Header Ads

प्रेग्नेंसी में हर महिला में अलग होती है कामोत्तेजना


प्रेग्नेंसी में हर महिला में अलग होती है कामोत्तेजना
कुछ लेडीज में, प्रेग्नेंसी के दौरान, कामेच्छा (लिबिडो) कम हो जाती है, जब कि कुछ में यह ज्यादा होती है। ऐसा प्रेग्नेंसी हॉर्मोन के कारण होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान, लेडीज की ब्रैस्ट का साइज बढ़ जाता है और वह और ज्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं। वजाइना, अधिक ब्लड फ्लो के कारण फूल जाती है और ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है। इन्हीं सब कारणों से प्रेग्नेंट लेडी का सेक्स की तरफ रुझान बढ़ जाता है।कुछ लेडीज, प्रेग्नेंसी की फर्स्ट ट्राइमेस्टर में, (इस अवस्था में हॉर्मोन लेवल बहुत हाई होता है) सेक्स करने में ज्यादा अच्छा महसूस करती हैं और डिलीवरी के आखिरी दिनों तक आराम से सेक्स कर सकती हैं। 
हालाँकि सभी महिलाएं एक जैसी नहीं होती और न ही हर कपल एक जैसा होता है। हर महिला प्रेग्नेंसी के दौरान, अलग महसूस करती है। इसलिए यदि किसी में, कामेच्छा ज्यादा है तो यह भी सामान्य ही है और किसी में कम तो भी।कभी-कभी, आपका पार्टनर इस बात को लेकर परेशान हो सकता है
 कि आप ऐसा व्यवहार क्यों कर रही हैं। उन्हें यह बात समझनी होगी कि इस समय आपके शरीर में बहुत से बदलाव हो रहे हैं, जिस कारण आप ऐसा महसूस कर रही हैं। आप दोनों के लिए यह समय बहुत स्पेशल है। इसलिए इस समय को एन्जॉय करें। इस समय सेक्स के दौरान, आपको बर्थ कंट्रोल या ओवुलेशन को लेकर, किसी बात की चिंता नहीं होती। इसलिए इस समय आप सेक्स को ज्यादा एन्जॉय कर सकती हैं। सेक्स पोजीशन को लेकर आप दोनों आपस में बात कर सकते हैं और ऐसी अवस्था ढूढें, जिसमें आपके बेबी को भी कोई नुक्सान न हो और आप दोनों एन्जॉय भी कर सकें। इस समय, आपके पार्टनर, आपका किस प्रकार साथ देते हैं और प्रेग्नेंसी के दौरान, होने वाले उतार-चढ़ावों से आप कैसे तालमेल बिठा पाती हैं,
 इन सब बातों पर भी आपकी कामेच्छा निर्भर करती है।आप प्रेग्नेंसी में, भी संतोषजनक प्रेम संबंध रख सकती हैं। याद रखें कि इस समय आप दोनों को एक दूसरे के और करीब रहना है। आपके पति अवश्य ऐसा तरीका ढूंढ निकालेंगे, जो आपके लिए फायदेमंद हो। एक दूसरे से बात करते रहें। प्रेग्नेंसी के दौरान और उसके बाद भी, यौन संबंधों को बनाए रखने और उनमें सुधार के लिए आपस में बात करना और खुलापन बहुत जरुरी है।

प्रेग्नेंसी में सेक्स और सहज स्थिति के लिए टिप्स


देखा गया है कि अधिकांश महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान सामान्य अवस्था की तुलना में शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा कुछ बढ़ जाती है। शरीर की इस प्राकृतिक एवं स्वाभाविक जरूरत के विपरीत अधिकांश लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि इस दौरान सेक्सुअल रिलेशनशिप से महिला को या उसके बेबी को नुकसान हो सकता है। वास्तव में यह सत्य नही है, हालाँकि किसी-किसी मामले में किसी विशेष कारण से गायनकोलॉजिस्ट (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) इसके लिए मना कर सकते हैं। यह स्थिति असामान्य स्थिति होती है।
यदि प्रेग्नेंसी की अवस्था सामान्य है तो कुछ सावधानियों एवं विशेष पोजीशन में शारीरिक सबंध बनाने में आमतौर पर कोई परेशानी नहीं होती है। बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि इससे आप न केवल अपने पार्टनर को खुश रख सकती हैं, बल्कि स्वयं भी खुश रहेंगी और यह मानसिक अवसाद से भी दूर रखने में सहायक है, जोकि इस अवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

शारीरिक संबंधों बनाने के लिए जो पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद की जाती है उसमें आप नीचे और आपका पार्टनर ऊपर रहता है जिसमें अधिकांश एक्टिविटी मेन्स की ही होती है। यदि पेट बढ़ जाता है, तो इस स्थिति से सेक्सुअल रिलेशन बनाने में परेशानी होती है, और साथ ही इसमें पीठ के बल लेटने से सिर भी चकरा सकता हैं।



आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स जिसमें आप कुछ क्रिएटिव और नया कर सकती हैं-

प्रचलित पोजीशन में कुछ परिवर्तन करना - यदि आपको ऊपर बताई गई पोजीशन की आदत है और दूसरी पोजीशन को ट्राई नहीं करना चाहती हैं, तो इसी स्थिति में कुछ बदलाव कर सकती हैं। इसमें आप पीठ के बल लेट जाएँ और अपनी हिप के नीचे कोई तकिया आदि रखकर थोड़ा ऊपर उठा लें, पैर बेड के नीचे लटका लें। आपका पार्टनर आपके सामने से पैरों के बीच में आकर सेक्स करता है। इस पोजीशन में फायदा यह होता है कि पेट पर दबाव नहीं पड़ता है, क्योंकि पार्टनर को ऊपर नहीं लेटना होता है। आपके पार्टनर के हाथ आराम से आपके ब्रैस्ट्स और क्लिटरिस तक पहुँच सकते हैं।
खुद ऊपर आ जाएँ - इस स्थिति में अपने पार्टनर को पीठ के बल लिटा दें खुद ऊपर आ जाएँ। इस स्थिति में दोनों में कोई भी एक्टिव हो सकता है, जैसा आरामदायक लगे। इस पोजीशन में कई फायदे होते हैं, जैसे- पेट पर दबाव नहीं पड़ता, टाँगें ज्यादा नहीं फैलानी पड़ती, पार्टनर के हाथ आराम से ब्रैस्ट्स और क्लिटरिस तक पहुँच सकते हैं ।
डॉगी स्टाइल - इसमें आप घुटने मोड़ कर और हाथों के सहारे आगे की ओर घोड़ी/डॉगी बन जाएँ और आपका पार्टनर आपके पीछे से आकर सेक्स करे। यह सबसे अच्छी पोजीशन होती है। इसमें भी पेट पर दबाव नहीं पड़ता, और पीठ एवं पेल्विक मसल्स में दबाव नहीं पड़ता, पार्टनर क्लिटरिस को टच कर सकता है, जिससे पूरा ऑर्गेज्म होता है। 

इसमें से सभी पोजिशंस पेट पर दबाव बनने से बचाती हैं, जो प्रेग्नेंसी की अवस्था में बहुत जरुरी है। लेकिन यह भी ध्यान दें कि यदि किसी स्थिति में आपको कष्ट या परेशानी हो तो पार्टनर को तुरंत रोकें। विशेषकर डॉगी स्टाइल में ध्यान रखें यदि पेनेट्रेशन ज्यादा गहराई तक हो, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए यदि किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस हो, तो पार्टनर तुरंत बताएँ, और उसे आराम से करने के लिए कहें। 


प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स, कितना सुरक्षित?



महिला के एक बार प्रेग्नेंट होने के बाद, पति-पत्नी के मन में यह सवाल उठने लगता है कि उन्हें इस दौरान, अंतरंग संबंध बनाने चाहिए या नहीं। क्योंकि यह मामला उनके बच्चे का होता है। वहीं दूसरी और डॉक्टर भी इस दौरान, कुछ समय के लिए अंतरंग संबंधों से बचने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि इस दौरान, सेक्स सेफ नहीं है, बल्कि इसलिए क्योंकि यदि महिला को कोई समस्या हो और उसे मिसकैरेज होने का डर हो तो ऐसा करना नुक्सानदायक हो सकता है।

यदि महिला पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे किसी प्रकार का कोई ख़तरा नहीं है, तो वह बिना संकोच के संबंध बना सकती है, लेकिन वह महिलाएं जो नीचे दी गई समस्याओं से जूझ रहीं हों, उन्हें संबंध नहीं बनाने चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनके मिसकैरेज की आशंका बढ़ जाती है।

परिस्थितयां, जिनमें नहीं बनाने चाहिए अंतरंग संबंध-
यदि आप को गर्भपात का खतरा हो, या पहले गर्भपात हो चुका हो,
यदि योनि से रक्तस्राव या स्पोर्टिंग की समस्या हो रही हो,
पेट में बिना किसी कारण के ऐंठन या दर्द हो रहा हो,
यदि गर्भाशय ग्रीवा की समस्या रही हो,
यदि आपके गर्भ में दो या उससे अधिक बच्चे पल रहे हों,
यदि आपका प्लेसेंटा गर्भाशय के बहुत नीचे आ गया हो।

क्या प्रेग्नेंसी के बाद सेक्स में रहेगी पहले जैसी बात?

हर महिला का स्वास्थ्य अलग होता है। यह उसके अपने स्वास्थ्य और इच्छा पर निर्भर करता है कि महिला अंतरंग संबंधों के दौरान, सहज है या नहीं। हो सकता है कि उसे इस दौरान, पहले से ज्यादा अच्छा महसूस हो। या फिर हो सकता है कि उसे परेशानी हो। जहाँ तक पति का सवाल है, तो कई महिलाओं के पार्टनर ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पहले के मुकाबले प्रेग्नेंट महिला की बॉडी ज्यादा आकर्षित करती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान, वह महिलाएं जिन्हें अंतरंग संबंधों से परेशानी होती है, इस बात को हल्के में न लें। वह लव मेकिंग को लेकर डॉक्टर से बात जरूर करें। कई बार, सेक्स के बाद महिलाओं को पेट में तेज दर्द, ऐंठन या अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं। इस तरह की स्थितियों में अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान, कुछ महिलाओं को ब्रैस्ट में बहुत कोमलता और दर्द महसूस होता है। यहाँ तक कि हल्की छुअन से भी ब्रैस्ट में दर्द होने लगता है, ऐसे में महिलाएं अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। एक और चीज देखी जाती है, कि जिन महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है, उन्हें भी इस दौरान, सेक्स में रूचि नहीं रहती।

क्या सेक्स से बच्चे को हो सकता है नुक्सान?


नहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान, अंतरंग संबंध बनाने से बच्चे को कोई नुक्सान नहीं होता। महिला के गर्भ में, बच्चा एकदम सुरक्षित होता है। वह एमनियोटिक तरल पदार्थ की थैली के अंदर सुरक्षात्मक रूप से लिपटा होता है। साथ ही, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) भी श्लेष्मा अवरोधक (म्यूकस प्लग) से बंद होती है। यह ब्लॉकेज बच्चे तक संक्रमण पहुंचने से भी रोकती है। 

बच्चे की सुरक्षा को लेकर एक और जो सवाल मन में होता है, कि कहीं सेक्स के दौरान, आपके पार्टनर के द्वारा तो गर्भस्थ शिशु को छुआ नहीं जाएगा। जैसा कि हमने ऊपर जिक्र किया है, कि बच्चा महिला के गर्भ में सुरक्षित होता है, तो ऐसा कुछ नहीं होता। साथ ही ओगाज़्म के दौरान, गर्भाशय में होने वाले संकुचन से भी बच्चे को कोई नुक्सान नहीं होता और यह संकुचन भी लेबर कॉंट्रैकशन से अलग होता है। साथ ही आप अपने पार्टनर के साथ यह बात शेयर करें कि वह ज्यादा डीप सेक्स न करे।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.