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वर्कआउट से पहले और बाद में जरूर करें स्ट्रेचिंग


वर्कआउट से पहले और बाद में जरूर करें स्ट्रेचिंग, 
सेहत के लिए होता है अच्छा
वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों को आराम करने के लिए समय मिलता है। इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को पोषण मिलता है और दर्द से आराम मिलता है।
स्ट्रेचिंग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ, जानें यहां।
लचीलेपन में सुधार, चोट लगने से बचने के लिए एक्सरसाइज से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग की जाती है ताकि आपको किसी भी तरह की शारीरिक समस्या ना हो। अपने रोजाना के वर्कआउट में स्ट्रेचिंग को शामिल करने से आपको कई स्वास्थ्य लाभ भी होंगे और शरीर भी सही तरीके से काम करता है। जानें, स्ट्रेचिंग करने से आपको क्या लाभ हो सकते हैं।

स्ट्रेचिंग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

स्टैमिना बढ़ाए
स्ट्रेचिंग की मदद से आप स्टैमिना बढ़ा सकते हैं। स्ट्रेचिंग की मदद से मांसपेशियां ढीली होती हैं, जिसकी मदद से मांसपेशयों की थकावट दूर होकर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। आप जितनी देर एक्सरसाइज करते हैं उतनी ही एनर्जी बर्न होती है और आप थक जाते हैं लेकिन स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियां थकती नहीं हैं और उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे सहनशीलता और स्टैमिना बढ़ता है।

चोट कम लगती है
स्ट्रेचिंग की मदद से मांसपेशियों को पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द कम होता है और आप जल्दी रिकवर कर लेते हैं। इसकी वजह से चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।

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एनर्जी लेवल में सुधार
अगर आपका सुबह जल्दी उठने का मन नहीं है तो आप सिर्फ स्ट्रेचिंग करके भी खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। इससे भी आपकी एनर्जी बूस्ट होती है। थकावट के दौरान मांसपेशियां भी टाइट हो जाती हैं जिससे आलस महसूस होता है इसलिए एनर्जी लेवल में सुधार लाने के लिए स्ट्रेचिंग करें।

मांसपेशियों में कम दर्द
वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों को आराम करने के लिए समय मिलता है। इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को पोषण मिलता है और दर्द से आराम मिलता है।

ब्लड सर्कुलेशन में सुधार
स्ट्रेचिंग रक्त संचार को बेहतर बनाता है। मांसपेशियों में ब्लड फ्लो बढ़ाना जरूरी होता है। यह ना सिर्फ वर्कआउट के बाद के दर्द को कम करता है बल्कि समय भी कम लेता है। यह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन की वजह से शरीर के अंग बेहतर तरीके से कार्य कर पाते हैं।

रात में सोने से पहले करेंगे ये 4 स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, तो थकान दूर होने के साथ नींद भी आएगी अच्छी
सोने से पहले स्ट्रेचिंग करने से इसका आपके शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह आपके पूरे दिन के तनाव को दूर करके सोते समय आपके शरीर और दिमाग को शांत रखने में मदद करता है।
रात में सोने से पहले स्ट्रचिंग करने से इसका आपके शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।


तनावपूर्ण मांसपेशियों को आराम दिलाने का सबसे अच्छा उपाय स्ट्रेचिंग है। इसी तरह पूरे दिन की थकावट को सोने से पहले कुछ स्ट्रेचिंग करके दूर किया जा सकता है। इससे ना केवल आपको आराम मिलता है बल्कि यह मांसपेशियों को लचीला बनाने में मदद करता है। सोने से पहले स्ट्रेचिंग करने से इसका आपके शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह आपके पूरे दिन के तनाव को दूर करके सोते समय आपके शरीर और दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। जानें, कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के बारे में जो सोने से पहले करने से नींद अच्छी आती है।

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स्पाइनल ट्विस्ट
यह स्ट्रेच एक्सरसाइज कमर के निचले हिस्से को आराम दिलाने में मदद करती हैं जिसे आसानी से बेड पर किया जा सकता है। इसे करने के लिए बेड पर लेट जाएं। उसके बाद अपने दोनों घुटने सीने के पास लेकर आएं और अब उन्हें शरीर के दाईं तरफ क्रॉस कर दें। अब इसके बाद अपने हाथों को टी पोजीशन में फैलाएं और अपने सिर को बाईं तरफ घुमाएं। इस पोजीशन में 30 सेकेंड तक रहें। उसके बाद अपने घुटनों को उठाएं और दूसरी तरफ करें। हेल्दी जीवन जीने के लिए नियमित करें वर्कआउट, जानें इसके ये 13 फायदे

नी हग स्ट्रेच
यह कमर के लिए एक साधारण और प्रभावी स्ट्रेच है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को फैला लें। अब अपने दाएं पैर को सीने के पास लाएं और दाएं पैर को आराम करने दें। हाथों की मदद से घुटने को सीने के जितने पास ला सकें लेकर आएं। यह आपके कंधे, गर्दन से तनाव दूर करने में मदद करता है। इस पोजीशन में 30 सेकेंड तक रहें। उसके बाद इसी तरह दाएं पैर से करें।

यह एक्सरसाइज कूल्हे और कमर के निचले हिस्से से तनाव दूर करने में मदद करती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें। उसके बाद हाथों की मदद से पंजे को पकड़ लें। इसके बाद घुटनों को अपनी छाती की साइड में फर्श लाएं। इससे कंधों और सिर को आराम मिलता है। इस पोजीशन में 30 सेकेंड तक रहें।

कोबरा
यह स्ट्रेचिंग पेट, छाती और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाती है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं और अपने हाथों को इस तरह से फैलाए जैसे पुश-अप कर रहे हों। इसके बाद अपने हाथों को छाती के लेवल पर रखें और अपने धड़ को ऊपर उठाएं। जैसे ही आप अपने धड़ को उठाएं तो अपनी कोहनी को थोड़ा से मोड़ लें। यह आपकी गर्दन और छाती की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मदद करता है। इस पोजीशन में 30 सेकेंड तक रहें और उसके बाद अपने धड़ को नीचे कर लें।





खतरनाक है 24 मिनट से ज्‍यादा मोबाइल का इस्‍तेमाल, प्रजनन क्षमता हो सकती है प्रभावित
मोबाइल और उनके टॉवर से निकलने वाली रेडिएशन प्रजनन क्षमता को पहुंचा रहेे हैंं नुकसान।
मोबाइल और उनके टॉवर से निकलने वाली रेडिएशन प्रजनन क्षमता को पहुंचा रहेे हैंं नुकसान।© 

दिन भर मोबाइल पर बात करने वाले या चैट में बिजी रहने वाले लोगों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। तमाम शोध इस बात को पुख्‍ता कर चुके हैं कि मोबाइल और उनके टॉवर से निकलने वाली रेडिएशन पुरुषों में स्‍पर्म काउंट कम करती है और महिलाओं में प्रजनन क्षमता को कम कर देती है। सिर्फ इतना ही नहीं मोबाइल रेडिएशन से ब्रेन ट्यूमर का भी खतरा हो सकता है।
क्‍या कहते हैं आंकड़े
डब्ल्यूएचओ की एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा है।
हंगरी में साइंटिस्टों ने पाया कि जो युवक बहुत ज्यादा सेल फोन का इस्तेमाल करते थे, उनके स्पर्म की संख्या कम हो गई।
जर्मनी में हुई रिसर्च के मुताबिक जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर के एरिया में रह रहे थे, उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना बढ़ गई। 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है।
केरल में की गई एक रिसर्च के अनुसार सेल फोन टॉवरों से होनेवाले रेडिएशन से मधुमक्खियों की कमर्शल पॉप्युलेशन 60 फीसदी तक गिर गई है।
सेल फोन टावरों के पास जिन गौरेयों ने अंडे दिए, 30 दिन के बाद भी उनमें से बच्चे नहीं निकले, जबकि आमतौर पर इस काम में 10-14 दिन लगते हैं।
इंटरफोन स्टडी इस बात की ओर इशारा करती है कि लंबे समय तक मोबाइल के इस्तेमाल से ट्यूमर होने की आशंका बढ़ जाती है।
रेडिएशन के जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल रेडिएशन से सिरदर्द, सिर में झनझनाहट, लगातार थकान महसूस करना, चक्कर आना, डिप्रेशन, नींद न आना, आंखों में ड्राइनेस, काम में ध्यान न लगना, कानों का बजना, सुनने में कमी, याददाश्त में कमी, पाचन में गड़बड़ी, अनियमित धड़कन, जोड़ों में दर्द आदि की समस्‍या हो सकती है। लगातार मोबाइल इस्‍तेमाल करने वालें लोगों में इनमें से कोई न कोई समस्‍या जरूर देखने में आती है।
क्‍या कहते हैं रिसर्च

रिसर्च कहते हैं कि मोबाइल रेडिएशन से लंबे समय के बाद प्रजनन क्षमता में कमी, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और मिस-कैरेज की आशंका भी हो सकती है। दरअसल, हमारे शरीर में 70 फीसदी पानी है। दिमाग में भी 90 फीसदी तक पानी होता है। यह पानी धीरे-धीरे बॉडी रेडिएशन को अब्जॉर्ब करता है और आगे जाकर सेहत के लिए काफी नुकसानदेह होता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल से कैंसर तक होने की आशंका हो सकती है। इंटरफोन स्टडी में कहा गया कि हर दिन आधे घंटे या उससे ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल करने पर 8-10 साल में ब्रेन ट्यूमर की आशंका 200-400 फीसदी बढ़ जाती है।
रेडिएशन के प्रकार
माइक्रोवेव रेडिएशन उन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स के कारण होता है, जिनकी फ्रीक्वेंसी 1000 से 3000 मेगाहर्ट्ज होती है। माइक्रोवेव अवन, एसी, वायरलेस कंप्यूटर, कॉर्डलेस फोन और दूसरे वायरलेस डिवाइस भी रेडिएशन पैदा करते हैं। लेकिन लगातार बढ़ते इस्तेमाल, शरीर से नजदीकी और बढ़ती संख्या की वजह से मोबाइल रेडिएशन सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। मोबाइल रेडिएशन दो तरह से होता है, मोबाइल टावर और मोबाइल फोन से।
महिलाओं और बच्‍चों को है ज्‍यादा खतरा

रेडिएशन सभी के लिए नुकसानदेह है लेकिन बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों और मरीजों को इससे ज्यादा नुकसान हो सकता है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स ऐडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि बच्चों और किशोरों को मोबाइल पर ज्यादा वक्त नहीं बिताना चाहिए और स्पीकर फोन या हैंडसेट का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि सिर और मोबाइल के बीच दूरी बनी रहे। बच्चों और और प्रेगनेंट महिलाओं को भी मोबाइल फोन के ज्यादा यूज से बचना चाहिए।
24 मिनट से ज्‍यादा है बात करना जोखिम भरा
दिन भर में 24 मिनट तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल सेहत के लिहाज से ठीक है। यहां यह भी अहम है कि आपके मोबाइल की SAR वैल्यू क्या है? ज्यादा SAR वैल्यू के फोन पर कम देर बात करना कम SAR वैल्यू वाले फोन पर ज्यादा बात करने से ज्यादा नुकसानदेह है। लंबे वक्त तक बातचीत के लिए लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल रेडिएशन से बचने का आसान तरीका है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि ऑफिस या घर में लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करें। कॉर्डलेस फोन के इस्तेमाल से बचें।

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