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हृदय रोग से बचने के लिए योग मुद्रा –


हृदय रोग से बचने के लिए योग मुद्रा – 

दिल की धड़कन ही है, जो हमें जीवित होने का एहसास दिलाती है। साथ ही हृदय पूरे शरीर में रक्त को प्रवाहित कर सेहतमंद जीवन सुनिश्चित करने में मदद करता है। इसलिए, कहा जा सकता है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हृदय का स्वस्थ रहना जरूरी है। अगर आप भी अपने हृदय को विभिन्न रोगों से बचाना चाहते हैं, तो कुछ आसान योग मुद्राओं को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। जी हां, हम योगासन की नहीं, बल्कि योग मुद्राओं की बात कर रहे हैं। आप आसानी से योग मुद्राएं सीखकर इसका स्वास्थ्य लाभ उठा सकते हैं। हम आपको स्टाइलक्रेज के इस लेख में विभिन्न योग मुद्राओं और ह्रदय के लिए योगा मुद्रा के लाभ जैसी तमाम जानकारियां देंगे।

आइए, सबसे पहले जान लेते हैं योग मुद्रा क्या हैं।

कैसे हृदय के लिए लाभदायक है योग मुद्रा – How Does Yoga Mudra Help with Heart in Hindi
हृदय रोग से बचने के लिए योगा मुद्रा – Yoga Mudra For Healthy Heart in Hindi
कैसे हृदय के लिए लाभदायक है योग मुद्रा – How Does Yoga Mudra Help with Heart in Hindi

योग भारत द्वारा विश्व को दिया गया एक अनमोल तोहफा है। इसके स्वास्थ्य लाभों की वजह से सभी देशों ने इसे अपनाया है। योग में आसन के साथ-साथ विभिन्न मुद्राएं भी हैं, जिन्हें आप सीखकर स्वास्थ्य लाभ उठा सकते हैं (1)। ये मुद्राएं हृदय रोग के जोखिम कारक जैसे हृदय संबंधी परेशानी और चयापचय सिंड्रोम को दूर करने में मदद करती हैं। आज के समय में सैकड़ों चिकित्सा केंद्र हृदय रोगियों को ठीक करने के लिए योग सिखा रहे हैं (2)। दरअसल, योग को नियमित रूप से करने से आपका रक्तचाप नियंत्रित रहता है। बीपी ठीक रहने से हृदय रोग के जोखिम कम होते हैं। इसके अलावा, योग बारोरिसेप्टर (Baroreceptor) की संवेदनशीलता को बनाए रखने में मदद करता है। बारोरिसेप्टर रक्तचाप में होने वाले बदलाव को डिटेक्ट करने वाला रिसेप्टर होता है (3)।

ह्रदय के लिए योगा मुद्रा के लाभ कई हैं, यह तो आप जान गए हैं। अब बात करते हैं हृदय रोगों के लिए विभिन्न योग मुद्राओं की, जो इस प्रकार हैं।
हृदय रोग से बचने के लिए योगा मुद्रा – Yoga Mudra For Healthy Heart in Hindi
1. अपान वायु मुद्रा
अपान मुद्रा और वायु मुद्रा से मिलकर अपान वायु मुद्रा का निर्माण होता है। दोनों के संयोजन से बनी यह मुद्रा आपके हृदय को लाभ पहुंचाती है। अपान वायु मुद्रा को हृदय मुद्रा व मृत संजीवनी मुद्रा भी कहा जाता है। दिल के दौरे को कम करने के लिए अपान वायु मुद्रा एक इंजेक्शन की तरह काम करती है। आप इसका अभ्यास जितनी बार चाहें उतनी बार कर सकते हैं। हार्ट के मरीजों और बीपी के मरीजों को बेहतर परिणाम के लिए दिन में दो बार 15 मिनट इसे करने की सलाह दी जाती है (4)।

अपान वायु मुद्रा की विधि :
सबसे पहले जमीन पर मैट या चटाई बिछा लें।
आप पद्मासन या सुखासन किसी अवस्था में बैठ सकते हैं। अगर घुटनों को मोड़ने में असमर्थ हैं, तो कुर्सी पर बैठ सकते हैं।
बैठने के बाद यह सुनिश्चत करें कि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो।
अब अपने हाथों को सीधा करके घुटनों पर रखें।
ध्यान रहें कि हाथों की हथेलियां आसमान की ओर रहें।
अब अपने हाथों के तर्जनी अंगुली यानी इंडेक्स फिंगर को मोड़ते हुए अंगूठे की जड़ में लगाएं।
अब अनामिका (रिंग फिंगर) और मध्यमा (इंडेक्स फिंगर) को मोड़कर अंगूठे की नोक को दबाएं।
इस दौरान कनिष्ठिका यानी छोटी अंगुली तनी हुई व बाहर की ओर फैली हुई हो।

2. प्राण मुद्रा

स्वस्थ हृदय के लिए योग मुद्रा काफी लाभदायक हैं। प्राण मुद्रा भी दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए की जाती है। इस मुद्रा को प्रतिरक्षा प्रणाली के समग्र स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है। इससे शरीर का रक्षा तंत्र (डिफेंस मकेनिज्म) सक्रिय होता है, जिसकी मदद से हमारे शरीर को सभी बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है (4) (5)। इसलिए, इस मुद्रा को हृदय संबंधी रोगों को दूर भगाने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा, इस मुद्रा का नियमित अभ्यास थायराइड और कैंसर से लड़ने में भी फायदेमंद पाया गया है (4) (5)।

प्राण मुद्रा की विधि :
जमीन पर योग मैट बिछाकर पद्मासन या सिद्धासन में बैठें।
ध्यान रहे कि आपके रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए।
अब अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रखें।
आपकी हथेलियां आकाश की तरफ होनी चाहिए।
अब अपने हाथ की सबसे छोटी अंगुली (कनिष्ठा) और अनामिका को अंगूठे के नोक से स्पर्श करें।
अन्य हुई दो अंगुलियों को फैलाएं।
ध्यान रहे कि इस दौरान अंगुलियों के बीच ज्यादा दवाब न बने।
इस मुद्रा में आपको 48 मिनट तक रहना चाहिए।
3. सूर्या मुद्रा

सूर्या मुद्रा शरीर को संतुलित करती है। इसकी मदद से शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है। इसके अलावा, यह मुद्रा वजन कम करने में भी मदद करती है (4) (5)। इन दोनों के नियंत्रित रहने से हृदय रोग का खतरा कम होता है। दरअसल, कोलेस्ट्रोल की अधिक मात्रा की वजह से हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इसके अलावा, मोटापा भी हृदय रोग के जोखिम कारकों में शामिल है (6)।

सूर्या मुद्रा की विधि :
फर्श पर योग मैट बिछाकर पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं।
अब अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रख लें।
हथेलियों की दिशा आकाश की तरफ रखें।
सूर्य मुद्रा करने के लिए सबसे पहले अपनी अनामिका अंगुली (रिंग फिंगर) को मोड़ लें।
अब अंगूठे से अनामिका अंगुली को दबा लें।
इस मुद्रा को रोज करीब 5 से 15 मिनट तक करें।

सावधानी :
कमजोर लोगों को यह मुद्रा न करने की सलाह दी जाती है। साथ ही इसे गर्मियों में भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस मुद्रा की वजह से शरीर में काफी ज्यादा गर्मी पैदा होती है।
4. लिंग मुद्रा
लिंग मुद्रा करने से आप अपने बढ़ते वजन को नियंत्रित कर सकते हैं। जैसा कि हम आपको ऊपर बता ही चुके हैं कि बढ़ते वजन की वजह से हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। ऐसे में इस मुद्रा का नियमित रूप से अभ्यास करने से बढ़ते वजन को रोका जा सकता है। साथ ही हृदय संबंधी रोग के खतरों को भी कम किया जा सकता है। इसके अलावा, लिंग मुद्रा करने से बलगम यानी कफ बनने की समस्या से भी राहत मिल सकती है। इससे आप अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य को भी ठीक रख सकते हैं (4) (5)।

लिंग मुद्रा की विधि :
अन्य मुद्राओं की तरह इसके लिए भी आप पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं।
अब अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें।
इसके बाद बाएं हाथ के अंगूठे को ऊपर की तरफ उठाएं।
इस मुद्रा को करीब 5 से 15 मिनट तक करें।
सावधानी :
आप इस मुद्रा का अभ्यास कभी भी कर सकते हैं, लेकिन इसे ज्यादा न करने की सलाह दी जाती है। इसे करने से ज्यादा पसीना निकलता है। इसलिए, आपको इस मुद्रा को करने के दौरान बराबर मात्रा में पानी, जूस और फल का सेवन करते रहना चाहिए।
5. गणेश मुद्रा

गणेश मुद्रा को भी हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना गया है। इस मुद्रा को करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम हो सकता है। साथ ही कमजोर हृदय वाले लोगों के दिल को मजबूत करने में भी गणेश मुद्रा को लाभदायक माना गया है (5)।

गणेश मुद्रा की विधि :
इस मुद्रा को करने के लिए आप पहले जमीन पर मैट बिछाकर बैठ जाएं।
अब दोनों हाथों को छाती के समानांतर लेकर आएं।
अपनी दोनों हथेलियों में से एक को ऊपर की ओर रखें और दूसरे को नीचे की ओर।
अब दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मोड़कर एक टाइट ग्रिप बनाएं, जैसा कि ऊपर फोटो में दिखाया गया है।
इसके बाद सांस भरते हुए दोनों हाथों को खींचें।
अब सांस छोड़ते हुए हाथों को ढीला छोड़ें।
इसके बाद हाथों की अवस्था को बदलें यानी जो हाथ ऊपर था उसे नीचे और नीचे वाले हाथ को ऊपर की ओर ले आएं।
हाथों के स्थान को बदलने के बाद इस प्रक्रिया को दोहराएं।
आप इसे 5 से 6 बार कर सकते हैं।
हृदय रोगों के लिए योग मुद्राएं कितनी जरूरी हैं, यह तो आप जान ही गए होंगे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि योग मुद्राओं से हृदय स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि समग्र सेहत का ख्याल रखा जा सकता है। बस जरूरत है तो अपनी व्यस्त दिनचर्या से सेहत को दुरुस्त रखने के लिए कुछ समय निकालने की। योग मुद्राओं को शुरू करने से पहले आप यह जान लें कि इसके परिणाम आपको एकदम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे नजर आएंगे, इसलिए आपको संयम के साथ इसे करते रहना होगा। योग मुद्राओं से संबंधित कोई सवाल अगर आपके जहन में है, तो आप नीचे दिए कमेंट बॉक्स के माध्यम से हमारे साथ जुड़ सकते हैं। आप योग से संबंधित अपने अनुभव हमारे साथ साझा भी कर सकते हैं।
योग करें, निरोग रहें!

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