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jankari365 बाँडेज सेक्स से बनाए अपनी सेक्स लाइफ को मसालेदार, ध्यान रखे यह टिप्सबाँडेज

    अगर आप अपने नियमित सेक्स से बोर हो चुके है तो आप अपनी सेक्स लाइफ को मज़ेदार बनाने के लिए बाँडेंज सेक्स का सहारा ले सकते है. हालाँकि आपको इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है. ताकि आपको या आपके पार्टनर को किसी तरह की परेशानी ना हो.
    - ध्यान रखे की अगर आप इस तरीके को पहली बार इस्तेमाल कर रहे है तो आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. तो मज़े से पहले अपनी और साथी की सहजता का ख्याल रखे.
    - ध्यान रहे की पहली बार इस तरीके को इस्तेमाल करने से आपकी साथी को कसकर ना बांधें और साथ ही चाबी भी उनके पास ही रहने दे ताकि उन्हें बेचैनी ना हो.
    - इस दौरान जल्दबाजी करने से भी बचना चाहिए. आपकी उत्तेजना और जल्दबाजी आपके साथी के लिए दर्द और परेशानी का कारण बन सकती है.
    - हालाँकि इस तरह के सेक्स से आपको एक तरह के सेक्स का अनुभव होगा. इस तरीके को तब ही इस्तेमाल करे जब आप अपने साथी पर पूर्ण विश्वास कर पाए. अन्यथा यह आपके लिए मज़ा की जगह सजा बन सकता है.
    - इस तरह से सेक्स से आपके साथी को भी अत्यधिक सुख की प्राप्ति होती है. इस दौरान अपने साथी को किश करना ना भूले. यह साथी को उत्तेजित करने का सबसे कारगर तरीका है.
    सेक्स में ज्यादा अंतराल बन सकता है परेशानी का कारण
    महिलाओ को पूर्ण संतुष्टि देती है यह सेक्स पोसिशन्स
    भारत में सेक्स को लेकर महिलाए ज्यादा खुल कर बात नहीं करती है. लेकिन उनके दिल में सेक्स से जुडी कई 'गन्दी इच्छाए' रहती है. जो वह शर्म और कई कारणो के चलते अपने पार्टनर से नहीं कह पाती है. आज हम आपको महिलाओ की ऐसी ही यौन कल्पनाए के बारे में बताने जा रहे है. जो वह किसी के साथ शेयर नहीं करती है.
    - ब्रिटिश महिलाए अपने कल्पनाओ में अनजान, बलवान और कामोत्तेजक पुरुष के साथ सम्भोग करने की इच्छा रखती है.
    - एक ऑनलाइन सर्वे के अनुसार, ज्यादातर महिलाओ की किसी कुंवारे लड़के को सेक्स का पाठ पढने की उत्तेजक यौन कल्पना होती है.
    - कई महिलाओ की कोई बलवान सेक्स स्लेव पलने की इच्छा रहती है. जो उनके इशारे पर उन्हें संतुष्ट करने के लिए तैयार हो.
    - महिलाए अपनी यों कल्पना में उस पुरुष के साथ सेक्स को इमेजिन करती है जिसके साथ वह सच में सेक्स का मज़ा ले रही है.
    बाँडेज सेक्स से बनाए अपनी सेक्स लाइफ को मसालेदार, ध्यान रखे यह टिप्स
    महिलाओ को पूर्ण संतुष्टि देती है यह सेक्स पोसिशन्स
    पुरुर्ष अक्सर सेक्स सम्बन्ध बनाने की पहल करते है. लेकिन अगर आप अपने पति के साथ सेक्स संबंधों की पहल कर इस वीकेंड को अपने साथी के लिए बेहद ही ख़ास बना सकती है.
    - सबसे पहले एक ऐसी ड्रेस का चुनाव करे जिसमे आप सेक्सी लगे. आपको इस तरह की ड्रेस में देख कर आपके पति खुद पर काबू नहीं कर पाएंगे.
    - सेक्स सम्बन्ध की शुरुवात एक डीप किस के साथ करे. यह सम्बन्ध बनाने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है.
    - सेक्स सम्बन्ध बनाने से पहले आप माहौल को रोमांटिक करने के लिए रोमांटिक डिनर का सहारा ले सकते है.
    - सेक्स सम्बन्ध बनने से पहले अपने शरीर की अच्छी तरह सफाई कर ले. इससे आपका साथी आपकी तरफ काफी जल्दी आकर्षित होगा.
    - इसके अलावा अपने बालो को खुला रख के ख़ास परफ्यूम का इस्तेमाल कर सकते है. महिलाओ के खुल्ले बालों की तरफ पुरुष काफी जल्दी आकर्षित होते है.
    महिलाओ की यौन कल्पनाएं, जिसे वह किसी को नहीं बताती
    बाँडेज सेक्स से बनाए अपनी सेक्स लाइफ को मसालेदार, ध्यान रखे यह टिप्स
    लाइफ स्टाइल में बदलाव के कारण लोगों को बहुत सी बीमारिया घेर लेती हैं। मधुमेह, हार्ट डिसीज़ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां बहुत आम हो गयी हैं. ऐसे में खुद को फिट रखने और इन बीमारियों से उबरने के लिए एक्सरसाइज का महत्व बहुत ब़ढ गया है। नियमित तौर पर व्यायाम करने से कई तरह की बीमारियों को दूर किया जा सकता है। एक्सरसाइज से बहुत सी बीमारियां अपने आप खत्म हो जाती हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने व्यायाम के एक और फायदे के बारे में पता लगाया है।
    ताजा रिसर्च में एक्सरसाइज पार्किंसंस से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि व्यायाम करने से शारीरिक संतुलन बना रहता है। इससे उनके गिरने-पड़ऩे का खतरा बहुत कम रहता है। शोधकर्ताओं ने पिछले तीन दशकों में किए गए 106 शोध का विश्लेषण कर इसका पता लगाया है। पार्किंसंस का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाना बहुत मुश्किल है। लिहाजा इसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है। इसमें सेंट्रल नर्वस सिस्टम ठीक से काम नहीं करने के कारण ब्रेन में डोपामाइन का स्तर काफी कम हो जाता है।
    यह बाद में पार्किंसंस का रूप ले लेता है। ये बिमारी ज्यादातर उम्रदराज लोगों में होती है लेकिन आजकल उम्र से पहले भी लोग इस बिमारी की चपेट में आ रहे हैं. अगर आपके आस पास या घर में कोई है जो इस बिमारी से जूझ रहा है तो उसे एक्सरसाइज करने की सलाह जरूर दीजियेगा।
    सलाद से जुडे मिथकों का सच
    ज़्यादा सॉफ्ट गद्दे पर सोना कर सकता है सेहत को ख़राब
    नींद का नाम आते ही दिमाग में आराम का ख़याल आने लगता है. कोल्हू के बैल की तरह काम करने के बाद भला किसे नींद प्यारी नहीं लगेगी। आप चाहे किसी कंपनी के मालिक हो या फिर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, अच्छी नींद पर सबका बराबर हक़ है। लेकिन सोते वक्त हमारी बॉडी काम करती रहती है इसलिए हम कैसी नींद लेते हैं, वो आरामदायक है या नही, हम किस दिशा में सोते हैं इन सबका भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। सोते समय हमें कुछ बातों का बहुत ध्यान रखना चाहिये जिससे हम स्वस्थ रह सकें।
    करवटें बदले बिना नींद आना मुश्किल है लेकिन सोते समय हमें बांयी करवट लेकर सोना चाहिये क्योंकि इस तरफ करवट लेकर लेकर सोना हमारे स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है। चलिए देखते हैं की बांयी करवट लेकर सोने के आखिर क्या बेनिफिट्स है. बांयी करवट लेकर सोने से हमारे लीवर और किडनी दोनों को फायदा मिलता है। इससे लीवर और किडनी पर कोई दबाव नहीं पड़ता, पेट का एसिड ऊपर की जगह नीचे की ओर जाता है, जिससे एसिडिटी और सीने की जलन नहीं होती।
    बाएं करवट सोने से दिल पर जोर कम पड़ता है क्योंकि उस समय दिल तक खून की सप्लाई काफी अच्छी मात्रा में हो रही होती है। गर्भवती महिलाओं को भी बायीं करवट लेकर ही सोना चाहिये इससे रक्त का प्रवाह सही रहता है, जो गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ के लिए भी उत्तम है। बाएं ओर सोने की वजह से ग्रेविटी, भोजन को छोटी आंत से बड़ी आंत तक आराम से पहुंचाने में मदद करती है। इस वजह से सुबह के समय आपको सौच में तकलीफ नहीं आएगी और कब्ज जैसी बिमारी आस पास भी नहीं फटकेगी। किसी का हाजमा गड़बड़ रहता है और बदहजमी की शिकायत रहती है, तो उन्हें बायीं ओर करवट लेकर ही सोना चाहिए।
    इस वीकेंड अपने पति को ऐसे करे खुश
    सलाद से जुडे मिथकों का सच
    सर्दी का मौसम आते ही बहुत से बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. हमारे पहनावे से लेकर खान-पान, सोने के समय में बदलाव जैसी चेंजेस होते हैं. इस मौसम में अक्सर लोग बीमार पड़ जाते हैं. सर्दी-जुखाम, बुखार और खांसी इस मौसम की आम बीमारिया हैं और ऐसा होने पर अक्सर हम ओवर द काउंटर मेडिसिन से काम चला लेते हैं. छाती में कफ जमने की वजह से खांसी की समस्या हो जाती है और सबसे पहला काम हम जो करते हैं वो यह है कि मेडिकल स्टोर पर जाकर कोई भी कफ सिरप लेकर उसका सेवन करना चालु कर देते हैं.
    क्या आप जानते है की खांसी की यह दवाई हमारे लिए कितनी खतरनाक है. सर्दी में होने वाली खांसी की दवाओं से परहेज करने की सख्त जरूरत है.कफ सीरप वाली दवाओं में कोडीन होता है जो आपकी याददाश्त को खत्म कर सकता है.अक्सर मेडिकल स्टोर में कोडीन वाली दवाओं को ही रखा जाता है जो खांसी में राहत कम देती है और खतरा अधिक।
    कोडिन का सेवन करने से त्वचा में खुजली, सांस लेने की बीमारी और पाचन तंत्र खराब हो सकता है.कोडीन एक ऐसा मीठा जहर होता है जो पहले इंसान में नशा लाता है फिर अपना असर दिखाता है.डॉक्टरों के अनुसार बच्चा हो या बड़ा सभी के लिये इसका प्रयोग नुकसानदेह होता है।
    ज़्यादा सॉफ्ट गद्दे पर सोना कर सकता है सेहत को ख़राब
    इस वीकेंड अपने पति को ऐसे करे खुश
    गलत ईटिंग हैबिट्स और अनहेल्दी लाइफ स्टाइल के कारण अपच, पेट में गैस, और कब्ज की शिकायत आम हो गयी है. इन सब का कारण हमारा ख़राब डाइजेस्टिव सिस्टम है जिसे हमने खुद खराब बनाया है. आइये देखते है कि अच्छा और हेल्दी डाइजेस्टिव सिस्टम मेन्टेन करने के लिए किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए। फाइबर से भरपूर आहार जैसे सब्जियां, फल, फलियां और साबुत अनाज पाचन को बेहतर बनाते है। यह पचने में आसान और कॉन्स्टिपेशन के लिए फायदेमंद है। उच्च फाइबर आहार पाचन संबंधी समस्याओं को कम करता है।
    फैट से युक्त खाद्य पदार्थ पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देती है और कॉन्स्टिपेशन और दूसरी पाचन समस्याओं के खतरे को बढ़ाते हैं इसलिए फैट के आवश्यक स्तर को बनाये रखना जरुरी है। कोशिश करे की फैट और फाइबर युक्त खादए पदार्थ का सेवन किया जाए. अत्यधिक कैफीन, धूम्रपान और शराब पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम के काम में गड़बड़ी हो जाती है। इनके कारण पेट के अल्सर और हार्टबर्न समस्या हो जाती है। इसलिए इनसे दूर ही रहे। पानी शरीर के लाइट डेटॉक्स का काम करता है इसलिए यह शरीर के लिए सबसे जरूरी है।
    गरम पानी पाचन शक्ति मजबूत बनाता है। इसलिए हल्का गर्म पानी पीजिए। हमें रोज 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए। नींबू पानी पीने से पाचनशक्ति मजबूत होती है। नियमित समय पर खाना खाए। रोज़ एक ही समय के आसपास नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना खाए। समय पर खाना खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम पर अच्छा असर पड़ता है और एसिड नहीं बनता है। एक्सरसाइज से मेटाबोलिज्म को बूस्ट करने और डाइजेस्टिव सिस्टम को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है इसलिए रोज कम 30 मिनट तक जरूर एक्सरसाइज करे। तनाव और चिंता के कारण भी एक्सरसाइज का कार्य बहुत धीमा पड़ जाता है। इसलिए तनाव को दूर करने के लिए योग और ध्यान का सहारा ले।
    सलाद से जुडे मिथकों का सच
    दिल से जुडी बीमारिया आजकल काफी आम हो गयी है. भारत की मेजर पॉपुलेशन इस तरह के रोगों से जूझ रही है. ऐसी बीमारियां जानलेवा होती हैं और इनका इलाज भी बहुत महंगा होता है.ऐसे में आयुर्वेद में इस तरह को बीमारियों से निजात पाने का एक शानदार घरेलु नुस्खा है। शायद आप नहीं जानते लेकिन पीपल दिल के 99 परसेंट ब्लॉकेज को भी समाप्त करता है। दिल संबंधी समस्याओ या दिल का दौरा पड़ जाने जाने की स्थिति में पीपल के पत्तों का काढ़ा बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।
    हृदय रोगियों के लिए यह एक अच्छा, सरल और सुलभ उपाय है, जिससे दिल के सभी प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इस काढ़े के सेवन से दिल मजबूत होता है और आप बेहद ठंडक और शांति महसूस करते हैं। इसे बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका भी भी काफी आसान है. सबसे पहले, 15 पीपल के पत्ते जो हरे, आकार में बड़े और पूरी तरह से विकसित हो उसे तोड़ लें। इन सभी पत्तों के ऊपर व नीचे के भाग को कैंची से काटकर अलग कर दें।
    अब पानी से पत्तों को धो लें और लगभग एक गिलास पानी में पत्तों को धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी उबलकर एक-तिहाई रह जाए, तब उसे ठंडा करके छान लें औरफ्रिज या अन्य किसी ठंडे स्थान पर रख दें। इस पानी को तीन भागों में बांट लें और हर तीन घंटे में इसका सेवन करें। इस दवा का रोज़ सेवन करने से हार्ट अटैक के बाद भी हृदय पहले की तरह स्वस्थ हो जाएगा और दोबारा दिल के दौरे की संभावना भी खत्म हो जाएगी।
    सलाद से जुडे मिथकों का सच
    आर्थराइटिस रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। दूनिया भर में जोड़ों की बीमारी आम हो गई हैं। इस रोग के होने पर पीड़ित व्यक्ति के शरीर के कई हिस्से जैसे जोड़ो में दर्द, अकड़न या फिर सूजन आ जाती है और कई बार जोड़ो में गांठे भी बन जाती है। इन हिस्सो पर हाथ लगाने पर और ऐसे भी दर्द बना रहता है। कुछ आसान घरेलु उपायों से दर्द पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है. वॉटर थैरेपी उपचार एक अच्छा व आसानी से उपलब्ध घरेलू उपचार है। इसमें दर्द वाले जोडों को 1 घंटे के लिए गर्म पानी में रखा जाता है।
    अदरक को अपने रोज के भोजन में शामिल करना आर्थराइटिस के दर्द को खत्म करने में मदद करेगा। अदरक को आप सॅासेज, सब्जी, सलाद, चावल या सूप में प्रयोग कर सकते है। ऐलोवेरा सूजन व दर्द को कम करने में मदद करता है जो आर्थराइटिस के ठीक होने में मदद करता है । कपूर और सरसों का तेल का मिश्रण प्रभावित जगह पर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है। यह जोडों में सूजन व अकड़न कम करने में भी असरकारक हैं।
    इस गुनगुने तेल का प्रभावित जगह पर लगा कर मसाज करें। हरे चने और लहसुन के मिश्रण को आर्थराइटिस के आसान उपचार के इस्तेमाल करे। हरे चनों को रात भर के लिए पानी में भिगो कर अंकुरित करे लें। इन अंकुरित चनों में कुटा हुआ लहसुन मिलाएँ व अच्छे से हिला ले। इस मिश्रण को दिन में दो बार लें। इसे थोडा स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें थोडी सी काली मिर्च छिड़क सकते है।
    इस वीकेंड अपने पति को ऐसे करे खुश
    सलाद से जुडे मिथकों का सच
    वैसे तो शरीर में कई जगहों पर दर्द होता है लेकिन कमर का दर्द एक ऐसा दर्द है जिसके पीड़ित लाखों की संख्या में है। कमर दर्द का बेसिक कारण गलत पोस्चर, गलत तरीके से वजन उठाना और किसी किडनी संबंधी बीमारी का इंडिकेशन भी होता है। महिलाएं जब माँ बनने के प्रोसेस में होती है और प्रेग्नेंट होती है तो उन्हें कमर दर्द का एहसास काफी होता है। अमूमन हर प्रेग्नेंट महिला कमरदर्द को लेकर काफी परेशान रहती है और कई बार उनमे इस को लेकर डर भी पैदा हो जाता है।
    घबराएं की जरुरत नहीं है क्योंकि प्रेगनेंसी के समय कमर दर्द अनेक कारणों से हो सकता है। प्रेगनेंसी में गर्भाशय भारी होने लगता है, महिलाओं की ग्रेविटी का सेंटर बदलने लगता है जिससे हाव-भाव और गतिविधियों में परिवर्तन होता है। ज्यादातर महिलाएं प्रेगनेंसी के लास्ट स्टेज में पीछे की ओर झुक जाती है जिससे कमर की मांसपेशियों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और कमर दर्द की सम्भावना बढ़ जाती है।
    पेट की मांसपेशियों का कमजोर होना भी प्रेगनेंसी के दौरान कमर दर्द का कारण हो सकता है। सामान्यत: पेट की मांसपेशियां रीढ़ की हड्डी को सहारा देकर कमर के स्वास्थ्य को सही रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अतिरिक्त प्रेगनेंसी हार्मोन मांसपेशियों को मुक्त कर ढ़ीला कर देते है जिससे कमर दर्द हो सकता है और शारीरिक गतिविधियों के दौरान चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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    अवसाद से बचने के अचूक उपाय
    आज के समय में ज्यादातर लोगों को ये शिकायत है कि उनकी आंखों में हर समय चुभन बनी रहती है. दरअसल, ऐसा होने की प्रमुख वजह हमारी लाइफस्टाइल ही है. दिन के 8 से 10 घंटे हम कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर बिताते हैं. उसके बाद कुछ घंटे मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन को घूरते हुए. इसका नतीजा ये होता है कि हमारी आंखों को पूरा आराम नहीं मिल पाता है.
    1-इलायची, शरीर के तापमान को संतुलित रखने का काम करती है. इसके नियमित सेवन से आंखों को ठंडक मिलती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है. आप चाहें तो इलायची और सौंफ को पीसकर पाउडर तैयार कर सकते हैं. इस पाउडर को ठंडे दूध में मिलाकर पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.
    2-अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं. अखरोट में मौजूद विटामिन ई और फैटी एसिड्स आंखों की सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं. आंखों को लंबे समय तक हेल्दी रखने के लिए डाइट में अखरोट को शामिल करना न भूलें.
    3-आंवला, आंखों के लिए वरदान है. इसमें मौजूद तत्व आंखों की रोशनी को सालों-साल तक बनाए रखते हैं. आप चाहें तो कच्चे आंवले को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा सुबह खाली पेट आंवले का रस पीना या फिर आंवले का मुरब्बा खाना भी फायदेमंद रहेगा.
    रोज खाये थोड़ी सी चॉकलेट
    यूं तो खट्टे फल खाना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद और जरूरी है लेकिन कई बार इन्हें खाना खतरनाक हो सकता है. क्या आप जानते हैं कब और किन परिस्थितियों में ये फल नहीं खाने चाहिए?
    1-अगर आपको सोरोसिस की प्रॉब्लम हो गई है तो ऐसे फल खाना आपके इंफेक्शन को बढ़ा सकता है. ऐसे में संतरा और अंगूर खाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है.
    2-सुबह सोकर उठते ही इन फलों को खाना नुकसानदेह हो सकता है.खाली पेट खट्टे फल खाने से बॉडी का पीएच लेवल बढ़ जाता है. अगर आपको सुबह फल खाने ही हैं तो ऐसे फल खाएं जिनमें भरपूर मात्रा में फाइबर्स हो और नेचुरल शुगर हो. आप चाहें तो सुबह उठकर केला, सेब और अनार खा सकते हैं.
    3-अगर आपने एल्कोहल ले रखी है तो खट्टे फल खाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसी हालत में ये फल खाने से शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है और जलन होने लगती है.
    4-देर रात खाना खाने के बाद खट्टे फल खाना खतरनाक हो सकता है .  इससे एसिडिटी और गैस की प्रॉब्लम हो सकती है. अगर आपको रात के समय कोई फल खाना ही है तो कोशिश कीजिए कि सोने के एक या दो घंटे पहले ही आप उसे खा लें. 
    सरसों के बीज करते है अस्थमा से...
    पैक्ड जूस चाहे जितनी भी अच्छी क्वालिटी का हो, ताजे फलों के जूस से उनका कोई मुकाबला नहीं. लेकिन अगर आप घर पर जूस निकालते हैं तो आपको कई बातों का ख्याल भी रखना चाहिए. वरना सेहत बनने के बजाय बिगड़ भी सकती है.
    जूस निकालते समय जरूर रखें इन बातों का ख्याल:
    1-बहुत से ऐसे फ्रूट जूस हैं जिसमें हम चीनी मिलाते हैं. ऐसे में कई बार शरीर में शुगर का लेवल भी बढ़ जाता है. कोशिश कीजिए कि जूस को उसके नेचुरल रूप में ही लें.
    2-अगर जूस पीना आपकी आदत है तो कोशिश कीजिए कि जब भी जूस पिएं, ताजा ही पिएं. जूस को स्टोर करके रखना और बाद में पीना सही नहीं है. बहुत से जूस तो ऐसे होते हैं जिन्हें तुरंत पीना तो फायदेमंद होता है लेकिन बाद में पीने से उसका कोई फायदा नहीं रह जाता.
    3-अगर आपका जूस सारे फाइबर्स को एक किनारे कर देता है तो ये सही नहीं है. फलों के फाइबर्स में कई पोषक तत्व होते हैं. ऐसे में बहुत ज्यादा फिल्टर जूस सही नहीं रहेगा. जूस का पल्पी होना जरूरी है तभी पूरा फायदा मिल सकेगा. 
    4-अगर आप मिक्स्ड जूस पीना पसंद करते है तो आपको फलों और सब्जि यों का सही और हेल्दी मेल भी पता होना चाहिए. इसके लिए डाइटिशियन से जरूर बात करें ताकि आपको फलों और सब्जिपयों का तालमेल पता चल जाए.
    5-हेल्दी रहने के लिए आप जूस तो रोजाना निकालते होंगे लेकिन क्या जूसर को नियम से साफ भी करते हैं? अगर आप रोजाना जूसर की सफाई नहीं करते हैं तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. ऐसे में आप जो जूस निकालेंगे वो भी अनहेल्थी ही रहेगा  ऐसे में जूसर को रोजाना साफ करना बहुत जरूरी है.
    ज़्यादा सॉफ्ट गद्दे पर सोना कर सकता है सेहत को ख़राब
    हाल में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 80 प्रतिशत भारतीय लोगों के खाने में प्रोटीन की कमी होती है. 91 प्रतिशत मांसाहारी और 85 प्रतिशत शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी पाई गई है. भारतीयों के खाने में सिर्फ 37 प्रमिशत ही प्रोटीन होता है जबकि पूरी दुनिया में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत है. 
    क्या होता है जब प्रोटीन की कमी हो जाती है? 
    1- बाल झड़ने लगते हैं.
    2- प्रोटीन की कमी होने पर शरीर में एनर्जी  कम  होने लगती है. 
    3- वजन कम होने लगता है.
    4- चोट या जख्म जल्दी ठीक नहीं होते. 
    क्या करे प्रोटीन की कमी होने पर -
    1- प्रोटीन में से सबसे अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन अंडे में होता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि एक स्वस्थ इंसान एक दिन में एक अंडा बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के खा सकता है.
    2-अखरोट प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है. इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स विशेषकर बी6 और कईं मिनरल जैसे आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर और जिंक भी काफी मात्रा में होते हैं. 
    3- सी-फूड और दालों में भी प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए अपनी डाइट में शामिल करने की कोशिश करें. 
    अनहेल्थी खाना डाल सकता है आपके बच्चे...
    आहार और सेहत का चोली दमन का साथ है | अच्छा और संतुलित आहार आपके स्वास्थ का पर्याय है| आपके भोजन में विटामिन्स, मिनरल्स, खनिज, लवण , प्रोटीन्स, कैल्शियम , जितनी संतुलित मात्रा में होंगे उतना ही आपके स्वास्थ बेहतर होगा |इस लेख में जानेगे कौन सा पोषक तत्व हमारे स्वास्थ के लिये कितना आवश्यक है | 
    आइये जाने भोजन के कौन से पोषक तत्व हमारे स्वास्थ पर कैसे असर डालते है :- 
    आयरन  : आयरन खून में लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में विशेष योगदान प्रदान करता है, इसके अलावा यह शरीर में ऑक्सीज़न के परिवहन को सुगम बनाता है। 
    मैंगनीज : यह इम्यूनिटी को बेहतर करता है। साथ ही बाल, त्वचा और नाखून की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी तत्व है।
    ज़िंक  : यह शरीर के किसी भी हिस्से में घावों को भरने का काम करता है। पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने में इसका खास योगदान होता है। इम्यून सिस्टम को ज़िंक के सेवन से बेहतर किया जा सकता है।
    आयोडिन  : आयोडिन त्वचा, बालों और नाखून को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
    पोटेशियम : पोटेशियम शरीर में पानी के स्तर को संतुलित रखने के साथ तंत्रिका संचरण को भी सुचारु रखने में मदद करता है। साथ ही यह मांसपेशियों के संकुचन के भी सहायक होता है।
    कैल्शियम  : यह हड्डियों व दांतों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए ज़रूरी तत्व  है।

    सर्दियों में स्किन को रूखेपन और एलर्जी से कैसे बचाएं
    नवजात शिशु की देखभाल और सावधानियाँ
    स्तनपान कराते समय रखे इन बातों का ख़याल
    सुबह की सैर से तन रहे तंदरुस्त
    रिश्तों को खुशहाल बनाये ये बातें !!

    बेल के फल का जीवनकाल काफी लंबा होता है. पेड़ से टूटने के कई दिनों बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. बेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को  बनाने में  तो किया जाता है ही साथ ही ये कई स्वादिष्ट व्यंजनों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. बेल में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
    1-आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
    2-अगर आप एक नई मां हैं तो आपके लिए बेल का रस पीना बहुत फायदेमंद रहेगा. ये मां के स्वास्थ्य को बेहतर करने में तो सहायक है ही साथ ही ब्रेस्ट मिल्क प्रोडक्शन को भी बढ़ाता है.
    3-नियमित रूप से बेल का रस पीने से ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका काफी कम हो जाती है.
    4-बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पिने से एसिडिटी  में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है.
    कही आपको भी तो नही है प्रोटीन की कमी
    दोस्तों एक स्वस्थ जीवनशैली ही एक मात्र उपाय है जिससे आप स्वस्थ और तंदुरुस्त रह सकते है| आप चाहे कितना भी समय जिम में क्यों न लगाए अगर आपका रहन सहन समय और प्रकृति अनुकूल नहीं है तो आप पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो सकते इसलिये शुरू से ही इस बात पर बल देना चाहिये की आप अपनी जीवनशैली को ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक और समय अनुकूल कैसे रखे | आयुर्वेद कहता है की भोजन ,शयन ,शौच और स्नान जिनके नियमित और सही समय पर है वो सेहतमंद रहते है| 
    आइये जाने कुछ उपयोगी एवं आसान टिप्स :-
    1 जीवन में नियम बना लें की संतुलित भोजन और  व्यायाम से दिन की शुरुआत करेंगे |
    2 सुबह और शाम की सैर का नियम बना लें |
    3 भरपूर पानी पिये ,ताँबे के लौटे का पानी पि सके तो अति उत्तम |
    4 सलाद और कच्ची सब्झीयों को अपने आहार में शामिल करे |
    5 शराब ,सिगरेट और किसी भी तरह के नशे से दूर रहे |
    6 भरपूर नींद लें, सुबह उठने और रात को सोने का निशित समय सारिणी बनाये और ताड अनुरूप कार्य करे |
    7 दिन में एक बार कोई भी मौसमी फल एवम सूखे मेवे ज़रूर खाये |
    6 हफ्ते में एक बार पूरे शरीर पर तेल मालिश करे | तेल में नारियल तेल, तिल का तेल, सरसो का तेल आदि अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के हिसाब से प्रयोग करे |
    7 दिन में दो बार मंजन करने की आदत रखे , इससे आपके दांत तो साफ रहेंगे ही आप की पाचन क्रिया भी मजबूत रहेगी |
    8 सुबह नाश्ता करे , खाली पेट चाय न पिये |
    9 रोज सुबह की हलकी धुप में 10 मिनिट ज़रूर बैठे |
    10 ओस भरी दूबों पर नंगे पाँव चले, ऐसे आप दिन भर तरोताज़ा बने रहेंगे |
    11 बासी खाना,जंक फ़ूड, प्रिज़र्वेटिव युक्त भोजन, चाय कॉफ़ी, सोडा , निकोटीन युक्त सॉफ्ट ड्रिंक न पिये | इसके बदले नारियल पानी , फलों के रस , दूध, छांछ आदि का प्रयोग करे |

    सर्दियों में भी पिये भरपूर पानी
    जब करे ठण्ड में तफरी तो बरते ये सावधानियां
    सुखी वैवाहिक जीवन की अनिवार्य शर्ते
    चेहरे की बनावट बताता है आपका स्वाभाव
    अवसाद से बचने के अचूक उपाय

    आपने शिशु को तकिया नहीं लगाने की बात सुनी होगी. ऐसा माना जाता है कि शिशु को तकिया लगाने से उनकी जान तक जा सकती है. कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं और कुछ सच. असली बात पर सबका विरोधाभास रहता है. 
    1-विशेषज्ञों का मानना रहा है कि हाल ही में पैदा हुए बच्चे और छोटे शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए तकिया लगाना नुकसानदायक रहता है. एक-दो दिन के बच्चों के लिए तो तकिया लगाना कई बार खतरनाक भी साबित हो जाता है.
    2-ऐसे में बेहतर होगा कि इन शिशुओं को उन्हें मां की गोद में या फिर बिस्तर पर सीधे ही सुलाएं. मां की गोद से अच्छी जगह शिशुओं के लिए कोई नहीं. 
    3-तकिया लगाने से शिशु की मौत होने का खतरा होता है. कई बार बच्चों का तकिया की वजह से दम घुट जाता है. दरअसल तकिया लगाने से बच्चे का सांस नली अंदर से मुड़कर दब जाने का खतरा होता है. ऐशा उनके कोमल औऱ नाजुक शरीर की वजह से होता है. तो बच्चे को तकिया कभी ना लगायें. इससे उनके जान जाने का खतरा होता है.

    गेहूं से बनी चीजें बहुत पौष्टिक होती हैं और इसको खाने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. एक्सचपर्ट के अनुसार गेहूं, मैदे के मुकाबले ज्या दा स्वा स्य्की वर्धक माना जाता है. गेहूं पेट के लिये बहुत हल्का  होता है और आसानी से पचाया जा सकता है.
    1-खांसी होने पर 20 ग्राम गेहूं के दानों में नमक मिलाकर 250 ग्राम पानी में तब तक उबालें, जब तक कि पानी की मात्रा एक तिहाई न रह जाए. इसे गरम-गरम पी लें. लगातार एक हफ्ते तक यह प्रयोग दोहराने से खांसी जल्दी चली जाती है . 
    2-गर्मी में 80 ग्राम गेहूं को रात में पानी में भिगोकर सुबह अच्छी तरह पीसकर छान लें. चाहें तो इसमें मिश्री मिला लें और उस रस को पीने से शरीर शांत रहता है.
    3-अगर खून को साफ करना है तो गेहूं को नियमित खाने में शामिल करें.
    4-गेहूं में विटामिन ई, सीलियम और रेशे पाए जाते हैं जो कि कैंसर की सेल को पनपने से रोकते हैं.
    5-गेहूं से बने हरीरा में शक्कर और बादाम मिलाकर पीने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और दिमाग की कमजोरी दूर होकर दिमाग तेज चलने लगता है.
    6-गेहूं से बने हलवे को रोज सुबह खाली पेट खाने से आंखों की समस्याओं से छुटकारा मिलता है.

    मसालेदार खाने में भी अदरक का अहम योदगान होता है लेकिन शायद आप अदरक खाने के इस फायदे अनजान होंगे. हाल में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि इसमें कैंसर रोधी गुण मौजूद हैं जो खास तौर से महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर से बचाने में कारगर साबित होते हैं. यह शरीर में कैंसर पैदा करने वाली कोशि‍काओं को ब्लॉक करता है और कैंसर को फैलने से रोकता है.
    शोधकर्ताओं के अनुसार अदरक में पाया जाने वाला कैंसर रोधी तत्व क्षतिग्रस्त कोशि‍काओं को भी पुन: संरक्षि‍त करने में सक्षम रहा, वह भी कीमो से 10 हजार गुना बेहतर और मजबूत तरीके से. हालांकि‍ कैंसर कोशि‍का पर किए गए इस शोध के बाद शोधकर्ताओं का मानना है कि, असल में मानव कोशि‍का पर यह कितना प्रभावकारी सिद्ध होगा यह देखने वाल बात होगी.
    प्रतिदिन अपनी डाइट में किसी भी तरह से अदरक को शामिल कर हम कैंसर को जड़ से समाप्त कर सकते हैं. स्तन कैंसर के मामले में अदरक का सेवन ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है और कैंसर बनने की संभावनाओं को कम करता है.
     
    मशहूर भौतिकी शास्त्री एमजीके मेनन का बिमारी के चलत..

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