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जानें फिटनेस के लिए कितना फायदेमंद है नींबू का छिलका


जानें फिटनेस के लिए कितना फायदेमंद है नींबू का छिलका
अक्सर आपने नींबू के रस से नींबू पानी बनाकर पीते हैं और उसका छिलका फेक देते हैं. पर नींबू का छिलका हमारी हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद है इसके बारे में आज हम बताएंगे.

हेल्थ और फिटनेस को बनाए रखने के लिए आजकल हम कई तरह के एक्सपेरिमेंट करते हैं, लेकिन घर में ही मौजूद कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमारी हेल्थ और फिटनेस को बनाए रखने में मदद करती है. अक्सर आपने नींबू के रस से नींबू पानी बनाकर पीते हैं और उसका छिलका फेक देते हैं. पर नींबू का छिलका हमारी हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद है इसके बारे में आज हम बताएंगे. नींबू के छिलके बहुत गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं. तो आइए जानते हैं नींबे के छिलके के हेल्थ के लिए फायदे…

कैंसर से होता है बचाव

कैंसर से बचने के लिए नींबू का छिलका बेहद फायदेमंद है, इस बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. नींबू के छिलके कैंसर से बचाने और उसके इलाज में काफी मददगार होते हैं. इसमें मौजूद तत्त्व कैंसर सेल्स से लड़ने में मददगार होते हैं.


कमर के एकस्ट्रा इंच घटाने में है मददगार

नींबू के छिलके वजन घटाने में भी मदद करते हैं. इनमें पेक्टिन होता है, जो बौडी में जमा अतिरिक्त चर्बी को दूर रखता है. तो अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो नींबू के छिलकों का सेवन जरूर करें.

कौलेस्ट्रौल घटाए नींबू का छिलका

यह कौलेस्ट्रौल का स्तर कम करने में भी मदद करते हैं. बौडी में कौलेस्ट्रौल की अधिक मात्रा दिल को नुकसान पहुंचाती है.

स्किन को रखे फ्रेश

झुर्रियों, एक्ने, पिग्मेंटेशन और गहरे निशानों से बचाने में नींबू के छिलकों का कोई सानी नहीं. इसमे मौजूद फ्री-रेडिकल्स इस प्रक्रिया में काफी अहम किरदार निभाते हैं. इसके साथ ही इसमं ऐंटि-औक्सिडेंट्स स्किन को डिटौक्सीफाई करते हैं, जिससे आपका रूप निखरता है.

हड्डियों की बढ़ाए मजबूती

नींबू के छिलके हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करते हैं. इसमें उच्च मात्रा में कैल्शियम और विटमिन सी होता है. इसके अलावा यह हड्डियों से जुड़ीं बीमारियों जैसे औस्टियोपोरोसिस, रहेयूमेटौयड अर्थराइटिस और इंफ्लेमेटरी पोलीअर्थराइटिस से भी बचाने में मदद करता है.


बौडी से टौक्सिन हटाए
हमारे बौडी में कई तरह के टौक्सिन होते हैं. ये पदार्थ न केवल हमारे बौडी को अंदर से कमजोर बनाते हैं, बल्कि साथ ही साथ हमारे भीतर ऐल्कोहल और अन्य नुकसानदेह खाद्य पदार्थों के सेवन की लालसा भी बढ़ाते हैं. नींबू के छिलके अपने खट्टे स्वाद और स्वभाव के कारण, इन विषैले पदार्थों को दूर करने में मदद करते हैं, जो हमारी हेल्थ और फिटनेस के लिए बेहद फायदेमंद होता है.



जानें महिलाओं में होने वाले 10 यौन रोगों के बारे में
महिलाओं में यौन रोग होना कोई नई बात नहीं महिलाओं में यौन रोग पुरुषों की तुलना में अधिक होने की संभावना होती है.

महिलाओं में यौन रोग होना कोई नई बात नहीं महिलाओं में यौन रोग पुरुषों की तुलना में अधिक होने की संभावना होती है. यौन रोगों के संक्रमण, विशेष रूप से जननांग में खुजली या यू टी आई, बदबू,सफेद दाग, फंगस इंफेक्शन आदि महिलाओं में आम यौन संचारित रोग ( एसटीडी ) है.

कारण 

यौन रोग का मुख्य कारण असुरक्षित यौनसंपर्क और जानकारी का अभाव ,इंजेक्शन व स्तनपान आदि हैं . इसके अलावा सेक्स से संबंधित कई बातें हैं जो इन रोगों को जन्म देती है. आइए जानते हैं वे कौन कौन सी बिमारियां हैं.

1. क्लैमिडिया 

महिलाओं में क्लैमिडिया रोग, क्लैमिडिया ट्रैकोमेटिस नामक जीवाणु से होता है.इसके लक्षण हैं-
पेशाब के दौरान दर्द
निचले पेट में दर्द
वैजाइना डिस्चार्ज
दर्दनाक संभोग
मासिक धर्म चक्रों के बीच रक्तस्राव

2. गोनोरिया 

यह रोग बैक्टीरिया से होता है. जो कि शरीर में बहुत तेजी से फैलता है. जिसकी वजह से गला, यरिनल ट्रैक, वैजाइना आदि संक्रमित हो जाते हैं. इसके मुख्य लक्षण हैं
वैजाइना से ब्लड डिस्चार्ज
यूरिनेशन में दर्द
लंबे समय तक रक्त स्त्राव
वैजाइना और एनस में खुजली

3. स्कैबीज 

यह रोग यौन संबंधों या एक दूसरे के संपर्क के कारण या संक्रमित व्यक्ति के कपड़े या बिस्तर का प्रयोग करने से भी फैलता है. इसके मुख्य लक्षण हैं–
कलाइयों, उंगलियों के बीच दाने और खुजली
गुप्तांगों के आस-पास मुंहासे जैसे खुजली वाले दाने

4. सिफि़लिस 

इस संक्रमण का कारण ट्रेपेनेमा पैलिडम सिफलिस वायरस है. महिलाओं में यह संक्रमण जननांग के बाहरी हिस्से, सर्विक्स और गुदा पर होता हैं.इसके लक्षण हैं
चकत्ते
मुंह, एनस या वैजाइना में सूजन
बाद के चरणों में, यह नर्वज़ और अंगों को हानि

5. जेनिटल वार्ट्स 

महिलाओं में आमतौर पर पाए जाना वाला यह रोग एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस है. इस रोग में महिला के जननांगों पर मस्से हो जाते है. जो कि त्‍वचा के रंग के ही होते हैं. इनमें खुजली रहती है लेकिन छूने पर दर्द नहीं होता.एचपीवी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का रूप ले सकता है.इनके लक्षण है –
वैजाइना के ऊपरी या अंदर, सर्विक्स और एनस पर दाने
या पीरियड के समय दर्द
खुजली
सेक्स के समयरक्त स्त्राव

5. जेनिटल हर्पीज 

इस रोग में संक्रमण छालों या फफोलों की तरह दिखता हैं. इस संक्रमण से ग्रसित महिला को दौर में बुखार थकान पीठ के निचले हिस्से में दर्द, सूजन होता है. लक्षण शामिल हैं-

गुदा, जननांग और अन्य क्षेत्रों में छोटे लाल दाने या छाले
जननांग क्षेत्र, जांघों और नितंबों के आसपास खुजली या दर्द

ये भी पढ़ें- हैल्थ से है प्यार तो न करें कौफी से इनकार

6. बैक्टीरियल वेजिनोसिस 

जब महिला के वैजाइना में जीवाणु बढ़ने लगते हैं तो बैक्टीरियल वेजिनोसिस की समस्‍या होती है. आमतौर पर इस रोग से ग्रसित महिला में कोई लक्षण नज़र नहीं आते क्योंकि इस तरह के जीवाणुओं के बढ़ने से कोई नुकसान नहीं होता. इस के लक्षण हैं-
योनि से सफेद या पीला स्राव
तेज बदबू,
यूरीनेशन में दर्द,
वैजाइना के बाहरी भाग में खुजली, लाली और सूजन

7. कैन्डिडा 

यह एक यीस्ट संक्रमण हैं . इस संक्रमण में भी शुरू में कोई लक्षण नज़र नहीं आते. इस के लक्षण हैं-
वैजाइना के आस-पास जलन,
खुजली, रैश और सूजन,
योनि से गाढ़ा और बदबू स्राव
यूरीन या सेक्‍स करते समय दर्द

8. वाटर वाटर्स 

यह संक्रमण वायरस से होता हैं और त्‍वचा पर बुरा असर डालता है. इसके लक्षण हैं
पानी से भरे फफोले जननांगों, गुदा, जांघों और धड़ पर

9. एक्टोपैरासिटिक 

यह संक्रमण छोटे परजीवी कीड़े या जूँ के कारण होते हैं. ये बालों या त्वचा को प्रभावित करते हैं. इसके लक्षण है-
तीव्र खुजली और शरीर पर नजर आने वाले चकत्ते

10. इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) 

एड्स का कारण बनने वाला वायरस एचआईवी कहलाता है. यह रक्त, वैजाइना , स्तन के दूध के माध्यम से फैल सकता है. इसके लक्षण हैं,
हल्काबुखार
थकान
मांसपेशी में दर्द
वजन घटना
अगर आप भी करती हैं 8-9 घंटे काम तो ऐसे रखें अपनी फिटनेस का ख्याल
जंक फूड्स, शारीरिक गतिविधि की कमी, काम का तनाव और लगातार बैठे रहने की वजह से आप की सेहत प्रभावित हो सकती है.

कौरपोरेट लाइफ की जो सब से बड़ी कमी है वह है सेहत से समझौता और बढ़ता मोटापा. जंक फूड्स, शारीरिक गतिविधि की कमी, काम का तनाव और लगातार बैठे रहने की वजह से आप की सेहत प्रभावित हो सकती है. सारा दिन काम करने के बाद हम इतना थक जाते है और वैसे भी उस के बाद इतनी एनर्जी नहीं बचती कि हम जिम जा कर अपने शरीर का ध्यान रखें. इस सन्दर्भ में जानते हैं फिटनेस एक्सपर्ट विकास डबास से फिटनेस के कुछ खास टिप्स और ट्रिक्स ;

1. ज्यादा चाय-कौफी हो सकती है खतरनाक

देखा जाये तो हम सभी को सुबह और शाम के वक्त चाय और कौफी पीना बहुत पसंद होता है. कुछ लोगो की दिन की शुरुआत ही कौफी से होती है. पर अगर आप उन में से है जो लगातार 7 से 8 घंटे औफिस में एक जगह बैठ कर काम करती है तो चाय और कौफी पीना आप के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. चाय और कौफी में चीनी और हैवी क्रीम मिल्क का इस्तेमाल किया जाता है. दोनों ही हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है. इस की जगह आप ग्रीन टी या फिर ग्रीन कौफी पी सकती है जो आप को काफी फ्रेश और एक्टिव रखेगा और साथ ही साथ आप की क्रेविंग्स पर भी संतुलन बनाए रखेगा.

. करें तबाटा व्यायाम

तबाटा व्यायाम उन लोगों के लिए है जो प्रतिदिन निर्धारित समय पर व्यायाम नहीं कर पाते. तबाटा व्यायाम के लिए आप को बस एक कार्डियो गतिविधि चुननी है जैसे कि दौड़ना, रस्सी कूदना, या साइकिल चलाना और 20 सेकंड तक लगातार यह करना है. 10 सेकंड के लिए आराम कर के 5-7 बार यह क्रिया दोहरानी होती है.

3. फ्रूट्स है जरूरी

जितना जरूरी सही मात्रा में खाना और सोना होता है उतना ही जरुरी सही मात्रा में वेजटेबल्स और फ्रूट्स लेना भी है. हमे पूरे दिन में कम से कम 5 अलग तरह की सब्जियां और 2 तरह के फल खाने चाहिए. कोशिश करे कि आप एक सब्जी उबली हुई और एक कच्ची खाएं. फ्रूट्स की बात करे तो हमें रोज सेब, केला और पपीते का सेवन जरूर करना चाहिए. इन सभी में एंटी-औक्सीडेंट और माइक्रो-न्यूट्रीशन की काफी मात्रा होती है जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है .

4. ग्रीन टी है बेस्ट

शाम को चाय के समय हमें बाहरी तली भुनी चीजें या पैकेट्स की चीजें बिस्कुट आदि नहीं खानी चाहिए. कोशिश करें की चाय की जगह ग्रीन टी लें और किसी बिस्कुट या समोसे के बजाए रोस्टेड चना या फिर मूंगफली खाए. आप चाहे तो फ्रूट सलाद भी खा सकती है जिस में अपने मनपसंद के फ्रूट्स डाल सकती हैं. अगर आप को कुछ चटपटा खाने का मन है तो उबली हुई मूंगदाल में प्याज,टमाटर चाट मसाला डाल कर टेस्टी स्नैक बना कर ऑफिस ले जा सकती हैं. इस में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है.

5. नींद है जरूरी
न्यूनतम 8 घंटे की नींद शरीर के लिए बेहतर होती है. इस 8 घंटे की नींद में आप के शरीर को अच्छे से आराम करने का समय मिलता है जिस से आप सारा दिन एक्टिव फील करती है. सोते समय यह सुनिश्चित करें लें कि आप के आसपास लैपटॉप, मोबाइल फोन, गेमिंग गैजेट्स जैसी चीज़े दूर हो.


अनियमित पीरियड्स से कैसे निबटें
पीरियड्स के दौरान असामान्य रक्तस्राव या स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने की समस्या से जूझ रही हैं, तो यह जानकारी आप के लिए ही है...

पीरियड्स एक नेचुरल क्रिया है जिस के बारे में जानना हर बढ़ती उम्र की लड़की और उस की मां के लिए जरूरी है. मां के लिए यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस प्राकृतिक क्रिया के बारे में अपनी बेटी को वह ही बेहतर तरीके से समझा सकती है. इन दिनों में लड़कियों के शरीर में अलगअलग बदलाव होते हैं और ये बदलाव होते बहुत ही सामान्य हैं. ये बदलाव हर लड़की के हार्मोंस पर निर्भर करते हैं.

कुछ लड़कियां पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स का सामना करती हैं तो कुछ लड़कियों को कोई खास बदलाव महसूस नहीं होता है. ऐसे ही कुछ लड़कियां डिप्रैशन और इमोशनल आउटबर्स्ट का शिकार होती हैं. इसे कहते हैं प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम और 90 प्रतिशत लड़कियां वर्तमान में इसे महसूस कर रही हैं. पीरियड के दौरान अनेक परेशानियां भी आती हैं. महीने में 2 बार पीरियड्स क्यों हो रहे हैं? मसलन, फ्लो इतना ज्यादा या इतना कम क्यों है? पीरियड्स और लड़कियों के समान क्यों नहीं हैं? अनियमित पीरियड्स क्यों हैं? ये सब प्रश्न अकसर हमारे दिमाग में घर कर लेते हैं. हमें यह समझने की जरूरत है कि ये सब परेशानियां असामान्य नहीं हैं. हर महिला का मासिकधर्म और रक्तस्राव का स्तर अलगअलग है.

असामान्य पीरियड्स

पिछले कुछ मासिक चक्रों की तुलना में रक्तस्राव असामान्य होना, पीरियड्स देर से आना, कम से कम रक्तस्राव से ले कर भारी मात्रा में खून बहना आदि असामान्य पीरियड माने जाते हैं. यह कोई बीमारी नहीं है. इसे अलगअलग हर लड़की में देखा जाता है. इस में अचानक मरोड़ उठने लगती है और बदनदर्द होने लगता है. अनियमित और असामान्य पीरियड को एनोबुलेशन से भी जोड़ा जा सकता है. आमतौर पर इस कारण हार्मोंस में असंतुलन हो सकता है.
प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम

हर साल भारत की एक करोड़ से भी ज्यादा लड़कियों में प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम देखा जाता है. यह एक ऐसी समस्या है जो लड़कियों को हर महीने पीरियड से कुछ दिनों पहले प्रभावित करती है. इस दौरान लड़कियां शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद को कमजोर महसूस करती हैं. मुंहासे, सूजन, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स इस के कुछ सामान्य लक्षण हैं. सटीक लक्षण और उन की तीव्रता लड़की से लड़की और चक्र से चक्र पर निर्भर करती है.


हार्मोंस में परिवर्तन इस सिंड्रोम का एक महत्त्वपूर्ण कारण है. विटामिन की कमी, शरीर में उच्च सोडियम का स्तर, कैफीन और शराब का अधिक सेवन पीएमएस का कारण बन सकते हैं. पीएमएस 20 से 40 वर्ष की महिलाओं में देखा जा सकता है.

इलाज है जरूरी
पीरियड्स में आने वाले अनियमित पीरियड्स या पीएमएस जैसी परेशानियों का इलाज बहुत ही सरल है. ऐक्सरसाइज हमेशा से ही पीरियड्स की परेशानी का हल रही है. एक स्त्रोत के अनुसार हफ्ते में 5 दिन 35 से 40 मिनट ऐक्सरसाइज करने से उन हार्मोंस की मात्रा कम हो जाती है जिन के कारण अनियमित पीरियड्स हो सकती है. अगर किसी लड़की को पीरियड्स के दौरान बहुत दर्द हो, भारी रक्तस्राव हो, 7 दिनों? से ज्यादा पीरियड के बीच उल्टियां हों तो अच्छा यही होगा कि तुरंत उसे डाक्टर के पास ले कर जाएं.

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