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साइनस के इलाज के लिए योगासन –


साइनस के इलाज के लिए योगासन –
अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों का अपनी सेहत पर ध्यान देना मुश्किल हो गया है। नतीजतन, उन्हें कई गंभीर बीमारियां घेर लेती हैं। इन्ही बीमारियों में से एक है साइनस। साइनस श्वास तंत्र से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस लेने में परेशानी होती है। मरीज के धूल, धुएं और ठंडी हवा के संपर्क में आने पर यह परेशानी और बढ़ जाती है। बेशक, यह बीमारी साधारण सर्दी-जुकाम के रूप में शुरू होती है, लेकिन बैक्टीरिया, वायरल और फंगल इन्फेक्शन के संपर्क में आने से यह समस्या और बढ़ जाती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि योग ऐसा विकल्प है, जिसकी सहायता से इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको साइनस के उपचार के लिए योग कैसे मदद कर सकता है और साइनस के लिए योग के कौन-कौन से प्रकार आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, इस बारे में बताएंगे।

साइनस के उपचार के लिए योग के प्रकार जानने से पहले हम यह जान लेते हैं कि योग इस समस्या को दूर करने में कैसे मदद करता है।


साइनस में कैसे लाभदायक है योग? – How Does Yoga Help with Sinus in Hindi
साइनस के लिए योग – Yoga For Sinus in Hindi
साइनस में कैसे लाभदायक है योग? – How Does Yoga Help with Sinus in Hindi

योग में सांस लेने और छोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, इस कारण इसके नियमित अभ्यास से श्वास तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि योग इस समस्या से छुटकारा दिलाने में सहायक साबित होता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि श्वास से संबंधित व्यायाम करने से साइनस की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है (1)। वहीं, एक अन्य शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि प्राणायाम (योग का एक प्रकार) के विभिन्न तरीकों से साइनस की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है 

लेख के आगे के भाग में हम आपको बताएंगे कि साइनस के लिए योग के किन आसनों को उपयोग में लाया जा सकता है।
साइनस के लिए योग – Yoga For Sinus in Hindi
1. गोमुखासन


कैसे है लाभदायक :

साइनस की समस्या को दूर करने के लिए गोमुखासन को उपयोग करना लाभदायक माना जाता है। कारण यह है कि इसके उपयोग से हमारे श्वसन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और सांस से संबंधित कई विकार (बंद नाक, नाक की नसों में सूजन और खुजली) दूर होते हैं (3)। इस समस्या में सबसे ज्यादा सांस लेने में दिक्कत होती है, इसलिए साइनस के लिए योगासन में गोमुखासन छुटाकारा दिलाने में सहायक साबित हो सकता है।
करने का तरीका :

सबसे पहले योग मैट बिछाकर उस पर बैठें और दोनों पैरों को आगे की ओर फैलाएं। दोनों हाथों को शरीर के पास जमीन से सटाकर सीधा रखें।
अब अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं नितंब (Buttocks) के पास जमीन पर रखें।
ठीक वैसे ही अब दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाएं पैर के ऊपर से लाते हुए बाएं नितंब (Buttocks) के पास जमीन पर रखें।
इसके बाद अब आप अपने बाएं हाथ को उठाएं और कोहनी से मोड़ते हुए पीठ के पीछे की ओर कंधों से नीचे तक लाएं।
अब दाएं हाथ को मोड़ते हुए पीठ के पीछे ले जाएं, जबकि बाएं हाथ को ऊपर उठाकर कोहनी से मोड़ते हुए दाएं हाथ की उंगलियों को पकड़ने का प्रयास करें।
ध्यान रहे कि आपकी पीठ बिल्कुल सीधी होनी चाहिए और कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने का प्रयास करें।
आप इस अवस्था में सामान्य सांस लेते रहें।
अब आप गोमुखासन के करीब आधे चक्र को पूरा कर चुके हैं।
इसके बाद यही प्रक्रिया दूसरे पैर और हाथ के साथ करें।
हाथ-पैर की स्थितियों को बदलने पर आपका गोमुखासन का चक्र पूरा हुआ।
अब इस प्रक्रिया को करीब चार से पांच बार तक दोहराएं।
सावधानियां :

अगर इस आसन को करते वक्त पीठ के पीछे तक हाथ ले जाने में तकलीफ महसूस हो, तो किसी प्रकार की जबरदस्ती न करें।
घुटनों में तकलीफ या कोई अन्य समस्या होने पर इस आसन को करने का प्रयास न करें।
खूनी बावासीर से पीड़ित व्यक्ति, जिन्हें खून आने की समस्या हो रही हो,वो इस आसन का इस्तेमाल न करें।
मांसपेशियों में दर्द होने की स्थिति में इस आसन के अभ्यास से बचना चाहिए।
रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई समस्या हो, तो इस आसन से दूर रहें।
2. जानुशीर्षासन
कैसे है लाभदायक :

साइनस के लिए योगासन में शामिल किया जाने वाला जानुशीर्षासन चिंता, तनाव और अवसाद को दूर करने के साथ-साथ साइनस की समस्या से भी छुटकारा दिला सकता है (4)। बताया जाता है कि इस आसन का सीधा प्रभाव हमारे तंत्रिका तंत्र और श्वसन तंत्र पर पड़ता है।
करने का तरीका :
योग मैट पर आराम से बैठे जाएं और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
अब अपने पैरों को सामने की ओर फैला लें और हाथों को शरीर के साथ जमीन से सटा कर रखें।
इसके बाद बाएं पैर को मोड़ते हुए अपनी दाहिनी जांघ के पास बाएं पैर के तलवे को रखें और बाएं घुटने को जमीन से चिपका दें।
अब गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं।
फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और दाएं पैर के अंगूठे को हाथों से पकड़ने की कोशिश करें। इसके साथ ही कोहनियों को जमीन से और सिर को घुटनों से छूने का प्रयास करें।
अब कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें।
फिर सांस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें। सीधे हो जाने पर हाथों को नीचे कर लें।
इस प्रकार जानुशीर्षासन का आधा चक्र पूरा हुआ।
चक्र पूरा करने के लिए दाएं पैर को मोड़कर इसी प्रक्रिया को फिर से दोहराएं।
सावधानियां :
पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने की स्थिति में इस आसन को न करें।
दस्त होने पर भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।
3. भुजंगासन
कैसे है लाभदायक :

साइनस के लिए योगासन में भुजंगासन को भी शामिल किया जाता है। यह भी तनाव और चिंता की समस्या को दूर करने के साथ-साथ श्वसन तंत्र को ठीक करने में सहायक माना जाता है। इस कारण साइनस की समस्या में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं (3)।
करने का तरीका :
सबसे पहले योग मैट बिछाकर आप पेट के बल लेट जाएं।
अब पैरों को सीधा करते हुए आपस में मिलाएं।
इसके बाद हथेलियों को छाती के पास जमीन पर सटाकर रखें।
अब गहरी सांस लें और छाती से नाभी तक के हिस्से को जमीन से ऊपर उठाएं।
अब कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
अब गहरी सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे प्रारम्भिक अवस्था में वापस आएं।
इस प्राकर भुजंगासन का एक चक्र पूरा हो जाएगा।
शुरुआती अभ्यास के दौरान इस प्रक्रिया को करीब चार से पांच बार दोहराएं।
अभ्यास हो जाने पर इस प्रक्रिया को अधिक बार भी किया जा सकता है।
सावधानियां :
अल्सर या हर्निया जैसी समस्या होने पर इस आसन से परहेज करना चाहिए।
स्लिप डिस्क (जोड़ों से संबंधित विकार) की समस्या होने पर इस आसन को करने का प्रयास न करें।
कमर में दर्द की स्थिति में इस आसन को न करें।
गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।
4. उष्ट्रासन

कैसे है लाभदायक :

उष्ट्रासन की प्रक्रिया में मुख्य रूप से सांस लेने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस कारण यह श्वसन तंत्र को मजबूत करने का बेहतर विकल्प हो सकता है (5)। वहीं, लेख में आपको पहले भी बताया जा चुका है कि श्वास से संबंधित योग साइनस जैसी समस्या को दूर करने में सहायक साबित होते हैं। इस कारण यह माना जा सकता है कि उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से इस समस्या के कई जोखिम कारकों को दूर किया जा सकता है।
करने का तरीका :
सबसे पहले योग मैट बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
अब आप घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
इसकी बाद गहरी सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें।
झुकते हुए दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर और बाईं हथेली बाईं एड़ी पर रखें।
ऐसा करते वक्त आपको अधिक सावधान रहने की जरूरत है, ताकि गर्दन में किसी तरह का झटका न आए।
इस स्थिति में जांघें फर्श से समकोण दिशा में होनी चाहिए और सिर पीछे की ओर झुका होना चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मुद्रा में शरीर का पूरा भार बांह व पैरों पर होना चाहिए।
अब कुछ देर इसी मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें और धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें।
जब तक संभव हो कुछ सेकंड इसी अवस्था में बने रहने के बाद आप सामान्य अवस्था में धीरे-धीरे वापस आएं।
सावधानियां :
हाई ब्लड प्रेशर वाले इस आसन को न करें।
कमर दर्द है, तो इस आसन को करने से बचें।
हर्निया की समस्या होने पर भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
5. सेतुबंध सर्वांगासन

कैसे है लाभदायक :

विशेषज्ञों के मुताबिक साइनस के लिए योगासन के कई प्रकार हृदय और श्वास से संबंधित विकारों को दूर करने में सहायक माने जाते हैं, जिनमें से एक सेतुबंध सर्वांगासन भी है (6)। वहीं, लेख के शुरुआत में बताया गया है कि सांस से संबंधित व्यायाम साइनस की समस्या को दूर करने में लाभकारी माने जाते हैं। इस कारण ऐसा कहा जा सकता है कि सेतुबंध सर्वंगासन के अभ्यास से साइनस के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
करने का तरीका :
सबसे पहले योग मैट बिछाकर आप आराम से जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं।
अब अपने घुटनों को मोड़ें और पैरों को कूल्हों के नजदीक लेकर आएं।
इसके बाद दोनों हाथों से अपनी एड़ियों को पकड़ें और सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं।
इस अवस्था में आने के बाद ठुड्डी को छाती से लगाएं।
कुछ देर ऐसे ही रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
फिर सांस छोड़ते हुए प्रारम्भिक अवस्था में वापस आ जाएं।
सावधानियां :
सबसे अहम बात यह है कि योग की यह प्रक्रिया खाली पेट ही करनी चाहिए।
इस आसान का अभ्यास करते समय सिर स्थिर रखने पर विशेष ध्यान दें। अन्यथा गर्दन में दर्द की शिकायत हो सकती है।
गर्भवती महिलाएं विशेषज्ञ की देखरेख में ही इस आसन का उपयोग करें।
घुटने, कंधे, पीठ और कमर में दर्द की स्थिति में इस आसन का अभ्यास न करें।
6. अधोमुख श्वानासन
कैसे है लाभदायक :
अधोमुख श्वानासन चिंता, तनाव और अवसाद को दूर करने के साथ-साथ हृदय और श्वास से संबंधित विकार (साइनस) को दूर करने में भी सहायक माना जाता है (7)।
करने का तरीका :
सबसे पहले योग मैट बिछाकर वज्रासन में बैठ जाएं।
इसके बाद आगे की ओर झुकते हुए हथेलियों को जमीन पर लगाएं।
अब आप सांस छोड़ते घुटनों को सीधा करें और कमर को ऊपर उठाएं।
इसके बाद हाथों के सहारे शरीर को पीछे करें और जितना संभव हो सके कमर को ऊपर लाने की कोशिश करें।
साथ ही एड़ियों को जमीन से सटाने का प्रयास करें और अपनी नाभि की ओर देखें।
ध्यान रहे, इस दौरान आपके शरीर का पूरा वजन हाथों और पैरों पर होना चाहिए।
अब कुछ देर इसी मुद्रा में रहने का प्रयास करें और धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें।
अब अंत में गहरी सांस छोड़ते हुए प्रारम्भिक अवस्था में धीरे-धीरे वापस आएं।
सावधानियां :
इस आसन को करने के लिए गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
आंख या कान में संक्रमण या ब्लड प्रेशर की समस्या हो, तो इस आसन को करने से बचें।
कलाई में दर्द या दिक्कत होने की स्थिति में आपको सावधान रहने की आवश्यकता है, वरना तकलीफ बढ़ सकती है।
कंधे, कमर, पीठ और बाजुओं में तकलीफ है, तो इस प्रक्रिया को नहीं करना चाहिए।
8. सलंब सर्वांगासन
कैसे है लाभदायक :

ऊपर बताए गए आसनों की ही तरह यह आसन भी चिंता, अवसाद और तनाव के साथ-साथ हृदय और श्वसन संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। जैसा कि आप जानते है साइनस श्वास संबंधी एक विकार है, इसलिए इसका उपयोग इस समस्या को दूर करने में लाभकारी सिद्ध हो सकता है (6)।
करने का तरीका :
सबसे पहले योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। इस दौरान हाथों को शरीर के साथ सीधा सटाकर रखें।
अब अपने पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और जितना हो सके पीछे की ओर ले जाने का प्रयास करें।
अब अपने हाथों से कमर व कूल्हों को सहारा दें और उन्हें भी जमीन से ऊपर उठा लें।
इसके बाद कोहनियों को जमीन पर सटाते हुए पीठ को अपने हाथों से सहारा दें और पैरों को सीधा करें।
ध्यान रहे, ऐसा करते वक्त घुटने व पैर आपस में मिले हुए होने चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि इस दौरान शरीर का पूरा भार आपके कंधों, सिर व कोहनियों पर हो। साथ ही ठुड्डी छाती को छू रही हो।
इस मुद्रा में कुछ सेकंड तक रहें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
अब गहरी सांस छोड़ें और धीरे-धीरे प्रारम्भिक स्थिति में वापस आ जाएं।
सावधानियां :
थायराइड के रोगियों को प्रशिक्षक के साथ ही इस आसन को करना चाहिए।
हृदय रोग से पीड़ित इस आसन को करने से बचें।
हर्निया की समस्या में इस आसन को नहीं करना चाहिए।
गर्दन या कंधे में चोट या दर्द होने पर इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए।
नोट : ध्यान रहे कि उपरोक्त दिए गए आसनों को अगर आप पहली बार करने जा रहे हैं, तो किसी योग ट्रेनर की उपस्थिति में ही इसे करें।

अब तो आप साइनस की समस्या को अच्छे से जान ही गए होंगे। साथ ही आपको यह भी पता चल गया होगा कि साइनस के उपचार के लिए योग किस प्रकार सहायक साबित हो सकता है। वहीं, आपको लेख के माध्यम से कुछ योगासनों के बारे में भी बताया गया, जिनके साइनस की समस्या में प्रभावकारी परिणाम देखने को मिलते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस समस्या से पीड़ित हैं या फिर योग को नियमित दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं, तो जरूरी है कि पहले लेख में दी सभी जानकारियों को अच्छे से पढ़ लें। उसके बाद ही सुझाए गए तरीकों को इस्तेमाल में लाएं। इस संबंध में अगर कोई अन्य सुझाव या सवाल हो, तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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