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हार्ट अटेक कारण और बचाव

हार्ट अटेक कारण और बचाव
 Heart Attack Causes and Rescue in Hindi




हार्ट अटेक कारण और बचाव-Heart Attack Causes and Rescue in hindi हार्ट अटेक बीमारी आपने ये अक्सर सुना होगा की किसी को हार्ट अटेक ,हार्ट फ़ैल ,या दिल का दौरा पड़ा है| लेकिन बहुत से लोगो को इसके बारे मे सही जानकारी नहीं होती है, तो आज हम हार्ट अटेक के बारे मे जानेगे की ये कैसे होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है| हार्ट अटेक को समझने से पहले हार्ट को समझना बहुत जरुरी है,तो आइये समझते है
मानव हृदय क्या है और यह कैसे कार्य करता-What is the human heart and how it works in hindi

यह छाती के मध्य में, थोड़ी सी बाईं ओर स्थित होता है |
यह एक दिन में लगभग 1 लाख बार धड़कता है एवं एक मिनट में 60-90 बार|
यह हर धड़कन के साथ शरीर में रक्त को पम्प करता है |
हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन, रक्त के ज़रिए मिलता है जो कोरोनरी आर्टरीज़ द्वारा प्रदान किया जाता है |
हृदय दो भागों में विभाजित होता है, दायां एवं बायां। हृदय के दाहिने एवं बाएं, प्रत्येक ओर दो चैम्बर (एट्रिअम एवं वेंट्रिकल नाम के) होते हैं। कुल मिलाकर हृदय में चार चैम्बर होते हैं |
हृदय का दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है एवं उसे फेफडों में पम्प करता है |
रक्त फेफडों में शोधित होकर ह्रदय के बाएं भाग में वापस लौटता है जहां से वह शरीर में वापस पम्प कर दिया जाता है |
चार वॉल्व, दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) रक्त के बहाव को निर्देशित करने के लिए एक-दिशा के द्वार की तरह कार्य करते हैं |
हृदयाघात क्या होता है –What is heart attack?
हृदय एक महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों में रक्त को पम्प करता है। हृदय ऑक्सीजन से भरपूर रक्त रक्त-धमनियों के ज़रिए प्राप्त करता है, जिन्हें कोरोनरी आर्टरीज़ कहा जाता है |
यदि इन रक्त धमनियों में रुकावट आ जाती है, तो ह्रदय की मांसपेशियों को रक्त प्राप्त नहीं होता एवं वे मर जाती हैं। इसे हृदयाघात कहते हैं |
हृदयाघात की गम्भीरता हृदय की मांसपेशियों को नुकसान की मात्रा पर निर्भर करती है, मृत मांसपेशी,पम्पिंग प्रभाव को कमज़ोर कर ह्रदय के कार्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है,जिससे कंजेस्टिव हार्ट फेल्यर होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है एवंउसके पैरों में पसीना आने लगता है।
यह क्यों होता है –Why is this?
हमारी आयु बढ़ने के साथ, शरीर के विभिन्न हिस्सों की रकत वाहिकाओं में, जिनमें कोरोनरी आर्टरीज़ भीशामिल हैं,कोलेस्ट्रॉल जम जाता है एवं रक्त के बहाव में धीरे–धीरे बाधा उत्पन्न कर देता है। इस धीरे–धीरेसंकरे होने की प्रक्रिया को अथेरोस्लेरोसिस कहते हैं |
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदयाघात होने की संभावना अधिक होती है। महिलाएं संभवतः मादा सेक्स हॉरमोन,एस्ट्रोजेन एवं प्रोजेस्टेरोन के प्रभाव से सुरक्षित रहती हैं। यह सुरक्षा प्रभाव कम से कम रजोनिवृत्तितक बना रहता है|
एशियाई लोगों, जिनमें भारतीय शामिल हैं, को हृदयाघात का जोखिम होने की संभावनाएं अधिक दिखती हैं।

हृदयाघात के कारणों में शामिल हैं:Reasons for heart attack include in hindi 
धूम्रपान
मधुमेह
उच्चरक्तचाप
अधिकवज़न
उच्च घनत्व वाला लिपोप्रोटीन बनाम निम्न घनत्व वाला लिपोप्रोटीन
शारीरिकगतिविधि में कमी
हृदयाघातका पारिवारिक इतिहास
तनाव,गुस्सैल स्वभाव, बेचैनी
आनुवांशिककारक
हार्ट अटेक के लक्षण क्या है –What is its symptom?


हार्ट अटेक लक्षणों को पहचानना कठिन होता है क्योंकि वह अन्य स्थितियों के सदृश भी हो सकते हैं।
विशिष्ट रूप से इनमे –
जकड़न के साथ छाती में दर्द एवं सांस लेने में कठिनाई,
पसीना,चक्कर एवं बेहोशी महसूस होना
छातीमें आगे या छाती की हड्डी के पीछे दर्द होना,
दर्द छाती से गर्दनया बाईं भुजा तक पहुँच सकता है,
अन्यलक्षण जैसे वमन, बेचैनी, कफ़, दिल तेज़ी से धड़कना। सामान्यतः दर्द २० मिनट से अधिक देर तक रहता है,
गंभीरमामलों में, रोगी का रक्तचाप तेज़ी से गिरने की वज़ह से उसका शरीर पीला पड़ सकता है और उसकी मृत्यु तक हो सकती है।
इसकी पहचान कैसे की जाती है – How it is identified ?
डॉक्टरमेडिकल इतिहास की विस्तृत जानकारी लेते, हृदयगति जांचते एवं रक्तचाप दर्ज करते हैं,
रोगी का इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम,ईसीजी, लिया जाता जो कि हृदय की विद्युत गतिविधि का रिकार्ड होता है,
ईसीजी, हृदयधड़कन की दर की जानकारी देता है। साथ ही, यह बताता है कि हृदय धड़कन में कोई असामान्य लक्षण तो विद्यमान नहीं तथा हृदय की मांसपेशी का कोई हिस्सा हृदयाघात से क्षतिग्रस्त तो नहीं हुआ है। यह याद रखना महत्त्वपूर्ण है कि प्रारम्भिक चरणों में सामान्य ईसीजी, हृदयाघात होने की संभावनाको खत्म नहीं करता,
हृदयकी मांसपेशी को नुकसान की पहचान करने के लिए रक्त परीक्षण उपयोगी होता है,
छातीका एक्स–रे परीक्षण किया जा सकता है,
ईकोकार्डिओग्रामएक प्रकार का स्कैन है जो हृदय की कार्यप्रणाली के बारे में उपयोगी जानकारी देता है,
कोरोनरीधमनियों में रुकावट का निर्णायक प्रमाण कोरोनरी एन्जिओग्राम द्वारा मिलता है।
हृदयाघात के दौरान मरीज़ को क्या प्राथमिक उपचार दिया जाना चाहिए primary treatment given to the patient during heart attack in hindi

शीघ्रउपचार से जान बचाई जा सकती है,
विशेषज्ञमेडिकल सहायता आने तक, मरीज़ को लेटाया जाना चाहिए एवं कपड़ों को ढीला कर दिया जानाचाहिए,
यदिऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हो तो मरीज़ को ऑक्सीजन दी जानी चाहिए,
यदिनाइट्रोग्लीसरिन या सोर्बीट्रेट टैबलेट उपलब्ध हों तो एक या दो गोली जीभ के नीचे रखी जा सकती है,
एस्पिरिनभी घोल कर दी जानी चाहिए|
इसका उपचार क्या है -What Are The Treatments For This?

हृदयाघातकी स्थिति में रोगी को चिकित्सकीय देखभाल एवं अस्पताल में भर्त्ती कराने की आवश्यकता होतीहै,
प्राथमिकचरणों में पहले कुछ मिनट एवं घंटे संकटपूर्ण होते हैं,कोरोनरी धमनियों में जमे थक्के को घोलने के लिए दवाइयां दी जा सकती है,
हृदयकी धड़कन पर नज़र रखी जाती है एवं असामान्य धड़कन की शीघ्रता से उपचार किया जाता है। दर्दनिवारक दवाएं दी जाती एवं मरीज़ को आराम करने तथा सोने के लिए प्रेरित किया जाता है,
यदिरक्तचाप अधिक हो, तो उसे कम करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं,
वास्तविकउपचार व्यक्ति विशेष के हिसाब से होता है तथा मरीज़ की आयु, हृदयाघात की गंभीरता,हृदय कोपहुंचे नुकसान एवं धमनियों में रुकावट की स्थिति पर निर्भर करता है,
कईबार, रुकावट को दूर करने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया ज़रूरी हो सकती है। यह कोरोनरीएन्जिओप्लास्टी,गुब्बारे की मदद से धमनियों के विस्तार, या कोरोनरी बायपास सर्जरी के रूप में हो सकतीहै।
हृदयाघात से कैसे बचा जा सकता है -How to avoid heart failure?
हृदयाघात से पीड़ीत लोगों को निम्न उपायों का पालन करना चाहिए:

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