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jankari369 एलुमिनियम फॉयल में पैक खाना बनाता है आपकी हड्डियों को कमज़ोर

    हम सभी के घर में किसी न किसी रूप में तो एल्युमिनियम का इस्तेमाल होता ही है लेकिन एल्युमिनियम का बहुत अधि‍क इस्तेमाल हड्डियों को कमजोर बना सकता है. शायद आपको पता न हो लेकिन एल्युमिनियम फॉयल में रखा खाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. जब हम किसी गर्म चीज को इसमें लपेटते हैं तो एल्युमिनियम गर्म हो जाता है और इसमें प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है. जिसके चलते एलुमिनियम के कुछ अंश खाने  में भी मिल जाते हैं.
    एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करते वक्त इन बातों का विकास ध्यान रखें-
    एसिटिक चीजों को फॉयल पेपर में रखने से बचें. इससे चीजें जल्दी खराब हो सकती हैं या फिर उनका केमिकल बैलेंस भी बिगाड़ सकता है .  
    फॉयल पेपर में बहुत गर्म खाना रैप नहीं करें. ऐसे में एल्युमिनियम पिघलकर खाने में मिल जाएगा. जिससे अल्जाइमर और डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि आप अच्छी क्वालिटी के फॉयल पेपर का इस्तेमाल करें.
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    अगर आपको लगातार गेम खेलने की आदत बन चुकी है तो सावधान हो जाइए, क्यों कि इसका असर सीधे आपकी सेहत पर पड़ने वाला है. गेमिंग की लत आपको बहुत ज्यादा बीमार कर सकती है. तो आइए हम आपको बताते हैं कि गेमिंग के इस एडिक्शन से कैसे बचें. 
    1-अगर आप सच में कुछ पाना चाहते है और गेमिंग की लत से आजाद होना चाहते हैं तो पहले अपनी हॉबी में बदलाव लाइए. इसकी जगह पर आप किताबें पढि़ए, कुछ रचनात्मक करिए. यदि किसी खेल में रूचि है तो उसे भी खेल सकते हैं. इससे आपका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा.    
    2-आदतों से छुटकारा पाने के लिए आप दोस्तों की मदद ले सकते हैं. अगर आपका कोई अच्छा दोस्त है जो आपको बचपन से जानता हो या आपका करीबी हो तो उसके साथ आप समय बिताइए. उसके साथ खेल भी सकते हैं. किसी अच्छे मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं. वह मुद्दे जो आप दोनों को रिलेट करतें हों. बेवजह की बातें ना करें. 
    3-कोई भी आदत इतनी जल्दी नही जाती है इसलिए पहले आप खुद को गेमिंग के प्रति खुद को सीमित करें. जब आप गेम खेल रहें हो तो एक समय निर्धारित करें कि इतने समय के बाद आप गेम नही खेलोगे. इसके लिए आप टाइमर सेट करिए और उसके बाद तुरंत कंप्यूटर से हट जाइए. इससे धीरे-धीरे आदत में सुधार आएगा.
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    गर्मियों में दही खाने से शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है. इसके अलावा ये पाचन क्रिया के लिए भी बहुत फायदेमंद है. दही में मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन और दूसरे  कई पोषक तत्व शरीर की कई आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होते हैं. लेकिन हर चीज की तरह दही खाने के भी कुछ खास नियम होते हैं. आमतौर पर घर में रात के समय दही खाना गलत माना जाता है. इसके अलावा दही खाने के इन नियमों को जानना भी आपके लिए बहुत जरूरी है.
    अगर आप दिन के समय दही खा रहे हैं तो कोशिश कीजिए कि उसमें चीनी न मिलाएं. अगर आप रात में दही खाने के आदती हैं तो आप उसमें कुछ मात्रा में काली मिर्च मिला सकते हैं.
    अगर आपको बहुत जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम हो जाता है तो रात के समय भूलकर भी दही न खाएं. इससे पेच‍िश होने की आशंका बढ़ जाती है. गर्मियों में ठंडा खाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञों की मानें तो इस दौरान बहुत अधिक तेल-मसाले के सेवन से बचना चाहिए. उन्हीं चीजों को खाना चाहिए जिनकी तासीर ठंडी हो. इससे अंदरुनी ठंडक बनी रहती है और इस लिहाज से दही काफी फायदेमंद है.
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    चिकनगुनिया में  पपीते के पत्ते, तुलसी की पत्ती, अजवायन, लहसुन खाने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं इन चीजों को खाने की सलाह क्यों दी जाती है?
    1-अजवायन में थीमॉल नाम का तेल पाया जाता है जो लोकल एनेस्थिसिया की तरह काम करता है. साथ ही इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण भी पाया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करते हैं. अजवायन में मौजूद ये लोकल एनेस्थिसिया का गुण दर्द को कम करने में मददगार है.
    2-पपीते के पत्तों में चयमोपापिन और पपेन नाम के दो ऐसे एंजाइम पाए जाते हैं, जो प्लेटलेट काउंट्स बढ़ाने में मदद करते हैं. डेंगू और चिकेनगुनिया दोनों ही बीमारियों में प्लेटलेट्स काउंट कम हो जाते हैं, ऐसे में पपीते के पत्ते का रस लेना फायदेमंद है.
    3-तुलसी की पत्तियों में यूगेनोल, सिट्रोनेलालोल, लिनालूल, सिट्रल, लिमोनेने और टेरपीनेयोल जैसे इसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं. इस वजह से ये एक बेहतरीन तापरोधी है. इसके अलावा इसमें मौजूद एंजाइम्स कमजोरी में भी राहत देने का काम करते हैं. इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और बीटा-कैरोटीन इम्यूनिटी को बूस्ट करने का भी काम करते हैं.
    4-लहसुन में फायटो-न्यूट्रिएंट्स, मिनरल्स, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. लहसुन की कली में पाया जाने वाला एल्लीसिन एंटी-वायरल की तरह काम करता है. ऐसे में डेंगू और चिकनगुनिया में लहसुन लेना फायदेमंद होता है .
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    आमतौर पर लोग अच्छी नींद के लिए नींद की गोली ले लेते हैं लेकिन आप चाहें तो नींद की गोली की जगह केले वाली चाय ले सकते हैं. वैसे भी नींद की गोली लेने से अक्सर भारीपन, कब्ज और पेट दर्द की शिकायत हो जाती है.
    अगर आपको भी अच्छी नींद नहीं आती है और सोने के दौरान आप बीच-बीच में उठ बैठते हैं तो केले वाली चाय पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद है. केले में पोटैशियम की भरपूर मात्रा पायी जाती है. इसके साथ ही ये मैग्नीशियम का भी खजाना है. ये दोनों ही तत्व नर्वस सिस्टम को रीलैक्स करने का काम करते हैं और तनाव को कम करते हैं.
    केले वाली चाय बनाने में मुश्किमल से 10 मिनट का समय लगता है. एक छोटा केला ले लें और एक कप पानी में दालचीनी डालकर उसे उबाल लें. जब पानी उबलने लगे तो इसमें केला डाल दें. इसे 10 मिनट तक उबलने दें. इसे छानकर पी लें.
    आपमें से कुछ लोग कहेंगे कि स्वाद के लिए तड़का लगाया जाता है. पर ये पूरी सच्चाई नहीं है. दरअसल, दाल में तड़का न केवल उसके स्वाद को बढ़ाता है बल्किल उसकी पौष्टिकता को भी कई गुना बढ़ा देता है. तड़के के लिए अलग-अलग घरों में अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल होता है और ये सभी चीजें स्वाद और गुणों से भरपूर होती हैं. जानते है दाल में तड़का लगाने के फायदे -
    1-जीरा, तड़के का सबसे जरूरी हिस्सा है. जीरा अच्छे पाचन के लिए रामबाण उपाय है. जीरे के इस्तेमाल से पेट फूलना, डायरिया, एसिडिटी और अपच की समस्या भी दूर रहती है.
    2-कुछ लोग तड़के में करी पत्ते का इस्तेमाल करना भी पसंद करते हैं. करी पत्ती के इस्तेमाल से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है. इससे पाचन सही रहता है, डायबिटीज का खतरा दूर होता है और साथ ही ये दिल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है. करी पत्तिसयों में फाइबर, कार्ब्स, विटामिन ई, बी, ए, सी, आयरन, फास्फोरस  ,और केल्शियम भी  अच्छी मात्रा में पाया जाता है.
    3-हींग का इस्तेमाल जहां स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, वहीं इसके इस्तेमाल से गैस की प्रॉब्लम भी दूर हो जाती है. ये अपच और एसिडिटी में भी खासा फायदेमंद है. पेट की मरोड़ को शांत करने के लिए भी हींग का इस्तेमाल किया जाता है. 
    4-कुछ घरों में लोग तड़का लगाते समय राई के दानों का भी इस्तेमाल करते हैं. राई के दानें मांस-पेशियों के दर्द को दूर करने का काम करता है. ये कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल करने और इम्यूनिटी को बेहतर रखने में मददगार है.
    एक महिला के शरीर में समय-समय पर हार्मोन संबंधी कई बदलाव होते हैं. ऐसे में कुछ जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो महिलाओं के शरीर के लिए जरूरी होते हैं. आइए जानते हैं क्या हैं वे पोषक तत्व-
    आयरन- आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है. आयरन से आपकी कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलता है और अगर ये न हो तो आप थकावट महसूस करती हैं. आयरन के लिए आपको अपने खाने में चिकन, पालक, बीन्स, सभी तरह की हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए.
    फोलिक एसिड- प्रेग्नेंट महिलाओं को फोलिक एसिड की बहुत ज्यादा जरूरत होती है. फोलिक एसिड की कमी के कारण न्यूरल ट्यूब को नुकसान पहुंचता है जिससे दिमाग पर असर पड़ता है. यह सबसे ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियों, जूस, बीन्स और काजू में पाया जाता है.
    फाइबर- फाइबर न सिर्फ आपके ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है, बल्कि आपके पाचन के लिए भी बेहद जरूरी होता है. इसकी वजह से पेट की कई बीमारियां नहीं होतीं. फाइबर से भरपूर  मात्रा में लेने के लिए अपनी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, बाजरा, काजू और बादाम को शामिल करें.
    विटामिन सी- क्या आप निखरी त्वचा चाहती हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आप भरपूर मात्रा में विटामिन सी लें. एक हफ्ते में कम से कम तीन बार संतरे का जूस पिएं. लाल मिर्च, फूलगोभी, सभी खट्टे फलों का सेवन करें.
    अगर आप वजन घटाने के तमाम उपाय करके थक चुके हैं और आपको अपनी अतिरिक्त चर्बी में एक इंच की भी कमी नजर नहीं आ रही है तो हो सकता है आपने अब तक नारियल तेल के उपाय नहीं आजमाए हों. नारियल तेल में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो वजन घटाने में मदद करते हैं. 
    1-नींबू में मौजूद विटामिन सी, पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. इसके साथ ही ये शरीर से विषाक्त पदार्थ को भी निकालने में मददगार है. नींबू के रस के साथ नारियल के तेल को मिलाकर लेने से अतिरिक्त चर्बी पर सीधा असर पड़ता है. एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच नारियल का तेल मिलाकर पीने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.
    2-जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. ये शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया को बढ़ाने का काम करता है साथ ही शरीर में जमे फैट को गलाने का काम करता है. इस मिश्रण को लेने के बहुत देर तक भूख का एहसास नहीं होता है. जिसके चलते समय-समय पर खाना नहीं पड़ता है और वजन वजन घटाने में मदद मिलती है. 
    3-शहद का इस्तेमाल भी वजन घटाने में  के लिए किया जाता है. नारियल तेल के साथ लेने से ये ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करता है. इस मिश्रण को लेने के काफी देर तक भूख का एहसास नहीं होता है. इसके सेवन से फैट-बर्निंग प्रोसेस में तेजी भी आती है. शहद और नारियल तेल की समान मात्रा लेकर एक गिलास गर्म पानी में मिला लीजिए. हर सुबह इस मिश्रण को पीने से वजन घटाने में मदद मिलेगी.

    आजकल के समय में जबकि हमारा ज्यादातर समय ऑफि‍स में ही गुजरता है. ऐसे में अक्सर पोषण अधूरा रह जाता है. खाना-पीने की इस लापरवाही से शुरुआत में तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता है लेकिन बाद में दिक्कत आ सकती है . ऐसे में कोशि‍श करनी चाहिए कि ऑफिस की टेबल पर खाने-पीने की कुछ ऐसी चीजें हों जिससे पेट तो भरे ही साथ ही पोषण भी मिले. ये  कुछ ऐसी ही खाने-पीने की चीजें हैं जिससे शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही दिन भर का पोषण भी:
    1-आपके टेबल पर अगर कुछ फल हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं और उन्हें खाने में भी कोई मुश्किल नहीं. आप कभी भी अपने बैग से एक सेब निकालकर या केला छीलकर खा सकते हैं. ज्यादातर फलों में 80 फीसदी तक पानी होता है, जिससे शरीर भी हाइड्रेटेड बना रहता है. 
    2-आजकल बाजार में तरह-तरह के ग्रेन बिस्कि‍ट्स मौजूद है. इसके अलावा ग्लूकोज बिस्कि‍ट्स का विकल्प भी बुरा नहीं है. ग्रेन बिस्कि‍ट्स में फाइबर होते हैं लेकिन, इन्हें खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें की ये अच्छी क्वालिटी के हों. साथ ही उनकी एक्सपाइरी डेट भी देखना बहुत जरूरी है.
    3-ऑफिस ले जाने के लिए सूखे मेवों से अच्छा कुछ भी नहीं. पर एक ही तरह का ड्राई फ्रूट खाने से बेहतर है  कि उन्हें मिलाकर खाया जाए. मतलब, कुछ बादाम, कुछ काजू, कुछ पिस्ता . इन सबको मिलाकर एक टिफिन में रख लें. सूखे मेवे आयरन से भरपूर होते हैं, जो कि शरीर को एनर्जी देने का काम करते हैं.
    चने की दाल खाने से लोग अक्सर बचते हैं क्योंकि कुछ लोगों को इससे पेट दर्द और गैस की समस्या हो जाती है तो लोगों को इसका स्वाद पसंद नहीं होता लेकिन इसे खाने से कई तरह की बीमारियों में राहत मिलती है.
    1-डायबिटीज में चने की दाल का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है. यह ग्लूकोज की अधि‍क मात्रा को अवशोषित करने में काफी मददगार है.
    2-चने की दाल का सेवन पीलिया जैसी बीमारी में भी बहुत फायदेमंद होता है.
    3-फाइबर से भरपूर चने की दाल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाकर वजन कम करने में भी बेहद फायदेमंद साबित होती है.
    4-चने की दाल जिंक, कैल्शिरयम, प्रोटीन, फोलेट आदि से भरपूर होने के कारण आपको आवश्यक और जरूरी ऊर्जा देती है.
    5-चने की दाल आपके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करती है और हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदद करती है.
    6-चने की दाल खाने से पाचनतंत्र ठीक रहता है और पेट की सारी समस्याओं से राहत मिलती है.
    कैंसर होने के बहुत से कारण होते हैं लेकिन आप चाहें तो अपनी डाइट में कुछ सुधार और बदलाव करके कैंसर के खतरे को काफी कम कर सकते हैं. 
    1-लहसुन में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से सुरक्षित रखते हैं. रोजाना एक या दो कली कच्चा लहसुन खाने से कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है. 
    2-टमाटर में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करते हैं. टमाटर, विटामिन A, C और E का भी बेहतरीन स्त्रोत है. इसके साथ ही ये ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाव का अच्छा उपाय है. टमाटर का जूस पीने या फिर इसे सलाद के रूप में लेना फायदेमंद होता है.
    3-ग्रीन टी पीने से कैंसर का खतरा कम होता है. ये ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से सुरक्षित रखने में मददगार है. नियमित रूप से 2-3 कप ग्रीन टी पीना फायदेमंद होता है  .
    4-ब्रोकली खाने से कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है. इसे माउथ कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, लीवर कैंसर होने का खतरा काफी कम हो जाता है. सप्ताह में दो से तीन बार ब्रोकली खाना फायदेमंद होता है . यूं तो ब्रोकली को सब्जी के रूप में या फिर सूप के रूप में लिया जा सकता है लेकिन ब्रोकली को उबालकर हल्के नमक के साथ लेना सबसे अधि‍क फायदेमंद है.
    5-ब्लू बैरी कैंसर से बचाव का अचूक उपाय है. ब्लू बैरी स्किन, ब्रेस्ट और लीवर कैंसर से सुरक्षित रखने में मददगार है. ब्लू बेरी का रस पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है.
    भुट्टे तो हम शौक से खाते हैं लेकिन उसके बालों को हम फेंक देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं भुट्टे के बालों से बहुत सी बीमारियां दूर रहती हैं.
    1-खून जमने में सहायता करता है: विटामिन K की अधिकता के कारण यह रक्त के जमने की क्षमता को बढ़ाता है. इससे चोट लगने पर खून कम बहता है.
    2-पाचन में सहायक: यह मनुष्य के पाचन तंत्र को मजबूत रखता है. इससे खाना अच्छे से पचता है और भूख भी लगती है.
    3-डायबिटीज को नियंत्रित रखता है: यह रक्त में इंसुलिन की मात्रा को संतुलित रखता है. जिससे डायबिटीज नियंत्रण में रहता है.
    4-ब्लैडर इंफेक्शन से सुरक्षा: यह ब्लैडर में इंफेक्शन पैदा करने वाले माइक्रोब्स को मारता है.
    5-दिल की बीमारियों से बचाव: भुट्टे के बाल से कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल में रहता है और मोटापा भी कम होता है इसलिए यह दिल की बीमारियों से हमारी रक्षा करता है. 
    अगर आपको भी कॉफी पीना बहुत पसंद है तो यकीन मानिए ये खबर पढ़कर आप खुश हो जाएंगे. समय-समय पर आने वाली कई रिपोर्ट में कहा गया है ब्लैक कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.  
    1-अगर किसी को पहले से ही लीवर से जुड़ी कोई बीमारी है तो उनके लिए भी ब्लैक कॉफी पीना फायदेमंद रहेगा. कॉफी एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर  है. एंटी-ऑक्साइड टाइप 2 मधुमेह और पार्किंसन रोग से बचाव करने में सहायक है.
    2-कॉफी में पाए जानेवाले विभिन्न तत्व लिवर पर अच्छा असर डालते हैं. इन तत्वों में कैफीन, कॉफी का तेल, कैफेस्टोल और एंटीआक्सीडेंट प्रमुख हैं.  एपीडेमियोलॉजिकल अध्ययन में ये कहा गया है कि रोजाना लगभग तीन कप कॉफी पीने से लि‍वर को नुकसान होने की आशंका कम हो जाती है.  कॉफ़ी उन लोगो के लिए भी अच्छा पेय है  जो लिवर की बीमारी से जूझ रहे है.
    3-कॉफ़ी बिना चीनी के पीनी चाहिए .अगर आप चीनी मिलाते है तो यह कैफीन के असर को कम कर देता है. आप चाहें तो बेहद कम मात्रा में दूध या चीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं.

    सैचुरेटेड फैट का ज्यादा इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का अहम कारण होता है. रेड मीट, मक्खन, पनीर, केक और घी आदि में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा न बढ़ें इसके लिए इस प्रकार के आहार के सेवन से परहेज करना चाहिए.
    1-हाई कोलेस्ट्रॉल के लिए आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार होते हैं. आनुवंशिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कई बार समय पूर्व ब्लॉकेज और स्ट्रोक की समस्या हो सकती है. आपके परिवार में किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर आप भी इस समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं.
    2-शरीर का ज्यादा वजन हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे को बढ़ा देता है. वजन ज्यादा होने से ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाता है, जो भविष्य में ब्लॉकेज का कारण हो सकता है. हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे से बचे रहने के लिए वजन नियंत्रित रखना जरूरी है.
    3-धूम्रपान और शराब के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है. साथ ही शराब का सेवन लीवर और हार्ट की मांसपेशियों के लिए भी नुकसानदायक होता है, जो कि कई बार हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन जाता है.
    4-लंबे समय तक तनाव में रहना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण हो सकता है. आमतौर पर कुछ लोग तनाव में होने पर शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढने लगता है.
    दूध फट गया है और आप उसे फेंकने वाली हैं तो पांच मिनट रुक जाइए. फटे दूध से जैसे पनीर बनता है वैसे ही उसका पानी भी बहुत उपयोग में आता है. फटे दूध के पानी के हैं ये उपयोग...
    1-पानी की जगह फटे दूध के पानी को आटा गूंदने में इस्तेमाल लाएं. इस तरह गूंथे आटे की रोटियां या पराठे नरम बनते हैं और इसमें प्रोटीन भी मिल जाता है. इसके अलावा आप इस पानी को फल या सब्जियों के जूस में भी मिला सकते हैं. ग्रेवी को खट्टा बनाने के लिये भी आप टमाटर, अमचूर, इमली या दही की जगह फटे दूध का पानी इस्तेमाल कर सकती हैं.
    2-फटे दूध का पानी का फ्लेवर काफी लाइट होता है जिसे उपमा में मिलाने से उपमा का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. उपमा में टेस्ट लाने के लिये टमाटर या दही मिलाने की जगह फटे दूध का पानी मिलाने पर ज्यादा बेहतर स्वाद आता है. आप सूप बनाने के लिये भी इस पानी का इस्तेमाल कर सकती हैं.
    3-फटे दूध के पानी से बालों को शैंपू करने के बाद, दुबारा इस पानी से धोएं और फिर 10 मिनट तक लगा रहने दें और हल्के गर्म पानी से बालों को धो लें. इससे बाल मुलायम बनते हैं और उनमें शाइन आती है. साथ ही इससे अपने चेहरे को धो कर आप त्वचा को मुलायम, टोन्ड, नरम और भीतर से साफ बना सकती हैं. दरअसल इस पानी में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जो कि सिर और त्वचा का pH बैलेंस बनाए रखते हैं.
    अत्यधिक हस्तमैथुन करने और अन्य कारणों के चलते कई पुरुषो के लिंग में टेड़ापन आ जाता है. जिस वजह से सेक्स करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. अगर आप भी ऐसी ही समस्या से पीडत है . तो हम ख़ास आपके लिए इस समस्या से निजात पाने हेतु कुछ कारगर घरेलु उपाय बताने जा रहे है.
    - जैतून के तेल में प्रचुर मात्रा में खनिज लवण पाए जाते है. जिससे रोजाना लिंग की मालिश करने से ना सिर्फ रक्त संचार बेहतर होता है. बल्कि, लिंग का टेड़ापन भी दूर होता है.
    - दालचीनी, बादाम, पिस्ता, जमालघोटा के तेल को बराबर मात्रा में मिला ले. रात को सोते वक़्त तेलो के इस मिश्रण से अपने लिंग की मालिश कर इस पर पान का एक पत्ता बांधें और सो जाए. इस उपाय से लिंग के पतलेपन, टेढ़ेपन दूर करने के साथ ही मर्दानगी भी बढ़ती है.
    - मेहँदी के फुल और फिटकरी को लेकर दोनों का चूर्ण तैयार कर ले. अब इस चूर्ण में बादाम का तेल मिला कर लेप तैयार कर के इस लेप को अपने लिंग पर लगाए और सूखने के बाद इसे साफ़ पानी से धो ले. इस उपाय से लिंग को शक्ति के साथ ही वेहतर स्वास्थ्य मिलेगा.
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    महिलाओ की यौन कल्पनाएं, जिसे वह किसी...
    पुरुषो में स्वप्नदोष जैसी समस्या होना काफी आम है. इस समस्या में रात को सोते समय पुरुष के लिंग से वीर्य निकल आता है. शायद आपको जान कर हैरानी होगी की महिलाए भी स्वप्नदोष की समस्या की शिकार होती है.
    महिलाओ को यह समस्या तीव्र यौन अहसास होने पर होती है. हालाँकि ज्यादातर महिलाओ को इस समस्या का अहसास नहीं होता है. जिसका कारण महिलाओं का जननांग का अंदर की और विकसित होना है. किशोरावस्‍था, युवावस्‍था या काफी दिन तक सेक्स नहीं करने पर महिलाओ को स्वप्नदोष की समस्या हो सकती है.
    इसके अलावा टाइट पैंटी पहनने, सोते वक़्त जननांग या उसके आसपास दबाव पडने या जांघों के बीच हाथ दबाकर सोने से भी महिलाओ की सोई हुई उत्‍तेजना जाग उठती है. जिस वजह से महिलाओ को स्वप्नदोष जैसी समस्या होती है.
    इस लड़की के साथ हर रोज किया जाता था...
    महिलाओ की यौन कल्पनाएं, जिसे वह किसी...
    आज हम आपको नाभि से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे है. नाभि हमारे शक़र्रिर का एक दिलचस्प हिस्सा है. सम्भोग के दौरान पुरुष महिलाओ की नाभि की मदद से उन्हें उत्तेजित कर सकते है. इसके अलावा भी नाभि से जुडी कई दिलचस्प बातें होती है. आईये जानते है इनके बारे में-
    - हमारी नाभि में कुल नाभि मे 67 प्रकार के बैक्टीरिया मौजूद होते है.
    - दुनिया भर में ऐसे केवल 4 फीसदी लोग ही है. जिनकी नाभि बाहर की तरफ निकली है.
    - आपको शायद जानकर हैरानी होगी की दुनिया की सबसे सेक्सी महिला की नाभि ही नहीं है.
    - किसी भी दो व्यक्तियों की नाभि का आकार कभी समान नहीं होता.
    - जिन महिलाओ की नाभि पेट के बिलकुल बीच में होती है. उन महिलाए के बच्चे स्वस्थ्य पैदा होते है.
    - नाभि केवल स्तनधारी जीवो में ही पायी जाती है.
    - पुरुषो की नाभि के आसपास महिलाओ की नाभि से ज्यादा रोएं पाए जाते है.
    महिलाओ के लिये स्वस्थ आहार
    कुछ फायदे चोट लगने के
    भरी भरी जाँघों की जगह टोन्ड थाइस भला किस की चाहत नहीं होती। मोटापा कमर और जांघो से आसानी से प्रदर्शित हो जाता है.अगर आप भी एकदम परफेक्ट और मजबूत थाइस चाहते हैं तो फिर आज से ही शुरू हो जाइये साइकिलिंग बहुत अच्छी एक्सरसाइज है। विदेशों में तो बाकायदा इसके लिए अलग से ट्रैक बने होते हैं. साइकल चलाने वालों के पैर बिल्कुल टोन रहते हैं, इसलिये दिन में एक बार साइकिल जरुर चलाएं। सुबह सुबह रनिंग के अपने ही फायदे हैं। दौड़ने से बड़ी जल्दी वजन कम होता है।
    अगर आपको ट्रेड मिल में दौड़ने से परहेज है तो बाहर पार्क में दौडिये। कुछ योग आसन जैसे, सूर्यनमस्कार आदि जांघो से फैट कम करने में मदद करते हैं। जांघो पर जमने वाला फैट सेल्युलाईट होता है जो कि ट्रांस फैट से आता है। इसलिये आपको बिना ट्रांस फैट वाली डाइट खानी चाहिये। पैरों को सुडौल बनाने के लिये रस्सी कूदना जरुरी है। डांस एक फुल बॉडी एक्सरसाइज है। सालसा डांस करने से पैरों और जाघों पर ज्यादा जोर पड़ता है। इस डांस से आप अपने पैरों को सुडौल बना सकते हैं।
    पैदल चलना हमारे दिल के साथ हमारे पैरों की मजबूती के लिए भी अच्छा होता है। जांघो से चर्बी कम करनी है तो कार या ऑटो की बजाय ऑफिस से घर पैदल ही आइए। ऑफिस जाते हैं या फिर सोसाइटी में लिफ्ट का प्रयोग करते हैं तो उसे बंद कर दीजिये।सीढियों से चढ कर ऊपर तक जाने से जाघों की बेहतर एक्सरसाइज होती है और वजन कम होता है। 
    जानिये नाभि से जुडी रोचक बातें
    महिलाओ को भी होती है स्वप्नदोष की समस्या
    ओवर द काउंटर मेडिसिन्स हमारे शरीर के लिए बहुत घातक होती है और इस बात को हम अपने हर आर्टिकल में आपसे कहते आये हैं क्योंकि वैज्ञानिकों ने हजारों ऐसे निष्कर्ष निकाले हैं जिस से यह बात साबित भी होती है. डॉक्टर्स को  इंसान के शरीर के हर हिस्से, शरीर का स्ट्रक्चर,उसकी कार्यप्रणाली इन सभी चीजों का पूरा ज्ञान होता है इसलिए छोटी से छोटी बिमारी होने पर भी आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए बजाय खुद ही अपना डॉक्टर बनने के।
    प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला अपने और गर्भ में पल रहे शिशु का पूरा ख़याल रखने का हर संभव प्रयास करती है।  लेकिन कभी कभार कुछ गलतियां ऐसी कर बैठती हैं जिसके बाद सिवाय पछताने के और कुछ बाकी नहीं रहता।
    गर्भावस्था के दौरान होने वाले छोटे मोटे दर्द के लिए पैरासिटामोल जैसी आम दर्द निवारक दवा लेने वाली महिलाओं को सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि एक नए अध्ययन में पता चला है कि इस तरह के दर्द निवारकों का प्रयोग करने से आने वाली पीढ़ियों की प्रजनन क्षमता कम होती जाती है। शोधार्थियों ने चूहों पर इस आशय का परीक्षण किया और पाया कि जब एक चूहिया को गर्भावस्था के दौरान सामान्य दर्द निवारक दवाएं दी गईं तो उसकी मादा संतान में अंडाणुओं की संख्या कम थी। कुछ ऐसा ही प्रभाव नर संतानों के जन्म पर भी देखने को मिला। उनके पास उन कोशिकाओं की कमी थी जो भविष्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ा सकते थे।
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