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नवजात शिशुओं के पेट में होने वाली परेशानियों


नवजात शिशुओं के पेट में होने वाली परेशानियों को कैसे दूर किया जाएं?

आमतौर पर यह बात सब जानते हैं कि नवजात बच्चों का पालन-पोषण करना कोई आसान काम नहीं है। छोटे बच्चों की पाचन-क्रिया बहुत ही नाजुक एवं संवेदनशील होती है। इसीलिए शिशुओं के खानपान में एक छोटी सी गलती या छोटा सा बदलाव नवजात शिशु की पाचन-क्रिया को प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाएं जब नयी -नयी माँ बनती हैं, तो ऐसे में माताएं अपने नवजात शिशु के स्वास्थ्य के प्रति हमेशा काफी चिंतित रहती हैं।

छोटे शिशुओं में जो आम समस्या आती है वो है पेट में दर्द, पेट में मरोड़, बुखार आना, उल्‍टी-दस्‍त (डायरिया) कब्‍ज, गैस तथा नवजात शिशु का बार-बार रोना आदि।

शिशु के पाचन तंत्र की समस्‍याओं के लिए कुछ घरेलू उपाय प्रस्तुत हैं…


स्तनपान करवाने की तरीका
ध्यान रहें नवजात शिशु को स्तनपान कराते समय सिर हमेशा पेट से अधिक ऊंचा होना चाहिए। यह शिशु को दूध पिलाने का अच्छा तरीका है, इससे दूध आसानी से पेट में चला जाता है। इससे शिशु के पाचन तंत्र, गैस या एसिड की समस्या भी नहीं होती है। पर आप बच्चे को बिस्तर पर लेट कर दूध न पिलाएं, बल्कि हमेशा उनको अपने गोदी में बिठाकर दूध पिलाएं।

शिशु की मालिश
आप अपने छोटे बच्चे की मालिश प्रतिदिन कर सकते हैं। मालिश करने से शिशु की पाचन-तंत्र से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं, परन्तु आप अपने शिशु की मालिश हल्‍के हाथों से करें तथा पेट व छाती के आस-पास ज्‍यादा जोर न दें। मालिश के लिए अच्‍छा क्रीम व हल्‍की खुशबू वाला बेबी ऑयल ही प्रयोग करें।


शिशु को दूध पिलाने के बाद पीठ थपथपाएं
शिशु को दूध पिलाने के बाद हमेशा अपने कंधे पर रखकर उन्हें अपने हल्के हाथ से पीठ को थपथपाना चाहिए। इससे बच्चे को पेट में होने वाली समस्याएं जैसे- कब्ज, पेट दर्द की संभावना कम होती है। यह अपच से राहत दिलाती है तथा शिशु को उल्‍टी की समस्या से राहत दिलाती है।

शिशु को ग्राइप वाटर पिलाएं
इस गर्मी के मौसम में अपने शिशु को ग्राइप वाटर पिला सकते हैं। यह शरीर को ठंडक एवं राहत दिलाती है, साथ ही यह शिशु के पेट से संबंधित समस्याओं के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता है। यह पानी, सोडियम बाइकार्बोनेट के अलावा कई तरह की जड़ी-बूटियां से बना होता है। अगर आपके शिशु को गैस की समस्‍या है तो इसे पिलाना एक बेहतरीन उपचारों में से है।


बच्चें को केवल मां का ही दूध पिलाएं
6 से 8 महीने तक के बच्चों को केवल माँ का ही दूध पिलायें। अगर आपके शिशु को मां का दूध पिलाने के बाद पाचन-क्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो आप सबसे पहले मां के दूध के अलावा जरूरत से ज्यादा खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ न दें। जब तक आपका बच्चा पूर्ण रूप से विकसित न हो जाए, तब तक स्तनपान करवाते रहें। जब आपका बच्चा खाने -पीने में सक्षम हो तो ही आप कुछ खिलाने की कोशिश करें।
इन छोटी मोटी सावधानियों को ध्यान में रखने से आसानी से बच्चों के स्वास्थ्य-सम्बन्धी समस्या से निपटा जा सकता है।

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