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jankari 357 358 ठंडा पानी पीना पंहुचा सकता है आपकी सेहत को

    मौसम गर्म हो तो ठंडा पानी पीना बहुत ही अच्छा लगता है, साथ ही बहुत राहत भी दिलाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं खाने के बाद ठंडा पानी पीने के कितने नुकसान हैं? इसका असर सीधे आपकी पाचन शक्ति पर होता है जिससे शरीर प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है. जब भी हम ठंडा पानी पीते हैं तो उसे उसे निगलने में थोड़ा समय लगता है क्योंकि पहले पानी मुंह में ही रहता है जब उसका तापमान सामान्य हो जाता है, तभी गला उसे नीचे उतारता है और अधिक समय तक ठंडा पानी पीते रहने से टॉन्सिल्स की समस्या उत्पन्न होती है. आइए जानें खाने के बाद ठंडा पानी पीना क्यों नुकसानदेह है.
    कुछ लोगों की आदत होती है खाने के बाद तुरंत ठंडा पानी पीने की. लेकिन यह आदत आपके दिल के लिए खतरनाक हो सकती है. हार्ट अटैक और पानी में एक गहरा संबंध है. एक वैज्ञानिक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि खाने के बाद ठंडा पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने चीन और जापान के लोगों पर इस रिसर्च को पूरा किया.
    चीन और जापान के लोग खाने के बाद ठंडा पानी नहीं पीते. ये लोग खाने के बाद गर्म चाय पीते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि इन लोगों में हार्ट अटैक की समस्या ना के बराबर पाई गई.
    ठंडा पानी पीने से शरीर में बनने वाले पाचक रस का तापमान भी कम कर देता है जिससे भोजन के पाचन में कठिनाई होती है और ठण्डे पानी से पेट की बड़ी आंत भी सिकुड़ जाती है जो कब्ज का मुख्य कारण है. जिन लोगों को अक्सर कब्ज की समस्या होती है उन्हें ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए.
    सेम है एनर्जी से भरपूर
    त्वचा पर थ्रेडिंग करवाने के बाद पिंपल्स, चकत्ते या त्वचा में लालिमा आ जाती है. अगर आपकी भी यहीं समस्या है तो यहां दिये उपाय आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं
    1-थ्रेडिंग करवाने से पहले चेहरे को धोकर अच्छे से पोंछ लें. त्वचा को गुनगुने पानी से धोने पर ज्यादा फायदा होता है. इससे थ्रेडिंग करवाते समय दर्द कम होगा और आप फ्रेश फील करेगी. फिर एक कॉटन का साफ कपड़ा लेकर अपने चेहरे को हल्के हाथों से पोंछ लें. क्योंकि रगड़कर पोंछने से आपकी त्वचा ड्राई हो सकती है.
    2-अब घरेलू टोनर लगाकर अपने चेहरे को हल्का नम कर दें. दाने वाली त्वचा के लिए विच हेजल जडी़ बूटी से बना टोनर अच्छा रहता है. आप चाहें तो दालचीनी की चाय को टोनर के रूप में लगा सकते हैं.
    3-थ्रेडिंग के बादआप अपना चेहरा धोना चाहती हैं तो गुलाब जल से धोयें. यह प्राकृतिक जल, आईब्रो पर लगने वाले कट को सही कर देता है और दाने व पिंपल भी सही हो जाते हैं.
    4-अपने चेहरे पर थ्रेडिंग करवाने के बाद, उस हिस्से में कम से कम 12 घंटे की अवधि के दौरान एसिड की मौजूदगी वाले सुगांधित कॉस्मेटिक उत्पाद जैसे क्लींजर और मॉश्चराइचर न लगाये. ऐसा इसलिए क्योंकि यह एसिडिक उत्पाद त्वचा की बाहरी परत को हटा देते हैं. बाल हटाने के बाद इन्हें इस्तेमाल करने से प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है, खासकर अगर आपकी संवेदनशील त्वचा है तो.
  •  डेली डियो या परफ्यूम लगाते हैं तो जरा रुकिएडेली डियो या परफ्यूम लगाते हैं तो जरा रुकिए
  • हम में से 80 परसेंट लोग डेली परफ्यूम या डियो का इस्तेमाल करते हैं. कोई खुशबू बिखेरने के लिए इसका उपयोग करता है तो कोई पसीने की गंध से बचाव के लिए इसका इस्तेमाल करता है। प्रतिदिन त्वचा पर इस्तेमाल किए जाने वाले डियोडरेंट या परफ्यूम आपकी त्वचा और सेहत को बिगाड़ भी सकते हैं। आप यकीन नहीं मानते तो नीचे लिखी बातों को पढ़ कर ही फैंसला लीजिये। रोजाना आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले डियोडरेंट या परफ्यूम में हानिकारक केमिकल मौजूद होते हैं, जो त्वचा में जलन पैदा कर उसे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करते हैं।
    यह त्वचा में खुजली पैदा कर उसे हानि पहुंचाते हैं। कई बार इनमें मौजूद न्यूरो टोक्सिन सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते है। कई बार इनके कारण त्वचा में घाव या अजीब तरह के निशान बन जाते हैं जिनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इनमें मौजूद कुछ केमिकल सेहत को बिगाड़कर, हार्मोन्स में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। हार्मोनल इम्बेलेंस का प्रभाव न केवल आपकी सेहत पर बल्कि आपके सौंदर्य पर भी पड़ता है। इसके अलावा महिलाओं में डियोडरेंट या परफ्यूम का प्रयोग मासिक धर्म संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
    कुछ डियोडरेंट या परफ्यूम पसीने को रोकने का कार्य भी करते हैं। इस प्रकार के उत्पाद में मौजूद केमिकल बेहद खतरनाक होते हैं। शरीर में से पसीना न निकलने के कारण कई हानिकारक व अवांछित तत्व बाहर नहीं निकल पाते है, जो सेहत के लिहाज से बेहद हानिकारक साबित होते हैं। डियोडरेंट या परफ्यूम में मौजूद केमिकल आपको अल्जाइमर दे सकते हैं। इसके अलावा सांस संबंधी समस्याएं पैदा करने में यह केमिकल सहायक साबित होते हैं। अत्यधिक तेज गंध होने के कारण यह नाक के तंतुओं को भी क्षतिग्रस्त कर सकते हैं ।
    पदोंडो के लिए ख़ुशख़बरी, आयी चमत्कारिक चड्डी
    कई घरो में खाने के साथ सलाद खाया जाता है। इसे कच्ची सब्जियो से तैयार किया जाता है। कुछ लोग फलो का भी सलाद के रूप में उपयोग करते है। सलाद में आप जितने रंगो का इस्तेमाल करते है, सेहत के लिए वो उतना ही फयदेमंद होता जाता है। सलाद बनाने में भी बहुत आसान होता है। लेकिन एक बात का ख़याल रहे की सलाद में ज़्यादा मिर्च मसाला उपयोग नही करना चाहिए। जो लोग सलाद नहीं खाते तो उन्हें हमारी सलाह है कि आज से ही इसे अपनी प्लेट में शामिल करें। सलाद में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते है, जिससे यह कई प्रकार के रोग जैसे हृदय रोग, कैंसर जैसी बिमारियों से लड़ने में शरीर की मदद करता है।
    सलाद में कई प्रकार के फलो को शामिल करने से यह मोटापे को भी कम करने में सहायक है। जिन लोगो को ज़्यादा खाने की आदत होती है उनके लिए सलाद बहुत ही फयदेमंद है। यह बार-बार भूख लगने की परेशानी को भी दूर करता है। इसके अलावा इससे दिन भर काम करने के लिए एनर्जी भी मिलती है। सलाद कई प्रकार के मिनरल्स और विटमिन्स से भरपूर होता है जो की शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ने में सहायक होते है।
    इसमे कैल्शियम और आइरन की भरपूर मात्रा होती है जिससे हड्डिया मजबूत बनती है और खून में हेमॉग्लोबिन बढ़ता है। सलाद हमें त्वचा रोग, हृदय रोग, पेट रोग आदि और कई प्रकार के संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है। सलाद शरीर में फाइबर की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे डायजेस्टिव सिस्टम दुरुस्त होता है और कब्ज और पेट की समस्या दूर हो जाती है।
    खाली पेट इन चीजो को खाना हो सकता है घातक
    पथरी से निजात पाने के घरेलु उपाय
    आजकल मोबाइल,वीडियोस गेम्स और इन्टरनेट की वजह से बच्चे आउटडोर गेम्स खेलने से कतराने लगे हैं. इसके बहेड़ा चुंकाने वाले नतीजे सामने आ रहे है. छोटी सी उम्र में बहुत सी बीमारियां उन्हें घेरने लगी है, बच्चे घर पर बैठे बैठे ओवरवेट होने लगे हैं। बच्चे इन्टरनेट गेम्स. ऑनलाइन गेम्स खेलते है, जो आजकल पुराने खेलो से ज्यादा प्रसिद्ध हो चुके है और इंटरनेट पर ही आजकल लोगो की मुलाकात होती है. लेकिन ये गेम कुछ देर खेलने के लिये अच्छी हैं पर आज कल तो बच्चे नजरों के सामने से इन्हें हटाना ही नहीं चाहते इस वजह से आँखे ख़राब होना, आँखों पर चश्मा लगना बच्चों के बारे में ये बाते सामान्य हो गयी हैं.
    एक्सरसाइज़ बच्चों के लिए भी बेहद जरूरी होती है. फर्क इतना है कि वो जिम ना जाकर, खेलकूद के जरिये फिट रह सकते हैं. आपको बच्चों को बाहर जाकर खेलने के लिये मनाना चाहिये, हो सके तो उनके साथ खेलना चाहिये. यदि आप अपने बच्चों के सामने खेलने के लिये तैयार रहते हो तो आप बिना पैसे खर्च किये उनका मनोरंजन करा सकते है. इसका परिणाम निश्चित ही आपके लिये फायदेमंद साबित होगा. आउटडोर गेम्स खेलने से सूरज की किरणे शरीर को विटामिन डी देती है. आउटडोर गेम्स के ऑफर रखने से बच्चे खेल खेलने के लिये आकर्षित होते है. हमें हमेशा से ही बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने के लिये प्रेरित करते रहना चाहिये.
    इसके लिये आप अपने बच्चों को आउटडोर गेम्स के फायदे भी बता सकते हो, विशेष रूप से जब बच्चों का समूह एकसाथ खेल खेलता है तब बच्चों के स्वास्थ को बहुत से फायदे होते है. बच्चों को अपने घर के आस-पास के बच्चों से जुड़ा हुआ होना चाहिये. दूसरे बच्चों से सामाजिक योग्यतायें और कॉन्फिडेंस को सीखना चाहिये. बाहर खेलते समय ब्रेक लेना बहुत जरुरी होता है, रोज़ ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिये और चेहरे पर सनस्क्रीन लगानी चाहिये, ऐसा करने से आपको गर्मी से राहत मिलेगी. जब शरीर को ज्यादा ही गर्मी लगे तब तुरंत अंदर चले जाये. ठण्ड के मौसम में गर्म कपडे पहनकर ही खेलने निकले.
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    वेट गेनर सप्लीमेंट्स से दूरी ही भली
    अंडे तो हमारे आहार का जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन इसके बारे में कई ऐसी बातें हैं जिनसे हम अनजान हैं. जानिये कुछ ऐसी ही बातें जो शायद आपने पहले कभी न सुनी हों.
    1-अंडे की ताजगी की पहचान के लिए उसे नमक मिले ठंडे पानी में रखें. अगर वह अंडा डूब जाता है तो मान लीजिये कि वह ताजा है और अगर वह तैरता रहता है, तो समझ जाइये कि वह अंडा पुराना हो चुका है.
    2-उबले अंडों को आसानी से सफाई के साथ छीलने के लिए उन्हें उबलने के बाद पाँच मिनट के लिए ठंडे पानी में डाल दें. थोड़ी देर बाद उन अंडों को छीलेंगे तो वे आसानी से छिल जाएंगे.
    3-क्या आप इस बात का यकीन करेंगे कि अंडे के छिलके में 17 हजार छोटे-छोटे रोम छिद्र होते हैं. जी नंगी आंखों से इन रोम छिद्रों को देख पाना संभव नहीं हो पाता. तो नेकिन अगर आप आर्वधक लैंस की सहायता से देखेंगे तो आप इन छिद्रों को महसूस कर पाएंगे.
    4-अंडों में पाये जाने वाले पोषक तत्वों के कारण वे बुजुर्गों के लिए भी काफी सेहतमंद माने जाते हैं. बच्चे और युवा भी अंडे का सेवन कर सकते हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो अंडा पूरे परिवार के लिए उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक होता है.
    5-अंडों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है. इसे हैल्थी फैट कहा जाता है. यह तत्व हमारे दिल और रक्तवाहिनियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. अंडे के पीले हिस्से में वसा बहुत अधिक होती हे, इसलिए कई डॉक्टर इसका सेवन न करने की सलाह देते हैं. हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर सीमित मात्रा में अंडे के पीले हिस्से का सेवन किया जाए तो यह दिल को नुकसान नहीं पहुंचााता.
    सेम है एनर्जी से भरपूर
    सलाद में डाली जाने वाली सब्जियों में सलाद के पत्ते का नाम शायद सबसे पहले आता होगा. पत्तागोभी की तरह दिखने वाली इस सब्जी के कई सारे गुण हैं जिनकी जानकारी सभी को नहीं होती है. सलाद के पत्तों की एक प्रजाति को लेटस कहा जाता है. लेटस विटामिंस का अच्छा स्रोत होने के अलावा इसमें ऑक्सीडेंट भी होता है.आइये जानते है आपके सलाद में प्रयोग किया जाने वाला लेटस कितना फायदेमंद है.
    1-लेटूस का सेवन दिमाग़ को ताज़गी देने के साथ साथ अच्छी नींद के लिए फायदेमंद होता है. इससे उन लोगों को बहुत आराम मिलता है जिन्हें अनिद्रा की बीमारी है. इसके बीज के रस को पीने से तनाव दूर होता है तथा बेहतर नींद आती है.लेटूस रस को गुलाब के तेल में मिला कर माथे पर मालिश करने से बेहतर नींद आती है. 
    2-लेटूस न सिर्फ खून में कोलेस्ट्राल के बढ़ने व हीमोग्लोबिन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद फोलिक एसिड मेगालोब्लास्टिक एनिमिया को रोकता है. गर्भावस्था के दौरान भी सलाद के पत्ते खाना बहुत लाभदायक होता है.  जिनमें बार बार गर्भपात की संभावना रहती है उन्हें भी कच्चे सलाद के पत्ते खाने की सलाह दी जाती है. 
    3-लेटूस का सेवन दिमाग को तेज और शांत करता है. इसमें लेक्टुकेरियम मौजूद होता है जो दिमाग़, तंत्रिका तंत्र या नर्वस सिस्टम को सही से काम करने में मदद करता है. सलाद के पत्ते का रस ठंडा तथा ताज़गी भरा होता है. हरी पत्तियों वाले इन सलाद के पत्ते के रस में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होने के कारण यह मांसपेशियों तथा दिमाग़ के लिये फायदेमंद माना जाता है.
    सेब का मुरब्बा करता है मोटापे को नियंत्रत

  • सीप खाये दिल को मजबूत बनाये
    क्या आप जानते हैं कि दर्द से तुरंत राहत देने वाले पैन किलर्स आपके लिए खतरनाक हो सकती है. जी हां अगर आप पेनकिलर का मनमाना इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप एक बड़े दर्द को न्यौता दे रहे हैं आइए जानें ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में.  
    1-बहुत ज्यादा दर्द होने पर लोग एक से अधिक पेनकिलर ले लेते हैं. उनको लगता है कि इससे पेनकिलर का प्रभाव दोगुना हो जाता है. ऐसा करने से अतिरिक्त दर्द से राहत मिलती है लेकिन इसके साइड इफेक्ट बढ़ जाते हैं. दर्द कितना भी तेज हो लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप में एक से अधिक पेन किलर लें.
    2-हममें से ज्यादातर लोग पेन होने पर पेनकिलर खाली पेट भी ले लेते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाली पेट पेनकिलर दवाएं लेने से शरीर में गैस्ट्रिक या एसिडिटी बहुत अधिक बढ़ जाती हैं जिससे तबियत और बिगड़ सकती है. हमेशा पेनकिलर लेने से पहले कुछ खाना बहुत जरूरी होता है.
    3-कई बार हमें पूरी गोली निगलने में परेशानी होने के कारण हम दवाओं को तोड़कर या क्रश करके ले लेते हैं. खासतौर पर बच्चे ज्यादातर दवाओं को ऐसे ही खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करने से दवा तेजी से शरीर में घुलती है और कई बार हमारा शरीर उसके प्रभाव को संभाल नहीं पाता. यह दवा के ओवरडोज की तरह काम करता है. इसलिए दवा को तोड़कर लेने के बजाय पूरी ही लें. लेकिन आधे डोज के लिए दवा को तोड़ने में कोई परेशानी नहीं है. 
    पथरी से निजात पाने के घरेलु उपाय
    जंक फूड का सेवन आपकी सेहत के कितना खतरनाक है ये तो सबको पता है. लेकिन कौन सा जंक फूड कितना नुकसानदेह हो सकता है इस बारे में जानने के लिए पढ़ें.
    बिस्कुट- बिस्कुट में काफी मात्रा में शुगर और फैट होता है जो मोटापे का कारण हो सकता है. कई बार आप भी बच्चों की तरह चॉकलेट क्रीम और अन्य फ्लेवर के चक्कर में आकर पेट भर कर बिस्कुट का सेवन करते हैं. जो कि वजन बढ़ने का मुख्य कारण हो सकता है. अगर आप बिस्कुट का शौकीन है तो अनहेल्दी बिस्कुट देने की जगह क्यों ना कुछ अनाज से भरपूर बिस्कुट खाएं.
    चिप्स- चिप्स के कुछ टुकड़ों में जहां दो ग्राम फैट होता है वहीं बेक किए हुए चिप्स में पांच ग्राम फैट होता है. क्योंकि उसमें सैचुरेटेड और ट्रांस फैट ज्यादा मात्रा में होता है.
    नूडल्स- बाजार में कई प्रकार के नूडल्स मौजूद हैं. इनमें ओट्स, मल्टीग्रेन और गेहूं से बने नूडल्स भी शामिल हैं. हालांकि, ये छोटे-छोटे बदलाव भी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे नहीं हैं. इनसे आपके आहार में कैलोरी की मात्रा तो बढ़ जाती है, जबकि पौष्टिकता में कोई इजाफा नहीं होता.
    बर्गर- जल्दी से और कम पैसे में भूख मिटाने हो तो ज्यादातर लोग बर्गर का सेवन ही पसंद करते हैं.  सब्जियों और चीज से बना बर्गर और उस पर हेल्दी टॉपिंग्स आपके लिए सेहत भरा हो सकता है. कभी-कभी ताजा और अच्छे से बेक किया हुआ बर्गर खाने में कोई बुराई नहीं. अच्छा होगा कि इसे हफ्ते में एक बार ही खाएं.
    ठंडा पानी पीना पंहुचा सकता है आपकी सेहत...
    भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है .आइये जानते है  कि किस प्रकार के बर्तन इस्तेमाल करने चाहिये, साथ ही कैसे बर्तनों के इस्तेमाल से क्या फायदे, नुकसान हो सकते हैं- 
    1-टेफ्लोन के बर्तन अनेक स्वास्थ समस्याओं का कारण बन सकते हैं. टेफलोन अधिक तापमान को तो सहन तो कर लेता है, लेकिन ज्यादा अधिक तापमान में इसकी परत टूटने का खतरा होता है. ऐसे में भोजन में परफ्लूओरो नामक कैमिकल मिलने का खतरा बढ़ जाता है. इस कैमिकल से दमा के लक्षण उत्पन्न हो सकते है.   
    2-कॉपर के बर्तन हीट कंडक्टर हैं. ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रतिक्रिया करते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ रिएक्ट करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है.
    3-कास्ट आयरन कुकवियर का वजन ज्यादा, लेकिन कीमत कम होती है. इनमें जल्दी जंग भी नहीं लगती है. इन बर्तनों में बने खाने में आयरन कंटेंट ज्यादा होने के कारण एनिमिया के पीड़ितों को खाना बनाने के लिए इन बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए.
    4-मिटटी के बर्तन ऊष्मा के अच्छे सुचालक न होने और बहुत नाजुक होने के कारण, इसके बने बर्तनों में खाना बहुत देर से पकता है और इन्हें सफाई भी अच्छी तरह से नहीं हो पाती. जो आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. इसलिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग अब बहुत कम हो गया है.
    चावल के पानी से पाए सुन्दर निखरी त्वचा
    खाना खाने के बाद चाय पीना हम भारतीयों की आदत में शामिल है, लेकिन यह गलत है. कुछ लोग कहते हैं कि वे खाना खाने के तुरंत बाद चाय पीने की आदत रखते हैं, खासतौर पर सर्दियो में तो हमेशा उन्हें खाने के बाद चाय चाहिये ही होती है. लेकिन आपको बता दें कि भोजन करने के तुरंत बाद चाय पीना सेहत के लिए कतई अच्छी बात नहीं हैं.
    ऐसा इसलिये क्योंकि चाय की पत्ती में अम्लीय गुण होते हैं और जब वो भोजन के प्रोटीन के साथ मिलते हैं तो प्रोटीन सख्त हो जाता है, जिस वजह से उसे पचाने में हमारी पाचन प्रणाली को मुश्किल होती है और अधिक मेहनत करनी पड़ती है. इसलिए चाय का सेवन खाना खाने के तुरंत बाद ना ही करें तो अच्छा होता है. 
    दरअसल चाय में "पॉलिफेनोल्स" और "टेनिन्स" आदि तत्व होते हैं जोकि शरीर के लिये भोजन से आयरन को सोखने नहीं देते हैं. खासतौर पर महिलाएं जिनमें आयरन व अकेल्शियम आदि की कमी होती है, उनके लिए खाने के बाद चाय पीना नुकसानदायक होता है.
    यदि आप चाय या कॉफी के बिना रह ही नहीं सकते हैं तो कम से कम भोजन के एक घंटे बाद इनका सेवन करें. इससे तब तक खाने में पाये जाने वाले आयरन को शरीर द्वारा काफी हद तक अवशोषित कर लिया जाएगा.
    दालचीनी से करे ब्लैकहेड्स की सफाई
    आपने सुना होगा कि स्मोकिंग पॉइंट पर तेल को गर्म करना अस्वस्थ होता है. अगर आप स्वस्थ खाने के साथ कभी-कभी तले भोजन की भी चाह रखते हैं तो आपको हाई स्मोक पॉइंट वाले तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. और अगर आप ऐसे तेल की तलाश में हैं जो खाना पकाने और सलाद में इस्तेमाल करने के साथ-साथ थोड़े से स्वाद और हाई हीट के लिए भी उपयुक्त हो तो कुसुम तेल आपकी इस तलाश को पूरा करता है.
    कुसुम के तेल अपने तीन गुणों के कारण स्वस्थ खाने का एक अच्छा घटक माना जाता है, इसका स्वाद, अनसेचुरेटेड फैट, अन्य किसी भी स्वस्थ तेल के तुलना में मोनोसेचुरेटेड रूप में अधिक तापमान पर गरम किया जा सकता है.    
    कुसुम के तेल की क्षमता प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाता है. इसमें मौजूद स्वस्थ फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. इसलिए मक्खन और अन्य हाइड्रोजनीकृत तेलों की जगह इसे इस्तेमाल करने की कोशिश करें. हालांकि ऑलिव ऑयल के भी ऐसे ही प्रभाव होते हैं लेकिन कुसुम का तेल अन्य तेलों की तुलना में अपने स्वाद और अधिक तापमान में गर्म किये जाने के कारण अधिक अच्छा होता हैं. 
    कोकोनट मिल्क से पाए घर में हे स्ट्रेट हेयर्स
    क्या आपके पैर हर समय ठंडे रहते हैं, तो ऐसा आपके पैरों में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के ठीक से नहीं पहुंच पाने के कारण हो रहा है. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते है -
    1-पैरों की एक्सरसाइज करने से भी आपको बहुत फायदा मिलता है. एक्सरसाइज करने के लिए दोनों पैरों की उंगलियों के भार पर एक मिनट तक खड़े होने के बाद धीरे-धीरे अपनी एडियों पर वापस जमीन पर आये. ऐसा 10 मिनट तक कीजिये. साथ ही आप इस एक्सरसाइज को भी कर सकते हैं जैसे अपने पैर के पंजे की मदद से जमीन पर पड़ा कोई रूमाल उठाने की कोशिश करें. इसके अलावा बैठकर दोनों पैरों के पंजों को क्लॉक वाइज 10-20 बार घुमाइये.
    2-समस्या से बचने के लिए अदरक और ग्रीन टी को अपने नियमित दिनचर्या में शामिल करें. इसके लिए 2 कप पानी में अदरक के छोटे से टुकडे को 10 मिनट तक उबाल कर छान लें. फिर उसमें शुद्ध शहद मिलाकर दिन में 2 या 3 बार सेवन करें. इसके अलावा दिन में 2-3 कप ग्रीन टी पिएं, लेकिन ध्यान रहें अगर आप ग्रीन टी में चीनी लेते हैं तो चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें और दूध कतई न मिलाएं.
    3-मैग्नीशियम ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद करता है. इसलिए अपने आहार में मैग्नीशियम युक्त आहार जैसे पालक, चुकंदर, ब्रोकली, सीफूड, एवोकाडो, खीरा, बींस, आलू, साबुत अनाज, कद्दू के बीज, तिल के बीज और बादाम आदि को शमिल करें. इसके साथ ही आप मैग्नीशियम सल्फेट का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए एक टब में गर्म पानी लेकर, इसमें आधा कप मैग्नीशियम सल्फेट डालें. इस पानी में 15 से 20 मिनट तक पैरों को डुबोकर रखें. हफ्ते में दो बार इस उपाय को करने से आपको बहुत फायदा होगा. 
    गीले बालो में ना करे कंघी
    अक्सर लोग भोजन के बाद मीठा खाने के शौकीन होते हैं. लेकिन, आपकी यह आदत भले ही आपके मुंह को 'जायकेदार' बना दे, लेकिन इससे आपको मोटापे जैसी बीमारी हो सकती है. 
    1-अगर आप भी उन लोगों में शुमार हैं तो खाने के बाद मीठा खाते हैं, तो आपकी सेहत के लिए इस आदत को छोड़ना ही बेहतर रहेगा. खाने के बाद मीठा मोटापे को निमंत्रण दे सकता है. दरअसल, हमारे शरीर में लेप्टिन नाम का एक हॉर्मोन होता है, जिसका संबंध हमारी भूख से होता है. और भोजन के बाद मीठा खाने से यह हार्मोन उल्टे तरीके से काम करने लगता है, जिससे व्यक्ति को खाने का अंदाजा नहीं मिल पाता. 
     2-जब हम भरपूर मात्रा में भोजन कर लेते हैं तो शरीर की फैट कोशिकाएं लेप्टिन हॉर्मोन का स्राव करती हैं. यह हॉर्मोन हमें पेट भरा होने का अहसास कराता है. इससे मस्तिष्क को इस बात का संकेत मिलता है कि अब हमें और भोजन करने की जरूरत नहीं है. 
    3-शोधकर्ताओं के मुताबिक आमतौर पर वैज्ञानिक मानते रहे हैं कि मोटे लोगों में लेप्टिन हॉर्मोन का स्तर कम हो जाता है इसलिए उन्हें पेट भरा होने का अहसास नहीं होता. और इसी कारण वे अधिक भोजन कर लेते हैं.  लेकिन, इस नए अध्यनयन में यह पाया गया है कि जिस व्याक्ति का वजन जितना अधिक होगा, उसमें लेप्टिन हॉर्मोन का स्राव भी उतना ही अधिक होगा.
    घर को बनाये एलर्जी प्रूफ
    चाय को कड़क और खाना को टेस्टी बनाने के साथ अदरक बालों की चमक लौटाने और बाल बढ़ाने में भी काफी मददगार माना जाता है. बालों की अनेक समस्याओं का एक ही हल है- अदरक. अदरक में मौजूद मैग्नेशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम और पोटेशियम बालों की खोई हुई चमक को लौटाते हैं साथ ही बालों को मजबूत और लंबा बनाते हैं.
    2 चम्मच कद्दूकस अदरक में नींबू की बूंदे मिलाइए और बालों की मसाज करिए. मसाज के 15 मिनट बाद बालों को धो लीजिए. बालों का रुखापन दूर हो जाए.
    2 चम्मच कद्दूकस अदरक लीजिए, उसमें 3 चम्मच ऑलिव ऑयल और एक-दो नींबू की बूंदे मिलाइए. इसे बालों की जड़ों में लगाकर 20 से 25 मिनट के लिए छोड़ दीजिए. ठंडे पानी से धो लीजिए. इस उपाय को सप्ताह में तीन बार अपनाइए. आपके बालों की समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी.
    1 चम्मच कद्दूकस अदरक लीजिए और उसमें जजोबा या ऑलिव ऑयल मिलाइए. फिर इस मिश्रण को बालों के जड़ों में लगाइए और आधे घंटे के लिए छोड़ दीजिए. आधे घंटे बाद शेम्पू कर लीजिए. आप पहले ही वॉश में महसूस करेंगे की बाल कम टूट रहे हैं.
    गर्भावस्था में न खाये कच्चा पपीता
    साफ़, सुन्दर, चिकने और मुलायम पैर सुंदरता और देखने वालों के आकर्षण दोनों को ही बढ़ा देते हैं. तो चलिए आज आपको पैरों को  चमकता हुआ और आकर्षक बनाने के कुछ असरदार और सुरक्षित तरीकों के बारे में बताते हैं.
    1-वैक्स करने से पहले व बाद में त्वचा को साफ जरूर करें, क्योंकि वैक्सिंग के बाद त्वचा पर संक्रमण होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं . ऐसा तब होता है, जब त्वचा पर बैठा बैक्टीरिया खुले रोमछिद्रों से त्वचा में प्रविष्ट कर जाता है . डिब्बे पर दिए निर्देश के अनुसार वैक्स को गरम करें. गरम करने के बाद गुनगुने पानी के टब या पतीले में रख कर वैक्स का प्रयोग करें. ध्यान रहे कि वैक्स के बाद त्वचा पर कैमोमाइल या एलोवेरा युक्त लोशन लगाएं. मुलायम व टैन फ्री त्वचा के लिए वैक्सिंग एक कारगर उपाय साबित हो सकता है, बशर्ते आपको वैक्सिंग का सही तरीका मालूम हो.
    2-एक बार पैरों से अनचाहे बाल साफ कर लेने के बाद बारी आती है इनकी त्वचा को निखरने और स्मूथ बनाने की. तो ऐसे में नींबू एक कमाल की प्राकृतिक ब्लीच है जो कि त्वचा को निखारने में बेहद मददगार साबित होता है. चाहे यह आपकी बांह, कंधे, चेहरा या फिर पैर ही क्यों न हों, आप आप नींबू के रस से मासाज करें और अपने पैरों की टैनिंग को जल्द ही गायब कर लें.
    3-तेल की मसाज न सिर्फ त्वचा के अच्छी होती है बल्कि हड्डियों को भी मज़बूत बनाती है. जब पैर रूखे और खराब दिखने लगें तो, उन्हें हल्के गुनगुने तेल की मसाज से नमी दीजिए. गर्म तेल ना सिर्फ पैरों को नम करेगा बल्कि डेड स्किन को भी साफ कर के पैरों को खिला-खिला बनाएगा. तिल का तेल पैरों की मसाज के लिए सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है.
    आयरन की कमी से भी लग सकती है...
    मसालेदार खाने के तुरंत बाद दूध पीते हैं तो आपकी पाचन क्रिया इससे प्रभावित हो सकती है. दरअसल, दूध पाचन संबंधी एंजाइम्स को पतला कर देता है जिससे कि पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है.ऐसे में खुद दूध का प्रोटीन भी पच नहीं पाता जिससे कि अपच की समस्या हो सकती है. मसालेदार खाना न सिर्फ शरीर में एसिड का निर्माण बढ़ाता है बल्कि पेट की आंतों में भी जलन होने लगती है. और जब इसी मसालेदार खाने के बाद दूध पिया जाता है तो ये समस्या और बढ़ जाती है.
    यहां तक कि खाने के बाद 15-20 मिनट तक तो आपको पानी तक नहीं पीना चाहिए. इससे भी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है. आप खाने के आख़िर में दही या फिर कर्ड राइस भी खा सकते हैं, ये एक प्रोबायोटिक की तरह काम करता है जो पाचन क्रिया में सहायक होता है.
    कई लोगों को मसालेदार खाना खाने का शौक होता है. मसालेदार खाना स्वाद के लिए भले ही कितना भी अच्छा क्यों ना हो ये सेहत को नुकसान पहुंचाता है. ज्यादा मसालेदार खाने से पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है जिससे अल्सर हो सकता है. कुछ लोग तेल मसालेदार खाना खाने के बाद ठंडे दूध का सेवन करना भी पंसद करते है. अगर आपको भी यही आदत है तो संभल जाइयें. क्योंकि ये आपकी पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकती है. 
    अस्थमा अटैक में पिए अजवायन की...
    नींद में खर्राटे लेने की आदत से आप न केवल अपने साथी की नाराजगी का शिकार हो सकते हैं, वरन इससे आपके शरीर पर अन्य बहुत से दुष्प्रभाव भी पड़ते हैं. अगर आप भी खर्राटों से हैं परेशान? तो यहां दिये रामबाण इलाज को अपनायें.
    1-ऑलिव ऑयल एक बहुत ही कारगर घरेलू उपाय है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण की मौजूदगी श्वसन तंत्र की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में बहुत फायदेमंद होती है. साथ ही यह दर्द को कम करने में मदद करता है. एक आधा छोटी चम्मच ऑलिव ऑयल में सामान मात्रा में शहद मिलाकर, सोने से पहले नियमित रूप से लें. गले में कंपन को कम करने और खर्राटों को रोकने के लिए नियमित रूप से इस उपाय का प्रयोग करें.
    2-इलायची सर्दी खांसी की दवा के रूप में काम करती हैं. यानी यह श्वसन तंत्र खोलने का काम करती है. इससे सांस लेने की प्रक्रिया सुगम होती है. रात को सोने से पहले इलायची के कुछ दानों को गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पीने से समस्या से राहत मिलती है. सोने से पहले इस उपाय को कम से कम 30 मिनट पहले करें.
    3-पुदीने में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गले और नाक के छिद्रों की सूजन को कम करने का काम करते हैं. इससे सांस लेना आसान हो जाता है. सोने से पहले पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर उससे गरारे करें. इस उपाय को कुछ दिन तक करने से आपको जल्द ही फर्क दिखाई देने लगेगा.
    4-हल्दी में एंटी-सेप्टिक और एंटी-बायोटिक गुणों के कारण, इसके इस्तेमाल से नाक का रास्ता साफ हो जाता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है. रात को सोने से पहले रोजाना हल्दी का दूध पीने से खर्राटों की समस्या से बचा जा सकता है.
    अनानास के छिलके भी है फायदेमंद
    खाना पकाने के लिए तेल महत्वपूर्ण होता है, लेकिन डीप फ्राई करने के बाद कड़ाही में बचे तेल का महिलाओं द्धारा बखूबी से इस्तेमाल, आहार विशेषज्ञों के अनुसार कैंसरस हो जाता है. जीं हां बार-बार तेल उबालने से उसमें कैंसर के कारक वाले तत्व आ जाते हैं. इससे गॉल ब्लैडर या पेट के कैंसर का खतरा पैदा हो जाता है.
    खाना बनाने के लिए एक ही तेल का इस्तेमाल बार-बार होने से उसमें फ्री रेडिकल्स का निर्माण होने लगता है. जो कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है. साथ ही बार-बार तेल गर्म करने से उसकी गंध खत्म हो जाती है और उसमे एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी नहीं बचते जिसके चलते उसमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व पैदा हो जाते हैं. और तो और ऐसे में जब इस तेल को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है तो इसमें मौजूद तत्व खाने में चिपककर स्वास्थ्य के लिए खतरा बनने लगते हैं.
    ऐसे खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. साथ ही एसिडिटी, दिल की बीमारी, अल्जाइमर और पार्किसंस समेत तमाम बीमारियों की आशंका बनी रहती है
    तेल  के उपयोग के समय इन बातो का रखे ध्यान -
    ऑलिव ऑयल लो स्मोक ऑयल है इसलिए इसे डीप फ्राई के लिए इस्तेमाल न करें.
    तेल का वास्तविक रंग बदलने पर उसे इस्तेमाल न करें.
    एक साथ या एक बार में कई तेल एक साथ इस्तेमाल करने से बचें.
    एक समय में एक ही तेल का उपयोग करें.
    ज़्यादा पैन किलर खाना हो सकता है नुकसानदेह
    पूरे दिन या तो हम खड़े रहते हैं या फिर इधर से उधर भागते-फिरते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि हमारे पैर बुरी तरह थक जाते हैं. ऐसे में पैरों की मसाज न केवल आपको आराम दिलाने में मददगार हो सकती है बल्किम इससे आपके पैरों की खूबसूरती भी बनी रहेगी.
    1- एक बड़े और गहरे बर्तन में गर्म पानी भर ले और इसमें किसी एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें मिला लें.
    2- 10 से 20 मिनट के लिए अपने पैरों को इसमें डुबोकर रखें. इसके बाद पैरों को पानी में से बाहर निकालकर अच्छी तरह पोंछ लें.
    3- अब एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ जाएं.
    4-अपने दाएं पैर को बाएं पैर के घुटने पर रखकर बैठ जाएं.
    5- एक छोटी कटोरी में गर्म तेल ले लें और उसे हल्के हाथों से पैर पर मलें. आप चाहें तो नारियल का तेल का  तेल  ले सकते हैं.
    6- अब इस तेल से अच्छी तरह मसाज करें. उंगलियों को आगे-पीछे करके भी मसाज करें ताकि पूरे पैर को इसका फायदा मिले.
    7- अब यही प्रक्रिया अपने बाएं पैर पर भी अपनाएं. 
      क्या आपके चेहरे पर पिंपल निकलता है तो आप उसे फोड़ देते हैं? अगर हां, तो आपको ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिये चेहरे पर निकले मुंहासे को कभी फोड़ना नहीं चाहिये नहीं तो, चेहरे पर दाग पड़ जाता है और चेहरा बहुत ही ज्यादा खराब दिखने लगता है पिंपल को फोड़ने पर इंफेक्शन हो जाता है, 
      1-जब आप पिंपल फोड़ते हैं, तो आप चेहरे पर एक गहरा घाव बना देती हैं, जिससे वह घाव समय के साथ बढ़ता चला जाता है और वह एक दाग का रूप ले लेता है
      2-पिंपल फोड़ने से चेहरे पर लाल रंग के दाग बन जाते हैं, जो कि कई दिनों तक फूले नजर आते हैं यह दाग मेकअप से भी नहीं छुपते अगर चेहरे पर मुंहासे हैं, तो कुछ घरेलू उपायों को आजमाना चाहिये, जिससे वह जल्द से जल्द ठीक होना शुरु हो जाएं
      3-रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह से साफ करें एक चम्मच खीरे के रस में हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगा लें आधे घंटे बाद धो लें ग्वारपाठे के रस के नियमित सेवन से त्वचा के कई रोग खत्म होते हैं ग्वारपाठे का रस सीधे त्वचा पर भी लगाया जा सकता है इसे आधा कप सुबह शाम लेना चाहिए गर्भवती महिलाएँ इसका सेवन न करें
      4-चंदन और हल्दी पावडर का पेस्ट दूध के साथ मिलाकर बना लें पानी के साथ घिसा हुआ जायफल भी   पिंपल के इलाज में कारगर होता है
      खुद से बनाये अपने चेहरे को धोने का पानी
      अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोगों के चेहरे पर सफेद धब्बे बन जाते हैं. इन धब्बों की वजह से चेहरे की रौनक गायब हो जाती है. मेडिकल टर्म में इस समस्या को विटिलिगो के नाम से जाना जाता है.अगर आपको भी ये समस्या है तो आपके लिए राहत की सबसे बड़ी बात ये है कि इस परेशानी को घरेलू उपायों से दूर किया जा सकता है. ये कुछ ऐसे ही घरेलू उपाय है जिन्हें अपना कर आप इस समस्या से राहत पा सकते है . 
      1-कई बार सफेद धब्बे बैक्टीरिया या फंगस के इंफेक्शन की वजह से भी हो जाते हैं. पानी और सेब के सिरके को दो-एक के अनुपात में मिला लें. इसे कुछ-कुछ देर में धब्बों पर लगाते रहिए. ऐसा करने से धब्बे जल्दी साफ हो जाएंगे.
      2-पत्तागोभी के रस को सफेद धब्बों पर लगाने से बहुत फायदा होता है. आप चाहें तो पत्तागोभी को पीसकर उसके रस का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर उसे 15 मिनट तक उबालकर उसके पानी को प्रयोग में ला सकते हैं. 
      3-प्रतिदिन खाने में अदरक का इस्तेमाल करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. अदरक त्वचा संबंधी कई बीमारियों में कारगर है. आप चाहे तो अदरक का एक छोटा टुकड़ा काट लें और उसे पीसकर रस निकाल लें. इस रस को लाल मिट्टी के साथ मिलाकर लगाने से बहुत फायदा होगा.
      4-शहद में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. शहद बहुत जल्दी त्वचा में अवशोषित हो जाता है. शहद को धब्बों पर लगाने से फायदा होगा लेकिन अगर आप इसे चंदन पाउडर, हल्दी, राइस पाउडर के साथ मिलाकर लगाते हैं तो ये और भी कारगर साबित होगा.
      जाने शैम्पू लगाने के सही तरीके के बारे...
      शरीर पर तिल का भी कुछ अजीब ही हिसाब होता है, अगर एक-दो हो तो आपकी सुन्दरता मे चार चांद लगाते हैं, लेकिन कई हों या काफी बड़े हों तो आपके लिए परेशानी का सबब हो सकते हैं. आइये जानते हैं कि कैसे इनसे छुटकारा पाया जाए. 
      कुछ घरेलू नुस्खे जो तिलों को दूर करने में सहायक होते हैं- 
      1-सेब के सिरके का उपयोग कर तिल से मुक्ति पाई जा सकती है और वो भी बिना किसी निशान के. इसके लिए रूई के एक फोहे पर कुछ बूंद सेब साइडर सिरका डालें. अब इस फोहे को तरल के चारों तरफ लगाएं और पट्टी बांध दें. अब इसे लगभग एक घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें. ऐसा तब तक करें जब तक कि तिल खुद गिर या गायब नहीं हो जाता.
      2-लहसुन की एक कली लें और इसे आधा काट लें. अब इस आधे कटे भाग को तिल पर रख कर बांध लें और रात भर बंधा रहने दें. कुछ दिनों तक इस प्रक्रिया को कुछ दिन दोहराने से चेहरे के तिल निकल जाते हैं.
      3-स्ट्रॉबेरी को बीच से काटें और तिल पर लगाएं. कुछ दिनों तक इसे दोहराएं, तिल निकलने लगेंगे.
      4-एक ताजा अंगूर लें और इसे निचोड़ कर रस निकालें. अब कई दिनों तक दिन में कई बार इस जूस को तिलों पर लगाएं. दो हफ्तों से एक महीने के भीतर तिल जाने लगते हैं.
      हर्बल चाय को पीने का तरीका
      नाखून भी मानव शरीर का प्रमुख अंग है. महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लगाने में नाखूनों की अहम भूमिका होती है. नाखूनों से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह होती है कि ये व्यक्ति स्वास्थ्य की जानकारी इनके रंग के आधार पर हो सकती है. आइये जानते है  नाखूनों से जुड़े तथ्यों के बारे में –
      1-व्यक्ति के हाथ और पैरों के नाखूनों में अलग-अलग तरह की वृद्धि देखी जाती है. अंगुलियों की तुलना में पैरों के नाखून धीमी गति से बढ़ते हैं. अंगूठे के नाखून प्रतिमाह करीब 2 मिमी तक बढ़ते हैं. 
      2-पुरुषों और महिलाओं के नाखूनों के बढ़ने की गति भी अलग-अलग होती है. पुरुषों की अंगुलियों की तुलना में महिलाओं के नाखूनों की गति धीमी होती है क्योंकि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक हार्मोंस पाए जाते हैं.
      3-नाखूनों का बढ़ना मौसम पर भी निर्भर करता है. नाखून के बढ़ने की गति गर्मी के मौसम अधिक तेज होती है क्योंकि शरीर द्वारा धूप का इस्तेमाल कर विटामिन डी बनाने से बढ़त तेज हो जाती है. जबकि अन्य मौसम में नाखूनों के बढ़ने की गति कम होती है.
      4-यदि आपके नाखूनों के आस-पास की त्वचा सूख रही है. तो यह आपके शरीर में विटामिन सी, फोलिक एसिड और प्रोटीन की कमी को दर्शाता है. 
      5-अगर आपके नाखूनों के बढ़ने की गति धीमी है तो यह बताता है कि आप प्रोटीन की कमी और विटामिन ए की कमी से जूझ रहे हैं. मानसिक अशांति, तनाव, प्रोटीन और जिंक की कमी भी नाखूनों की वृद्धि में बाधक हो सकती है.
      हरी मिर्च खाने से रह सकते है लंबे समय...
      बालों को धोने से लेकर उन्हें संवारने तक की प्रक्रिया सभी के लिए अलग-अलग होती है. जिस तरह सीधे बाल वालों को लगता है कि घुंघराले बाल होना अच्छा है उसी तरह घुंघराले बाल वाले स्ट्रेट हेयर की  ख्वाहिश रखते है. हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि घुंघराले बालों की देखभाल करना एक बेहद मुश्किल काम है. ऐसे बालों की देखभाल के लिए एक ओर जहां बहुत अधिक धैर्य की जरूरत होती है वहीं अगर कर्ल्स बहुत छोटे-छोटे हों तो मुसीबत दोगुनी हो जाती है.
      1-घुंघराले बालों को साफ रखने का इसके सिवा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है. ऐसे बालों को साफ रखना और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि गंदे होने पर इनके उलझने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में कोशिश करें कि बालों के गंदा होने से पहले ही आप उन्हें धो लें.
      2-ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि घुंघराले बाल ड्राई ही होते है .ऐसे में उनमे नियमित रूप से तेल लगाना बहुत ज़रूरी होता है ऐसे बालों में तेल लगाने के दौरान विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है क्योंकि इनमें तेल आसानी से स्कैल्प तक पहुंच नहीं पाता है और बालों को पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पाता है. ऐसे में घुंघराले बालों को नियमित रूप से तेल मसाज देते रहें.
      3-ऐसे बालों में बार-बार ब्रश करना सही नही है. स्ट्रेट बालों में तो आप बार-बार कंघी कर सकते हैं लेकिन घुंघराले बालों में बार-बार कंघी करना नुकसानदेह हो सकता है.
      घुंघराले बालों की देखभाल के लिए बहुत जरूरी है कि आप शैंपू करने के बाद कंडिशनर का इस्तेमाल जरूर करें. इससे कर्ल्स आपस में कम उलझेंगे और नतीजन टूटेंगे भी कम.
      थ्रेडिंग करवाने के कुछ खास स्टेप्स
      ओवर वेट लोग अक्सर अपना वजन कम करने के बारे में सोचते हैं लेकिन लोग क्या सोचेंगे बस यह सोचकर वो अपना फैंसला अक्सर बदल देते हैं. जब किसी अधिक वजन वाले व्यक्ति को जिम में या कहीं बाहर व्यायाम करना पड़े तो उनके लिए यह मुश्किलभरा मौका होता है। कई बार लोगों को अपने भारी-भरकम शरीर के साथ बाहर व्यायाम करने में शर्मिंदगी महसूस होती है। उन्हें लगता है कि लोग उनका मजाक बनाएंगे।
      अगर आप भी कुछ ऐसा करते हैं तो सबसे पहले यह सोचिये कि अपना वजन कम करने से फायदा आपको ही होने वाला हैं. अगर लोगों के बारे में हो सोचते रहेंगे तो फिर आप अपने बारे में कब सोचेंगे। जो ओवरवेट लोग जिम या बाहर एक्सरसाइज करने जाते हैं अब उन्हें घबराने कि जरुरत नहीं है. आपको देते हैं कुछ टिप्स जो आपमें कॉन्फिडेंस जगायेंगे। कपड़ों की फिटिंग जरूर बेहतर होनी चाहिए। ढीले-ढाले, बिना आकार वाले कपड़े खासकर इनर वियर एक्सरसाइज के दौरान सही सपोर्ट नहीं दे पाएंगे।
      इसलिए इनर वियर चुनते समय खास ध्यान रखें जो आपकी बॉडी को हर प्रकार की एक्सरसाइज करते समय पूरा सपोर्ट करे. जंपिंग जैक्स, रस्सी कूदना और दौड़ लगाना अधिक वजन वाले लोगों को शुरुआत में घुटनों और हिप्स में दर्द पैदा कर सकते हैं। कम प्रभाव देने वाले स्टेप्स आपके घुटनों को प्रभावित किए बिना प्रभाव दिखाते हैं। ऐसे में वॉकिंग और स्वीमिंग सबसे बेहतर विकल्प हैं। यदि लंबे समय तक खड़े रहना आपके लिए संभव नहीं हो पा रहा हो तो आप बैठकर किए जाने वाले कुछ व्यायाम कर सकते हैं।
      इसके लिए डम्बेल्स, रेसिस्टेंस बैंड्स का प्रयोग कर अपने आर्म्स, लेग्स की एक्सरसाइज करें। हल्की-फुलकी चोट या दर्द, जिनमें जोड़ों में दर्द भी शामिल है, उसका मतलब यह नहीं कि आपका सब छोड़कर बैठ जाना है। आपके शरीर को उसकी सीमा से अधिक कार्य करना पड़ेगा और अत्यधिक थकान हो सकती है। इसकी जगह धीरे-धीरे शुरुआत करें। तीन दिनों तक अपनी एक्टिविटी का स्तर सामान्य बनाए रखें। इसके बाद आगे की योजना बनाएं।
      हेल्थी लाइफ स्टाइल को भी फॉलो करना है जरूरी
      डायबिटीज़ वह सिचुएशन है जब शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि पैनिक्रयास इन्सूलिन नहीं बना पाता है। इस सिचुएशन का पूरा भार हमारे खान-पान पर होता है इसलिए हेल्दी डायट पर ध्यान देने की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है। अक्सर हम वक्त की कमी के कारण एक्सरसाइज़ न करना, ब्रेकफास्ट करना और अनहेल्दी फूड्स खाने जैसी ग़लतियां करते रहते हैं जो डायबिटीज़ जैसी बीमारियों को न चाहते हुए भी इनविटेशन दे ही देते हैं। आजकल छोटी उम्र में भी लोगों को यह बीमारी लग रही है. कुछ चीजों का ध्यान रख कर आप इस बिमारी से बच सकते हैं।
      अपने शरीर से मेहनत करवाना बेहद जरूरी है. पुरी बॉडी की एक्सरसाइज़ नहीं होगी तब तक आप किसी ने किसी बिमारी को बुलावा देते रहेंगे। जिम नहीं जा सकते तो मवर्निंग वाक पर जाइये, आउटडोर स्पोर्ट्स के भी वही लाभ है, साइकिलिंग,डांसिंग नहुत सी ऐसी चीजे हैं जिस से आप फिट रहेंगे और डायबिटीज होने के ख़तरे को काफी हद तक कम किया जा सकता हैं। आप क्या और कितना खा रहे हैं इस बात का सीधा असर आपकी बॉडी पर दिखता है. घर पर अगर बेहद तला हुआ और मसालेदार भोजन कर रहे हैं तो यह भी बाहर का जंक फ़ूड खाने के बराबर ही है. अपनी डाइट को हमेशा स्ट्रिक्टली फ़ॉलो करने की आदत बनाये। सेहत को ध्यान में रखकर अपने खाने में अधिक सब्ज़ियां और फायदेमंद मसाले ऐड करें। हमेशा ताज़ी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां ही अपने डायट में शामिल करें।
      रोज एक फल ज़रूर खाना चाहिए जिसमें सेब, पपीता या अमरूद हो तो बेहतर होगा। केला और चीकू खाने से बचें क्योंकि इन फलों से खून में ग्लूकोज़ लेवल बढ़ने की संभावना रहती है। अपनी डायट में हमेशा ज़्याद फाइबरयुक्त चीज़ें शामिल करें। बेसन फाइबर की मात्रा न के बराबर होती है इसलिए बेसन से बनी चीजें खाना सेहत के नजरिये से अच्छा नहीं होता। खाने का चुनाव करते समय इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। युवा स्ट्रीट फूड काफी मात्रा में खाते हैं.ऐसी चीज़ें खाने से पहले हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि वह लो-फैट हो और ज्यादा फ्राई किए हुए न हो।प्रोसेस्ड फूड जैसे अचार, पापड़ और पकौड़ों से दूरी बरतें।
      बच्चो को भी हो सकती है टाइप 2 डाइबिटीज़
      HIV एड्स दुनिया भर के देशो के लिए एक सबसे बड़ी परेशानी बन के उभरा है. इसका मुख्य कारण असुरक्षित यौन सम्बन्ध और दूषित खून पर इस्तेमाल की गयी सुई हो सकती है. यह एक गंभीर जानलेवा समस्या है. जिसकी समय रहते पहचान करना अति आवश्यक है.
      इसी सिलसिले में आज हम आपको HIV सिम्पटम्स बताने जा रहे है. ताकि इस गंभीर बीमारी से बचाव किया जा सके.
      - वेसे तो बुखार आना काफी आम समस्या है. लेकिन अगर आपको लंबे समय तक बुखार है और काफी इलाज के बाद भी आपको आराम नहीं मिल पा रहा है तो आज ही HIV टेस्ट करवाए.
      - HIV के चलते हमारे शरीर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है. जिस वजह से हमे अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है.
      - HIV की वजह से हमारे श्री की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है. जिस वजह से हमे सिरदर्द एवं गले में खराश का सामना करना पड़ता है.
      - HIV संक्रमण के चलते हुमात्रि स्किन पर खुजली और धब्बे होने लगते है.
      - HIV की वजह से पीड़ित के वजन में भारी गिरावट आती है. इसके साथ ही पीड़ित की भूख भी मारने लगती है.
      आप भी घर पर कर सकते है HIV टेस्ट, जानिए कैसे
      कुदरत का सबसे अद्भुत फल नारियल स्वाद और पौष्टिकता से पूर्ण है| नारियल पानी भी अमृत समान है| नारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट्स, अमीनो-एसिड, एंजाइम्स, बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन सी और कई प्रमुख लवण होते हैं| नारियल पानी पीने से इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है. साथ ही इसमें मौजूद cytokinins बढ़ती उम्र के लक्षणों को आने से रोकता है|
      आइये जाने नारियल पानी के अन्य लाभ :- 
      1 बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए भी नारियल पानी का प्रयोग किया जाता है,इसमें मौजूद cytokinins कोशिकाओं और ऊतकों पर सकारात्मक प्रभाव डालकर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद करता है|
      2 नारियल पानी पीने से शरीर को ऊर्जा मिलती है,ये एक सुपाच्य प्राकृतिक पेय है,ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और साथ ही ये कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने का भी काम करता है। नारियल पानी प्राकृतिक रूप से एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो बढ़ती उम्र में भी ऊर्जावान बनाये रखता है|
      3 नारियल पानी में विषाक्त तत्वों को दूर करने का गुण पाया जाता है |
      4 थायरॉएड हॉर्मोन्स को संतुलित बनाए रखने में नारियल पानी बहुत उपयोगी होता है। सुबह के समय नारियल पानी पीने से थायरॉएड हॉर्मोन नियंत्रित रहते हैं। 
      5 अगर आप वजन घटाने को लेकर फिक्रमंद हैं तो नारियल पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा। इसमें बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है और फैट न के बराबर| 
      6 नारियल कोलेस्ट्रॉल और फैट-फ्री होने की वजह से ये दिल के लिए बहुत अच्छा होता है, इसके साथ ही इसका एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी सर्कुलेशन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है|
      7 सिर दर्द से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं डिहाइड्रेशन की वजह से ही होती हैं. ऐसे में नारियल पानी पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स पहुंचाने का का काम करता है, जिससे हाइड्रेशन का स्तर सुधर जाता है|

      गरम पानी की भाप से निखारे सौंदर्य

      सुबह की सैर से तन रहे तंदरुस्त
      आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि को अच्छे से काम करने में मदद करता है, जिससे इसमें हार्मोन ठीक से बनने लगते हैं। यह हार्मोन दिमाग को अच्छे से काम करने, वजन नियंत्रण करने में और मेटाबोलिज्म को मजबूत करने में मदद करता है। अगर आयरन सही मात्रा में ना खाया जाए तो कुछ लोगों को थायराइड हार्मोन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। दिमागी विकास के लिए आयोडीन बहुत जरुरी है। आयोडीन फर्टिलिटी और स्तनपान के दौरान भी महत्वपूर्ण है। कुछ आयोडीन युक्त फ़ूड ऐसे हैं जिन्हें अपने आहार में शामिल करना बेहद जरुरी है।
      एक चौथाई सीवीड में 4500 माइक्रोग्राम आयोडीन पाया जाता है। एक दिन की आयोडीन की पर्याप्त मात्रा यह आपके शरीर में पहुचाता है। भुने हुए आलू रोज़ खाने चाहिए।आलू के छिल्के में आयोडीन, पोटेशियम और विटामिन होते हैं। एक आलू लगभग 40: आयोडीन आपको देता है। दही में 80 माइक्रोग्राम आयोडीन जो आपकी दिन भर की कमी को पूरा करता है। दही में अच्छे बैक्टीरिया भी पाये जाते हैं जो आपके पाचन तंत्र को अच्छा रखते हैं।
      एक कप दूध में 56 माइक्रोग्राम आयोडीन पाया जाता है, साथ ही इसमें कैल्शियम, और विटामिन डी भी मिलता है जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनता है। बकरी के दूध के पनीर में 15 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है. यही नहीं इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स भी होता है। रोज़ तीन मुन्नके खाने से 34 माइक्रोग्राम आयोडीन आपके शरीर में जाता है। इससे से आपको विटामिन ए, विटामिन, आयोडीन, फाइबर, और बोरान मिलता है।
      सर्दी में नाक बहना, गले में खराश, कफ़, हल्का बुखार, छींक आदि। यदि सही उपचार किया जाए तो यह एक सप्ताह में सर्दी ठीक हो जाती है। सर्दी के इलाज के लिए कई घरेलू उपचार हैं। हालाँकि सर्दी तथा उससे संबंधित लक्षणों के इलाज के लिए शहद सबसे अच्छा इलाज है। शहद में एंटीबैक्टीरियल , एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो वायरस, बैक्टीरिया और फंगस से लड़ते हैं तथा सर्दी और उससे रिलेटेड सिम्पटम्स के उपचार में सहायक होते हैं। यह नेचुरल तरीके से सर्दी का उपचार करता है तथा गले की खराश से आराम दिलाता है।
      शहद के नियमित सेवन से शरीर का इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है और सर्दी से होने वाले बीमारियों से छुटकारा मिलता है। नींबू और अदरक का मिश्रण मिनटों में सर्दी को दूर भगा सकता है। शहद और नींबू का रस समान मात्रा में मिलाएं। इसमें अदरक का पाउडर मिलाएं तथा दिन में कई बार इसका सेवन करें। सर्दी से राहत पाने के लिए हनी और लेमन टी भी एक अच्छा उपाय है। इस मिश्रण का नियमित सेवन करने से सर्दी तथा उससे संबंधित लक्षणों से आराम मिलता है। इस मिश्रण का अधिक लाभ लेने के लिए सुबह सुबह इस मिश्रण का सेवन करें।
      शहद में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटीवायरल और एंटी फंगल गुण होते हैं जो प्रभावी रूप से सर्दी की रोकथाम करते हैं। एक चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाएं। सर्दी से छुटकारा पाने के लिए दिन में दो बार इस मिश्रण का सेवन करें। शहद और कच्चे प्याज का मिश्रण भी सर्दी से राहत दिलाने में सहायक होता है। प्याज के स्लाइस काटें तथा इस पर शहद लगायें। इसे रात भर ऐसे ही रहने दें तथा दूसरे दिन सुबह इसे खाएं। इस प्रक्रिया को दिन में कई बार करें।
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      गलत अनाज का चुनाव आपके स्वास्थ्य के साथ-साथ आपकी त्वचा को भी प्रभावित करता है.अनाज के इस्तेमाल से बचकर आप त्वचा संबंधी सभी समस्याओं को दूर कर सकते हैं.
      ऐसे कुछ अनाज के बारे जानकारी-
      1-ग्रेन आपकी त्वचा के खिलाफ नकारात्मक प्रतिक्रिया करते है. यह आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाकर, सूजन और जलन पैदा करते हैं. जिसके परिणास्वरूप त्वचा पर छोटे या बड़े दानों का विकास होने लगता है. यह एलर्जी हल्के से शुरू होकर गंभीर रूप ले सकती हैं.  
      2-गेहूं उन खाद्य पदार्थों में से एक है जो अतिरंजित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर एलर्जी की प्रतिक्रिया का कारण बनता है. खाद्य एलर्जी चेहरे, होंठ और जीभ की सूजन सहित कई अन्य चीजों का कारण हो सकती है.  
      3-एक्जिमा के चकत्ते आम है और सभी के जीवन में इसका अनुभव करने की संभावना कभी न कभी रहती है. आमतौर पर, एक्जिमा चकत्ते की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिसमें चकत्ते लाल, खुजली और उभरे हुए होते है. ग्रेन, सूजन का कारण बन एक्जिमा के नेतृत्व की संभावना बढ़ा देते है.  
      4-गेहूं और कुछ अन्य अनाज जैसे राई, स्पेल्ट और जौ ग्लूटेन से भरे हुए होते है. बहुत से लोग ग्लूटेन को ठीक से पचाने में असमर्थ होते हैं, परिणामस्वरूप उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली बिगड़ने लगती है. प्रतिरक्षा प्रणाली के असंतुलन से सीलिएक रोग सहित कई गंभीर त्वचा की समस्याओं का नेतृत्व होता हैं. कुछ लोगों के लिए, सीलिएक रोग खुजली और बहुत अधिक चकत्तों का कारण बनता है. 
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      अक्सर लोग फलों और सब्जियों का प्रयोग करके उनके छिलकों और पत्तों को उतार कर फेंक देते हैं. जबकि फलों और सब्जियों से अधिक फायदेमंद और पौष्टिक ये छिलके होते हैं. इनके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है साथ ही यह सौंदर्य को निखारने में भी मदद करते हैं. इन छिलकों का प्रयोग करके कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. इन छिलकों के प्रयोग से आप घरेलू ब्लीच बना सकते हैं. 
      छिलकों के फायदे के बारे में भी जानिये-
      1-संतरे का छिलका त्वचा को निखारने में प्रयोग किया जा सकता है. यह भी नैचुरल ब्लीच की तरह है. संतरे के छिलकों को धूप में सुखा कर उन्हें मिलाकर बारीक पीस लीजिए. उस पाउडर में थोड़ी सी मलाई मिला कर इसका पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर 10 मिनट लगा कर रखें, फिर साफ पानी से धो लें. दाग-धब्बे दूर होंगे और त्वचा में निखार आयेगा.
      2-नींबू का छिलका अच्छी तरह सुखा लें, सूखने के बाद उसे पीस लें. इसमें कुछ बूदं शहद और कुछ बूंद गुलाब जल की मिलाकर चेहरे पर लगायें. यह प्राकृतिक ब्लीच है जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारता है.
      3-पपीता खाने में फायदेमंद होता है और इसका छिलका सौंदर्य निखारने में मदद करता है. पपीते के छिलके को त्वचा पर लगाने से खुश्की दूर होती है. एड़ियों पर लगाने से वे मुलायम होती हैं.
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      बीज ना सिर्फ निर्माण के काम आता है बल्कि कुछ बीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायक होता है. देखने में छोटे से ये बीज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं.
      जानें छोटे से बीजों के बड़े फायदे-
      1- तरबूज का सेवन हमारे स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद है. लेकिन इसके बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं. तरबूज के बीज शीतवीर्य, शरीर में स्निग्धता बढ़ाने वाले, पौष्टिक, मूत्रल, गर्मी का शमन करने वाले, कृमिनाशक, दिमागी शक्ति बढ़ाने वाले, दुर्बलता मिटाने वाले, गुर्दों की कमजोरी दूर करने वाले, गर्मी की खांसी तथा बुखार को दूर करने वाले व मूत्ररोगों को दूर करने वाले होते हैं. तरबूज के बीजों की गिरी की ठंडाई बनाकर रोज सुबह नियमित रूप से पीने पर स्मरण शक्ति भी बढ़ती है.
      2-अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व उम्र बढ़ाती है. अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फेटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं. अलसी के बीज पाचन शक्ति बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं.
      3-कद्दू के बीज में विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं. यह बलवर्धक होते हैं और रक्त एवं पेट साफ करते हैं. इनके सेवन से पित्त व वायु विकार दूर होता है और मस्तिष्क के लिए भी ये बहुत फायदेमंद होते हैं.
      4-सूरजमुखी के बीज अर्थात सनफ्लावर सीड गुणों के मामले में सुपर होते हैं. इन बीजों में विटामिन ई और पोली अन-सैचुरेटेड फैट प्रचुर मात्रा में होते हैं. इनके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है. साथ ही सूरजमुखी में मैग्नीशियम भी अच्छा-खासा होता है जो हड्डियों को मजबूती देता है. 
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      दूध पीने से लाल रक्त कणिकाएं स्वस्थ्य रहती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. दूध पीने के ऐसे ही कई फायदे हैं जिन्हें आप उंगलियों पर नही गिन सकते हैं. लेकिन शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपकी एक छोटी सी गलती दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को खत्म कर देती है.  
      भारतीय घरों में दूध उबाले जाने के संदर्भ में हुए एक अध्ययन के मुताबिक करीब 17 प्रतिशत महिलाओं को ही पता है कि बार-बार दूध उबालने से इसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इस अध्ययन का एक चौकाने वाला नतीजा यह भी है कि 59 प्रतिशत महिलाएं यह मानती हैं कि दूध उबालने से उसके पोषक तत्व बढ़ जाते हैं और 24 प्रतिशत महिलाओं को लगता है कि पोषक तत्वों पर कोई असर नहीं पड़ता.
      सबसे पहले तो दूध को बार-बार उबालने वाली मानसिकता को बदलनी होगी. कोशिश करें कि दूध को उबालने के साथ ही उसे चुल्हे से उतार लें. ज्यादा देर तक इसे उबालते रहना ठीक नही है. दूध को एक बार उबालने के बाद उसे फ्रीज में रख दें. ज्यादा जरूरी हो तभी उबालें. कोशिश करें कि एक या दो बार उबालने के बाद ही दूध को प्रयोग में ले लिया जाए.
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      कॉर्न की तरह बेबीकॉर्न भी एक स्वादिष्ट पौष्टिक आहार है. पाचन के अलावा बेबीकॉर्न के कई स्वास्थ्य लाभ है. 
      आइए इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानते हैं-
      1-इस छोटे से पीले रंग के आहार में आपकी सोच से भी ज्यादा मिनरल होते हैं. बेबीकॉर्न में मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर और सबसे महत्वपूर्ण फास्फोरस का एक बड़ा हिस्सा होता है, जो स्वस्थ हड्डियों के लिए जरूरी होता है. यह पोषक तत्व न केवल बढ़ती उम्र में आपकी हड्डियों को चटकने से रोकता है बल्कि किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है.
      2-बेबीकॉर्न में फाइबर की भरपूर मात्रा, पाचन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह कब्ज, बवासीर को रोकता है और साथ ही साथ कोलोन कैंसर के खतरे को भी कम करता है.
      3-बेबीकॉर्न एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, त्वचा को लंबे समय तक जवां रखने में मदद करता है. बेबीकॉर्न का नियमित सेवन करने के अलावा इसके तेल को आप अपनी त्वचा पर लगा भी सकती है, क्योंकि बेबीकॉर्न के तेल लिनोलिक एसिड का एक समृद्ध स्रोत है.
      4-कॉलेस्ट्रॉल एक पदार्थ जो लीवर द्वारा निर्मित है. वहाँ कॉलेस्ट्रॉल के दो प्रकार के होते हैं; अच्छा कॉलेस्ट्रॉल (एचडीएल) और खराब कॉलेस्ट्रॉल (एलडीएल). वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण खराब कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि हुई है अपने दिल को कमजोर और भी हृदय रोगों को जन्म दे सकता है. लेकिन बेबीकॉर्न में मौजूद विटामिन सी, केरोटीनॉइड और बायोफ्लेवोनॉइड कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर आपके दिल को स्वस्थ और शरीर में रक्त के प्रवाह में वृद्धि करता है.
      स्वस्थ रहना है तो खाये लेटस का सलाद
      पानी हमारी बॉडी के लिए कितना आवश्यक है यह सभी जानते हैं। दिन भर में कम से कम 5 लीटर पानी पीना ही चाहिए। ज्यादातर लोग ठन्डे पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद गर्म पानी पिया जाए, तो कई सारी स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा भी पाया जा सकता है। जानते हैं गरम पानी पीने के कुछ फायदें के बारे में। गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती हैं, साथ ही, कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
      गर्म पानी पीने से फ़ायदा हमारे पाचन तंत्र को भी मिलता है। गर्म पानी पीने से आंतों में जमा मल आसानी से निकल जाता है। जिससे आपका पेट साफ़ रहता है। अगर आपको कब्ज की परेशानी है तो यह उसे भी आराम दिलाता है। अजवाइन के कुछ दानो के साथ गर्म पानी लेने से मासिक धर्म के दर्द से आराम मिलता है | पेट की मांसपेशियां गर्मी से ढीली पद जाती है और मांसपेशियां के ऐंठन के कारण होने वाले दर्द से आराम मिलता है |
      गर्म पानी के नियमित सेवन से बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ाता है और पसीने के माध्यम से शरीर के सारे विषैले पदार्थ बाहर हो जाते हैं। मुंहासों बचने के लिए रोज़ सुबह खली पेट एक गिलास गर्म पानी पियें। इससे मुंहासे नहीं होंगे, और चेहरे का ग्लो भी बढ़ जाएगा। अगर आप अपना वज़न कम कर रहे हैं तो गर्म पानी ज़रूर पियें। रोज़ सुबह खली पेट गर्म पानी पियें। यह आपके शरीर से अतिरिक्त फैट निकल देगा।
      बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अक्सर में जिम में बहुत वक्त बिताते हैं। दूसरों को देख देख कर बहुत सारी कसरतें करते हैं और नतीजों के लिए परेशान रहते हैं। उनका यह सोचना होता है कि इतनी मेहनत के बाद भी उनके शरीर पर इसका असर क्यों नहीं दिखाई देता। सिर्फ जिम जाकर वजन उठाने भर से बॉडी नहीं बनती, इसके लिए बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है. डाइट से लेकर एक्सरसाइज टेक्निक और तय किये गए लक्ष्य को अचीव करने में लगने वाला एफर्ट, ये सब बातें बहुत मायने रखती है.
      मसल्स बनाने और बॉडी को ग्रो करने में जितना रोल कसरत का है उससे कम रोल डाइट और नींद का नहीं है।. आइये जानते हैं कि क्या है शानदार बॉडी बनाने का फुल प्रूफ प्लान। पतले या कम वजन वाले लोगों को जिम में कम वक्त बिताना चाहिए। आप एक दिन में केवल एक बॉडी पार्ट की तीन से चार कसरतें ही करें। हर सेट की शुरुआत में इतना वेट लगायें कि आप 12 से ज्यादा रैप न निकाल पायें। आखिरी सेट हैवी हो कि आप 4 से 6 रैप ही निकाल पायें। कसरत से पहले हल्का फुल्का वार्मअप करें और कसरत के बाद हल्की फुल्की स्ट्रेचिंग।
      बॉडी बनानी है तो अपनी लिमिट्स को हर बार पुश करना होगा। खुद को चैलेंज करके ही आप अच्छी बॉडी बना सकते हैं। जितना हैवी वेट लगाएंगे उतना ही ज्यादा आपकी मसल्स ग्रो होने के चान्सेस बढ़ेंगे। एक ही वेट पर एक महीना गुजारने वाले तो फिर बॉडी बनाना एक सपने की तरह ही रहेगा। गेन करने के लिए आपको अपनी जरूरत से हर दिन कम से कम 500 कैलोरी ज्यादा लेनी होगी। हम जो कुछ भी खाते हैं उससे हमें कैलोरी मिलती है।
      प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट तीनों से हमें कैलोरी मिलती है। जब आप जिम करने लगते हैं तो आपकी जरूरत वैसे ही बढ़ जाती है। यानी बॉडी ग्रो करने के लिए अपनी सामान्य जरूरत, कसरत की जरूरत और फिर ग्रो करने की जरूरत को पूरा करना होगा। इसलिए अपनी डाइट तो आपको बढ़ानी ही पड़ेगी। कसरत करने से हमारी बॉडी में जो टूट फूट होती है उसकी मरम्मत का काम उस वक्त होता है जब हम सो रहे होते हैं। सोते वक्त ही हमारी बॉडी ग्रोथ हार्मोन रिलीज करती है। इसलिए पूरी नींद लेना बहुत जरूरी है। जितना आप बॉडी को रेस्ट देंगे उतना आपकी बॉडी को ग्रो करने का चांस मिलेगा।
      सप्लीमेंट्स का यूज़ करें तो ध्यान रखिये की आपको अपने कोच और डॉक्टर से इस बारे में जरूर सलाह लेनी चाहिए। अगर नेचुरल तरीके से आप प्रोटीन ले सकते हैं तो इस से अच्छी बात हो ही नहीं सकती। सप्लीमेंट्स के बारे में तब सोचे जब आप नेचुरल तरीकों से इसे न ले पाते हों. वजन बढ़ाना है तो भी आप अपनी डाइट में फेरबदल करके ऐसा करिये। वेट गेनर को न ही इस्तेमाल करें तो बेहतर है।
      जिम जाते हैं तो इन वर्ड्स का मतलब भी..
      सफ़ेद दाग स्किन की ऐसी बीमारी हैं जिसके कारण पीड़ित व्यक्ति काफी शर्म महसूस करता है. इसमें पीड़ित के शरीर पर कई जगह स्किन का रंग सफ़ेद पड़ जाता है और शरीर के बाकी पार्ट्स से अलग दिखने लगता है. इसका एलोपैथिक इलाज भी संभव है लेकिन हम आज आपको कुछ आसान घरेलु नुस्खें बता रहे हैं जिनके इस्तेमाल से सफ़ेद दाग से निजात पाया जा सकता हैं. जरुरत है तो सिर्फ आपके पेशेंस की, क्योंकि हो सकता है बिमारी के पुरी तरह ठीक होने में कुछ वक्त लगे लेकिन सब्र का फल हमेशा मीठा होता है।
      नीम एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर और एंटी इन्फेक्शन तत्वों से भरपूर औषधि है। छाछ के साथ नीम के पत्ति यों को पीसकर इसका लेप बना लें। इस लेप को त्वचा पर लगाएं और फिर पूरी तरह से सुख जाने पर इसे धो लें। इसके अलावा आप नीम के तेल का प्रयोग और नीम के जूस का सेवन भी कर सकते हैं। कोकोनट ऑइल स्किन को पिगमेंटेशन प्रदान करने में सहायक है साथ ही स्किन के लिए भी बेहतर है। इसमें एंटी बेक्टिरियल और एंटी इन्फेक्शन गुण भी पाए जाते हैं। दिन में 2 से 3 बार प्रभावित त्वचा पर नारियल तेल से मसाज करना फायदेमंद हो सकता है। कॉपर स्किन में मेलानिन बनाने के लिए बेहद आवश्यक है।
      रात में तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखें और सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं। बरसों पुराना यह तरीका काफी कारगर है । सरसों के तेल के साथ हल्दी पाउडर का लेप बनाकर लगाना फायदेमंद है। इसके लिए 1 कप सरसों के तेल में 5 बड़े चम्मच हल्दी पाउडर डालकर मिलाएं। दिन में दो बार इस लेप को प्रभावित त्वचा पर लगाएं। 1 साल तक लगातार इस लेप का प्रयोग करें। इसके अलावा आप हल्दी पाउडर और नीम की पत्तियों के लेप का प्रयोग भी कर सकते हैं। लाल मिट्टी में बहुत ज्यादा क़्वान्टिटी में कॉपर पाया जाता है, जो मेलानिन के निर्माण और त्वचा के रंग का पुन: निर्माण करने में मददगार है। लाल मिट्टी को अदरक के रस के साथ मिलाकर भी प्रभावित स्थान पर लगाए, यह बहुत फायदेमंद होगा।
      हरी सब्जियां विटामिन, प्रोटीन और मिनरल से भरपूर होती हैं। यह शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करती हैं।सब्जियों को अच्छे से धोकर इस्तेमाल न करने पर न्यूरोसिस्ट सरकोसिस एक प्रकार की मिर्गी नामक बीमारी हो सकती है। और इसका सही और समय पर इलाज नहीं होने पर जान को जोखिम भी हो सकता है। हरी सब्जियां जब भी लें तो ये सुनिश्चित करें कि सब्जियां साफ-सुथरी हों, पत्तों में कीड़े न लगे हों। साथ ही साफ पानी से अच्छी तरह धोकर इन्हें इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि इन्हें हमेशा पकाकर ही खाएं।
      सब्जियों को सही से ना धोया जाएं तो ये आपकी सेहत को फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचाती हैं। हरी सब्जियों से होने वाली न्यूरोसिस्ट सरकोसिस बीमारी के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार टीनिया सोलियम नामक जीव है जो सुअर की बीट में पाया जाता है। ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें देख पाना भी संभव नहीं होता है। सुअर की बीट वाली खाद का इस्तेमाल न भी करें तो सब्जियों वाली जगह इतनी गंदी होती है कि सुअर वहां आसानी से पहुंच जाते हैं और बीट कर देते हैं। बीट के साथ घातक परजीवी भी सब्जियों में प्रवेश कर जाते हैं।
      टीनिया सोलियम जीव हरी सब्जियों में अंडे देते हैं। ये हर हाल में अपना लाइफ साइकिल पूरा करते हैं। ऐसे में जो लोग सब्जियों अच्छे से धोकर नहीं खाते हैं, उनके निवाले का हिस्सा बनते इन परजीवियों को देर नहीं लगती। इंसान के शरीर में प्रवेश कर ये अंडे देते हैं और अंदर ही अंदर इनकी तादात इतनी हो जाती है कि खून के सहारे शरीर के हर हिस्से में पहुंच जाते हैं। ये परजीवी दिमाग की नसों में पहुंचकर तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर डालते है जिससे मिर्गी के झटके आने लगते हैं। सबसे ज्यादा इस बीमारी से बच्चे प्रभावित होते हैं।

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