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jankari363 गोभी करती है सुरक्षा हर तरह के कैंसर से

    कैंसर कई प्रकार का होता है जो हमारे लिए जानलेवा हो सकता है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि हम अपनी दिनचर्या व खान-पान की आदतों को सही रखें. फूलगोभी के सेवन से कैंसर के खतरे को रोका जा सकता है.
    1-गोभी में जिंक, मैग्नीशियम, मैन्गनीज, फास्फोरस और सेलेनियम तथा सोडियम जैसे लाभकारी तत्व होते हैं. इसके अलावा जिंक भी होता है जो नयी कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और साथ ही शरीर की मरम्मत में भी मदद करता है. इसमें मौजूद सेलेनियम प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है.
    2-गोभी में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो पाचन शक्ति को बढ़ाता है. इसके साथ ही इसमें ग्लूकोरैफैनिन भी होता है जो पेट में कैंसर की समस्या पैदा करने वाले तत्व को खत्म कर कैंसर के खतरे को कम करता है.   
    3-गोभी के सेवन से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है खासकर प्रोस्टेट क्षेत्र में जिससे कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. गोभी एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती हैं जो की फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और कैंसर के खतरे को कम करता है. 
    4-गोभी में फाइटो केमिकल्स  जैसे सलफोराफेन,इनडोल-3- कार्बिनॉल होता है जो स्तन कैंसर के खतरे को कम करता है. यह महिलाओं के स्तनों में कैंसर की कोशिकाओं को विकसित होने से रोकता है.  
    5-गोभी के सेवन से सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम होता है क्योंकि इसमें फाइटो केमिक्लस, प्लांट स्टेरॉल्स, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी का मेल होता है. यह सारे तत्व महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करते हैं.
    अपने प्रतिदिन के आहार में शहद और तिल को अवश्य शामिल करना चाहिए. यह आपको फिट और स्वस्थ रखते हैं.ये दोनों पदार्थ शरीर को कई प्रकार के पोषक तत्व प्रदान करते हैं. इन्हें आपस में मिलाने पर ये बहुत अधिक ऊर्जा प्रदान करते हैं.
    1-ऐसे लोग जिन्हें मीठा खाना पसंद होता है, उनके लिए शहद एक अच्छा विकल्प है. ऐसे पदार्थ खाएं जिनमें शहद प्रचुर मात्रा में हो क्योंकि यह न सिर्फ वज़न को नियंत्रित करता है बल्कि यह मुंह के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. शहद और तिल का मिश्रण प्रतिरक्षा तंत्र के लिए लाभदायक होता है. शहद में उपस्थित गुण प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. तिल के बीज शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस की वृद्धि को रोकते हैं
    2-इन दोनों ही घटकों में समान मात्रा में कैल्शियम होता है जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है. इसे नियमित तौर पर खाने से आपकी हड्डियां उम्र के साथ कमज़ोर नहीं होती.तिल और शहद में ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है. अत: जब इन दो घटकों को आपस में मिलाया जाता है तो शरीर को प्रचुर मात्रा में उर्जा प्राप्त होती है जो आपको दैनिक गतिविधियों को करने में सहायक होते हैं.
    3-टाइप 2 के डायबिटीज को रोकने के लिए आपको अपने आहार में तिल अवश्य शामिल करना चाहिए, विशेष रूप से यदि आपके परिवार में कोई इससे ग्रसित है तो. दूसरी ओर डायबिटीज़ के रोगी शक्कर के स्थान पर शहद का उपयोग कर सकते हैं.तिल से होने वाला एक सबसे बड़ा स्वास्थ्य लाभ यह है कि यह शरीर में कोलेस्ट्राल को कम करते हैं. इन बीजों को सलाद या डिज़र्ट पर छिड़का जा सकता है या इसे कच्चा भी खाया जा सकता है.
    बालों को रंगने या मनचाहा रंग पाने के लिए आजकल पर्मानेंट हेयर डाइ के तरह-तरह के ब्रांड्स बाजारों में उपलब्ध हैं लेकिन इनके उपयोग के खामियाजों का भी पता लगा है.
    1-कुछ शोधों में इनसे कैंसर का संबंध माना है तो कुछ शोधों में गाढ़े रंग के पर्मानेंट हेयर डाइ से महिलाओं में ल्यूकेमिया या लिम्फोमा जैसे रोग हो सकते हैं. हालांकि इनके प्रभावों को लेकर कुछ शोधों में इन्हें नकारा भी गया है पर चिकित्सकों की राय है कि कम से कम गर्भवती महिलाएं ऐसे हेयर डाइ का इस्तेमाल डॉक्टरी परामर्श के बिना ना ही करें.
    2-परमानेंट हेयर कलर में अधिक मात्रा में अमोनिया होता है. जो बालों को सफेद करने के अलावा उनकी कोमलता खत्म कर देता है. इसके इस्तेमाल से कम उम्र में ही युवाओं के बाल अधिक झड़ने का खतरा हो जाता है. इसलिए जहां सम्भव हो परमानेंट हेयर कलर के इस्तेमाल से बचना चाहिए. 
    3-स्थायी हेयर कलर के नुकसान के रूप में बालों का झड़ना, बालों का सफेद होना, सांस लेने में दिक्कत, गले में कफ जमना, सर्दी-जुकाम, त्वचा में जलन, एलर्जी, आँखें लाल होना, खुजली आदि समस्याएं हो सकती है.
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    हाथो को साफ करने के लिए आजकल साबुन से अधिक हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं यह त्वचा के लिए बहुत नुकसानदेह है, यह किस तरह नुकसान पहुंचाता है, आइए हम आपको बताते हैं.
    1-सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नामक एक केमिकल होता है, जिसे हाथ की त्वचा तुरंत सोख लेती है. अगर यह रक्त संचार में शामिल हो जाये, तो यह मांसपेशी को-ऑर्डिनेशन के लिए जरूरी सेल-कम्युनिकेशन को बाधित करता है. 
    2-इसका लंबे समय तक ज्यादा इस्तेमाल त्वचा को सूखा बनाने, बांझपन और हृदय के रोग को न्योता दे सकता है. इसलिए अगर आपको हाथ धोने की जरूरत महसूस हो रही है, तो इंतजार कीजिए और मौका मिलते ही साबुन और पानी से ही अपने हाथों को धोइए.
    3-हम सभी जानते है कि बच्चे ना जाने कैसी-कैसी चीजों को हाथ लगाते रहते है. उनको हैंड सैनीटाइजर का प्रयोग करने अपने सामने ही कराये. . कई बार बच्चों के सैनिटाइजर को निगल लेने का खतरा  ऱहता है. सैनिटाइजर मे एल्कोहल की मात्रा होने की वजह से ये बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है. इस तरह के कई मामले सामने आ भी चुके है.
    4- हैंड सैनिटाइटर के ज्यादा प्रयोग से बच्चों की इम्यूनिटी घट रही है. बच्चों की यूरीन मे इनफ्लेमेटरी तत्व  सी-रिएक्टिव प्रोटीन पाया गया है जो कि इम्यूनिटी को कमजोर करता है. इसका ज्यादा प्रयोग बड़ो को भी नुकासन करता है.  
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    लोग क्रीम निकले व टोंड या फिर डबल टोंड दूध का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. टोंड दूध से पोषण कम मिल पाता है और इसमें शुगर की मात्रा भी थोड़ी ज्यादा होती है. 
    1-सभी प्रकार के दूध में फैट की मात्रा अधिक नहीं होती. ज्यादातर लोग फैट अधिक होने की वजह से क्रीम रहित दूध का सेवन करते हैं. लेकिन गाय का दूध आपके लिये सबसे बेहतर विकल्प होता है. गाय के फुल फैट दूध में वसा की मात्रा केवल 3.7 प्रतिशत होती है. साधारण दूध केवल तब हाई फैट की श्रेणी में आता है, जब ये मात्रा 20 प्रततिशत से अधिक होती है. इसलिए स ही मायने में स्किम्ड दूध का सेवन भी सेहत के लिए अच्छा नहीं है.
    2-टोंड दूध में विटामिन ए, डी, ई और के मौजूद होते हैं और इन्हें अवशोषित करने के लिये शरीर को वसा की जरूरत भी होती है. सात ही वसा युक्त दूध से बनी एक कप चाय पीने बर से ही आपकी रोजाना की विटामिन की 5 प्रतिशत जरुरत की पूर्ती हो जाती है. इससे आपको दैनिक आवश्यकता का 20 प्रतिशत राइबोफ्लेविन भी मिल जाता है. इस मायने में आपके लिये ताज़ा दूध टोंड या स्किम्ड दूध से कहीं बेहतर होता है.
    3-लोग अकसर सोचते हैं की स्किम्ड दूध में शुगर नहीं मिलाई जाती, लेकिन ये गलत है. वसा निकालने के बाद उसकी भरपाई करने के लिए स्किम्ड दूध में कई मीठे तत्व मिलाए जाते हैं, जोकि सेहत के लिये ठीक नहीं होते हैं. ताज़ा दूध लाने में आपको थोड़े अधिक पैसे और मेहनत तो लगती है, लेकिन पैक्ड दूध से आधी मात्रा में भी ये आपके लिये कहीं अधिक पौष्टिक और सुरक्षित होता है.
    सुबह के समय आपको एक कप गर्मागर्म कॉफी मिल जाएं तो आप पूरे दिन ताजगी भरा महसूस करते हैं. कॉफी का सेवन आपके लिए कई मामलों में फायदेमंद होता है, यह कई शोधों से साफ हो चुका है. गर्मागर्म कॉफी आपके अंदर ऊर्जा का संचार करती है.
    कैंसर करीब 100 तरह का होता है, जिसमें से लिवर कैंसर दुनिया में छठा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है. और यह कैंसर से होने वाली मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण भी है.
    अब एक अध्ययन से पता चला है कि यदि आप दिन भर में तीन कप कॉफी पीते हैं तो आपको लिवर कैंसर होने का खतरा आधे से भी कम हो जाता है. कॉफी पीने से हेपटोसेल्युलर कार्सिनोमा (एचसीसी) की आशंका भी कम रहती है, यह आमतौर पर होने वाला लिवर कैंसर है.
    लिवर कैंसर के करीब 90 फीसदी मामलों में रोगी एचसीसी से ग्रस्त होता है.कॉफी का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है.
    ऐसे पता लगाए लिवर केंसर का
    थायराइड की समस्या होने पर आपको खुद की देखभाल के प्रयास करने होते है, ऐसे में अपने उत्कृष्ट स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए आप हर संभव प्रयास करके खुद को शीर्ष स्थिति में ले आते हैं. लेकिन हम अक्सर ऐसी चीजो के बारे में सुनते हैं, जो एक व्यक्ति को थायराइड से ग्रस्त होने पर कभी नहीं करने चाहिए. आइए जानते है इन  चीजो के बारे में -
    1- सिगरेट में मौजूद कई प्रकार के केमिकल थायराइड के लिए विशेष रूप से हानिकारक होते हैं. धूम्रपान से थायराइड नेत्र रोग के विकास की संभावना बढ़ जाती है, और धूम्रपान थायरॉयड नेत्र रोग के उपचार को कम प्रभावी बनाता है.
    2-थायराइड के मरीज को अपने डॉक्टर से किसी भी विषय में कुछ नहीं छिपाना चाहिए, विशेषरूप से दवाओं के विषय में तो बिल्कुल भी नहीं. कई बार कई तरह के सप्लीमेंट और डॉक्टर के बिना बताये ली जाने वाली दवाओं के बारे में वह डॉक्टर से छिपाते हैं जो सही नहीं है. 
    3-थायराइड मरीजों को लगता है, सभी प्रकार के प्राकृतिक और उपलब्ध ओवर-द-काउंटर लेबल प्रोडक्ट उनके लिए अच्छे होते हैं. लेकिन यह थायराइड मरीजों के लिए सही नहीं होता.
    हरी मटर सिर्फ स्वाद को ही नहीं बढ़ाती बल्कि आपके स्वास्थ्य में भी निखार लाती है. विटामिन, मिनरल और एंटी-ऑक्सीडेंटस के अलावा मटर प्रोटीन और फाइबर  से भी भरपूर होती हैं, जिनके कारण इनके पोषक गुण काफी बढ़ जाते है. 
    आइए जानते है हरी मटर के स्वास्थ्य एवं सौन्दर्य दोनों गुणों के बारे में जानें-
    1-मटर का प्रयोग चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी किया जा सकता है. यह प्राकृतिक स्क्रब है. पानी में थोड़े से मटर को उबालकर उसका पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरे पर रगडें और 15 से 20 मिनट के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें. यह चेहरे की खोई हुई चमक को वापस लाता है और चेहरे की झाइयां और धब्बों को भी दूर करता है.
    2-इसके अलावा यह बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. विटामिनों का समूह विटामिन बी-6, बी-12 और फॉलेट लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है जो शरीर के साथ-साथ सिर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. इस प्रकार यह बालों की वृद्धि को बढ़ाता है और बालों के कमजोर होने की गति को धीमा करता है.
    3-मटर में कैलोरी और फैट की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए यह वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है. इसके अलावा हरी मटर फाइबर से भरपूर होती है जो वजन बढ़ने से रोकती है .इसके अलावा मटर शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखती है. हरी मटर में मौजूद फाइटोन्यूट्रिंस और कैरोटिन शरीर को एनर्जी से भरपूर और हमेशा जवां बनाएं रखने में मदद करती है.
    गोभी करती है सुरक्षा हर तरह के कैंसर से
    अब तक टूथपेस्ट का इस्तेमाल दांतों को चमकाने के लिए ही किया जाता था लेकिन टूथपेस्ट का इस तरह से इस्तेमाल करके त्वचा भी निखार सकते हैं.
    आइये विस्तार से जानते हैं कि कैसे टूथपेस्ट से त्वचा को निखारें-
    1-एक्ने यानी मुहांसे त्वचा की ऐसी समस्या है जो आपको परेशान कर सकती है. यह ऐसी समस्या है जो लगभग सभी को होती है. अब अगली बार आपको जब भी मुहांसों की समस्या हो उनके ऊपर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगा दें. अगली सुबह मुहांसे सूखे हुए नजर आयेंगे.
    2-झुर्रियों को भी टूथपेस्ट से कम किया जा सकता है. इसके लिए थोड़ी सी टूथपेस्ट झुर्रियों वाले स्थान पर लगायें तथा रात भर इसे ऐसे ही रहने दें, अगले दिन इसे धुल दें. टूथपेस्ट की सहायता से काले धब्बों को हल्का बनाया जा सकता है. इसके लिए टूथपेस्ट में टमाटर का रस मिलाकर मास्क बनायें और इसे चेहरे पर लगायें.
    3-ब्लैकहैड्स भी त्वचा की एक अन्य समस्या हैं जिसका सामना हमें अक्सर करना पड़ता है. इसे दूर करने के लिए टूथपेस्ट को अखरोट स्क्रब के साथ मिलाकर लगायें. चेहरे पर अगर गहरी रेखायें अगर हैं तो आपको सिर्फ इतना करना होगा कि आप टूथपेस्ट और पानी के मिश्रण को इन गहरी रेखाओं पर लगायें. कुछ दिनों में रेखायें समाप्त हो जायेंगी.
    4-अनचाहे बालों के लिए आप कितनी बार पार्लर के चक्कर लगाती होंगी. लेकिन अब पार्लर के चक्कर लगाने के बजाये टूथपेस्ट का प्रयोग करें. टूथपेस्ट का मिश्रण बनाने के लिए इसमें नीबू तथा नमक या शक्कर मिलायें. इस पेस्ट को अच्छे से चेहरे पर मालिश करें. कुछ दिन ऐसा करने से अनचाहे बालों से मुक्ति मिल जायेगी.
    क्या आप जानते हैं, हरी मटर है सौन्दर्य का खजाना
    चिकित्सा की भाषा में एमब्लिओपिया कही जाने वाली सुस्त-आंख की समस्या पचास में से एक बच्चे को होती है. यह समस्या तब होती है जब एक आंख में दृष्टि का ठीक से विकास नहीं हो पाता. अक्सर इस आंखं में भेंगापन भी पाया जाता है. इलाज न कराए जाने पर कमज़ोर आंख की दृष्टि पूरी तरह जा सकती है. 
    डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने सुस्त-आंख के इलाज का नया और मज़ेदार तरीका ढूंढ निकाला है- और यह है टेटरिस वीडियो गेम खेलना. मैकगिल विश्वविद्यालय के डॉक्टरों की टीम का कहना है कि, एक बिल्डिंग के गिरते हुए टुकड़ों को एक लाइन में लगाए जाने वाले, इस खेल से दोनों आंखों को साथ काम करना सिखाया जा सकता है.
    सामान्यतः डॉक्टर इसके इलाज के लिए ठीक आंख को ढक देते हैं और बच्चे को सुस्त-आंख से ही देखने को कहा जाता है. बच्चे को आंख कई महीने तक करीब-करीब पूरे दिन ढक कर रखना पड़ता है, जिससे बच्चा हताश होने लगता है. एक छोटे से शोध में सुस्त आंख की दिक्कत से ग्रस्त 18 जवान लोगों को शामिल किया गया. डॉक्टरों के अनुसार आंख को ढकने के पारंपरिक तरीके के मुताबिक इससे बेहतर परिणाम हासिल हुए. 
    थायरॉड के मरीज न करे धूम्रपान
     
    जब शिशु अपने 6 माह पार कर लेता है तब भी मां के लिए यह किसी चुनौती सरीखा होता है कि शिशु को कौन सा दूध शुरु किया जाए. कई मांएं विकल्प के तौर पर सोया मिल्क का चयन करती हैं. हालांकि इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन इसके प्रति सजग होना और इससे जुड़े कुछ तथ्यों का जानना जरूरी है. यहां हम कुछ ऐसे ही तथ्यों पर नजर डालेंगे.
    1-आपको यह बताते चलें कि सोया मिल्क एलर्जी न होने की गारंटी नहीं है. असल में यह जानना आवश्यक है कि आपके शिशु को किस प्रकार का दूध सूट करता है. यदि उसे पशु के दूध से एलर्जी है तो विशेषज्ञों की सलाह मुताबिक कब और कितना सोया मिल्क लेना है, यह अवश्य जान लें. आपको यह भी बताते चलें कि सामान्यतः शिशुओं को गाय के दूध से एलर्जी नहीं होती. अपने शिशु के लिए लो फैट सोया मिल्क को ही पिलाये  
    2-सोया मिल्क में ओस्ट्रोजेन जैसे तत्व मसलन फाइटोएस्ट्रोजेन बहुतायत में पाए जाते हैं. फाइटोएस्ट्रोजेन पौधों में प्राकृति रूप से मौजूद होते हैं. जो शिशु सोया मिल्क पर ही पूरी तरह निर्भर है सोया मिल्क के सेवन के चलते उनमें फाइटोएस्ट्रोजेन सम्बंधित बीमारी बढ़ने की आशंका हो जाती है. यह आपके शिशु के विकास को प्रभावित कर सकता है.
    3-सोया मिल्क के प्रतिदिन सेवन से शिशु के आने वाले दांतों को नुकसान हो सकता है. वे सड़ सकते हैं. यही कारण है कि सोया मिल्क पर निर्भर शिशुओं के लिए नित्य सफाई की सलाह देते हैं. साथ ही उन्हें नियमित पानी का सेवन भी करते रहना चाहिए ताकि उनमें पानी की कमी न होने पाए. असल में सोया मिल्क में ग्लुकोस सिरप मौजूद होता है जो दांतों के लिए हानिकारक है. अतः शिशु को पानी अवश्य पिलाएं.
    टोंड दूध का सेवन हो सकता है खतरनाक
    मेनोपॉज के दौरान एक महिला काफी बदलाव महसूस करती है. ये बदलाव उसकी बॉडी से लेकर उसके माइंड तक में नजर आते हैं. तनाव, चिड़चिड़ापन, याददाश्त, और ध्यान न दे पाना जैसी प्रोब्लेम्स इस दौरान काफी दिखती है. आपको यह मान लेना चाहिए कि मेनोपॉज एक नेचुरल प्रोसेस है और हर किसी महिला को किसी ख़ास एज में इस से दो चार होना ही पड़ेगा। कुछ बातों को ध्यान में रख कर आप इस सिचुएशन को काफी कण्ट्रोल कर सकती हैं. मेनोपॉज के दौरान आपको मसालेदार और एसिडिक फ़ूड प्रोडक्ट्स का सेवन नही करना चाहिए।
    तम्बाकू, कैफीन और शराब से दूर रहना भी रात में होने वाली घबराहट को कम करने में मददगार होता है। कैल्शियम इम्पोर्टेन्ट है चूंकि रजोनिवृत्त महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना होती हैं। बैलेंस्ड डाइट के लिए एक डाइटिशियन से परामर्श करें। इसके अलावा, रात में गर्म भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से बचने की कोशिश करें। विटामिन बी और सी भी रात को घबराहट के कारण आने वाले पसीने को रोकने में मदद करता है। सुबह की धूप जो कि पर्याप्त विटामिन डी के साथ होती है, बेहद फायदेमंद है।
    ताजा जूस और पानी का पर्याप्त सेवन दिन के दौरान आपके शरीर के तापमान को सामान्य रखने में सहायता करेगा। संतरा, नींबू, और मौसंबी जैसे सिट्रस विकल्प अधिक लाभदायक है। गाजर और अन्य सब्जियों के जूस भी फायदेमंद होते है। मेनोपॉज के दौरान तनाव घबराहट के कारणों में से एक हो सकता है। मेडिटेशन एंगर औऱ टेंशन से निपटने में मदद करता है। आप एक्सरसाइज के द्वारा भी तनावमुक्त हो सकते है, लेकिन किसी भी फ़ास्ट और हैवी गतिविधि जोकि आपके शरीर के तापामान को बढ़ा सकती है, को करने से बचना चाहिए।
    आजकल हर लड़की एक परफेक्ट फिगर चाहती है और इसके लिए वो मेहनत की जगह मार्केट प्रोडक्ट्स पर ज्यादा यकीन रखती हैं। ब्रैस्ट एक ऐसा पार्ट है जिसकी साइज को लेकर अक्सर युवतियां काफी चिंतित रहती है. छोटी साइज़ से जूझ रही युवतियां अक्सर ब्रैस्ट एनलार्जमेंट करेंस या फिर अन्य इक्विपमेंट्स की तरफ आकर्षित होती है जो कि एकदम गलत है. हर चीज नेचुरल वे में ग्रो हो सकती है। जैसे कि जब आपका वजन बढ़ता हैं तो धीरे धीरे आपके स्तनों का आकर भी बढ़ता हैं।
    आपको ऐसा लगता हैं की आपके स्तन बहुत ही धीमी गति से बढ़ रहे हैं तो आप डॉक्टर से हार्मोन्स लेवल टेस्ट करवा सकते हैं. बहुत सी ऐसी एक्सरसाइज हैं जिकी मदद से आपके स्तनों की वृद्धि हो सकती है । पुश-अप्स काफी अच्छी एक्सरसाइज है। अपने पैरो को फर्श पर सीधा रखे और हथेली की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाइए और धीरे धीरे निचे लाइए। ऐसा कम से कम 13 से 14 बार दोहराए और आप अपने हाथों और छाती को मज़बूत और स्वस्थ महसूस करेंगे।
    चेस्ट प्रेसेस डम्बल्स या वज़न को दोनों तरफ रखकर और ऊपर उठाकर किया जा सकता है। चटाई पर सीधे खड़े हो जाइये और दोनों घुटनों को मोड़िये और दोनों हाथों में वज़न लीजिये। धीरे से उन्हें आपके कन्धों के स्तर तक उठाइए और फिर वापस पुरानी स्थिति में लाइए। यह दिन में 10-15 बार दोहराइए और आप आसानी से परिवर्तन देख सकते हैं। चेस्ट कॉन्ट्रेक्शन में अपने पैरो को कुल्हो के बराबर दुरी पर रख कर सीधे खड़े हो जाइये। तोलिये के दोनों छोर पकडिये और अपने हाथो को सीधा फैलाईये तोलिये के छोरो को विपरीत दिशाओ में दोनों हाथो में खिचिये।
    आप 30 सेकंड से 1 मिनट तक रुक सकते है और यह व्यायाम 3 बार करे। चेस्ट फ्लाइज आपके घर बिना अधिक प्रयास के किया जा सकता है। कुर्सी के बीचो बिच बैठ जाइये और हाथो से बराबर वजन उठाइए। अपने हाथो वजन सहित सीधा कंधे के स्तर तक उठाइए और धीरे से निचे लाइए, ध्यान रखिये के आपके हाथ आपस में पास होने चाहिए। और आपके निचले शरीर के तरफ हाथो का फेस होना चाहिए। यह एक्सरसाइज एक दिन में 12 बार और 3 सेट में करे।
    आज के समय में इनडाइजेशन की समस्या एक बहुत ही गंभीर समस्या बनती जा रही है जिसके प्रभाव से कई लोग परेशान हैं। बहुत से लोगों की समस्या यह है की, सही पाचन न होने की वजह से उन्हें कब्ज़ का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही पेट में गैस बनने की शिकायत भी देखी गयी है। आधुनिक लाइफस्टाइल इस प्रॉब्लम का मुख्य कारण है।
    अपनी लाइफस्टाइल में निश्चित सुधार करके आप अपने डाइजेशन में आवश्यक सुधार कर सकते हैं। सही डाइजेशन के लिए दवाओं का सहारा लेने से नेचुरल उपाय ज़्यादा बेहतर माने जाते हैं। यह सभी उपाय घर पर आसान तरीके से कर सकते हैं. तेज़ी से खाने की वजह से भोजन अच्छी तरह नहीं चबा पाते और अधचबा हुआ यह भोजन पचने में कठिन होता है। इसीलिए हमेशा अच्छी तरह चबा कर ही भोजन करें और भोजन को देर तक धीरे धीरे खाएं। क्सर घर में कुछ विशेष पकवान आदि बनने पर हम ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं, ज़्यादातर लंच के बाद ऐसे भोजन जिनमें अधिक कैलोरी तो होती ही है और जो पचने में भी थोड़ा अधिक समय लेता है ऐसे भोजन को लेने से बचना चाहिए।
    प्रोसेस्ड फूड खाने में टेस्टी और पचने में कठिन होते हैं। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी नुकसानदायक होते हैं। इमनें पोषक तत्वों की मात्रा न के बराबर होती है। इनसे दूरी रखिये। मौसमी फलों और ताज़ी सब्जियों का भरपूर सेवन करना सेहत और पाचन के लिए बहुत लाभकारी होता है। अच्छे पाचन के लिए घर में बनी हुई चीजों का उपयोग करें। अपने खाने के समय की समय सीमा निर्धारित करें और सख्ती से उसका पालन करें। सुबह का नाश्ता ठीक समय पर करें। इसी तरह दोपहर और रात के भोजन का भी समय निर्धारित कर सही समय पर भोजन कर लें।
    अपने दिल को हेल्दी रखने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत असरदार होता है। ये हार्ट अटैक के खतरे को 50 फीसदी तक कम करता है। लेकिन क्या आप जानते है की एक्सरसाइज के दौरान होने वाली कुछ परेशानियां भी दिल की बिमारी की तरफ इशारा करती है? जी हाँ, ऐसा होता है. बहुत से ऐसे इंडिकेशन्स हैं जो आपको एक्सरसाइज के दौरान ये संकेत देते हैं कि आपको हार्ट संबंधी कोई प्रॉब्लम हैं. यदि आप नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते हैं और आपका वजन अधिक हैं, ऐसे में अचानक व्यायाम आपके दिल पर बहुत अधिक दबाव डाल सकता है.
    एक्सरसाइज के बाद या दौरान सीने में बेचैनी, दबाव, दर्द, जकड़न और भारीपन अनुभव करने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। एनजाइना एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिल को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति सही से नहीं होती। एनजाइना के कारण अक्सर जबड़े में दर्द की समस्या बनी रहती है। यदि सीने का दर्द जबड़े तक बढ़ जाता है तो ऐसे में आपको तुरंत अपने चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। अगर आपको पहले भी दिल के दौरे पड़े हों तो एक्सरसाइज के दौरान सावधानी बरतें, क्योंकि व्यायाम करते वक्त शरीर अति सक्रिय हो जाता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ऐसे में दिल का दौरा दोबारा पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
    एक्सरसाइज के दौरान कभी-कभी दर्द शरीर के किसी भी हिस्से से शुरू होकर सीधे सीने तक भी पहुंच सकता है। इन लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और संभावित हार्ट अटैक के लिए इनकी जांच करवानी चाहिए। बिना किसी कारण के अक्सर थकान होती है या हमेशा थका-थका महसूस हो तो यह परेशानी का सबब हो सकता है। थकान और सांस की तकलीफ की शुरुआत हार्ट अटैक होने से कई दिनों पहले जाती है। एक्सरसाइज के दौरान सामान्य से ज्यादा पसीना आना हृदय की समस्याओं की पूर्व चेतावनी संकेत हो सकता हैं।
    बॉडी बनाने का सही रास्ता
    आजकल की फास्ट लाइफ में चैन की नींद सोना हर किसी के नसीब में नहीं होता। दौड़ती भागती ज़िन्दगी में बमुश्किल एक ही वक्त होता है जब हम सब कुछ पीछे छोड़कर आराम करते हैं और यह वक्त है जब हम सो रहे होते हैं. आजकल नींद की बीमारियां बहुत आम हो गयी है. कोई नींद न आने से परेशान है तो किसी को बहुत ज्यादा नींद आने की बिमारी है. टेंशन,डिप्रेशन और खराब लाइफस्टाइल और न जाने कितने कारण है जिनके रहते हम ऐसी समस्याओं से जूझते हैं।
    नींद की एक ऐसी ही बीमारी है जिसका नाम स्लीप ऐप्निया है. अक्सर नींद के दौरान सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है, जिसे स्लीप ऐप्निया की समस्या के नाम से जाना जाता है। यह समस्या भले ही सुनने में छोटी लगती हो लेकिन इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं। यह समस्या रात को नींद के दौरान होती है। इस समस्या की वजह से सोते समय व्यक्ति की सांस सैकड़ों बार रुक जाती है। श्वसन क्रिया में आने वाले इस अंतर को ऐप्निया कहा जाता है।
    एक शोध के मुताबिक भारतीय पुरुषों में नींद के दौरान सांस लेने में दिक्कत महिलाओं की अपेक्षा तीन गुना अधिक हैं। शोध में यह भी माना गया है कि इस बीमारी में अधिकतर लोग डॉक्टर के पास जाने की सोचते ही नहीं हैं। भारतीय लोगों का चेहरा गोरे लोगों की तुलना में समतल होता है और जबड़े का हिस्सा भी बाहर उभरकर नहीं आता है। इसके परिणाम स्वरूप, हमारी जुबान से गले के पीछे की तरफ अधिक दबाव पड़ता है।
    सोने के इन तरीको से जाहिर होता...
    सर्दियों में गुड का सेवन ना सिर्फ स्वाद देता है बल्कि सेहत की दृष्टि से भी फायदेमंद होता है. गुड़ ना केवल बड़े-बुजुर्गो और गर्भस्थ महिलाओं के लिए बेहतर होता है बल्कि छोटे-छोटे बच्चों को भी फायदा देता है. ये बच्चों के पाचन तंत्र को भी प्रभावित नहीं करती है. बच्चों को थोड़ा थोड़ा ही गुड का सेवन करना चाहिए. इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, एनीमिया से बचाव करता है. 
    बच्चों के लिए गुड के फायदे –
    1-गुड़ की तासीर गर्म होती है. इसलिए जुकाम और कफ में यह फायदेमंद है. इसमें एंटी-एलर्जिक तत्व होते हैं. इसमें मौजूद फास्फोरस कफ को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है.सर्दी के दिनों में गुड़, अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलानें से ठंड लगने की आशंका कम हो जाती है. 
    2-गुड़ मिनरल, कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत होता है. ये पोषक तत्व बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाये रखने के लिए जरूरी होते है. साथ ही इससे कोशिकाओं का अच्छा निर्माण होता है. बच्चों के आहार में गुड को शामिल करने से उनकी हड्डिया मजबूत बनी रहती है. आप एक ग्लास दूध में गुड़ डालकर खिला सकते है. 
    3-अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो रात में खाना खाने के बाद एक टुकड़ा गुड़ खाने से कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी. गुड़ पाचनक्रिया ठीक रखता है. इससे खून साफ होता है और मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है. रोजाना एक ग्लास पानी या दूध के साथ थोड़ा सा गुड़ पेट को ठंडक देता है. गुड़ खाने के बाद  शरीर में पाचनक्रिया के लिए जरुरी क्षार पैदा होता है.
    ये है गुड़ के गुण
    चुकंदर, पालक, गाजर आदि पौधों की पत्तियां और तना दोनों बहुत फायदेमंद होती है, लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी हैं जिनके जड़ और तने सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं, कुछ तो जानलेवा भी हो सकते हैं, जानते है इन  इन पौधों के बारे में –
    1-टमाटर भी आलू के संबंधित परिवार में आते हैं जिस ये भी स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं माने जाते. यूरोप में तो 200 सालों से अधिक तक तो इसका इस्तमाल करने से भी लोग डरते थे. 1800 में अमेरिका द्वारा इस्तेमाल करने के बारे में समझाने पर इसका इस्तेमाल यूरोप में शुरू हुआ. टमाटर की पत्तियों में सोलेनाइन और टोमाटाइन होता है जो आपके पेट में दर्द का कारण बन सकता है.
    2-सेब के बीजों में सायनाइड जहर होता है. इन बीजों में एमेग्डलाइन रहता है जो पेट में डायजेस्टिव एंजाइम से प्रतिक्रिया करने पर सायनाइड रिलीज करता है. खैर प्रकृतिक तौर पर बीजों को कोटिंग काफी हार्ड होती है जिसे तोड़ पाना आसान है. ऐसे में अगर बिना चबाए आप बीज केवल लील लेते हैं तोघबराने की बात नहीं है. लेकिन इसका चबाकर लीलने पर पेट में सायनाइड रीलिज होता है जिससे आपकी तबीयत गड़बड़ा जाएगी.
    3-झाड़ियों में पकने वाले बैरी  जो बच्चों को काफी पसंद आते हैं. ये बैरी जहरीले होते हैं. इनमें सेपोजेनिन्स होता है जो आपको बीमार कर देता है. ये सेपोजेनिन्स इंसानों के लिए टॉक्सिक का काम करता है और जानवरों के लिए जहर की तरह काम करता है. अगर आप इन बैरियों को खाते हैं तो आपको उल्टी और दस्त हो सकते हैं.
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    मानव शरीर के प्रमुख अंगो में से एक "ह्रदय " पुरे शरीर में रक्त के सुचारू संचार के लिये जिम्मेदार है  और मानव स्वस्थ इस अंग के सुचारू संचालन पर निर्भर है. ह्रदय शरीर का महत्वपूर्ण अंगों में से एक है जो हमेशा चलता रहता है, सोते, खाते, पीते, हँसते, बैठते निर्विवाद रूप से जब तक साँसे है तब तक धड़कता है ये दिल.पर इसके अतिरिक्त भाव और कामना प्रधान ये दिल मानव का सबसे मजबूत और संवेदनशील अंगों में से एक है.
    आइये जानते है दिल से जुडी हुई कुछ रोचक जानकारियों को :- 
    1 सामान्य इंसान का ह्रदय एक मिनट में 72 बार धड़कता है. एक दिन में करीब एक लाख बार और एक साल में करीब साढ़े तीन करोड़ बार और पूरे जीवन में करीब 250 करोड़ से ज्यादा बार.
    2 दिल शरीर में एक मिनट से भी कम समय में हर कोशिका को रक्‍त पहुंचा सकता हैं. पूरे दिन में करीब एक लाख बार धड़कने वाला दिन पूरे शरीर में 2000 गैलन यानी करीब 7600 लीटर ऑक्‍सीजन युक्‍त रक्‍त शरीर की सभी कोशिकाओं, अंगों और हिस्‍सों में पहुंचाता है, ताकि वे सुचारू रूप से काम कर सकें.
    3 महिलाओं का दिल पुरुषों से तेज धड़कता है. पुरुषों का दिल एक मिनट में 70 बार धड़कता है वहीँ महिलाओं का दिल 78 बार .
    4 दिल को अगर ऑक्सीजन मिलती रहे तो ये शरीर से अलग होने के बाद भी धड़कता रहेगा .
    5 दिल एक मिनट में 5 से 30 लीटर रक्त पम्प करता है .
    6 ह्रदय रक्त को पूरी बॉडी में प्रसारित करने में केवल 20 सेकेण्ड का समय लगाता है .
    7 गर्भधारण के चार सप्ताह बाद बच्चे का दिल धड़कना शुरू कर देता है और ये मरते दम तक धड़कता रहता है .
    8 दिल बायीं तरफ नहीं बल्कि बीच में होता है लेकिन थोड़ा बायीं तरफ झुका होता है.

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    कच्ची हरी सब्जियां जैसे टमाटर,प्याज,मटर,अंकुरित दालें,साबुत अनाज,चने,उबले आलू,मक्का,पतागोभी,आदि को रुच्चीपूर्ण ढंग से नमक,चाट-मसाला,दही या सरसो के तेल, तिल के तेल के साथ जब परोसा जाता है और कच्चे रूप में खाया जाता है तो उसे सलाद कहते है. सलाद में कई हरी सब्जियां और फल इस तरह के होते है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी क्योंकि ये ज़रूरी खनिजो, विटामिन,और अन्य पोषक तत्वों की आपूर्ति करते है जिसे हमे स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. अगर हम ताजा सलाद लेते हैं, तो इससे हमारी पाचन शक्ति ठीक रहती है और साथ ही यह हमारे वजन को कम करने में भी मदद करता है.  
    सलाद के फायदे :- 
    1 आहार के रूप में शामिल सभी प्राकृतिक वनस्पतिक खाद्य पदार्थ और ताजा उत्पादों को स्वस्थ्य के लिए हितकर माना जाता है. इसमे शामिल है विटामिन,खनिज,फाइबर,और अन्य पोषक तत्वों से युक्त सभी प्राकृतिक फल ,सब्जी,भाजी साबुत अनाज.
    2 सलाद खाने से हमारे रक्त का संचार बढ़ता है. सलाद का सेवन करने से हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन मिलते हैं.
    3 यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हो, तो आप को सलाद खाना चाहिए, इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है. इसमें मौजूद फाईबर भूख को शांत रखने में मदद करते हैं, जिससे हमारा पेट भरा-भरा रहता है.
    4 कच्ची सब्जियों का सलाद पर्याप्त मात्रा में खाना चाहिए क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में एंटीआक्सीडेंट होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ और सुचारू सञ्चालन में हमारी मदद करते हैं.
    5 सलाद हमे रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करती है .
    6 सलाद सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है, साथ में यह हमारी पाचन शक्ति को ठीक रखने में मदद करता है. इसका सेवन करने से हमें दिल की बीमारियां नहीं होती है. हम कैंसर जैसी घातक बीमारियों से बचे रहते हैं.
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