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संगीत और सेहत की संगत


संगीत और सेहत की संगत
संगीत की ताक़त कितनी है और कहां तक है, अगर संगीत में थोड़ी-बहुत दिलचस्पी है, तो आपको ज़रूर पता होगा. इतिहास की मानें तो तानसेन जब राग मेघ मल्हार गाते थे, तो बारिश होती थी और राग दीपक से दीप जल जाते थे. संगीत में इस कदर की शक्ति होती है, कि वह बहरे को भी थिरकना सिखा देती है. संगीत की सकारात्मकता हमारी सेहत को भी फ़ायदा पहुंचाती है, और शायद इसीलिए हवा, पानी, नदी, समुद्र, पक्षी और हम इंसानों के भीतर क़ुदरतन संगीत भरी हुई है. आयुर्वेद देह और मस्तिष्क को संतुलित करने के लिए संगीत को थैरेपी के रूप में मान्यता देता है. संगीत-चिकित्सा शरीर को बदलने का एक परिष्कृत तरीक़ा उपलब्ध कराती है. संगीत ‘शांतिदायक’ या ‘उत्तेजक’ से कहीं बहुत अधिक है.

संगीत की धुन, उसकी लय हमारे हृदय को कई तरह से प्रभावित करती है. जैसे रोमैंटिक या इंस्प्रिरेशन वाले गाने सुनकर हमारे अंदर एक आनंद की लहर दौड़ जाती है, लेकिन वहीं जब हम ग़म भरे गाने सुनते हैं, तो उदास हो जाते हैं. कुछ धुनों को सुनना हमें अच्छा नहीं लगता, लेकिन कुछ को हम निर्बाध रूप से कई घंटे सुन सकते हैं. ऐसा क्यों है, क्या आपने कभी सोचा है? कहा जाए कि हम संगीत आनंद के लिए सुनते हैं, पर हर शरीर के लिए आनंद के मायने अलग होते हैं.

कल्पना कीजिए, आप कार चला रहे हैं और आपका बेटा आपके साथ है. कार में किशोर कुमार का गाया गाना ‘आ चल के तुझे मैं ले के चलूं इक ऐसे गगन के तले’ बत रहा हो, तब आप अपने बेटे को देखकर बड़ा सुकून महसूस करेंगे. वहीं थोड़ी देर बाद महेन्द्र कपूर का गाया गाना ‘होगा मसीहा सामने तेरे, फिर भी न तू बच पाएगा, तेरा अपना ख़ून ही कल फिर तुझको आग लगाएगा ’ यक़ीन मानिए इन दोनों गीतों को सुनते समय आपका मन बिल्कुल अलग अवस्था में होगा. इस उदाहरण से आप संगीत का स्वास्थ्य के नज़रिए से महत्व समझ गए होंगे. आपका ग़म, सुकून देनेवाले नग़मों को सुनकर कम होगा और दर्द भरे नग़मों से बढ़ेगा. सोते समय जब मां लोरियां गाती हैं, तो सुनकर बच्चों को सुकून की नींद आती है. इससे आप समझ गए होंगे कि बचपन से ही संगीत हमारे शरीर और मस्तिष्क पर कितना अधिक प्रभाव डालती है.

तय है संगीत सुनने का समय
वैदिक संगीत पाठों में यह निर्देश दिया गया है कि सुबह, दोपहर और शाम के लिए कौन-सा राग उपयुक्त है. दोपहर के बाद वात अपने शिखर पर पहुंच जाता है, तब अधिक शांत संगीत सुनना चाहिए, यह शरीर की थकावट को दूर कर सकता है और मस्तिष्क के तनाव को कम करता है. यदि उचित रूप से इन्हें सुना जाए तो कई रोगों से बचा जा सकता है.

दस मिनट का संगीत और पाएं सेहतमंद शरीर
यदि आप अपने रक्तचाप को कम करना चाहते हैं, तो हल्के, मंद शास्त्रीय संगीत को सुनना अच्छा होता. कई तरह के शारीरिक दोषों को स्वरों से संतुलित और असंतुलित किया जाता है. यदि आप सोने की कोशिश करते हैं, पर आपका मस्तिष्क अभी भी चिंतन कर रहा है और नींद नहीं आ रही है, तो आप संगीत सुनकर इस परेशानी को दूर कर सकते हैं.

संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल करके कुछ हद तक आम परेशानियों को दूर किया जा सकता है. सुबह के समय में शांति से जगने के लिए, भोजन के बाद पाचन को सक्रिय करने के लिए, सोने के लिए, जब आप बीमार हों तब स्वास्थ्य लाभ के लिए, अगर आप वज़न कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो दिन में कई बार पांच मिनट तक कोई इंस्ट्रूमेंट सुनें, यह मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने में मदद करता है. ज़्यादा टेंशन और परेशानी फ़ील कर रहे हैं, तो शांत संगीत सुनें, यह आपके मन को शांति देगा.
संगीत सुनने का सही तरीक़ा?
संगीत सुनने के लिए अपनी आंखें बंद करके शांत बैठ जाएं और अपना ध्यान संगीत की तरफ़ लगाएं. अगर आपका मन भटके तो इसे आराम से संगीत पर ले आएं. वही संगीत सुनें, जो आपकी प्रकृति से मेल खाता हो. यह पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत, पारंपरिक भारतीय राग और वर्तमान समय का संगीत भी हो सकता है. यदि संगीत सुनने से आप ख़ुद को ख़ुश, हल्का और एनर्जेटिक महसूस कर रहे हैं, तो समझ जाएं कि संगीत अपना काम कर रहा है

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