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jankari362 कटहल के बीज बनाते है बालो को मजबूत

    अक्सर हम कटहल के बीज को बेकार समझकर फेंक देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कटहल के बीज से आपको कितने स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं, आइए कटहल के बीजों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानें.
    1-अगर आप एनर्जी से भरपूर रहना चाहते हैं तो कटहल के बीज का सेवन करें. जीं हां कटहल के बीज में काफी अधिक मात्रा में स्टार्च पाया जाता है, जिसके कारण यह एनर्जी का बहुत अच्छा स्रोत है. एक कटोरी कटहल के बीज आपको दिनभर एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं.
    2-कटहल के बीज में विटामिन ए और सी पाया जाता है, विटामिन ए आंखों के लिये बहुत ही अच्छा माना जाता है और विटामिन ए और सी बालों को मजबूत बनाता है. साथ ही कटहल के बीज बालों को घना बनाने में मदद करते हैं. कटहल के बीज खाने से सिर में ब्लड सर्कुलेशन बढता है, जिससे बालों का घनापन बढ़ता है.
    3-कटहल के बीज में बहुत सारा आयरन भी पाया जाता है और आयरन शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है. इसको नियमित रूप से खाने से शरीर में खून की कमी नही होती. साथ ही यह शरीर में ब्लड़ शुगर के लेवल को कंट्रोल में रखता है.
    4-कटहल के बीज में मैग्नीज और मैग्नीशियम जैसे मिनरल काफी मात्रा में होते हैं और यह दोनों ही मिनरल हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी हैं. मैग्नीशियम शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है. वहीं मैग्नीज संयोजी ऊतकों के निर्माण और ब्लड क्लॉटिंग के कार्य को नियमित करने में मदद करता है. इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कटहल के बीजों को सेवन करें. 
    थ्रेडिंग करवाने के कुछ खास स्टेप्स
  •  सरसों के बीज करते है अस्थमा से बचावसरसों के बीज करते है अस्थमा से बचाव
  • सरसों के बीजों का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है. इससे बनी चटनी बहुत स्वादिष्ट होती है. स्वाद लाभ के अलावा आसानी से उपलब्धता और त्वचा, बालों और स्वास्थ्य के लिए सरसों के बीज के अद्भुत फायदे हैं. ऐसे ही कुछ लाभों को उल्लेख यहां किया गया है. 
    1-सरसों के बीज में ग्लूकोसाइनोलेट्स जैसे यौगिक की उपस्थिति कैंसर कोशिकाओं के विकास को बाधित करने के लिए फाइटोकेमिकल्स उपयोग करने के लिए जाना जाते है. यह निश्चित रूप से सरसों के बीज एक बड़ा स्वास्थ्य लाभ है. 
    2-सरसों के बीज में मौजूद मैग्नीशियम माइग्रेन की समस्या को कम करने में मदद करता है. मछली में सरसों के बीज का  हल्का सा स्पर्श ओमेगा-3 फैटी एसिड को बढ़ावा देने में मदद करता है
    3-सरसों के बीज आहार फाइबर का अच्छा स्रोत हैं, जो शरीर में पाचन में सुधार करता है. जिससे मल त्याग बेहतर बनता है और शरीर के समग्र चयापचय में सुधार होता है. इसमें मौजूद फाइबर बहुत आसानी से घुलनशील होता है जो ज्यादातर उपयोग  के लिए इसे प्रभावी बनाता है.
    4-सरसों के बीज अस्थमा के रोगियों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर और सेलेनियम जैसे मिनरल की उपस्थिति अस्थमा के हमलों को रोकने में मदद करते हैं.
    यह तेल लायेगा आपकी खूबसूरती में निखार
    शिशु के रोने की असंख्य वजह है.शिशु भूख लगने पर, डाइपर गीला होने पर, असहज कपड़े पहनाने पर, तकलीफ आदि परेशानियों में रोते हैं. यही नहीं यदि शिशु के बाल उसकी अंगुली में उलझ गए, हाथ कहीं फंस गया, शरीर में कुछ चुभ रहा है आदि वजहों से भी शिशु रोते हैं. असल में शिशु रोकर ही अपनी समस्याओं के बारे में दूसरों को बताते हैं. अतः शिशु के रोने की सही वजह जानना जरूरी है-
    2-कई बार शिशु का रोना  छोटी मोटी वजहों से नहीं वरन बड़ी वजह से भी हो सकता है. यदि शिशु की तबियत सही नहीं है तो भी वह रो रोकर पूरे घर को सिर पर उठा सकता है. ऐसे में मां को लग सकता है कि उसे किसी चीज से परेशानी हो रही है. यदि आप उसके रोने की वजह न जान पाएं तो तुरंत डाक्टर के पास ले जाएं. शिशु का रोना अच्छी बात है. लेकिन अत्यधिक रोना अच्छी बात नहीं है.
    3-शिशु का रोना सिर्फ संकेत भर नहीं है. शिशु के रोने से उनके बेहतर स्वास्थ्य का भी पता चलता है. यही नहीं शिशु जितना रोते हैं, उससे उनकी आवाज खुलती है. यदि शिशु न रोए तो इससे डर का एहसास बंध जाता है. दरअसल शिशु के न रोने का मतलब है कि भूख, प्यास, दर्द, दूरी आदि कुछ भी वह महसूस नहीं सकता. जबकि चोट लगने से लेकर भूख लगने तक में रोने का मतलब है कि उसे महसूस होता है कि उसे क्या तकलीफ है. इसके अलावा उसके हृदय के लिए रोना सही है. शिशु का रोना संकेत है  उसके बेहतर स्वास्थ्य की निशानी है.
    क्यों रोते है बच्चे
    बदलती जीवनशैली के कारण स्तन कैंसर काफी बढ़ गया है. स्तन कैंसर का नाम सुनते ही डर लगने लगता है, क्योंकि कैंसर एक ऐसा रोग है जो तेजी से फैलता है. परन्तु अब इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है. ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन डी के सेवन से स्तन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है.
    महिलाओं में अक्सर विटामिन डी की कमी देखी जाती है. इसे सामान्य स्तर पर बनाये रखकर कैसर के खतरे को कम किया जा सकता है. अध्ययन के अनुसार विटामिन डी की गोलियों का खर्च काफी कम है और लाभ काफी अधिक क्योंकि इससे बड़ी परेशानी की आशंका काफी कम हो जाती है.
    एक अध्ययन के अनुसार, ब्रिटेन में हर साल 50 हजार महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ रही हैं. इसमें 1200 मौत के मुंह में चली जाती हैं.अध्ययन के अनुसार, वैसे तो विटामिन डी हड्डियों की मजबूती में अहम रोल अदा करता है. लेकिन अब यह भी माना जाता है कि विटामिन डी इम्यून सिस्टम और कोशिका विभाजन को नियंत्रित करने में भी लाभकारी है. यह दोनों कैंसर की रोक के अहम कारक हैं.
    ब्रैस्ट पर ही आखिर क्यों बनवाया इस महिला ने टैटू
    हमें अपने बच्चों के दिल को मजबूत करने के लिए बचपन से ही उनमें खान-पान की अच्छी आदतें डालनी चाहिए. जो लोग मिडिल एज में अपने हृदय को दुरूस्त रख लेते हैं, वो लंबा जीवन बिताते है. इस शोध में अच्छे हृदय और ब्लडप्रेशर वाले बच्चों को शामिल किया गया. लेकिन अगर उनका खान-पान अस्वस्थ रहता है तो बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) असंतुलित हो जाता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है. 
    बच्चों के लिए आप पहले से ही ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें, जिनसे बच्चे की जरूरतें पूरी हो सके. शुरुआत में आप अपने शिशु को कम कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे - सूजी की खीर, घी वाली खिचड़ी, दलिया, कुचला हुआ केला आदि दें. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि उसे पर्याप्त मात्रा में आयरन मिल रहा है या नहीं, क्योंकि ब्रेस्टफीडिंग के बाद बच्चे को पर्याप्त मात्रा में आयरन न मिलने के कारण उसमें आयरन की कमी होने लगती है.
     इसकी कमी पूरी करने के लिए बच्चे को दालें, फलियां, अंकुरित दालें, ब्रोकली व गोभी दें, इनमें आयरन बहुतायत में होता है. आयरन, बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के अलावा हीमोग्लोबिन के उत्पादन के लिए जरूरी है. हीमोग्लोबिन कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाने व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है.
    नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूर है. लेकिन क्या आपको पता है कि सोते समय यदि आपके साथ कुछ अजीबोगरीब बातें हों तो किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती हैं? यदि नहीं तो चलिये जाने सोते समय आपके साथ हो सकती हैं क्या अजीबोगरीब बातें.  
    1-बहुत ज्यादा नींद आना भी सेहत के लिए अच्छा नहीं. लोग नींद न आने से परेशान रहते है. नींद न ले पाना स्वास्थ्य के लिए जितना हानिकारक है, ज्यादा सोना भी सेहत के लिए उतना ही नुकसानदायक हो सकता है. 9-10 घंटे की नींद लेने वाले लोग कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से घिर जाते है. विशेषज्ञों के मुताबिक एक दिन में आठ से नौ घंटों की नींद काफी है.
    2-विशेषज्ञों बतात हैं कि लोगों को अपने उठने-बैठने के तरीकों से लेकर सोने तक की मुद्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि रोज की इन गलत आदतों की वजह से हड्डियों में दर्द शुरू हो सकता है. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि समय से पहले आपकी कमर न झुके आपको गहरी नींद आए तो ज्यादा साफ्ट गद्दे पर सोने से बचें. 
    3-कई लोग सोते समय इतनी जोर से दांत पीसते हैं कि पास सोया व्यक्ति भी जाग जाता है. इसके कई कारण जैसे चिंता और तनाव आदि हो सकते हैं. हालांकि हिप्नोथैरेपी के माध्यम से तनाव के कारण का पता लगाया जा सकता है. शराब, सिगरेट और अधिक चाय व कॉफी पीने से भी यह समस्या हो सकती है.
    ओवर स्लीपिंग मतलब बीमारियों को बुलावा
    आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे है. जिनकी मदद से आप सक्सेसफुल SEX लाइफ हासिल कर सकते है. जिससे आपको कई फायदे होंगे.
    - सेक्स लाइफ को सक्सेसफुल बनाने के लिए आपको अपने पार्टनर की सहजता का पूरा ध्यान रखना होगा. इसके अलावा सेक्स के दौरान अपने साथी के साथ ज्यादा आक्रामक ना होकर प्यार से पेश आये.
    - एक आइडल सेक्स के लिए सबसे ज़रूरी है TALK सम्बन्ध बनाने से पहले अपने साथी से बात करे. उनकी इच्छो और क्षमताओ के बारे में जाने. अपनी इच्छाओ को साथी पर थोपने से बचे.
    - अपने साथी की मदद से अपने सेक्स संबंधों में विविधता लाये. इससे आपके संबंधों में रोमांच बढ़ेगा और दोनों साथी को बेहतर सुख की प्राप्ति होगी.
    - इस बात का अवश्य ध्यान रखे की सेक्स सम्बन्ध दो लोगो के बीच बनाए जाते है. ऐसे में अपने साथी की सुख प्राप्ति के बारे में सोचे. और उन्हें अपने साथ पूरी तरफ सजग होने का मौका दे.
    - बेहतर सेक्स सम्बन्ध बनाने के लिए अपने शरीर की साफ सफाई का भी ख़ास ख्याल रखे. सम्बन्ध बनाने से पहले कुछ भी इस ना खाये जिससे आपके मुह से दुर्गन्ध आने लगे.
    बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में बढ़ती है सेक्स की इच्छा
    पहले कभी नहीं सुनी होगी सेक्स से जुडी ये बातें
    आधुनिक जीवन में आने वाले परिवर्तन विशेष रूप से इयरफोन पर लगातार सुने जाने वाले संगीत के कारण लोगों में सुनने की क्षमता कम होती जा रही है लेकिन अपनी दिनचर्या में संतुलित आहार को शामिल कर इस समस्या को रोका जा सकता है.
    1-एंटीऑक्सीडेंट का नियमित सेवन, विशेष रूप से पालक, शतावरी, सेम, ब्रोकोली, अंडे, जिगर या नट्स में पाया जाने वाला फोलिक एसिड सुनने की क्षमता की हानि के जोखिम को कम करते हैं. एंटीऑक्सीडेंट कान के भीतरी ऊतकों को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कण को रोकने में मदद करता है. 
    2-नट, विशेष रूप से बादाम, काजू और मूंगफली, साथ ही दही, आलू और केले मैग्नीशियम के बहुत अच्छे स्रोत है. अध्ययन के अनुसार, यह सुनने की क्षमता कम होने का आम प्रकार यानी शोर प्रेरित सुनने की हानि (एनआईएचएल) को रोकने में मदद करता है.  
    3-आप जिंक की स्वस्थ खुराक लेकर, उम्र के कारण होने वाले सुनने की क्षमता में कमी को आसानी से रोक सकते हैं. यह कानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जिंक समुद्री भोजन जैसे कस्तूरी, केकड़ा और झींगा और साथ ही पनीर और डार्क चॉकलेट में पाया जाता है. 
    4-एंटीऑक्सीडेंट की तरह विटामिन सी/ई मुक्त कणों की देखभाल करता है, और आपकी समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है. इस प्रकार से यह कान में होने वाले संक्रमण के जोखिम को कम करता है. यह विटामिन आपको आसानी से सब्जियों (जैसे शिमला मिर्च) और फल (जैसे संतरे) में मिल जायेगें. 
    बेबीकोर्न करता है त्वचा की देखभाल
    आमतौर पर भारत में गोरा होना ही सुंदरता का प्रमाण माना जाता है. कई बार तो समाज में सांवले रंग वालों को तिरस्कार भी झेलना पड़ता है. इन्हीं चीजों का विज्ञापन दिखाकर कॉस्मेटिक कंपनियां लोगों को क्रीम लगाने की सलाह देती है, और गोरा होने का दावा करती हैं.  विशेषज्ञों का मानना है कि गोरा करने का दावा करने वाली क्रीम का लगातार इस्तेमाल आपको हमेशा के लिए परेशानी में डाल सकती है.
    1-विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादातर क्रीमों में स्टेरॉयड होते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने से त्वचा को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं. वैज्ञानिकों की मानें तो ग्लूटेथियोन को इंटरनेट पर गोरेपन के एंजेट के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन सच यह है कि यह हमारे शरीर में एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट है जो उम्र बढ़ने या बीमारी के कारण समाप्त हो जाती है.
    2-तमाम ब्यूटी एक्सपर्ट भी यह मानते हैं कि त्वचा का रंग हल्का करने वाली क्रीम केवल एक निश्चित सीमा तक मेलानीन को हल्का कर सकती है. यह त्वचा को बिल्कुल गोरा नहीं कर सकती है. उनका मानना है कि गोरेपन के बजाय सुंदर त्वचा की प्रशंसा करनी चाहिए. कोई भी महिला या पुरूष उचित सफाई, टोनिंग, तेल लगाने, मॉश्चरॉइजिंग त्वचा में नमी बनाए रखकर साफ-सुथरी चमकदार त्वचा के जरिए सुंदर दिख सकता है. 
    करे अपने घुंघराले बालो की देखभाल
    3 से 6 महीने की उम्र के बच्चों में अक्सर अंगूठा चूसने की आदत की शुरुआत देखी गई है. पर कई बच्चों के साथ ये आदत उम्र बढ़ने के बाद भी बनी रहती है. हम आपको इससे  निजात पाने का तरीका बता रहे हैं.
    1-अंगूठे पर कड़वी या बेस्वाद चीज लगा दी जाए. यदि बच्चा जिस दिन या रात में खुद अंगूठा न चूसे तो उसे उत्साहित करे. बच्चे को मानसिक रूप से तैयार करें. इसमें बच्चे को स्नेह, अनुराग व मानसिक सुरक्षा की जरूरत होती है. बच्चे को लाड़ में और प्रेम से चुनौती देते हुए इस आदत को छोड़ने को कहें. उंगली पर पट्टी बाँधकर या इन अंगूठा चूसने से रोकने की चीज़ों का प्रयोग कर, आप अपने बच्चों की इस आदत को छुड़वाने में सफल हो सकते हैं.
    2-बच्चों को अंगूठा चूसने के क्या क्या परिणाम हो सकते है इस बारे में जरूर बताएं. उन्हें समझायें कि ये आदत उन्हें बीमार कर सकती है. जिस उंगली को चूसा जा रहा है उसपर सूजन या संक्रमण होना, साँस में दिक्कत होना- ये सब अपने बच्चे को दिखायें.बड़े होकर टेढ़े या ऊँचे दाँतों पर तार लगवाने में कितना दर्द होता है, ये सब अपने बच्चे को बताएँ.
    उसे ये भी बतायें की बड़े होकर भी यदि वह इस आदत को नही छोड़ता तो उसके स्कूल/ कॉलेज में वह सबकी हँसी का पार्थ बन सकता है जो उसी को ठेस पहुँचाएगा. ऐसा करने पर आपका बच्चा ये आदत छोड़ेगा. आप चाहे तो डॉक्टर की मदद भी ले सकते है. 
    छिलको से निखारे अपनी स्किन
    रक्तदान सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ है. यह एक मानव के जीवन को बचाता है, ऐसे में सभी को रक्तदान करना चाहिए. कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर 3 माह में रक्तदान कर सकता है. तो चलिये जानें रक्त से जुड़ी ऐसी ही कुछ जरूरी जानकारियां.
    1-रक्तदान करने से 3 घंटे पहले पौष्टिक भोजन लें.
    2-रक्त देने से पहले भर पेट नाश्ता/ भोजन किया हुआ हो. रक्तदान करने से पहले हल्का खाना खाएं. वर्ना उल्टी और घबराहट की शिकायत हो सकती है.
    3-इस बात का ध्यान रखें कि आपका स्वास्थ्य अच्छा हो. एक गिलास पानी पीकर रक्तदान करें और उसके बाद कुछ तरल पदार्थ लें.
    4-घबराहट होने पर आराम करें और एक कप चाय या कॉफी पिएं.
    5-अगर कोई महिला रक्तदान करती है तो इस बात का ध्यान रखें कि आपको महावारी ना हो रही हो.
    6-यदि 48 घंटे पहले आपने एल्कोहल लिया हो, तो आप रक्तदान करने के लिए योग्य नहीं होंगे. 
    बॉडी बनाने का सही रास्ता
    हमारे जीवन में रिश्तों की काफी अहमियत होती है. रिश्ते हमारी जिंदगी को पूर्ण बनाते हैं. लेकिन, रिश्ते अगर ठीक न चल रहे हों तो उसका असर हमारी सेहत पर भी नजर आने लगता है. यहां रिश्ते हमें मजबूत बनाने की बजाए हमारी तबीयत को नुकसान पहुंचाने लगते हैं. कोई रिश्ता परफेक्ट नहीं होता, उनमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. लेकिन, रिश्तों में अगर परेशानियां आने लगें तो इसका असर हमारे मानिसक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है.
    1-मजबूत रिश्ता किसी इनसान को बीमारियों से बचाने का काम करता है. जब इनसान किसी मजबूत रिश्तों में होता है तो वह सेहतमंद आदतें अपनाने के लिए प्रेरित होता है. इसका सकारात्मतक असर उसकी उम्र पर भी होता है. वहीं रिश्तों की परेशानियां व्यक्ति का मानसिक तनाव बढ़ा देती हैं. इसका प्रभाव आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है. इसलिए अगर आप किसी को डेट कर रहे हैं, किसी रिश्ते में जुड़ने जा रहे हैं या शादीशुदा हैं तो कुछ खास बातों का विशेष खयाल रखें.
    2-उचित खान-पान ना होना, हमेशा तनावग्रस्त रहने के असर आपके ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है.  इसके कारण हमारे शरीर से स्ट्रेस हार्मोंन निकलते हैं और हृदय गति बढ़ जाती है जिसकी वजह से बल्ड प्रेशर बढ़ सकता है
    3-आलिंगन प्यार जताने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. यह तनाव कम करने में मददगार है. शोध के मुताबिक जब आप अपने साथी को गले लगाते हैं, तो इससे रक्त में एक हार्मोन ऑक्सीटोसिन का स्राव होता है. इससे उच्च रक्तचाप में कमी आती है, तनाव और बेचैनी कम होती है और इससे आपकी स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है.
    जानिए, छोटे बीजो के बड़े काम

  • केले में विटामिन सी, बी-6 पोटैशियम, थायमिन, राइबोफ्लेविन भी होता है. जो बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हीलिंग क्रीमी केला खांसी का एक उत्कृष्ट प्राकृतिक उपाय है और लगातार होने वाली खांसी और ब्रोंकाइटिस के इलाज में काफी फायदेमंद होता है. यह बच्चों के लिए विशेष रूप से प्रभावी होता है, लेकिन यह बड़ों द्वारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
    बच्चे के गले में खराश या लगातार खांसी होने पर इस अद्भुत क्रीम को बनाना चाहिए- इसे तैयार करना बहुत ही आसान है. आइए इसे तैयार करने की विधि के बारे में जानें.
    2 मध्यम आकार के पके हुए केले (डॉट्स वाले अच्छे रहते हैं)
    2 बड़ा चम्मच चीनी या शहद (अगर आप इसमें शहद मिला रहे है तो मिश्रण को ठंडा होने पर मिलायें क्योंकि उच्च तापमान में शहद अपने गुणों को खो देता है.
    400 मिलीलीटर उबलता पानी.
    1-केले लेकर छिलका निकाल लें. फिर इसे चम्मच और कांटे की मदद मैश करें (कोशिश करें कि चम्मच लकड़ी या प्लास्टिक का ही हो.फिर इसमें चीनी डालकर अच्छे से मिलाये.
    2-अब इस पेस्ट में गर्म पानी डालकर कवर करें और इसे 30 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें.
    3-अगर आपको शहद का उपयोग करना हैं तो पेस्ट के ठंडा होने के बाद ही इसे मिलाये.
    4-अंत में पेस्ट को प्लास्टिक की छलनी से छान लें.
    5-पेस्ट को हल्का गर्म करके दिन में 4 बार लें. (हर बार आपको लगभग 100 मिलीलीटर का सेवन करना चाहिए).
    6-उपचार के लिए आपको रोजाना नया पेस्ट बनाना चाहिए. कुछ ही दिनों में आपकी खांसी महंगी दवाओं के बिना ठीक हो जायेगी!
    आज की लाइफ स्टाइल में चैन की सांस लेना भी दुशवार है तो फिर चैन की नींद लेना तो काफी दूर की बात है. बहुत से लोग ठीक से सो नहीं पाते। लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो जरुरत से ज्यादा नींद लेते है यानी वो देर तक बिस्तर में सोये रहने के आदि हैं। जरूरत से ज्यादा नींद लेना सेहत को बिगाड़ भी सकता है और यह बहुत से सोधों के बाद सामने आया है कि ऐसा करने से हमज बहुत सी बीमारियों को बुलावा दे रहे हैं।
    नार्मल से ज्यादा नींद लेना दिमाग को स्वस्थ रखने के बजाए आपको डिप्रेशन का शिकार बना सकता है। शोध में यह साबित हुआ है कि 7 घंटे से अधिक सोने वालों को मानसिक तनाव का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा 9 घंटे से अधिक नींद लेने पर डिप्रेशन की संभावना 49 प्रतिशत बढ़ जाती है। जो लोग रोजाना आठ घंटे से ज्यादा नींद लेते हैं उन्हें डायबिटीज होने की संभावना उन लोगों की अपेक्षा में दुगुनी हो जाती है, जो आठ घंटे से कम नींद लेते हैं।
    आठ घंटे या इससे अधिक नींद लेने वाले लोगों को कोरोनरी हार्ट डिसीज होने का खतरा दुगुना हो जाता है, बजाए उनके, जो आठ घंटे से कम नींद लेते हैं। आठ घंटे से ज्यादा नींद लेने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावनाएं, आम महिलाओं जो 7 से 8 घंटे की नींद लेती हैं, उनकी तुलना में आधी हो जाती है। ज्यादा नींद लेना दिमाग को आराम देने के बजाए आपके दिमाग को कमजोर करता है और याददाश्त को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    अंजीर से होने वाले स्वास्थकारी फायदे उसमे पाये जाने वाले मिनरल्स, विटामिंस और फाइबर की वजह से होतें है। अंजीर में स्वास्थ के लिये लाभदायक न्यूट्रीशन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्निशियम, सोडियम पोटेशियम और क्लोरिन जैसे लाभदायक तत्व होते है। अंजीर पोटेशियम का अच्छा स्त्रोत है। पोटेशियम एक जरुरी और महत्वपूर्ण मिनरल्स है जो हमारे शरीर के लिये जरुरी होता है, इसका रोज़ सेवन करने से ब्लड प्रेशर की समस्या कम होती है और साथ ही अंजीर हाई-ब्लडप्रेशर को कम करने में भी सहायक है।
    अंजीर में पोटेशियम सम्बन्धी तत्व पाये जाते है जो हमारे पाचन तंत्र को विकसित करने और मजबूत बनाने में सहायक होते है, यह तत्व आपको ह्रदय सम्बन्धी विकार और किडनी सम्बन्धी समस्याओ से बचाते है। अंजीर में ज्यादा मात्रा में फाइबर होने की वजह से इसका हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इससे हमारा वजन संतुलित रहता है।
    फाइबर केवल हमारे पाचन तंत्र के लिये ही ठीक नही है बल्कि इससे कैंसर और डायबिटीज का खतरा भी कम होता है। अंजीर में जिंक, मैग्नीज, मैग्नीशियम और आयरन होता है, यह सभी तत्व हमारे प्रजनन तंत्र के लिये उपयोगी होते है और ये सभी प्रजनन स्वास्थ को विकसित करने में सहायक भी होते है। अंजीर में पाये जाने वाले एंटीओक्सिडेंट तत्व खून में से ग्लूकोज़ और शक्कर के प्रमाण को कम करते है। और हमें डायबिटीज से बचाते है।
    मेथी का सेवन करना हमारे अच्छे स्वास्थ के लिये बहुत जरुरी है. मेथी के बीज शुरू में हल्के से कडवे जरुर होते है लेकिन बीजो को भुनकर हम इसकी कडवाहट को कम कर सकते है। मेथी में बहुत से विटामिंस जैसे थायमिन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, नियासिन, आयरन, सेलेनियम, जिंक, मैंगनीज और मैग्नीशियम।
    इसके साथ ही मेथी की पत्तियाँ विटामिन 'के' का सबसे अच्छा स्त्रोत है। मेथी के बीज ट्रिगोनेलिन, लाइसिन और एल-ट्रीप्टोफान के अच्छे स्त्रोत है। इसके साथ ही मेथी के बीज में सैपोनिन और फाइबर की मात्रा भी ज्यादा होती है जो हमारे स्वास्थ के लिये बहुत लाभदायक है। मेथी और मेथी के बीज का उपयोग करने के कुछ आसान तरीके निचे दिये गए है। पारंपरिक रूप से देखा जाये तो मेथी, मेथी के बीज और मेथी की पत्तियों का उपयोग कई तरह से किया जाता है।
    मेथी में कुछ एंटी-डायबिटिक तत्व भी होते है जैसे की मेथी इन्सुलिन के स्त्राव को हाइपरग्लीसमिक परिस्थितियों में बढ़ाने में सहायक है और साथ ही मेथी संवेदनशीलता को बढ़ाने में भी सहायक है। मेथी में पाये जाने वाले 4HO-Ile का उपयोग डायबिटीज के इलाज के लिये भी अक्सर किया जाता है।
    ऐसा पाया गया है कि जिंजर बियर सर्दी और फ्लू के लक्षणों को कम कर सकती है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार व कैंसर से बचाव भी करती है. तो चलिये जानें एल्कोहॉल रहित जिंजर बियर के ऐसे ही कुछ और फायदे-
    1-अदरक पाचन में सुधार करते हुए मतली से राहत दिलाता है.अगर आप गर्भवती हैं और आपको मॉर्निंग सिकनेस की समस्या है तो बना एस्कोहॉल वाली जिंजर बियर से मतली में कुछ राहत मिलती है.  इसके साइड इफेक्ट नहीं होते हैं. 
    2-हर्बल मेडिसन की समीक्षा के अनुसार अदरक को बहुत पहले से ही एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन इस विषय पर शोधों के विरोधाभासी परिणाम आए हैं. हालांकि कुछ अध्ययनों में पाया गया कि अदरक से सूजन में कमी आती है.
    3-वर्ष 2008 में मॉलिक्यूलर नुट्रिशन एंड फ़ूड रिसर्च की एक रिपोर्ट में पाया गया कि अदरक ने प्रयोगशाला में मानव कैंसर कोशिकाओं के विकास में रोकथाम की.
    अदरक है बालो की अनेक समस्याओ का समाधान
    क्या आप जानते हैं कि शहद को गर्म पानी के साथ लेने से लीवर को डिटॉक्स करने और वजन कम में मदद मिलती है और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है. 
    1-अच्छे पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना चाहिए. यह पेट को साफ करने में मदद करता है. यह लीवर में रस के उत्पादन को बढ़ाता है जिससे पाचन में मदद मिलती है. 
    2-नींबू में मौजूद एसिड आपके पाचन तंत्र में मदद करता है और अवांछित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. इसके अलावा शहद एक एंटीबैक्टीरियल के रूप में कार्य करता है और आपके शरीर में मौजूद किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन करने के अन्य फायदे भी है.
    3-शहद और गर्म पानी से शरीर में एनर्जी में भी वृद्धि होती है. शरीर में ज्यादा एनर्जी उत्पन्न होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म और कार्यप्रणाली में भी वृद्धि होती है. शहद शरीर के अंगों को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है. सुबह के समय गर्म पानी में शहद लेने से आप दिन भर ऊर्जावान बने रह सकते हैं.
    लिवर को डेटॉक्स करता है किशमिश का पानी
    जल संक्रमण प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है और यह पाचन तंत्र की दीवारों के माध्यम से संचार प्रणाली के ऊतकों पर आक्रमण करते हैं. इसके कारण आपके पाचन तंत्र, मूत्राशय और मूत्र मार्ग या सभी में समस्याएं पैदा कर सकता है. वैसे तो संक्रमण के इलाज के लिए कई प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आप इन दवाओं का सेवन नहीं करना चाहते हैं, तो यहां दिये प्राकृतिक उपायों को आजमा सकते हैं. 
    1-क्रेनबेरी जूस किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलवाने का सबसे अच्छा विकल्प है. दिन में दो बार इसका एक गिलास पियें. इसके अलावा आप ब्लूबेरी या अनार के जूस को भी ले सकते हैं. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह फल शरीर को प्राकृतिक रूप से संक्रमण से मुक्त करने में मदद करते हैं. 
    2-सिरके में मौजूद पीएच स्तर शरीर की बाहरी तत्वों से रक्षा करता है. कुछ मात्रा में सेब साइडर सिरका लेने से शरीर समस्या पैदा करने वाले रोगजनकों के खिलाफ कार्रवाई करने में मजबूर करता है. 
    3-अच्छे स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए पर्याप्त नींद बहुत जरूरी होती है, साथ ही यह रोगी को अधिक दर्द सहने योग्य बनाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि पर्याप्त आराम के बाद शरीर किसी भी समस्या से बेहतर तरीके से लड़ सकता है. यदि आप रात को पर्याप्त सात आठ घंटे की नींद लेते हैं तो किसी भी समस्या का बेहतर सामना कर सकते हैं.
    लेमन ग्रास का  प्रयोग खाने पकाने और स्वाद बढ़ाने वाले मसाले के रूप में करने के साथ सदियों से औषधीय रूप में भी किया जा रहा है. लेकिन कहते हैं न कि हर चीज के फायदों के साथ-साथ कई नुकसान भी होते हैं ऐसा ही लेमनग्रास के साथ भी है. आइए जानें लेमनग्रास किस तरह से नुकसानदायक हो सकती है.
    1-लेमनग्रास की लंबी अवधि के कोई हानिकारक साइड इफेक्ट नहीं है लेकिन इसे कम मात्रा में इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाती है और गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए. लेमनग्रास के सेवन से माहवारी शुरू हो जाती है, इससे मिसकैरेज का डर बना रहता है.
    2-कुछ लोगों को लेमनग्रास लेने के बाद फूड एलर्जी जैसे लक्षणों का अनुभव होता है. लेमनग्रास की चपेट में आने वाले लोगों को सीने में दर्द, चकत्ते, गले में सूजन, त्वचा पर पित्ती, त्वचा पर खुजली और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों का अनुभव होता है. हालांकि यह प्रभाव असामान्य है.
    3-डायबिटीज या ह्य्पोग्ल्य्समिक से ग्रस्त लोगों को लेमनग्रास तेल लगाने से बचना चाहिए क्योंकि यह तेल आपके रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है और डायबिटीज और उच्च रक्तचाप की दवा लेने वाले लोगों को तो इसके इस्तेमाल से पहले से ही मनाही है. इसके अलावा लीवर और किडनी की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को लेमनग्रास के तेल का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए.

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