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बवासीर में भूलकर भी ना खाएं ये आहार

बवासीर में भूलकर भी ना खाएं ये आहार, नहीं तो बढ़ जाएगी परेशानी

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खान-पान के कारण आजकल 5 में से 3 लोग किसी ना किसी हैल्थ प्रॉब्लम से परेशान हैं। पाइल्स या बवासीर भी इन्हीं में से एक है। बवासीर भी दो तरह की होती हैं एक खूनी बवासीर और मस्से वाली बवासीर। ये बीमारी एक बार ठीक होने के बाद दोबारा फिर से हो जाती हैं। ऐसे में बवासीर से ग्रस्त लोगों को अपने खान-पान पर बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए। आज हम आपको बताएंगे कि पाइल्स या बवासीर में कौन सी चीजों से परहेज करना चाहिए..

हरी या लाल मिर्च
बवासीर की समस्या होने पर लाला या हरी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए। मिर्च खाने से बवासीर के जख्म एक बार फिर सक्रिय हो जाते हैं। मिर्च के साथ ही गर्म मसाला, चटपटा, तीखा खाना भी नहीं खाना चाहिए।

धूम्रपान और गुटखा
नशे या धूम्रपान का सेवन किसी भी बीमारी को बढ़ाने का काम करता है। वैसे ही सुपारी, गुटखा, पान मसाला, सिगरेट पीने से भी बवासीर की समस्या बढ़ जाती है। जो लोगों बवासीर की समस्या से परेशान है उनको नशे से दूर रहना चाहिए।

फास्ट फूड से बचें
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पाइल्स से पीड़ित लोग फास्ट फूड से जितना हो सके, दूरी बनाएं रखें। फास्ट फूड खाने के बजाए आप, फलों या कुछ खास सब्जियों जैसे- पत्तागोभी, चुकंदर, टमाटर आदि को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं, जो काफी फायदेमंद होते है और इस समस्या से निजात पाने में भी सहायक होते हैं।

पाइल्‍स में भूलकर भी ना खाएं ये आहार, नहीं तो बढ़ जाएगी परेशानी


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लत खान-पान के कारण आजकल 5 में से 3 लोग किसी ना किसी हैल्थ प्रॉब्लम से परेशान हैं। पाइल्स या बवासीर भी इन्हीं में से एक है। बवासीर भी दो तरह की होती हैं एक खूनी बवासीर और मस्से वाली बवासीर। ये बीमारी एक बार ठीक होने के बाद दोबारा फिर से हो जाती हैं। ऐसे में बवासीर से ग्रस्त लोगों को अपने खान-पान पर बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए। आज हम आपको बताएंगे कि पाइल्स या बवासीर में कौन सी चीजों से परहेज करना चाहिए....

हरी या लाल मिर्च
बवासीर की समस्या होने पर लाला या हरी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए। मिर्च खाने से बवासीर के जख्म एक बार फिर सक्रिय हो जाते हैं। मिर्च के साथ ही गर्म मसाला, चटपटा, तीखा खाना भी नहीं खाना चाहिए।

धूम्रपान और गुटखा
नशे या धूम्रपान का सेवन किसी भी बीमारी को बढ़ाने का काम करता है। वैसे ही सुपारी, गुटखा, पान मसाला, सिगरेट पीने से भी बवासीर की समस्या बढ़ जाती है। जो लोगों बवासीर की समस्या से परेशान है उनको नशे से दूर रहना चाहिए।

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फास्ट फूड से बचें
पाइल्स से पीड़ित लोग फास्ट फूड से जितना हो सके, दूरी बनाएं रखें। फास्ट फूड खाने के बजाए आप, फलों या कुछ खास सब्जियों जैसे- पत्तागोभी, चुकंदर, टमाटर आदि को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं, जो काफी फायदेमंद होते है और इस समस्या से निजात पाने में भी सहायक होते हैं।

बाहर का खाना
बवासीर होने पर बाहर का खाना खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि बाहर के खाने में नमक, मिर्च और साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है जबकि घरों में खाना सफाई से बनाया जाता है और मसालों का कम इस्तेमाल किया जाता है। अस्वस्थ खाने से पाइल्स का संक्रमण बढ़ सकता है और दर्द भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।









क्या सेहत के लिए सही हैं ज्यादा पका हुआ केला खाना?


अक्सर लोग हफ्ते के अंत में पूरे सप्ताह का बाजार करके फ्रिज में रख देते हैं। और फिर सब्जी और फल इतने दिनों तक रखने के कारण वह पकने लगते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या फ्रिज में हद से पका हुआ केला ब्रेकफास्ट में खा सकते हैं? चलिये न्यूट्रिशनिस्ट चंदना देसाई से पता लगाते हैं कि ज्यादा पके केले का न्यूट्रिशनल वैल्यु क्या होता है....

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कार्बोहाइड्रेट्स :- जैसे फल पकने लगता है केले का स्टार्च बदल जाता है। कच्चे केले में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट्स होता है लेकिन ज्यादा पके केले में स्टार्च सामान्य शुगर में बदल जाता है। लेकिन जिनको डायबिटीज होता है वह ज्यादा पका केला न खाये तो अच्छा है। क्या आपको पता है कि केले के छिलके का भी एक चमत्कार फायदा होता है।

कैलोरी :- पूरे पके केले में जितना कैलोरी होता है उतना ही कच्चे केले में होता है। अगर आप कैलोरी को लेकर ज्यादा चिंता कर रहे हैं तो ये जान लें कि केले में अन्य फलों की तुलना में ज्यादा कैलोरी रहता है।

एन्टीऑक्सिडेंट्स :- केले में तभी भूरे रंग के दाग होने लगते हैं जब क्लोरोफिल टूट कर एन्टीऑक्सिडेंट में बदल जाता है। इसलिए जब आप स्मूदी में ज्यादा एन्टीऑक्सिडेंट चाहते हैं तो ज्यादा पका केला डाल सकते हैं। अगर आप ज्यादा पका हुआ केला डाल रहे हैं तो चीनी का इस्तेमाल न करें।

विटामिन और मिनरल :- ज्यादा पके केले का माइक्रोन्यूट्रिएन्ट्स कम हो जाता है। जितना फल पकने लगता है वाटर सोल्युब्ल विटामिन फॉलिक एसिड, विटामिन सी और थियामिन कम होने लगता है। ज्यादा पका हुआ केला में भी पोटाशियम उच्च मात्रा में होता है।क्या सेहत के लिए सही हैं ज्यादा पका हुआ केला खाना?

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अक्सर लोग हफ्ते के अंत में पूरे सप्ताह का बाजार करके फ्रिज में रख देते हैं। और फिर सब्जी और फल इतने दिनों तक रखने के कारण वह पकने लगते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या फ्रिज में हद से पका हुआ केला ब्रेकफास्ट में खा सकते हैं? चलिये न्यूट्रिशनिस्ट चंदना देसाई से पता लगाते हैं कि ज्यादा पके केले का न्यूट्रिशनल वैल्यु क्या होता है....

कार्बोहाइड्रेट्स :- जैसे फल पकने लगता है केले का स्टार्च बदल जाता है। कच्चे केले में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट्स होता है लेकिन ज्यादा पके केले में स्टार्च सामान्य शुगर में बदल जाता है। लेकिन जिनको डायबिटीज होता है वह ज्यादा पका केला न खाये तो अच्छा है। क्या आपको पता है कि केले के छिलके का भी एक चमत्कार फायदा होता है।

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कैलोरी :- पूरे पके केले में जितना कैलोरी होता है उतना ही कच्चे केले में होता है। अगर आप कैलोरी को लेकर ज्यादा चिंता कर रहे हैं तो ये जान लें कि केले में अन्य फलों की तुलना में ज्यादा कैलोरी रहता है।

एन्टीऑक्सिडेंट्स :- केले में तभी भूरे रंग के दाग होने लगते हैं जब क्लोरोफिल टूट कर एन्टीऑक्सिडेंट में बदल जाता है। इसलिए जब आप स्मूदी में ज्यादा एन्टीऑक्सिडेंट चाहते हैं तो ज्यादा पका केला डाल सकते हैं। अगर आप ज्यादा पका हुआ केला डाल रहे हैं तो चीनी का इस्तेमाल न करें।

विटामिन और मिनरल :- ज्यादा पके केले का माइक्रोन्यूट्रिएन्ट्स कम हो जाता है। जितना फल पकने लगता है वाटर सोल्युब्ल विटामिन फॉलिक एसिड, विटामिन सी और थियामिन कम होने लगता है। ज्यादा पका हुआ केला में भी पोटाशियम उच्च मात्रा में होता है।



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