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अधिक लार बहती है तो आजमायें ये घरेलू नुस्‍खे


अधिक लार बहती है तो आजमायें ये घरेलू नुस्‍खे

कई लोगो को अत्यधिक लार बहने की समस्या होती है। इससे बार परेशानी और शर्म का सामना भी करना पड़ जाता है। अगर आपको भी ये समस्या हो तो इऩ घरेलु नुस्खों को अपनायें।

अधिक लार आने का कारण

शरीर में लार बनाने वाले अलग से ग्लैंड्स होते हैं। सोते समय जागते समय की अपेक्षा अधिक लार का निर्माण होता है।लार बहने के कई कारण होते है जैसे कुछ खाने पीने की चीज़ों से होने वाली एलर्जी की वजह से लार का अधिक निर्माण हो सकता है और वो बह सकती है।रात को अपने मुंह से सांस लेते हैं और ऐसे में आपके मुंह से लार बहने लगती है।कुछ एंटीडिप्रेसेंट और दवाएं जैसे कि मॉर्फिन, पिलोकार्पिन आदि लार का निर्माण बढ़ा देती हैं। लेकिन लार बहने की समस्या से निपटने के लिए आप ये घरेलु नुस्खों को अपना सकते है। 


एनिमा क्रिया अपनाएं

मुंह से अधिक लार आने पर देर से पचने वाले भोजन को नहीं खाना चाहिए बल्कि जो भोजन जल्दी पचने वाला हो उसे ही खाना चाहिए।मुंह से लार आने पर गर्भवती स्त्री को अपने पेट को साफ करना चाहिए और पेट को साफ करने के लिए एनिमा क्रिया करनी चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने पर को अधिक लार आने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।


तुलसी के पत्ते


तुलसी के 2-3 पत्तों को चबाने के बाद थोड़ा सा पानी पी लें। ऐसा एक दिन में कम से कम 3-4 बार करें। यह उपाय लार के बहने को तेजी से दूर करने में मदद करने के साथ इसे दोबारा होने से रोकने में भी आपकी मदद करेगा। तुलसी के पत्ते स्लाइवा पीएच का पुनः निर्माण और संतुलन द्वारा, मुंह के अंदर अम्लीय वातावरण पर अंकुश लगाने में मदद करते हैं जिससे एसिड के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।












फिटकरी पानी से कुल्ला


इस रोग से जल्दी छुटकारा पाने के लिए फिटकरी को पानी में मिलाकर कुल्ला (गरारा) करें जिसके फलस्वरूप उसके मुंह से लार आना बंद हो जाता है।भोजन के बाद आधा चम्मच सौंफ और एक लौंग का सेवन करें। इससे पाचन क्रिया सुधरेगी। शुगर फ्री च्यूंइगम भी एक अच्छा विकल्प है। 
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सुहागा औऱ शहद


500 मिलीलीटर पानी में 125 ग्राम सुहागा मिलाकर गरारे करने और बीच-बीच में कुल्ला करने से लार का मुंह में अधिक आना (लार श्राव) बंद हो जाता है। सुहागा को शहद में मिलाकर रखें। इसे जीभ और मुंह के अन्दर के छाले पर दिन में 3 से 4 बार लगायें। इससे जीभ या मुंह में हुए छाले के कारण लार का गिरना और कब्ज (पेट मे गैस) खत्म होता है।




अगर आप भी रोज करते हैं ये 5 गलतियां, तो टॉन्सिलाइटिस के लिए रहें तैयार
टॉन्सिलाइटिस या टॉन्सिल गले से जुड़ी एक बीमारी है। टॉन्सिल होने पर गले के दोनों ओर सूजन आ जाती है। शुरुआत में मुंह के अंदर गले के दोनों ओर दर्द महसूस होता है, बार-बार बुखार भी होता है। टॉन्सिल के कारण आपको कई अन्‍य तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं भी घेर सकती है। टॉन्सिल में होने वाले इंफेक्शन को टॉन्सिलाइटिस कहते हैं। आमतौर पर ये इंफेक्शन हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस के कारण फैलता है। आपकी रोजमर्रा की ऐसी कई गलतियां हैं, जो आपको टॉन्सिलाइटिस रोग का शिकार बना सकती हैं।

टॉन्सिलाइटिस के कारण होने वाली परेशानियां
बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण आपको खाने-पीने में तकलीफ होने लगती है। जी हां जहां छोटे टॉन्सिल बहुत ज्‍यादा तकलीफ नहीं देते, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण से खाने-पीने की चीजें निगलने में भी परेशानी होने लगती है। अगर आपको किसी एलर्जी या वायरस की समस्‍या नहीं है तो आपको टॉन्सिल के कारण कुछ भी निगलने में तकलीफ होने लगती है। आइये आपको बताते हैं कि आपकी किन गलतियों के कारण बढ़ जाता है टॉन्सिलाइटिस का खतरा।


अगर आप खाने से पहले हाथ नहीं धोते हैं

अगर आप खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते हैं, तो आपको टॉन्सिलाइटिस रोग हो सकता है क्योंकि टॉन्सिल का इंफेक्शन हानिकारक बैक्टीरिया के कारण फैलता है। ऐसे में हाथों में लगे बैक्टीरिया खाने के साथ जब आपके गले से गुजरते हैं, तो टॉन्सिल के आसपास चिपक जाते हैं और इंफेक्शन का कारण बनते हैं। इसके अलावा खाने से पहले हाथ न धोने से पेट की कई समस्याएं होने का खतरा रहता है इसलिए खाना खाने से पहले हमेशा साबुन से हाथ धोएं।


जूठा खाने की आदत

कई लोग खाने-पीने में जूठे का फर्क नहीं देखते हैं। कई लोगों का मानना है कि साथ में खाना खाने और एक ही थाली या ग्लास में खाने-पीने से प्यार बढ़ता है लेकिन ऐसा कहते समय वे ये भूल जाते हैं कि, हर व्यक्ति के सलाइवा में अलग-अलग बैक्टीरिया मौजूद होते हैं और कई बार दूसरे के मुंह के बैक्टीरिया आपके मुंह में जाने से आपको इंफेक्शन हो सकता है। इससे टॉन्सिल की समस्या हो सकती है।

मिर्च-मसाले और गर्म चीजों का सेवन
बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजों को खाने से भी टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो जाती है। इसके अलावा अगर आप बहुत ज्यादा गर्म या ठंडी चीज खाते हैं, तो भी आपको टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है। इसलिए खान-पान में सावधानी बरतें। खट्टी और ऑयली चीजों का सेवन बहुत ज्यादा न करें।

अगर आप कम पानी पीते हैं
अगर आप कम पानी पीते हैं तब भी आपको टॉन्सिलाइटिस होने का खतरा होता है। दरअसल खाना खाते समय खाने के छोटे-छोटे कण आपके पूरे मुंह में चिपके रह जाते हैं। अगर आप खाना खाने के बाद पानी से कुल्ला करते हैं, तब मुंह के कण तो निकल जाते हैं लेकिन गले और आहार नली में कण चिपके रह जाते हैं। इसलिए खाना खाने के 15 मिनट बाद पानी जरूर पिएं और रोजाना कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं।

टूथब्रश जल्दी न बदलना

कई लोग अपना टूथब्रश जल्दी नहीं बदलते हैं और खराब होने के बाद भी एक ही टूथब्रश का इस्तेमाल करते रहते हैं। इससे भी गले में टॉन्सिल की समस्या हो जाती है। दरअसल आप ब्रश करने के बाद रोज टूथब्रश धोते हैं मगर उनपर माइक्रोव्स चिपके रह जाते हैं। समय के साथ ये माइक्रोव्स आपको बीमार बनाने लगते हैं इसलिए हर 3 महीने में अपना टूथब्रश जरूर बदलें।


अगर दांत हैं पीले और सड़े, तो हो सकते हैं ये 5 गंभीर रोग
दांतो की सड़न सिर्फ दांतो के लिए नहीं बल्कि आपकी पूरी सेहत को प्रभावित करती है। गंदे दांत कई घातक बीमारियों का कारण हो सकते हैं जानिए कैसे।

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दांतों की समस्या और बीमारियां

दांतों में सड़न या गंदे दांत आपकी खूबसूरती और स्वास्थ्य दोनों को ही प्रभावित करते हैं। अक्सर दांतों की समस्या को हल्के में लेते हैं, लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। दांतो की समस्या कई गंभीर बीमारियों का कारण हो सकती हैं? मधुमेह, रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं के पीछे दांतों की बीमारियां हो सकती हैं।

डायबिटीज

मधुमेह रोगियों में मसूड़ों में सूजन, दांतों का ढीलापन और मुंह से बदबू आना आदि समस्या पायी जाती है। इन रोगियों में मुंह की लार में पाए जाने वाले कीटाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए उनके मसूड़ों और जबड़े की हड्डी में संक्रमण हो जाता है। ऐसे में दांत कमजोर हो जाते हैं। मधुमेह के रोगियों को अपना ब्लडशुगर नियंत्रण में रखना चाहिए।

उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप से ग्रस्त रोगियों में मसूड़ों से खून आना, दुर्गध और मुंह में सूखापन आदि की समस्या पायी जाती है। इसलिए इन रोगियों को अपने रक्तचाप को नियंत्रण में रखना चाहिए।

हृदय रोग
दांतों की ठीक से सफाई करना आपको हार्ट अटैक से बचाता है। एक शोध के मुताबिक दांतों को साफ रखकर आप दिल के दौरे से बचे रह सकते हैं, क्योंकि दांतों और मसूड़ों की बीमारी का दिल की बीमारी के साथ सीधा संबंध है।

फेफड़ों पर असर
दांतों की नियमित सफाई नहीं करने पर ये गंदे, बदरंग व खराब हो जाते हैं, इनकी गंदगी एवं परत से दांत व मसूडें दोनों भी खराब होने लगते हैं। दांतों की गंदगी व बीमारी फेफड़े तक पहुंचकर उसे भी संक्रमित कर सकती है। उसकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो जाती है। कुछ भी खाने व पेय पीने के बाद कुल्ला कर मुंह साफ करना चाहिए जबकि दिन भर में दो समय दांतों की नियमित सफाई करनी चाहिए। यह सफाई अच्छी तरह करनी चाहिए। साफ दांत हमारे जीवन को महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कैंसर
दांतों की बिगड़ी सेहत मुंह और गले के कैंसर का कराण हो सकते हैं। मसूड़ों से खून आना या दांतों से जुड़ी किसी प्रकार की समस्या को नजरअंदाज ना करें। दांतो को स्वस्थ रखने के लिए दिन में दो बार ब्रश करें और महीने में एक बार डेंटिस्ट के पास जरूर जाएं।

पीरियोडोंटिस
यदि जिन्जीवाइटिस का उपचार नहीं किया जाता तो वह गंभीर रूप लेकर पीरियोडोंटिस में बदल जाती है। पीरियोडोंटिस से पीड़ित व्यक्ति में मसूड़ों की अंदरूनी सतह और हड्डियां दांत से दूर हो जाती हैं। दांतों और मसूड़ों के बीच स्थित इस छोटी-सी जगह में गंदगी इकट्ठी होने लगती है और दांतों और मसूड़ों में संक्रमण फैल जाता है। अगर ठीक से इलाज न किया जाए तो दांतों के चारों ओर मौजूद ऊतक नष्ट होने लगते हैं।

कैसे करें दांतों की सफाई
स्वस्थ दांतों कि लिए जरूरी है कि इसका खास खयाल रखा जाए। हर रोज दिन में दो बार ब्रश करें। रात को सोने से पहले ब्रश करना कभी ना भूलें। बच्चों को बचपन से ही यह आदत डालें जिससे वो बड़े होकर भी इस आदत को अपनाएं।

बार-बार मुंह के छाले होने के ये हैं 8 कारण
मुंह का अल्सर महिलाओं में अधिक आम हैं, लेकिन यह वयस्कों और बच्चों को भी प्रभावित कर सकता हैं। इन दर्दनाक मुंह के छालों का कारण जानकर हमें आसानी से इसे होने से रोक सकते हैं।

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मुंह के छालों के कारण

मुंह का अल्सर बहुत आम हैं और ओरल स्वास्थ्य सामान्य जनसंख्या के लगभग 20 प्रतिशत के आसपास को प्रभावित करती है। इसके अलावा, छालेयुक्त अल्सर के रूप में जाने जाने वाला अल्‍सर हम में से ज्यादातर लोगों को जीवन में कम से कम एक बार जरूर विकसित होता है। हालांकि मुंह का अल्सर महिलाओं में अधिक आम हैं, लेकिन यह वयस्कों और बच्चों को भी प्रभावित कर सकता हैं। इन दर्दनाक मुंह के छालों का कारण जानकर हमें आसानी से इसे होने से रोक सकते हैं। यहां पर मुंह के छालों के आम कारण के बारे में जानकारी दी गई है।

कुछ खाद्य पदार्थ

नींबू, टमाटर, संतरा, स्ट्रॉबेरी और अंजीर जैसे खट्टे फल और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थ मुंह में छालों के लिए ट्रिगर के रूप में काम करते हैं। अन्य आहार स्रोत जैसे चॉकलेट, बादाम, मूंगफली, गेहूं का आटा और बादाम आदि मुंह के छालों के उच्च जोखिम में डाल सकते है।

ओरल हाइजीन से जुड़ी बातें
कठोर खाद्य पदार्थों को चबाना, अत्यधिक ब्रश करना और ब्रेसिज़ की सही प्रकार से फिटिंग आदि अधिकांश लोगों के भी मुंह में छालों का कारण होता है। कुछ लोगों में, सोडियम सल्फेट युक्त टूथपेस्ट का प्रयोग भी इस समस्‍या को बढ़ा सकता है।

तनाव और चिंता

जब आप उदास या चिंतित होते हैं तो आपके शरीर के साथ मुंह के अल्‍सर को प्रभावित करने वाले केमिकल का स्राव होता है। इसलिए जो लोग हमेशा तनाव में रहते हैं उनमें मुंह में छालों से पी‍ड़‍ित होना का उच्‍च जोखिम रहता है।

पोषक तत्वों की कमी
विटामिन बी 12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण बीमारी की स्थिति की एक विस्तृत श्रृंखला के उच्च जोखिम में डालने के अलावा मुंह के छालों का कारण भी बन सकता है। मुंह के छाले के खतरे को कम करने के लिए आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध आहार अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

धूम्रपान छोड़ना

पहली बार धूम्रपान को छोड़ने वाले लोगों में सामान्‍य लोगों की तुलना में अक्‍सर मुंह में छाले होने की संभावना बहुत अधिक होती है। यह अस्थायी और सामान्य है; क्‍योंकि इस समय शरीर खुद को रासायनिक परिवर्तन के साथ समायोजित करने की कोशिश कर रहा होता है।

हार्मोनल में परिवर्तन
शरीर में हार्मोंन के स्‍तर में परिवर्तन के कारण भी मुंह में छाले होते हैं। यह आमतौर पर मासिक धर्म चक्र के दौरान कुछ महिलाओं में देखने को मिलता है।

चिकित्सा की स्थिति
कुछ नैदानिक स्थितियां जैसे सीलिएक रोग, वायरल संक्रमण और प्रतिक्रियाशील गठिया आदि भी आपको मुंह के छालों के बार-बार होने के जोखिम में डाल सकती है। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और जठरांत्र रोगों से पीड़‍ित लोगों में भी मुंह में छालों की समस्‍या बार-बार होती है।




दवाएं

कभी कभी, रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाले दवाएं भी मरीजों में मुंह के छालों का कारण बनती है। सीने के दर्द के इलाज के लिए इस्‍तेमाल की जाने वाली कुछ दर्दनाशक दवाएं जैसे बीटा ब्‍लॉकर्स भी मुंह में छाले की वृद्धि को जोखिम में डाल सकता है। image courtesy : getty images




दस चीजें जो छीन सकती हैं आपकी प्‍यारी मुस्‍कान
एक प्‍यारी सी मुस्‍कान कितने कामों को आसान बना देती है। तनाव और चिंता को दूर कर सकती हैं। लेकिन कुछ चीजें जाने अनजाने आपकी मुस्‍कान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जानिये कौन सी हैें वे दस चीजें।

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आपकी मुस्‍कान
खूबसूरत और प्‍यारी मुस्‍कान किसी के भी दिल में आपकी जगह बना सकती है। और आप इसे हमेशा बरकरार भी रखना चाहेंगे। आप ब्रश भी करते हैं, वाइट स्ट्रिप भी इस्‍तेमाल करते हैं और साल में दो बार डेंटिस्‍ट के पास भी जाते हैं, लेकिन स्‍वस्‍थ मुस्‍कान के लिए केवल इतना ही जरूरी नहीं है। कई चीजें हैं जो आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। और आपको इनसे बचना जरूरी है।

स्‍पोटर्स ड्रिंक
हम सब ऊर्जा के लिए इनका सेवन करते हैं, लेकिन ये हमारे दांतों के लिए अच्‍छी नहीं होतीं। वैज्ञानिक शोध में यह साबित हुआ है कि इसमें मौजूद अम्‍लीय तत्‍वों की अधिक मात्रा दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे दांतों का इनेमल नष्‍ट हो जाता है। इसके साथ ही इन स्‍पोटर्स ड्रिंक में शर्करा की अधिक मात्रा होती है, जिससे मुंह में अधिक बैक्‍टीरिया पैदा होती हैं जो कैविटी का कारण बनते हैं।

डायबिटीज
डायबिटीज के कारण संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे आपको मसूड़ों की बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ब्रश करने, फ्लोसिंग और अपनी ब्‍लड शुगर पर नजर रखने से आपको इस संदर्भ में लाभ हो सकता है। डायबिटीज से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और इसलिए जरूरी है कि आप न केवल मसूड़ों बल्कि अन्‍य बीमारियों की जांच के प्रति भी सचेत रहें। डायबिटीज के कारण मसूड़ों के लिए जरूरी इनसुलिन के स्‍तर में भी गिरावट आती है। Image Courtesy- Getty Images

तंबाकू
धूम्रपान करने से दांत पीले हो जाते हैं। लेकिन इसके नुकसान अधिक भयावह होते हैं। किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करने से आपके दांतों और मसूड़ों को बेहद नुकसान पहुंचाता है। इससे गले और मुंह का कैंसर हो सकता है और कई मामलों में यह मृत्‍यु का कारण भी बन सकता है। तंबाकू में मौजूद टार से दांतों पर एक परत जम जाती है, जिसमें बैक्‍टीरिया उत्‍पन्‍न होता है। इससे दांतों और मसूड़ों को काफी नुकसान हो सकता है। 

वाइन
वाइन को दिल के लिए अच्‍छा माना जाता है, लेकिन नियमित रूप से इसका सेवन दांतों के कुदरती इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है। दंत विशेषज्ञों के अनुसार वाइन में मौजूद अम्‍लीय तत्‍व दांतों की संरचना को क्षतिग्रस्‍त कर सकते हैं। वाइन पीते समय जब वह काफी समय तक दांतों के संपर्क में रहती है या आप बड़े घूंट भरते हैं, तो उससे दांतों का इनेमल नष्‍ट हो जाता है। तो छोटे सिप भरें और पीने के बाद साफ पानी से कुल्‍ला 

गर्भावस्‍था
गर्भावस्‍था के दौरान आपको अपने दांतों की खास देखभाल करने की जरूरत होती है। शोधों में यह प्रमाणित हुआ है कि मसूड़ों की बीमारी का संबंध समय-पूर्व प्रसव और सामान्‍य से कम वजन के बच्‍चे के जन्‍म, से होता है। गर्भवस्‍था के दौरान हॉर्मोंस में बदलाव आता है जिससे मसूड़ों में सूजन हो सकती है। यही समस्‍या आगे चलकर जिंजिवाइटिस का रूप ले सकती है। इससे मुख संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको मॉर्निंग सिकनेस की शिकायत होती है, तो उल्‍टी के बाद अपने दांतों को अच्‍छी तरह पेस्‍ट या बेकिंग सोडा से साफ करें। 

दांत पीसना

दांतों को पीसने से आपके मसूड़ों में परेशानी हो सकती है। इससे दर्द भी हो सकता है और कुछ मामलों में इससे आपके चेहरे की लुक भी बदल सकती है। दांतों को बार-बार रगड़ने से न केवल उनका इनेमल नष्‍ट होता है, बल्कि इससे वे कमजोर भी हो जाते हैं। ऐसा होने से दांतों में सेंसेटिविटी बढ़ जाती है। तनाव और गुस्‍से में लोग अकसर दांत पीसने लगते हैं। यह अच्‍छी आदत नहीं। अपनी भावनाओं को जाहिर करने के वै‍कल्पिक उपाय तलाशिये। 

किशोरावस्‍था

किशोरावस्‍था में हॉमोंस में आने वाले बदलावों से मसूड़ों में सूजन की शिकायत हो सकती है। इससे संक्रमण, जिंजिवाइटिस, मुंह में छाले आदि भी हो सकते हैं। लेकिन, आमतौर पर ऐसी परेशानी तभी होती है, जब मसूड़ों की साफ-सफाई का अच्‍छी तरह ध्‍यान न रखा जाए। किशोरावस्‍था में दांतों की अच्‍छी तरह सफाई करें और नियमित रूप से डेंटिस्‍ट के पास जाएं। Image Courtesy- Getty Images

मुंह का रुखापन
मुंह का रुखापन भी दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। साल्विया के कारण कैविटी उत्‍पन्‍न करने वाले बैक्‍टीरिया और हानिकारक एसिड नष्‍ट हो जाते हैं। साल्विया के बिना आपके दांतों में परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा आपको कई अन्‍य ओरल डिजीज भी हो सकती हैं। इससे बचने के लिए खूब पानी पियें, शुगर-लैस च्‍युइंग गम चबायें और साथ ही दंत चिकित्‍सक से संपर्क करें। Image Courtesy- Getty Images

डायटिंग
खानापन की खराब आदतें और डायटिंग के काराण भी ऐसी समस्‍यायें हो सकती हैं। जरूरी है कि आप अपने आहार में जरूरी पोषक तत्‍वों को शामिल करें। इससे आपकी मुस्‍कान कायम रहेगी। जरूरी है कि आप विटामिन बी, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन सी आदि युक्‍त आहार का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन करें।




टॉन्सिल से होती हैं आपको सेहत से जुड़ी ये 5 दिक्कतें!
टॉन्सिल की कारण गला खराब और दर्द जैसी परेशानियां होने लगती हैं, यह बात तो आप जानते ही होगें लेकिन क्या आपको जानते हैं कि टॉन्सिल के कारण आपके सांसों से बदबू भी आने लगती है।

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टॉन्सिल के कारण भी होती है स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं

टॉन्सिल होने पर गले के दोनों ओर सूजन आ जाती है। शुरुआत में मुंह के अंदर गले के दोनों ओर दर्द महसूस होता है, बार-बार बुखार भी होता है। टॉन्सिल्स सामान्य से ज्यादा लाल हो जाते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि टॉन्सिल के कारण आपको कई अन्‍य तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं भी घेर सकती है। अगर आपको विश्‍वास नहीं हो रहा तो आइए इस स्‍लाइड शो में ऐसी ही कुछ समस्‍याओं के बारे मे जानते है जो टॉन्सिल के कारण आपको हो सकती है। 


सांसों की बदबू

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, दुनिया की आधी आबादी मुंह की सफाई न करने के कारण मुंह की बदबू से ग्रस्त हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि टॉन्सिल की समस्‍या होने पर भी सांसों से बदबू आने लगती है। टॉन्सिल ग्‍लैंड चुभनेवाले और दरारों से भरा होता है जहां बैक्‍टीरिया और डेड सेल्‍स अटक जाते हैं और इनके कारण सांसों से बदबू आने लगती है।

खर्राटों की समस्‍या

गले में बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण आपको खर्राटों की समस्या हो सकती है। अमेरिकन अकादमी ऑफ ओटालर्यनोलोजी के अनुसार, बढ़े हुए टॉन्सिल से खर्राटों की समस्‍या हो सकती है। जब बार-बार होनेवाले संक्रमण या किसी जन्मजात कारण टॉन्सिल का आकार बढ़ने लगता है तो बढ़ा हुए आकार के कारण गले में हवा के बहाव में रुकावट आने लगती है। जिससे खर्राटे की समस्या होती है।



निगलने में परेशानी
बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण आपको खाने-पीने में तकलीफ होने लगती है। जी हां जहां छोटे टॉन्सिल बहुत ज्‍यादा तकलीफ नहीं देते, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण से खाने-पीने की चीजें निगलने में भी परेशानी होने लगती है। अगर आपको किसी एलर्जी या वायरस की समस्‍या नहीं है तो आपको टॉन्सिल के कारण कुछ भी निगलने में तकलीफ होने लगती है।

साइनस इंफेक्शन
बढ़े हुए टॉन्सिल की कारण आपको बार-बार साइनस और कान में इंफेक्‍शन की समस्‍या भी हो सकती है। ऐसा नाक और कान को जोड़ने वाली नली बंद हो जाने के कारण होता है और कान के पर्दे के पीछे पानी हो जाता है। कभी-कभी पर्दे से छेद होकर मवाद बाहर बहने लगता है। इससे सुनने की क्षमता कम होने लगती है।


सिरदर्द की समस्‍या

कुछ गंभीर मामलों में बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण सोते समय सांस लेने में भी परेशानी आने लगती है। नींद में इस तरह का खलल आने से ब्रेन तक सही मात्रा में ऑक्सिजन नहीं पहुंच पाता और ऑक्सिजन की कमी के कारण रक्त-वाहिनियों का आकार बढ़ जाता है और गंभीर सिरदर्द होने लगता है।


दांतों को शेप में लाने के लिए 'ब्रेसेस' के अलावा हैं ये विकल्‍प!
टेढ़े-मेढ़े दांतों को सीधा करने के लिए या इनके बीच के खाली जगहों को भरने के लिए अगर आप ब्रेसेस पसंद नहीं करते हैं तो कई दूसरे विकल्‍प भी मौजूद हैं।

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ब्रेसेस के विकल्प

बुरा दिखना किसी को पसंद नहीं होता और अच्छे दिखने के लिए हर कोई बहुत से एफर्ट्स लगाता है। अच्छे दिखने में सबसे ज्यादा भूमिका निभाते हैं हमारे दांत, क्‍योंकि जब हम मुस्‍कुराते हैं तब पॉजिटिविटी दिखती है। लेकिन जिसके दांत अच्छे न हो तो वह मुस्‍कुराने में हिचकेगा। ऐसे में उनको सुंदर बनाने किए कई लोग ब्रेसेस का उपयोग करते हैं। लेकिन मैटल के ब्रेसेस का उपयोग करने से कई लोग घबराते हैं। ऐसे में वो लोग ब्रेसेस के अलावा अन्य उपाय भी अपना सकते हैं। इसके दूसरे विकल्‍पों के बारे में यहां जानें। 
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रिटेनर्स
इसे किसी भी वक्त दांतों में लगाया जा सकता है और दांतों से निकाला जा सकता है। ये दांतों को सही पोजिशन में लाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। एसिक्स रिटेनर्स पूरी तरह से ट्रांसपैरेंट होता है जो दांतों के ऊपर लगाया जाता है। लेकिन इसका इस्तेमाल तभी संतोषदायक है जब दांत ज्यादा टेढ़े-मेढ़े न हो। ये ज्यादा महंगे नहीं होते और इन्हें पहनना बहुत आसान होता है। 



हेडगियर या कैप
अगर आपके दांत ज्यादा खराब हैं और दिखने में बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते तब हेडगियर या कैप का उपयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल दांतों को सही शेप में लाने के लिए किया जाता है। इस क्रिया में ऊपर वाले दातों और मसूड़ों पर प्रेशर दिया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि इसे दिन में कुछ घंटों के लिए ही पहना जाता है। अधिकतर लोग इसे रात में सोते वक्त पहनते हैं। लेकिन एक बात का हमेशा ध्यान रखें की इसे खेलते समय, खाते समय और ब्रश करते समय जरूर उतार दें। 
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क्‍लीयर अलाइनर्स
इनविज़अलाइन जो क्‍लीयर अलाइनर्स के तौर पर अधिक उपयोग में लाया जाता है। यह ब्रेसेस के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे लोकप्रिय विकल्प है। इससे किसी भी प्रकार के दांतों को सही किया जा सकता है। इस क्रिया में डेंटिस्‍ट दांतों के अनुसार एक क्‍लीयर अलाइनर ट्रे सिरीज़ देते हैं जिसे दांतों के ऊपर लगाया जाता है। प्रत्येक अलाइनर को दिन में बीस घंटे दो हफ्ते तक के लिए पहनना जरूरी है। दो हफ्ते के बाद दूसरी ट्रे उपोयग में लाई जाती है। यह क्रिया सिरीज़ के खत्म होने तक अपनाई जाती है। 
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विनियर
विनियर पोर्सिलिन की पानी जैसी पतली परत होती है, जो दांतो के ऊपर लगा दी जाती है। दांत का नाप लेकर लैब में पोर्सिलिन या सिरेमिक की परत तैयार की जाती है। इसको दांतों में फिट करने से पहले दांतों के ऊपर से एनामल की एक परत हटा दी जाती है। दांतों के बीच की खाली जगह को भरने के लिए उपयोग में लाया जाता है और ये पांच साल तक कारगर होते हैं। पांच साल के बाद आफको इसे दोबारा करने की जरूरत होगी। 


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बॉन्डिंग
अगर दांत पीछे हैं तो उन्हें आगे लाने के लिए, अगर दांत बाहर निकले हैं तो उन्हें पीछे ले जाने के लिए या टूटे-फूटे दांतो को शेप में लाने के लिए दांतों की बॉन्डिंग का इस्तेमाल भी किया जाता है। अगर कोई दांत पीछे है तो उसकी बॉन्डिंग कर एक लाइन में लाया जाता है। टूटे-फूटे दांतों को शेप में लाने के लिए दांत के रंग की कंपोजिट फीलिंग को दांत के ऊपर लगाया जाता है। यह सब विकल्पों में सबसे आसान और सस्ता विकल्प है। 


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