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गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शारीरिक परेशानियां और उपाय


गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शारीरिक परेशानियां और उपाय
 (pregnancy ke 2nd trimester me sharirik pareshaniya aur upay)
गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में आप पहली तिमाही से बेहतर महसूस करने लगेंगी। इस दौरान आपको पहली तिमाही में होने वाली जी मिचलाने (जी घबराने) और उल्टी आने (vomiting in hindi) की समस्या कम हो जाएगी, लेकिन प्रेगनेंसी के बढ़ते समय में आपको कुछ नई समस्याएं और शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए नज़र डालते हैं कि गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में होने वाले शारीरिक बदलावों और समस्याओं पर और जानिए इनके कारण और उपाय - गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में महिला को पीठ के निचले हिस्से में दर्द और पेट में दर्द होने की समस्या बनी रहती है, क्योंकि दूसरी तिमाही से बच्चा बढ़ना शुरू हो जाता है जिसके चलते गर्भाशय का भी विकास होना शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में राउंड लिगमेंट (round ligament in hindi) (पेट के निचले हिस्से में मौजूद एक नाज़ुक उत्तक) में खिंचाव आने लगता है, यह ऐसा दर्द है जो आपके पेट में नीचे की ओर होता है। अगर आपको दर्द के साथ ब्लीडिंग नहीं हो रही है तो चिंता की बात नहीं है। यह दर्द आपके हिलने-डुलने के बाद घट या बढ़ सकता है। अगर आप इस दर्द को सहन नहीं कर पा रही हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में पेट और पीठ दर्द के उपाय (back pain and stomach pain treatment in pregnancy 2nd trimester) सामान्य रूप से पेट और पीठ दर्द होने पर आराम करने से आपको राहत मिलेगी। आप गर्भावस्था में पेट और पीठ दर्द से राहत पाने के लिए नीचे दिए गए तरीके अपना सकती हैं -
इस दर्द में आप बाम आदि का इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह प्लेसेंटा के ज़रिये आपके शिशु तक भी पहुंच सकता है जो उसके लिए हानिकारक है। अगर आप बाम का इस्तेमाल करना चाहती हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से संपर्क कर लें।
पेट के जिस हिस्से में दर्द हो, उसके दूसरी तरफ होकर लेट जाएं और पूरी तरह आराम करें।
हल्के गर्म पानी से नहाएं, आपको आराम मिलेगा।
दर्द वाले हिस्से पर गर्म पानी की बोतल से सेक करें। इसके अलावा आप एक सूती कपड़े को प्रेस से गर्म करके भी सेक कर सकती हैं।
पीठ दर्द के लिए मेटरनिटी सपोर्ट बेल्ट (maternity support belt in hindi) का भी प्रयोग कर सकती हैं। ध्यान रहे कि आप प्रेगनेंसी में होने वाले पीठ दर्द में बाम ना लगाएं।

2. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में पैरों में दर्द और सूजन क्यों होती है? (pregnancy ke 2nd trimester me pairo me dard aur sujan kyu hoti hai)जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती है आपकी शारीरिक समस्या भी बढ़ती जाती हैं। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में आपको पैरों में सूजन और दर्द की समस्या होने लगती है और यह समस्या गर्भावस्था के अंतिम चरण तक चलती है।
अगर आपका वज़न सामान्य से ज्यादा है तो पैरों में दर्द और सूजन की शिकायत बनती है।
गर्भाशय के बढ़ने से आपके निचले हिस्से पर भार पड़ता है जिस कारण पैरों में सूजन और दर्द होता है।
अगर आप पानी कम पीती हैं तो भी पैरों में सूजन आती है और दर्द होता है।
खून की कमी (anemia in hindi) होने से भी पैरों में सूजन आती है।
कैल्शियम (calcium in hindi) और मैग्नीशियम (magnesium in hindi) की मात्रा कम होने से भी पैरों में दर्द और सूजन आती है।


गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में पैरों में दर्द और सूजन कम करने के उपाय (pregnancy ke 2nd trimester me pairo me dard aur sujan kam karne ke upay)
पैरों में खिंचाव लाएं। इसके लिए अपने पैर को सीधा करें और अपनी टखनों और पैर की उंगलियों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर खींचे। हालांकि शुरुआत में ऐसा करने से दर्द होगा लेकिन इससे धीरे-धीरे पैरों के दर्द में आराम मिलेगा।
जहां दर्द और सूजन हो वहां मालिश कराएं।
ज्यादा देर के लिए ना बैठी रहें ना खड़ी रहें। समय-समय पर अपनी पॉज़िशन बदलती रहें।
गर्म पानी से सिकाई करने पर भी आराम मिलेगा।
खूब सारा पानी पिएं (रोज़ाना 10 से 11 ग्लास)।
खून की कमी से बचने के लिए आयरन युक्त भोजन खाएं जैसे पालक, सेब आदि।
वहीं कैल्शियम के लिए आप दूध पिएं और इसके अलावा डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम की गोलियां भी ले सकती हैं।



3. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में योनि से सफेद पानी आना (pregnancy ke 2nd trimester me yoni se safed pani aana)हालांकि गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में योनि से सफेद पानी (white discharge in hindi) आना नुकसानदायक नहीं है। दूसरी तिमाही के अंत तक यानी गर्भावस्था के छठे महीने में आपको योनि स्राव हो सकता है। इसे ल्यूकोरिया (leukorrhea in hindi) कहते हैं। यह अंडे के सफेद भाग की तरह दिखता है। अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें।


4. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में सांस क्यों फूलता है? (pregnancy ke 2nd trimester me sans kyun foolta hai?)गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में सांस फूलने की समस्या काफी देखने को मिलती है। यह वज़न बढ़ने और हार्मोनल बदलावों के चलते होता है। इसके अलावा अगर गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हैं तो भी गर्भावस्था के दौरान सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। सांस में कमी और थकान आयरन की कमी होने (anemia in hindi) का भी संकेत हो सकता है।
इस समस्या से राहत पाने के लिए व्यायाम करना बेहतर विकल्प है। व्यायाम करने से आपको ऑक्सिजन मिलेगी।
ज्यादा काम ना करें, इससे आपका सांस और फूलेगा और थकान बढ़ेगी।
ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
आयरन युक्त भोजन खाएं जैसे पालक, सेब, दालें आदि।पढ़े - गर्भावस्था में शुगर (गर्भकालीन मधुमेह) होने से बच्‍चे पर क्या असर पड़ता है? (pregnancy me sugar hone se bachche par kya asar padta hai?) 5. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में वज़न क्यों बढ़ता है? (pregnancy ke 2nd trimester me vajan kyun badhta hai?)गर्भावस्था में वज़न बढ़ना दूसरी तिमाही से ही शुरू होता है क्योंकि इस तिमाही से बच्चे का विकास होना शुरू हो जाता है। सामान्य तौर पर पूरी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का 12 से 16 किलो के आसपास वज़न बढ़ता है। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में हर महीने आपका एक से दो किलो वज़न बढ़ना सामान्य है। अगर आप प्रेगनेंट होने से पहले मोटापे से ग्रस्त नहीं हैं तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। अगर आपका वज़न बहुत बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें।


गर्भावस्था के दौरान गर्भवती का वजन कितना बढ़ना चाहिए? (pregnancy me garbhvati ka vajan kitna badhna chahiye)
गर्भवती होने से पहले जिस महिला का वज़न सामान्य रहा हो, गर्भावस्था के दौरान उसका वज़न औसत रूप से साढ़े ग्यारह किलोग्राम से सोलह किलोग्राम तक बढ़ना चाहिए।
गर्भवती होने से पहले जिस महिला का वज़न कम रहा हो, गर्भावस्था के दौरान उसका वज़न औसत रूप से साढ़े बारह किलोग्राम से साढ़े अठारह किलोग्राम तक बढ़ना चाहिए।
गर्भवती होने से पहले जिस महिला का वजन ज्यादा रहा हो, गर्भावस्था के दौरान उसका वजन औसत रूप से करीब सात किलोग्राम से बारह किलोग्राम तक बढ़ना चाहिए।

गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में सामान्य से ज्यादा वज़न बढ़ने के नुकसान (pregnancy ke 2nd trimester me zyada vajan badhne ke nuksan) अगर गर्भावस्था के दौरान आपका ज़रूरत से ज्यादा वज़न बढ़ा हुआ हो तो आपको यह समस्याएं हो सकती हैं -
प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी (high BP during pregnancy in hindi) यानी जेस्टेशनल हाईपरटेंशन (Gestational hypertension in hindi)।
शुगर (sugar) की समस्या (Gestational diabetes in hindi)।
सिज़ेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in hindi) की संभावना बढ़ना।
गर्भपात का खतरा (miscarriage in hindi)।
डिलीवरी के दौरान ज्यादा तकलीफ होना।
बढ़ते वज़न के कारण आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में वज़न को कैसे ठीक रखें? (pregnancy ke 2nd trimester me vajan control kaise kare) यूं तो गर्भावस्था के दौरान वज़न बढ़ना सामान्य है और ज़रूरी भी है लेकिन हद से ज्यादा वज़न बढ़ना नुकसानदायक ही होता है। आप गर्भावस्था के दौरान वज़न को ऐसे नियंत्रित रख सकती हैं -
वज़न नियंत्रित रखने के लिए आप अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और खाने को एक बार में इकट्ठा ना खाकर थोड़ा-थोड़ा चार से पांच बार में खाएं।
जितना हो सके तरल पदार्थ लें, जैसे फलों का जूस, नारियल पानी, नींबू पानी, पानी आदि।
जंक फूड जैसे चिप्स, बिस्किट, केक आदि से दूरी बना लें।
डाइटिंग ना करें बल्कि प्रोटीन (दालें), कैल्शियम (दूध, पनीर), आयरन (हरी सब्जियां जैसे पालक आदि) से भरपूर पौष्टिक खाना खाएं।
डॉक्टर की देखरेख में उचित व्यायाम करें। इसमें सुबह-शाम की सैर (morning walk and evening walk) आपको फायदा पहुंचाएगी।


6. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में सोने में परेशानी क्यों होती है? (pregnancy ke 2nd trimester me sone me pareshani kyun hoti hai?)एक ओर जहां पहली तिमाही में जी घबराना, उल्टी आना (vomiting in hindi) और हार्मोनल परिवर्तन के चलते (hormonal changes in pregnancy in hindi) नींद में समस्या होती थी तो वहीं गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में काफी हद तक यह समस्या खत्म हो जाती है लेकिन नींद ना आने की समस्या अब भी बरकरार रहती है। जानिए दूसरी तिमाही में नींद ना आने के क्या कारण हैं -
बढ़ते पेट के कारण असुविधा होना।
पैरों में दर्द और ऐंठन के कारण।
सीने में (heartburn in hindi), पेट में, गले में जलन और कब्ज़ के कारण।
ब्लैडर (मूत्राशय) पर गर्भाशय का दबाव पड़ने के कारण जिससे रात में कई बार पेशाब (frequent urination in pregnancy in hindi) लगता है और नींद टूटती है।


गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में सोने के टिप्स (pregnancy ke 2nd trimester me son ke tips)
कमरे का तापमान - अपने कमरे के तापमान पर ध्यान दें। हमेशा वही तापमान रखें जो आपको आराम दे।
दूध पीकर सोएं - सोते समय गर्म दूध पीकर सोएं, इससे आपको अच्छी नींद आएगी।
सोने की स्थिति - दाईं ओर करवट लेकर सोएं। आप चाहें तो पैरों के बीच तकिया भी लगा सकती हैं।


7. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में गैस और एसीडिटी क्यों होती है? (pregnancy ke 2nd trimester me gas aur acidity kyun hoti hai?)अक्सर प्रेगनेंसी में गैस और एसीडिटी की समस्या बनी रहती है। यह समस्या शरीर में होने वाले बदलावों के चलते होती हैं। इसके अलावा यह समस्या तनाव के कारण भी होती है।


गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में गैस और एसीडिटी से बचने के उपाय (pregnancy ke 2nd trimester me gas aur acidity se bachne ke upay) अगर आपको गैस, एसिडिटी (acidity during pregnancy in hindi), पेट फूलने जैसी समस्या होती है तो गैस बनाने वाले भोजन खाना बंद कर दें जैसे पत्ता गोभी, कोल्ड ड्रिंक आदि। ज्यादा तैलिये और मसालेदार खाना ना खाएं। आप डॉक्टर से एक लिस्ट या सूची बनवा लें कि आपको क्या नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा आप उचित व्यायाम करें।


8. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में त्वचा का रंग क्यों बदलता है? (pregnancy ke 2nd trimester me twacha ka rang kyun badalta hai?)एस्ट्रोजेन हार्मोन (estrogen hormone in hindi) के स्तर में बढ़ोत्तरी होने के कारण आपकी त्वचा के रंग में भी बदलाव होने लगता है। यह बदलाव दूसरी तिमाही की शुरुआत यानी गर्भावस्था के चौथे महीने में नज़र आने लगेगा। इस दौरान आपको स्किन पर यह बदलाव नज़र आएंगे -
अगर आपके चेहरे पर तिल और झाइयां हैं तो वो अधिक गहरे रंग के हो जाएंगे।
गाल, माथे नाक पर ये झाइयां बढ़ सकती हैं।
आपके प्राइवेट पार्ट भी काले होने लगेंगे।त्वचा संबंधी इन बदलावों को रोकने के लिए आप प्रेगनेंसी सेफ सन्सक्रीन (pregnancy safe sunscreen in hindi) का प्रयोग करें। इसके अलावा आप डॉक्टर से भी सलाह ले सकती हैं।

9. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में नाक से खून क्यों आता है? (causes of nose bleeding during 2nd trimester in pregnancy)गर्भावस्था के दौरान नाक से खून आने की समस्या कई महिलाओं में देखी जाती है। पांच में से करीब तीन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान नाक से खून (नकसीर) आता है। ऐसा हार्मोनल परिवर्तन के चलते (hormonal changes in pregnancy) होता है क्योंकि शरीर में रक्त संचार (blood circulation in hindi) बढ़ जाता है। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में नाक से खून रोकने के उपाय (pregnancy ke 2nd trimester me naak se khoon rokne ke upay)
गर्भावस्था में नाक से खून आने पर आप सिर को बिल्कुल सीधा रखें।
नाक को कुछ समय के लिए मुलायम सूती कपड़े से दबाएं। इस दौरान आप मुंह से सांस लें।
भारी सामान ना उठाएं और ज़ोर लगाने वाला काम ना करें।
गर्म तासीर वाली चीज़े ना खाएं जैसे खजूर, सूखे फल आदि।अगर 20 मिनट तक नाक दबाए रखने के बाद भी खून बहना ना रुके तो डॉक्टर से संपर्क करें।


10. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में बवासीर क्यों होती है? (causes of piles during 2nd trimester of pregnancy)गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में महिला को बवासीर (piles in hindi) की समस्या होते भी देखा गया है। गर्भावस्था में बवासीर कब्ज़ के कारण (constipation in hindi) होती है। इसमें एनस (anus in hindi) के पास मस्से हो जाते हैं जिनमें आपको खुजली होती है। गंभीर समस्या में इन मस्सों से खून भी आने लगता है। गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में बवासीर से बचने के उपाय (pregnancy ke 2nd trimester me bawasir se bachne ke upay) अगर आपको गर्भावस्था में बवासीर (piles in hindi) की समस्या हो रही है तो आप इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें -
जब भी आपको मल त्यागना हो तो इसे कभी रोकें नहीं। वहीं अगर आपको मल नहीं आ रहा तो ज़बरदस्ती प्रैशर ना लगाएं। इससे समस्या और बढ़ सकती है।
दिन में 3 से 4 बार 5-10 मिनट के लिए कमर तक गुनगुने पानी में बैठें। आपको आराम मिलेगा।
आप ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें (दिन में कम से कम 10 ग्लास पानी)।
रेशेदार भोजन (fiber in hindi) खाएं जिससे कब्ज़ नहीं होगी और बवासीर जल्दी दूर होगी जैसे - दलिया, हरी सब्जियां, फल आदि।
योगा, स्ट्रैचिंग और एक्सरसाइज़ करें, बवासीर में आराम मिलेगा।ध्यान दें - अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी ना करें।


11. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में ब्लीडिंग क्यों होती है? (causes of bleeding in 2nd trimester of pregnancy)गर्भावस्था के शुरुआती समय में अगर थोड़ी बहुत ब्लीडिंग हो तो सामान्य है लेकिन गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में ब्लीडिंग होने पर लापरवाही ना करें। दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने के निम्न कारण हो सकते हैं -
प्लेसेंटा के अचानक से टूट जाने पर।
प्लेसेंटा प्रीविया (placenta previa) के कारण - यह स्थिति तब आती है जब प्लेसेंटा गर्भाशय में कम जगह बना पाता है और जब यह जन्म देने वाली नलिका (birth canal in hindi) को पूरी तरह घेर लेता है। हालांकि यह बहुत कम महिलाओं के साथ होता है।ऐसी स्थिति होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।


12. गर्भावस्था के चौथे, पांचवे और छठे महीने में पेट टाइट क्यों होता है? (pregnancy ke 2nd trimester me pet tight kyun hota hai?)ब्रैक्‍सटन हिक्‍स संकुचन (Braxton hicks contraction) में आपको अपने गर्भाशय की मांसपेशियां कड़ी होती महसूस होंगी। यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली छोटी-छोटी ऐंठन है जिसमें आपको पेट टाइट होने की समस्या होगी। यह समस्या आपको गर्भावस्था के 16वें सप्ताह से होनी शुरू होती है। इस समस्या के दौरान आप जब अपने पेट पर हाथ लगाएंगी तो आप जान पाएंगी कि आपका गर्भाशय कितना कड़ा हो गया है। यह संकुचन आमतौर पर 30 सेकेंड तक रहता है, जिससे किसी तरह की हानि नहीं होती। आपको बता दें कि ब्रैक्‍सटन हिक्‍स संकुचन और प्रसव के संकुचनों (labour pain in hindi) में अंतर होता है। जानिए ब्रैक्सटन हिक्स और लेबर पेन में अंतर ब्रैक्‍सटन हिक्‍स संकुचन (Braxton hicks contraction) आमतौर पर कभी-कभी होते हैं और एक घंटे में एक या दो से ज्यादा बार नहीं होते। वहीं लेबर पेन (labour pain in hindi) ज्यादा देर तक होते हैं और जो ज्यादा दर्द भरे होते हैं। प्रसव संकुचन बार-बार होते हैं। तो ये थी कुछ समस्याएं जो आपको गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में देखने को मिल सकती हैं। लेकिन आप इन समस्याओं से घबराएं नहीं बल्कि ऊपर बताई गई बातों को समझकर और इनका सही उपचार कराकर एक स्वस्थ प्रेगनेंसी का लुत्फ उठाएं।

13. गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में सर्दी-खांसी क्यों होती है? (causes of cough and cold in pregnancy 2nd trimester)गर्भावस्था में सर्दी-खांसी होना आम है। इसका कारण है इस दौरान आपकी बीमारियों से लडने की शक्ति कम पड़ना। गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में सर्दी-खांसी के घरेलू उपाय (pregnancy ke 2nd trimester me sardi jukham ke gharelu upay)
अदरक के रस में शहद डालकर खाएं।
गर्म पानी पीने से राहत मिलेगी।
नाक बंद होने पर गर्म पानी की भांप लें।
इसके अलावा अगर आपको ज्यादा समस्या हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें।14. गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में मसूड़ों और दांत से खून आना (pregnancy ke 2nd trimester me teeth aur gums se khoon aana)गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में मसूड़ों और दांत (teeth and gum problem in pregnancy) से खून आने की समस्याएं भी कई महिलाओं में देखी जाती हैं। यह समस्या हार्मोन में बदलाव के कारण होती है जिससे मसूड़े काफी संवेदनशील हो जाते हैं। हालांकि यह समस्या बच्चे के जन्म के बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए आप मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करें, मसूड़ों पर उंगली से हल्की-हल्की मालिश करें। ज्यादा समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें। तो ये थीं गर्भावस्था के चौथे, पांचवें और छठे महीने में होने वालीं कुछ शारीरिक समस्याएं जिनका आप सही समय पर इलाज आसानी से कर सकती हैं। लेकिन इसी के साथ अगर यह समस्याएं आपको ज्यादा बढ़ती नज़र आएं तो अपने डॉक्टर से सही समय पर इलाज कराएं और स्वस्थ गर्भावस्था का लुत्फ उठाएं।

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