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प्रेगनेंसी के लक्षण



नॉर्मल डिलीवरी के उपाय – जाने नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है

किसी भी महिला के लिए गर्भवती होना भगवान का सबसे बड़ा उपहार माना गया है। उसके लिए दुनिया की सभी खुशी एक तरफ होती है जबकि बेबी के मां बनने की खुशी एक तरफ होती है। जिस दिन से स्त्री को पता चलता है कि उसके पेट में एक बच्चा पल रहा है, वह पूरी तरह से सावधान हो जाती है और अपने शिशु के लिए वह सभी जरूरी कदम उठाती है जिससे उसका बच्चा सेहतमंद पैदा हो। गर्भवती होने से लेकर शिशु के दुनिया में आने तक महिला के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य तक इस प्रयास में रहते हैं कि बच्चा न केवल स्वस्थ्य हो बल्कि डिलिवरी भी सामान्य रूप से हो या नॉर्मल डिलीवरी हो।


बिना किसी कष्ट के नॉर्मल डिलीवरी हो हर गर्भवती महिला की चाहत होती है लेकिन कमजोर शरीर, बुरी आदतें व प्रेग्नन्सी के साथ जुड़े काम्प्लकेशन ऐसा होने नहीं देते। लेकिन कई बार न चाहते हुए कुछ महिलाओं को सीजेरियन सेक्शन (सर्जरी के जरिए) से गुजरना पड़ता है। वैसे ऐसा कोई लक्षण नहीं होता है जिससे यह पता किया जा सके कि बच्चे की डिलिवरी सीजेरियन हो या नॉर्मल।

हालांकि नीचे दिये गए इन बातों का ध्यान यदि आप देते हैं तो बहुत संभव है कि बच्चे की डिलिवरी नॉर्मल रहेगी।

नॉर्मल डिलीवरी के उपाय

#1 सैर सपाटा

दिन में कुछ समय सैर-सपाटे के लिए निकालें। इससे आप न केवल खुद को रिलेक्स महसूस करेंगे बल्कि ताजी हवा आपके और आपके बच्चे के लिए सुकून का काम करेगी। आप चाहे तो सुबह या शाम कुछ समय अपने घर के आसपास पार्क में टहल सकती हैं।


#2 नियमित रूप से व्यायाम करें

ज्यादातर देखा गया है कि गर्भावस्था में महिलाओं को आराम करने के लिए कहा जाता है, लेकिन आराम के साथ-साथ यह जरूरी है कि अपने आप को स्वस्थ्य रखने के लिए क्या-क्या कर रही हैं। दरअसल प्रेग्नेंसी मांसपेशियों का स्वस्थ्य और मजबूत होना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे प्रसव के दौरान पीड़ा से लड़ने में मदद मिलती है। ध्यान रखें कि व्यायाम करते समय ज्यादा भारी चीजों को न उठाए और किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। अगर आप गलत तरीके से कोई व्यायाम कर रही हैं तो यह आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है और नॉर्मल डिलीवरी में भी बाधक हो सकता है ।


#3 तनाव से दूरी बनाए
तनाव लेना एवं डिप्रेशन में जाना किसी भी अच्छे काम में रुकावट बन सकता है। यही बात आपके गर्भावस्था में भी लागू होती है। तनाव गर्भावस्था में काम्प्लकेशन को भी बढ़ाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव आपके व आपके बच्चे की सेहत पर पड़ेगा। यह एक ऐसा दौर होता है जब आपको शांत और संतुलित रहने की जरूरत है। इसके लिए टीवी पर अच्छा प्रोग्राम देख सकती हैं या फिर कोई अच्छी बुक पढ़ सकती हैं। इसके अलावा आप नकारात्मक चीजों पर ज्यादा ध्यान न दें।


#4 ध्यान और सांस लेने वाले प्राणायाम

प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी हो इसके लिए आप सांस लेने वाले प्राणायाम कर सकती हैं। इसका फायदा यह होता है कि उचित और पर्याप्त ऑक्सीजन बेबी को मिलती रहती है, जिससे बच्चे का सही तरह से विकास भी होता है। इसलिए नियमित रूप से ध्यान और सांस लेने वाले प्राणायाम कीजिए।


#5 पर्याप्त नींद

पर्याप्त, अबाधित और अच्छी नींद नॉर्मल डिलविरी में कई तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा सोने से दो घंटे पहले चाय या कॉफी का सेवन मत कीजिए।

#6 डॉक्टर से लेते रहें सलाह

नॉर्मल डिलीवरी के लिए नियमित रूप से अच्छे डॉक्टर से सलाह लेते रहें। ऐसे समय में डॉक्टर न केवल आपका मनोबल बढ़ाते हैं बल्कि डिलिवरी संबंधित जितने भी डर हैं उनको दूर करते हैं।

डिलिवरी संबंधित यदि आपके दिल में कोई बात है तो उसे बताएं। बात को अंदर दबाने से केवल गुस्सा बढता है जिसके कारण तनाव बढता है। इस दौरान आप दोस्तों, रिश्तेदारों तथा अपने पड़ोसियों से भी बातें कर सकते हैं।


#7 कम न हो पानी का सेवन

गर्भावस्था के दौरान यह ध्यान रखिए कि शरीर में पानी की कमी न हो। पानी केवल आपको हाइड्रेटेड ही नहीं रखता बल्कि नोर्मल डिलिवरी पाने में आपकी सहायता भी करता है।


#8 आहार का ध्यान रखें

प्रेग्नेंसी में आप क्या खा रहे हैं और क्या नहीं खा रहे हैं यह भी आपके नोर्मल डिलिवरी योगदान देते हैं। ऐसी अवस्था में आप सही समय पर सही आहार खाएं। अपने आहार में हरी सब्जियां, जूस, अंडा और फल आदि को शामिल करें। इससे आपको और आपके पेट में पल रहे बच्चे को प्रोटीन और विटामिन मिलते रहेंगे।
प्रेगनेंसी के लक्षण 
Pregnancy symptoms in hindi 


आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं इसका पता आप बाजार में उपलब्ध कई तरह के उपकरणों और दवाईयों से जान सकती हैं। लेकिन इन दवाईयों और उपकरणों के अलावा भी जब शरीर में बदलाव होता है उसके द्वारा भी कोई महिला जान सकती है कि वह गर्भवती होने वाली है या नहीं।

आइए जानते हैं प्रेग्नेंट होने के लक्षण के बारे में

ब्रेस्ट में सूजन

गर्भधारण करने के साथ ही महिला के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं। इससे ब्रेस्ट में सूजन आ जाती है या फिर भारीपन आ जाता है। दरअसल ब्रेस्ट के ऊतक हॉर्मोन्स के प्रति अति संवेदनशील होते हैं इसलिए ऐसा होता है। इसे शुरुआती लक्षणों में से एक मान सकते हैं।

मितली आना और उल्टी आना

कमजोरी जैसा अनुभव हो या फिर कुछ खाने पर उल्टी जैसा महसूस हो तो प्रेग्नेंट के लक्षण कहा जा सकता है। ऐसी अवस्था में चक्कर भी आ सकता है।


निपल का रंग गहरा होने लगता है

कोई महिला गर्भ धारण कर चुकी है या नहीं उसके निपल के बदलते रंग से भी पता चल सकता है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले हॉमोर्नल चेंज से मेलानोसाइट्स प्रभावित होती हैं। यानी इसका प्रभाव उन कोशिकाओं पर पड़ता है जो निपल के रंग के लिए उत्तरदायी होती हैं। इससे निपल का रंग हल्का गाढ़ा होने लगता है।

बार-बार टॉयलेट जाना और सिर में दर्द

ऐसी अवस्था में किडनी ज्यादा सक्रिय हो जाती है और बार-बार टॉयलेट जाने का मन करता है। इसके अलावा ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाने के कारण जब आपके सिर में दर्द होने लगे तो समझे की आप प्रेग्नेंट होने वाली हैं।

क्रेविंग

क्रेविंग भी गर्भवती होने का एक प्रमुख लक्षण है. इसका मतलब यह है कि जब आपका मन अचानक किसी विशेष चीज के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है और ज्यादा भूख लगने लगती है। कई बार यह भी होता है कि भूख न लगे।

तापमान में बढ़ोतरी
गर्भवती होने पर शरीर का तापमान अक्सर सामान्य से ज्यादा होने लगता है और गर्मी लगने लगती है। इसके अलावा पीठ के निचले हिस्से में भी दर्द तथा थकान महसूस होने लगता है।


धब्बे और मुँहासे

जब हॉर्मोनल बदलते हैं तो उसका प्रभाव आपके चेहरे पर भी पड़ता है। आपके चेहरे पर धब्बे और मुँहासे दिखने लगते हैं। यह एक तरह का गर्भवती होने का लक्षण हो सकता है।

कब्ज और ऐंठन

हॉर्मोनल बदलाव होने की वजह से पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है। पाचन क्रिया थोड़ी धीमी हो जाती है। ऐसे में महिला को अक्सर कब्ज की शिकायत रहने लगती है। इसके अलावा पेट में ऐंठन की समस्या भी उत्पन हो जाती है।

नोट: हालांकि यह लक्षण पूरी तरह से नहीं दर्शाते कि आप प्रेग्नेंट हैं इसलिए ऐसा कुछ होने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

प्रेगनेंसी टिप्स
गर्भावस्था में सावधानियां – न करें ये काम




गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर महिलाओं को सलाह देते हैं कि खुद और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हमेशा सावधान रहना चाहिए। यह सावधानी खाने-पीने की चीजों से लेकर अलग-अलग गतिविधियों में देखी जा सकती है। मां बनना जिंदगी के बेहतरीन अनुभवों में से एक है। इसी अनुभवों को जिंदा रखने के लिए कुछ सावधानी भी बरतनी पड़ती है। गर्भवती स्त्रियां अपनी दिनचर्या को नियमित करके तथा गर्भावस्था में अपने खाने पीने का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखकर अपने होने वाले बच्चे को का ख्याल रख सकती हैं। अपने पिछले लेख में हमने बाताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किन-किन चीजों को नहीं खाना चाहिए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि गर्भवती महिला को कौन-कौन से काम नहीं करना चाहिए।

मनोरंजन पार्क में सवारी

वाटर स्लाइड या अन्य सवारी करने से पहले इस बात का ध्यान दे कि जो आप करने जा रहे हैं उससे बेबी को नुकसान तो नहीं होगा। हमारी राय में इस तरह की सवारी करने से बच्चे को नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के खेल में सब चीज अचानक ही होता है। अब वह चाहे लैंडिग करना हो या फिर अचानक रुकना या फिर अचानक शुरू करना हो।
साइकिल से बनाए दूरी

अगर आप गर्भवती हैं, तो आपको साइकिल चलाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसमें संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। साइकिल चलाने के दौरान कोई भी दुर्घटना बेबी को नुकासन पहुंचा सकता है।

डुबकी लगाना

वैसे गर्भवस्था के दौरान तैराकी को अच्छा माना जाता है, लेकिन जब आप पूरे दबाव के साथ डुबकी लगाते हैं, तो ये चीज बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।


जिमनास्टिक्स

बतौर महिला आपको जिमनास्टिक्स का शौक है, लेकिन जब गर्भवती हैं तो इससे दूरी बना लें। क्योंकि इसमें गिरने का खतरा रहता है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है।


हॉर्स राइडिंग


आप घोड़े पर कितनी भी अच्छी सवारी कर लेते हो, लेकिन जब आप गर्भवती हैं तो आपको रिक्स लेने की जरूरत नहीं है। क्योंकि घोड़े के मूड का कोई भरोसा नहीं, कब आपको धोखा दे जाए। गर्भावस्था के दौरान ऐसा न करें।


टेनिस न खेलें


खुद को फिट रखने के लिए टेनिस बहुत ही अच्छा गेम है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान इस खेल से आप दूरी बनाएं। यह संतुलन का गेम है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसे न ही खेंले तो अच्छा है।


सर्फिंग और वाटरस्किंग

एक और चीज गर्भावस्था के दौरान आप न तो सर्फिंग करें और न ही वाटरस्किंग। ये रोमांचकारी गेम आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आप स्कूबा डाइविंग से भी दूरी बनाएं।

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