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मधुमेह में फायदेमंद हैं गौमुखासन yog school 30

पूर्ण भुजा शक्ति विकासक योग के लाभ


पूर्ण भुजा शक्ति विकासक योग के लाभ
योग की पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया को करने से जहां एक ओर प्राणशक्ति का विकास होता है वहीं खुलकर गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके चलते प्राणशक्ति का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति दिनभर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। इसके नियमित अभ्यास से भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कंधों की जकड़न दूर होती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में प्राणशक्ति का संचार होने लगता है।
योग आसनों की शुरुआत के पूर्व अंग संचालनों में पारंगत हुआ जाता है। अंग संचालनों के क्रम में ही एक अंग संचालन 'पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया' है। जिन लोगों को कठिन आसन करने में दिक्कत होती है, वे इस अभ्यास से आसन और प्राणायाम के लाभ एकसाथ प्राप्त कर सकते हैं।
पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया योग की विधि : सबसे पहले सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिला लें। फिर भुजाओं को सीधा, कंधों को पीछे खींचकर और सीने को तानकर रखें। 
इसके बाद दाएं हाथ का अंगूठा भीतर और अंगुलियां बाहर रखते हुए मुट्ठी बांध लें। फिर बाएं हाथ के तलवे को जंघा से सटाकर रखें। श्वास भरते हुए दाईं भुजा को कंधों के सामने लाएं।
उसके बाद श्वास भरते हुए भुजा को सिर के ऊपर लाएं। अब श्वास छोड़ें और दाईं हथेली को कंधों के पीछे से नीचे लेकर आएं। इस तरह एक चक्र पूरा होगा। अब दाएं हाथ से लगातार 10 बार इसी तरह गोलाकार चलाएं। उसके बाद बाएं हाथ से भी मुट्ठी बनाकर 10 बार गोलाकार चलाएं। 
अंत में धीरे-धीरे श्वास को सामान्य कर लें। श्वास के सामान्य होने के बाद दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर 10 बार गोलाकार चलाएं। सामने से पीछे की ओर ले जाएं। इस दौरान श्वास की एकाग्रता और संतुलन बनाए रखें। 
जिस तरह हाथों को एक दिशा में गोलाकार घुमाते हैं, उसी तरह हाथों को उल्टी दिशा में भी गोलाकार घुमाना चाहिए। इससे विपरीत योग संचालन भी हो जाता है, जो कि जरूरी है।
सावधानी : योग संचालन के दौरान श्वास के प्रति सजग रहें। एक श्वास में एक चक्र पूरा करें। बाजू बिलकुल सीधी रखें। शरीर को तानकर रखें।
इसका लाभ : इस अंग संचालन योग को करने से जहां एक ओर प्राणशक्ति का विकास होता है वहीं खुलकर गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके चलते प्राणशक्ति का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति दिनभर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है।
इसके नियमित अभ्यास से भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कंधों की जकड़न दूर होती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में प्राणशक्ति का संचार होने लगता है।

मधुमेह में फायदेमंद हैं गौमुखासन


मधुमेह में फायदेमंद हैं गौमुखासन
हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने मधुमेह (डायबिटीज) दिवस पर कहा कि ऋषि प्रणीत जीवनचर्या अपनाने से इस जटिल रोग से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि गौमुखासन के नियमित अभ्यास एवं सविता ध्यान से काफी राहत मिल सकती है।
डॉ. चिन्मय के अनुसार, सुबह जल्दी उठकर उगते हुए सूर्य का ध्यान, यज्ञोपैथी एवं नियमित आसनों के अभ्यास डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। डायबिटीज का मरीज अक्सर तनाव में रहता है। ऐसे में नियमित प्राणायाम एवं सात्विक आहार मन के साथ तन को शांत एवं स्वस्थ रख सकता है।
उन्होंने कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा वैकल्पिक चिकित्सा एवं इस विषय पर काफी शोध कार्य चल रहे हैं। इसके सफल परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। प्रतिकुलपति ने कहा कि आज के समय में लोगों का जीवन अति व्यस्त हो गया है। समय के साथ अनियमित दिनचर्या के कारण नाना प्रकार के रोग बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में शरीर के अंदर बढ़ने वाले ग्लूकोज और इंसुलिन के संतुलन को बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में पित्ताशय का दुरुस्त रहना मधुमेह के मरीजों के लिए जरूरी है। आज से सदियों पहले हमारे ऋषियों ने पित्ताशय विकार का यौगिक समाधान निदान के रूप में दिया था।

अंडकोष वृधि के लिए विशेष लाभदायक::गोमुखासन


अंडकोष वृधि के लिए विशेष लाभदायक::गोमुखासन
गोमुखासन आसन में व्यक्ति की आकृति गाय के मुख के समान बन जाती है इसीलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। यह आसन आध्‍यात्मिक रूप से अधिक महत्‍व रखता है तथा इस आसन का प्रयोग स्‍वाध्‍याय एवं भजन, स्‍मरण आदि में किया जाता है। यह आसन पीठ दर्द, वात रोग, कंधे के कडे़ंपन, अपच तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है।
यह अंडकोष से संबन्धित रोगों को दूर करता है। यह आसन उन महिलाओं को अवश्‍य करना चाहिये, जिनके स्‍तन किसी कारण से छोटे तथा अविकसित रह गए हों। यह आसन स्‍त्रियों की सौंदर्यता को बढ़ाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी है।
गोमुखासन की विधि-
इस आसान को करने के लिए आप पहले सीधे दण्डासन में बेठकर बाये पेर को मोड़कर उसकी ऐड़ी को दाये नितंब के पास रखे उसी प्रकार दाये पैर को मोड़कर बाये पैर पर इस प्रकार रखे कि दोनों घुटने एक दूसरे को स्पर्श करते हुए हो। अथवा आप ऐड़ी पर वज्रासन कि स्थिति में भी बैठ सकते हें। अब दाये हाथ को उठाकर पीठ कि और मोड़िए तथा बाये हाथ को पीठ के पीछे से लेकर दाये हाथ को पकड़िये। ध्यान रहे गर्दन व कमर सीधी रहे एक और से एक मिनिट करने के पश्यात दूसरी और से इसी प्रकार करे।
सावधा‍नी-
हाथ, पैर और रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर रोग हो तो यह आसन न करें। जबरदस्ती पीठ के पीछे हाथों के पंजों को पकड़ने का प्रयास न करें।
लाभ :
इससे हाथ-पैर की मांसपेशियां चुस्त और मजबूत बनती है। तनाव दूर होता है। कंधे और गर्दन की अकड़न को दूरकर कमर, कब्ज, पीठ दर्द आदि में भी लाभदायक। छाती को चौड़ा कर फेफड़ों की शक्ति को बढ़ाता है जिससे श्वास संबंधी रोग में लाभ मिलता है। अंडकोष वृधि के लिए विशेष लाभदायक हें। यह आसन गठिया को दूर करने में भी असरकारी है।

पुरुषों के लिये योगा करने का फायदा


पुरुषों के लिये योगा करने का फायदा
आज-कल अकसन पुरुषों को जिम में घंटो पसीना बहाते हुए देखा जाता है। कुछ पुरुष तो समय के इतने पक्‍के होते हैं कि वह हफ्तों के सातो दिन मासपेशियां बनाने के लिये तैयार रहते हैं। वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो पार्क में कसरत और योग करने वालों की संख्‍या में भारी गिरावट आई है। पुरुष सोंचते हैं कि जिम में जा कर ट्रेडमिल पर एक घंटा दौड़ लेने से और कुछ देर मासपेशियां बना लेने से वह पूरी तरह से फिट हो जाएंगे। मगर ऐसा सोंचना पूरी तरह से गलत है।
आज पांच में से केवल एक आदमी योग करने पर विश्‍वास रखता है। मगर दोस्‍तो योग करने के अपने अद्भुत फायदे हैं। जो योग करता है उसे कभी भी किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती और जो बीमारी उसे पहले से लग चुकी है, वह भी नियमित योग करने से ठीक हो जाती है। पुरुषों के लिये योग हर तरह से फायदेमंद हो सकता है। आइये जानते हैं उनके बारे में।
1. शरीर की ऊर्जा बढाए – जिम की तरह योग करने से आपके शरीर की पूरी एनर्जी बरबाद नहीं होती बल्कि यह इंसान को एनर्जी से भर देता है और उसे और भी ज्यादा एलर्ट बनाता है।
2. मांसपेशियों का दर्द मिटाए - जब जिम में वर्कआउट करने पर मासपेशियां थक जाती हैं तो उनमें लैक्टिक एसिड बनने लगता है, जिससे कि उसमें दर्द होना शुरु हो जाता है। मगर योगा करने से शरीर में कड़ापन नहीं रहता और ना ही दर्द होता है। योगा से ठीक होने वाली दस बीमारियां
3. लचीलापन लाए - ऐसे कई योगा पोज हैं, जिन्हें करने से शरीर का लचीलापन बढता है। अगर आपका शरीर लचीला है तो इससे आपको बहुत फायदा मिलेगा।
4. बेडरूम में फायदा - लचीलापन, बढी हुई एनर्जी और मजबूत मासपेशियां किसी भी आदमी को बेडरूम में एक्टिव बना सकती हैं। अपी जननेन्द्रियाँ को जगाने के लिये गरूणआसान करें क्‍योंकि इससे ताजी ऑक्‍सीजन शरीर में प्रवेश करती है और आपको शक्‍ति देती है।
5. दिमाग को बैलेंस करे – योगा दिमाग में शांति भर कर उसे सही काम पर फोकस करने की शक्‍ति देता है। इसे करने के बाद आप शांत महसूस करेगें।

पीठ दर्द को जड़ से खतम करे मार्जारी आसन


 आसन
मार्जारी आसन एक बहुत ही सरल आसन है जो कि खासतौर पर रीढ़ को लचीला बनाने के लिये किया जाता है। रीढ़ हमारे शरीर का स्‍तंभ होता है, अगर यह ठीक नहीं रहेगा तो आप ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। मार्जारी आसन करने में बहुत ही आसान है। अगर आपको पीठ दर्द रहता है तो आप के लिये यह मार्जारी आसन बहुत लाभकारी होगा। पीठ दर्द की वजह से शरीर के अन्‍य भाग जैसे, कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। मार्जारी आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने तक मार्जारी आसन का अभ्यास किया जा सकता है। यह आसन शरीर को ऊर्जावान बनाता है! आइये जानते हैं मार्जारी आसान करने की विधि और इसका लाभ।
मार्जारी आसन की विधि दोनों घुटनों और दोनों हाथों को जमीन पर रखकर घोड़े की भाति खड़ी हो जाएं। हाथों को जमीन पर बिलकुल सीधा रखें। ध्यान रखें कि हाथ कंधों की सीध में हों और हथेली फर्श पर इस तरह टिकाएं कि उंगलियां आगे की तरफ फैली हों।   7 योग आसन जो आपके पेट को रखें स्वस्थ हाथों को घुटनों की सीध में रखें, बांहें और जांघें भी फर्श से एक सीध में होनी चाहिए। घुटनों को एक-दूसरे से सटाकर भी रख सकती हैं और चाहें तो थोड़ी दूर भी। यह इस आसन की आरंभिक अवस्था है। इसके बाद रीढ़ को ऊपर की तरफ खींचते हुए सांस अंदर खींचें। इसे इस स्थिति तक लाएं कि पीठ अवतल अवस्था में पूरी तरह ऊपर खिंची हुई दिखे। सांस अंदर की ओर तब तक खींचती रहें जब तक कि पेट हवा से पूरी तरह भर न जाए। इस दौरान सिर का ऊपर उठाए रखें। सांस को तीन सेकंड तक भीतर रोक कर रखें। इसके बाद पीठ को बीच से ऊपर उठाकर सिर नीचे झुकाएं। अपनी दृष्टि नाभि पर टिकाएं। सांस धीरे-धीरे बाहर छोड़ें और पेट को पूरी तरह खाली कर दें और नितंबों को भी भीतर की तरफ खींचें। सांस को फिर तीन सेकंड तक रोकें और सामान्य दशा में वापस आ जाएं। इस तरह इस आसन का एक चक्र पूरा होता है। सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जितना भी संभव हो सके, उतना ही धीरे-धीरे करें। सांस अंदर भरने और छोड़ते वक्‍त पांच सेकेंड का वक्‍त लगाएं। लाभ मार्जारी आसन पीठ और कमर की मांसपेशियों के तनाव को कम करने में सहायक है। यह गर्दन, कंधें और रीढ़ की कोशिकाओं पर विशेष प्रभाव डालता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की कोशिकाओं के बीच दबाव कम होता है। इससे रीढ़ की तंत्रिकाओं में स्फूर्ति आती है। इसके अतिरिक्त मासिक धर्म की समस्या और ल्यूकेरिया से छुटकारा दिलाने में भी मार्जारी आसन असरदार साबित होता है। 

पीठ दर्द को जड़ से खतम करे मार्जारी आसन


 आसन
मार्जारी आसन एक बहुत ही सरल आसन है जो कि खासतौर पर रीढ़ को लचीला बनाने के लिये किया जाता है। रीढ़ हमारे शरीर का स्‍तंभ होता है, अगर यह ठीक नहीं रहेगा तो आप ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। मार्जारी आसन करने में बहुत ही आसान है। अगर आपको पीठ दर्द रहता है तो आप के लिये यह मार्जारी आसन बहुत लाभकारी होगा। पीठ दर्द की वजह से शरीर के अन्‍य भाग जैसे, कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। मार्जारी आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने तक मार्जारी आसन का अभ्यास किया जा सकता है। यह आसन शरीर को ऊर्जावान बनाता है! आइये जानते हैं मार्जारी आसान करने की विधि और इसका लाभ।
मार्जारी आसन की विधि दोनों घुटनों और दोनों हाथों को जमीन पर रखकर घोड़े की भाति खड़ी हो जाएं। हाथों को जमीन पर बिलकुल सीधा रखें। ध्यान रखें कि हाथ कंधों की सीध में हों और हथेली फर्श पर इस तरह टिकाएं कि उंगलियां आगे की तरफ फैली हों।   7 योग आसन जो आपके पेट को रखें स्वस्थ हाथों को घुटनों की सीध में रखें, बांहें और जांघें भी फर्श से एक सीध में होनी चाहिए। घुटनों को एक-दूसरे से सटाकर भी रख सकती हैं और चाहें तो थोड़ी दूर भी। यह इस आसन की आरंभिक अवस्था है। इसके बाद रीढ़ को ऊपर की तरफ खींचते हुए सांस अंदर खींचें। इसे इस स्थिति तक लाएं कि पीठ अवतल अवस्था में पूरी तरह ऊपर खिंची हुई दिखे। सांस अंदर की ओर तब तक खींचती रहें जब तक कि पेट हवा से पूरी तरह भर न जाए। इस दौरान सिर का ऊपर उठाए रखें। सांस को तीन सेकंड तक भीतर रोक कर रखें। इसके बाद पीठ को बीच से ऊपर उठाकर सिर नीचे झुकाएं। अपनी दृष्टि नाभि पर टिकाएं। सांस धीरे-धीरे बाहर छोड़ें और पेट को पूरी तरह खाली कर दें और नितंबों को भी भीतर की तरफ खींचें। सांस को फिर तीन सेकंड तक रोकें और सामान्य दशा में वापस आ जाएं। इस तरह इस आसन का एक चक्र पूरा होता है। सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जितना भी संभव हो सके, उतना ही धीरे-धीरे करें। सांस अंदर भरने और छोड़ते वक्‍त पांच सेकेंड का वक्‍त लगाएं। लाभ मार्जारी आसन पीठ और कमर की मांसपेशियों के तनाव को कम करने में सहायक है। यह गर्दन, कंधें और रीढ़ की कोशिकाओं पर विशेष प्रभाव डालता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की कोशिकाओं के बीच दबाव कम होता है। इससे रीढ़ की तंत्रिकाओं में स्फूर्ति आती है। इसके अतिरिक्त मासिक धर्म की समस्या और ल्यूकेरिया से छुटकारा दिलाने में भी मार्जारी आसन असरदार साबित होता है। 

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