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माँ-बेटे की महान कथा


माँ-बेटे की महान कथा (माँ के ह्रदय में बेटे के लिए प्यार और बेटे का माँ के प्रति विचार
माँ-बेटे का हृदय,
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माँ-बेटे :- एक माँ ने अपने पति के देहान्त के बाद बेटे को अत्यधिक कष्ट उठाकर पाला – पोसा, उच्च शिक्षा दलाई और उसे डॉक्टर बनाया ।

सांसारिक कर्तव्य पूरे किये , उसकी शादी भी पढ़ी – लिखी सुन्दर कन्या से करवा दी ।

कुछ दिन तो ठीक चला , लेकिन जैसा कि होता आया है , पढ़ी – लिखी बहू को सास नागवार गुजरने लगी ।

वह अपने पति को बार बार कहने लगी – मों को वृद्धाश्रम में भेज दो ।

पति को अच्छा तो नहीं लग रहा था |

लेकिन आखिर पत्नी के दबाव के आगे झुककर माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आया ।

आते वक्त कहा – माँ ! मैं तुम्हारे लिए प्रतिमाह पांच सौ रुपये ।

भेजता रहूंगा तथा समय – समय पर तुम्हारे पास मिलने के लिए आऊंगा ।

माँ ने मना किया , लेकिन उसने रुपये तो भेजना शुरू कर दिया , माँ से मिलने वह कभी नहीं जा सका ।

भेजता रहा तथा समय – समय पर तुम्हारे पास मिलने के लिए आऊगा ।

माँ ने मना किया , लेकिन उसने रुपये तो भेजना शुरू कर दिया |

माँ से मिलने वह कभी नहीं जा सका । कुछ वर्ष गुजर गये । माँ बहुत बीमार पड़ी । डॉक्टर ने बेटे को ।

संदेश भेजा गया कि आकर माँ से मिल जाए । उसने कहलाया कि अभी बहुत बीमार हैं , शाम को आता हूँ ।


जब वह शाम को पहुंचा तब तक माँ के प्राण – पखेरू उड़ चुके थे ।

अब अफसोस करने के अलावा बचा ही क्या था ।

उसने वार्डन से पूछा – माँ ने मेरे लिए कुछ कहा था ? ‘ वार्डन ने कहा – आप पूछते हैं कुछ कहा क्या |

अरे ! वह तो हर समय आपको याद ही करती रहती थी |

आपके लिए सदा उसकी आंखों में आंसू रहते थे ।

हाँ , उन्होंने मरने से पहले मुझे दो लिफाफे दिये थे और कहा था |

जब भी आये मेरे बेटे को दे देना ।

यह कहते हुए उसने दोनों लिफाफे डॉक्टर के हाथ पर रख दिये ।

पुत्र ने देखा एक लिफाफा हल्का और दूसरा भारी था ।

उसने पहले लिफाफे को खोला तो उसमें एक पत्र था । उसमें लिखा था – मेरे प्यारे बेटे ! मेरी अंतिम इच्छा थी कि मैं तुमसे मिलू ।

प्यार से तुम्हारा माथा चूहूं ओर ढेर से आशीर्वाद दें , लेकिन मरी इच्छा पूरी न हो सकी ।

मरने से पहले यह पत्र लिखवा रही हूँ ।

तुम मुझे खर्च के लिए प्रतिमाह पांच सौ रुपये भेजते थे , पर यहां घर जैसी ही व्यवस्था थी ।

ढाई साल में मेरे पास 15000 रुपये इकटते हो गए हैं |

ये पैसे मेरे तो काम नहीं आये , लेकिन ये रुपये में तुम्हारे लिए छोड़कर जा रही हूँ ।

तुम तो मेरेअच्छे और उदार पुत्र रहे |

कि मुझे पांच सौ रुपये प्रतिमाह भेजते रहे लेकिन बेटा मुझे डर है कि तुम्हारी जो संतान होगी |

वह शायद तुम्हे पाच सौ रुपये न भेज पाए |

उस वक्त तुम्हें पैसों की आवश्यकता होगी तब ये रुपये तुम्हारे काम आयेंगे ।

इन्हें उस समय के लिए जमा रख लेना ।
-: माँ-बेटे का प्यार :-
तुम्हारी माँ

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