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प्रेग्नेंट महिला


प्रेग्नेंट महिला को रात को देर से सोने से कौन-कौन सी दिक़्कतें आती हैं?
प्रेग्नेंट महिला को रात को देर से सोने से कौन-कौन सी दिक़्कतें आती हैं?
गर्भावस्था के दौरान महिला को खान पान के अलावा भी बहुत सी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की उठते समय, बैठते समय, सोते समय पूरी सावधानी की जरुरत बरतनी पड़ती है। क्योंकि गर्भवती महिला यदि किसी भी काम को करने में थोड़ी सी भी लापरवाही बरतती है तो इससे न केवल महिला को नुकसान पहुँचता है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी इसके कारण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा महिला को अपनी नींद का भी अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है न केवल महिला को केवल नींद पूरी करने का ध्यान रखना पड़ता है बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए समय से सोना भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि महिला रात को देरी से सोती है और सुबह देरी से उठती है तो इसके कारण महिला की पूरी दिनचर्या गड़बड़ हो जाती है जिसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है।
गर्भवती महिला को देर रात को सोने के नुकसान

वजन बढ़ने के कारण, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण हो सकता है की गर्भवती महिला को बेड पर जाते ही नींद न आये लेकिन महिला को समय पर बेड पर चले जाना चाहिए। क्योंकि महिला यदि सोने की कोशिश करती है तो पांच से दस मिनट बाद नींद आ जाती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला की रात को देर से सोने की आदत है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को रात को देर से सोने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।
वजन
गर्भवती महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है लेकिन यदि वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने लग जाये तो यह गर्भवती महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। और यदि गर्भवती महिला देर रात तक जगी रहती है तो महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि देर से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या होने के कारण मेटाबोलिज्म रेट पर असर पड़ता है जिसके कारण महिला को वजन बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही देर रात तक जगे रहने के कारण भूख भी लगती है जिसके कारण आप जरुरत से ज्यादा आहार भी खा सकते हैं, और आहार का जरुरत से ज्यादा सेवन गर्भवती महिला के वजन को बढ़ा सकता है।
ब्लड प्रैशर

ब्लड प्रैशर की समस्या का गर्भवती महिला को होना गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। और यदि गर्भवती महिला देर रात तक नहीं सोती है तो इसका असर महिला की रक्तचाप पर पड़ता है जिसके कारण महिला को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को यदि ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होती है तो इसके कारण महिला को दिल सम्बंधित समस्या के होने का भी खतरा रहता है।
मूड में बदलाव

रात को देर से सोने पर सुबह देरी से उठना या जल्दी उठना दोनों के ही कारण महिला के स्वभाव में फर्क आ सकता है। जैसे की महिला को अधिक गुस्सा या चिड़चिड़ापन महसूस होना, और गर्भवती महिला का अधिक गुस्सा करना गर्भ में शिशु पर गलत असर डाल सकता है।
यादाश्त

यदि गर्भवती महिला रात को देरी से सोती है तो इसका बुरा असर महिला के सोचने की क्षमता पर भी पड़ता है। जैसे की महिला को चीजों को भूलने की समस्या हो सकती है। और कई बार इसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है क्योंकि महिला कुछ चीज रखकर भूल जाती है की कहां रखी थी।
गेस्टेशनल शुगर

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है और यदि महिला रात को देरी से सोती है तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है। क्योंकि देर से सोने के कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है जिसके कारण ब्लड में शुगर के लेवल के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान परेशान होना पड़ सकता है।
इम्यून सिस्टम
गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। और इसके साथ यदि प्रेग्नेंट महिला देरी से सोती है तो बॉडी में हार्मोनल असंतुलन के कारण इम्युनिटी और भी कम हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण यानी की बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रमण से बचाव और इम्युनिटी को मजबूत बनाये रखने के लिए गर्भवती महिला को रात को देरी से सोने से बचना चाहिए।
आलस

रात को देरी से सोना मतलब सुबह देरी से उठना या फिर यदि आप जल्दी भी उठ जाती हैं तो नींद पूरी न होने के कारण फ्रेश महसूस नहीं होता है। थोड़ी थोड़ी देर में उबासियाँ आती है, आँखे नींद से भरी रहती है, किसी काम को करने का मन नहीं करता है, आलस और भी ज्यादा होने लगता है। और इन सब लक्षणों का गर्भवती महिला के साथ होना किसी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को आमंत्रित कर सकता है। ऐसे में इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए गर्भवती महिला को रात को समय से सोना चाहिए और सुबह समय से उठना चाहिए।
शारीरिक परेशानी

थकान, कमजोरी, सिर दर्द, शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या रात को देरी से सोने के कारण गर्भवती महिला को हो सकती है। और इनके कारण महिला को सोने, उठने, बैठने सब चीजों में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
पेट सम्बंधित समस्या

महिला के देर से सोने के कारण शरीर की बहुत सी क्रियाएं बुरी तरह से प्रभावित होती है जैसे की देर से सोने के कारण महिला की पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान अधिक परेशान होना पड़ सकता है।
तनाव

देर रात को सोने के कारण गर्भवती महिला मानसिक रूप से भी परेशानी का सामना कर सकती है। जैसे की महिला को तनाव जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला का तनाव लेना न केवल प्रेग्नेंट महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या को बढ़ा सकता है बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुँच सकता है।

तो यह हैं कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां जो गर्भवती महिला को रात को देरी से सोने के कारण हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए गर्भवती महिला को रात को समय से सोना चाहिए। साथ ही अपनी नींद को पूरा लेना चाहिए ताकि नींद के कारण होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला और शिशु के स्वास्थ्य पर किसी भी तरह का गलत प्रभाव न पड़े।

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