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jankari423 424 खांसी दूर करने के लिए खाये अदरक लहसुन और नमक

    मौसम बदलने के साथ बच्चो को और उनको जिन में इम्युनिटी कम है उन्हें सर्दी और खाँसी हो जाता है. ऐसे में सर्दियों से घर के मसाले की त्रिमूर्ति, अदरक, लहसुन और नमक, वो सफलता देती है जो एलोपैथिक दवाई नहीं दे सकती है. ख़ास कर के अगर कफ हो जाए तो सिर्फ अदरक और नमक एक रामबाण औषधी है कफ को भगाने के लिए . 
    1-अदरक में है बीटा कैरोटीन, विटामिन c, अलग प्रकार के पोलीफेनॉल्स और फ्लावोनोइड्स और टैंनिंस. कफ और सर्दी में अदरक में श्गॉल्स, जिंजरोने, गिंगेरोल, गलनालस और जिंजरोने अच्छा ऐसा एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल कार्य करके, सूजन कम  करके राहत पहुचाते है . 
    2-नमक भी अदरक की तरह एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने वाला तत्त्व है और एंटी-बैक्टीरियल भी है. 
    3-अदरक को बारीक काटे और उस पर नमक छिडक के मिला के थोड़ी देर तक रहने दे और फिर चबा के खा ले. चाहे तो इस में थोड़ा सा शहद मिला ले क्योंकि अदरक बहुत तीखा होता है. अगर चबा के खाना मुश्किल है तो अदरक और नमक पानी में उबाल के छान ले और यह काढ़ा पीये. 
    सूरजमुखी के बीज बचाते है अस्थमा और...
      शादी का सपना हर इंसान के मन में होता है, शादी की पहली रात हर एक के जीवन की सबसे यादगार रात होती है, ये एक ऐसा एहसास है जिसे शब्दो में बयाँ करना ठीक नहीं होगा. सुहागरात का सपना हर शादीशुदा जोड़ा देखता है, क्योकि इस दिन का इंतज़ार हर पति-पत्नी को होता है. बस ज़रूरत है इसे यादगार बनाने की. हम आपको बताने जा रहे है की आप अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को और भी हसींन कैसे बना सकती है-
      1-बाते करे- जब आपकी शादी की सुहागरात हो तो सबसे पहले अपने पार्टनर से बाते करे अगर वो चाहे तो क्योकि बात करने से आपको उसकी पसंद-नापसन्द का पता चलेगा और आप उनसे अच्छी तरह घुल-मिल जाएँगी और अरेंज मैरिज में तो ये सबसे ज़रूरी होता है क्योकि बाते करने से सामनेवाला आपके साथ सहज हो जाता है और आगे बढ़ने के लिए आपके पार्टनर का आपके साथ सहज होना बहुत ज़रूरी है.
      2-धीरे धीरे शुरुवात करे- शादी की पहली रात को सम्भोग करने से पहले अपने पार्टनर की सहजता का पूरा ध्यान दे,थोड़ी देर बाते करे,शुरू में आप अपने पार्टनर का हाथ पकड़ कर धीरे धीरे सहलाये, उसके बाद आप किस भी कर सकती है, आपका पार्टनर क्या चाहता है ये समझ कर ही आगे बढे.
      3-कपड़ो का चयन- जैसा की हम सभी जानते है की लाल रंग बहुत कामोतेजना पैदा करता है इसीलिए सुहागरात के दिन आप लाल रंग का गाउन पहन सकती है जो की देखने में काफी सेक्सी होना चाहिए आप चाहें तो अपने पार्टनर की पसंद के रंगो में से किसी भी रंग का चयन कर सकती हैं। साथ ही साथ इसी रंग की पैंटी और ब्रा भी पहने जो आपकी सेक्स अपील को पूरी तरह से दर्शाता हो और सेक्सी अंर्तवस्त्र पहनकर आप अपने साथी को अपनी तरफ पूरी तरह आकर्षित कर सकती है क्योकि सुहागरात के दिन पति का ध्यान सबसे पहले आपकी नाईट ड्रेस और आपके अंडरगार्मेंट पर जाता है, इसलिए भूलकर भी सुहागरात के कपड़ो के चयन पर जरा भी कोताही ना बरते नहीं तो ये आपके खुशनुमा माहौल को फीका का सकता है |
      4 -इत्र का चयन- जैसा की हम सभी जानते है की इत्र किसी भी माहौल को खुशनुमा बनाने में काफी मदतगार साबित होता है इसलिए सुहागरात के दिन अपनी ड्रेस की तरह इत्र का भी चयन काफी सोच समझ कर करे जिससे आपका पार्टनर आपकी तरफ पूरी तरह से उत्तेजित हो, क्योकि आपकी सेक्सी ड्रेस की तरह आपके शरीर से मधुर खुशबू आ रही है, तो आपके साथी की कामोत्तेजना चरम पर पहुंच जाती है। आपकी गर्दन, हाथ, कलाई, पीठ, से अगर आपके साथी की मनपसंद खुशबू आ रही है, तो सेक्स करने का मजा दोगुना हो जाता है वही आपके बिस्तर पर गुलाब की कुछ पंखुडियां बिखरी बड़ी हो और माध्यम लाइट या कैंडल जल रही हो तो आपकी राते और भी गर्म हो जाएँगी.
    वजन कब बढ़ जाता है और चर्बी कब जमा हो जाती है यह पता नहीं लगता है मगर जब कपडे टाइट होने लगे और पेट आगे की ओर उभर तब पता चलता है की आप मोटे हो गए है.
    यहाँ पर हम बता रहे है कुछ आसान तरीके जिन्हें अपना कर आप आसानी से  वजन कम कर सकते है. 
    1-घरेलू कार्य खुद करें. जैसे झाडू-पोंछा, कपडे धोना, बाजार से सब्जी, रोशन आदि लाना. इससे आपकी फिटनेस बनी रहेगी. शारीरिक थकान से बिस्तर पर अच्छी नींद भी आएगी.
    2-दिन भर में कोई भी ऐसा कार्य करें, या चढे-उतरें. सुबह उठने का प्रयास करें और जितनी इच्छा हो उतना पानी पिएं. छत पर जाकर टहलें.
    3-छरहरी कमर के लिए पेट हिप्स पर चर्बी न चढने दें. पेट और हिप्स का आकार बेडौल हो जाता है तो आप कमर की स्वाभाविक ब्यूटी से वंचित रह जाती हैं.
    4-संतुलित एवं पौष्टिक खाने लें. ठोस आहार की जगह तरल भोजन का सेवन करें, जो सुपाच्य भी हो और भरपूर एनर्जी देने वाला भी हो. ठोस आहार देर से पचता भी है और वजन में भी वृद्धि करता है.
    5-अपने भोजन पर नियमित रूप से ध्यान दें, चीनी, स्टार्च, वसायुक्त पदार्थ तथा अधिक कैलोरी वाला आहार से परहेज करें.
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    सर्दियां आने पर सबसे ज्यादा परेशान करता है वो है पुराना दर्द. जैसे-जैसे सर्दियां बढ़ती जाती है दर्द और बढ़ता जाता है. लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है. पुरानी चोट या फिर दुर्घटनाओं से तो आप उभर जाते हैं लेकिन इनका दर्द ऐसे मौसम के आते ही बार-बार सामने आने लगता है. ऐसे में आपको डॉक्टर से तो सलाह लेनी ही चाहिए लेकिन आप खुद भी कई तरीकों से इससे निपट सकते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि ऐसे दर्द से आप कैसे छुटाकारा पा सकते हैं.
    पुराने दर्द का कारण
    पुराना दर्द कई कारणों से हो सकता है. अक्सर ऐसा होता है कि उम्र बढ़ने के साथ  जोड़ों और हड्डियों में दर्द होता है. अन्य सामान्य कारणों तंत्रिका को नुकसान पहुंचने और चोटों के पूरी तरह से ठीक न हो जाने के चलते ऐसा होता है. 
    पुराने दर्द को ठीक करने के लिए पहले यह जानने की कोशिश करें कि इसके पीछे का कारण क्या है. इसकी पहचान करना बेहद जरूरी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक कभी-कभी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता, यह नर्वस सिस्टम को डैमेज कर देती है जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता. ऐसी स्थिति में जब भी सर्दियां आती है तो भयंकर दर्द का सामना करना पड़ता है. 
    पेनकिलर्स और डॉक्टर की सलाह के आलावा बहुत से ऐसी कुदरती तरीके मौजूद हैं जिससे आप आपने पुराने दर्द से निजात पा सकते हैं. 
    10 चम्मच अच्छा सफेद नमक
    20 चम्मच जैतून या सूरजमुखी का कच्चा तेल 
    इसको बनाने की विधि बहुत ही आसान है, एक कांच के बर्तन में दोनों चीजे मिला लें. बर्तन को अच्छी तरह से 2 दिन के लिए बंद कर के रखें और दो दिन बाद एक हल्के रंग की औषधि तैयार हो जाएगी.
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    भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है. चिरौंजी किसी औषधि से कम नहीं है जो सेहत व सौंदर्य के लिए भी लाभकारी होती है. छोटे चिरौंजी में प्रोटीन की मात्रा होती है इसके अलावा इसमें विटामिन सी और बी खूब मात्रा में होता है. चिरौंजी को चारोली के नाम से भी जाना जाता है.
    चिरौंजी सेहत व सौंदय दोनों के लिहाज से बहुत फायदेमंद है. 
    1-सर्दी-खांसी में चिरौंजी का काढा बनाकर सुबह-शाम पीने से काफी फायदा होता है.
    2-चिरौंजी को दूध और संतरे के छिलको मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और इस पेस्ट को चेहरे पर लेप लगाएं. जब लेप सूख जाए तब चेहरे को धो लें. कुछ ही दिनों में चेहरे पर फर्क पाएं.
    3-चिरौंजी दो प्रकार की वस्तुओं को कहते हैं एक तो जो मंदिर में प्रसाद के रूप में चढाई जाती है वह है चिरौंजी दाना और दूसरी है वह मिलती है.
    4-अगर आपको शारीरिक कमजोरी हो तो उसके लिए चिरौंजी का सेवन करना चाहिए. यह शारीरिक वीकनेस को दूर करने के साथ ही क्षमता का विकास भी करता है.
    माइग्रेन दूर करने में सहायक है रोजमेरी टी
    अंजीर में अत्यधिक पौष्टिक तत्व होते हैं, जिसमें विटामिन ए, बी और कई मिनरल्स, जैसे कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम शामिल हैं. अंजीर में पोटैशियम होने के कारण यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.
    इसका प्रयोग अनेक रोगों में औषधि के रूप में भी किया जाता है. 
    1-इसमें कैल्सियम तथा विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं. अंजीर के सेवन से कब्ज, एनीमिया, अस्थमा, जुखाम, कमर दर्द, सिरदर्द, बावासीर आदि रोग दूर होती हैं और शरीर में ताकत आती है. 
    2-यदि आप अपने चेहरे को ग्लो देना चाहते हैं और पिंपल्स से छुटकारा पाना चाहते हैं तो तो ताजे अंजीर को पीसकर चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट तक रखकर चेहरा साफ पानी से धो लें.
    3-सूखे अंजीर को पानी से उबालकर उसका लेप बनाकर गले पर लगाने से गले के अंदर की सूजन दूर होती है.
    4-अंजीर का सेवन करने से थकान दूर होती है, साथ ही यह दिमाग को भी तेज रखता है.    
    5-अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है.
    स्वस्थ रहने के लिए खाये मल्टी ग्रेन आटे की रोटी
    आपको अक्सर रात में नींद नहीं आती है इसके लिए आप रोज रात को नींद की गोली लेते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि हमेशा नींद की गोली आपके लिए कितनी हानिकारक है, कभी-कभार नींद की गोलियों का सेवन बहुत लाभदायक हो सकता है. वो भी तब जब आपके डॉक्टर ने इसे लेने की सलाह दी हो. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गोलियां कितनी सुरक्षित है?  आप अपने मन से कभी भी इन दवाईयों का सेवन न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से सलाह ले लें. हाल ही में एक शोध के द्वारा पता चला है कि जिन दवाईयों में नॉनबेंजोडिजेपाइन पाया जाता है उनका साइड इफेक्ट प्रोफाइल सेफ होता है.
    डॉक्टर जिन दवाईयों के सेवन की सलाह देते हैं वो आपको रिलैक्स कर देती हैं और आपको खतरे व साइडइफेक्ट से बचाती हैं. दवाई लेने से पहले आप डॉक्टर से पूछ भी सकते हैं कि आपको इसे कितने समय तक लेना होगा और कितनी मात्रा में. डॉक्टर जब भी इन दवाईयों को देते हैं तो वो उन्हें एक क्रम से देते हैं ताकि आपको उनकी आदत न पड़े और उनका दुष्प्रभाव भी आप पर न हों.
    लेकिन आपको इन दवाईयों को लेने के अलावा, खुद को सही रखने के लिए वर्कआउट करना चाहिए और कैफीन के सेवन से बचने के लिए चाय या कॉफी को कम पीना चाहिए।
    नहाने के लिए इस्तेमाल करे विटामिन C...
    ये तो हम सब जानते है कि हंसना हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है ठीक उसी तरह कभी-कभी रोना भी हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है. जी हां एक रिसर्च के मुताबिक रोना भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद होता है.
    तो आइए आज हम आपको बताते है रोने के कुछ फायदों के बारे में...
    1-- आंसू आपकी निराशा को बाहर निकालते हैं, इससे आपका मन साफ होता है. रोने से दिमाग, दिल और लिंबिक सिस्टम का काम ठीक रहता है.
    2- आंसुओं में लोसोजोम नाम का एक तत्व होता है, जो बाहरी बैक्टीरिया को खत्म करने में 90 फीसदी तक सफल होता है.
    3- अगर आप तनाव में हैं और रोते हैं तो आंसुओं के साथ आड्रोकार्टिको ट्रॉपिक और लूशिन जैसे हार्मोन निकलते हैं, जिससे तनाव दूर होता है.
    4- आंखों में मेमब्रेन के सूखने पर रोशनी कमजोर हो जाती है. आपके आंसू इसे सूखने नहीं देते, जिससे आंखों की रौशनी बनी रहती है.
    पानी रखता है आपकी सुंदरता को बरक़रार
    हम सभी जानते है की सूरज के बिना धरती पर जीवन ही नही है. सूर्य नमस्कार एक प्राचीन तकनीक है, जिसका सम्मान आज भी लोग करते है. सूरज को उर्जा का स्त्रोत माना गया है. इसके इतिहास को देखा जाए तो, भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों ने यह बताया था की शरीर के विविध भागो पर अलग-अलग देव शासन करते है. इस लिए माना गया है प्रतिदिन सूर्य नमस्कार से करने से आप निरोगी काया पा सकते है.
    आइए जानते है सूर्य नमस्कार करने के फायदे—
    1-दिमाग की स्मरण शक्ति और तंत्रिका तंत्र को विकसित करने में भी सूर्य नमस्कार सहायक है और रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आपकी चिंता भी आसानी से दूर हो जाती है.
    2-सूर्य नमस्कार जब तेजी से किया जाए, तब आपको बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट देता है जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है. यह आसन पेट की मांसपेशियो के खिचाव को कम करने में भी सहायक है. इस आसन से आपकी चयापचन की क्षमता भी विकसित होती है.
    3-सूर्य नमस्कार आपकी मांसपेशियो, जोड़ो, बंधन और साथ ही कंकाल तंत्र के खिचाव और उन्हें मजबूत बनाने में सहायक है. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी भी लचीली होती है. जब आप यह आसन करते हो, तब आपके अवयव मजबूत होकर इंटरनल ऑर्गन के कार्य करने की क्षमता को बढ़ाते है.
    4-सूर्य नमस्कार आपके शरीर में रक्त प्रवाह को विकसित करता है जिसका निखार आपको अपने चेहरे पर दिखाई देता है, इससे आपके चेहरे से झुर्रियो की समस्या दूर होती है और आपका चेहरा जवां और दमकता हुआ दिखाई देता है.
    जाने मेटा मैडिटेशन के बारे में
    अक्सर लोग दांतों की देखभाल की गंभीरता से नहीं लेते लेकिन दांतों को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है अन्यथा दांतों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार यदि दांतों व मसूडों में अधिक समय तक रोग बने रहें तो कैंसर की आशंका कई गुना तक बढ जाता है. जिन व्यक्तियों को मसूडों के रोग होते हैं उनकी शिराओं के सिकुडने की संभावना अधिक रहती है, जिसके कारण उन्हें हार्टअटैक हो सकता है
    दांतों की सफाई उचित तरीके से नहीं करने पर दांतों के मध्य कैविटी बनने लगती है जिससे भोजन करने पर दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है.
    दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है. दांतों पर जमी प्लेक में स्थित बैक्टीरिया को जब भोजन से स्टार्च व शुगर मिलता है. तो एक प्रकार का एसिड बनता है जिससे दांतों की ऊपरी परत नष्ट होने लगती है और केविटी बन जाती है. ऐसा होने पर शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.दांतों के आसपास मसूडों से रक्त आना तथा मुख से दुर्गंध आना पायरिया रोग का लक्ष्य है. पायरिया के कारण दांतों की जडे कमजोर होती जाती हैं और धीरे-धीरे दांतों का हिलना प्रारंभ हो जाता है.
    दांतों को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए कुछ बातों ध्यान रखना चाहिए.   
    1-दांतों को दिन में दो बार साफ करें. सख्त ब्रश का प्रयोग न करें.
    2-चाकलेट, मिठाइयां, बिस्कुट आदि अधिक न खाएं. अधिक खट्टी, ठंडी या गर्म वस्तुओं से परहेज करें. भोजन हमेशा अच्छी तरह चबाकर खाएं.पान मसाला, तम्बाकू आदि के सेवन से बचें.
    इन बिन्दुओ पर दबाव डालने से तेजी से घटता है...
    वेसे तो पुरुष हर खूबसूरत महिला को देखकर उसकी तरफ आकर्षित होने लगते है. लेकिन महिलाओ की एक ख़ास उम्र होती है. जब पुरुष उनकी और सबसे ज्यादा आकर्षित होते है. हाल ही में हुए एक सर्वे में इससे जुड़े कुछ तथ्यों का खुलासा किया गया है.
    सर्वे में 18 से लेकर 49 साल के कुल 12,656 लोगो को शामिल किया गया था. जिसमे महिला और पुरुष दोनों शामिल है. इन लोगो से उनके सेक्स संबंधों से जुड़े सवाल किये गए. जैसे की वह किस उम्र के व्यक्ति के साथ शारीरक सम्बन्ध बनाना पसंद करते है, पिछले 12 सालों में उन्हें किस उम्र के लोगो ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया हैं?
    इस सवालों के बाद कुछ दिलचस्प तथ्य सामने आये है. जिसके अनुसार, पुरुष अपने से कम उम्र की महिलाओ की तरफ आकर्षित होते है. वही महिलाए अपने से अधिक उम्र के पुरुषो की तरफ अधिक आकर्षित होती है.
    ये है दुनिया के सबसे परफेक्ट फिगर वाली महिला 
    कुंवारी लड़कियों के मन में अक्सर आती है ये बातें
    सूरजमुखी के बीज खाने के कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं. इनके बीजों में काफी सारा विटामिन ई तथा अन्य खनिज पदार्थ होते हैं, जो सिर से ले कर पांव तक फायदा पहुंचाते हैं.
    इन दिनों लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिये अलसी, कद्दू, तिल और सूजरमुखी के बीजों का सेवन करने लग गए हैं.
    दिल को रखे स्वस्थ - इनके बीजों में विटामिन सी होता है जो कि दिल की बीमारी को दूर रखने में मदद करता है. साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई कोलेस्ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोक कर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा टालता है. एक चौथाई कप सूरजमुखी बीज 90 प्रतिशत तक का डेली विटामिन ई प्रदान करता है.
    हड्डी बनाए मजबूत- इसमें मैग्नीशियम की भी अधिक मात्रा होती है, जिससे हड्डियों में मजबूती आती है. इसके साथ ही यह हड्डियों के जोड़ों में
    लचीलापन तथा मजबूती लाता है- गठिया और सूजन के लिये इसमें मौजूद विटामिन ई काफी लाभदायक है.दिमाग के लिये अच्छा : यह आपके दिमाग को शांत रखता है. इसमें मौजूद मैग्नीशियम दिमाग की नसों को शांत करता है तथा स्ट्रेस और माइग्रेन से छुटकारा दिलाता है.
    अस्थमा और पेट के कैंसर से बचाता है- सूरजमुखी के तेल में किसी अन्य खाना पकाने के तेल की तुलना में अधिक विटामिन  E होता है. इसलिए आप अपने आहार में इस तेल को शामिल कर के अस्थमा और पेट के कैंसर जैसे बीमारियों से बचे रहा सकते है.
    काली मिर्च के धुएं से खुल जाती है बंद नाक
    भैंस का दूध या गाय का दूध, कौन सा दूध आपके लिए बेहतर है, ये जानना आपके लिए जरूरी है.
    दोनों किस्म के दूध की अपनी कमियां और अपनी खासियत है.
    1-गाय और भैस के दूध में सबसे पहला और बड़ा अंतर उनमें मौजूद फैट की मात्रा का होता है. भैंस के दूध में गाय के दूध से 100 प्रतिशत से ज्यादा अधिक फैट होता है. इसलिए, गाय का दूध हल्का माना जाता है और भैस का दूध भारी. जिन खाद्य पदार्थों में ज्यादा फैट होता है उनको पचाना भी मुश्किल होता है. इसलिए ही, नवजात बच्चों और बुज़ुर्गों को भैंस के दूध की जगह, गाय का दूध पीने की सलाह दी जाती है.
    2-भैंस के दूध में गाय के दूध से लगभग 11 प्रतिशत अधिक प्रोटीन होता है. भैंस के दूध का प्रोटीन ज्यादा ताप प्रतिरोधी होता है. फैट की ही तरह, प्रोटीन भी नवजात बच्चे और बुजुर्ग पचाने में दिक्कत महसूस करते हैं. इसलिए इस मामले में भी उनको गाय का दूध चुनना चाहिए. हां, जिसे प्रोटीन की अधिक आवश्यकता है, वो भैंस का दूध पी सकते हैं.
    3-भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में कम कॉलेस्ट्रॉल होता है. इसलिए डायबिटीज़, हाईपरटेंशन, किंडनी संबंधी बिमारियों, मोटापे आदि से ग्रस्त लोगों को भैंस का दूध पीने की सलाह दी जाती है.
    4-जाहिर है, जब भैंस के दूध में फैट और प्रोटीन ज्यादा होता है तो उसमें कैलोरी भी ज्यादा ही होगी. 100 मिली गाय के दूध में 70 कैलोरी होती हैं, जबकि 100 मिली भैंस के दूध में 1-00 कैलोरी होती हैं. इसलिए वो लोग जिन्हें कम से कम कैलोरी की सलाह दी गई हो, उन्हें गाय के दूध का सेवन करना चाहिए.
    स्वस्थ आँखों के लिए करे विटामिन D का...


  • पीरियड्स के दौरान महिलाएं काफी दर्द से गुजरती है, चिड़चिड़ी हो जाती है और इस वक्त में महिलाओं को कभी कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती है। लेकिन यही वो वक्त होता है जब महिला के शरीर को सबसे ज्यादा देखभाल आवश्यकता होती है ऐसे में आपके शरीर की देखभाल के लिए इस वक्त में आपको पौष्टिक आहार लेना बहुत जरूरी है। पीरियड्स में ब्लीडिंग के कारण हीमोग्लोबिन काफी कम हो जाता है और आयरन युक्त आहार जहां शरीर में खून की कमी को रोकता है वहीं आपके शरीर को कमजोर होने और आपको तनाव से भी बचाता।
    आप आयरन युक्त आहार के लिए रेड मीट, पोल्ट्री, मीट, ड्रायड बीन, शीरा और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर सकती हैं। इन सब चीजों में आयरन की मात्रा काफी अधिक होती है। शरीर में प्रोटिन और विटामिन्स की मात्रा बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने भोजन में विटामिन को शामिल करें। क्योंकि विटामिन-ई आपको पीएमएस सिंड्रोम से छुटकारा दिलाने में काफी मदद करता है।
    आप विटामिन-ई के लिए एवाकाडो और अंडे की जर्दी को खा सकती हैं। वहीं विटामिन बी-6 ब्लाउटिंग को कम करने में काफी मदद करता है। तो विटामिन-सी आपके प्रजनन तंत्र को बेहतर बनाने का काम करता है। विटामिन-सी के लिए आपको अंगूर और नींबू का सेवन करना चाहिए। वहीं विटामिन बी-6 के लिए अपने भोजन में आलू को शामिल करें। अपने आहार में फल, सब्जी ज्यादा से ज्यादा शामिल करने चाहिए। क्योंकि इसमें काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं। जैसे की गाजर, खुबानी, संतरा आदि का सेवन करें।
    वैसे देखा गया है की इस दौरान महिलाओं को मीठा खाने की इच्छा ज्यादा होती है। ब्राउन राइस में मौजूद कार्बाहाइड्रेट्स और शुगर आपके अंदर की ऊर्जा को बढ़ाने का काम करते हैं। वैसे आप इसके अलावा कार्बाहाइड्रेट पाए जाने वाले विभिन्न चीजों का सेवन भी कर सकती हैं जैसे कि ओटमील, व्हीट पास्ता और स्वीट पौटेटो आदि। डॉर्क चॉकलेट खाने का सही समय पीरियड्स का वक्त ही होता है। क्योंकि यह एक तरह से हार्मोन निर्मित करने का काम करती है। जिसे सेरोटिन कहा जाता है। जो कि आपके मूड को भी नियंत्रित करने के साथ-साथ आपको अच्छा महसूस करवाता है।
    यूरिक एसिड में करे आंवले और एलोवेरा का सेवन
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  • इलायची सुंगधित होने के कारण इसका इस्तेमाल मुख शुद्धि के रूप में किया जाता है. त्यौहारों पर मीठा बनाने के लिए मसालों तथा औषधियों में भी इसका अधिक उपयोग होता है.
    तो आइए, जानते हैं इलायची के औषधीय गुणों के बारे में-
    1-इलायची दाना, पीपरामूल और पटोलपत्र सम भाग में लेकर चूर्ण बनाएं. 2-4 ग्राम पाउडर घी के साथ सुबह शाम चाटने से कफजन्य हृदय रोग से राहत मिलती है.
    2-इलायची दानों का पाउडर और शक्कर सम भाग में लेकर उसमें थोडा अरंडी का तेल मिलाकर 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से आंखों को ठंडक पहुंचती है और आंखों की ज्योती बढती है.
    3-मुंह में छाले हो गए हों तो इलायची पाउडर को शहद में मिलाकर छालों पर लगाने और लार टपकाने से छाले ठीक हो जाते हैं.
    4-आधा-आधा ग्राम इलायची और सोंठ के पाउडर में 1 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से अथवा इलायची के तेल 4-5 बूंदें शक्कर के साथ लेने से कफजन्य खांसी दूर हो जाती है.
    यूरिक एसिड में करे आंवले और एलोवेरा का सेवन
    मौसम बदलने के साथ बच्चो को और उनको जिन में इम्युनिटी कम है उन्हें सर्दी और खाँसी हो जाता है. ऐसे में सर्दियों से घर के मसाले की त्रिमूर्ति, अदरक, लहसुन और नमक, वो सफलता देती है जो एलोपैथिक दवाई नहीं दे सकती है. ख़ास कर के अगर कफ हो जाए तो सिर्फ अदरक और नमक एक रामबाण औषधी है कफ को भगाने के लिए . 
    1-अदरक में है बीटा कैरोटीन, विटामिन c, अलग प्रकार के पोलीफेनॉल्स और फ्लावोनोइड्स और टैंनिंस. कफ और सर्दी में अदरक में श्गॉल्स, जिंजरोने, गिंगेरोल, गलनालस और जिंजरोने अच्छा ऐसा एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल कार्य करके, सूजन कम  करके राहत पहुचाते है . 
    2-नमक भी अदरक की तरह एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने वाला तत्त्व है और एंटी-बैक्टीरियल भी है. 
    3-अदरक को बारीक काटे और उस पर नमक छिडक के मिला के थोड़ी देर तक रहने दे और फिर चबा के खा ले. चाहे तो इस में थोड़ा सा शहद मिला ले क्योंकि अदरक बहुत तीखा होता है. अगर चबा के खाना मुश्किल है तो अदरक और नमक पानी में उबाल के छान ले और यह काढ़ा पीये. 
      वजन कब बढ़ जाता है और चर्बी कब जमा हो जाती है यह पता नहीं लगता है मगर जब कपडे टाइट होने लगे और पेट आगे की ओर उभर तब पता चलता है की आप मोटे हो गए है.
      यहाँ पर हम बता रहे है कुछ आसान तरीके जिन्हें अपना कर आप आसानी से  वजन कम कर सकते है. 
      1-घरेलू कार्य खुद करें. जैसे झाडू-पोंछा, कपडे धोना, बाजार से सब्जी, रोशन आदि लाना. इससे आपकी फिटनेस बनी रहेगी. शारीरिक थकान से बिस्तर पर अच्छी नींद भी आएगी.
      2-दिन भर में कोई भी ऐसा कार्य करें, या चढे-उतरें. सुबह उठने का प्रयास करें और जितनी इच्छा हो उतना पानी पिएं. छत पर जाकर टहलें.
      3-छरहरी कमर के लिए पेट हिप्स पर चर्बी न चढने दें. पेट और हिप्स का आकार बेडौल हो जाता है तो आप कमर की स्वाभाविक ब्यूटी से वंचित रह जाती हैं.
      4-संतुलित एवं पौष्टिक खाने लें. ठोस आहार की जगह तरल भोजन का सेवन करें, जो सुपाच्य भी हो और भरपूर एनर्जी देने वाला भी हो. ठोस आहार देर से पचता भी है और वजन में भी वृद्धि करता है.
      5-अपने भोजन पर नियमित रूप से ध्यान दें, चीनी, स्टार्च, वसायुक्त पदार्थ तथा अधिक कैलोरी वाला आहार से परहेज करें.
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      सर्दियां आने पर सबसे ज्यादा परेशान करता है वो है पुराना दर्द. जैसे-जैसे सर्दियां बढ़ती जाती है दर्द और बढ़ता जाता है. लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है. पुरानी चोट या फिर दुर्घटनाओं से तो आप उभर जाते हैं लेकिन इनका दर्द ऐसे मौसम के आते ही बार-बार सामने आने लगता है. ऐसे में आपको डॉक्टर से तो सलाह लेनी ही चाहिए लेकिन आप खुद भी कई तरीकों से इससे निपट सकते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि ऐसे दर्द से आप कैसे छुटाकारा पा सकते हैं.
      पुराने दर्द का कारण
      पुराना दर्द कई कारणों से हो सकता है. अक्सर ऐसा होता है कि उम्र बढ़ने के साथ  जोड़ों और हड्डियों में दर्द होता है. अन्य सामान्य कारणों तंत्रिका को नुकसान पहुंचने और चोटों के पूरी तरह से ठीक न हो जाने के चलते ऐसा होता है. 
      पुराने दर्द को ठीक करने के लिए पहले यह जानने की कोशिश करें कि इसके पीछे का कारण क्या है. इसकी पहचान करना बेहद जरूरी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक कभी-कभी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता, यह नर्वस सिस्टम को डैमेज कर देती है जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता. ऐसी स्थिति में जब भी सर्दियां आती है तो भयंकर दर्द का सामना करना पड़ता है. 
      पेनकिलर्स और डॉक्टर की सलाह के आलावा बहुत से ऐसी कुदरती तरीके मौजूद हैं जिससे आप आपने पुराने दर्द से निजात पा सकते हैं. 
      10 चम्मच अच्छा सफेद नमक
      20 चम्मच जैतून या सूरजमुखी का कच्चा तेल 
      इसको बनाने की विधि बहुत ही आसान है, एक कांच के बर्तन में दोनों चीजे मिला लें. बर्तन को अच्छी तरह से 2 दिन के लिए बंद कर के रखें और दो दिन बाद एक हल्के रंग की औषधि तैयार हो जाएगी.
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      भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है. चिरौंजी किसी औषधि से कम नहीं है जो सेहत व सौंदर्य के लिए भी लाभकारी होती है. छोटे चिरौंजी में प्रोटीन की मात्रा होती है इसके अलावा इसमें विटामिन सी और बी खूब मात्रा में होता है. चिरौंजी को चारोली के नाम से भी जाना जाता है.
      चिरौंजी सेहत व सौंदय दोनों के लिहाज से बहुत फायदेमंद है. 
      1-सर्दी-खांसी में चिरौंजी का काढा बनाकर सुबह-शाम पीने से काफी फायदा होता है.
      2-चिरौंजी को दूध और संतरे के छिलको मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और इस पेस्ट को चेहरे पर लेप लगाएं. जब लेप सूख जाए तब चेहरे को धो लें. कुछ ही दिनों में चेहरे पर फर्क पाएं.
      3-चिरौंजी दो प्रकार की वस्तुओं को कहते हैं एक तो जो मंदिर में प्रसाद के रूप में चढाई जाती है वह है चिरौंजी दाना और दूसरी है वह मिलती है.
      4-अगर आपको शारीरिक कमजोरी हो तो उसके लिए चिरौंजी का सेवन करना चाहिए. यह शारीरिक वीकनेस को दूर करने के साथ ही क्षमता का विकास भी करता है.
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      अंजीर में अत्यधिक पौष्टिक तत्व होते हैं, जिसमें विटामिन ए, बी और कई मिनरल्स, जैसे कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम शामिल हैं. अंजीर में पोटैशियम होने के कारण यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.
      इसका प्रयोग अनेक रोगों में औषधि के रूप में भी किया जाता है. 
      1-इसमें कैल्सियम तथा विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं. अंजीर के सेवन से कब्ज, एनीमिया, अस्थमा, जुखाम, कमर दर्द, सिरदर्द, बावासीर आदि रोग दूर होती हैं और शरीर में ताकत आती है. 
      2-यदि आप अपने चेहरे को ग्लो देना चाहते हैं और पिंपल्स से छुटकारा पाना चाहते हैं तो तो ताजे अंजीर को पीसकर चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट तक रखकर चेहरा साफ पानी से धो लें.
      3-सूखे अंजीर को पानी से उबालकर उसका लेप बनाकर गले पर लगाने से गले के अंदर की सूजन दूर होती है.
      4-अंजीर का सेवन करने से थकान दूर होती है, साथ ही यह दिमाग को भी तेज रखता है.    
      5-अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है.
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      आपको अक्सर रात में नींद नहीं आती है इसके लिए आप रोज रात को नींद की गोली लेते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि हमेशा नींद की गोली आपके लिए कितनी हानिकारक है, कभी-कभार नींद की गोलियों का सेवन बहुत लाभदायक हो सकता है. वो भी तब जब आपके डॉक्टर ने इसे लेने की सलाह दी हो. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गोलियां कितनी सुरक्षित है?  आप अपने मन से कभी भी इन दवाईयों का सेवन न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से सलाह ले लें. हाल ही में एक शोध के द्वारा पता चला है कि जिन दवाईयों में नॉनबेंजोडिजेपाइन पाया जाता है उनका साइड इफेक्ट प्रोफाइल सेफ होता है.
      डॉक्टर जिन दवाईयों के सेवन की सलाह देते हैं वो आपको रिलैक्स कर देती हैं और आपको खतरे व साइडइफेक्ट से बचाती हैं. दवाई लेने से पहले आप डॉक्टर से पूछ भी सकते हैं कि आपको इसे कितने समय तक लेना होगा और कितनी मात्रा में. डॉक्टर जब भी इन दवाईयों को देते हैं तो वो उन्हें एक क्रम से देते हैं ताकि आपको उनकी आदत न पड़े और उनका दुष्प्रभाव भी आप पर न हों.
      लेकिन आपको इन दवाईयों को लेने के अलावा, खुद को सही रखने के लिए वर्कआउट करना चाहिए और कैफीन के सेवन से बचने के लिए चाय या कॉफी को कम पीना चाहिए।
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      ये तो हम सब जानते है कि हंसना हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है ठीक उसी तरह कभी-कभी रोना भी हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है. जी हां एक रिसर्च के मुताबिक रोना भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद होता है.
      तो आइए आज हम आपको बताते है रोने के कुछ फायदों के बारे में...
      1-- आंसू आपकी निराशा को बाहर निकालते हैं, इससे आपका मन साफ होता है. रोने से दिमाग, दिल और लिंबिक सिस्टम का काम ठीक रहता है.
      2- आंसुओं में लोसोजोम नाम का एक तत्व होता है, जो बाहरी बैक्टीरिया को खत्म करने में 90 फीसदी तक सफल होता है.
      3- अगर आप तनाव में हैं और रोते हैं तो आंसुओं के साथ आड्रोकार्टिको ट्रॉपिक और लूशिन जैसे हार्मोन निकलते हैं, जिससे तनाव दूर होता है.
      4- आंखों में मेमब्रेन के सूखने पर रोशनी कमजोर हो जाती है. आपके आंसू इसे सूखने नहीं देते, जिससे आंखों की रौशनी बनी रहती है.
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      हम सभी जानते है की सूरज के बिना धरती पर जीवन ही नही है. सूर्य नमस्कार एक प्राचीन तकनीक है, जिसका सम्मान आज भी लोग करते है. सूरज को उर्जा का स्त्रोत माना गया है. इसके इतिहास को देखा जाए तो, भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों ने यह बताया था की शरीर के विविध भागो पर अलग-अलग देव शासन करते है. इस लिए माना गया है प्रतिदिन सूर्य नमस्कार से करने से आप निरोगी काया पा सकते है.
      आइए जानते है सूर्य नमस्कार करने के फायदे—
      1-दिमाग की स्मरण शक्ति और तंत्रिका तंत्र को विकसित करने में भी सूर्य नमस्कार सहायक है और रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आपकी चिंता भी आसानी से दूर हो जाती है.
      2-सूर्य नमस्कार जब तेजी से किया जाए, तब आपको बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट देता है जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है. यह आसन पेट की मांसपेशियो के खिचाव को कम करने में भी सहायक है. इस आसन से आपकी चयापचन की क्षमता भी विकसित होती है.
      3-सूर्य नमस्कार आपकी मांसपेशियो, जोड़ो, बंधन और साथ ही कंकाल तंत्र के खिचाव और उन्हें मजबूत बनाने में सहायक है. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी भी लचीली होती है. जब आप यह आसन करते हो, तब आपके अवयव मजबूत होकर इंटरनल ऑर्गन के कार्य करने की क्षमता को बढ़ाते है.
      4-सूर्य नमस्कार आपके शरीर में रक्त प्रवाह को विकसित करता है जिसका निखार आपको अपने चेहरे पर दिखाई देता है, इससे आपके चेहरे से झुर्रियो की समस्या दूर होती है और आपका चेहरा जवां और दमकता हुआ दिखाई देता है.
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      अक्सर लोग दांतों की देखभाल की गंभीरता से नहीं लेते लेकिन दांतों को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है अन्यथा दांतों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार यदि दांतों व मसूडों में अधिक समय तक रोग बने रहें तो कैंसर की आशंका कई गुना तक बढ जाता है. जिन व्यक्तियों को मसूडों के रोग होते हैं उनकी शिराओं के सिकुडने की संभावना अधिक रहती है, जिसके कारण उन्हें हार्टअटैक हो सकता है
      दांतों की सफाई उचित तरीके से नहीं करने पर दांतों के मध्य कैविटी बनने लगती है जिससे भोजन करने पर दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है.
      दांतों में ठंडा गरम महसूस होते लगता है. दांतों पर जमी प्लेक में स्थित बैक्टीरिया को जब भोजन से स्टार्च व शुगर मिलता है. तो एक प्रकार का एसिड बनता है जिससे दांतों की ऊपरी परत नष्ट होने लगती है और केविटी बन जाती है. ऐसा होने पर शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.दांतों के आसपास मसूडों से रक्त आना तथा मुख से दुर्गंध आना पायरिया रोग का लक्ष्य है. पायरिया के कारण दांतों की जडे कमजोर होती जाती हैं और धीरे-धीरे दांतों का हिलना प्रारंभ हो जाता है.
      दांतों को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए कुछ बातों ध्यान रखना चाहिए.   
      1-दांतों को दिन में दो बार साफ करें. सख्त ब्रश का प्रयोग न करें.
      2-चाकलेट, मिठाइयां, बिस्कुट आदि अधिक न खाएं. अधिक खट्टी, ठंडी या गर्म वस्तुओं से परहेज करें. भोजन हमेशा अच्छी तरह चबाकर खाएं.पान मसाला, तम्बाकू आदि के सेवन से बचें.
      इन बिन्दुओ पर दबाव डालने से तेजी से घटता है...
      वेसे तो पुरुष हर खूबसूरत महिला को देखकर उसकी तरफ आकर्षित होने लगते है. लेकिन महिलाओ की एक ख़ास उम्र होती है. जब पुरुष उनकी और सबसे ज्यादा आकर्षित होते है. हाल ही में हुए एक सर्वे में इससे जुड़े कुछ तथ्यों का खुलासा किया गया है.
      सर्वे में 18 से लेकर 49 साल के कुल 12,656 लोगो को शामिल किया गया था. जिसमे महिला और पुरुष दोनों शामिल है. इन लोगो से उनके सेक्स संबंधों से जुड़े सवाल किये गए. जैसे की वह किस उम्र के व्यक्ति के साथ शारीरक सम्बन्ध बनाना पसंद करते है, पिछले 12 सालों में उन्हें किस उम्र के लोगो ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया हैं?
      इस सवालों के बाद कुछ दिलचस्प तथ्य सामने आये है. जिसके अनुसार, पुरुष अपने से कम उम्र की महिलाओ की तरफ आकर्षित होते है. वही महिलाए अपने से अधिक उम्र के पुरुषो की तरफ अधिक आकर्षित होती है.
      ये है दुनिया के सबसे परफेक्ट फिगर वाली महिला 
      कुंवारी लड़कियों के मन में अक्सर आती है ये बातें

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    • आपने 7 साल पहले कोई गद्दा लिया था तो अब तब उस पर 20 हजार घंटे आप बिता चुके हैं. अगर आपका गद्दा सात साल या उससे पुराना है तो उसे बदल डालिए. गलत गद्दा कमर व गर्दन के दर्द सहित नींद से जुड़ी कई परेशनियों की वजह बनता है.
      हम कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि नींद पूरी न होना या गर्दन वगैरा में दर्द की वजह गद्दा भी हो सकता है.
      क्या आप जानते हैं कि पसीने, गंदगी और डेड स्किन की वजह से सात साल में आपके गद्दे का वजन करीब दोगुना हो जाता है. इस्तेमाल हुए गद्दे में 1 लाख से लेकर 1 करोड़ तक खटमल, दीमक व अन्य सूक्ष्म कीट हो सकते हैं. यह कीट आपकी डेड स्किन से खाना पाते हैं और एक आदमी एक साल में औसतन 4 किलो डेड स्किन छोड़ता है. खटमल खून चूसते हैं.
      उम्र के साथ बॉडी की जरूरत बदलती है. जो गद्दा 25 की उम्र में आपके लिए कंफर्टेबल था वो 35 में नहीं रहेगा. एक बार इस बात पर गौर जरूर करें कि आपका गद्दा आज की जरूरतों को पूरा कर रहा है या नहीं. अगर गद्दा आपको सही सपोर्ट नहीं दे रहा है तो यकीनन आपके शरीर को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.
      निशानिंया, गद्दा बदलने का टाइम का आ गया है
      1-पूरी रात सोने के बावजूद आप थकान महसूस कर रहे हैं
      2-आप अकड़न, जकड़न और दर्द के साथ सो कर उठते हैं
      3-किसी और बेड पर आपको अपने बेड के मुबाबले अच्छी नींद आई
      4-कई बार गद्दे की शक्ल बता देती है कि उसके जाने का वक्त आ गया है
      कैसे पाए पुराने दर्द से छुटकारा
      बहुत देर तक छींक, आंसू, डकार, प्यास या उल्टी को रोकने से भी गैस बनने लग जाती है. इसके अलावा डर, टेंशन, दुख और गुस्से के चलते भी एसिडिटी हो जाती है. बहरहाल गैस किसी भी वजह से पैदा हुई हो मगर एक बार हो गई तो परेशान बहुत करती है. दवा खाने का ऑप्शन तो आपके पास हमेशा खुला है मगद दवाओं के अपने साइड इफेक्ट होते हैं ये भी आप जानते हैं. और वैसे भी जिनको अक्सर एसिडिटी की प्रॉब्लम हो उनके लिये तो घरेलू इलाज ही ठीक रहता है क्योंकि इनसे लंबा आराम और परमानेंट इलाज मिलता है.
      1-खाना खाने के बाद करीब सौ ग्राम छाछ या मट्ठे में 2 ग्राम अजवायन और एक चुटकी काला नमक मिलाकर पीने से गैस बनना बंद हो जाती है.
      2-अलसी/तीसी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है.
      3-दो ग्राम अजवायन को आधा ग्राम नमक के साथ चबाकर खायें. अगर एसिडिटी के चलते पेट दर्द हो रहा है तो वो भी ठीक हो जायेगा.
      4-गैस परेशान कर रही है तो एक लहसुन की फांक, चार मुनक्के के साथ चबाकर निगल जायें. मुनक्के के बीज निकाल कर यूज करें. आराम मिलेगा .
      4-खाना खाने से पहले एक छोटा टुकड़ा अदरक सेंधा नमक के साथ चबा चबाकर खायें. इससे भूख भी खुलकर लगेगी. खाना खाने के बाद भुने हुए पिसे हुए जीरे में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर खा लेने से गैस की दिक्कत नहीं होती और खाना भी ठीक से डाइजेस्ट हो जाता है. आप किसी शीशी में जीरा पीसकर और उसमें काला नमक मिलाकर रख लें. जब भी खाना खायें उसे साथ रखें और खाना खत्म होने के बाद थोड़ी सा ये चूरन लेकर उसकी एक घूंट पानी के साथ उसे निगल जायें. खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए इसलिए बस एक दो घूंट की पानी ही पियें.
      चिरोंजी कर सकती है शारीरिक...
      ठण्ड के मौसम में पित्त बढ़ जाता है इसलिए हमें ऐसी चीजें नहीं खानी चाहिए जिनसे बॉडी में एसिड बने. लहसुन, बैंगन, करेला, सौंफ, काली मिर्च, हींग, सरसों का तेल, उड़द की दाल, कढ़ी वगैरा से परहेज करें. इस मौसम में छाछ-मट्ठे भी परहेज करना चाहिए. आपको ज्यादा गर्म तासीर वाले, कड़वे और चटपटे खाने से थोड़ा बचकर रहना है.
      1-इस मौसम में तो खाने पीने को बहुत कुछ है. कोशिश करें ऐसी चीजें खाने की जिनसे पित्त शांत रहे. गेहूं, जौ, ज्वार, मसूर व मूंग की दाल, सेम, गाय का दूध, मक्खन, घी, मलाई, श्रीखंड वगैरा ले सकते हैं.
       2-सब्जियों में चौलाई, बथुआ, लौकी, तोरी, पालक, परवल, सोया, फूलगोभी, कुंदरू को शौक से बनायें और खायें. इसी तरह से फलों में आप सेब, अनार, केला, आंवला, मुनक्का, सिंघाड़ा वगैरा खा सकते हैं.
      3-सुबह के वक्त खीर खाना अच्छा रहता है. घी भी खाना चाहिए क्योंकि घी में पित्त को शांत करने की काबलियत होती है. हरड़ का इस्तेमाल भी इस मौसम में बहुत अच्छा माना जाता है. 
      4-आप हरड़ को शहद या गुड़ या मिश्री के साथ खा सकते हैं. पुरानी किताबें कहती हैं कि इस मौसम में रात के वक्त चांदनी में रखा गये पानी में अमृत के गुण आ जाते हैं. इस पानी को हंसोदक या अंशदूक कहते हैं. इस पानी को पीने से बहुत फायदा होता है. 
      5-इस मौसम में रात को हल्का खाना ही खाना चाहिए. 
      लहराते बालो के लिए इस्तेमाल करे...
      भारत में रहने वाला हर शख्स काले चने के बारे में जानता है.चना  मेहनकश की खुराक का अहम हिस्सा रहा है .वैज्ञानिक भाषा में बात करें तो चने में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, आयरन और कैलशियम अच्छी खासी मात्रा में होता है.
      आइये जानते है इसके फायदों के बारे में  -
      1-चने को दस्तावर कहा जाता है. कब्ज के शिकार लोगों के लिए यह अच्छी चीज है. इसमें ढेर सारा फाइबर होता है जो आपको पेट साफ करने में मदद करता है. फाइबर आपकी आंतों को मांझने का काम भी करता है. चने में कई तरह के मिनरल्स और विटामिन होते हैं, जो पेट के मूवमेंट को बिगड़ने नहीं देते. सौ ग्राम काले चने में करीब 20 ग्राम फाइबर होता है. यह आपकी रोज की जरूरत का 80 फीसदी है. पेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी कुछ हद तक आप चने पर छोड़ सकते हैं.
      2-डायबिटीज के मरीज पूरे इत्मेनान से चने को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इसकी एक वजह यह है कि यह काफी धीमी रफ्तार से ग्लूकोज को बॉडी में रिलीज करता है. इससे अचानक बॉडी का शुगर लेवल नहीं बढ़ता.
      3-काला चना आयरन का सबसे सस्ता स्रोत है. 100 ग्राम में करीब 3 एमजी आयरन होता है. यह आपकी रोज की जरूरत का करीब 20 फीसदी है. यही नहीं चने में पोटेशियम, मैगनीशियम और कैल्शियम की भी अच्छी मात्रा होती है.
      अंजीर बनाता है हड्डियों को मजबूत
      क्रिएटिन अथवा क्रेटीन उस कैमिकल से बनाया जाता है जो हमारी बॉडी में नेचुरली पाया जाता है. ये मीट और मछली में भी होता है. सबसे ज्यादा क्रेटीन हमारी मसल्स में जमा रहता है. ये एनर्जी देने के काम आता है और मसल्स की ग्रोथ में भी इसका रोल रहता है. 
      1-क्रिएटिन के यूज का सबसे बड़ा और खतरनाक साइड इफेक्ट किड़नी पर पड़ता है. दस ग्राम से ज्यादा रोज क्रेटीन लेना खतरनाक होता है. इसकी हाई डोज के चलते मसल्स का टूटना बहुत तेज हो जाता है. इससे ढेर सारा कैमिकल और प्रोटीन रिलीज होता है, जिसका सारा भार किडनी पर जाकर पड़ता है. इससे किडनी फेल हो सकती है और अगर सही वक्त पर इलाज न मिला तो मौत तक हो सकती है.
      2-पेट और छोटी आंत से जुड़ी प्रॉबलम को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिस्ट्रेस (GI) कहते हैं. इसमें पेट में गैस होना, दर्द, जी खराब होना, उल्टी और डायरिया शामिल है. आपको भूख में कमी भी महसूस हो सकती है. ये सब साइड इफेक्ट आमतौर पर थोड़े टाइम के लिए होते हैं और हां डोज कितनी ले रहे हैं इस पर डिपेंड करते हैं.
      3-अगर आपने डाइट में क्रेटीन को शामिल किया है तो आपका वजन बढ़ सकता है, भले ही आप चाहते हों या नहीं. सपलीमेंट के तौर पर क्रेटीन का यूज करने से बॉडी में इसका लेवल बढ़ जाता है. इसके चलते मसल्स में वाटर रिटेंशन होने लगता है और पानी का लेवल बढ़ने से वजन बढ़ जाता है.
      जाने क्या है नींद की गोलियों के साइड...
      यहां हम एंडूरा मास के साइड इफेक्ट पर बात करेंगे. इन्हें जानने के बाद आपको यह फैसला लेने में मदद मिलेगी कि यह प्रोडक्ट आपके कितने काम है.
      1-ये प्रोडक्ट बॉडी बिल्डिंग के लिए नहीं है. सौ ग्राम एंडूरा में आपको करीब 15 ग्राम प्रोटीन ही मिल पायेगा. अगर आप इसका इस्तेमाल करके बॉडी बिल्डिंग करने के बारे में सोच रहे हैं तो यह सही नहीं है, क्योंकि बॉडी बिल्डिंग में हाई प्रोटीन वाले सपलीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप बॉडी बिल्डिंग में इसका इस्तेमाल करेंगे तो मसल्स बने या न बनें लेकिन हां फैट जरूर जमा कर लेंगे.
      2-जब भी आप कोई ऐसी चीज खाते हैं जो फूड नहीं है तो उसे हजम करने के लिए आपके लिवर को बहुत मेहनत करनी पड़ती है. थोड़े से वेट गेनर में बहुत सारी कैलोरी होती है, उसे संभालने और सही ढंग से इस्तेमाल करने के लिए लिवर को एक्स्ट्रा बोझ उठाना पड़ता है जो उसकी सेहत के लिए ठीक नहीं होता. आमतौर पर गेनर के इस्तेमाल से हाजमा बिगड़ जाता है, पेट फूल जाता है और आपके बाउल की मूवमेंट बदल जाती है.
      3-एंडूरा में सोया प्रोटीन होता है. सोयाबीन से टेस्टोसटेरोन का लेवल कम होता है. टेस्टोसटेरोन का लेवल कम होने से जिम में आपकी परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है .
      4-जिन लोगों को दूध से परेशानी होगी या जिनका पेट ठीक नहीं रहता उन्हें एंडूरा से परेशानी होगी. क्योंकि इसमें सोयाबीन के प्रोटीन का इस्तेमाल होता है और सोयाबीन सबको सूट नहीं करता. पेट में गैस की दिक्कत तो हमने खुद महसूस की है. अगर आपको यह प्रोडक्ट सूट नहीं किया तो चेहरे पर पिंपल निकल सकते हैं. दूध और सोयाबीन दोनों ही ऐसे फूड हैं जिनमें एलर्जिक रिएक्शन होता है.
      रोने से बढ़ती है आँखों की रौशनी
      वेट लॉस के बाजार में ग्रीन कॉफी का नाम ज्यादा पुराना नहीं है. आज वेट लॉस के बाजार में ग्रीन कॉफी बीन्स को एक चमत्कार की तरह पेश किया जा रहा है.ग्रीन कॉफी बीन दरअसल कॉफी बीन्स ही होते हैं मगर बिना रोस्ट किये हुए. बीन्स को रोस्ट करने से एक खास कैमिकल कम हो जाता है, जिसे क्लोरोजेनिक एसिड  कहते हैं. इसलिए ग्रीन कॉफी बीन्स में आम कॉफी के मुकाबले ज्यादा क्लोरोजेनिक एसिड होता है. कहा जाता है कि यह एसिड हेल्थ के लिये काफी अच्छा होता है. लोग ग्रीन कॉफी को मोटापे से लड़ने, डायबटीज, हाई बीपी, अलजाइमर और बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने में यूज करते हैं.
      ग्रीन कॉफ़ी के साइड इफेक्ट्स 
      1- बेचैनी  – ग्रीन कॉफी की वजह से बेचैनी की शिकायत बढ़ जाती है. अगर किसी को पहले से बेचैनी की परेशानी है तो यह उसमें इजाफा कर सकती है.
      2-डायरिया  – ग्रीन कॉफी में कॅफीन होता है और अगर कैफीन ज्यादा होने के चलते पेट चल सकता है और अगर आपका पेट पहले से चला हुआ है यह कंडीशन को और खराब कर देता है. अगर आपका पेट कमजोर है तो यह प्रोडक्ट आपके लिए ठीक नहीं है.
      3-ग्लूकोमा  – ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन से आंखों के भीतर प्रैशर बढ़ जाता है. कॉफी पीने के महज 30 मिनट बाद ही प्रैशन बढ़ जाता है और यह कम से कम 90 मिनट तक रहता है.
      5-हाई कॉलेस्ट्रॉल   – अनफिल्टर्ड कॉफी के कुछ सब्सटांस की वजह से कॉलेस्ट्रॉल के लेवल में दिखाई दी है. यह सब्सटांस ग्रीन कॉफी में हो सकते हैं. हालांकि यह पूरी तरह से क्लीयर नहीं है कि ग्रीन कॉफी से वाकई कॉलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है.
      स्मरण शक्ति बढ़ने के लिए करे सूर्य नमस्कार

      ज्यादा टीवी देखने के कई खतरों से आप वाकिफ हैं. मगर शोधकर्ताओं ने एक ऐसा खतरा खोजा है, जिसकी कल्पना आपने नहीं की होगी. बहुत ज्यादा टीवी देखने से मौत तक हो सकती है. पांच घंटे या उससे ज्यादा समय के लिए टीवी के सामने बैठना बेहद खतरनाक हो सकता है.
      एक नई रिसर्च का दावा है कि इससे खून के जानलेवा थक्के (ब्लड क्लॉट्स) बन सकते हैं. इससे पलमनरी एम्बॉलिज्म का खतरा दो गुना बढ़ जाता है.  रिसर्च करने वालों का कहना है कि लंबे समय तक टीवी देखने वालों को बीच बीच में खड़े हो जाना चाहिए या पानी पीने के लिए उठना चाहिए.
      पलमनरी एम्बॉलिज्म का मतलब होता है पलमनरी आर्टरी में रुकावट हो जाना या उसका जाम हो जाना. यह वो रक्तवाहिनी है जो दिल से खून को फेफड़ों तक पहुंचाती है. 
      शोध के मुताबिक, 40 से 59 उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. इसलिए उन्हें लंबे समय तक टीवी के सामने बैठते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. रिटायर्ड लोग टीवी ज्यादा देखते हैं. इसलिए उन्हें बीच बीच में खड़े हो जाना या टहलना चाहिए.
      इन तरीको से करे दांतो की देखभाल
      मेथी ना सिर्फ एक मसाला है बल्कि यह हर बीमारी को जड़ से खतम करने की दवा भी है. आज हम आर्टिकल में हम आपको मेथी के गुण नहीं बल्कि मेथी के पानी के गुण बताने वाले हैं. आपको करना सिर्फ इतना है कि एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें. सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं. 
      1-यदि आप भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्ती की भूख नहीं लगेगी. रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है. 
      2-मेथी में एक गैलाक्टोमेनन नामक कम्पाउंड और पोटैशियम होता है. ये दो सामग्रियां आपके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बड़ी ही सहायक होती हैं.
      3-बहुत सारी स्टडीज़ में प्रूव हुआ है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है. 
      4-इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के नाते, मेथी का पानी गठिया से होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है. 
      5-मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्वों को निकाल फेंकती है और पेट के कैंसर से बचाती है.
      सर्दियों के मौसम में अदरक वाली काली चाय का मजा ही कुछ और है. लेकिन क्या आपको पता है कि दिन में एक कप अदरक की चाय का सेवन न सिर्फ स्वाद के लिए अच्छा है बल्कि सेहत की नजर से भी इसकी चुस्की के फायदे हैं.
      तो आइये जानते हैं कुछ और फायदे अदरक वाली चाय के .
      1-अदरक वाली ब्लैक टी आपके आपके ब्लड सर्कुलेशन को अच्छा करती हैं क्योंकि इसमें फ्लेवनॉइड्स पाया जाता है इसलिए यह हड्डियों और दाँतों को भी मजबूत करती है. तो दूध और चीनी की चाय बार बार पीने से अच्छा है कि आप सेहत से भरपूर अदरक वाली चाय पीयें.
      2-क्या आपको सुबह के वक़्त मतली या उल्टी आती है. तो सुबह खाली पेट अदरक वाली ब्लैक टी पीयें. इससे आपकी उल्टी होना बंद हो जायेगी. साथ ही गर्भवती महिलाएं भी पी सकती हैं जिन्हें मॉर्निंग सिकनेस की परेशानी है.
      3-ब्लैक अदरक वाली चाय पीने से एलडीएल यानि कोलेस्ट्रॉल 7.5 % तक कम हो जाता है जिससे हृदय की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.
      4-ब्लैक टी इंसुलिन के स्तर को बढ़ाती है जिससे प्लाज़्मा ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रहता है. साथ ही अदरक में कैंसर विरोधी गुण होते हैं जिससे ट्यूमर नहीं बनता है.
      5-ब्लैक टी और अदरक में मजूद एंटी इन्फ्लैमटॉरी तत्व हार्टबर्न ,पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, और सूजन, यह सब ठीक करती है. इनदोनो को पीने से शरीर के अंगों और जोड़ों की सूजन कम हो जाती है.

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