Header Ads

WOMEN’S HEALTH


महिलाएं सर्दियों में उन दिनों की तकलीफ, ऐसे करें कम

Healths Is Wealth





सर्दियों में मासिक धर्म अधि‍क तकलीफदेह हो सकता है। इन दिनों में ठंड के कारण सूजन और पहले से ज्यादा दर्द और ऐंठन की समस्या होना स्वभाविक है। इन समस्याओं से बचने के लिए यह विशेष उपाय आपके लिए काफी मददगार होंगे। जानिए कौन से हैं वे उपाय।





1. सर्दी के दिनों में ठंड के कारण पेट में दर्द की समस्या अधि‍क होती है और कभी-कभी स्त्राव (secretion) भी ठीक से नहीं होता। इसके लिए मासिक धर्म की शुरुआत में ही गर्म पानी पीना या फिर अन्य गर्म पेय पदार्थ का सेवन सबसे अच्छा उपाय है। इससे दर्द में तुरंत आराम होगा और स्त्राव (secretion) भी ठीक होगा।

2. ठंड के कारण इन दिनों में चेहरे और शरीर के बाकी हिस्सो पर अंगों में सूजन जैसी समस्या भी हो जाती है। इसके लिए शरीर को गर्म बनाए रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल और ठंडी चीजों से बचना फायदेमंद रहेगा।


3. पेट पर गर्म पानी की थैली या bottle रखकर सिकाई करने से दर्द तुरंत कम हो सकता है। अदरक वाली चाय का सेवन काफी फायदेमंद होगा। साथ ही दिन में दो से तीन बार Green tea पीना भी काफी लाभ देगा। इससे प्रतिरोधक क्षमता (immunity) भी बढ़ेगी और शरीर में नमी व तरलता भी बनी रहेगी।


4. महिलाओ को इन दिनों में कई बार चिड़चिड़ाहट के साथ खान-पीन में भी रूचि नहीं होती है, लेकिन इस समय खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खाली पेट बिल्कुल भी न रहें, इससे पेट में गैस बनेगी जो अधि‍क तकलीफदेह हो सकती है।

5. पेट में गैस पैदा करने वाली चीजों से दूर रहें और हल्का व पौष्ट‍िक भोजन लें। जितना हो सके अधि‍क पानी पिएं जिससे शरीर के सारे हानिकारक तत्व बाहर निकल सकें। हल्का फुल्का व्यायाम कर सकती हैं। इसके अलावा aroma therapy आपकी चिड़चिड़ाहट कम होकर मूड ठीक रहेगा।

नॉर्मल डिलीवरी के लिए टिप्स




Healths Is Wealth

गर्भावस्था (pregnancy) एक खुशखबरी भरा लेकिन साथ हीं चुनौतियों भरा समय भी होता है। Operation से बच्चे के जन्म के बाद, जहाँ माँ को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, वही माँ को बहुत सारी बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है। सिजेरियन डिलिवरी (cesarean delivery) के बाद निर्देशों का पालन न करना माँ के लिए खतरा भी बन सकता है। जबकि normal delivery से स्त्री का शरीर भी ठीक रहता है और माँ को कम खतरों का सामना करना पड़ता है। और normal delivery के बाद महिलाएँ जल्दी हीं recover हो जाती है। साथ हीं अगली बार गर्भवती (pregnant) होने पर भी बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। आइए जानते हैं कुछ उपाय, जिन्हें अपनाने से आपकी normal delivery होने की सम्भावनाएं बढ़ जाएगी। जिससे आपके शरीर को कम कष्टों का सामना करना पड़ेगा, और आपके पैसे भी बचेंगे। Read Tips for Normal Delivery in Hindi (Normal Delivery ke liye Tips).



Normal Delivery के लिए कुछ फायदेमंद टिप्स

प्रसव पीड़ा (labour pain) को सहने करने के लिए यह जरूरी है कि शरीर में खून की बिल्कुल भी कमी न हो। किसी अच्छे doctor की देख-रेख में यह सुनिश्चित करें कि आपके शरीर में खून की पर्याप्त मात्रा है या नहीं। अगर आपके शरीर में खून की कमी है तो, doctor की सलाह से खून बढ़ाने वाली दवाइयाँ लें। साथ हीं खानपान में भी जरूरी सुधर लाएँ।

ताजे फल, iron, calcium, vitamin तथा protein युक्त भोजन करें। समय पर खाना खाएँ। ताजे साग-सब्जियाँ, फल इत्यादि को अपने भोजन में शामिल करे जरुर करें।

एक गर्भवती (pregnant) महिला को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, रोज़ 10-12 गिलास पानी जरुर पिएँ।

पैदल चलना और टहलना एक गर्भवती (pregnant) महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए आसपास कहीं भी आने-जाने के लिए पैदल आना-जाना करें।

Doctor के निर्देश के अनुसार उन व्यायामों को जरूर करें जो एक गर्भवती (pregnant) महिला को करने चाहिए। अपने मन से यह निकाल दें की व्यायाम करना आपके लिए खतरनाक है। नियमित व्यायाम करने से आपकी मांसपेशियाँ मजबूत और लचीली होती है। साथ हीं व्यायाम दर्द सहने की क्षमता भी बढ़ाता है। जिससे normal delivery की सम्भावनाएँ बढ़ जाती है।

हर दिन पर्याप्त मात्रा में नींद लें। नियमित रूप से अपने शरीर की मालिश (massage) करते रहें।

तनाव से बचने की कोशिश करें, और इधर-उधर के बेकार की बातों के कारण चिंतित न हों।

आपका स्वस्थ्य रहना आपके होने बच्चे के लिए बहुत जरूरी है।

इस बात को न भूलें कि शरीरिक रूप से सक्रिय रहे बिना normal delivery बिल्कुल भी सम्भव नहीं है।

गर्भ ठहरने बाद से हीं किसी अच्छी महिला डॉक्टर (gynecologist) के सम्पर्क में रहें और उन चीजों का पालन करें जो एक गर्भवती (pregnant) महिला को करनी चाहिए।
Normal delivery एक माँ के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। एक बात बिल्कुल न भूलें कि आप एक बच्चे को जन्म देने जा रही हैं, इसके लिए आपको शरीरिक और मानसिक रूप से मजबूत और स्वस्थ रहना होगा। अगर आप गर्भ ठहरने के तुरंत बाद से खुद को पूरी तरह से आराम की आदि बना देंगीं, तो normal delivery की सम्भावना काफी हद तक कम हो जाएगी।
गर्भ ठहरने के लक्षण





अगर आपने अभी हाल हीं में बिना गर्भनिरोधक (Contraceptive) या बिना condom के sex किया है, तो आप गर्भवती (pregnant) हो सकती हैं। आपमें आने वाले कुछ बदलाव यह बता देंगे कि गर्भ ठहरा है या नहीं। अगर आप अपनी इच्छा से गर्भवती (pregnant) हुई हैं, तो यह आपके लिए अच्छी खबर है। गर्भवती (pregnant) होने पर एक स्त्री के शरीर, मन और Mood में कई बदलाव आते हैं। आइए जानते हैं गर्भवती (pregnant) होने के लक्षण क्या हैं। Read Symptoms of Pregnancy in Hindi (Garbhwati Hone ke Lakshan).

Symptoms of

गर्भवती होने के सामान्य लक्षण

वैसे Period असमान्य अवस्था में भी बंद हो जाते है। लेकिन अगर आप पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं और आपके periods नहीं आए हो तो यह आपके गर्भवती (pregnant) होने का एक लक्षण है।

कुछ स्त्रियाँ जब गर्भवती (pregnant) हो जाती है, तो उनके स्तनों (breast) से दूध का रिसाव शुरू हो जाता है। स्तनों (breast) से दूध का रिसाव गर्भ ठहरने का एक लक्षण है। स्तन (breast) भारी और थोड़े बड़े हो जाते हैं।

गर्भ ठहरने पर nipples चौड़े और थोड़े बड़े हो जाते हैं और स्तन (breast) भी बड़े होने लगते हैं। Nipples का रंग गाढ़ा होने लगता है। स्तनों (breast) में सूजन महसूस होने लगती है, उन्हें हल्का सा भी दबाने से दर्द होने लगता है।

गर्भधारण करने के बाद गर्भावस्था (pregnancy) के शुरूआती 3 महीनों में sex करने की इच्छा बढ़ जाती है। इस दौरान कुछ सावधानियों के साथ sex किया जा सकता है।

खट्टी या चटपटी चीजें खाने की बहुत ज्यादा इच्छा होने लगती है। हमेशा कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती है।

गर्भवस्था (pregnancy) के पहले 3 महीने में बार-बार पेशाब जाना, गर्भ ठहरने का एक लक्षण है।

थोड़ा-बहुत काम करने पर बहुत ज्यादा थकान होना, या अनावश्यक चिड़चिड़ापन भी गर्भावस्था (pregnancy) में एक सामान्य बात है।

खानपान में बदलाव किए बिना उल्टी या बदहजमी होना, गर्भ ठहरने का एक बड़ा लक्षण है।

गर्भाशय (uterus) में ऐथन और पेट में Periods के दौरान जैसी पीड़ा होती है। दर्द तो ठीक है, लेकिन अगर योनी (vagina) से खून आए तो doctor से जरुर संपर्क करे।

Period में ज्यादा रक्त आना (heavy bleeding) भी गर्भवती (pregnant) होने का लक्षण है। गर्भवस्था (pregnancy) में आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और कुछ खास चीजों का पालन करना चाहिए। इस बात कि पूरी जानकारी जुटानी चाहिए कि खानपान से लेकर आपके विचारों तक का होने वाले बच्चे पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

अगर आप न चाहते हुए गर्भवती (pregnant) हो गईं हैं, तो आपको गर्भपात (abortion) के घरेलू नुस्खों को आजमाना चाहिए।

गर्भनिरोधक गोलियों के साइड इफेक्ट क्या हैं?


Healths Is Wealth









गर्भनिरोधक दवाइयां गर्भावस्था को रोकने के लिए हैं। इन गोलियों को मौखिक गर्भ निरोधक दवाइयां भी कहा जाता है। मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों (Oral contraceptive pills) में hormone estrogen और progesteron का संयोजन हो सकता है या केवल progesteron हो सकता है। वे मस्तिष्क में pituitary gland से hormone को छोड़कर गर्भ को रोकने में मदद करते हैं। Read Effects of Contraceptive Pill in Hindi (Contraceptive Pill ke Effects).

Effects of Contraceptive Pill in Hindi

(Contraceptive Pill ke Effects)

गर्भनिरोधक गोलियां के प्रकार (Types of Contraceptive Pills)

गर्भनिरोधक गोलियां के विभिन्न प्रकार के होते हैं जिन्हें “monophasic”, “biphasic” और “triphasic” भी सम्बोधित किया जाता है।

मिनी गोलियों को monophasic भी कहते हैं जो केवल progesteron hormone को शामिल करते हैं। यह सामान्य रूप से स्तनपान (breast feeding) करा रही महिलाओं के लिए या estrogen के प्रभाव को सहन नहीं कर रही महिलाओं के लिए है। प्रतिदिन इसका उपयोग अंडों के उत्सर्जन (Emissions) को रोकता है। ये मानक गर्भनिरोधक गोलियां (standard contraceptive pills) से भी कम प्रभावी है।

गोलियों की अच्छाइयां और बुराइयां (Advantages and Disadvantages of Contraceptive Pills)

अच्छाइयां (Advantages of Contraceptive Pills)

यदि किसी को हृदय रोग, रक्त के थक्के (blood clots), सिरदर्द या हाई ब्लड प्रेशर की स्वास्थ्य समस्या हो तो मिनी गोलियाँ ली जा सकती है।

यह स्तनपान (breast feeding) के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह प्रजनन (reproduction) के लिए पुन: तैयार कर देता है जब आप चाहें।

बुराइयां (Disadvantages of Contraceptive Pills)

यौन संचरित संक्रमणों (Sexually transmitted infections) से कोई सुरक्षा नहीं है।

यह गर्भनिरोधक गोलियां से कम प्रभावी है।

यह रोज़ एक ही समय पर ली जानी चाहिए।

दुष्प्रभाव अनियमित माहवारी रक्तस्राव (bleeding), डिम्बग्रंथि अल्सर (Ovarian Cysts), सिर दर्द, स्तन कोमलता (breast tenderness), मुँहासे, वजन और अवसाद शामिल करता है।

बहुअवस्था गोलियाँ biphasic, triphasic और quatraphasic के रूप में भी जानी जाती है। वे hormone estrogen और progesteron दोनों का संयोजन हैं। वे चक्र के चरणों पर निर्भर करते हैं। अधिकांश बहु चरण गोली चक्र में सात hormone मुक्त होते हैं। वे गर्भाशय (Uterus) की पतली दीवारों को अधिक मोटा करते हैं और गर्भाशय (Uterus) से अंडों के उत्सर्जन को रोकते है।

अवस्था गोलियों का पक्ष और विपक्ष

पक्ष (Favor)

Ovarian और Endometrial cancer का खतरा कम हो जाता है।

गंभीर मासिक धर्म ऐंठन कम होता है।

मुँहासे में सुधार होता है।

Menopause के बाद संभव Hip fracture जोखिम रोकता है।

भारी रक्तस्राव (bleeding) कम होता है और संबंधित anemia में मदद करता है।


विपक्ष (Against)

यह यौन संचरित संक्रमणों (Sexually transmitted infections) के विरुद्ध कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता।

रक्त के थक्के (blood clots), दिल के दौरों और stroke का खतरा बढ़ता है।

अनियमित रक्तस्राव (bleeding), सूजन, मिचली और सिरदर्द, स्तन कोमलता (breast tenderness) जैसे दुष्प्रभाव होते है।

गोलियाँ कैसे प्रभाव डालती हैं? (Effects of Contraceptive Pills)

कोई गर्भनिरोधक गोली, अंडों के उत्सर्जन (Emissions) को रोकती है। प्रत्येक महिला की प्रजनन प्रणाली (reproductive system) अलग होने के कारण, मौखिक गर्भ निरोधकों का अनुभव अलग हो सकता है।

गर्भनिरोधक गोलियां के Side Effects (Side Effects of Contraceptive Pills)

कुछ सामान्य दुष्प्रभाव जैसे हल्का खून बहना या मासिक धर्म के बीच में दाग, कोमल स्तन, मिचली,और वजन बढ़ना शामिल हैं। इसलिए डॉक्टर side effect की वजह से छोड़ने से पहले 3 से 6 महीने के लिए गोलियाँ को जारी रखने की सलाह देते है।

जिन महिलाओं को हृदय की समस्याएं जैसे stroke, खून के थक्के (blood clots) या जिन्हें जिगर या breast cancer हो उन्हें संयोजन गोलियां नहीं लेनी चाहिए।

मौखिक गर्भनिरोधक एंटीबायोटिक (Oral contraceptive pills) दवाइयों और HIV दवाइयों के साथ हस्तक्षेप कर सकते हैं।

गर्भनिरोधक गोलियां की सलाह दी जाती है (Advise of Contraceptive Pills)

आमतौर पर ये गोलियां गर्भावस्था को रोकने के लिए दी जाती हैं।

ये उन दर्दों के इलाज के लिए भी दी जाती है जो मध्य-चक्र के दौरान महिलायें अनुभव करती हैं।

गर्भनिरोधक गोलियाँ (contraceptive pills) मासिक धर्म चक्र (mensuration cycle) को नियमित करने में मदद करती हैं।

यह मासिक धर्म ऐंठन और भारी रक्तस्राव (bleeding) को कम करने में मदद करता है।

गोलियां कुछ महिलाओं में anemia को रोकने में मदद करते हैं।

इस गोली कभी कभी की उच्च खुराक की सलाह दी जाती है। यह गर्भावस्था (pregnancy) को रोकने के लिए असुरक्षित संभोग के 72 घंटे बाद ली जा सकती है।

जन्म नियंत्रण के लिए कई विकल्प हैं। किसी को भी सही प्रकार के गर्भ निरोधक (Contraceptive) का चयन doctor के परामर्श के आधार पर करना चाहिये।

घरेलू नुस्खों से गर्भपात के तरीके





जहाँ गर्भ धारण (conceive) करना एक सुखद एहसास है, वहीं कई बार गर्भपात (abortion) करना भी जरूरी हो जाता है। असुरक्षित सम्भोग (sex) के बाद गर्भपात (abortion) घर में भी किया जा सकता है, लेकिन सावधानियों के साथ। तो आइए जानते हैं, गर्भ गिराने के घरेलू उपाय। जिन्हें आजमाकर अनचाहे गर्भ को गिराया जा सकता हैं। Read Home Remedies for Abortion in Hindi (Gharelu Nuskho se Abortion ke Tarike).



गर्भपात के घरेलू नुस्खे

बाजार में कुछ गर्भनिरोधक गोलियाँ (contraceptive pills) आती है, जिन्हें आई-पिल (i-pill) कहते हैं। इन्हें सम्भोग (sex) के 72 घंटे के भीतर खाने से गर्भ ठहरने की सम्भावना खत्म हो जाती है। ध्यान रखें इन गोलियों के ज्यादा उपयोग से भविष्य में गर्भ ठहरने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इन गोलियों का ज्यादा उपयोग, स्त्री के शरीर के लिए भी ठीक नहीं है। अगर आप पहले से गर्भवती (pregnant) हैं तो इस दवा का उपयोग न ही करें।

घरेलू गर्भपात (abortion) का तरीका तभी काम करता है, जब गर्भ 1 या 2 महीने का ही हो। जब गर्भ इससे ज्यादा महीने का हो जाए, तो doctor से हीं गर्भपात (abortion) करवाना सही होता है।

अगर गर्भपात (abortion) करना ही है तो शुरूआती महीनों में ही कर ले। ज्यादा माह के गर्भ को गिराना खतरनाक हो सकता है।

ज्यादा इलायची खाने से गर्भपात (abortion) की सम्भावना बढ़ जाती है। ध्यान रखें कि रात में इलायची नहीं खानी चाहिए।

अधिक मात्रा में बाजरा खाने से गर्भ गिरने की सम्भावना बढ़ जाती है।

Vitamin C से युक्त खाना ज्यादा खाने से गर्भपात (abortion) की सम्भावना बढ़ जाती है।

कच्चे पपीते और कटहल गर्भ गिराने में बहुत मदद करता है।

गर्म पानी से रोज नहाना से गर्भपात (abortion) में मददगार होता है।

भूने हुए तिल को शहद के साथ खाएँ, यह भी गर्भपात (abortion) के लिए मददगार साबित होगा।

असुरक्षित सेक्स (sex) करने के तुरंत बाद स्त्री का खड़ा हो जाना चाहिए तथा योनी (vagina) की तुरंत अच्छे से सफाई करने से भी pregnant होने का खतरा कम हो जाता है।

लहसून की 2 कली खाएँ, यह गर्भपात (abortion) में मदद करेगा।

सीता फल के बीज को पीसकर योनी पर कुछ दिनों तक अच्छी तरह से मलें, इससे अनचाहा गर्भ नहीं ठहरेगा।

2-4 दिनों तक तुलसी के पत्ते का काढ़ा पिएँ।

ज्यादा व्यायाम और उछल-कूद गर्भ गिराने में मददगार होता हैं।

असुरक्षित यौन सम्बन्ध (sex) बनाने के बाद कुछ दिन तक स्त्री लगातार 1-2 बार का हस्तमैथुन करे।


अगर इन तरीकों को आजमाने के बाद आपके Period आ जाए, तो समझ जाइए कि गर्भ (pregnancy) का अब कोई खतरा नहीं है।


याद रखें जहाँ तक सम्भव हो, sex के दौरान condom का उपयोग करें। क्योंकि बार-बार गर्भपात (abortion) करना बाद में pregnant होने में दिक्कत कर सकता है। यह गर्भाशय (uterus) को कमजोर कर देता है।

गर्भवती होने के आसान तरीके




हर स्त्री के लिए माँ बनना उसके जीवन का सबसे सुखद एहसास होता है। लेकिन कई बार हमारी आदतें गर्भ ठहरने (pregnancy) में बाधा उत्पन्न करती हैं। तो आइए जानते है कहीं आप भी किसी ऐसी आदत के शिकार तो नहीं, जो आपको सन्तान सुख पाने से रोक रही हो।

गर्भवती होने के आसान तरीके : Read Tips to Get Pregnant in Hindi (Pregnant Hone ke Nuskhe).

Tips to Get Pregnant in Hindi

(Pregnant Hone ke Nuskhe)

Period शुरू होने वाले दिन से चौथी रात से 16वीं रात तक में Sex करने से गर्भ ठहरने की सम्भावना बढ़ जाती है।

तनावमुक्त रहना गर्भ ठहरने (pregnancy) के लिए बहुत जरूरी है। तनाव Sex का मजा तो किरकिरा करता हीं है, साथ हीं यह गर्भ ठहरने (pregnancy)में भी दिक्कत पैदा करता है।

अक्सर शारीरिक सम्बन्ध बनाना (sex) गर्भ ठहरने (pregnancy) में मददगार होता है।

Sex करने के बाद लिंग (penis) को योनी (vagina) से तबतक बाहर ना निकाले, जबतक वह खुदबखुद बाहर ना आ जाए।

स्त्री को sex करने के 15-20 मिनट बाद तक पीठ के बल लेती रहे। योनी (vagina) को रात में ना साफ करें, योनी (vagina) को अगली सुबह हीं साफ करें।

लिंग (penis) और अंडकोष (testicles) को गर्म पानी से ना धोएँ। Laptop को जांघ में रखकर काम ना करें।

Bathtub में गर्म पानी से bath ना लें। लिंग (penis) का गर्म पानी से सम्पर्क शुक्राणुओं (sperms) के लिए अच्छा नहीं होता है।

किसी भी तरह का ज्यादा या थोड़ा नशा ना करें। नशा sex क्षमता को कम कर देता है।

योनी (vagina) को गीला करने के लिए, Gel या कोई तरल पदार्थ न लगाएँ, sex के दौरान योनी खुद गीली हो जाती है। योनी खुद- गीली हो, इसके लिए sex से पहले स्त्री को पूरी तरह उत्तेजित करे।

अगर गर्भवती (pregnant) होना चाहती हैं, तो गर्भ रोकने या गर्भ गिराने वाली दवाईयों (contraceptive pills) का प्रयोग न करे। अन्य दवाओं का प्रयोग भी न करें। दवाईयों को बंद करने के बाद भी गर्भ ठहरने में समय लगता है।

फल, सब्जियाँ, साग, दाल, इत्यादि का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। Protein और vitamin युक्त भोजन करें।

2 दिन के बीच में शारीरिक सम्बन्ध (sex) बनाएँ, इससे sperms की Quality बढ़ जाती है।

नियमित व्यायाम कर शरीर को Active रखें।

पुरुष, स्त्री के ऊपर रहे, ऐसी Position में Sex करें।

एक हीं दिन में 2-3 बार शारीरिक सम्बन्ध (sex) बनाएँ।

सेक्स Power बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन न करें। प्यार हो तो उत्तेजक दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

वजन कम करें।

पति-पत्नी के बीच प्यार न हो तो भी गर्भ ठहरने (pregnancy) में दिक्कत आती है। क्योंकि इस स्थिति में sex तो होता है, लेकिन शरीर की अनिक्षा गर्भ ठहरने नहीं देती।

कुछ दिनों की छुट्टी ले कर काम और परिवार के तनाव से दूर रह कर sex करने से गर्भ ठहरने में मदद मिलती है।

लिंग (penis) या योनी (vagina) के बालों को Remove ना करें, ये sperms को जीवित रखने में मददगार होते हैं। बस इनकी नियमित सफाई करे।

थोड़ा धैर्य रखे, कुछ लोगों के गर्भ ठहरने में समय लगता है। अगर इन उपायों को आजमाने के बाद भी नहीं ठहरता है तो किसी अच्छे doctor की सलाह लें। भूल कर भी किसी नीम-हकीम के के पास न जाए।


इस बात की पूरी सम्भावना है कि इन सब उपायों को आजमाने के बाद कुछ महीनों में हीं आप गर्भवती हो जायेंगी। हमें उम्मीद है कि आपकी उलझन जल्दी हीं सुलझ जाए।

जल्दी होने वाले मासिक धर्म के घरेलू उपचार






मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) उन परिवर्तनों को कहते हैं जो एक उम्र के बाद हर महिला के शरीर में होते हैं। इसके अंतर्गत रक्तपात (bleeding) तब होता है जब गर्भावस्था (pregnancy) को शुरू करने के लिए कोई उर्वर अंडा (fertilized egg) नहीं रह जाता। मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) महिलाओं में 14 वर्ष के आसपास प्रारम्भ होता है और 50 वर्ष तक चलता है। यह एक चक्र (cycle) होता है जो रक्तपात (bleeding) होने के प्रथम दिन से अगली बार रक्तपात (bleeding) होने के प्रथम दिन तक चलता है जो आमतौर पर 28 दिन का होता है। Read about Early Menstrual Cycle in Hindi (Jaldi Hone Wale Menstrual Cycle).


मासिक धर्म (mensuration) एक महिला के जीवन में काफी सामान्य होते हैं, अगर ये चक्र निर्धारित समय तक शुरू नहीं होता तो ये महिलाओं के लिए चिंता का विषय बन जाता है। इसका कारण गर्भावस्था (pregnancy) या प्रज्ञान प्रणाली (reproductive system) में आई अन्य कोई गड़बड़ी हो सकती है।



जल्दी होने वाला मासिक धर्म
ज़्यादातर महिलाओं अपने जीवन में जल्दी होने वाला मासिक धर्म (mensuration) किसी न किसी समय में अनुभव किया होगा। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। Menopause के समय ये समस्या सामान्य होती है। कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं जैसे anemia जल्दी होने वाले मासिक धर्म (mensuration) के कारण हो सकता है। 23 दिनों के पहले इस चक्र (cycle) का पूरा होना इस बात का संकेत देता है कि अंडा ठीक तरह से बढ़ा नहीं हुआ है और ठीक तरह से छोड़ा भी नहीं गया है। ऐसी स्थिति होने पर पहले अपने doctor से सलाह करें।


जल्दी होने वाले मासिक धर्म के कारण (Causes of Early Mensuration)

जल्दी होने वाले मासिक धर्म (mensuration) के कारणों को 2 भागों में बांटा जा सकता है : शारीरिक (physical) और मानसिक (physiological)।

मानसिक (Physiological) कारण
मानसिक (physiological) कारणों के अंतर्गत तनाव, बेचैनी, थकान और कमज़ोरी मुख्य है। ये सारे कारक hormones का अंदरूनी नियंत्रण खराब करते हैं जो कि जल्दी हुए मासिक धर्म (mensuration) का कारण बनता है।

शारीरिक (Physical) कारण


Estrogen और progesterone hormones ovary, Pituitary gland तथा मस्तिष्क के hypothalamus में निकलते हैं। ये hormones ही सामान्य मासिक धर्म (mensuration) होने के पीछे के मुख्य कारक हैं। वज़न का घटना या बढ़ना, ज़्यादा व्यायाम आदि कारणों से ये hormones समय से पहले भी निकल सकते हैं और मासिक धर्म (mensuration) के समय में फेरबदल कर देते हैं।



जल्दी होने वाले मासिक धर्म के लिए घरेलू उपाय

Remedies to Avoid Early Menstrual Cycle


ज़्यादातर मामलों में जल्दी मासिक धर्म (mensuration) होने से कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आती और ये कुछ cycle पूरे करते ही सामान्य हो जाते हैं। इस समस्या का सामना करने के कई तरीके हैं। कुछ घरेलू नुस्खों का प्रयोग कर के आप चैन की सांस ले सकती हैं।

जीवनशैली में परिवर्तन (Change in Lifestyle to Avoid Early Menstrual Cycle)

योग एवं ध्यान का सहारा लें कर आप तनाव और बेचैनी को दूर कर सकती है। तनाव और बेचैनी मासिक धर्म (mensuration) के समय में परिवर्तन के कारक हो सकते हैं।

खानपान में परिवर्तन (Change in Diet to Avoid Early Menstrual Cycle)


जैविक भोजन, गेहूं, चावल, सोयाबीन और जामुन को खानपान में शामिल करें क्योंकि ये estrogen बनाने में आपकी सहायता करते हैं। तले हुए और डिब्बाबंद खानों से दूर रहें, ये पचने में मुश्किल होते हैं।

काले कहोश नमक जडीबुटी में पौधों से लिए गए estrogen की मात्रा होती है। यह जल्दी हुए मासिक धर्म (mensuration) का एक अच्छा उपचार है।

जल्दी होने वाले चक्र (cycle) को सामान्य करने के लिए गूसबेरी और बरबेरी सक्षम हैं।

Vitamin C युक्त भोजन करने से महिलाओं में estrogen की मात्रा बढ़ाती है।

गर्म पानी से नहाना या hot pack, जल्दी मासिक धर्म होने का कारण हो सकता है।

स्वास्थवर्धक खानपान, नियमित व्यायाम और एक तनाव मुक्त मस्तिष्क, मासिक धर्म (mensuration) को सामान्य करने का सबसे अच्छा उपाय है जो कि योग और ध्यान से संभव है।

कुछ मामलों में जल्दी मासिक धर्म (mensuration) के शुरू होने के अन्य कारण भी हैं जैसे fibroid, किसी दवाई का side effect, ovary में परेशानी, hormonal imbalance या योनि (vagina) के आकार में असमानता। इन सभी कारणों के लिए आपको अपना उपचार कराना चाहिए।
प्रेगनेंसी केयर टिप्स






माँ बनना हर एक स्त्री की जिंदगी की सबसे बड़ी ख़ुशी होती है। गर्भावस्था (Pregnancy) में एक गर्भवती (pregnant) स्त्री के शरीर में कई बदलाव होते हैं। गर्भवती (pregnant) स्त्री को कई चीजों से परहेज करना चाहिए और कई अन्य बातों का ध्यान भी रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि आपको गर्भावस्था (Pregnancy) में क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं। कौन सी चीजें आप पर कैसा प्रभाव डाल सकती है। Read about Pregnancy Care Tips in Hindi (Pregnancy Mein in Baato ka Dhyan Rakhe).

Pregnancy Care

गर्भावस्था में इन बातों का ख्याल रखें

Doctor की सलाह के अनुसार vitamin और iron की गोलियाँ नियमित रूप से खानी चाहिए।

किसी अच्छी महिला doctor से नियमित सम्पर्क में रहें और उनकी सलाह के अनुसार खुद को manage करें। किस महीने से क्या करना चाहिए और क्या नहीं, ये बातें एक doctor हीं आपको अच्छे से बतायेंगी।

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान बहुत ज्यादा मीठा ना खाये।

हल्का-फुल्का नियमित व्यायाम करें, व्यायाम करने से पहले doctor की सलाह जरूर लें।

अच्छा, धीमा और मधुर संगीत सुनें। यह आपको तनावमुक्त रखेगा और mood को fresh भी करेगा।

घर का काम करें, लेकिन काम का सारा बोझ अपने ऊपर न रखें। Doctor से काम से जुड़ी सलाह जरुर लें। जो काम आप न कर सके वो काम घर के दूसरे सदस्यों के बीच बाँट दें।

हमेशा खुश और तनावमुक्त रहें क्योंकि तनाव आपके और आपके बच्चे के लिए नुकसानदायक होगा।

गर्भावस्था (Pregnancy) में आप जैसे वातावरण में रहेंगी, आपके बच्चे के स्वभाव में उसका प्रभाव जरुर होगा। सकारात्मक (positive) वातावरण का सकारात्मक (positive) प्रभाव पड़ेगा, तो नकारात्मक (negative) वातावरण का नकारात्मक (negative) प्रभाव पड़ेगा।

आप जैसी चीजें देखेंगी, पढ़ेंगी और सुनेंगी उन सबका बच्चे के स्वभाव पर जरुर प्रभाव पड़ेगा।

गर्भावस्था (Pregnancy) में जैसे आपके विचार होंगे, बच्चे के विचार उससे प्रभावित होंगे। इसलिए अच्छे विचार ही पढ़ें, देखें और सुनें।

गर्भ ठहरने के 5 वें महीने से आपको 2 संतरे हर दिन खाने चाहिए। इससे बच्चे के गोरे होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

शरीर पर दही और बेसन का उबटन बना कर मलें, इससे शरीर की बदबू खत्म हो जाएगी।

आपकी अगर सांस फूलती हो तो, कुछ दिनों तक कढ़ी में घी डालकर खाने से फायदा होगा।

अपने thyroid की जाँच जरुर करवाएँ।

खाने में हरी सब्जियाँ, फल, दाल इत्यादि का सेवन नियमित रूप से करें।

रोज़ 11-12 ग्लास पानी जरुर पिए। यह आपके और आपके बच्चे के लिए बहुत जरूरी है।

गर्भवस्था (Pregnancy) में पैरों में ऐंठन एक साधारण बात है। आपको ऐंठन को कम करने के लिए केला खाना चाहिए, इससे दर्द कम होगा।

आपको हर रोज़ 8-9 घंटा सोना चाहिए।

गर्भवस्था (Pregnancy) में आपको आरामदायक जूती और चप्पल पहननी चाहिए।

गर्भवती (pregnant) स्त्री को दूध का नियमित सेवन करना चाहिए।

गर्भवती (pregnant) महिला को fastfood, तली भुनी और मसालेदार चीजें कम खानी चाहिए।

गर्भवती (pregnant) महिला को उपवास नहीं करना चाहिए।

गर्भवती (pregnant) महिला को किसी भी तरह का नशा न करें।

हर 3-4 घंटे में आपको कुछ न कुछ खाना चाहिए।

महिलाओ की समस्याओं के लिया योग आसान



पीरियड्स के दौरान व्यायाम करना तब तक आपके लिए सुरक्षित है जब तक आप बहुत अधिक मेहनत वाला काम नहीं करते। यह न केवल सुरक्षित है बल्कि ऐसा माना जाता है कि इसके कारण P.M.S. के लक्षण कम हो जाते हैं तथा पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है। पीरियड्स के दौरान प्रत्येक महिला के दर्द और असुविधा का अलग अलग स्तर होता है, अत: प्रत्येक महिला को उतना ही व्यायाम करना चाहिए जितना वह सहन कर सकती है। Read about yogasana for female problems in hindi (Female Problems Ke Liye Yogasana).




पीरियड्स के दिनों में निम्न योगिक क्रियाएं करनी चाहिए (Yogasan for Periods)

मकरासन या क्रोकोडाइल पोज़

योगेन्द्र प्राणायाम 4

यस्तिकासन या स्टिक पोज़

शवासन या शव पोज़

एब्डोमिनल मसल्स को सुद्रढ़ करने के लिए हस्तपादासन और योगेन्द्र प्राणायाम 4 की चारों प्रक्रियाएं करनी चाहिए।


दो पीरियड्स के बीच हो रही ब्लीडिंग को रोकने के लिए आसन के सुझाव

प्राणायाम से फायदा होता है।

जब ब्लीडिंग न हो रही हो तब भद्रासन या तितली पोज़ नियमित रूप से करने पर पेल्विक मसल्स सुद्रढ़ होती हैं।


P.C.O. से पीड़ित के लिए मुद्रा, आसन, क्रिया और प्राणायाम के सुझाव (Yogasan For PCOS)

सर्वप्रथम हमें अपनी जीवन शैली बदलनी होगी।

हमें एक्टिव बनना होगा।

हर दो घंटे में उठकर हमें चहलकदमी करनी होगी।

दिमाग को शांत रखते हुए आराम प्रदान करने वाली तकनीक जैसे योग करना और ध्यान लगाना होगा।


आइये जानते है कुछ बाते Birth Control के बारे में




यहाँ बहुत सी जन्म नियंत्रण (birth control) की विधियाँ है जिनमें से कोई भी आप काम में ले सकते है। एक जोड़े कि तरह, आपको निर्णय लेना पड़ेगा कि जन्म नियंत्रण के लिए किस विधि को चुनाव करे है। कुछ बातें जो आप ध्यान रख सकते है। Read about Tips for Birth Control in Hindi (Birth Control ke Tips).

Tips for Birth Control in Hindi

(Birth Control ke Tips)

जन्म नियंत्रण (birth control) की विभिन्न विधियों के बारें में पुरी तरह से और त्रुटि रहित जानकारी के लिए अपने gynecologist से सलाह लेवें – जोड़े के रूप में या व्यक्तिगत।

आपको पुरे जीवन में सेक्स के लिए केवल एक birth control तरीके को अपनाना पड़ता है। आपको कौनसी विधि सही लगती है, इसके लिए अनेक विधियों का प्रयोग कर सकते है। लेकिन 1 बार में एक ही विधि का ही प्रयोग करना होता है।

निषेचन को रोककर या इंप्लाटेशन को रोककर या गर्भपात के द्वारा भी birth control किया जा सकता है। जोड़े को जागरूक रहने की आवश्यकता होती है कि प्रत्येक विधि क्या है और इससे अधिक, प्रत्येक विधि कितनी प्रभावी होगी है।

कंडोम निषेचन को रोकने में मदद करता है। इनका उपयोग सेक्स के दौरान किया जाता है और ये sperm को अण्डे से निषेचित होने से रोकता है।

बतायी गयी birth control की विधियाँ जैसे Oral contraceptives गर्भनिरोधक भी निषेचन रोकने में मदद करते है। इनको आदर्श रूप से चिकित्सकीय देखरेख में ही प्रयोग करना चाहिए।

यदि आप Behavioral methods के प्रयोग का चयन करने है तो ध्यान रहें कि ये पूर्णतया सुरक्षित नहीं होती है। हालांकि, विड्रोवल विधि जन्म नियंत्रण विधि की तरह कार्य कर सकती है, लेकिन यदि पूर्व स्खलन होता है तो इसके परिणामस्वरूप गर्भधारण हो सकता है।

Sterilization Method ज्यादा लोकप्रिय और प्रभावी जन्म नियंत्रण तकनीक है। महिलाओं में टयूबल नसबंदी या पुरूषों में पुरूष नसबंदी करवा सकते है।

सुबह बाद में गोली लेना birth control की काफी लोकप्रिय विधि बन गया है। असुरक्षित SEX के बाद उपयोग होने वाली ये गोलियां अवांछित गर्भावस्था से बचाने की गारंटी देती है।

यदि आप किसी birth control की विधि के प्रयोग को लेकर असहज है तो अपने साथी से इस बारें में बात करे। Birth control की कुछ विधियों के व्यक्ति के हार्मोन और संपूर्ण स्वास्थ्य पर दूष्प्रभाव हो सकते है।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.