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भूख को करेंगे नजरअंदाज तो होंगे थाइराइड के शिकार


भूख को करेंगे नजरअंदाज तो होंगे थाइराइड के शिकार



सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात के खाने के अलावा भी दिन में कई बार भूख लग जाती है. भूख का यह समय शाम को 4 से 6 के बीच होता है. इस समय पेट बिल्कुल खाली-सा लगने लगता है. उस भूख को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं या फिर मोटे होने के डर से कुछ खाना नजरअंदाज भी कर देते हैं. आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं को इस बात को समझ लें कि शाम की भूख को नजरअंदाज करने से आप अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं. इससे बहुत-सी समस्याएं हो सकती हैं. आइए जानें कौन से हैं ये सेहत संबंधी प्रॉब्लमस. 

खाएं हल्के-फूल्के स्नैक्स- मोटे होने की सोच में इस समय लगने वाली भूख को नजरअंदाज न करें. इस समय हल्का-फुल्का स्नैक्स खा सकते हैं. जिससे भूख भी शांत हो जाएगी और डिनर के लिए पेट में जगह भी बच जाएगी. 
क्यों लगती है रात को भूख- शाम को भूख लगने की वजह है शरीर में कॉर्टिसॉल हॉर्मोन का कम होना. यह हॉर्मोन सुबह के समय तो बढ़ जाता है लेकिन शाम होते-होते इसका लेवल डाउन होनी शुरू हो जाता है. जिससे भूख का अहसास होने लगता है. इससे बचने क लिए कुछ खा लेना जरूरी है. 

हो सकता है थायरॉयड- शाम को 4-6 के बीच लगने वाली भूख को नजरअंदाज करने का कारण शारीरिक पाचन क्रिया धीमी होनी शुरू हो जाती है. जिससे पीसीओडी और थायरॉयड जैसी समस्याओं के साथ इंसुलिन इंसेंसिटिविटी भी हो जाती है. इसके अलावा शरीर कई तरह की बीमारियों का जल्दी शिकार बनना शुरु हो जाता है. शाम को भूख लगने पर कुछ न कुछ जरूर खाएं, चाहे इसके लिए डिनर स्किप करना पड़े. 

शाम को क्यों खाना चाहिए भूना चना?- इस समय भूने चने का सेवन कर सकते हैं. इसमें मौजूद प्रोटीन,कैल्शियम और आयरन शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं. 

मखाना या सलाद खाएं- ऑफिस टाइम में 4 से 6 बजे का समय काम खत्म करने और घर जाने का होता है. इस समय के लिए कुछ न कुछ पैक करके ऑफिस के लिए जरूर रख लें. आप मखाना या सलाद भी खा सकते हैं. इससे बॉडी में फैट भी नहीं बढ़ता और एनर्जी भी बनी रहती है.


एक लाल मिर्च आपको दे सकती है ये खुशी



लंबा और स्वस्थ जीवन हर व्यक्ति चाहता है. लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव और रोजमर्रा की आदतें हमें बीमार बना देती हैं. क्या आप लंबे समय तक जीना चाहते हैं? तो खूब लाल मिर्च खाइए, इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिससे जिंदगी लंबी होती है. ऐसा शोधकर्ताओं का कहना है. हालांकि शोधकर्ताओं को उस प्रणाली का पता नहीं चल पाया है, जिससे लाल मिर्च खाने से जीवन लंबा होता है. अमेरिका के वरमोंट विश्वविद्यालय के मुस्तफा चोपान ने बताया, "ट्रांसिएंट रिसेप्टर पोटेंसियल (टीआरपी) चैनल्स, जो कैप्सीचीन जैसे एजेंटों के प्राथमिक रिसेप्टर्स होते हैं, जोकि मिर्च का प्रमुख तत्व है. उसकी जीवनकाल को बढ़ाने में कोई भूमिका हो सकती है."
चोपान ने बताया, "माना जाता है कि कैप्सीचीन ही मोटापे को घटाने और धमनियों में रक्त प्रवाह को नियंत्रिण करने में सेलुलर और आणविक तंत्र में अपनी भूमिका निभाता है. साथ ही इसमें माइक्रोबियल विरोधी गुण होते हैं जो 'संभवत: आंतों के माइक्रोबायोटा में बदलाव कर अप्रत्यक्ष तौर पर उस व्यक्ति के जीवनकाल को बढ़ाने में योगदान करता है." मसालों और मिर्ची को शताब्दियों से रोगों के इलाज में लाभकारी माना जाता रहा है. इस शोध के लिए दल ने 16,000 अमेरिकियों का 23 सालों तक अध्ययन किया.

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