Header Ads

कब्ज का रामबाण इलाज: वज्रासन


कब्ज का रामबाण इलाज: वज्रासन
यदि समय पर उपचार नहीं किया जाए तो कब्ज एक खतरनाक जानलेवा बीमारी बन सकती है| इससे पेट सम्बन्धी कई बीमारियाँ जैसे- दस्त, उल्टी, पेट दर्द, जलन आदि हो सकती है| अतः वज्रासन कब्ज के इलाज का एक सर्वोत्तम उपाय है| जो बिना किसी परेशानी के आसानी से किया जा सकता है|

आजकल निरंतर परिवर्तनशील वातावरण ने हमारी जीवनशैली को अत्यधिक प्रभावित किया है| इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है| खान-पान में लापरवाही और फ़ास्ट फ़ूड के बढ़ते चलन ने हमारी पाचन शक्तियों को कमजोर कर दिया है, परिणाम स्वरूप कई बिमारियाँ हमारे शरीर में अपनी जड़े बनाने लगी है| जिनमे से एक है, कब्ज|


अपने व्यस्त जीवन में योग के लिए वक़्त नहीं निकाल पा रहे हैं | देखीये प्रारंभिक योग की हमारी सूची जो आपको योग को अपने जीवन में अपनाने में सहायता करेगी |


आज कल के व्यस्त जीवन में अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद कठिन हो जाता है | ऐसे में योग ने लोगों के जीवन और सेहत को बेहतर बनाने में एक बेहद अहम भूमिका निभाई है | योग कैसे शुरू करें और कौन से आसन ऐसा करने में सहायक होंगे ये इस लेख से जानिए | इन आसनों को करने से आपको ये अंदाज़ा हो जायेगा की योग कैसे किया जाता है | तो चलिए शुरू करते हैं :

1. पर्वत मुद्रा (माउंटेन पोज़)


सीधे खड़े हो कर कन्धों को ढीला छोड़ दें | गहरी सांस ले कर दोनों हाथों को उठा आसमान को छूने की कोशिश करें |
ये आसन आपकी साँसों को शांत कर हाथ , पैर ,घुटनों और जाँघों को ताकत प्रदान करता है |


2. अधो मुख स्वनासन (डाउनवर्ड डॉग)

ये सबसे आम आसन है लेकिन इसमें बेहतर प्रभाव के लिए आपको कुछ देर तक ठहरना होता है | अपने हाथों और पैरों पर लेट शरीर के बीच के हिस्से को उठा लीजिये | अपने हथेलियों और पैरों के तलवों को अच्छे से धरती को दबाने दीजिये | पैरों को एक दूसरे से थोड़ी दूर पर रखिये और घुटनों को हल्का सा झुका लीजिये | ये मुद्रा आपके दिमाग को शांत कर आपमें एक नयी उर्जा का संचार करती है |


3. वीरभद्र आसन (वारियर पोज़ )

एक पैर को आगे को बढ़ा लें और पीछे के पैर को थोड़ा सा उलटी दिशा में रखें | अपने हाथों को अपने कमर पर रखें और आगे वाले पैर को झुका लें | फिर हथेली को नीचे की तरफ कर एक हथेली को आगे और एक को पीछे कर लें | थोड़ी देर रुक दिशा बदल लें | ये आसन आपके पूरे शरीर को ताकत प्रदान करता है और साथ ही साथ ये संयम ,एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाने में मदद करता है |
4. वृक्षआसन (ट्री पोज़)
दोनों हाथ शरीर से सटा कर खड़े हों | फिर एक पैर को उठा दूसरे पैर पर टिका लें | एक बार संतुलन बन जाए तो हाथों को नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें | सांस छोड़ दोनों हाथों को अलग कर ऊपर तक ले जाएँ | 30 सेकंड तक खड़े रहे और फिर दूसरे पैर के साथ दोहराएं | ये आसन आपके पैरों को संतुलन प्रदान करता है और उनसे जुड़ी सभी बीमारियों से आराम दिलाता है |


5. सेतु बंधासन (ब्रिज पोज़)

पीठ के बल धरती पर लेट जायें और दोनों पैर को ठीक से धरती पर टिका लें | इसके बाद अपनी पीठ और कमर के साथ पैरों को इतना उठाएं की सिर्फ तलवे धरती से टिके हों | इस अवस्था में 1 मिनट तक लेटे रहे | इस आसन से खून का संचार बेहतर होता है और पीठ ,रीड की हड्डी और कोल्हू की मांसपेशियां भी मज़बूत होती है |


6. त्रिकोणासन (ट्रायंगल पोज़)


दोनों हाथ पैर फैला कर खड़े हों और उसके बाद एक तरफ से झुक कर दूसरी तरफ का पैर छूने की कोशिश करें | ध्यान रहे दूसरा हाथ आसमान की तरफ हो | 5 साँसों तक रुकने के बाद दुबारा खड़े हो इसकी दिशा बदल लें |ऐसा करने से आपके जीवन से तनाव कम होता है और नपुंसकता ,गर्दन और पीठ के दर्द इत्यादि में भी आराम मिलता है |


7. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (सीटेड ट्विस्ट )
ज़मीन पर पैर फैला के बैठ जाएँ | सीधे पैर को उलटे पैर की जांघ को पार करके रखें | उलटे पैर के घुटने को मोड़ लें और सीधे पैर के घुटने को आसमान की तरफ कर के रखें | उलटे हाथ की कोहनी को सीधे पैर के बगल में और सीधे पैर की कोहनी को अपने पीछे जमीन पर रखें | 1 मिनट तक अपने शरीर को जितना मोड़ सकते हैं मोडें और उसके बाद दिशा बदल किसी कार्य को फिर करें | इस आसन से आपके शरीर के पूर्ण स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है खास तौर से रीढ़ की हड्डी और पीठ |


8. भुजंग आसन (कोबरा)


पेट के बल धरती पर लेटें और हाथों को शरीर के साथ रखें | फिर पूरा दबाव लगते हुए अपने शरीर के उपरी हिस्से को उठाएं और हाथों पर सारी ताकत लगायें | थोड़ी देर रुक वापस से इस आसन को करें | ये आसन आपके तनाव को कम करता है और कंधे ,पेट और छाती की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है |


9. एक पद राज्कपोतआसन (पिजन)

पहले पुश अप वाली अवस्था में आयें | अपने सीधे पैर को मोड़ लें और सीधे हाथ को उसके पास टिका लें |फिर उलटे पैर को पीछे ले जाएँ और थोड़ा सा उठाएं | उलटे हाथ से उस पैर के तलवे को पकड़ने की कोशिश करें | 1 मिनट रुक इसे दिशा बदल दोहराएं | ये आसन मल मूत्र से सम्बंधित तकलीफों को दूर करने में सहायता करता है और अंदरूनी अंगों के स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है |
10. बकासन (क्रो पोज़ )
डाउनवर्ड डॉग मुद्रा में आयें और चलके अपने घुटनों को पैरों तक लेकर जाएँ | कोहनी को झुका लें और हाथों के सहारे से दोनों एड़ियों को ऊपर उठाएं | पैरों को वापस रखें और हाथों को पैरों के साथ मिलाएं | 5 से 10 साँसों तक इसी मुद्रा में रहे | ये आसन आपका संतुलन और एकाग्रता बढ़ाता है और साथ ही पेट की पाचन शक्ति को भी बेहतर बनाता है |
11. बालासन (चायिल्ड्स पोज़)

अपनी एड़ियों को मिला कर बैठें ,अपने शरीर के उपरी हिस्से को झुका लें धरती से छुएं |अपनी छाती को जितना अपने पैरों से मिला सकें मिलाएं और दोनों हाथों को आगे तक बढाएं |इस अवस्था में कुछ क्षणों तक रहे | ये आसन आपके शरीर को आराम देता है और पीठ और रीढ़ की हड्डी की तकलीफ कम करता है |

इससे मोटापा, पेट दर्द, पेट में गड़बड़ी, उल्टी आदि कई पेट सम्बन्धी बीमारियाँ जन्म ले सकती है| इसके उपचार के लिए बाजार में कई औषधियाँ उपलब्ध है परंतु वह कुछ ही समय के लिए कारगर सिद्ध हुई है| इसका सबसे प्रभावशाली उपाय हमें योग में मिलता है|



किसी भी रोग का रामबाण इलाज है योग| कब्ज जैसी समस्या के निवारण के लिए प्रमुख असरकारक योग है-वज्रासन| वज्रासन एक ऐसा आसन है, जिसके अनेक फायदे है| परंतु कब्ज दूर करने के लिए यह एक अचूक उपाय है| योग अभ्यास में वज्रासन ही एक ऐसा आसन है, जो खाना खाने के पश्चात भी किया जा सकता है| इसे “ठंडार्बोल्ट” और “डायमंड पोज़” भी कहा जाता है|

वज्रासन शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है, वज्र का शाब्दिक अर्थ “बलशाली” होता है| योग के जानकार कहते है कि वज्रासन करने से वज्र नाड़ी सुचारू रूप से कार्य करने लगती है| जिससे हमारी पाचन क्रिया तेज होती है और कब्ज से राहत मिलती है| इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण देखा जाये तो वज्रासन करते वक़्त रक्त का प्रवाह शरीर के निचले हिस्से में बाधित होता है| जिसके फलस्वरूप पेट की तरफ रक्त संचार बढ़ने लगता है| जिससे पाचन क्रियाएँ तेज हो जाती है|



योग करने के लिए एक स्वछ व शांतिपूर्ण वातावरण की आवशयकता होती है| वैसे ही वज्रासन भी किया जाता है| कोई भी साफ जगह पर आसान बिछाकर आप इसे कर सकते है| सबसे पहले आसन पर घुटनों के बल इस प्रकार बैठे की आपके पैर पीछे और तलवे ऊपर की ओर दिखाई देवें| इस मुद्रा में आपकी पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए| इस दौरान आपके पैर के अंगूठे एक दूसरे से सटे हुए हो|

फिर अपने हाथों को आगे की ओर ले आये और अपने घुटनो पर रख देवें| फिर अपने शरीर को रिलैक्स फील करवाएँ परंतु घुटनो और पीठ को सीधा ही रखे और मन में शान्ति का आनंद ले| इस क्रिया में श्वांस नाक से लेते हैें| इसलिए यह ध्यान रखे की आसन करते वक़्त मुँह बंद होना चहिये| इस आसन से शरीर की पाचन क्रिया प्रभावित होगी एवं शरीर की पेट सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिलेगा|

जिन्हें घुटनो में दर्द या रीड की हड्डी संबधित कोई परेशानी हो वो यह आसान न करे| वज्रासन घर पर किया जा सकने वाला अचूक उपाय हैे| जो आपकी कब्ज सम्बन्धी परेशानियों को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा|

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.