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पीरियड्स के दौरान इन बातों का भी रखें ख्याल



पीरियड्स के दौरान इन बातों का भी रखें ख्याल
बिजी लाइफस्टाइल में बहुत जरूरी है कि आप पीरियड्स के दौरान अपनी स्वच्छता का पूरा ख्याल रखें क्यों कि अगर ऐसा नहीं किया तो बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.


बिजी लाइफस्टाइल में बहुत जरूरी है कि आप पीरियड्स के दौरान अपनी स्वच्छता का पूरा ख्याल रखें क्यों कि अगर ऐसा नहीं किया तो बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसीलिए आज हम आपको बताएंगे की कैसे पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई बनाए रखें और बीमारियों से भी बचे रहें…

1. ब्लीडिंग के दौरान रखें साफ-सफाई

पीरियड्स के दौरान शरीर से ब्लीडिंग होने पर विशेष रूप से अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ रखना महत्वपूर्ण है. इस हिस्से की सफाई के लिए गर्म पानी और इंटिमेट या वैजाइनल वाश का उपयोग करें.

2. कभी भी एक साथ दो पैड का इस्तेमाल न करें

कुछ महिलाएं ज्यादा फ्लो के समय सावधानी वश 2 सेनेटरी पैड का उपयोग करती हैं. यह उचित नहीं क्यों कि यह योनि क्षेत्र में संक्रमण का कारण बन सकता है. इसीलिए एक ही पैड का इस्तेमाल करें और यदि फ्लो अधिक हो तो इसे बदलते रहें.

3. आरामदायक, साफ अंडरवियर पहनें

अपने सैनिटरी पैड को बदलते समय आवश्यक है इन दिनों कुछ आरामदायक अंडरवियर पहने. केवल कौटन या कपड़े से बने अंडरवियर जो आप की स्किन को सांस लेने की अनुमति देते हैं. सिंथेटिक और टाइट अंडरवियर भी संक्रमण को आमंत्रित करते है.

हमेशा प्राइवेट पार्ट्स को आगे से पीछे की तरफ धोएं या पोंछें. यह महत्वपूर्ण है क्यों कि विपरीत दिशा में सफाई, बैक्टीरिया का रास्ता बना सकती है जिस से संक्रमण हो सकता है.

4. अक्सर उत्पादों को बदले

एक सैनिटरी उत्पाद आप के शरीर के संपर्क में जितना लंबा होगा, संक्रमण का खतरा उतना ही अधिक होगा. बहुत लंबे समय तक रहने पर पैड रशेस पैदा कर सकते हैं और संक्रमण भी पैदा कर सकते हैं. आम तौर पर एक पैड का उपयोग 6 घंटे तक किया जा सकता है. टैम्पोन को भी हर 2 से 3 घंटे में बदलने की आवश्यकता होती है.



पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई न करना हो सकता है खतरनाक
पीरियड्स के दर्द से जूझना पड़ता है. लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि तकलीफ की वजह से आप उन दिनों खुद की देखभाल करना छोड़ दें.


महिलाओं और लड़कियों के लिए प्रत्येक महीने 4 -5 दिन काफी थकावट वाला और दर्द भरा होता है. यह वक्त है जब उन्हें पीरियड्स के दर्द से जूझना पड़ता है. लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि तकलीफ की वजह से आप उन दिनों खुद की देखभाल करना छोड़ दें. बल्कि उन दिनों आप के प्राइवेट पार्ट्स को ज़्यादा देखभाल की जरुरत होती है. आइये जानते हैं इंटरनेशनल फर्टिलिटी सेंटर की डौ रीता बख्शी से कि पीरियड्स के दिनों में साफ-सफाई क्यों जरुरी है और कैसे रखी जा सकती है-

1. यूरिन इन्फेक्शन्स

पीरियड्स के दौरान खुद को साफ न रखना बहुत सारे बैक्टीरियाज को आमंत्रित करता है जो आगे चल कर यूरिन इन्फेक्शन्स की वजह बन सकते हैं. इस से पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ किडनी भी प्रभावित हो सकती है.
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2. रैशज

यह एक बहुत ही आम समस्या है और लगभग हर दूसरी महिला ने कभी न कभी इस का अनुभव किया है. पीरियड्स के दौरान होने वाले रैशेज का मुख्य कारण सैनिटरी नैपकिन को बारबार बदलना नहीं है. आधुनिक समय के नैपकिन बनाने में कंपनियां अच्छी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य सामग्री का उपयोग करते हैं जो आप की स्किन के लिए अनुकूल नहीं है. इस के अलावा 4-6 घंटे से अधिक के लिए एक नैपकिन का उपयोग करने से रक्त उस के आसपास के संक्रमण का कारण बन सकता है जिस से स्किन पर चकत्ते और जलन होती है.

3. सफेद डिस्चार्ज
प्राइवेट पार्ट्स से व्हाइट डिस्चार्ज हर बार अस्वस्थ परिस्थितियों की ओर इशारा नहीं करता है. लेकिन पीरियड्स के दौरान अस्वच्छता आप की योनि में बैक्टीरिया का कारण बन सकती है और परिणामस्वरूप सफेद डिस्चार्ज हो सकता है. इस लिए ज़रूरी है कि इस हिस्से को पीरियड्स के दौरान साफ़ और स्वच्छ रखें.

4. बांझपन की संभावना

पीरियड्स के दौरान अशुद्ध कपड़ों का उपयोग करना या लंबे समय तक एक ही सैनिटरी नैपकिन या टैम्पोन का उपयोग करना बैक्टीरिया के विकास को सुविधाजनक बना सकता है. ये बैक्टीरिया बांझपन की संभावना बढ़ा सकते हैं.

5. सरवाइकल कैंसर की संभावना

पीरियड्स के दौरान अस्वच्छता की वजह से कैंसर के विकास की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं. महिलाओं के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे अपने पीरियड्स के दौरान न केवल खुद को साफ रखें बल्कि नियमित रूप से अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई कर के हमेशा स्वच्छता बनाए रखें.



जब त्यौहारों में पीरियड्स शुरू हो जाएं
उत्सवों की मस्ती में माहवारी से जुड़ी समस्याएं बाधा बनें तो ये टिप्स आप के काम आएंगे...






लेखक-पूजा भारद्वाज

फैस्टिवल के मस्तीभरे माहौल में हरकोई मस्ती के मूड में होता है, लेकिन महिलाओं के त्योहारों का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब उन्हें ऐसे मौकों पर पीरियड्स शुरू हो जाते हैं. तब इस दौरान होने वाली थकावट, कमर व पेट दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग और सिरदर्द जैसी समस्याएं उन के सारे उत्साह को कम कर देती हैं और वे चाह कर भी कुछ नहीं कर पातीं. उन की हर योजना धरी की धरी रह जाती है. घर के बाकी लोगों को मस्ती करते देख उन के चेहरों पर उदासी छा जाती है. ऐसे में अगर वे इन बातों का खयाल रखें तो उन के त्योहार की चमक भी फीकी नहीं पड़ेगी:

रहें टैंशन फ्री

ऐसे समय में महिलाएं खुद को एक सीमित दायरे में बांध लेती हैं और बीमार सा महसूस करती हैं, जबकि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह तो प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए दब कर नहीं खुल कर जीएं. पीरियड्स को ले कर ज्यादा तनाव न लें, क्योंकि ज्यादा तनाव लेना उन की सेहत पर भारी पड़ सकता है. इसलिए सोच सकारात्मक रखें, तो ज्यादा बेहतर है. सब से जरूरी बात है कि परिस्थिति कैसी भी हो खुश रहें, क्योंकि जब आप अंदर से खुश रहेंगी, तो आप के चेहरे पर आने वाले ग्लो की बात ही कुछ अलग होगी.

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हौट वाटर बोतल से सिंकाई

पीरियड्स के दौरान पेट में अगर ज्यादा दर्द हो, तो आप गरम पानी की बोतल से सिंकाई भी कर सकती हैं, क्योंकि पीरियड्स में पेट की निचली तरफ गरम पानी की बोतल से सिंकाई करने से यूटरस की मांसपेशियों को आराम मिलता है और दर्द से राहत मिलती है.

साफ-सफाई का रखें खास ध्यान

पीरियड्स के दौरान साफसफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि सेहत पर इस का बुरा असर न पड़े. इस दौरान पर्सनल साफसफाई का ध्यान रखने से आप कई तरह की बीमारियों जैसे यूटीआई और इन्फैक्शन से भी बच सकती हैं और इस में सब से अहम रोल उस पैड या सैनिटरी नैपकिन का होता है, जिस का आप पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल करती हैं. इस के अलावा पीरियड्स के दौरान ऐंटीबायोटिक साबुन या क्लींजर से प्राइवेट पार्ट की सफाई करें. स्नान जरूर करें, क्योंकि इस से आप तरोताजा महसूस करेंगी और खिलीखिली नजर आएंगी.

कंफर्ट है जरूरी

आज भी ऐसी कई महिलाएं हैं, जो पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड्स की जगह गंदे कपड़े, न्यूजपेपर, पत्ते या फिर गलत पैड्स का इस्तेमाल करती हैं, जिस में खुद को असहज महसूस करती हैं और कपड़े गंदे होने के डर से कहीं जाती नहीं और त्योहार का भरपूर आनंद नहीं ले पाती हैं. इसलिए इस समय में सिर्फ पैड्स का ही इस्तेमाल करें ताकि आप खुल कर जी सकें.

सही पैड ही चुनें

पीरियड्स के दौरान लंबे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल आप के लिए घातक साबित हो सकता है. इसलिए पैड कितनी भी अच्छी क्वालिटी का क्यों न हो कम से कम दिन में 3 बार जरूर चेंज करें, साथ ही पैड की क्वालिटी पर भी ध्यान दें, क्योंकि कई महिलाएं सस्ते के चक्कर में उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता कर लेती हैं और कम पैसों में घटिया ब्रैंड के नैपकिन यूज करने लगती हैं, जिस से उन्हें रैशेज हो जाते हैं.

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वैसे तो बाजार में विभिन्न कंपनियों के सैनिटरी नैपकिन मौजूद हैं, लेकिन नाइन की बात ही कुछ खास है, क्योंकि यह आप को खुल कर जीने की आजादी देता है और यह डाईऔक्सिन मुक्त है, जो सर्विकल कैंसर होने के खतरे को नियंत्रित करता है. इस के अलावा यह हैवी फ्लो में कामयाब है और लीक भी नहीं होता है. इसे डिस्पोज करना भी काफी आसान है, साथ ही यह पौकेट फ्रैंडली भी है.

जरूरी बातें

– सैनिटरी नैपकिन को 3-4 घंटे में बदलती रहें.

– माहवारी में हाइजीन का पूरापूरा ध्यान रखें ताकि आप को इन्फैक्शन न हो.

– माहवारी में प्राइवेट पार्ट की सफाई पर ध्यान दें.

– सूती अंडरवियर पहनें.

– माहवारी में डीहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है, इसलिए अधिक पानी पीएं.
– इस समय तंग कपड़े पहनने से बचें. ढीले कपड़े पहनें.


पीरियड्स प्रौब्लम: उन दिनों में क्या खाएं
माहवारी के दौरान व बाद में महिलाओं को आहार संबंधी किन जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए, जानिए 
महिलाओं को यौनारंभ की उम्र से ले कर मेनोपौज तक लगभग 18 मिग्रा. प्रतिदिन आयरन का सेवन करना जरूरी है. माहवारी के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव को मीनोरहेजिया कहा जाता है. इस से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. एक अनुमान के मुताबिक प्रजनन उम्र की 5 फीसदी महिलाओं में हैवी पीरियड्स के कारण आयरन की कमी की वजह से ऐनीमिया हो जाता है. पीरियड्स के दौरान ज्यादा रक्तस्राव से महिलाओं में आयरन की कमी की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में इस आहार के सेवन से आयरन की कमी को पूरा किया जा सकता है.
हीम आयरन
हीम आयरन पशु उत्पादों में पाया जाता है. हीम आयरन नौनहीम आयरन की तुलना में जल्दी अवशोषित हो जाता है. इन खाद्यपदार्थों में हीम आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
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चिकन लिवर
चिकन लिवर की एक सर्विंग में 12.8 मिग्रा. आयरन होता है, जो रोजमर्रा की जरूरत का 70 फीसदी होता है.

शैलफिश

100 ग्राम शैलफिश में 28 मिग्रा. तक आयरन होता है, जो रोजमर्रा की जरूरत का 155 फीसदी होता है.

अंडा
100 ग्राम उबले अंडे में 1.2 मिग्रा. आयरन होता है.

नौनहीम आयरन

नौनहीम आयरन पौधों से मिलने वाले खाद्यस्रोतों में पाया जाता है. यह हीम आयरन की तरह शरीर में तेजी से अवशोषित नहीं होता. किंतु शाकाहारी लोगों के लिए यह आयरन का प्रभावी स्रोत है. नौनहीम आयरन के निम्न सब से अच्छे स्रोत हैं-

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, स्विस कार्ड, काले और बीट ग्रीन्स की हर सर्विंग में 2.5, 6.5 मिग्रा. आयरन होता है, जो रोजमर्रा की जरूरत का 14 से 40 फीसदी होता है. पत्तागोभी और ब्रोकली भी आयरन के अच्छे स्रोत हैं.
टमाटर

टमाटर की प्यूरी या पेस्ट के आधे कप में लगभग 3.9 मिग्रा. आयरन होता है. इस के अलावा टमाटर में विटामिन सी भी होता है, जो आयरन के बेहतर अवशोषण में मदद करता है.


अमरंथ

अमरंथ एक प्रकार का ग्लूटेनरहित अनाज है. पके अमरंथ के 1 कप में 5.2 मिग्रा. आयरन होता है. यह रोजमर्रा की जरूरत का 29 फीसदी होता है. इस के अलावा यह प्रोटीन का भी संपूर्ण स्रोत है.

ओट्स

ओट्स भी ग्लूटेनरहित सुपर अनाज है. यह आहार कई तरह से फायदेमंद है. पके ओट्स के 1 कप में रोजमर्रा की जरूरत का 19 फीसदी आयरन होता है. यह आहार पाचनतंत्र के लिए भी फायदेमंद है.

किडनी बींस/राजमा

उबले राजमा का 1 कप 4 मिग्रा. आयरन देता है. राजमा प्रोटीन, फाइबर के भी अच्छे स्रोत हैं और ब्लड शुगर का स्तर भी सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं.
खजूर
खजूर प्राकृतिक चीनी के सब से अच्छे स्रोतों में से एक है. इस के अलावा 100 ग्राम खजूर में रोजमर्रा की जरूरत का 5 फीसदी आयरन होता है.
चने/छोले
100 ग्राम चने में 6.6 मिग्रा. आयरन होता है. इस में प्रोटीन और फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
सोयाबीन
सोयाबीन के 1 कप में 8.8 ग्राम आयरन होता है.
आयरन के अवशोषण से जुड़े पहलू

आयरन से युक्त आहार का सेवन विटामिन सी के साथ करना चाहिए, क्योंकि विटामिन सी के साथ आयरन के अवशोषण की दर 300 फीसदी तक बढ़ जाती है. इसलिए अपने आहार में संतरा, किवी, नीबू, अंगूर और टमाटर भी शामिल करें.

खाने के साथ चायकौफी का सेवन न करें, क्योंकि इस से आयरन के अवशोषण की दर 50 से 90 फीसदी कम हो जाती है. चाय में मौजूद टैनिन और कौफी में मौजूद कैफीन आयरन के अवशोषण को रोकता है.

कैल्सियम का सेवन ज्यादा मात्रा में करने से आयरन के अवशोषण की दर कम हो जाती है. इसलिए आयरन से युक्त आहार के साथ दूध, चीज, लस्सी आदि का सेवन न करें.

मीट, फिश और पोल्ट्री में आयरन होता है, जो शरीर में तेजी से अवशोषित होता है.
पके पालक में ज्यादा आयरन मिलता है, क्योंकि कच्चे पालक में औक्जेलिक ऐसिड या आक्सेलेट होता है, जो आयरन के अवशोषण में बाधक बन सकता है. पके भोजन के सेवन से आयरन के अवशोषण की दर बढ़ जाती है.

अनाज, लैग्यूम, सोयाबीन में फायटेट्स होते हैं, जिन से आयरन के अवशोषण की दर कम हो जाती है.



जानें प्रेग्नेंसी के दौरान करने वाली इन एक्सरसाइज के बारे में
प्रेग्नेंसी के दौरान डौक्टर कुछ खास एक्सरसाइज बताते हैं, जिसे करने से मां और बच्चे की सेहत बनी रहती है.

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई प्रौब्लम का सामना करना पड़ता है. कई बार ये प्रौब्लम्स प्रेग्नेंसी में ज्यादा न करने व एक्सरसाइज न करने से होता है. इसीलिए जरूरी है कि प्रेग्नेंसी में एक्सरसाइज करना न भूलें. प्रेग्नेंसी के दौरान डौक्टर कुछ खास एक्सरसाइज बताते हैं, जिसे करने से मां और बच्चे की सेहत बनी रहती है. साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली प्रौब्लम्स से भी छुटकारा मिलते है.

कम्फर्ट के अनुसार करें एक्सरसाइज

एक्सरसाइज शरीर को मजबूती प्रदान करने वाले होने चाहिए. इस के लिए आप तैराकी करें, टहलें और अपने शरीर को स्ट्रैच करें. ये एक्सरसाइज हफ्ते में 3 बार किए जा सकते हैं. होने वाली मां ध्यान रखें कि उतनी ही देर तक एक्सरसाइज करें जितनी देर तक वे इस में कम्फर्ट महसूस करें. यह बात बेहद महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर और सुविधा के अनुसार ही एक्सरसाइज करें क्योंकि एक्सरसाइज के दौरान हार्ट रेट सामान्य ही होनी चाहिए. आप इसे इस तरह ले सकती हैं कि एक्सरसाइज के समय आप आराम से किसी से बातचीत कर सकें. आइए आपको बताते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान किए जाने वाली खास एक्सरसाइज के बारे में…

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1. स्क्वाट्स
यह पैरों के लिए बहुत अच्छा एक्सरसाइज है. पैरों को कंधे के बराबर में खोलें. अपनी रीढ़ की दिशा में नाभी को अंदर खीचें और एबडौमिनल्स को टाइट करें. धीरे-धीरे अपने शरीर को नीचे की ओर झुकाएं जैसे कि आप कुरसी पर बैठी हों. यदि आप इतनी नीचे जा सकें कि आप के पैर आप के घुटनों की सीध में आ जाएं तो अच्छा होगा. लेकिन ऐसा न हो तो आप जितनी कोशिश कर सकती हैं उतना ही नीचे जाएं. यह सुनिश्चित कर लें कि आप के घुटने आप के पैरों की उंगलियों के पीछे हैं. 4 तक गिनती गिनें और फिर धीर-धीरे अपने शरीर को पहले वाली स्थिति में वापस ले आएं. इस प्रक्रिया को 5 बार दोहराएं.
2. केगेल एक्सरसाइज

केगेल एक्सरसाइज मूत्राशय, गर्भाशय और आंत का समर्थन करने वाली मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. गर्भावस्था के दौरान इन मजबूत मांसपेशियों के सहारे आप आराम से प्रसव पीड़ा को झेल सकती हैं और शिशु को जन्म दे सकती हैं. केगेल करने के लिए आप को ऐसा सोचना पड़ेगा जैसे आप मूत्र के प्रवाह को रोकने का प्रयास कर रही हों. ऐसा करते वक्त आप पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को नियंत्रित करेंगी. ऐसा करते वक्त 5 बार गिनती गिनें. इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं. यह एक्सरसाइज दिन में 3 बार करना चाहिए.
3. ऐबडौमिनल एक्सरसाइज

इस अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं. जमीन पर पैरों को मोड़ कर बैठें और पीठ एकदम सीधी रखें. अब अपने पेट को अंदर की तरफ लें और उन्हें टाइट रख कर 10 सैकंड तक रखें. लेकिन यह सुनिश्चित कर लें कि ऐसा करते वक्त आप को सांस नहीं रोकनी है. इस के बाद आराम से अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं. इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं.

4. कैट ऐंड कैमल एक्सरसाइज
यह अभ्यास आप की पीठ और पेट को मजबूत बनाता है.इस अभ्यास को करने के लिए चटाई पर हाथों और घुटनों के बल बैठ जाएं. घुटने आप के कूल्हे की सीध में होने चाहिए और कलाई कंधों की सीध में. साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि पेट लटक न रहा हो.अब अपना सिर झुकाएं और अपने पेट को अंदर की तरफ ले जाएं. अपनी रीढ़ की हड्डी को ऊपर की तरफ निकालें. इस अवस्था में 10 सैकंड तक रहें. लेकिन सांस लेना बंद न करें.

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5. एक्सरसाइज के लिए चेतावनी संकेत

– सीने में दर्द, पेट में दर्द, पैल्विक पेन या लगातार संकुचन.

– भ्रूण की स्थिति में ठहराव आना.

– योनि से तेजी से तरल पदार्थ का स्राव होना.


– अनियमित या तेज दिल की धड़कन.

– हाथपैरों में अचानक सूजन आ जाना.

– चलने या सांस लेने में दिक्कत.

– मांसपेशियों में कमजोरी.

– एक्सरसाइज तब भी हानिकारक है जब आप को गर्भावस्था से संबंधित कोई परेशानी हो.

– प्लेसैंटा का गर्भाशय ग्रीवा के पास होना या गर्भाशय ग्रीवा को पूरी तरह से कवर करना.

– पिछले प्रसव के दौरान आई समस्याएं जैसे प्रीमैच्योर बेबी का जन्म या समय से पहले लेबर पेन उठी हो.
फिट हैं तो हिट हैं
शारीरिक रूप से फिट रहना कौन नहीं चाहेगा. लेकिन इस के लिए एक अनुशासित लाइफस्टाइल की जरूरत है. इसलिए जरूरी है कि कुछ नियम बनाए जाएं. सो, आप भी अपनाइए फिट रह कर हिट रहने का फंडा.

‘‘आज भी सुबह नहीं उठ पाई मैं. मुझ से यह ऐक्सरसाइज और डाइटिंग नहीं होगी. मैं मोटी ही ठीक हूं,’’ 23 साल की रिचा ने मुंह बनाते हुए अपनी दोस्त नगमा से कहा. ‘‘हां, बस रोज अपने आलस के कारण सोती रहना और फिर मेरी बौडी देख कर जलना,’’ जौगिंग से आई नगमा ने रिचा को डांटते हुए कहा. हर सुबह रिचा का यही रोना होता कि कल से पक्का सुबह जल्दी उठ कर जौगिंग करने जाएगी और ऐक्सरसाइज करेगी. लेकिन वह दिन कभी आया ही नहीं.

नगमा जहां फिटनैस को ले कर पूरी तरह चौकस रहा करती थी, वहीं रिचा के पास बहानों की कमी नहीं थी. उसे ऐसा लगता था कि बस कोई जादू की छड़ी घुमाए और वह दुबलीपतली व स्मार्ट हो जाए. न उसे अपनी पसंद का खाना छोड़ना पड़े और न ही सुबह की नींद खराब हो.

रिचा जैसा हाल आज तकरीबन हर लड़की का है और केवल लड़की ही क्यों, लड़कों का भी यही हाल है. सैक्सी वैल टोंड बौडी की चाहत तो सभी को है लेकिन उस के लिए मेहनत करने को कोई तैयार नहीं है.

लड़कों को वरुण धवन और रितिक रोशन जैसे सिक्स पैक एब्स तो चाहिए, लेकिन जिम में पसीना बहाने में आफत आती है. कभी सही डाइट न मिल पाने की मजबूरी, तो कभी नौकरी और पढ़ाई से समय न मिल पाने का रोना.
अक्सर लोग पैसा कमाने और अच्छे लाइफस्टाइल के चक्कर में भूल जाते हैं कि जब उन का शरीर ही फिट नहीं रहेगा तो क्या फायदा पैसे और लग्जरी लाइफ का. जिंदगी में हर छोटीबड़ी बात को तवज्जुह देते लोग अपने शरीर को ही तवज्जुह देना भूल जाते हैं. कहीं आप भी तो इसी लाइन में नहीं खड़े हैं? अगर ऐसा है तो कोई बात नहीं, अब भी देर नहीं हुई है, अब भी हैल्दी लाइफस्टाइल अपनाना मुश्किल नहीं है.

दिमाग के लिए भी जरूरी है अच्छी डाइट

केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क पर भी अच्छी डाइट का गहरा प्रभाव पड़ता है. आप यदि फिट होंगे तभी आप का दिमाग भी फिट होगा. आप का दिमाग आप की हरेक हरकत पर ध्यान रखता है. आप के सोचने, सांस लेने, काम करने और यहां तक कि आप के खाने तक का हिसाब होता है आप के दिमाग के पास. इसलिए आप जो कुछ भी खाते हैं उस का सीधा असर आप के दिमाग की संरचना और कार्य पर पड़ता है. और फिर, इस से आप का मूड भी प्रभावित होता है.

कह सकते हैं कि एक हैल्दी डाइट से मानसिक स्थिति पर ठीक वैसा ही प्रभाव पड़ता है जैसा कि अच्छे ईंधन का प्रभाव गाड़ी के इंजन पर होता है. सही पोषण वाला भोजन हमारे शरीर ही नहीं, हमारे दिमाग की सेहत का भी खयाल रखता है. विटामिन, मिनरल्स और एंटीऔक्सिडैंट तत्त्वों से भरपूर आहार हमारे दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है.
आहार निश्चित करें

बर्गर, पिज्जा, फ्रैंच फ्राइज, चौकलेट्स, आइसक्रीम, यम्मी केक… क्यों आ गया न मुंह में पानी. लेकिन, पेट आप का है तो इस का मतलब यह नहीं कि जो जी में आया, खाते गए. इसलिए जरा अपनी मनमानियां कम करें. इन यम्मी और टेस्टी फास्टफूड को खाने की मात्रा और दिन निश्चित करें. जब आप भूख छोड़ कर स्वाद के लिए खाते हैं तो आप के शरीर का मोटापा बढ़ता है.

फोर्टिस ला फेम्मे हौस्पिटल की डाक्टर नीना बहल का कहना है, ‘‘एक बार में ज्यादा खाना खाने से बचें. बारबार लेकिन थोड़ाथोड़ा खाएं. इस से शरीर को उचित ऊर्जा मिलेगी. अगर आप पूरे दिन के खाने में अधिक समय का अंतराल रखते हैं तो आप के शरीर का बीएमआई यानी बौडी मास इंडैक्स कम हो जाता है. बौडी मास इंडैक्स एक ऐसा मापदंड है जिस से पता चलता है कि आप के शरीर के अनुपात में शरीर की चरबी कितनी अधिक है.


बौडी मास इंडैक्स बताता है कि शरीर की लंबाई की तुलना में कितना वजन उचित है. इसलिए, पूरे दिन के खाने में अधिक गैप रखना आप की फिटनैस पर बुरा असर डाल सकता है. पूरे दिन कुछ न खा कर एक ही बार रात में 4,000 कैलोरी वाले आहार लेना भी नुकसानदेह साबित होता है. फिजिकल ऐक्टिविटी कम होने के बाद जब हम हाई कैलोरी की चीजें खाते हैं तो वह फैट के रूप में शरीर में जमा होने लगता है.
आसान है हैल्दी डाइट

डाइट पर जाने का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को भूखा रखें. ध्यान रखें, शरीर का खयाल रखना है, उसे भूखा रख कर सताना नहीं है. इसलिए ऐसी डाइट लें जिस से आप को कमजोरी या भूख न लगे.

-अपनी डाइट में मौसमी फलों को शामिल करें. अगर सलाद खाना है तो उस में अलग रंगों वाले फलों और सब्जियों को रखें.

-नाश्ते में पनीर, सैंडविच के साथ ताजा जूस लें या मिलीजुली सब्जियों वाला परांठा खाएं. आप 2 इडली के साथ सांभर भी ले सकते हैं.

-अगर आप अंडा खाते हैं, तो एक से दो अंडे के साथ एक गिलास दूध लें या 2 अंडे के साथ ब्रैडऔमलेट खाएं. ब्रैड के साथ पीनट बटर भी ले सकते हैं.

नाश्ते में आप नमकीन या मीठा दलिया, ओट्स, पोहा या उपमा भी शामिल कर सकते हैं. इस से आप के नाश्ते में विविधता आएगी और आप बोर नहीं होंगे. रोजरोज सादा या आलू का परांठा खाने से बचें. इस की जगह आप पनीर या मिक्स वैजिटेबल वाला परांठा खा सकते हैं.

-नाश्ते और दोपहर के भोजन के बीच 4 से 5 घंटे का अंतराल होता है. इस बीच बिलकुल भूखे न रहें. एक सेब या ड्राई फ्रूट्स या स्प्राउट्स (अंकुरित मूंग या सोयाबीन) ले सकते हैं.


-दोपहर के खाने में 2 चपाती के साथ हरी सब्जी, दाल, दही एक भरपूर आहार का स्रोत होता है. हरी सब्जी में मौसमी सब्जियों का सेवन कर सकते हैं.

शाम के स्नैक्स में भुने चने, मूंगफली, मखाने या ड्राई फ्रूट्स के साथ ग्रीन टी लें. ग्रीन टी मंु कैलोरी नहीं होती, इसलिए इसे दूध की चाय की जगह लेना बेहतर होता है.

-रात के खाने में आप 2 चपाती या एक कटोरी चावल, एक कटोरी दाल और सब्जी, सलाद खा सकते हैं. अगर आप मांसाहारी हैं तो चिकन या मछली भी खा सकते हैं. रैड मीट का सेवन सप्ताह के केवल एक दिन करें. अगर आप का मन मीठा खाने का होता है तो किशमिश खाएं.

-ज्यादा तली चीजें लेने से परहेज करें और साल्ट यानी जिन फूड प्रोडक्ट्स में सोडियम की मात्रा अधिक है उसे कम से कम लें. कोशिश करें कि कम से कम दिन में 4 से 5 वक्त का आहार लें. एक सेब भी एक वक्त के आहार में आता है. पूरे दिन के 3 भरपूर और 3 हलके आहार लें.
एब्स बनाने के लिए
जिम में पसीने बहाने और थकाने वाली कसरत करने भर से एब्स नहीं आते. उस के लिए सही मात्रा में सही आहार भी लेना जरूरी है. लक्ष्मीनगर में लाइफलाइन युनिसैक्स जिम के ट्रेनर टीटू त्यागी बताते हैं, ‘‘जिम में एब्स के लिए वर्कआउट करने से 20-25 प्रतिशत फायदा ही होता है. एब्स बनाने के लिए मसल्स को ऊर्जा देने और शरीर में जमा फैट को बर्न करने के लिए उचित और भरपूर आहार लेना जरूरी है.

50-60 प्रतिशत काम केवल हैल्दी डाइट ही कर सकती है, जिस में कार्ब्स और फाइबर वाले आहार के साथ उबले और भुने हुए आहार भी शामिल होने चाहिए. उस के साथ ही 20 प्रतिशत काम शरीर को मिले आराम से हो जाता है जिस के लिए कम से कम 6-7 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है.’’


सिक्स पैक एब्स के लिए मुख्यतौर पर पुशअप, सिटअप, क्रंचेस, प्लैंक्स, स्क्वैट्स आदि किया जा सकता है. कुछ आसान एक्सरसाइजेस हैं जिन्हें आप कर सकते हैं.
पुशअप

पुशअप से शरीर का ऊपरी भाग मजबूत होता है. इस से मुख्यतया छाती मजबूत और चौड़ी होती है. कंधे, बांह, कमर और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं.

पुशअप कैसे करें

-जमीन पर घुटनों के बल लेट जाएं.

-अपनी हथेलियों और उंगलियों को जमीन पर रख कर शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं.

-शरीर ऊपर उठाते समय हाथों को बिलकुल सीधा रखें.

-ध्यान रखें कि आप के हिप्स नीचे की तरफ न आएं.

-इस मुद्रा में एक मिनट तक बने रहें, फिर शरीर को नीचे की तरफ लाएं.
-इस प्रक्रिया को 10 से 12 बार दोहराएं.



खुद को ऐसे रखें फिट
जिम की मैंबरशिप लेते समय तो बहुत उत्साह रहता है. 15 से 20 दिन रोजाना जिम जा कर कसरत भी बड़े मजे से करते हैं. लेकिन, धीरेधीरे रोज जिम जाना थकाने वाला हो जाता है.
पहला भाग पढ़ने के लिए- फिट हैं तो हिट हैं

जिम की मैंबरशिप लेते समय तो बहुत उत्साह रहता है. 15 से 20 दिन रोजाना जिम जा कर कसरत भी बड़े मजे से करते हैं. लेकिन, धीरेधीरे रोज जिम जाना थकाने वाला हो जाता है. घर का कोई एक कोना जहां आप की कसरत के लिए थोड़ी जगह हो तो वहीं से अपना वर्कआउट शुरू कर दें.

1. सिटअप

सिटअप करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत और टोन होती हैं. इस के साथसाथ यह एब्स एरिया को भी टोन करता है. इस से गरदन, छाती, पीठ का निचला हिस्सा और हिप फ्लैक्सर में मजबूती आती है. इसे नियमित करने से शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है. सिटअप शरीर की मुद्रा को भी सही करता है.

सिटअप कैसे करें 

-किसी स्थान पर ऐक्सरसाइज मैट को बिछा कर उस पर सीधे लेट जाएं.

-दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर जमीन पर रखें.

-अपने दोनों हाथों को क्रौस की स्थिति में कंधे पर रख लें, अर्थात दायां हाथ बाएं कंधे पर और बायां हाथ दाएं कंधे पर रखें.

-अब सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपर के हिस्से को अपने घुटनों की ओर ले जाएं.

-अब सांस लेते हुए दोबारा नीचे की ओर आएं और फिर से लेट जाएं.

2. क्रंचेस

क्रंचेस करने से पीठ के निचले हिस्से और पीठ की मांसपेशियों में चोट आने की संभावना कम होती है. इस से शारीरिक संतुलन में विकास होता है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है. क्रंचेस से कैलोरी अधिक मात्रा में बर्न होती है, साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है.

क्रंचेस कैसे करें

-किसी ऐक्सरसाइज मैट या जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं.

-अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें ताकि आप के पैर जमीन पर एकदम सीधे रहें.

-दोनों हाथों को गरदन या सिर के पीछे रखें और अपने कंधों को जमीन से 7-8 इंच ऊपर की तरफ उठाएं.


-ध्यान रखें कि केवल शरीर का ऊपरी हिस्सा ऊपर उठे और कमर व पीठ जमीन पर ही टिकी रहें.

-इस अवस्था में एक से दो सैकंड रहने के बाद नीचे आ जाएं.

-फिर तुरंत ही वापस उठें और इस प्रक्रिया को 8 से 10 बार दोहराएं.

3. प्लैंक्स

प्लैंक्स से आप के कोर मसल्स में मजबूती आती है और एब्स भी मजबूत होते हैं. प्लैंक्स कंधों, छाती, कमर और पैरों को भी मजबूत बनाता है व शारीरिक संतुलन बेहतर करता है.

प्लैंक्स कैसे करें –

प्लैंक्स के लिए आप पुशअप की अवस्था में आ जाएं.

-अपनी कुहनियों और कलाइयों को जमीन पर टिकाएं.

-अब अपनी पीठ को सीधा करते हुए शरीर को ऊपर उठाएं.

-गरदन से पुट्ठों तक शरीर को एक सीध में रखें.

-शरीर का पूरा भार कुहनियों, कलाइयों और पैरों के पंजों पर रखें.

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-इस अवस्था में एक मिनट तक बने रहें.

-इसे 2 से 3 बार दोहराएं.

4. स्क्वैट्स

स्क्वैट्स करने से मांसपेशियों का विकास होता है. इस से फेफड़े और हृदय मजबूत होते हैं और शरीर के जोड़ों में भी फायदा होता है. इस से कैलोरी बर्न होती है, शरीर में लचीलापन आता है, हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर का संतुलन विकसित होता है.

स्क्वैट्स कैसे करें

-दोनों पैरों को फैला लें और पैरों की उंगलियों को बाहर की तरफ निकाल कर खड़े हो जाएं.

-पीठ सीधी रखें और कंधे को ढीला छोड़ें.

-अपने हाथों को कमर पर रखें या सामने सीधा फैला लें.

-पीठ को सीधा रखते हुए बैठने की मुद्रा में जाएं जैसे किसी कुरसी पर बैठते हैं.

-अपने घुटनों को पंजों के ठीक सीध में रखें और आगे की ओर न झुकें.

-इस अवस्था में एक सैकंड तक रह कर वापस सीधे खड़े हो जाएं.

-शुरुआत में इसे 10 बार दोहराएं.


5. घर को बना लें जिम

जिम की मैंबरशिप लेते समय तो बहुत उत्साह रहता है. 15 से 20 दिन रोजाना जिम जा कर कसरत भी बड़े मजे से करते हैं. लेकिन, धीरेधीरे रोज जिम जाना थकाने वाला हो जाता है. घर का कोई एक कोना जहां आप की कसरत के लिए थोड़ी जगह हो तो वहीं से अपना वर्कआउट शुरू कर दें.

घर की बालकनी या टैरेस का भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां आप को ऐक्सरसाइज मैट डालने की जगह आराम से मिल जाएगी.

अगर आप का बजट सही हो तो आप जिम के कुछ इक्विपमैंट भी रख सकते हैं, जैसे डंबल्स, बारबेल रौड, मल्टी बैंड, वैट लिफ्टर आदि. इन सब से आप की पूरे बौडी की वर्कआउट हो जाती है. साथ ही, ऐक्सरसाइज करने के लिए स्पोर्ट्स शूज और वर्कआउट ड्रैस भी ले सकते हैं.

6. पर्सनल ट्रेनर भी है अच्छा

अगर आप रोजाना जिम जाने के झंझटों से बचना चाहते हैं तो पर्सनल फिटनैस ट्रेनर भी रख सकते हैं. वे आप को ऐक्सरसाइज करने के सही तरीकों के बारे में गहराई से बताएंगे और सब से अच्छी बात कि वे आप को पूरा समय और अपना पूरा ध्यान देंगे. इस से आप को अपने हर एक फिटनैस लैवल के बारे में सही जानकारी मिलेगी, ऐक्सरसाइज सही कर रहे हैं या नहीं. कौन सी ऐक्सरसाइज को करने से कितना फायदा होगा जैसी छोटीछोटी बातें वे आप को बताएंगे जिस से कि आप बिना डर और वहम के ऐक्सरसाइज का फायदा उठा सकेंगे.

कैसे रखें जिम किट का ध्यान 

-अपनी जिम किट में इक्विपमैंट्स को पानी से बचा कर रखें. पानी से जंग लगने की संभावना रहती है.

-मल्टी बैंड का इस्तेमाल व्यायाम के अलावा किसी और काम के लिए न करें.

-वर्कआउट क्लौथ को कुछ दिनों के अंतराल पर धोना चाहिए.

-अपनी जिम किट को बच्चों की पहुंच से दूर रखें.


-भारी डंबल्स ऐसी जगह पर रखें जहां से वे गिरें नहीं.

-कुछ दिनों के अंतराल पर इक्विपमैंट के नटबोल्ट्स की जांच करते रहें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न घटे.

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-इक्विपमैंट की सफाई के लिए स्प्रे की जगह जिम वाइप्स का इस्तेमाल करें.

7. डांस भी है फायदेमंद

अगर आप अपने डेली वर्कआउट रूटीन से बोर हो गए हैं और कुछ मजेदार करना चाहते हैं तो डांस ऐक्सरसाइज शुरू कर दें. अगर आप को डांस की जानकारी है तो फिर बात ही क्या है, और अगर जानकारी नहीं है तो भी कोई परेशानी नहीं है. इस के लिए आप डांस क्लास जा सकते हैं या डांस वर्कआउट डीवीडी या औनलाइन वीडियो देख कर भी डांस, जैसे बालरूम या बैलेट, हिपहौप, एरोबिक्स कर सकते हैं. इन से आप के शरीर की लचक बढ़ेगी और साथ ही आप के मसल्स मजबूत होंगे व शारीरिक संतुलन भी बनेगा.

जिन्हें दिल की बीमारी है या हाई कोलैस्ट्रौल या डायबिटीज की समस्या है, उन के लिए भी डांस वर्कआउट बहुत फायदेमंद होता है. अगर आप की बीमारी ज्यादा गंभीर है तो पहले अपने डाक्टर से परामर्श ले लें. रोजाना 30 मिनट डांस ऐक्सरसाइज करने से 130 से 250 कैलोरी कम होती है. इतनी ही कैलोरी जौगिंग से भी बर्न होती है. अगर आप के शरीर में किसी प्रकार की कोई चोट हो या आप पहले से अस्वस्थ हों तो किसी भी नई ऐक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करने से पहले अपने डाक्टर से सलाह जरूर लें.

8. यह भी करके देखें

दिनभर औफिस में बैठे रहने या ऐसे काम करने जिन से आप का शारीरिक श्रम न के बराबर होता हो और आप के शरीर से बहुत ही कम मात्रा में कैलोरी बर्न होती हो, तो उस स्थिति में यह जरूरी है कि ऐक्सरसाइज के अलावा भी छोटीछोटी बातों का ध्यान रख कर फिजिकली ऐक्टिव रहा जाए.
-लिफ्ट की जगह सीढि़यों का प्रयोग करें.
-बाजार अगर ज्यादा दूर न हो तो गाड़ी या दूसरी सवारी के बजाय पैदल चल कर जाएं.
-औफिस के लंचटाइम में 15 मिनट का वाक कर लें.
-पूरे दिन बैठे रहने की जगह कुछ घंटे खड़े हो कर भी काम करें.
एक अध्ययन के मुताबिक, अगर आप दिन के 6 घंटे खड़े रहते हैं तो आप का कुछ वजन कम हो सकता है.
-इस के अलावा अपना काम खुद से करने की आदत डालें. इस से आप के शरीर में हरकत होती रहेगी.
-अपने साथ कुछ हैल्दी स्नैक्स रखें और जरूरत से अधिक खाने से बचें.
-पूरे दिन में पानी पीते रहें, ताकि आप के शरीर में पानी की कमी न होने पाए.

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