Header Ads

पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका


पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका, जानें इसके फायदे और सावधानियां


पश्चिमोत्तानासन कैसे करे 



सबसे पहले दोनों पैरों को बाहर की ओर फैलाते हुए जमीन पर बैठ जाएं।
पैर की उंगलियों को आगे और एक साथ रहनी चाहिए।
श्वास लें, अपनी बाहों को ऊपर उठाएं और जहां तक संभव हो शरीर को आगे की ओर झुकाने के लिए झुकें।
आगे की ओर झुकते समय साँस छोड़े ।
अंतिम चरण में, दोनों हाथो को पैरों के तलवे को और नाक को घुटनों को छूना चाहिए।
प्रारंभ में, इसे 5 सेकंड के लिए करें और धीरे-धीरे जब तक आप सहज महसूस करते हैं, तब तक मुद्रा मे बने रहने की कोशिश करें।
श्वास लें और मूल स्थिति में आएं।
यह एक दौर है। शुरू में, दो बार करें।


योग आपके शरीर के लिए एक बेहतरीन व्यायाम है जो आपके शरीर के हर एक हिस्से को टारगेट करती है और इन्हें स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। योग का अभ्यास आपके शरीर को हेल्दी बनाने के साथ-साथ एक्टिव भी बनाता है। योग को अगर आप अपने डेली रूटीन में शामिल करते हैं तो यह आपको मानसिक तौर पर भी हेल्दी रहता है।


आप अपने व्यायाम रूटीन में बहुत से योगासन को शामिल कर सकते हैं जो आपकी क्षमता के अनुसार हैं यानी अगर आपने योग का अभ्यास करना अभी शुरू किया है तो आप उन्हीं योगासन का अभ्यास करें जो बिगनर्स के लेवल के हैं। पश्चिमोत्तानासन इन्हीं योग में से एक है।


यह एक बेसिक पोज़ है। हालांकि इसके लिए भी आपको बहुत अभ्यास की जरूरत होती है क्योंकि इसमें शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी चाहिए होती है। पश्चिमोत्तानासन हठ योग की एक क्लासिक मुद्रा है। यह आपकी कमर से लेकर, काव्स और हैमस्ट्रिंग (जांघों के पीछे) तक को एक अच्छा स्ट्रेच देता है।


पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से आपके एब्डोमेन ऑर्गन को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। इससे पाचन बेहतर होता है और आपके शरीर को भोजन से सभी पोषक तत्व मिलते हैं। आइए जानते हैं कि पश्चिमोत्तानासन कैसे किया जाता है और क्या हैं इसके फायदे-
पश्चिमोत्तानासन क्या है?


पश्चिमोत्तानासन एक सिटींग पोज़ है जो आपकी कमर को एक इंटेंस स्ट्रेच देता है। यह हठ योग का एक हिस्सा है और मॉडर्न योग में एक्सरसाइज के रूप में काम करता है। इस आसन में आपको अपनी कमर को आगे की ओर झुकना पड़ता है। इसके अभ्यास से कमर से लेकर आपकी ऐड़ी तक अच्छा स्ट्रेच मिलता है।

पश्चिमोत्तानासन के फायदे 
पश्चिमोत्तानासन के लाभ | 
यह आसन मन को शांत करता है और तनाव से भी छुटकारा दिलाता है ।
इसे करने से कंधे, रीढ़ को अच्छा खिंचाव मिलता है ।
इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास करने से पाचन में सुधार होता है ।
चिंता, सिरदर्द और थकान कम करने मे सहायता मिलती है ।
इस आसन से उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, बांझपन और साइनसाइटिस को ठीक किया जा सकता है ।
भूख बढ़ाने और मोटापा कम ( विशेष कर पेट की चर्बी) करने के लिए फ़ायदेमद है ।

पश्चिमोत्तानासन या सीटेट फॉरवर्ड बेंड पोज़ शांत और रिलैक्सिंग होता है, और तनाव, चिंता, अनिद्रा, सिरदर्द और डिप्रेशन को कम करने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं इसके अभ्यास से आपको क्या फायदे मिलते हैं-
दिमाग को शांत करता है
थकान को दूर करे
फैट को बर्न करे
इंसोम्निया से राहत
पाचन को बेहतर करे
कमर को स्ट्रेच करे
1. दिमाग को शांत करता है

TOI

इस आसन का अभ्यास करने से आपके दिमाग को शांत करने में मदद मिलती है जिससे तनाव को दूर करने और चिंता से राहत पाने में मदद मिल सकती है। इस आसन का हर रोज अभ्यास करने से आपको डिप्रेशन के लक्षणों से भी राहत मिल सकती है।

2. थकान को दूर करे

यह आसन आपके शरीर में रक्त के संचार को बढ़ाता है इसलिए अगर आप थका हुआ महसूस करते रहते हैं तो इस आसन को अपने रूटीन में शामिल करें। यह आपके शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाकर थकान को दूर करने में मदद करेगा।
3. फैट को बर्न करे

TOI

अगर आप बेली फैट से परेशान हैं तो इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं। यह आसन एक्स्ट्रा बॉडी फैट को बर्न करने में मदद करता है और फ्लैट टमी पाने के लिए मददगार है।

4. इंसोम्निया से राहत

आज की लाइफस्टाइल के कारण हम सभी को नींद लेने में परेशानी होती है और जब यह परेशानी बढ़ जाती है और इंसोम्निया का रूप ले लेती है लेकिन पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास इंसोम्निया की समस्या को दूर करता है और अच्छी नींद लेने में मदद करता है।
5. पाचन को बेहतर करे


पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास आपके एब्डोमेन ऑर्गन को मसाज करने और स्टिमुलेट करने में मदद करता है जिससे ये ऑर्गन सही तरीके से काम करते हैं। जब पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है तो भोजन को पचाने में मदद मिलती है और आपका शरीर भोजन के पोषक तत्वों को अच्छी तरह से अवशोषित कर पाता है।

6. कमर को स्ट्रेच करे


इस आसन का अभ्यास आपकी कमर को स्ट्रेच करके कमर के दर्द से राहत दिला सकता है। आप इस आसन का हर रोज अभ्यास करके रीढ़ को स्वस्थ रख सकते हैं।

पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका 


जमीन पर चटाई बिछा कर बैठ जाएं और अपनी रीढ़ को सीधा रखें।
पैरों को अपने सामने फैलाएं और पैरों की उंगलियों को अपनी ओर फैला कर रखें।
सांस लेते हुए, अपने दोनों हाथों को अपने सिर के ऊपर उठाएं और स्ट्रेच करें।
सांस छोड़ते हुए, कूल्हे के जोड़ों से आगे की ओर झुकें, अपनी ठोड़ी को पंजों की ओर बढ़ाएं।
घुटनों की तरफ नीचे की ओर झुकते हुए रीढ़ की हड्डी को आगे की ओर ले जाते रहें।
अपने हाथों को अपने पैरों पर रखें, जहां तक हाथ पहुंच पाएं।
जितना स्टेच करने में आप सहज हों, उतना ही करें।
अगर हो पाए तो अपने हाथों से अपने पैरों की उंगलियों को पकड़ें।
सांस लेते हुए, अपने सिर को थोड़ा ऊपर उठाएं और अपनी रीढ़ को लंबा करें।
सांस बाहर निकालते हुए, धीरे से नाभि को घुटनों की ओर ले जाएं।
इस मूवमेंट को दो या तीन बार दोहराएं।
इस आसन में 20-60 सेकंड तक रहें और गहरी सांस लेते रहें।
अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं।
सांस छोड़ें और हाथों को नीचे लाएं।
पश्चिमोत्तानासन करते वक्त बरतें ये सावधानियां 
अगर आपको कूल्हों, हैमस्ट्रिंग, पीठ के निचले हिस्से और कंधों में चोट है, तो इस आसन के अभ्यास से बचें या इसे मोडिफाई कर लें।
इस आसन को करते वक्त खुद के साथ जबरदस्ती ना करें। अगर आपको पूरी तरह बेंड होने में परेशानी हो रही है तो केवल उतना ही बेंड करें जितना आप बिना दर्द के कर पा रहे हैं।
यह मुद्रा पेट को संकुचित करती है, इसलिए भरे हुए पेट के साथ इस आसन का अभ्यास ना करें।
अगर आपको दमा या डायरिया जैसी समस्याएं हैं तो पश्चिमोत्तानासन ना करें।
अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगाएं।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.