Header Ads

jankari366 67 68 अदरक हल्दी की चाय से होता है मानसिक स्वास्थ्य बेहतर

    चाय पीने से इम्यूनिटी बेहतर होती है. अगर आप चाय में दूध का इस्तेमाल करते हैं तो ये और भी फायदेमंद है. दूध में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डिलयों को मजबूत बनाने का काम करता है. पर हर्बल टी पीना सबसे अधिक फायदेमंद है. खासतौर पर हल्दी-अदरक के गुणों से भरपूर चाय. विशेषज्ञों की मानें तो हल्दी-अदरक वाली चाय पीने से असमय मौत का खतरा कम हो जाता है.
    1-अस्त-व्यस्त जीवनशैली के चलते मोटापे का खतरा काफी बढ़ जाता है . ऐसे में बढ़ी हुई चर्बी को कम करने के लिए भी ये चाय पीना काफी फायदेमंद है. हल्दी और अदरक दोनों में ही कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो फैट बर्न करने का काम करते हैं.
    2-बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम हो जाना एक आम समस्या है. एक बार तबियत बिगड़ी तो उसका सीधा असर पढ़ाई और ऑफिस के काम पर पड़ता है. लेकिन अगर आप हर रोज अदरक-हल्दी की चाय पीते हैं तो आपको सर्दी-जुकाम होने की आशंका बहुत कम हो जाती है. दरअसल, हल्दी और अदरक दोनों ही इम्यूनिटी को बूस्ट करने का काम करते हैं जिससे बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है.
    3-हर रोज हल्दी-अदरक की चाय पीने से मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है. इससे मस्तिष्क का ऑक्सीजन-इनटेक बढ़ जाता है. जिससे दिमाग सक्रिय बना रहता है. इसके साथ ही ये चाय मेमोरी को बढ़ाने में भी मददगार है.
    4-हल्दी में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो तनाव को कम करने में मददगार होते हैं. इसलिए अगर आप हर रोज हल्दी-अदरक वाली चाय पीते हैं तो डिप्रेशन की आशंका कम हो जाती है. 
    जूस पिने के शौक़ीन है तो अपनाये ये...
      भारत में सेक्स को लेकर महिलाए ज्यादा खुल कर बात नहीं करती है. लेकिन उनके दिल में सेक्स से जुडी कई 'गन्दी इच्छाए' रहती है. जो वह शर्म और कई कारणो के चलते अपने पार्टनर से नहीं कह पाती है. आज हम आपको महिलाओ की ऐसी ही यौन कल्पनाए के बारे में बताने जा रहे है. जो वह किसी के साथ शेयर नहीं करती है.
      - ब्रिटिश महिलाए अपने कल्पनाओ में अनजान, बलवान और कामोत्तेजक पुरुष के साथ सम्भोग करने की इच्छा रखती है.
      - एक ऑनलाइन सर्वे के अनुसार, ज्यादातर महिलाओ की किसी कुंवारे लड़के को सेक्स का पाठ पढने की उत्तेजक यौन कल्पना होती है.
      - कई महिलाओ की कोई बलवान सेक्स स्लेव पलने की इच्छा रहती है. जो उनके इशारे पर उन्हें संतुष्ट करने के लिए तैयार हो.
      - महिलाए अपनी यों कल्पना में उस पुरुष के साथ सेक्स को इमेजिन करती है जिसके साथ वह सच में सेक्स का मज़ा ले रही है.
      बाँडेज सेक्स से बनाए अपनी सेक्स लाइफ को मसालेदार, ध्यान रखे यह टिप्स
      महिलाओ को पूर्ण संतुष्टि देती है यह सेक्स पोसिशन्स
      पुरुर्ष अक्सर सेक्स सम्बन्ध बनाने की पहल करते है. लेकिन अगर आप अपने पति के साथ सेक्स संबंधों की पहल कर इस वीकेंड को अपने साथी के लिए बेहद ही ख़ास बना सकती है.
      - सबसे पहले एक ऐसी ड्रेस का चुनाव करे जिसमे आप सेक्सी लगे. आपको इस तरह की ड्रेस में देख कर आपके पति खुद पर काबू नहीं कर पाएंगे.
      - सेक्स सम्बन्ध की शुरुवात एक डीप किस के साथ करे. यह सम्बन्ध बनाने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है.
      - सेक्स सम्बन्ध बनाने से पहले आप माहौल को रोमांटिक करने के लिए रोमांटिक डिनर का सहारा ले सकते है.
      - सेक्स सम्बन्ध बनने से पहले अपने शरीर की अच्छी तरह सफाई कर ले. इससे आपका साथी आपकी तरफ काफी जल्दी आकर्षित होगा.
      - इसके अलावा अपने बालो को खुला रख के ख़ास परफ्यूम का इस्तेमाल कर सकते है. महिलाओ के खुल्ले बालों की तरफ पुरुष काफी जल्दी आकर्षित होते है.
      महिलाओ की यौन कल्पनाएं, जिसे वह किसी को नहीं बताती
      बाँडेज सेक्स से बनाए अपनी सेक्स लाइफ को मसालेदार, ध्यान रखे यह टिप्स


    • नींद का नाम आते ही दिमाग में आराम का ख़याल आने लगता है. कोल्हू के बैल की तरह काम करने के बाद भला किसे नींद प्यारी नहीं लगेगी। आप चाहे किसी कंपनी के मालिक हो या फिर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, अच्छी नींद पर सबका बराबर हक़ है। लेकिन सोते वक्त हमारी बॉडी काम करती रहती है इसलिए हम कैसी नींद लेते हैं, वो आरामदायक है या नही, हम किस दिशा में सोते हैं इन सबका भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। सोते समय हमें कुछ बातों का बहुत ध्यान रखना चाहिये जिससे हम स्वस्थ रह सकें।
      करवटें बदले बिना नींद आना मुश्किल है लेकिन सोते समय हमें बांयी करवट लेकर सोना चाहिये क्योंकि इस तरफ करवट लेकर लेकर सोना हमारे स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है। चलिए देखते हैं की बांयी करवट लेकर सोने के आखिर क्या बेनिफिट्स है. बांयी करवट लेकर सोने से हमारे लीवर और किडनी दोनों को फायदा मिलता है। इससे लीवर और किडनी पर कोई दबाव नहीं पड़ता, पेट का एसिड ऊपर की जगह नीचे की ओर जाता है, जिससे एसिडिटी और सीने की जलन नहीं होती।
      बाएं करवट सोने से दिल पर जोर कम पड़ता है क्योंकि उस समय दिल तक खून की सप्लाई काफी अच्छी मात्रा में हो रही होती है। गर्भवती महिलाओं को भी बायीं करवट लेकर ही सोना चाहिये इससे रक्त का प्रवाह सही रहता है, जो गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ के लिए भी उत्तम है। बाएं ओर सोने की वजह से ग्रेविटी, भोजन को छोटी आंत से बड़ी आंत तक आराम से पहुंचाने में मदद करती है। इस वजह से सुबह के समय आपको सौच में तकलीफ नहीं आएगी और कब्ज जैसी बिमारी आस पास भी नहीं फटकेगी। किसी का हाजमा गड़बड़ रहता है और बदहजमी की शिकायत रहती है, तो उन्हें बायीं ओर करवट लेकर ही सोना चाहिए।
      इस वीकेंड अपने पति को ऐसे करे खुश
      सलाद से जुडे मिथकों का सच



    • पैक्ड जूस चाहे जितनी भी अच्छी क्वालिटी का हो, ताजे फलों के जूस से उनका कोई मुकाबला नहीं. लेकिन अगर आप घर पर जूस निकालते हैं तो आपको कई बातों का ख्याल भी रखना चाहिए. वरना सेहत बनने के बजाय बिगड़ भी सकती है.
      जूस निकालते समय जरूर रखें इन बातों का ख्याल:
      1-बहुत से ऐसे फ्रूट जूस हैं जिसमें हम चीनी मिलाते हैं. ऐसे में कई बार शरीर में शुगर का लेवल भी बढ़ जाता है. कोशिश कीजिए कि जूस को उसके नेचुरल रूप में ही लें.
      2-अगर जूस पीना आपकी आदत है तो कोशिश कीजिए कि जब भी जूस पिएं, ताजा ही पिएं. जूस को स्टोर करके रखना और बाद में पीना सही नहीं है. बहुत से जूस तो ऐसे होते हैं जिन्हें तुरंत पीना तो फायदेमंद होता है लेकिन बाद में पीने से उसका कोई फायदा नहीं रह जाता.
      3-अगर आपका जूस सारे फाइबर्स को एक किनारे कर देता है तो ये सही नहीं है. फलों के फाइबर्स में कई पोषक तत्व होते हैं. ऐसे में बहुत ज्यादा फिल्टर जूस सही नहीं रहेगा. जूस का पल्पी होना जरूरी है तभी पूरा फायदा मिल सकेगा. 
      4-अगर आप मिक्स्ड जूस पीना पसंद करते है तो आपको फलों और सब्जि यों का सही और हेल्दी मेल भी पता होना चाहिए. इसके लिए डाइटिशियन से जरूर बात करें ताकि आपको फलों और सब्जिपयों का तालमेल पता चल जाए.
      5-हेल्दी रहने के लिए आप जूस तो रोजाना निकालते होंगे लेकिन क्या जूसर को नियम से साफ भी करते हैं? अगर आप रोजाना जूसर की सफाई नहीं करते हैं तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. ऐसे में आप जो जूस निकालेंगे वो भी अनहेल्थी ही रहेगा  ऐसे में जूसर को रोजाना साफ करना बहुत जरूरी है.
      ज़्यादा सॉफ्ट गद्दे पर सोना कर सकता है सेहत को ख़राब
      हाल में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 80 प्रतिशत भारतीय लोगों के खाने में प्रोटीन की कमी होती है. 91 प्रतिशत मांसाहारी और 85 प्रतिशत शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी पाई गई है. भारतीयों के खाने में सिर्फ 37 प्रमिशत ही प्रोटीन होता है जबकि पूरी दुनिया में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत है. 
      क्या होता है जब प्रोटीन की कमी हो जाती है? 
      1- बाल झड़ने लगते हैं.
      2- प्रोटीन की कमी होने पर शरीर में एनर्जी  कम  होने लगती है. 
      3- वजन कम होने लगता है.
      4- चोट या जख्म जल्दी ठीक नहीं होते. 
      क्या करे प्रोटीन की कमी होने पर -
      1- प्रोटीन में से सबसे अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन अंडे में होता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि एक स्वस्थ इंसान एक दिन में एक अंडा बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के खा सकता है.
      2-अखरोट प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है. इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स विशेषकर बी6 और कईं मिनरल जैसे आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर और जिंक भी काफी मात्रा में होते हैं. 
      3- सी-फूड और दालों में भी प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए अपनी डाइट में शामिल करने की कोशिश करें. 
      अनहेल्थी खाना डाल सकता है आपके बच्चे...
      आहार और सेहत का चोली दमन का साथ है | अच्छा और संतुलित आहार आपके स्वास्थ का पर्याय है| आपके भोजन में विटामिन्स, मिनरल्स, खनिज, लवण , प्रोटीन्स, कैल्शियम , जितनी संतुलित मात्रा में होंगे उतना ही आपके स्वास्थ बेहतर होगा |इस लेख में जानेगे कौन सा पोषक तत्व हमारे स्वास्थ के लिये कितना आवश्यक है | 
      आइये जाने भोजन के कौन से पोषक तत्व हमारे स्वास्थ पर कैसे असर डालते है :- 
      आयरन  : आयरन खून में लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में विशेष योगदान प्रदान करता है, इसके अलावा यह शरीर में ऑक्सीज़न के परिवहन को सुगम बनाता है। 
      मैंगनीज : यह इम्यूनिटी को बेहतर करता है। साथ ही बाल, त्वचा और नाखून की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी तत्व है।
      ज़िंक  : यह शरीर के किसी भी हिस्से में घावों को भरने का काम करता है। पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने में इसका खास योगदान होता है। इम्यून सिस्टम को ज़िंक के सेवन से बेहतर किया जा सकता है।
      आयोडिन  : आयोडिन त्वचा, बालों और नाखून को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
      पोटेशियम : पोटेशियम शरीर में पानी के स्तर को संतुलित रखने के साथ तंत्रिका संचरण को भी सुचारु रखने में मदद करता है। साथ ही यह मांसपेशियों के संकुचन के भी सहायक होता है।
      कैल्शियम  : यह हड्डियों व दांतों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए ज़रूरी तत्व  है। सर्दियों में स्किन को रूखेपन और एलर्जी से कैसे बचाएं नवजात शिशु की देखभाल और सावधानियाँ स्तनपान कराते समय रखे इन बातों का ख़याल सुबह की सैर से तन रहे तंदरुस्त रिश्तों को खुशहाल बनाये ये बातें !!
      दोस्तों एक स्वस्थ जीवनशैली ही एक मात्र उपाय है जिससे आप स्वस्थ और तंदुरुस्त रह सकते है| आप चाहे कितना भी समय जिम में क्यों न लगाए अगर आपका रहन सहन समय और प्रकृति अनुकूल नहीं है तो आप पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो सकते इसलिये शुरू से ही इस बात पर बल देना चाहिये की आप अपनी जीवनशैली को ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक और समय अनुकूल कैसे रखे | आयुर्वेद कहता है की भोजन ,शयन ,शौच और स्नान जिनके नियमित और सही समय पर है वो सेहतमंद रहते है| 
      आइये जाने कुछ उपयोगी एवं आसान टिप्स :-
      1 जीवन में नियम बना लें की संतुलित भोजन और  व्यायाम से दिन की शुरुआत करेंगे |
      2 सुबह और शाम की सैर का नियम बना लें |
      3 भरपूर पानी पिये ,ताँबे के लौटे का पानी पि सके तो अति उत्तम |
      4 सलाद और कच्ची सब्झीयों को अपने आहार में शामिल करे |
      5 शराब ,सिगरेट और किसी भी तरह के नशे से दूर रहे |
      6 भरपूर नींद लें, सुबह उठने और रात को सोने का निशित समय सारिणी बनाये और ताड अनुरूप कार्य करे |
      7 दिन में एक बार कोई भी मौसमी फल एवम सूखे मेवे ज़रूर खाये |
      6 हफ्ते में एक बार पूरे शरीर पर तेल मालिश करे | तेल में नारियल तेल, तिल का तेल, सरसो का तेल आदि अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के हिसाब से प्रयोग करे |
      7 दिन में दो बार मंजन करने की आदत रखे , इससे आपके दांत तो साफ रहेंगे ही आप की पाचन क्रिया भी मजबूत रहेगी |
      8 सुबह नाश्ता करे , खाली पेट चाय न पिये |
      9 रोज सुबह की हलकी धुप में 10 मिनिट ज़रूर बैठे |
      10 ओस भरी दूबों पर नंगे पाँव चले, ऐसे आप दिन भर तरोताज़ा बने रहेंगे |
      11 बासी खाना,जंक फ़ूड, प्रिज़र्वेटिव युक्त भोजन, चाय कॉफ़ी, सोडा , निकोटीन युक्त सॉफ्ट ड्रिंक न पिये | इसके बदले नारियल पानी , फलों के रस , दूध, छांछ आदि का प्रयोग करे | सर्दियों में भी पिये भरपूर पानी जब करे ठण्ड में तफरी तो बरते ये सावधानियां सुखी वैवाहिक जीवन की अनिवार्य शर्ते चेहरे की बनावट बताता है आपका स्वाभाव अवसाद से बचने के अचूक उपाय
      आपने शिशु को तकिया नहीं लगाने की बात सुनी होगी. ऐसा माना जाता है कि शिशु को तकिया लगाने से उनकी जान तक जा सकती है. कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं और कुछ सच. असली बात पर सबका विरोधाभास रहता है. 
      1-विशेषज्ञों का मानना रहा है कि हाल ही में पैदा हुए बच्चे और छोटे शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए तकिया लगाना नुकसानदायक रहता है. एक-दो दिन के बच्चों के लिए तो तकिया लगाना कई बार खतरनाक भी साबित हो जाता है.
      2-ऐसे में बेहतर होगा कि इन शिशुओं को उन्हें मां की गोद में या फिर बिस्तर पर सीधे ही सुलाएं. मां की गोद से अच्छी जगह शिशुओं के लिए कोई नहीं. 
      3-तकिया लगाने से शिशु की मौत होने का खतरा होता है. कई बार बच्चों का तकिया की वजह से दम घुट जाता है. दरअसल तकिया लगाने से बच्चे का सांस नली अंदर से मुड़कर दब जाने का खतरा होता है. ऐशा उनके कोमल औऱ नाजुक शरीर की वजह से होता है. तो बच्चे को तकिया कभी ना लगायें. इससे उनके जान जाने का खतरा होता है.
      गेहूं से बनी चीजें बहुत पौष्टिक होती हैं और इसको खाने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. एक्सचपर्ट के अनुसार गेहूं, मैदे के मुकाबले ज्या दा स्वा स्य्की वर्धक माना जाता है. गेहूं पेट के लिये बहुत हल्का  होता है और आसानी से पचाया जा सकता है.
      1-खांसी होने पर 20 ग्राम गेहूं के दानों में नमक मिलाकर 250 ग्राम पानी में तब तक उबालें, जब तक कि पानी की मात्रा एक तिहाई न रह जाए. इसे गरम-गरम पी लें. लगातार एक हफ्ते तक यह प्रयोग दोहराने से खांसी जल्दी चली जाती है . 
      2-गर्मी में 80 ग्राम गेहूं को रात में पानी में भिगोकर सुबह अच्छी तरह पीसकर छान लें. चाहें तो इसमें मिश्री मिला लें और उस रस को पीने से शरीर शांत रहता है.
      3-अगर खून को साफ करना है तो गेहूं को नियमित खाने में शामिल करें.
      4-गेहूं में विटामिन ई, सीलियम और रेशे पाए जाते हैं जो कि कैंसर की सेल को पनपने से रोकते हैं.
      5-गेहूं से बने हरीरा में शक्कर और बादाम मिलाकर पीने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और दिमाग की कमजोरी दूर होकर दिमाग तेज चलने लगता है.
      6-गेहूं से बने हलवे को रोज सुबह खाली पेट खाने से आंखों की समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
      मसालेदार खाने में भी अदरक का अहम योदगान होता है लेकिन शायद आप अदरक खाने के इस फायदे अनजान होंगे. हाल में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें कैंसर रोधी गुण मौजूद हैं जो खास तौर से महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर से बचाने में कारगर साबित होते हैं. यह शरीर में कैंसर पैदा करने वाली कोशि‍काओं को ब्लॉक करता है और कैंसर को फैलने से रोकता है.
      शोधकर्ताओं के अनुसार अदरक में पाया जाने वाला कैंसर रोधी तत्व क्षतिग्रस्त कोशि‍काओं को भी पुन: संरक्षि‍त करने में सक्षम रहा, वह भी कीमो से 10 हजार गुना बेहतर और मजबूत तरीके से. हालांकि‍ कैंसर कोशि‍का पर किए गए इस शोध के बाद शोधकर्ताओं का मानना है कि, असल में मानव कोशि‍का पर यह कितना प्रभावकारी सिद्ध होगा यह देखने वाल बात होगी.
      प्रतिदिन अपनी डाइट में किसी भी तरह से अदरक को शामिल कर हम कैंसर को जड़ से समाप्त कर सकते हैं. स्तन कैंसर के मामले में अदरक का सेवन ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है और कैंसर बनने की संभावनाओं को कम करता है. 

      मंथली पीरियड्स समय पर होना इस बात को दर्शाता है की महिलाओ का प्रजनन तंत्र सही तरह से काम कर रहा है। पीरियड्स के समय में महिलाओ को दर्द का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन थोड़ी लाइफस्टाइल में बदलाव कर और कुछ घरेलु उपयो को अपनाकर माहवारी के समय में आप इन समस्याओ से छुटकारा पा सकते हो। एक हीटिंग पैड या फिर गर्म पानी की बोतल लेकर उसे 5 से 10 मिनट तक अपने निचले एब्डोमेन पर रखे। इसके बाद थोडा आराम कर के दोबारा इस प्रोसेस को रिपीट करें।
      दूसरा ऑप्शन यह है कि एक टॉवल को गर्म पानी में भिगोये और फिर टॉवल को निचोड़कर उसमे से ज्यादा का पानी निकाल ले और फिर इसे निचले एब्डोमेन पर रखे, तब तक टॉवल रहने दे जब तक वह पूरी तरह से ठंडा नही हो जाता। गर्म शावर लेने से भी आपको राहत मिल सकती है,पीरियड्स के समय में आपको जो परेशानी या दर्द होती है, इस उपाय से आपको उससे राहत मिल सकती है। पीरियड्स में हैल्दी ईटिंग बहुत जरुरी है। अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थो को शामिल करे जो विटामिन सी से भरपूर हो, इससे आपको पीरियड्स के समय में मदद मिलेगी।
      शिमला मिर्च, हरे पत्तो वाली सब्जियां, हरी फूलगोभी, कीवी, टमाटर, मटर, एसिड फ्रूट्स और पपीते को अपनी डाइट में शामिल करें। पीरियड्स में सिमित मात्रा में ही पानी का सेवन करे, इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। सिमित मात्रा में तरल पदार्थ पीने से आपके शरीर के अंदर के प्रोसेस आसान हो जाते है। जो महिलाए फिट रहती है वे रोज़ एक्सरसाइज करती हैं ऐसी महिलाये पीरियड्स के दिनों में स्वस्थ और तंदरुस्त रहती है। दूसरी तरफ देखा जाये तो ज्यादा वजन वाली महिलाये और ऐसी महिलाये फिट नही है उन्हें पीरियड्स के दिनों में काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है। एक्सरसाइज करने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन मजबुत होता है और पीरियड्स के समय महिलाओ को ज्यादा दर्द भी नही होता।
      कपालभाती प्राणायाम एक शारीरिक और सांस लेने की प्रक्रिया है जो दिमाग के लिए फायदेमंद है. इससे शरीर के सभी नकारात्मक तत्व निकल जाते है, और शरीर और मन सकारात्मकता से भर जाता है. योगा पूरी दिनचर्या अच्छे से गुजरती है. सिर्फ कपालभाती ही ऐसा प्राणायाम है जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध कर सकता है. रोग नाशक औजार के रूप में इसके अदभूत नतीजे है. इसे दूनिया भर में प्रसिद्ध करने के लिए योग गुरुओं ने बहूत परिश्रम किया है.
      कपालभाती प्राणायाम सांस से सम्बंधित व्यायाम है, जो कई बीमारियाँ दूर करता है. ‘कपाल’ का मतलब होता है माथा और ‘भाती’ का मतलब होता है प्रकाश। रोज नियमित कपालभाती करने से व्यक्ति के चेहरे पर कांती या चमक आती है. रीढ़ की हड्डी को सीधे रखके पैरो को अपने सामने मोड़ कर बैठे. एक लंबी सांस ले और एकदम से सांस छोडिये. सांस लेने पर नही सांस छोड़ने पर ज्यादा ध्यान दे. आप जब सांस छोड़ते हो तो आपके पेट की अतडियाँ निचे चली जानी चाहिए और सांस लेते समय वे ऊपर आ जानी चाहिये.
      इसे एक बार में 10 बार ही करे फिर थोडा आराम करे और इसे ऐसे ही 2 बार और करे. सभी रोगों में कपालभाती नही किया जा सकता है इसलिए किसी तरह की बीमारी हो तो चिकित्सक की सलाह ले कर ही करे जैसे की रीढ़,हर्निया, दिल से संबंधित बीमारी वालों को इस प्राणायाम को नही करना चाहिए. श्वसन प्रणाली और सर्दी व नाक से संबधीत रोगों में भी इसे न करें. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज है, पेट में अलसर है वे इसे ना करे. इसलिए इसे डॉक्टर सलाह अथवा किसी योग गुरु की सलाह से ही करे.
      कैंसर दुनिया की सबसे तेज़ी से फैलने वाली बीमारी मानी जाती है. भारत में कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा है. कैंसर को समझने के बहुत आसान तरीके है, यदि आपको अचानक ही खून की छिके आ रही है, कफ में खून आने लगे, अचानक ही वजन कम होने लगे तो तुरंत अपनी जांच एक बार डॉक्टर से अवश्य करा ले. क्योकि ऐसे में आपको कैंसर भी हो सकता है. कैंसर के कुल मरीजो में से कुछ लिप, ओरल कैविटी, कोलोरेक्टम, सर्विक उटेरी, प्रोस्टेट और लंग कैंसर के भी मरीज हमें दिखाई देते है.
      शरीर में कोशिकाओं के समूह की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर है.जब ये कोशिकाएं टिश्यू को प्रभावित करती हैं तो कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है. कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन यदि कैंसर का सही समय पर पता ना लगाया गया और उसका उपचार ना हो तो इससे मौत का जोखिम बढ़ सकता है. वैज्ञानिक युग में कैंसर का इलाज है. बस इसके लिए हमें कुछ सावधानिया बरतनी होगी. कैंसर ना हो इसके लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए. 
      शक्कर से बने पेय और हाई कैलोरी वाले फ़ूड खाना बंद करे. हर तरह की सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा खाने की कोशिश करे, फल खाये. मॉस खाना बंद करे और साथ ही परिवर्तित खाना ग्रहण न करे. यदि आप शराब पीते हो, तो उसकी एक सीमा निर्धारित कर ले. ज्यादा नमक का सेवन न करे और परिवर्तित खाने को नमक डालकर न खाये. माताओं को अपने बच्चो को कम से कम पहले छः महीनो तक तो भी अपना दूध पिलाना चाहिये. कैंसर से बचने के लिये तम्बाखू उत्पादों का सेवन बिल्कुल न करे, चोट लगने पर उसका सही उपचार करवाए.
      जिमिकंद एक गुणकारी सब्जी है, जिसमें कई तरह के गुण हैं, इनको खाने से बीमारियां दूर होती हैं और शरीर निरोग रहता है, इनके गुणों को जानकर इससे दूर नहीं रह पायेंगे आप.
      1-जिमीकंद में पाया जाने वाला कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में ब्लड के फ्लो को दुरुस्त करता है. और आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद करता है. 
      2-जिमीकंद में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ने में सहायक होता है. साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह आहार गठिया और अस्थमा रोगियों के लिये सबसे अच्छा होता है. 
      3-जिमीकंद में पोटैशियम की मौजूदगी के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है. इसे नियमित खाने से कब्ज और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है. 
      4-फाइबर से भरपूर होने के कारण जिमीकंद के सेवन से आपको भरा हुआ महसूस होता है. जिससे आप आसानी से वजन कम कर सकते हैं. अगर आप भी अपना वजन कम करना चाहते हैं तो जिमीकंद को अपने आहार में शामिल करें. 
      5-आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो. जिमिकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक, चरपरा, कफ व बवासीर रोगनाशक है. इसे आप कभी-कभार इसलिए खा सकते हैं, क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में आयरन भी पाया जाता है. 
      नींद न आने के बहुत से साइड इफेक्ट्स के बारे में आप और हम जानते हैं और सुन चुके हैं लेकिन ये खबर शायद बहुत से लोगों को चौंका देगी। एक शोध में यह बात सामने आई है कि नींद कम आने या अच्छी नींद न आने से गुर्दे के मरीजों में गुर्दे ठीक तरह से काम नहीं कर पाते। इस कारण परेशानी और बढ़ जाती है। हाल ही में किये गए इस शोध के अनुसार कम और अधूरी नींद क्रॉनिक किडनी डिजीज के खतरे को और बढ़ा देता है।
      इस शोध से पता चलता है कि नींद और गुर्दे की कार्यप्रणाली के बीच संबंध है। यह सीकेडी वाले व्यक्तियों में नींद की आदतों में सुधार के लिए एक नैदानिक परीक्षण की जरूरत को रेखांकित करता है। हालांकि ज्यादा साक्ष्य हैं कि सीकेडी से पीड़ित लोगों में नींद से जुड़ी विकृतियां आम बात है। इसके सीकेडी से जुड़े होने के तथ्य अज्ञात हैं. इस शोध में प्रतिभागियों ने औसत 6.5 घंटे प्रति रात नींद ली।
      इस दौरान 70 व्यक्तियों में गुर्दे की विफलता देखने को मिली और 48 व्यक्तियों की मौत हो गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में अतिरिक्त घंटों की वृद्धि से 19 प्रतिशत तक गुर्दे की विफलता का खतरा कम होता है। इस शोध से एक बात तो साफ़ हो गयी हैं कि क्यों बड़े बुजुर्ग हमें कम से कम 8 घण्टे की नींद लेने को कहा करते हैं।
      आजकल हर माँ बाप अपने बच्चों को टॉप पोजीशन पर देखना चाहते है. 100 में से 99 नंबर लेन वाले बच्चों पर भी एक नंबर ज्यादा लाने का प्रेशर डाला जाता है. इतना ख्याल रखिये की बच्चा कोई रोबोट नहीं है बल्कि आप ही की तरह हाड़ मांस से बना इंसान है. अगर मेमोरी पावर बढ़ाने की बात है तो कुछ बातें अपनाकर आप बच्चो को बेहतर दिमाग और याददाश्त दे सकते है. आजकल बच्चो को आउटसाइड फूड्स यानि पिज़्ज़ा, बर्गर, समोसा, चॉकलेट, चिप्स जैसी चीजें ही ज्यादा पसंद आती है आती है लेकिन इनके पौष्टिकता कुछ भी नहीं होती और गाहे बगाहे कुछ बीमारियां इना में मिल ही जाती हैं इसलिये उन्हें घर के बने पौष्टिक खाने की बचपन से आदत डाले इससे उनका संपूर्ण विकास होंगा.
      हम अपने बच्चों को बचपन से ही किताबे पढ़ने की आदत डाले तो उनकी कॉनसन्ट्रेशन भी बढेंगी और उनके नॉलेज में भी इजाफा होगा. वैसे भी कहावत है कि किताबे मनुष्य की सबसे अच्छे दोस्त होती है, अगर आप उनके सामने पढ़ेंगे तो उन्हें भी किताबें पढ़ने का ख्याल आएगा। म्यूजिक सुनने और सीखने से मन को शांती मिलती है. बच्चों को बचपन से ही संगीत की शिक्षा दी जाये तो उनके ब्रेन का डेवलपमेंट बेहतर होता है संगीत से बच्चों की और कॉनसन्ट्रेशन और आईक्यू दोनों बढ़ जाते है.
      माता-पिता का आपसी संबध से बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है. इसलिये परिवार में ज्यादा हँसी खुशी का माहौल हो तो बच्चो का तन-मन का संपूर्ण विकास होता है. जितना हो सकें बच्चों के सामने ना लड़े। जो बच्चे स्मोकींग करने वाले लोगों के संपर्क में आते है उनके मस्तिष्क पर उस धुम्रपान से उठने वाले धुंए से बहुत बुरा असर पड़ता है. उनकी आईक्यू 90 से कम हो जाती है. इसलिए अगर आपके स्मोक करता है तो बच्चों को उनसे उस समय :
      नीम की पत्तियों से लेकर उसकी छाल और बीज का इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है. नीम के बीज से बने तेल में इतने उपयोगी गुण हैं जो आपकी सेहत और सौंदर्य दोनों को ही फायदा पहुंचा सकते हैं.
      1-नीम के बीज के तेल का उपयोग हर्बल उत्पादों के घटक के रूप में किया जाता है. नीम के बीज के तेल से आपकी त्वचा नर्म, चिकनी और चमकदार बनती है.
      2-इससे त्वचा स्वस्थ और दाग धब्बों से मुक्त रहती है. नीम के बीज से बने तेल में मौजूद प्राकृतिक एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण इसको उपयोग त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याओं जैसे सोरेसिस, एक्जिमा, मुहांसों आदि में किया जाता है.
      3-अपने पालतू जानवर के कीटाणुओं से संक्रमित होने पर हम नीम का तेल फायदेमंद होता है .नीम का तेल आपके पालतू जानवर के लिए भी बहुत उपयोगी होता है.
      4-उनके बालों में नीम के बीज से बना तेल लगाये. इससे उनके बालों में मौजूद कीटाणु दूर होने के साथ-साथ बाल भी चमकीले हो जायेगें. इस उपचार से जानवर को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता.
      आयुर्वेद में भुट्टा खाने के कई फायदे गिनाए गए हैं. ये प्यास को शांत करने वाला होता है. अच्छी बात ये है कि एक ओर जहां बहुत सी चीजें पकने के बाद अपना पोषक गुण खो देती हैं वहीं भुट्टे का पोषण और बढ़ जाता है. भुट्टा कैरेटोनॉएड और विटामिन ए का स्त्रोत है.
      भुट्टा खाने के फायदे:
      1-कभी आपने ये सोचा है कि पूरा भुट्टा खा लेने के बाद उसे बीच से तोड़कर सूंघते क्यों हैं? इसे सूंघने से सर्दी-जुकाम में फायदा होता है.
      2-आप चाहें तो इसे सुखाकर जला लें. सर्दी होने पर इसका धुंआ लेना फायदेमंद होता है . इसके अलावा ये खांसी में भी बहुत फायदेमंद है.
      3-बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है. इसमें कोलेस्ट्रॉल न के बराबर होता है और इसलिए ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है. 
      4- इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है. जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है.
      अगर आपको हैंगओवर के वक्त ऑफिस का काम भी करना है तो नाशपाती आपके लिए बहुत अच्छा उपाय साबित होता है. क्योंकि आमतौर पर शराब का सेवन शरीर को डीहाइड्रेट कर देता है, जिससे प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन प्रभावित होता है. लेकिन नाशपाती में मौजूद शुगर इस संतुलन को फिर से बनाता है. नाशपाती में मौजूद विटामिन सी शरीर को पोषण देता है जो हैंगओवर से लड़ने में मददगार होता है और नाशपाती में मौजूद मैग्नीशियम हैंगओवर में होने वाले सिरदर्द को कम करता है. साथ ही नाशपाती से मतली की समस्या और ध्यान केंद्रित करना आसान हो जाता है.  
      एल्कोहल के सेवन के बाद सोते समय सबसे पहले एक नाशपाती या फिर एक गिलास नाशपाती का जूस पियें. इससे आप अगली सुबह फ्रेश फील करेंगे. नाशपाती का जूस बनाने के लिए नाशपाती के टुकड़ों, थोड़ा पानी, शहद और अदरक को मिलाकर पीस लें.
      ये सभी चीजें हैंगओवर दूर करती हैं. तो फिर देरी किस बात कि अब जब भी आपको कॉकटेल पार्टी में जाना हो तो पहले नाशपाती खा लें या पार्टी की अगली सुबह हैंगोवर से सिर आपका घूमें, तो दवा की बजाए नाशपाती का सेवन करें. 
      स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पानी पीने से कहीं बेहतर है कि हम पानी खाएं. उनके अनुसार, पानी पीने से कहीं ज्यादा अच्छा होगा कि हम पानी से भरपूर ज्यादा से ज्यादा चीजों को खाएं.
      हेल्दी हाइड्रेशन से मतलब उस पानी से है जो हमारे शरीर में जमा रहता है न कि वो पानी जो हम पीते हैं और सीधे शरीर के बाहर निकल जाता है. खाने की ऐसी चीजे जिसमे पानी की बहुत अधिक मात्रा होती है, उसमें कुछ ऐसे कण पाए जाते हैं जो आसानी से कोशिकाओं द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं. ये कण एक लंबे समय तक हमारे शरीर में मौजूद रहते हैं जिससे लंबे समय तक पोषण बना रहता है.
      जब हम पानी पीते हैं तो वो सीधे हमारे पाचन तंत्र से होकर गुजर जाता है जिससे विटामिन और लवणों का बहुत सा पोषण नहीं मिल पाता लेकिन जब हम पानी से भरपूर कोई चीज खाते हैं तो हमारी कोशिकाओं को विटामिन और लवणों का पोषण भरपूर मात्रा में मिल जाता है.
      इसके साथ ही जब हम पानी खाते हैं तो हमारे शरीर में पानी धीरे-धीरे करके जाता है जो सीधे पानी पीने से कहीं बेहतर है. पानी का अवशोषण जितना धीरे होगा, उतने ही लंबे समय तक वो हमारे शरीर में बना रहता है, जोकि सेहत के लिए हर लिहाज से अच्छा है.
      क्या आप जानते हैं सिंघाड़ा गुणों की खान है. इसके अनेक फायदे है. यह कई बीमारियों से आपकी रक्षा करता है. आप भी जानिए इसके फायदेः
      1-सिंघाड़ा बवासीर जैसी मुश्किल समस्याओं से भी निजात दिलाने में कारगर साबित होता है.
      2-अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद होता है. सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी आराम मिलता है.
      3-सिंघाड़ा खाने से फटी एड़ि‍यां भी ठीक हो जाती हैं. इसके अलावा शरीर में किसी भी स्थान पर दर्द या सूजन होने पर इसका लेप बनाकर लगाने से बहुत फायदा होता है.
      4-सिंघाड़ा शरीर को ऊर्जा देता है, इसलिए इसे व्रत के खाने में शामिल किया जाता है. इसमें आयोडीन भी पाया जाता है, जो गले संबंधी रोगों से रक्षा करता है और थाइरॉइड ग्रंथि को सुचारू रूप से काम करने के लिए प्रेरित करता है.
      5-प्रेग्नेंसी में सिंघाड़ा खाने से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं. इससे गर्भपात का खतरा भी कम होता है. इसके अलावा सिंघाड़ा खाने से पीरियड्स की समस्याएं भी ठीक होती हैं.
      पान बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों में से एक प्रमुख चीज सुपारी भी है. पान-मसालों के अलावा कुछ लोग इसे यूं भी चूने के साथ खाना पसंद करते हैं. स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक होने की वजह से दुनिया के कई देशों में इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है.
      1-इसके इसतेमाल से कैंसर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों का मानना है की इसे पान मसालो से हटा देना चाहिए दिया जाना चाहिए. सुपारी खाने से कई तरह के स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं:
      2-इसमें कई विषाक्त तत्व हो सकते हैं. हो सकता है कि ये शरीर में पहुंचकर दूसरे तत्वों के साथ क्रिया करके कुछ ऐसी गैसों और रासायनिक पदार्थों का स्त्रावण करे जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हों.
      3-कई अध्ययनों में पाया गया है कि सुपारी खाने से हार्ट से जुड़ी कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही ये मोटापा भी बढ़ाता है.
      4-हर रोज सुपारी का इस्तेमाल करने से ये एक नशे की तरह साथ जुड़ जाता है. डॉक्टर भी न चबाने की हिदायत देते हैं.
      थायरॉइड एक ऐसी ही बीमारी है जिसमें वजन तेजी से बढ़ने लगता है और अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह शुगर जैसी कई बीमारियों की वजह भी बन सकता है. इस बीमारी को थोड़ी सी सजगता और खानपान की सही आदतों को अपनाकर ठीक किया जा सकता है. 
      1-विटामिन और मिनरल्स युक्त चीजों को डाइट का हिस्सा बनाएं. यह थायरॉइड की अनियमितता में फायदेमंद होता है. पनीर, हरी मिर्च, टमाटर, प्यााज, लहसुन, मशरूम में पर्याप्त मात्रा में विटामिन और लवण पाए जाते हैं. 
      2-कम वसा युक्तप आहार का सेवन करें. इसके साथ ही गाय का दूध भी थायरॉइड के रोगी के लिए फायदेमंद होता है. खाना बनाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद रहेगा.
      3-रोगी को उन पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें आयोडीन की भरपूर मात्रा हो क्यों कि इसकी मात्रा थायरॉइड फंक्शन को प्रभावित करती है. सी फूड खासकर मछलियों में आयोडीन की मात्रा भरपूर होती है इसलिए इन्हें डाइट में शामिल करना न भूलें. 
      4-कॉपर और आयरन युक्तं आहार लें क्योंकि यह भी थायरॉइड फंक्शनन को प्रभावित करते हैं. कॉपर की सबसे ज्या-दा मात्रा काजू, बादाम और सूरजमुखी के बीज में होती है और हरे पत्ते.दार सब्जियों में आयरन भरपूर मात्रा में होता है.
      इन खानों से बचे  -
      1. सोया और उससे बनीं चीजों के सेवन से बचें.    
      2. जंक और फ़ास्ट  फ़ूड का सेवन कम  से कम करे . 
      3. ब्रोकली, गोभी जैसे सब्जियों के सेवन से बचें.
      शायद यह जानकर आपको थोड़ी हैरानी हो, लेकिन आपके वजन बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण आपका घर भी हो सकता है. इसलिए घर और इससे जुड़ी कुछ आदतों में बदलाव करना चाहिए तो चलिये जाने की क्या हैं घर के ये मोटापा बढ़ाने वाले कारण और इन्हें ठीक करने के तरीके. 
      1-विशेषज्ञ बताते हैं कि जब आप मल्टीटास्किंग करते हुए भोजन करते हैं तो आप त्रप्त नहीं हो पाते और ज्यादा खा लेते हैं. शयनकक्ष में टीवी देखने से भी  मोटापा बढ़ सकता है . तो खाते समय टेलीविजन से दूर ही रहें. 
      2-अपने वजन को बढ़ने से रोकने के लिए अच्छी और पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी होता है. जब आप थके होते हैं तो, लेप्टिन का स्तर, जो कि भूख को नियंत्रित करता है, कम होता है. जबकि भूख उत्तेजक, घरेलिन स्तर बढ़ जाता है. सोने से लेप्टिन का स्तर बढ़ता है और अधिक खाने की आदत से बचाव होता है. तो बिस्तर को साफ और आरामदायक रखें और अच्छी और पर्याप्त नींद लें. 
      3-अपनी कंप्यूटर टेबल, लिविंग रूम आदि में स्नैक्स रखने से आप बिना भूख के भी कई बार ये नुकसान दायक खाद्य खाने लगते हैं. जिस कारण आपका मोटापा बढ़ने लगता है. बेहतर होगा कि इस प्रकार के फैटी स्नैक्स को रसोई की एक अलवाली में ही रखें और आसान पहुंच से दूर रखें.   
      चोट लगना भले ही एक समस्या की तरह हो, लेकिन इसके कई छुपे हुए फायदे भी हैं, एथलीटों और नियमित व्यायाम करने वालों को चोट लगने की संभावना अधिक होती है .इन फायदों के बारे में भी जानें.
      1-इस मामले में एथलीट और खिलाडि़यों को अधिक फायदा है. अगर किसी एथलीट को चोट लगी है तो उसे सुबह-सुबह होने वाले ट्रेनिंग से बच सकता है. यानी अब आपके पास देर तक सोने का सुनहरा मौका है.
      2-खाना पकाना भी एक कला है, स्वादिष्ट खाना पकाने के लिए अधिक समय की जरूरत होती है. चोट लगने के बाद आपके पास समय का अभाव नहीं है, ऐसे में समय व्यतीत करने के लिए कुकिंग बेहतर विकल्प हो सकता है.
      3-अगर आप समय अभाव के कारण किताब पढ़ने से बचते हैं, तो इस समय किताबों को खंगालने का अच्छा मौका है. कोई अच्छी सी किताब चुनें और चोट ठीक होने तक उसे पूरा करने की कोशिश करें.
      4-चोट लगने के बाद आप अपने दोस्तों के साथ अधिक से अधिक समय बिता सकते हैं. दोस्तों के साथ मस्ती करने, उनके साथ हैंगआउट करने का यह अच्छा मौका है. अगर किसी दोस्त ने पिछले दिनों में आपको समय की कमी के लिए ताना मारा है तो यह अच्छा मौका है उसकी शिकायत दूर करने का.
      5-चोट के उपचार के लिए आप चिकित्सक के पास जाते हैं तो हो सकता है वह आपको अन्य बीमारियों के बारे में भी कुछ जानकारी दे. अगर चोट ठीक होने में समय लग रहा है तब चिकित्सक आपके रक्त और मूत्र की जांच कर सकता है, जिससे अन्य बीमारियों का निदान हो सकता है.
      दूध को फाड़कर या फिर फटे हुए दूध से पनीर तैयार किया जाता है. इसको बनाते वक्तध जो पानी बच जाता है उसे को फेंके नहीं क्योंकि अगर अगर आपको शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी है तो इसे पी जाइएं. पनीर, कार्बोहाइड्रेट्स, फैट्स और प्रोटीन से बना हुआ उत्पाद है.लेकिन क्या आप जानते हैं पनीर खाने का सही समय क्या है या फिर आप कभी भी पनीर खाने में विश्वास रखते हैं. अगर ऐसा है तो जानें पनीर खाने को सही समय क्या है...
      पनीर खाने का सही समय
      1- पनीर को कभी भी एक्सरसाइज करने के पहले या फिर बाद में नहीं खाना चाहिए क्यों कि आपकी बॉडी को फैट की आवश्यपकता नहीं है. 
      2- पनीर को रात को सोने से एक घंटे पहले खाया जा सकता है. 
      3- सोते वक्त हमारी मांसपेशियां और लंबाई बढ़ जाती है, जिसके लिये हमारे शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में पनीर खाना एक अच्छां ऑपशन होता है.
      4- आप चाहें तो इसे दिन के वक्तक भी खा सकते हैं, लेकिन इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए.
      5- अगर आप पनीर को संतुलित तरीके से खाएंगे, तो आप मोटे नहीं बल्कि  फिट बनेंगे.
      प्याज खाने से जोड़ों की बीमारी और कई तरह के इंफेक्शन से शरीर को बचाया जा सकता है. इससे कई तरह की अन्य बीमारियां दूर होती हैं इसलिए ये भी कहा जाता है कि प्याज खाने से इंसान की उम्र बढ़ती है.
      1-अगर आपको स्टोन की शिकायत है तो प्याज का रस आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं. सुबह के समय खाली पेट प्याज का रस पीने से पथरी के दर्द और इसे आसानी से दूर करने में सहायता मिलती है. 
      2-अगर आपके घर में किसी को गठिया या जोड़ो का दर्द है तो प्याज के रस से मालिश करने से आराम मिलेगा. प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से आराम मिलता है.
      3-प्याज की तासीर गर्म होती है. अगर आपको सर्दी-जुकाम की परेशानी रहती है तो प्याज आपके लिए दवा का काम करेगी . इसे खाने से आपके शरीर को गर्माहट मिलेगी और सर्दी के इंफेक्शन से आपका बचाव भी होगा. 
      मैदा आटे का री-फाइन्ड रूप होता है. इसे बारीक और महीन बनाने के लिए कई बार पीसा जाता है. ऐसा करने से अच्छी क्वालिटी का मैदा तो मिल जाता है लेकिन उसमें मौजूद सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर खत्म हो जाते हैं.
      बहुत अधिक मैदा खाने से हो सकते हैं ये नुकसान:
      1. मोटापा बढ़ाने का काम करता है.
      2-बहुत अधि‍क मैदे के इस्तेमाल से हड्डिौयां कमजोर हो जाती हैं.
      3-ये डायबिटीज और गठिया जैसी बीमारियों का भी कारण बन सकता है. 
      4- मैदे से बनी चीजों के ज्यादा इस्तेमाल से कब्ज की प्रॉब्लम हो जाती है.
      5- मैदे में ग्लू टन होता है जिससे फ़ूड एलर्जी होने का खतरा बढ़  जाता है.
      6. मैदे का बहुत अधिक इस्तेमाल करने से इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ता है.
      मैदे से बनी ज्यादातर चीजों को डीप फ्राई करके ही खाया जाता है, जिसके चलते वजन कम करने की ख्वाहिश रखने वाले मैदा खाने से परहेज ही करते हैं. लेकिन मैदा सिर्फ ऐसे लोगों के लिए ही खतरनाक नहीं है. मैदे का इस्तेमाल बहुत संतुलित मात्रा में करना चाहिए, वरना ये सेहत बिगाड़ सकता है.
      दाल-चावल को पसंद किए जाने की बहुत सी वजह हैं. पहली तो इसका स्वाद. सादा और मीठास भरा. दाल-चावल को पसंद किए जाने की दूसरी और सबसे बड़ी वजह ये है कि ये झटपट तैयार हो जाता है. कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते है  जो केवल एक वर्ग विशेष को ही पसंद आते हैं, पर दाल-चावल एक ऐसी चीज है जो हर वर्ग चाव से खाता है.
      1-दाल और चावल दोनों में ही फाइबर की भरपूर मात्रा होती है.ये एक सुपाच्य व्यंजन है. फाइबर की मौजूगी से पाचन क्रिया बेहतर बनती है. अगर आप सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल करते हैं तो ये और भी फायदेमंद है. ब्राउन राइस में सेलेनियम, मैंगनीज, कॉपर, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक लवण पाए जाते हैं.
      2-ऐसा माना जाता है कि चावल खाने से वजन बढ़ जाएगा. पर ऐसा नहीं है. दाल-चावन खाने से काफी देर तक पेट भरे होने का अहसास होता है. जिससे दिनभर कुछ-कुछ खाने की जरूरत नहीं पड़ती और एक्स्ट्रा कैलोरी जमा नहीं होने पाती है. 
      3-दाल में कई ऐसे अमीनो एसिड्स होते हैं जो चावल में नहीं होते. ऐसे में जब आप दाल और चावल साथ खाते हैं तो आपको ये सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं.
      4-मांसाहार करने वालों में प्रोटीन की कमी नहीं होने पाती लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए दाल ही प्रोटीन का प्रमुख माध्यम है. इसमें मौजूद फोलेट दिल को सुरक्षित रखने में भी मददगार होता है.
      दस्त और पेट से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां उन लोगों को होती हैं जो बाहर खाना खाते हैं लेकिन इस बात की गारंटी नहीं ली जा सकती है कि जो लोग घर पर खाना खाते हैं उनका पेट हमेशा ठीक ही रहेगा. पेट में इंफेक्शन हो जाने से बार-बार मोशन होना, कमजोरी होना, उल्टी होना और कभी-कभी बुखार होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
      1-अपसेट पेट में अदरक का इस्तेमाल काफी कारगर होता है. इसमें एंटीफंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो पेट दर्द में राहत देता है. एक चम्मच अदरक पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
      2-अगर आप बार-बार हो रहे मोशन से परेशान हो चुके हैं तो केले का इस्तेमाल आपको राहत देगा. इसमें मौजूद पेक्टिन पेट को बांधने का काम करता है. इसमें मौजूद पोटै‍शियम की उच्च मात्रा भी शरीर के लिए फायदेमंद होती है.
      3-अगर आपको लगातार दस्त हो रहे हों तो एक चम्मच जीरा चबा ले . अमूमन सभी घरों में मिलने वाला ये मसाला दस्त में काफी फायदेमंद है. जीरा चबाकर पानी पी लेने से दस्त बहुत जल्दी रुक जाते हैं. 
      4-पेट खराब होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. ऐसे में कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. आप फलोें का जूस और सब्जियों का रस भी ले सकते हैं. बेहतर होगा अगर पानी में लवण मिला हो. आप चाहें तो नींबू पानी, नमक-चीनी का घोल या फिर नारियल पानी ले सकते हैं. गाजर का जूस भी ऐसे समय में काफी फायदेमंद होता है.

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.