाव होता है। अनार के बीजों का तेल भी त्वचा को कैंसर से बचाता है।



अंगूर का फलों में बहुत महत्व ,अंगूर के रस से निखारिये अपनी सुंदरता








अंगूर का फलों में बहुत महत्व है क्योंकि इसमें शक्कर की मात्रा अधिक और ग्लूकोज़ के रूप में होती है. ग्लूकोज़ रासायनिक प्रक्रिया का नतीजा होने के कारण शरीर में तुरन्त सोख लिया जाता है. इसलिए अंगूर खाने के बाद आप तुरंत स्फूर्ति अनुभव करते हैं. अंगूर विटामिनों का भी सर्वोत्तम स्रोत हैं. विटामिन का सेवन खाली पेट ज़्यादा लाभदायक होता है इसलिए अंगूर का सेवन प्रात: काल श्रेयस्कर है.
अंगूर जैसे रसीले फल में हेल्दी गुणों की खदान छुपी होती है. इससे न सिर्फ कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स मिलता है बल्कि इसके सेवन से कई बीमारियां भी नजदीक नहीं आती.
अंगूर के साथ ही अंगूर का बीज भी बहुत फायदेमंद है. जहां ये याददाश्त को बेहतर बनाता है, वहीं कैंसर जैसी बीमारी को भी कंट्रोल करने में अहम् भूमिका अदा करता है. इसमें जिंक, सेलेलियम, कार्बोहाइड्रेट और पॉलिफिनोल्स बहुतायत में होते हैं. इससे ब्रेन एक्टिव रहता है. इसे नाश्ते के बाद और लंच के पहले खाना फायदेमंद है.
1. मस्तिष्क के लिए – हर फल का अपना फायदा है, लेकिन अंगूर ऎसा फल है, जो सीधा ब्रेन पर असर करता है. बच्चों को एक्जाम टाइम में अंगूर देने से उनका ब्रेन रिचार्ज होता है. बच्चों की याददाश्त में बढ़ोतरी होगी. अंगूर या इसके बीज का सेवन मस्तिष्क में एक ऎसे पदार्थ को बनने से रोकता है, जो याददाश्त को कमजोर करता है. साथ ही कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है.
2.ऊर्जा के लिए – अंगूर में मौजूद फाइबर आपको हमेशा एनर्जेटिक फील देगा. इससे पाचन क्रिया भी बेहतर होगी. ग्रीन के मुकाबले ब्लैक ग्रैप्स दोगुना असरदायक है.
3. मायग्रेन में – पके हुए अंगूर का रस मायग्रेन का घरेलू इलाज माना जाता है. अंगूर हृदय को स्वस्थ रखता है, साथ-साथ दिल की धड़कन और दिल के दर्द में भी लाभकारी पाया गया है. अच्छी मात्रा में थोड़े दिन अगर अंगूर का रस सेवन करे तो किसी भी रोग को काबू में लाया जा सकता है. हृदय रोगियों के लिए अंगूर का रस काफी लाभकारी हो सकता है.
4. किडनी में – अंगूर का महत्व पानी और पोटैशियम की प्रचुर मात्रा के कारण भी है. इसी तरह अलब्युमिन और सोडियम क्लोराइड की मात्रा कम होने के कारण ये गुर्दे की बीमारी में लाभकारी हैं. अंगूर गुर्दे और लीवर से पानी और विषैले तत्व बाहर निकालता है.
5. कब्ज में – इससे कब्ज़ की शिकायत भी दूर हो सकती है और पेट व आंत की बीमारियों में भी सुधार आ सकता सकता है. अच्छे नतीजे के लिए दिन में हर व्यक्ति को कम से 350 ग्राम अंगूर खाने चाहिए. अस्थमा या दमा जैसी बीमारियों में भी अंगूर का रस लाभकारी है.
1) Flavonoids अंगूर का रस में पाया
एचडीएल (अच्छा) के स्तर बढ़ा
कोलेस्ट्रॉल. इस रुकावट को रोकता है
धमनियों और दिल रहता है
स्वस्थ.
2) Resveratrol अंगूर का रस में पाया
ट्यूमर के गठन से बचाता है
शरीर में. तो इस रोकता
कैंसर. बैंगनी रंग का अंगूर का रस
स्तन कैंसर से बचाता है.
3) इस रस, स्तर पीने से
नाइट्रिक ऑक्साइड में वृद्धि हुई है
गठन को कम कर देता है जो शरीर
रक्त वाहिकाओं में थक्के. यह
दिल के दौरे की संभावना को कम कर देता है.
) 4 पीने अंगूर का रस दैनिक में मदद करता है
रक्तचाप कम करने में.
) 5 अंगूर का रस विरोधी बुढ़ापे
गुण और यह भी करने में मदद करता है
वजन कम.
6) अंगूर में मौजूद एंटी
रस मरम्मत क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और
भी उन्हें आगे से रोकने के लिए
नुकसान होता है.
7) खांसी और अम्लता दूर रहना
व्यक्ति जो पेय से
नियमित रूप से अंगूर का रस.
8) सुबह में अंगूर का रस लेना
चीनी helpsin क्यूरिंग बिना
माइग्रेन. यह एक अच्छा घर उपाय है
माइग्रेन के लिए.
9) अंगूर का रस इलाज रक्त विकार
और खून की एक बहुत अच्छा शुद्ध है.
से यह हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर flushes
शरीर.
10) अंगूर का रस भी इलाज
कब्ज की समस्या के रूप में यह एक के रूप में कार्य करता है
रेचक अच्छा है.
11) लाल रंग का अंगूर का रस
मजबूत antiviral और जीवाणुरोधी
गुण. तो यह से बचाता है
अलग संक्रमण.
12) अंगूर का रस के लिए पाया गया है
अस्थमा में बहुत प्रभावी हो
अपने प्रमुख कारण इलाज
चिकित्सकीय मूल्य.
13) अंगूर में मौजूद एंटी
रस उम्र बढ़ने को रोकने में मदद कर सकते हैं
अल्जाइमर जैसे संबंधित समस्याओं
रोग.
14) बैंगनी अंगूर का रस में मदद करता है
atherosclerosis लड़ रहे थे.
15) अंगूर में मौजूद एंटी
रस प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा.

केले के औषधीय गुण ,केले के फलों में एंटेसिड प्रभाव पाया जाता है जो सीने की जलन को दूर करता है





केले का पेड़ आपने और हमने सभी ने देखा होगा I राह चलते या बगीचे में इसके 20-25 फीट की लम्बाई के पेड़ अक्सर हमारा ध्यान खींचते हैं I इसके फलों में पाए जानेवाले स्टार्च की अधिकता इसकी भोजन में उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देती हैं I केले की कई प्रजातियाँ अपने फलों के अलग-अलग आकार के लिये जानी जाती हैं I केवल इतना ही नहीं केले में कई अदभुत गुण पाए जाते हैं जो इसके औषधीय गुणों के रूप में प्रयोग में लाये जाते हैं I शायद इन्ही कारणों से यह जानवरों विशेषकर बंदरों और हाथियों को अत्यंत प्रिय है I
आईये अब हम केले के औषधीय गुणों की चर्चा करते हैं :-
-केले के फलों में उच्च मात्रा में पाया जानेवाला आयरन (लौह तत्व ) रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ा देता है साथ ही एनीमिया के लिए इसे अच्छी औषधि माना गया है I
-केले के फलों में एक ख़ास गुण पाया जाता है जो हमारी आँतों की गति को नियंत्रित रखता है जिस कारण इसका इस्तेमाल डायरीया से लेकर कब्ज दोनों ही स्थितियों में किया जा सकता है I
-यदि आप थकान से पीड़ित हो तो बस एक बनाना-शेक शहद के साथ लेना आपको स्फूर्ति प्रदान करता है I
-केले के फल पोटेशीयम के अच्छे स्रोत है जो विद्यार्थियों को एलर्ट रखने में मददगार होते हैं, इसलिए इसे ब्रेन-टोनिक भी कहा जाता है I
-उच्चरक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए केले के फल को नाश्ते के रूप में लेना नमक की मात्रा को नियंत्रित रखने में मददगार होता है I
-जो लोग अवसाद से ग्रसित होते हैं उनके लिए केला के अद्भूत प्राकृतिक रसायन से युक्त औषधि है , जिसमें सीरेटोनिन नामक प्रोटीन पाया जाता है जिसे “हेप्पी-हारमोन” भी कहा जाता हैं यह तनावमुक्त एवं खुशी प्रदान करनेवाला हारमोन है I
-अल्सर से पीड़ित रोगियों के लिए केले का फल एक अच्छे औषधि के रूप में काम करता है ,यह एसिड को नीयुट्रलाइज कर देता है तथा इसके कोमल और मुलायम फल पेट को नुकसान भी नहीं पहुंचाते है I
– केले के फलों को नियमित सेवन कर धुम्रपान भी छोडा जा सकता है क्यूंकि इसके फलों में पाए जानेवाले विटामिन-सी,ए,बी-6 एवं बी-12 तथा पोटेशीयम एवं मेगनीशीयम निकोटीन विदड्रोल के लक्षणों से मुकाबला करने में शरीर की मदद करते हैं I
-केले के फलों में एंटेसिड प्रभाव पाया जाता है जो सीने की जलन को दूर करता है I
-केले के फलों में पाया जानेवाला पोटेशियम ह्रदय गति को सामान्य कर देता है और शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित रखता है I
-वजन को नियंत्रित रखना हो तो नाश्ते में केले के फल का सेवन अत्यंत लाभकारी है ,विभिन्न शोधों के अनुसार अत्यंत तनाव की स्थिति में भी केले का फल आपके शरीर में रक्तगत शर्करा को नियंत्रित रखता है I
-पके केले के फल का प्रयोग चेहरे पर मोईसचराइजर के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है I
-केले के तने भी बड़े उपयोगी होते हैं इसके अन्दर वाले मुलायम हिस्से को काटकर साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में दही या मख्खन युक्त दूध में पकाकर खाया जा सकता है , दक्षिण भारत में इसे चावल के साथ खाने का चलन है I
-केले के फलों के गुच्छों के अंत में मिलनेवाले फूल भी बड़े ही उपयोगी होते हैं इनका प्रयोग सब्जियों के रूप में किया जाता है ,इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन,फ्लेवनोइड एवं प्रोटीन पाए जाते हैं ,इसका प्रयोग ब्रोकाईटीस,कब्ज एवं अल्सर की चिकित्सा में किया जाता है, यह स्त्रियों में मासिक धर्म की पीड़ा को भी दूर करता है Iइसके फूलों से प्राप्त एक्सट्रेक्ट एंटीआक्सिडेंट गुणों से युक्त होते हैं जो फ्री-रेडिकल द्वारा होने वाले शारीरिक नुकसान से शरीर की रक्षा करते हैं I
-केले के पत्ते भी बड़े ही उपयोगी होते हैं इसका प्रयोग खाने में थाली के रूप में किया जाना तो सर्वविदित ही है जो स्वछता के साथ खाने के स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है I
ऐसे ही अनेक गुणों से भरपूर हैं केले का वृक्ष जिसके पंचांग हमारे लिए किसी न किसी रूप में उपयोगी है !

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