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अदरक के इतने फ़ायदे जानकर आप रह जायंगे हैरान

अदरक के इतने फ़ायदे जानकर आप रह जायंगे हैरान

मसाले के रूप में अदरक का प्रयोग लगभग पूरे संसार में किया जाता है। जिंजिबेरासी परिवार से संबंध रखने वाले अदरक का वनस्पतिक नाम जिंजिबेर ओफि्फचिनाले रोस्को है। यह एक प्रकार का कंद देने वाला पौधा है जिसकी खेती कंकरीली दोमट मिट्टी में अच्छी होती है जहां पानी का ठहराव नहीं होता। अदरक को सुखाकर सोंठ बनाई जाती है इसका भी मसाले तथा औषधि के रूप में व्यापक प्रयोग होता है।
आयुर्वेद में अदरक को रूचिकारक, पाचक, स्निग्ध, उष्ण वीर्य, कफ तथा वातनाशक, कटु रस युक्त विपाक में मधुर, मलबंध दूर करने वाली, गले के लिए लाभकारी, श्वास, शूल, वमन, खांसी, हृदय रोग, बवासीर, तीक्ष्ण अफारा पेट की वायु, अग्निदीपक, रूक्ष तथा कफ को नष्ट करने वाली बताया गया है।
जुकाम में चाय में अदरक के साथ तुलसी के पत्ते तथा एक चुटकी नमक डालकर गुनगुनी अवस्था में पीने से लाभ मिलता है। गले में खराश होने या खांसी होने पर ताजा अदरक के टुकड़े को नमक लगाकर चूसने से आराम मिलता है। बुखार, फ्लू आदि में अदरक तथा सौंफ के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से शीघ्र पसीना आकर बुखार उतर जाता है। ऐसे में अदरक की चाय भी फायदेमंद होती है। गला पकने या इन्फ्लुएंजा होने पर पानी में अदरक का रस तथा नमक मिलाकर गरारे करने से शीघ्र लाभ मिलता है।
पेट संबंधी समस्याओं के निदान में भी अदरक बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। अफारे और अजीर्ण में सोंठ का चूर्ण, अजवायन, इलायची का चूर्ण लेकर मिलाकर पीस कर रख लें। दिन में प्रत्येक भोजन के बाद इसका सेवन करें। बच्चों के पेट में दर्द की शिकायत होने पर अदरक का रस दूध में मिलाकर पिलाना चाहिए इससे गैस तथा अफारे की समस्या दूर हो जाती है। सोंठ और गुड़ की बनी गोलियों के नियमित सेवन से, आंव आने की समस्या का समाधान हो जाता है। आमाजीर्ण में भी सोंठ और गुड मिलाकर सेवन करना चाहिए इससे पाचक अग्नि ठीक हो जाती है। गजपिप्पली और सोंठ के चूर्ण का दूध के साथ सेवन पेट के विकारों के लिए एक आदर्श औषधि है।
भूख बढ़ाने तथा भोजन के प्रति रूचि पैदा करने के लिए भोजन से पहले थोड़ा सा अदरक या सोंठ का चूर्ण नमक मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और कब्ज का निदान होता है। छोटों या बड़ों को यदि खालिस दूध न पचने की शिकायत हो तो दूध में सोंठ की गांठ उबालकर या सोंठ का चूर्ण बुरकाकर सेवन करना चाहिए।
48 ग्राम सोंठ, 200 ग्राम तिल तथा 120 ग्राम गुड़ को मिलाकर कूट लें। इस मिश्रण की 12 ग्राम मात्रा का सेवन रोज करने से वायुगोला शांत होता है। पेट की ऐंठन तथा योनि शूल का दूर करने के लिए यह एक कारगर औषधि है। खाली पेट अधिक पानी पीने से हुए पेटदर्द को दूर करने लिए सोंठ के चूर्ण का गुड़ के साथ सेवन करना चाहिए।
संग्रहणी रोग में भी अदरक खासा फायदेमंद होता है। संग्रहणी में आम विकार के निदान के लिए सोंठ, मोथा और अतीस का काढ़ा बनाकर रोगी को देना चाहिए। इसके अतिरिक्त मसूर के सूप के साथ सोंठ और कच्चे बेल की गिरी के कल्क का सेवन करने से भी लाभ होता है। ज्वरातिसार एवं शोथयुक्त ग्रहणी रोग मंे प्रतिदिन सोंठ के एक ग्राम चूर्ण का दशमूल के काढ़े के साथ सेवन करना चाहिए।
उल्टी होने पर अदरक के रस में पुदीने का रस, नींबू का रस एवं शहद मिलाकर सेवन करना चाहिए। उल्टियां रोकने के लिए अदरक के रस में, तुलसी के पत्तों का रस, मोरपंख की राख तथा शहद मिलाकर सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है।
तीव्र प्यास को शांत करने के लिए अदरक के रस और शुंठी बीयर में आधा पनी मिलाकर पिलाने से रोगी का प्यास जल्दी शांत हो जाती है। डायरिया के रोगी के यदि हाथ−पैर ठंडे पड़ गए हों तो सोंठ के चूर्ण में देशी घी मिलाकर मलना चाहिए इससे खून की गति बढ़ जाती है।
महिलाओं में गर्भपात रोकने के लिए सोंठ, मुलहठी और देवदारू का दूध के साथ सेवन करना चाहिए। इससे गर्भ पुष्ट होता है। बच्चों के पेट में यदि कीडे़ हों तो उन्हें अदरक के रस की एक−एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार नियमित रूप से देनी चाहिए। अदरक का कोसा रस कान में डालने पर कान का दर्द ठीक हो जाता है।
आमवात तथा कटिशूल में एक ग्राम सोंठ तथा तीन ग्राम गोखरू के काढ़े का प्रातरूकाल सेवन करना चहिए। फीलपांव के रोगी के लिए भी सोंठ का काढ़ा लाभदायक होता है। सबसे आम समस्या सिरदर्द में तुरन्त फायदे के लिए आधा चम्मच सोंठ पाउडर को एक कप पानी में घोलकर पिएं।

मस्सों का घरेलू उपचार

मस्सों को दुर करने के लिये अपनाएँ और शेयर कर के सबको बताएं
ये कारगर घरेलू नुस्खे।
मस्से सुंदरता पर दाग की तरह दिखाई देते हैं। मस्से होने का मुख्य कारण पेपीलोमा वायरस है। त्वचा पर पेपीलोमा वायरस के आ जाने से छोटे, खुरदुरे कठोर पिंड बन जाते हैं, जिन्हें मस्सा कहा जाता है। पहले मस्से की समस्या अधेड़ उम्र के लोगों में अधिक होती थी, लेकिन आजकल युवाओं में भी यह समस्या होने लगी
है। यदि आप भी मस्सों से परेशान हैं तो इनसे राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपायों काे अपना सकते हैं। आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खों के बारे में…..
1⇒ बेकिंग सोडा और अरंडी तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर
इस्तेमाल करने से मस्से धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।
2⇒ बरगद के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही
असरदार होता है। इसके रस को त्वचा पर लगाने से त्वचा सौम्य
हो जाती है और मस्से अपने-आप गिर जाते हैं।
3⇒ ताजा अंजीर मसलकर इसकी कुछ मात्रा मस्से पर लगाएं।
30 मिनट तक लगा रहने दें। फिर गुनगुने पानी सेधो लें। मस्से खत्म
हो जाएंगे।
4⇒ खट्टे सेब का जूस निकाल लीजिए। दिन में कम से कम तीन
बार मस्से पर लगाइए। मस्से धीरे-धीरे झड़ जाएंगे।
5⇒ चेहरे को अच्छी तरह धोएं और कॉटन को सिरके में भिगोकर
तिल-मस्सों पर लगाएं। दस मिनट बाद गर्म पानी से फेस धो लें।
कुछ दिनों में मस्से गायब हो जाएंगे।
6⇒ आलू को छीलकर उसकी फांक को मस्सों पर लगाने से मस्से
गायब हो जाते हैं।
7⇒ कच्चा लहसुन मस्सों पर लगाकर उस पर पट्टी बांधकर एक
सप्ताह तक रहने दें। एक सप्ताह बाद पट्टी खोलने पर आप पाएंगे
कि मस्से गायब हो गए हैं।
8⇒ मस्सों से जल्दी निजात पाने के लिए आप एलोवेरा के जैल
का भी उपयोग कर सकते हैं।
9⇒ हरे धनिए को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे रोजाना
मस्सों पर लगाएं।
10⇒ ताजे मौसमी का रस मस्से पर लगाएं। ऐसा दिन में लगभग 3
या 4 बार करें। मस्से गायब हो जाएंगे।
11⇒ केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक
पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें,
जब तक कि मस्से खत्म नहीं हो जाते।
12⇒ मस्सों पर नियमित रूप से प्याज मलने से भी मस्से गायब हो
जाते हैं।
13⇒ फ्लॉस या धागे से मस्से को बांधकर दो से तीन सप्ताह
तक छोड़ दें। इससे मस्से में रक्त प्रवाह रुक जाएगा और वह खुद ही
निकल जाएगा।
14⇒ अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगाएं। इससे मस्से
नरम पड़ जाएंगे और धीरे-धीरे गायब हो जाएंगे।
15⇒ अरंडी के तेल की जगह कपूर के तेल का भी उपयोग कर सकते
है।

गुणों से भरपूर सरसो का तेल

सरसों का तेल भारत का ऑलिव ऑयल है, सरसों के तेल के गुणों के बारे में अगर बात की जाए तो यह सचमुच हर किसी के लिए काफी लाभदायक है। सरसो के तेल में विटामिन ए, विटामिन ई, प्रोटीन्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स जैसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद होते है। सरसों तेल के इस्तेमाल से आकर्षक लुक भी पाया जा सकता है। जानिए क्या होते हैं इसके फायदें
नैचुरल सनस्क्रीन-
आजकल हम ऐसे सन्स्क्रीन का चयन करने लगे हैं, जिनमें एसपीएफ 20 या फिर उससे अधिक हो। लेकिन हम आपको बता दें कि सरसों के तेल से बेहतर सन्स्क्रीन कोई नहीं है। इसमें उच्च लेवल का विटामिन ई होता है, जो नेचरल सन्स्क्रीन की तरह काम करता है। यह सूरज की हानिकारक किरणों से हमारी त्वचा को बचाता हैं और समय से पहले झुर्रियों को आने से भी रोकता है।
बालों के लिए फायदेमंद-
हानिकारक केमिकल युक्त कंडीशनर बालों पर लगाने के बजाय सरसों तेल लगाएं। यह प्राकृतिक रूप से बालों को कंडीशन कर मुलायम बनाता है। बालों को कर्ल (घुंघराला) बनाए जाने या जूड़ा बनाने के दौरान बालों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए सरसों तेल से सिर का मसाज कीजिए। यह बालों को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान करने के साथ ही बाल उलझने व झड़ने से भी रोकता है।
छुर्रियों से दिलाए मुक्ति-
चेहरे को रोजाना सरसों तेल से मसाज कर सन टैन, झुर्रियों और काले धब्बों से छुटकारा पाया जा सकता है। थोड़े बेसन में एक छोटा चम्मच दही, नींबू की कुछ बूंदें और सरसों तेल की कुछ बूंदों को एक साथ मिलाकर इसे चेहरे और गर्दन पर हफ्ते में कम से कम तीन बार जरूर लगाएं। इसे 10-15 मिनट बाद धो लें। मुहांसे, चकत्ते या दाने पड़ जाने पर सरसों तेल की कुछ बूंदें रोज 10-15 मिनट लगाएं। यह त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के साथ ही चमक भी लाता है।
त्वचा को करता है मुलायम-

सरसो के तेल की मालिश भी बहुत लाभप्रद होती है, क्यूकि इससे रक्त प्रवाह सुधरता है और मांसपेशियों मजबूत बनती है| सर्दियों के मौसम में त्वचा रूखी होना आम बात है। आप सरसों तेल की कुछ बूंदें अपने चेहरे पर मलें। कुछ मिनट के बाद इसे पानी से धो लीजिए। त्वचा मुलायम हो जाती है।
कोमल होंठों के लिए-
सर्दियों में होंठों का फटना काफी सामान्य सी बात होती है। अगर आप सॉफ्ट और मॉइस्चराइज होंठ चाहती हैं तो ऐसे में आप लिपबाम के बजाय होंठों पर सरसों के तेल का इस्तेमाल करें। रात को सोते समय अगर आप इस उपचार का इस्तेमाल करती हैं तो आप आसानी से फटे होठों से राहत पा सकती हैं।

आम की बर्फी

आम की बर्फी-

गर्मी का मौसम यानी आम का मौसम. आम की बर्फी आप ताजा पके हुये मीठे आम से बनाईये या प्रिजर्व किये हुये आम के पल्प से, इसका स्वाद आप और आपके परिवार को बहुत पसन्द आयेगा.
हम आम की बर्फी (Aam ki Burfi) को बेसन डालकर बना रहे हैं, लेकिन आम की बर्फी को मावा, मिल्क पाउडर या कंडेंस्ड मिल्क मिला कर भी बनाया जासकता है.
आवश्यक सामग्री -
आम का पल्प - 2 कप (400 ग्राम)
चीनी - 150 ग्राम (3/4 कप)
बेसन - 100 ग्राम (1 कप)
देशी घी - 75 ग्राम ( 1/3 कप)
काजू - 15
पिस्ते - 10 -12
छोटी इलाइची- 5
विधि -
बड़े आकार के 2 आम छील कर, गूदा निकालिये, पीसिये और 2 कप आम का पल्प तैयार कर लीजिये.
काजू छोटे छोटे टुकड़े में काट लीजिये, पिस्ते पतले पतले काट लीजिये. इलाइची छील कर कूट लीजिये.
कढ़ाई में घी डाल कर गरम कीजिये, घी पिघलने पर बेसन डालिये और बेसन के ब्राउन होने और अच्छी महक आने तक भून लीजिये. भुना हुआ बेसन प्याले में निकाल कर रख लीजिये.
आम का पल्प और चीनी मिलाकर कढ़ाई में डालिये और पकने दीजिये. थोड़ी थोड़ी देर में चमचे से चलाते जाइये. चीनी घुलने और आम के पल्प को गाढ़ा होने दीजिये.
आम का पल्प गाढ़ा होने के बाद, भुना हुआ बेसन, आम और चीनी के गाढ़े पल्प में मिलाइये और चमचे से चलाते हुये पकाइये, जब मिश्रण हलवे जैसा गाढ़ा हो जाय और कढ़ाई के किनारे छोड़ने लगे, तब इसमें थोड़े से काजू बचाकर, काजू के टुकड़े और कुटी हुई इलाइची डालिये और जमने वाली कन्सिस्टैन्सी तक चमचे से लगातार चलाते हुये पका लीजिये.
पहले से चिकनी की गई प्लेट में मिश्रण डालिये और एक जैसा फैला दीजिये, ऊपर से कतरे हुये काजू, पिस्ते डाल कर चिपका दीजिये.
प्लेट में डाले हुये मिश्रण को ठंडा होने दीजिये, 2 घंटे में आम की बर्फी ठंडी होकर जम कर तैयार हो जायेगी.
आम की बर्फी को आप अपने मन पसन्द आकार में काट लीजिये.
स्वादिष्ट आम की बर्फी तैयार है, ताजा ताजा बर्फी आप अभी खाइये और बची हुई आम की बर्फी (mango burfi) एअर टाइट कन्टेनर में रख लीजिये और 10 दिन तक फ्रिज में रख कर खाइये.
आम की बर्फी मावा, मिल्क पाउडर या कंडेंस्ड मिल्क के साथ
मावा के साथ -
1 कप मावा भूनकर,  आम के पल्प और चीनी के गाढ़े होने पर मिला दीजिये और बर्फी को जमने वाली कनसिस्टैन्सी तक पका लीजिये, मेवा डालकर मिला दीजिये.  मावा डालने पर बर्फी बनाने के लिये घी की आवश्यकता नहीं है.
मिल्क पाउडर के साथ -
आम और चीनी के थोड़ा गाढ़े होने पर, आग बन्द कर दीजिये, चमचे से चलाते हुये 1 कप मिल्क पाउडर डालकर, अच्छी तरह मिक्स होने तक मिला लीजिये और गैस पर रखकर बर्फी को जमने वाली कनसिस्टैन्सी तक पका लीजिये. मिल्क पाउडर डालकर बर्फी बनाने में भी घी की आवश्यकता नहीं है.
कंडेंस्ड मिल्क के साथ
आम के पल्प को गाढ़ा कीजिये, 1 कप कन्डेस्ड मिल्क मिलाइये और बर्फी जमने वाली कनसिस्टैन्सी तक पका कर बर्फी जमा दीजिये. कन्डेस्ड मिल्क डालकर बर्फी बनाने में चीनी और घी डालने की आवश्यकता नहीं है.
सावधानी:
बेसन को भूनते समय आग मीडियम और धीमी रखिये और लगातार चलाते हुये भूनिये, बेसन कढ़ाई में लगने न पाये.
बर्फी बनाते समय मिश्रण को गाढ़ा करते समय आग थोड़ी तेज रखें लेकिन मिश्रण को कढ़ाई में नीचे तक ले जाते हुये लगातार चलाते रहें, ताकि मिश्रण कढ़ाई में बिना लगे, जल्दी से गाढ़ा होकर, बर्फी जमाने के लिये तैयार हो जाय.

टाइट जीन्स पहनने से नुकसान

ज्यादातर महिलाएं अपने सौंदर्य को निखारने के लिये टाइट कपड़े पहनने ज्यादा ही पसंद करती है उन्ही फैशन से जुड़ी है स्किनी जींस जो आपके लिये नुकसानदायक साबित हो सकती है। आपके शरीर में यह स्किनी जींस कूल्हे या पीठ दर्द जैसी समस्या का कारण बनती है। लोग भले ही स्किनी जींस को पहन कर अपने आप के पतला होने के बारे में सोचे लेकिन ये आप को कई खतरनाक बीमारियों को दावत देती है।
आरामदायक कपड़े: आजकल बाजार में स्किनी और लो वेस्ट जींस का काफी ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जिसे लड़किया ज्यादा पहनना पसंद करती है पर यह जींस उन लड़कियों के लिये नुकसानदायक है जिनके हिप्स भारी होने के कारण जींस ज्यादा टाइट होती है।
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वर्कआउट ना करे: यदि आप वर्क आउट जाने की सोच रही है तो इसके लिये आप स्किन टाइट जींस का चुनाव कतई ना करें क्योकि जॉगिग के समय हमें कई शारीरिक गतिविधि करनी पड़ती है बार बार उठना बैठना या पैर का फैलाना जिससे हमारी जांघों की नसों पर दबाव पड़ता है।
शारिरीक संरचना: टाइट जीन्स पहने से पहले आप अपने शरीर का पूरा ध्यान रखते हुये शारीरिक संरचना के साथ ही इसका चयन करे यदी आपका शरीर काफी हैवी है तो शरीर के वजन को कम कर लें इसके लिये आप अपने आहार पर विशेष ध्यान देते हुये अपने वजन को घटाये।
चयन बुद्धिमानी के साथ करें: फैशन से जुड़ी चीजों को अपनाते वक्त उन पर ध्यान देना जरूरी है कि जो लोग अपनी सुंदरता को निखारने के लिये कपड़े अपनाते है वो सुंदरता तो बढ़ाते है लेकिन अपने शरीर को भी नुकसान पहुंचा रहे है इसलिये आप इन बातों को ध्यान में रखकर अपने कपड़ो का चयन करें।

अँगूर के 6 बेमिसाल फायदे

अंगूर खाने के फायदे-
अंगूर एक ऐसा फल है जिसे आप साबुत खा सकते हैं. इनसे न तो छिलका उतारने का झंझट और न ही बीज का निकालने का. वैसे स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं. आमतौर पर अंगूर दो तरह के होते हैं, हल्के हरे रंग के और काले रंग के. ल‍ेकिन आकार के आधार पर भी आप इन्हें विभाजित कर सकते हैं. अंगूर को एक विशेष प्रक्रिया के तहत सुखाकर किशमिश का रूप भी दिया जाता है.
अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी, ई पाया जाता है. अंगूर के लाजवाब स्वाद से तो हम सभी परिचित हैं लेकिन कम ही लोगों को पता होता है कि ये सेहत का खजाना भी है.
1. अंगूर में ग्लूकोज, मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. कई बीमारियों में राहत के लिए अंगूर का सेवन करना फायदेमंद होता है. टीबी, कैंसर और ब्लड-इंफेक्शन जैसी बीमारियों में ये मुख्य रूप से फायदेमंद होता है.
2. मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी अंगूर बेहद फायदेमंद है. ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करने का काम करता है. इसके अलावा ये आयरन का भी एक बेहतरीन माध्यम है.
3. माइग्रेन के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए अंगूर का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है. कुछ समय तक अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से इस समस्या से निजात पाई जा सकती है.
4. हाल में हुए एक शोध के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम में अंगूर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए भी ये विशेष रूप से फायदेमंद है.
5. अगर आपको भूख नहीं लगती है और इस वजह से ही आपका वजन नहीं बढ़ पा रहा है तो भी आप अंगूर के रस का सेवन कर सकते हैं. इसके सेवन से कब्ज की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही भूख भी लगने लग जाती है.
6. खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलकार पीने से खून की कमी दूर हो जाती है. यह हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है.


सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फ 1 तेज पत्ता, होगा ये फायदा

रात को अच्छी नींद सोना है तो ज़रूरी है आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता।


ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो

तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए।
तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है। ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।
कैसे करें इस्तेमाल
एक तेज पत्‍ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

विटामिन E से दूर करे अपने चेहरे के दाग धब्बो को

विटामिन ई हमारे शरीर को सेहतमंद रखने में मदद करता है.यह बहुत चीजों में पाया जाता है जैसे हरा साग, पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है.यह स्किन अौर बालों को हेल्दी रखने के साथ-साथ स्ट्रेच मार्क्स, पिंपल्स के दाग-धब्बे दूर कर ड्राय स्किन से छुटाकारा दिलाता है.


आप भी इसके फायदे जानकर इसके एक कैप्सूल से अपनी सभी समस्याओं से छुटकारा पा सकते है
1-आखों के आस-पास की स्किन काफी नाजुक होती है. इसलिए यहां पर झुर्रियां जल्दी हो जाती है. आप बादाम के तेल की 5-6 बूंदे लेकर इसमें 1 कैप्सूल विटामिन ई का मिलाएं और सोने से पहले अपनी आंखों के आस-पास वाली स्किन पर मसाज करें. विटामिन ई में एंटी एजिंग गुण पाए जाते है,जिससे इसके इस्तेमाल से त्वचा पर ग्लो आता है.
2-विटामिन ई चेहरे के दाग धब्बे धीरे-धीरे बिल्कुल खत्म कर देता है. इसका एक कैप्सूल लेकर उसे तोड़कर सारा तेल निकालकर अपने चेहरे पर सारी रात लगाकर रखने से चेहरा बिल्कुल साफ हो जाता है.
3-विटामिन ई बालों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. आप इसे सोने से पहले अपने बालों के स्कैलप पर अच्छी तरह लगाएं और सुबह धो लें. इससे बाल लंबे, काले अौर घने होगें.

4-प्रैग्नेंंसी के दौरान आपकी स्किन को बहुत कुछ झेलना पड़ता है. इसी दौरान स्ट्रैच मार्क्स हो जाते है और इनसे छुटकारा पाने के लिए 2 विटामिन ई कैप्सूल्स का ऑयल और 1 बड़ा चम्मच नारियल तेल या ऑलिव ऑयल मिलाकर मिक्सचर तैयार करें. इस मिक्सचर को अपने प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं और स्ट्रेच मार्क्स दूर हो जाएंगे

ऐसे करेंगे देखभाल तो नहीं सूखेगी तुलसी

घर में तुलसी का पौधा लगाना बहुत अच्छा माना जाता है। इससे घर की शुद्धि होती है। यह वातावरण भी अच्छा रखता है। यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। सही देखभाल न होने के कारण तुलसी का पौधा सूख जाता है या मुरझा जाता है। आइए जानते हैं कैसे करनी चाहिए तुलसी की देखभाल


1. घर की कच्ची जगह पर तुलसी का पौधा लगाना चाहिए। जमीन पर इसकी जड़े मजबूत रहती है।
2. तुलसी का पौधा ज्यादा गर्मी में न रखें। इससे यह मुरझा सकता है अगर सर्दी ज्यादा है तो कोशिश करें इसे छांव में रखें।
3. तुलसी को पौधा आंगन के बीचो-बीच रखने की बजाए कोने में रखें।

4. पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देने से भी यह गल जाते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि पानी सिर्फ उतना ही डाले जितनी जरूरत हो। ज्यादा पानी से इसकी जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
5. सीधी धूप में पौधा रखने से बेहतर है कि इसे हल्की नेट से कवर कर दें। इससे पौधे को ज्यादा समय तक संभाल कर रखा जा सकता है।
6. पौधे की समय-समय पर सफाई करनी भी बहुत जरूरी है। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि होती है।

7. तुलसी के पौधे में बढ़िया किस्म की खाद डालने से भी इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

सिर्फ 50 रुपये में गले के कैंसर का इलाज, इस जानकारी को लोंगों तक पहुंचाएं जरुर

”डॉक्टर ने बड़े ही गर्व से कहा। उपकरण को AUM क्यों कहा जाता है? डॉ. राव कहते है – “पुरातनकाल में ॐ को “अउम” (AUM) नाम से जाना जाता था। ‘अ’ मतलब निर्माण, ‘उ’ मतलब जीविका और ‘म’ मतलब विनाश। इन तीनो के आधार पर ही यह संसार चलता है। वोइस बॉक्स खोने के बाद जब ये उपकरण मरीज को दिया जाता है तब उसका पुनर्जन्म होता है, ठीक उसी तरह से जैसे सृष्टि की उत्पत्ति ओम से ही हुयी है।”

  • बंगलूरू स्थित डॉ. विशाल राव ने एक ऐसे चिकित्सा यंत्र की खोज की है जिससे गले के कैंसर से पीड़ित लोग सर्जरी के बाद भी ठीक से बोल सकते है। और इस यंत्र की क़ीमत सिर्फ ५० रूपये है। गले के कैंसर से पीड़ित, कोलकता का एक मरीज, पिछले २ महीने से कुछ खा नहीं पा रहा था। वो निराश था, कुछ बोलता नहीं था और उसे नाक में लगे एक पाइप से खाना पड़ रहा था। गरीब होने की वजह से वो अच्छी मेडीकल ट्रीटमेंट नहीं ले सकता था। उसके डॉक्टर ने उसे बंगलुरु के एक सर्जन के बारे में बताया। वो बंगलुरु गया, डॉक्टर से मिला और ट्रीटमेंट शुरू की। सिर्फ ५ मिनट के ट्रीटमेंट के बाद वो बोल पा रहा था, खाना खा रहा था और उसके बाद वो अपने घर जाने के लिये तैयार था। ये सब मुमकिन हुआ डॉ. विशाल राव की वजह से! ३७ वर्षीय डॉक्टर राव ने बताया – “उस दिन ३ घंटे के ऑपरेशन के बाद जब मैं ऑपरेशन थियटर से बाहर आया, तब मैंने देखा कि कोलकता का वो मरीज मेरी राह देख रहा था। जैसे ही उसने मुझे देखा, वह दौड़ता हुआ आया और मुझसे लिपट गया और अपनी आवाज वापस पाने की ख़ुशी में मुझे धन्यवाद देने लगा।”
  • डॉ. राव एक ओंकोलोजिस्ट है और बंगलूरू में हेल्थ केयर ग्लोबल (HCG) कैंसर सेंटर में सर और गले की बीमारियों के सर्जन है। आम तौर पर मिलने वाले गले के प्रोस्थेसीस की किमत १५००० रुपये से लेकर ३०००० रुपये होती है और उन्हें हर ६ महीने के बाद बदलना पड़ता है। लेकीन डॉ. राव के प्रोस्थेसीस की किमत सिर्फ ५० रुपये है। डॉ. विशाल राव वोइस प्रोस्थेसीस (Voice prosthesis ) उपकरण सिलिकॉन से बना है। जब मरीज का पूरा वोइस बॉक्स या कंठनली (larynx) निकाला जाता है तब ये यंत्र उन्हें बोलने में मदत करता है। सर्जरी के दौरान या उसके बाद विंड-पाइप और फ़ूड- पाइप को अलग करके थोड़ी जगह बनायी जाती है। ये यंत्र तब वहा बिठाया जाता है। डॉ. राव ने समझाया कि फेफड़ो से आनेवाली हवा से वौइस् बॉक्स में तरंगे उत्सर्जित होती है। प्रोस्थेसीस की मदत से फ़ूड पाइप में कंपन (वाइब्रेशन) पैदा होती है जिससे बोलने में मदद मिलती है।
  • डॉ. राव याद करते है – “उस आदमी ने एक महीने से कुछ खाया नहीं था और वो ठीक तरह से बोल भी नहीं पा रहा था। सर्जरी के बाद उसके गले से वोइस बॉक्स निकाल दिया गया था। और उसके लिए प्रोस्थेसीस का खर्चा उठाना मुश्किल था। वो जब मुझसे मिलने आया तब परेशान था और जिंदगी से हार चूका था।”
  • ★ डॉ. राव ने उसे मदद करने का वादा किया :

    • पहले जब भी डॉ. राव के पास ऐसे मरीज आते थे, वो दवाईयो की दूकान में जाकर डिस्काउंट मांगते थे, पैसे इकठ्ठा करते थे और फिर मरीजों को दान कर देते थे। पर इस कर्नाटक के मरीज के एक दोस्त, शशांक महेस ने डॉ. राव से कहा कि पैसो का इंतज़ाम वो खुद कर लेंगे और साथ में उनसे एक गंभीर सवाल पूछा – “आप इन सब लोगो पर निर्भर क्यूँ है? आप खुद ऐसे मरीजो के लिये कोई इलाज या कोई यंत्र क्यों नहीं बनाते?”डॉ. राव को पता था कि ये उनकी क्षमता के परे है। उन्हें इसके लिये एक यंत्र का निर्माण करना था, जिसकी कल्पना उन्हें थी पर उसे बनाने के लिये तंत्रीय ज्ञान उन्हें नहीं था। पर शशांक एक उद्योगपति था और जो कौशल डॉ. राव के पास नहीं था वह उसमे था। डॉ. राव ने सारा टेक्निकल प्लान तैयार किया और शशांक ने उसे हकीकत में तब्दील किया। शशांक ने डॉ. राव की मदद करने का आग्रह किया। और दोनों ने अपनी समझ, मेहनत और पैसो की पूंजी लगाके इस यंत्र का आविष्कार किया।


    • डॉ. राव कहते है – ”गरीबो को फटे-पुराने कपडे दान में देना मुझे कभी पसंद नहीं था, क्यूंकि गरीब होने के बावजूद वे इससे ज्यादा के हकदार है। इसी तरह सिर्फ इसलिए कि मेरे मरीज़ गरीब है, मैं उनके लिए निचले स्तर का कोई यंत्र का निर्माण नहीं करना चाहता था। आखिर वो भी मरीज़ है, उन्हें भी बेहतरीन इलाज करवाने का हक़ है। इसलिए हमने इस यंत्र को बनाने के लिए सबसे बेहतरीन मटेरियल का इस्तेमाल किया ” डॉ. राव और शशांक ने इस यंत्र को पेटेंट करने के की अर्जी दी है। यह यंत्र बाज़ार में अगले महीने से उपलब्ध हो जायेगा। HCG के साइंटिफिक तथा एथिकल कमिटी ने भी इसे मरीजो के लिये इस्तेमाल करने के लिये स्वीकृति दे दी है। शुरुआत में जांच के उपलक्ष्य से इस यंत्र को ३० मरीजो को इस्तेमाल करने दिया जायेगा। वोइस प्रोस्थेसिस महंगा होता है, क्योंकि वो विदेश से ख़रीदा जाता है। इस यंत्र को बनाने के लिये डॉ. राव और शशांक को करीब दो साल लगे। इसकी क़ीमत बहुत ही कम रखी गयी ताकि गरीब मरीज भी इसे इस्तेमाल कर सके। वे कहते है- ”हमारा मानना है कि अपनी आवाज़ पर हर किसीका अधिकार है। हम किसी मरीज़ से उसकी आवाज़ हमेशा के लिए सिर्फ इसलिए नहीं छींन सकते क्यूंकि वह गरीब है। ” डॉ. राव ने अब तक ३ मरीजो पर इसका उपयोग किया है।
    • डॉक्टर इस यंत्र को और भी बेहतर बनाना चाहते है ताकि देश भर के कैंसर अस्पताल इसका इस्तेमाल कर सके। प्रोस्थेसीस का साइड व्यूह “सबसे पहले पीनिया के एक चौकीदार पर मैंने इसका प्रयोग किया। २ साल पहले उसके प्रोस्थेसिस के लिये हमने पैसे जमा किये थे। यंत्र का इस्तेमाल सिर्फ ६ महीने तक करना चाहिये पर गरीब होने के कारण उसने २ साल तक उसका उपयोग किया। मैंने उस पर AUM वोइस प्रोस्थेसिस का इस्तेमाल किया। एक दिन नाईट ड्यूटी से उसने मुझे कॉल करके कहा कि यंत्र अच्छी तरह से चल रहा है और वो बहुत खुश है। ये सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

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