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क्या आप दुबलेपन से परेशान है?


क्या आप दुबलेपन से परेशान है? तो चिंता ना करे वजन बढ़ाये

▶ अक्सर आपने लोगों को वजन घटाने या वजन प्रबंधन के बारे में बात करते हुए सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वजन बढ़ाने की बात करते हैं।दरअसल, वे उस वर्ग के लोग हैं जिन्हे या तो भूख बहुत कम लगती है और उनका वजन कम है या फिर जो लोग जरूरत से ज्यादा पतले हैं वजन बढ़ाने के लिए कई दवाईयां आती हैं लेकिन वजन बढ़ाने के लिए किसी दवाई का प्रयोग न करके बल्कि प्राक़तिक या आयुर्वेदिक प्रणाली का ही इस्तेमाल करना चाहिए-और वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाने से किसी तरह को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
▶ आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत मोटे तथा अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को निंदित व्यक्तियों की श्रेणी में माना गया है (debility) दुबलापन एक रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयम का परिणाम मात्र है।
▶ दुबलापन रोग होने का सबसे प्रमुख कारण मनुष्य के शरीर में स्थित कुछ कीटाणुओं की रासायनिक क्रिया का प्रभाव होना है जिसकी गति थायरायइड ग्रंथि (thyroid gland) पर निर्भर करती हैं यह गले के पास शरीर की गर्मी बढ़ाती है तथा अस्थियों की वृद्धि करने में मदद करती है तथा यह ग्रंथि जिस मनुष्य में जितनी ही अधिक कमजोर और छोटी होगी। वह मनुष्य उतना ही कमजोर और पतला होता है। ठीक इसके विपरीत जिस मनुष्य में यह ग्रंथि स्वस्थ और मोटी होगी। वह मनुष्य उतना ही सबल और मोटा होगा।
▶ देखा जाए तो 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का वजन यदि उसके शरीर और उम्र के अनुपात सामान्य से कम है तो वह दुबला व्यक्ति कहलाता है तथा जो व्यक्ति अधिक दुबला होता है वह किसी भी कार्य को करने में थक जाता है तथा उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (resistive capacity) कम हो जाती है ऐसे व्यक्ति को कोई भी रोग जैसे- सांस का रोग, क्षय रोग, हृदय रोग, गुर्दें के रोग, टायफाइड, कैंसर बहुत जल्दी हो जाते हैं ऐसे व्यक्ति को अगर इस प्रकार के रोग होने के लक्षण दिखे तो जल्दी ही इनका उपचार कर लेना चाहिए नहीं तो उसका रोग आसाध्य हो सकता है और उसे ठीक होने में बहुत दिक्कत आ सकती है अधिक दुबली स्त्री गर्भवती होने के समय में कुपोषण (malnutrition) का शिकार हो सकती है।
▶ अत्यंत दुबले व्यक्ति के नितम्ब, पेट और ग्रीवा शुष्क होते हैं तथा अंगुलियों के पर्व मोटे तथा शरीर पर शिराओं का जाल( net of veins ) फैला होता है, जो स्पष्ट दिखता है-शरीर पर ऊपरी त्वचा (upper skin) और अस्थियाँ (bones) ही शेष दिखाई देती हैं।
▶ इसमें अग्निमांद्य या जठराग्नि का मंद होना ही अतिकृशता का प्रमुख कारण है- अग्नि के मंद होने से व्यक्ति अल्प मात्रा में भोजन करता है, जिससे आहार रस या ‘रस’ धातु का निर्माण भी अल्प मात्रा में होता है- इस कारण आगे बनने वाले अन्य धातु ( रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्रधातु ) भी पोषणाभाव( denutrition ) से अत्यंत अल्प मात्रा में रह जाते हैं, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति निरंतर कृश से अतिकृश होता जाता है- इसके अतिरिक्त लंघन, अल्प मात्रा में भोजन तथा रूखे अन्नपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी शरीर की धातुओं का पोषण नहीं होता।
▶ वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपका फिट रहना जरूरी है यदि आप वजन बढ़ाना चाहते हैं इसका ये अर्थ नहीं कि आप फिजीकली बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे- व्यायाम (exercise) करना तब भी जरूरी होगा।
▶ वजन बढ़ाने के लिए सबसे बढि़या उपाय है आप हाई कैलोरी का खाना खाएं उन खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जिनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि आप जंकफूड (junk food) भारी मात्रा में खाने लगे। बल्कि आपको हेल्दी और हाई कैलोरी भोजन को प्राथमिकता देनी हैं। अगर आप वजन हेल्दी रूप से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सुबह का नाश्ता हेवी करना होगा।
▶ च्यवनप्राश वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधी है और यह लगभग सभी के लिए आमतौर पर भी हेल्दी रहता है इससे न सिर्फ शारीरिक उर्जा बढ़ती है बल्कि मेटाबोलिज्म (metabolism) भी मजबूत रहता है शतावरी कल्पा लेने से न सिर्फ आंखें और मसल्स अच्छी रहती है बल्कि इससे वजन भी बढ़ता है वसंत कुसुमकर रस शरीर को न सिर्फ आंतरिक उर्जा देता है बल्कि वजन को जल्दी बढ़ाने में भी लाभकारी है।

➡ दुबलेपन के अन्य कारण ये है :
• पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण व्यक्ति अधिक दुबला हो सकता है।
• मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से व्यक्ति दुबला हो सकता है।
• यदि शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाए तो व्यक्ति दुबला हो सकता है।
• चयापचयी क्रिया में गड़बड़ी हो जाने के कारण व्यक्ति दुबला हो सकता है।
• बहुत अधिक या बहुत ही कम व्यायाम करने से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है।
• आंतों में टमवोर्म या अन्य प्रकार के कीड़े हो जाने के कारण भी व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो सकता है।
• मधुमेह, क्षय, अनिद्रा, जिगर, पुराने दस्त या कब्ज आदि रोग हो जाने के कारण व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो जाता है-
शरीर में खून की कमी हो जाने के कारण भी दुबलेपन का रोग हो सकता है।

➡ यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन कितना होना चाहिए।
इसका फार्मूला ये है :
बीएमआई = वजन ( किलोग्राम) / ( ऊंचाई X ऊंचाई ( मीटर में)
आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें।

➡ जाने कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय : 
• डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अधिक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं- दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें।
• नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।
• भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं तथा दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है- अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं-बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।
• च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है- सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।
• आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है 3-3 ग्राम दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंत कुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार दवा है।
• रोज सुबह 3-4 किलोमीटर घूमने का नियम बनाएं- ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म भी ठीक रहेगा और भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है। दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।
• 50 ग्राम किशमिश रात को पानी में भिगो दे सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं- दो-तीन माह के प्रयोग से वजन बढेगा-किशमिश में अनाज की 99 % कैलोरी पायी जाती है और फाइबर भी बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर के फैट को हटा के स्वस्थ कैलोरी में परिवर्तित करता है।
• मलाई-मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है- और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है। मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से बढ़ेगा।
• अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा।
• तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा। केले को दूध में फेट के भी ले सकते है।
• आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है।
• नारियल का दूध यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है। नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृद्धि होगी।
• जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदद नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।

• मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।
• ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा।
• काजू स्वस्थ काया पाने का आसान तरीका है काजू के तेल में न केवल वजन बढ़ाने बल्कि काजू रोज़ खाने से आपकी त्वचा कोमल और बाल चमकदार दिखने लगेंगे।
• जैतून के तेल में आवश्यक कैलोरी बहुत बड़ी मात्रा में पाई जाती है और यह हृदय रोग से लड़ने में भी बहुत मदद करता है।
• अश्वगंघा और आंवले को पानी और दूध से लेने से जल्दी असर करता है और वजन प्रबंधन में भी मदद करता है । इसका चूर्ण दूध, घी या शहद से लेने में भी असरकारक है। • द्रकशरिष्ठा को लगातार एक महीने को गर्म और ठंडे पानी में शहद मिलाकर लेने से अच्छा रहता है इन आयुर्वेदिक औषधियों को लेने से कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और आप आराम से अपना वजन भी बढा़ सकते हैं।
• मोटापा घटाने एवं बजन कम करने के लिये ये भी आजमा सकते है इस प्रयोग को करने से आप एक माह में पाँच किलो तक बजन कम कर सकते हैं।
• आप 2 चम्मच असली शहद एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पियें दोनो टाइम खाना खाने के आधा घँटे बाद आधा चम्मच पाचक चूर्ण पानी के साथ लें।
इसे आप बनाये इस प्रकार :
छोटी हरड, बहेडा, आँवला, सोंठ, पीपर, कालीमिर्च, कालानमक ये सब 20-20 ग्राम असली हींग दो ग्राम सब कूट पीस कर रख लें पाचक चूर्ण तैयार है ये रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले अवश्य खालें और रात को सोते समय 2 छोटी हरड का चूर्ण थोडे गुनगुने पानी से लें तथा बसा और ज्यादा मिर्च मसाले युक्त भोजन न करें।
जानें महिलाओं में होने वाली एनीमिया बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज

विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार दुनिया की कुल पॉपुलेशन का छठा हिस्सा एनीमिया से ग्रस्त‍ है। एनीमिया यानी बॉडी में खून की कमी। यह समस्या महिलाओं में अधिक पाई जाती है। हमारे देश में हर तीन में से एक महिला एनीमिया की शिकार है। लगभग 57.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित रहती हैं। इनमें से 7 में से एक महिला ऐसी होती है, जिसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 ग्राम/डीएल है। यह सिचुएशन उनके और उनके गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए घातक है। भारत में बच्चे भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हैं।
एनीमिया क्या है- बॉडी के सेल्स को एक्टिव रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है और ऑक्सीजन को बॉडी के अलग-अलग भागों में रेड ब्लड सेल्स में मौजूद हीमोग्लो‍बीन द्वारा पहुंचाया जाता है। बॉडी में आयरन की कमी से रेड ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबीन का बनने की क्रिया प्रभावित होती है। इससे सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता जो कार्बोहाइड्रेट और वसा को जलाकर एनर्जी पैदा करने के लिए जरूरी है। जिससे बॉडी और ब्रेन की काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है इस सिचुएशन को एनीमिया कहते हैं।

कारण- एनीमिया ब्लड से रिलेटेड सबसे आम समस्या है। जो कई प्रकार का होता है, जिसके कारण अलग-अलग होते हैं।
ज्यादा ब्लड सेल्स का नष्ट हो जाना।
रेड ब्लड सेल्स के बनने में कमी। हेमरेज या लगातार खून बहने से कमी।
फोलेट, विटामिन बी 12, विटामिन ए कम।
इन्फेक्शन या लंबी बीमारी। अनुवांशिक कारण।
पूरी दुनिया में आयरन की कमी को एनीमिया की सबसे खास वजह माना जाता है।
जोखिम ऐसे- एनीमिया किसी को कभी भी हो सकता है, लेकिन जो खासतौर से पहले से ही किडनी , डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों का शिकार हैं, उनमें इसकी संभावना ज्यादा होती है। इसमें महिला होना एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।

महिलाएं आसान शिकार- पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनीमिया की अधिक शिकार होती हैं। डाइटिंग कर रही लड़कियां भी इसका शिकार हो जाती हैं। पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने से, गर्भाशय में ट्यूमर होने पर भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है। दूध पिलाने वाली महिलाओं में भी एनीमिया होने का खतरा रहता है। हेल्दी महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन का नॉर्मल लेवल 11 ग्राम/डीएल होता है। अगर यह लेवल 9-7 ग्राम/डीएल हो तो यह माइल्ड एनीमिया होता है। यह लेवल 6-4 ग्राम/डीएल हो तो उसे सीवियर एनीमिया कहते हैं। जिसमें तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।

लक्षण- कमजोरी और थकान। एनीमिया लगातार रहना न्यूरोलॉजिकल गड़बड़ी भी करता है, खासकर बच्चों में चिड़चिड़ापन। सीरियस होने पर यह स्ट्रेस का रूप ले लेता है। हार्टबीट सही नहीं रहती है, सांस उखड़ना और चक्कर आना। यह नॉर्मल लक्षण हैं, लेकिन इसके लगातार रहने पर कई गंभीर लक्षण भी नजर आ सकते हैं। जैसे- चेस्ट पेन (एन्जाइना), सिरदर्द या पैरों में दर्द, जीभ में जलन, मुंह और गला सूखना, मुंह के कोनों पर छाले हो जाना, बाल गिरना, निगलने में तकलीफ, त्वचा, नाखून और मसूड़ों का पीले पड़ जाना।

रोकथाम- अगर किसी को पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग अधिक हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि इससे शरीर में आयरन में तेजी से कमी आती है। अगर कोई महिला मां बनने वाली है या तो वह डॉक्टर की सलाह से आयरन के सप्लीमेंट जरूर लें। समय से पहले जन्मे बच्चों में आयरन की कमी हो जाती है। ऐसे बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान दे।
इलाज- एनीमिया का इलाज इसकी सीरियसनेस और कारणों पर निर्भर करता है। एनीमिया को ठीक होने में छह से नौ महीने का समय लगता है। इसमें आयरन, फॉलिक एसिड और विटामिन बी12 के सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। आयरन की गंभीर कमी को इंट्रावीनस आयरन थेरेपी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। इसमें आयरन मसल्स या इन्ट्रावीनस लाइन में इंजेक्ट किया जाता है।






नहीं घट रहा मोटापा तो आजमाएं चिया सीड

हर बड़ी चीज़ एक छोटे साइज़ में आती है। यानी चिया सीड, जो कि दिखने में होती है छोटी मगर इसके गुण होते हैं बडे़। चिया सीड को सुपर सीड की श्रेणी में रखा जाता है। इन बीज़ों को जब पानी में डाल कर थोड़ी देर के लिये रखा जाता है तो, यह आकार में काफी बड़े दिखने लगते हैं।
चिया सीड तुलसी चिया सीड ढेर सारे पोषण से भरी है। इनमें फाइबर और पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर में जा कर हमारी अंदरूनी ताकत को बनाए रखने में सहायक हैं। इसमें आयरन, प्रोटीन, फाइबर तथा ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है।
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिये चिया सीड रामबाण है क्‍योंकि यह बार बार लगने वाली भूख को शांत करती है और चयापचय प्रणाली को बढ़ाती है, जिससे फैट बर्न होता है। बाजार में यह भूरे और काले रंग में मिल जाएगा। आप इसे सलाद, दूध, जूस, सूप, पुडिंग आदि में डाल कर खा सकते हैं।
आज इस आर्टिकल में हम आपको चिया सीड के बढियां स्‍वास्‍थ्‍य लाभ बताएंगे तो, जरा ध्‍यान से पढ़ना...

मधुमेह से बचाव 
चिया सीड में जैल जैसा पदार्थ होता है जो पाचक एंजाइम और कार्बोहाइड्रेट के बीच में अवरोध करता है। इससे ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

मोटापा घटाए 
चिया सीड में मौजूद पोषण पेट को हमेशा भरे रहने का एहसास दिलाते हैं। साथ ही यह शरीर से घातक पदार्थों को भी बाहर निकालता है। यह कार्बोहाइड्रेट में कम होता है, जिससे भूख भी कम होती है।

हड्डियां और दांत बनाए मजबूत 
28 ग्राम चिया सीड में आपको 18% तक का कैल्‍शियम प्राप्‍त होगा जो कि दांत और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिये काफी है। साथ ही इसमें मैगनीश्यिम, प्रोटीन और फॉस्‍फोरस भी पाए जाते हैं

प्रोटीन का अच्‍छा सोर्स 
चिया सीड प्रोटीन की कमी भी पूरी करता है। यह शरीर को कार्य करने में मदद करता है। यह मासपेशियों के विकास, इम्‍यूनिटी बनाए रखने तथा शरीर का पीएच लेवल चेक रखता है।





इन टिप्स को अपना कर गरमी में होने वाली बीमारियों से बचें
गरमी का मौसम अपने साथ बहुत सी बीमारियां ले कर आती है. इस दौरान हमारा इम्यून सिस्टम काफी प्रभावित होता है.

गरमी का मौसम अपने साथ बहुत सी बीमारियां ले कर आती है. इस दौरान हमारा इम्यून सिस्टम काफी प्रभावित होता है. इसके अलावा गरमी हमारे पाचन और त्वचा को बुरी तरह प्रभावित होती है. इस दौरान लोगों को मौसमी फ्लू और संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में जरूरी है कि आप पहले से इन परेशानियों से लड़ने के लिए तैयार रहें. इसलिए हम आपको कुछ जरूरी टिप्स देने वाले हैं जो आपको इन चुनौतियों के सामने मजबूती से खड़े रखने में मदद करेंगे.

रहें हाइड्रेटेड


यदी आप दिनभर में पर्याप्त पानी पी रहे हैं तो आपके अंदर बहुत से रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है. पानी को शरीर के फाइबर द्वारा हमारे कोलोन में खींच लिया जाता है और यह नरम मल बनाने में शरीर की मदद करता है.
फाइबर इनटेक लें





अनाज, फल, सब्जियां और फलियां जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर के प्रमुख स्रोत होते हैं. इसके साथ ही ये कब्ज की आशंका को भी दूर करता है.

कम कैफीन

गरमी में कैफीन का सेवन कम करें. इससे आपका पाचन तंत्र का फंग्शन प्रभावित होता है. इसके कारण आगे चल कर अल्सर, एसिडिटी और जलन होती है.

वर्कआउट
पसीने के निकलने से शरीर के बहुत से विकार दूर होते हैं. पसीने के रास्ते शरीर की सारी गंदगी निकल जाती है. इसके साथ ही आपके शरीर को फिट और स्वस्थ रखने में भी ये काफी सहायक होता है. हम जितना अधिक शारीरिक तौर पर सक्रिय रहेंगे, हमारे लिए जीवन खुशहाल होगा.

धूप से बचें

धूप से दूरी बनाने की कोशिश करें. ध्यान रखें कि तेज धूप में तीन घंटे से अधिक रहने से स्वास्थ संबंधित बहुत सी परेशानियां होती हैं.

ध्यान दें कि गरमी में जौंडिस, टाइफाइड और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याओं के होने का खतरा काफी अधिक रहता है. इनसे बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने खानपान की आदतों में बदलाव लाएं और धूप में कम समय बिताएं. बाहर के खाने से परहेज, मील्स नहीं छोड़ना और बाहरी ड्रिंक एवं अल्कोहल की बजाय स्वास्थ्यकर विकल्पों जैसे छोटे बदलाव बड़ा अंतर ला सकते हैं. ये छोटे लेकिन अनहेल्दी आदतें आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
पौष्टिक आहार योजना


भागदौड़ और तनावग्रस्‍त लाइफ में ऐसा डाइट चार्ट बनाइए जो आपकी थकान को कम करे और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करे। आइए हम आपको बताते हैं कि कैसा हो आपका डाइट प्‍लान।

पौष्टिक आहार चुनें
स्वास्थ्य से संबंधित बीमारियां आपके आहार के कारण होती हैं जो आपके वजन को प्रभावित करती हैं और आपके स्वास्थ्य के प्रति खतरे बढ़ाती हैं। स्वस्थ आहार खाने का फैसला कहने में आसान है परंतु करने में कठिन है क्योंकि कम स्वस्थ खाद्य पदार्थ खाने में आकर्षक होते हैं। लेकिन अगर आपके डाइट चार्ट में पोषणयुक्‍त आहार हैं तो बीम‍ारियां कम होती हैं और शरीर भी स्‍वस्‍थ रहता है।

संयमित आहार खायें
सामान्‍यतया शरीर का 6 कार्य होता है, और यह है - पाचन, हार्मोन नियंत्रण, तंत्रिकातंत्र का संचालन, गुर्दे का संचालन, इन्‍फ्लेमेशन और टॉक्सिन्‍स को बाहर निकालना। इससे ही शरीर का संचालन होता है और ये फंक्‍शन तभी सुचारु तरीके से काम करते हैं जब आदमी नियमित और पोषणयुक्‍त आहारों का सेवन करता है।

वजन घटाने वाले आहार
अपना डाइट चार्ट बनाते वक्‍त यह ध्‍यान रखें कि उसमें मोटापा बढ़ाने वाले आहार बिलकुल न हों। वजन बढ़ने से कई बीमारियां होती हैं, मधुमेह मोटे लोगों को ज्‍यादा होता है। फास्‍ट फूड और जंक फूड खाने से बचें। हरी पत्‍तेदार सब्जियों और ताजे फलों का ज्‍यादा सेवन करें।

वा‍स्‍तविक आहार
पोषणयुक्‍त आहार का सेवन न करने से कई रोगों के होने का जोखिम होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अधिक वज़न, हृदय तथा रक्तवाहिका संबंधी रोग और कैंसर जैसी बीमारियां केवल अनुचित खान-पान के कारण होती है। डब्‍ल्‍यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया में लगभग तीन लाख लोग आहार में फल और सब्‍जी की कमी के कारण मर जाते हैं।
मौसम के अनुसार
बदलते मौसम में अपने डाइट चार्ट को भी बदलिए, हमेशा मौसम के अनुसार ही खाइए। ठंड के मौसम में हरी सब्जियों का ज्‍यादा मात्रा में प्रयोग करें। गर्मी के मौसम में खाने के साथ सलाद, सूप, रोटी और हरी सब्जियों को शामिल करें। रात को हमेशा हल्‍का खाने की कोशिश करें।



हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले आहार
इसकी कमी से ऑक्‍सीजन वहन की क्षमता कम होती है।

किड्नी की समस्‍यायें हीमोग्‍लोबिन की कमी से होते हैं।

ताजे फल, हरी और पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन कीजिए।
ढेर सारा पानी पियें और नियमित व्‍यायाम जरूर करें।

● हीमोग्‍लोबिन शरीर के लिए बहुत जरूरी है, इसकी कमी से शरीर में ऑक्‍सीजन को वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण शरीर में रेड ब्‍लड सेल्‍स की संख्‍या कम हो जाती है और एनीमिया हो जाता है। किड्नी की ज्‍यादातर समस्‍यायें हीमोग्‍लोबिन की कमी के कारण होती हैं। 

● हीमोग्‍लोबिन की कमी को आहार के जरिये दूर किया जा सकता है। भोजन में अनेक पोषक तत्व होते हैं जो शरीर का विकास करते हैं, उसे स्वस्थ रखते हैं और शक्ति प्रदान करते हैं। हमें अपने आहार में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले फल एवं सब्जियों को शामिल करना चाहिए। हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के लिए संतुलित आहार, व्यायाम, भोजन में हरी सब्जियां, दालें, अनार आदि फल लेना चाहिए। अधिक जानने के लिए इस लेख को पढ़ें।

1) अमरूद

अमरूद जितना ज्यादा पका हुआ होगा, उतना ही पौष्टिक होगा। पके अमरूद को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती। इसलिए महिलाओं के लिए यह और भी लाभदायक हो जाता है।

2) आम

आम खाने से हमारे शरीर में रक्ति अधिक मात्रा में बनता है, एनीमिया में यह लाभकारी होता है।

3) सेब

सेब एनीमिया जैसी बीमारी में लाभकारी होता है। सेब खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन बनता है।

4) अंगूर

अंगूर में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है, और हीमोग्लोबिन की कमी संबंधी बीमारियों को ठीक करने में सहायक होता है।

5) चुकन्दर
चुकन्दर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता का लोह तत्व रक्त में हीमोग्लोबिन का निर्माण व लाल रक्तकणों की सक्रियता के लिए बेहद प्रभावशाली है। खून की कमी यानी एनीमिया की शिकार महिलाओं के लिए चुकंदर रामबाण के समान है। चुकन्दर के अलावा चुकन्दर की हरी पत्तियों का सेवन भी बेहद लाभदायी है। इन पत्तियों में तीन गुना लौह तत्व अधिक होता है।

6) तुलसी

तुलसी रक्त की कमी को कम करने के लिए रामबाण है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।

7) सब्जियां

शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। हरी सब्जियों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले तत्व ज्यादा मात्रा में पाये जाते है।

8) तिल

तिल हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। तिल खाने से रक्ताअल्पता की बीमारी ठीक होती है।

9) पालक

सूखे पालक में आयरन काफी मात्रा होती है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को ठीक करता है।

10) नारियल
नारियल शरीर में उत्तकों, मांसपेशियों और रक्त जैसे महत्वपूर्ण द्रव्यों का निर्माण करता है, यह संक्रमण का सामना करने के लिए इन्जाइम और रोग प्रतिकारक तत्वों के विकास में सहायक होता है।

11) अंडा

अंडे के दोनों भागों में प्रोटीन, वसा, कई तरह के विटामिन, मिनरल्स, आयरन और कैल्शियम जैसे गुणकारी तत्वों की भरपूर मात्रा होती है। बहुत कम खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला विटामिन डी भी अंडे में पाया जाता है।

12) गुड़

गुड़ में अधिक खनिज लवण होते है। जो हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है।


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