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कैसे दूर करे अपने मन से इंजेक्शन का डर




दुनिया में कुछ ऐसे भी हैं जिनको नुकीली चीजों से डर लगता है, इसमें इंजेक्शन यानी कि सुई का डर सबसे अधिक है. कुछ लोग तो इससे इतना डर जाते हैं कि वे सुई के बजाय दवा खाना अधिक पसंद करते हैं.


अगर आपको भी सुई लगवाने से डर लगता है तो अपनाये ये तरीके –


1-अगर आपका ध्यान इंजेक्शन के दौरान सुई पर होगा तो आपको न केवल दर्द होगा बल्कि इसका अहसास इंजेक्शन लगने से पहले होने लगेगा. इसलिए जब भी सुई लगने की बात हो रही हो तो इसके बारे में न सोचकर किसी और के बारे में सोचिये. इस दौरान आप अपने सबसे अच्छे और सबसे बुरे दिन के बारे में सोचें, इससे दर्द बिल्कुल नहीं होगा और आपका ध्यान इसकी तरफ भी नहीं होगा.


2-अगर आपके साथ कोई है तो आप उसका सहारा ले सकते हैं, वह इस छोटी (आपके लिए बहुत बड़ी है) सी मुश्किल की घड़ी में आपका साथ देगा. इस दौरान आप अपने पार्टनर या दोस्त का हाथ पकड़कर रखें, इससे दर्द का अहसास कम होगा.


3-इंजेक्शन की सुई के डर का सबसे बड़ा कारण है कि हम इस छोटी सी सुई को घूर-घूरकर ऐसे देखते हैं जैसे मानों यह सुई नहीं बल्कि तलवार हो. इस तरह इसका डर आपके मन से बिलकुल भी नहीं जायेगा. तो इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप इसकी तरफ देखे ही नहीं. जब आप इस तरफ नहीं देखेगें तो आपका ध्यान इस पर नहीं होगा और आपको दर्द न के बराबर होगा. तो अगली बार जब भी इंजेक्शन लगने की बात हो तो डरें नहीं बल्कि इन तरीकों को आजमाकर अपने डर को दूर भगायें.


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कैसे करे चीनी से घाव का इलाजकैसे करे चीनी से घाव का इलाज





चीनी के माध्यम से चिकित्सा एक बहुत ही पुरानी परंपरा है. घाव को तेजी से भरने के लिए चीनी एक बहुत ही अच्छा उपाय है. किसी भी खुले घाव जैसे, जलने, छिलने और डायबिटीक अल्सर के कारण होने वाले घावों को भरने के लिए चीनी बहुत उपयोगी होती है. चीनी के माध्यम से चिकित्सा एक बहुत ही पुरानी परंपरा है.


आइए जानें घाव को तेजी से भरने के लिए चीनी का उपयोग करने के उपाय.


1-घाव को साबुन और गर्म पानी की मदद से अच्छी तरह से साफ करें. फिर इसे सुखने के लिए छोड़ दें ताकी इसमें बिल्कुल भी नमी न रहें. अगर घाव के आस-पास कुछ दिखाई दें तो फिर से इसे साफ कर लें.


2-घाव पर चीनी डालें, लेकिन ध्यान रहें कि यह घाव पर ही डालें. लेकिन अगर घाव बड़ा है तो इसे पहले शहद से कवर करें और फिर चीनी छिड़कें. शहद चीनी को उस जगह पर टिके रहने में मदद करती है और इसे पूरी चिकित्सा के लाभ प्रदान करता है.


3-बैडेंज की मदद से इसे तुरंत कवर करें और टेप की मदद से बैडेंज को सुरक्षित करें. बैडेंज घाव में डस्ट और बैक्टीरिया को आने से रोकने में मदद करता है.


4-बैंडेज को बदलें और एक दिन के बाद फिर से सफाई और चीनी को लगाने की प्रक्रिया को दोहराये. बैंडेज को धीरे से निकालने की बजाय हल्का सा खींच कर निकालें. बैंडेज निकालने का यह तरीका मृत ऊतकों को हटाने और घाव को साफ करने में मदद करता है.


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ना करे अपने दिन की गलत शुरुआतना करे अपने दिन की गलत शुरुआत




दिन की सही शुरुआत पूरे दिन के अच्छे होने को काफी कुछ सुनिश्चित करती है, लेकिन यदि शुरुआत ही गलत हो तो दिन कहां से अच्छा गुजरेगा.


चलिए जानें कि क्या हैं वो सुबह सवेरे की जाने वाली गलतियां, ताकि आप उनसे बचकर आपना दिन अच्छा बना सकें.


1-सुबह उठ कर या घर पर या दफ्तर जा कर लोगों से कठोर भाषा में बात न करें. सरल, उचित और सकारत्मक शब्दों का उपयोग करें. अभी तक ये क्यों नहीं हुआ, अपने काम से काम रखो आदि की जगह “कृपया”, “धन्यवाद”, “शाबास” जेसे शब्द आपको लोगों के नजदीक ले जाते हैं. 


2-सुबह उठते ही झगड़ें नहीं और न ही पुराने दिन की बातों के आधार पर नया दिन शुरू करें. दिन की शुरुआत अच्छे मूड के साथ घर से निकलते हुए करें. ऑफिस में पूरे विश्वास के साथ प्रवेश करें. मुस्कुराते हुए अपने स्टाफ का अभिवादन करें. 


3-आज-कल लोग सुबह उठते ही कंप्यूटर या मोबाइल से चिपक जाते हैं, जिसकी वजह से न सिर्फ उनका समय और दिन का प्रबंधन खराब होता है, बल्कि सेहत (खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य) पर भी बुरा असर पड़ता है. 


4-दिन की शुरुआत की सबसे बड़ी गलती है देर से उठना. देर से उठने पर न सिर्फ आप दफ्तर के लिए लेट होते हैं बल्कि आपका स्वास्थ्य भी बिगड़ता है. इसलिए सुबह सूरज चढ़ने से पहले उठें और रात को समय से सोएं. 


5-यूं तो आप दिनभर में कभी भी या शाम को कसरत कर सकते हैं लेकिन सुबह-सवेरे कसरत करना सबसे फायदेमंद रहता है. जो लोग सुबह को कसरत या व़क नहीं करते उनके बीमार होने की आशंका अधिक रहती है. 


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जाने लीच थेरेपी के बारे में





प्राचीन काल से ही जोंक थैरेपी का तमाम बीमारियों से पार पाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. यह प्रक्रिया रक्तस्राव के जरिये सम्पन्न किया जाता है जिसके तहत अशुद्ध रक्त को बाहर निकाला जाता है जिससे स्वस्थ होने में मदद मिलती है. कई बार तो जोंक थैरेपी ओषधीय चिकित्सा से भी बेहतर कारगर होता है. जोंक थैरेपी के असंख्य फायदों के कारण ही यह पारंपरिक चिकित्सकीय पद्धती आज भी अस्तित्व में मौजूद है.


1- 20वीं सदी से ही कार्डियोवस्कुल डिजीज से लड़ने के लिए जोंक थैरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है. दरअसल जोंक के लार में पाया जाने वाला हिरुडिन एंजाइम कार्डियोवस्कुलर डिजीज के लिए लाभकर है. जैसा कि पहले ही जिक्र किया गया है इसमें एंटीकोग्यूलेशन एजेंट होते हैं जो कि इस बीमारी के लिए प्रभावशाली होते हैं. इसके अलावा चिकित्सक जोंक थैरेपी हृदय सम्बंधी बीमारियों से जुड़े मरीजों के लिए भी सलाह स्वरूप देते हैं.


2-जोंक थेरेपी रक्तसंचार बेहतर करने के लिए भी जाना जाता है. यही कारण है कि जोंक थैरेपी को सिर पर जहां बाल कम है, जैसे स्थान पर लगाया जाए तो वहां बाल आने की उम्मीद बढ़ जाती है. दरअसल जोंक थैरेपी से शरीर में पौष्टिकता बढ़ती जो बालों के लिए आवश्यक है. यही नहीं यह बालों को जड़ों से मजबूत करते हैं जिससे बालों को उगने में आसानी होती है. जो लोग डैंड्रफ या फंगल संक्रमण के कारण गंजेपन से जूझ रहे हैं, उनके लिए जोंक थैरेपी एक रामबाण इलाज है. जोंक का लार फंगल संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है.


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: जाने चिग्गर बाईट के लक्षण और इलाज के बारे मेंजाने चिग्गर बाईट के लक्षण और इलाज के बारे में






सर्दियों के मौसम में चिग्गर नामक कीड़े के काटने का खतरा रहता है. इसको काटने बहुत तेज खुजली होती है और त्वचा पर लाल धब्बे से बन जाते है.


आइये इसके बारे विस्तार से जानते है .


1-जब चिग्गर गिर जाता है तो त्वचा पर लाल रंग का धब्बा सा बन जाता है. ये उस ट्यूब का अवशेष माना जाता है. ये धब्बा वेल्ट, बिल्सटर, पिंपल और हाइव्स की तरह दिखते है. ये बाइट्स समूह में दिखती है और इनके निशान हफ्तों तक नहीं जाते है. वैसे कीड़ों का काटना आसानी से दिख जाता है, लेकिन चिग्गर त्वचा के अंदरूनी हिस्सों पर काटते है खासतौर पर जहां कपड़े ज्यादा कसे हुए हो. चिग्गर ज्यादातर टखने, कमर, आर्मपिट, जांघ और घुटनों के पीछे काटते है. 


2-चिग्गर के काटने पर कम से कम तीन हफ्ते लगते है. इसमे खुजली बहुत होती है जिसको करने से बचना चाहिए. वरना इससे संक्रमण हो सकता है. आप इस पर खुजली को रोकने वाली दवाई जैसे लैक्टोकैलामाइन वा हाइड्रोक्रोसोन आदि लगा सकते है. आप इस पर बर्फ भी रगड़ सकते है.इस दौरान गर्म पानी से ना नहायें. अगर आपको संक्रमण हो गया हो या फिर इसके लक्षण दिख रहे तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिले. चिग्गर के काटने से स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पंहुचता है पर खुजली शायद आपकी नींद खराब कर दें.अगर सूजन आदि दिखे तो भी डॉक्टर से मिल लें.


3-गार्डन में चलते समय या हाइकिंग करते समय इधर उधर की बजाए सीधे ट्रेल पर चले. पूरे कपड़े पहने. पैंट को जूते या मोजे में टक करके पहने. त्वचा पर खासतौर से शर्ट के कॉलर, जूतों को ऊपर कफ, बेल्ट आदि के पास कीट से बचाने वाली क्रीम लगा कर चले. घर पहुंचते ही सबसे पहले नहायें और अपने कपड़ो को गर्म पानी में धुले. 

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क्या हो 40 साल की महिलाओ के लिए महत्वपूर्ण आहारक्या हो 40 साल की महिलाओ के लिए महत्वपूर्ण आहार






आज हम 40 की उम्र में कदम रखने जा रही या 40 की हो चुकी महिलाओं के डायट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उन्हें न सिर्फ शरीरिक रूप से स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ के लिए भी फायदेमंद होते हैं.


1-भारतीय महिलाओं में आयरन और कैल्शियम की कमी आमतौर पर पाई ही जाती है. इसलिए 40 की उम्र में आने पर एक बार इन दोनों का टेस्ट जरूर करा लें और अपने खानपान में ऐसी चीजें शामिल करें, जिनमें कैल्शियम और आयरन की मात्रा अधिक हो. कोशिश करें कि इन्हें प्राकृतिक स्रोतों से ही प्राप्त करें, लेकिन यदि डॉक्टर इनकी गोलियां लेने को कहें तो इनसे भी परहेज न करें.


2-शोध बताते हैं कि रोजाना वजन जांचना कुछ लोगों को अपना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है, लेकिन 40 की उम्र के बाद यह काम करना लाभदायक साबित नहीं होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कई हॉर्मोन संबंधी बदलाव होते हैं, जिसके चलते वजन में परिवर्तन होना लाजिमी होता है. तो ऐसे में खानपान पर ध्यान और नियमित व्यायम भर काफी होता है. रोजाना अपना वजन नापना ऐसे में आवश्यक नहीं होता है. इससे मानसिक तौर पर असहजता होती है.


3-लोगों में एक आम धारणा होती है कि वे यदि थोड़ी ज्यादा एक्सरसाइज कर लेंगे तो उनके द्वारा खाया गया ज्यादा कैलोरी वाला भोजन भी मोटापा नहीं बढ़ाएगा और न ही इससे कोई समस्या होगी. दरअसल उम्र के साथ शरीर की शक्ति भी कम होती जाती है और शरीर को सभी चीजों की संतुलित मात्रा की जरूरत होती है. ऐसे में डाइट और एक्सरसाइज दोनों का संतुलन जरूरी होता है.


दिल को स्वस्थ रखने के लिए खाये सरसो तेल और हल्दी एक साथ 



कैसे करे अपनी कंघी की सफाईकैसे करे अपनी कंघी की सफाई





अगर आप अपनी कंघी को साफ नहीं करती हैं तो इससे कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं,


आइये कंघी साफ करने के आसान तरीकों के बारे में जानें.


1-कंघी को साफ करने से पहले उसमें से जितने भी बाल हों उसे निकाल दें. इसके लिए आप अपने हाथों या फिर एक टूथब्रश का इस्तेमाल कर सकती हैं. जितने बाल निकाल सकें उतने निकाल दें. अगर आप कंघी पर ब्रश घुमाकर सारी गन्दगी साफ़ नहीं कर पा रहे हैं तो इसके लिए टूथपिक या पिन का प्रयोग करें. इनके किनारे इतने पतले होते हैं कि इससे आप कोई भी गन्दगी निकाल सकते हैं. 


2-बालों के ब्रश को साफ़ करते समय गर्म पानी का प्रयोग ना करें. अगर कंघा प्लास्टिक का बना है तो गर्मी से यह पिघल सकता है, तथा इससे कंघे के आकार में भी फर्क आ जाता है. अतः अतिरिक्त रूप से गर्म पानी का ब्रश को धोते समय प्रयोग न करें.आप नींबू की मदद से भी कंघे और हेयर ब्रश साफ़ कर सकते हैं. नींबू में भी एसिडिक मिश्रण होता है जिससे आपका कंघा गन्दगी से बिलकुल मुक्त हो जाएगा. कंघे पर नींबू के रस की कुछ बूँदें डालने पर आपको कंघे की खोयी चमक मिलेगी. इससे सैलून और पार्लर के कंघे काफी साफ़ रहते हैं.


3-अगर कंघी में कस के कोई बाल चिपक गया हो और वह निकल न रहा हो तो दूसरी कंघी की मदद से आप उलझे हुए बालों को निकाल सकती हैं.


4-कंघी सारी रात पानी में डुबोकर रखें. इससे गंदगी ढीली पड़ जाती है तथा सुबह जब आप ब्रश से इसे साफ़ करेंगे तो ये गन्दगी आसानी से निकल जाएगी. इसके बाद साबुन और ब्रश से आप बाकी की सफाई कर सकते हैं.


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बालो में तेल लगाने के बाद ना जाये धूप मेंबालो में तेल लगाने के बाद ना जाये धूप में






आयुर्वेद सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, बालों की समस्याओं के उपचार में यह बहुत कारगर है, क्या आप जानते हैं बालों में आयुर्वेद के अनुसार तेल लगाने के कितने फायदे हैं, हम आपको बता रहे हैं,


आयुर्वेद के अनुसार कैसे तेल लगायें और इससे क्या फायदे हैं.


1-हम अकसर बालों में सामान्य तेल ही लगाते हैं. तेल को हल्के गुनगुने पानी के जरिये गर्म किया जा सकता है..गर्म तेल से सर की मसाज बेहतरीन विकल्प है. आयुर्वेदिक सिद्धांत के मुताबिक यह न सिर्फ बालों की सेहत बेहतर करता है बल्कि सिर को आराम भी देता है और सुकून भी मिलता है. लेकिन यह सिद्धांत सब लोगों के लिए नहीं है. ध्यान रखें कि यदि आपको सिर दर्द की बीमारी है, सिर में लाल दाग है और जिन लोगों को पित्त सम्बंधी बीमारी है उन्हें तेल गर्म करके सिर पर नहीं लगाना चाहिए.


2-यदि आप उन लोगों में से हैं जो रोजाना सिर पर तेल लगाते हैं तो ध्यान रखें कि प्रत्यक्ष रूप सूरज की रोशनी के संपर्क में न आएं. साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि बालों में तेल इस्तेमाल न करें. तेल सीधे सिर पर लगाएं और महज एक चम्मच ही लगाएं. ज्यादा तेल लगाने से सिर कोई विशेष लाभ नहीं होगा. इसके उलट आपको अपना सिर धोना पड़ेगा. आयुर्वेदिक सिद्धांत की मानें तो धूप में कतई न जाएं यह बालों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है.


3-यदि आप के सर में डेंड्रफ है तो बेहतर होगा कि नहाने के एक या डेढ़ घंटा पहले ही सिर पर तेल लगाएं. तेल अगर गर्म करें तो अच्छा होगा. इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि तेल सीधे बालों की जड़ों में लगाएं. सिर की अच्छे से मसाज करें. इसमें यदि आप सोचते हैं कि बालों पर तेल लगाने से डैंड्रफ खत्म हो जाएंगे तो यह आपकी गलत अवधारणा है. सिर का मसाज करें और बेहतर परिणाम पाएं.


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बड़े काम के हैं ये लड्डूबड़े काम के हैं ये लड्डू





इंदौर। सर्दियों के इस मौसम में उड़द की दाल के लड्डु लोगों को बहुत लुभा रहे हैं। लड्डू का एक कोर ही मुंह में जाता है और लोगों को बदन में गर्मी का अहसास होने लगता है। जी हां, आप सोच रहे होंगे कि यह तो इन्होंने अति कर दी। मगर ऐसा नहीं है जनाब। उड़द की दाल के ये लड्डु सर्द प्रकृति में लोगों को गर्मी का अहसास देते हैं। तो अब उड़द की दाल का एक लड्डु आपको सर्दियों में भी गर्मी का अहसास दिलाएगा।


फिर कुछ श्रम करने पर आप ये न पूछें कि चाचू मुझे पसीने क्यों आ रहे हैं। जी हां उड़द की दाल के बड़े लाभ हैं। दरअसल इस दाल में प्रोटीन तो प्रचुर मात्रा में होता ही है साथ ही पौष्टिक तत्व भी होते हैं। इस दाल में विटामिन, खनिज लवण, कैल्श्यिम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नेशियम, मैगनीज आदि तत्व होते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है।


यह दाल पाचन में भी बेहतर होती है और इसका सेवन करने से कोलेस्ट्राॅल अधिक नहीं बढ़ता है। उड़द की दाल और इसका पाक लाड़ू बनाकर इसे लेने से ठंड में शक्ति मिलती है और ठंड में ये अच्छा असर करते हैं।




: सेहत बनाए जिंदगी की यह दौड़सेहत बनाए जिंदगी की यह दौड़

सुबह की सैर सुबह का व्यायाम और सुबह सवेरे लगाई गई दौड़ आपको तरोताज़ा तो कर ही देती है साथ ही आपकी सेहत को भी दुरूस्त रखती है। दौड़ना एक बड़ा अच्छा व्यायाम है और इसमें आपको खर्च कुछ भी नहीं करना होता है। हां आपका बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राॅल जरूर खर्च हो जाता है मगर यह आपके लिए बड़े फायदे का ही है। दौड़ने से आपके शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बड़ा अच्छा होता है।


इतना ही नहीं आपके शरीर की महत्वपूर्ण नसें एक्टिव होने लगती हैं। जब आप दौड़ते हैं तो सांस लेने में शुद्ध वायु शरीर में जाती है और आप पूरी तरह से खुलकर सांस ले पाते हैं। ऐसे में आपका ब्रेथिंग सिस्टम अच्छी तरह से काम करता है। मगर दौड़ने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। यदि आप दौड़ने के फायदे चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान रखकर आप सही लाभ ले सकते हैं कई बार दौड़ने पर कुछ नुकसान भी होने लगते हैं ऐसे में आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए दौड़न


सही परिधान पहनकर दौड़ें


दौड़ने के लिए यह जरूरी है कि आपने जो ड्रेस या परिधान पहना है वह इसके अनुकूल हो। मसलन आप ऐसा पहनावा न पहनें जो कि बहुत टाईट हो और आपके पैरों में अटकने लगे। यदि ऐसा होता है तो आप गिर भी सकते हैं।


सही समय का चयन


दौड़ने के लिए यह आवश्यक है कि आप सही समय चुनें। सर्दियों में एकदम सुबह कड़कड़ाती ठंड में न दौड़ें और न ही सुबह की ताज़गी समाप्त होने के बाद दौड़ें इसका यह अर्थ है कि आपके आसपास यदि वाहनों का ट्रैफिक बढ़ने लगे तब न दौड़ें अक्सर सुबह के एक समय बाद सड़कों पर वाहन दौड़ने लगते हैं ऐसे समय और ऐसी व्यस्त सड़कों के आसपास न दौड़ें इससे आपके स्वास्थ्य को तो अधिक लाभ नहीं होगा साथ ही आपको ट्रैफिक का भी ध्यान रखना होगा।


गुनगुनी धूप का रखें ध्यान


सर्दियों के मौसम में यदि गुनगुनी और हल्की धूप के बीच आप दौड़ें तो अच्छा होगा। हां दौड़ते समय आप के कान, सिर कनपटी आदि किसी गर्म या ऐसे ही किसी ऊनी वस्त्र से ढंके हों तो बेहतर है। इससे मौसम की सर्द हवा आपके शरीर में प्रवेश नहीं करेगी और आपको जरूरत से अधिक सर्द वातावरण का अहसास नहीं होगा। हां आप जर्सी, हल्का स्वेटर, ट्रेक सूट भी सर्द मौसम से बचने के लिए पहन सकती हैं।


पार्क या वाॅकिंग झोन का उपयोग


यदि आप अपने आसपास के किसी शांत और ऐसे मैदान में दौड़ सकें जिसके आसपास पेड़ पौधे अधिक हों तो बेहतर होगा। आप किसी पार्क में या वाॅकिंग झोन में भी दौड़ सकती हैं दरअसल यहां पर दौड़ना आपके लिए सेफ होगा और आपको शुद्ध हवा भी मिल पाएगी।


सही जूते आदि का प्रयोग


दौड़ने के लिए आपको रनिंग शूज़ या स्पोर्टस शूज़ का प्रयोग करना चाहिए। यदि आप ऐसे जूते पहनें जो फिसलन युक्त हों तो यह काम का नहीं है। आप दौड़ते समय चप्पल आदि नहीं पहन सकती हैं। इतना ही नहीं दौड़ने से पहले आपके बीपी आदि के बारे में जानकारी ले लें। यदि आपको कुछ सीरियस प्राॅब्लम्स हैं या हार्ट डिज़ीज हैं तो फिर आप दौड़ न लगाऐं ऐसे में आप चिकित्सक की सलाह ले सकती हैं।


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जानिए कैसे बचाये सर्दियों में अपनी त्वचा को रूखेपन सेजानिए कैसे बचाये सर्दियों में अपनी त्वचा को रूखेपन से






सर्दियों का मौसम आते ही त्वचा रूखेपन की समस्या से जूझने लगती है. त्वचा की नमी और चमक चली जाती है. ऐसे में त्वचा को कोमल व स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ विशेष उपाय करने पड़ते हैं.


आइये जानते हैं कुछ ऐसे टिप्स के बारे में जो सर्दियों से आपकी त्वचा की रक्षा करने में आपकी मदद करेंगे


1-मॉस्चुराइज़र मौसम के हिसाब से बदलते रहना चाहिए. सर्दियों में वॉटर बेस्ड मॉस्चराइज़र की बजाय ऑइल बेस्ट मॉस्चराइज़र लगाना चाहिए. ऑयल बेस्ड मॉस्चराइज़र त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है जो किसी भी क्रीम या साधारण लोशन से ज्यादा बचाव करता है. 


2-सन्स्क्रीन सिर्फ गर्मियों के मौसम में लगाने के लिए नहीं होती. सर्दियों का सूरज भी आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है. धूप में निकलने से 30 मिनट पहले अपने चेहरे व हाथों पर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सन्स्क्रीन लगाने की कोशिश करें. अगर आपको धूप में या बाहर लंबे वक्त तक रहना पड़े तो आप दोबारा सन्स्क्रीन लगा सकते हैं.


3-गीले ग्लव्ज और सॉक्स आपके हाथ-पैरों के लिए समस्या उत्पन्न कर सकते हैं. सर्दियों में इन्हें पहनने से खुजली, क्रैकिंग, दर्द या ऐक्ज़िमा तक हो सकता है. इसलिए हमेशा अच्छी तरह से सूखे ग्लव्ज और सॉक्स ही पहने.


4-सर्दियों में ऑफिस और घर में सेंट्रल हीटिंग सिस्टम्स और हीटर का इंतज़ाम होता है. ये उपकरण आपको ठंड से तो बचा लेते हैं लेकिन इनसे आने वाली गर्म हवा त्वचा को रूखी बना देती है. अपने घर में कई सारे ह्यूमिडफायर (वायु को नम रखनेवाला उपकरण) रख दें, ये आपको इस समस्या से बचा सकता है.


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नेल पोलिश पहुंचा सकती है आपकी त्वचा को नुकसाननेल पोलिश पहुंचा सकती है आपकी त्वचा को नुकसान





क्या आप जानते हैं कि इन कॉस्मेटिक के लगातार संपंर्क में आने से त्वचा पर कई तरह के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. कई शोधों के मुताबिक इनके ज्यादा इस्तेमाल से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां होने का भी खतरा होता है.


आइए जानें ऐसे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के बारे में जो आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.


1-ज्यादातर महिला होठों को खूबसूरत बनाने के लिए लिपस्टिक का प्रयोग करती हैं. लिपस्टिक में मौजूद रसायन आपके होठों को काला बनाने के साथ ही इसकी नमी चुरा लेते हैं. इसकी जगह अगर आप लिप बाम अपनाएं तो ज्यादा अच्छा रहेगा. लाल लिपस्टिक में रंग ज्यादा गाढ़ा करने के लिए लीड की ज्यादा मात्रा भी मिला दी जाती है जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं.


2-त्वचा में नमी बनाए रखने वाले मॉश्चरराइजर में ऐसे रसायन मिले होते हैं जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीन लेते हैं. अधिकतर मॉश्चरराइजर में डिटर्जेंट जैसे कई केमिकल मिले होते है जो आपकी त्वचा को काफी नुकसाच पहुंचाने के लिए पर्याप्त होते हैं.


3-काजल का ज्यादा प्रयोग आंखों से संबंधित कई समस्याओं को जन्म दे सकता है. काजल में मौजूद रसायन का आंखों से संपंर्क होने पर आंखों में जलन, खुजली या पानी आने की समस्या हो सकती है.


4-कभी अपने नाखूनों पर हमेशा नेलपॉलिश ना लगाएं. इससे नाखूनों की प्राकृतिक चमक खो जाती है. डार्क रंग की नेलपॉलिश आपके नाखूनों पर धब्बे छोड़ सकती है और उनमें पीलापन ला सकती है. 


कैसे करे अपनी कंघी की सफाई 



जाने क्या है ब्रश करने का सही तरीकाजाने क्या है ब्रश करने का सही तरीका






हम दांतों की देखभाल में कई सामान्य गलतियां करके दांतों को कमजोर बनाते हैं,


आइये जानते है उन गलतियों के बारे में 


1-हम भारतीय यह सोचते हैं कि सुबह कुछ खाने से पहले ही ब्रश करना जरूरी है. जबकि यही अवधारणा गलत है. क्योंकि जब भी आप ब्रश करते हैं तो दांतों का प्राकृतिक सुरक्षा कवच यानी नैचुरल इनैमल ब्रश के कारण क्षतिग्रस्त हो जाता है और इसे दोबारा दांतों पर घेरा बनाने में थोड़ा वक्त लगता है. यानी अगर आप ब्रश करने के 60 मिनट के अंदर कुछ खा रहे हैं तो आप अपने दांतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. तो अगली बार ब्रेकफास्ट से एक घंटा पहले ब्रश जरूर कर लें.


2-लोगों को लगता है कि दांतों को अच्छे से चमकाने और मूंह की बदबू दूर करने के लिए रगड़कर और देर तक ब्रश करना जरूरी है. जबकि बदबू का दांतों से कोई संबंध नहीं है. इसलिए अगली बार आराम से ब्रश करें और दांतों को नुकसान न पहुंचायें.


3-सुबह उठकर पहला काम ब्रश करना है, और इसका मतलब यही माना जाता है कि दांत अब मजबूत और सुरक्षित बने रहेंगे. लेकिन अगर आप रात में सोने से पहले ब्रश नहीं करते हैं तो अपने दांतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. दरअसल रात में सोने के बाद कीटाणु नियमित रूप से 6 से 8 घंटे बिना किसी बाधा के आपके दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं.


बालो में तेल लगाने के बाद ना जाये धूप में







अपच हो तो सौंफ लें जनाबअपच हो तो सौंफ लें जनाब





आप भोजन करने के बाद पेट फूल जाने या फिर अक्सर बदहजमी होने, खट्टी डकारें आने और सीने में जलन से परेशान हैं तो कुछ घरेलू उपाय आपकी सहायता कर सकते हैं जरूरत है आपको इसे समय पर और सही मात्रा में अपनाने की हां आप चाहें तो इसे अपनाने के पहले अपने चिकित्सक से कंसल्ट कर सकती हैं।


आपकी इन परेशानियों को दूर करती है सौंफ। यह सौंफ बेहद लाभदायक है। थोड़ी सी सौंफ जहां भोजन के बाद आपको हल्कापन और राहत देती है वहीं आपके मुंह की दुर्गंध को भी दूर कर देती है। सौंफ से आपका खून भी साफ रहता है और आपकी आंखों के लिए भी यह बेहद उपयोगी है। यदि आप अपच से निजात पाना चाहते हैं तो सौंफ आपके लिए फायदेमंद है।


अपच है क्या


आखिर हम अपच के बारे में जान लेते हैं कि अपच क्या है। दरअसल अपच को बदहजमी या फिर इनडाइजेशन कहा जाता है। जब भी आपकी आंतों में गया भोजन ठीक से पच नहीं पाता है तो आपको अपच की परेशानी होती है। कई बार लीवर के फंक्शन ठीक नहीं रहते हैं ऐसे में अपच की परेशानी होती है। कई बार तो पाचक रस जो कि नेचुरल होता है ठीक से जनरेट नहीं हो पाता है।


दरअसल इसके कई कारण होते हैं जिसमें भोजन के पहले और ठीक बाद में पानी पी लेना प्रमुख होता है ऐसे में भोजन पच नहीं पाता है और पाचन तंत्र पर इसका अफेक्ट होता है। जब आप अपच से परेशान होते हैं तो इसके रिज़ल्ट में आपको गैस, उल्टियां आदि परेशानी होने लगती है और फिर एसिडीटी होती है। यह एसिडीटी कई तरह की परेशानी पैदा करती है।


भूनी सौंफ है अच्छा उपाय


यदि आप तवे पर सौंफ को अच्छे से भून लें और फिर इसका नियमित दिन में तीन से 4 बार और भोजन के बाद सेवन करें तो यह बेहद लाभदायक होता है। सौंफ मिश्री है उपयोगी यदि आप सौंफ मिश्री का उपयोग भोजन के बाद करें तो यह बेहद लाभदायक होता है। इससे आपको आने वाली डकार सहज बाहर निकल जाती है और आपको सीने में जलन आदि की परेशानी नहीं होती जब भी आप गरिष्ठ भोजन कर लेते हैं या होटल का भारी भोजन करते हैं तो सौंफ व मिश्री का सेवन करने से आपको कुछ हल्कापन लगता है।


अजवायन सौंफ उपयोगी


यदि आप अजवायन सौंफ काला नमक, गुलाब का फूल सेंधा नमक त्रिफला का मिश्रण लें तो आपको अजीर्ण में कुछ लाभ होगा मगर याद रहे इनकी मात्रा सही हो और आवश्यकता से अधिक कोई भी तत्व मिश्रण में न डला हो मसलन 100 ग्राम के मिश्रण में त्रिफला 15 प्रतिशत सौंफ 10 प्रतिशत अजवायन 10 प्रतिशत काला नमक 8 प्रतिशत सेंधा नमक 5 प्रतिशत और गुलाब का फूल करीब 5 प्रतिशत के अनुसार मिले हों तो आपको लाभ भी होगा। मगर इसमें आपको योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए।


लीची खाये अपने दिल को स्वस्थ बनाये


तो मिल जाएगा तोंद की समस्या से















घर पर ज़रूर रखे ये प्राकृतिक औषधियांघर पर ज़रूर रखे ये प्राकृतिक औषधियां






कई बार हम घर पर छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे सिर दर्द, सर्दी-जुकाम, दांत में दर्द आदि से ग्रस्त होते हैं जिनके लिए डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती है, उनके लिए तो घर में मौजूद प्राकृतिक उपचार ही काफी होते हैं.


जानें कौन सी वे प्राकृतिक दर्द निवारक दवाएं हैं जिनका घर में होना जरूरी है. 


1-ओरेगेनो में विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में होता है. यह छोटी-छोटी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभदायक होता है. सर्दी-जुकाम, बुखार हो या पेट में दर्द ओरेगेनो ऑयल इन सब समस्याओं में यह काफी उपयोगी है. इसमें मौजूद विटामिन ए , सी, जिंक मैग्निशियम, पोटेशियम शरीर के लिए जरूरी तत्व है जिनकी कमी से आप बीमारी के चपेट में आ जाते हैं.


2-एलोवेरा जेल में कई औषधीय गुण समाए हुए हैं. अगर आपको किसी प्रकार की मामूली चोट या घर में काम करते वक्त जल गए हैं तो एलोवेरा जेल को बिना देर किए उस पर लगाएं. इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा. इतना ही नहीं एलोवेरा सौंदर्य से जुड़ी समस्याओं जैसे दाग-धब्बों,पिंपल आदि समस्याओं को भी दूर करनें में फायदेमंद है. इसलिए अगर अब तक आप ऐलोवेरा जेल को घर में नहीं रखते तो अब रखना शुरु कर दें.


3-मेनोपॉज की समस्या से गुजर रही महिलाओं के लिए अलसी का सेवन फायदेमंद साबित होता है. हर रोज 40 ग्राम पिसी हुई अलसी खाने से मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है. मेनोपॉज की प्रक्रिया शुरू होती है, उन्हें अत्यधिक गर्मी महसूस होने के साथ ही पसीने आते हैं और दिल की धड़कन भी तेज हो जाती है. ऐसे में अलसी का सेवन इन लक्षणों को काबू कर राहत दिलाता है.


जाने लीच थेरेपी के बारे में 



इस चमत्कारी तेल से चला जायेगा जोड़ो का दर्दइस चमत्कारी तेल से चला जायेगा जोड़ो का दर्द






ठंड आते ही आपके जोड़ों में गठिया जैसा ही तेज दर्द होने लगता है. अगर आपको भी होती है ये समस्या तो घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि हम आपको बता रहे हैं दर्दनिवारक एक ऐसे तेल के बारे में जिसे घर पर ही बनाया जा सकता है.


आइए इस तेल के बारे में विस्तार से जानें.


लगभग 10 ग्राम काली उड़द


4 ग्राम बारीक पिसा हुआ अदरक


4 ग्राम पिसा हुआ कपूर 


50 मिली खाने का तेल


बनाने की विधि


1-स्टोव पर लोहे की कढाई रखें.


2-कढ़ाई के गर्म होने पर उसमें लगभग 10 ग्राम काली उड़द, 4 ग्राम बारीक पिसा हुआ अदरक, 4 ग्राम पिसा हुआ कपूर और 50 मिली खाने का तेल मिला लें.


3-पांच मिनट बाद इस गर्म तेल को छानकर एक कटोरी में रख लें.


4-अब रोज एक महीने तक सुबह-शाम जोड़ों के दर्द में इस तेल को लगाएं.


नोट- लेकिन हां, लगाने से पहले हमेशा इस तेल को हल्का गर्म जरूर कर लें.


ना करे अपने दिन की गलत शुरुआत





फेफड़ो की समस्या के लिए फायदेमंद है बियर रुट का सेवनफेफड़ो की समस्या के लिए फायदेमंद है बियर रुट का सेवन






आधुनिक चिकित्सा पद्धति या दवाओं के विकास से पहले रोगों का निदान व उपचार घरेलू नुस्खों की मदद से किया जाता था और पीढ़ी दर पीढ़ी ये नुस्खे अगली नस्लों तक पहुंचते रहते थे. ओशा या बीयर रूट भी एक ऐसी ही हर्ब है जो कई सालों पहले से इस्तेमाल की जा रही है और इसके परिणाम भी साबित किए जा चुके हैं. ओशा को आमतौर पर चिकित्सा और आध्यात्मिक प्रायोजनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.


चलिए जानते हैं ओशा की जड़ क्या है और इसके क्या फायदे होते हैं.


1-गले व फेफड़ों से सायनस और बलगम को बाहर करने के अलावा ये हर्ब सांस की समस्या को भी ठीक करती है. इसके अलावा ओशा फेफड़ों में ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ा देती है, जिससे फेफड़ो में सकुंचन की समस्या नहीं होती है और वे आराम से ऑक्सीजन ले पाते हैं. 


2-फेफड़ों के लिए तो ओशा की जड़ के सेवन को कमाल ही माना जाता है. वे लोग जो अस्थमा, एलर्जी, वातस्फीति और निमोनिया आदि से पीड़ित होते हैं, को ओशा की जड़ से बेहद फायदा होता है.


3-आज के समय में भी ओशा की जड़ को इसके एंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है. आज भी फ्लू या आम सर्दी के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर या कफ आदि की समस्या होने पर ओशा की जड़ का सेवन किया जाता है. 


4-इसका उपयोग गले में खराश, साइनस और फेफड़ों में सूजन आदि के उपचार के लिए भी किया जाता है. इसकी जड़ को शहद के साथ मिलाकर लेने पर ये एक कमाल के कफ सीरप का काम करता है. साथ ही ओशा की जड़ का सेवन ऊंचाई पर चढ़ने या स्टैमिना बढ़ाने और आराम से सांस लेने के लिए भी किया जाता है.


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कच्ची हल्दी है गुणों की खानकच्ची हल्दी है गुणों की खान






कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है. इसे जूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है. कच्ची हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है. इसका उपयोग जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को अत्यधिक लाभ पहुंचाता है. यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है और जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है.


गुणों की खान कच्ची हल्दी में कुरकुमिन नामक तत्व पाया जाता है जो लंबे समय के दर्द से छुटकारा दिलाता है. इसके अलावा यह जोड़ों और मांसपेशियों में लचीलापन लाता है जिससे जोड़ों का दर्द कम हो जाता है. कच्ची हल्दी में पाउडर वाली हल्दी की तुलना में एक अच्छी सी खुशबू होती है. ऐसा इसमें मौजूद तेल के कारण होता है.


रात को सोते समय हल्दी की कच्ची गांठ में से थोड़ी सी गांठ लेकर उसे एक गिलास दूध में उबालें. आप चाहे तो फ्लेवर के लिए थोड़ी सी इलायची भी मिला सकते हैं. थोड़ा ठंडा होने पर इसे पी लें. ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों में सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म दूध में थोड़ी सी हल्दी की गांठ मिलाकर पीने से गठिया के दर्द में राहत मिलती है. कुछ दिन इस उपाय को नियमित करने से ही आपको फर्क महसूस होने लगेगा. 


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निम्बू और बेकिंग सोडा मिलकर कर सकते है कैंसर का इलाजनिम्बू और बेकिंग सोडा मिलकर कर सकते है कैंसर का इलाज






दुनिया भर में मशहूर फल नींबू के कई फायदे हैं पर क्या आप जानते हैं कि स्वस्थ जीवन के साथ-साथ ये कैंसर के उपचार में भी लाभदायक साबित हुआ है. अध्ययन के मुताबिक नींबू में लीमोनॉइड्स फाइटोकेमिकल्स होते है जिनमें कैंसर रोधी गुण मौजूद होते हैं. इस बात की पुष्टि औषधि निर्माताओं ने भी की है. नींबू में 12 प्रकार के कैंसर से लड़ने की क्षमता है.


कीमोथेरेपी और नारकोटिक प्रोडक्ट की तुलना में नींबू हजार गुणा बेहतर और असरदार पाया गया है और अगर नींबू के साथ बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाए तो ये मिश्रण कैंसर के सेल्स पर शक्तिशाली तौर पर असर करता है.


यह पाया गया है कि सोडियम बाई-कॉर्बोनेट (बेकिंग सोडा) ट्यूमर और उसके आसपास की जगह को अल्क्लाइज करता है और मेटास्टेटिस (एक अंग से दूसरे अंग में फैलने) को बढ़ने से रोकता है.यदि नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भोजन के साथ लिया जाए तो पेट में एसिड का प्रभाव कम हो सकता है और पाचनक्रिया भी ठीक रहेगा. अच्छे परिणम के लिए आप ऑर्गेनिक नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि ये केमिकल फर्टिलाइजर से मुक्त होते हैं.


मिश्रण कैसे तैयार करें?


1 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा, 1 नींबू का रस, 240ml उबालकर ठण्डा किया हुआ पानी


इस्तेमाल कैसे करें?


इन तीनों को मिलाकर मिश्रण बनाएं और एक दिन में 3 बार पिएं. बेहतर परिणम के लिए अपने आहार में 80% ताजा सब्जियों और फलों का सेवन करें, इससे शरीर में pH लेवल बैलेंस्ड रहेगा.


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फूलो में छुपे है सेहत के राजफूलो में छुपे है सेहत के राज






यूं तो सभी जानते है शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए खानपान और व्यायाम बहुत जरूरी होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि फूलों से भी सेहत बनाई जा सकती है.फूलों में फाइबर, कैल्शियम, विटामिन, प्रोटिन और मिनरल का भंडार होता है जिनकी जरूरत शरीर को होती है.


आइए हम आपको बताते है कि किस फूल में सेहत के कितने राज छिपे है-


गुलाब- गुलाब एक जड़ी बूटी भी है, इसमें शरीर के विकास के लिए जरूरी विटामिन, अम्ल और रसायन है. गुलाब की पंखुडियो से गुलाब का शर्बत, इत्र, गुलाबजल और गुलकन्द बनाया जाता है. मुंह में छाले होने पर गुलाब के फूलों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं. गुलकन्द खाने से पका हुआ मुंह और शारीरिक कमजोरी दूर होती है.


कमल- कमल के फूल फोड़े-फुंसी आदि को दूर करता है. शरीर पर विष का कुप्रभाव कम होता है. इसकी पॅखुडियों के खाने से मोटापा कम होता है, रक्त विकार दूर होते हैं और मन प्रसन्न रहता है. इसकी पॅखुड़ियों को पीसकर चेहरे पर मलने से सुंदरता बढ़ती है, इनके फूलों के पराग से मधुमक्खियाँ शहद बनाती हैं.


मोगरा- इन फूलों को अपने पास रखने से पसीने की दुर्गंध नहीं आती है. इसकी कलियाँ चबाने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली परेशानी कम होती है. मोगरे के फूल मसलकर स्नान करने से त्वचा में सनसनाती प्राकृतिक ठंडक का एहसास होने लगेगा.

चमेली- चमेली के फूलों से बना तेल चर्म रोग, दंत रोग, घाव आदि पर गुणकारी है. चमेली के पत्ते चबाने से मुँह के छालों में तुरंत राहत मिलती है. ये त्वचा व बालों के लिए भी उपयोगी है, रात को पानी में भिगो दीजिए, सुबह पीस लीजिए व गुलाब जल मिला दीजिए. इसे बालों में लगाने से चमक व चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता हैं.

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