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सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार


सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार – 




Syphilis in hindi सिफलिस (उपदंश) एक यौन संक्रमित बीमारी है जो जीवाणु संक्रमण से होती है। शुरुआती चरणों में इसका इलाज संभव है। लेकिन यदि उपचार समय पर न कराया जाए तो यह बहुत से खतरों को जन्‍म दे सकता है, यह हमारे शरीरिक क्षमता में कमी और तंत्रिका संबंधी विकारों का कारण बन सकता है। यह रोग एक प्रकार के जीवाणु के द्वारा होता है जिसे ट्रेपेनेमा पैलिडम (Treponema pallidum) कहा जाता है। यह रोग, प्राथमिक, माध्‍यमिक और तृतीयक तीन चरणों में होता है।

यह रोग महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकता है। महिलाओं में इस रोग की दर में कमी आई है लेकिन पुरुषों में असुरक्षित यौन संबंधों के कारण इस रोग की दर में वृद्धि हो रही है। इस कारण सभी लोगों को सिफलिस के कारण, लक्षण और उपचार के बारे पता होना चाहिए। इस लेख के माध्‍यम से आप जानेगें कि सिफलिस किन कारणों से होता है और आप इसका उपचार किस प्रकार कर सकते हैं।

सिफलिस (उपदंश) क्‍या है – What is syphilis in Hindi


सिफलिस टी पैलिडम (T. Pallidum) बैक्‍टीरिया के संक्रमण से होता है जिसका पहला संकेत त्‍वचा पर हल्‍का दर्द होना होता है। यह यौन अंगों, गुदाशय या मुंह के अंदर हो सकता है। इसके मौखिक, गुदा या योनि संभोग जैसी यौन गतिविधि के दौरान फैल जाने की संभावना बहुत अधिक होती है।

इस बीमारी के सबसे पहले संकेत जननांग, गुदाशय, मुंह या त्‍वचा की सतह पर दर्द रहित फफोले उत्‍पन्‍न होते हैं।

इस संक्रमण के दौरान होने वाले घाव अपने आप ही ठीक हो जाते है, लेकिन फिर भी इनका इलाज किया जाना आवश्‍यक है नहीं तो बैक्‍टीरिया शरीर में रह सकते हैं और मस्तिष्‍क समेत शरीर के अन्‍य अंगों को क्षति पहुंचा सकते हैं यह लंबे समय तक शरीर में निष्क्रिय रह सकता है।

(और पढ़े – क्लैमाइडिया – Chlamydia in hindi)
उपदंश (सिफलिस) होने का कारण – Causes or Syphilis in Hindi



सिफलिस रोग होने के बहुत से कारण है जिन्‍हें हम अक्‍सर नजर अंदाज कर देते हैं जो आगे चल कर हमारे लिए बहुत सी समस्‍याओं को बढ़ाने का कारण बनते हैं।

सिफलिस तब होता है जब यौन गतिविधि के दौरान टी पैलिडम (T. Pallidum) एक व्‍यक्ति से दूसरे में स्‍थानांतरित होता है।
गर्भावस्‍था या प्रसव के दौरान यह शिशु को मां के भ्रूण में भी हो सकता है। इसे जन्‍मजात सिफलिस कहा जाता है।
यह डोरकोन्‍स और टॉयलेट सीट (doorknobs and toilet seats) जैसी वस्‍तुओं के साथ साझा संपर्क के माध्‍यम से नहीं फैलता है।
यह असुरक्षित यौन संबंधों के कारण हो सकता है, लेकिन चुंबन से इसके फैलने की पुष्टि नहीं होती है।
पुरुष, महिलाओं की तुलना में सिफलिस के लिए अधिक संवेदनशील होते है। 15-39 साल की उम्र के परुषों और महिलाओं में यह बीमारी होने की संभावन सर्वाधिक होती है।


सिफलिस होने का खतरा किन लोगों को है – Risk factors of Syphilis in Hindi


यौन सक्रिय (Sexually active) लोगों को सिफलिस का खतरा होता है। इससे होने वाले खतरों में शामिल हैं :
जो लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं।
वे पुरुष जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं।
एचआईवी संक्रमित लोगों के साथ संबंध बनाने से
कई साथीयों यौन भागीदारों वाले लोग
सिफलिटिक घाव भी एचआईवी के जोखिम में वृद्धि करते हैं

उपदंश (सिफलिस) के लक्षण – Symptoms of Syphilis in Hindi


इसे चांसर्स (chancres) के नाम से भी जाना जाता है। सिफलिस (उपदंश) जो कि घावों के माध्‍यम से फैलता है। सिफलिस को प्रत्‍येक चरण से जुड़े विभिन्‍न लक्षणों के साथ तीन चरणों द्वारा वर्गीकृत किया जाता है।
हालांकि कुछ मामलों में कई सालों तक इसके कोई लक्षण (symptoms) नहीं दिखाई देते हैं।
संक्रामक चरणों (Infectious stages) में प्राथमिक, माध्‍यमिक और तृतियक चरण होते हैं।
तृ‍तीयक सिफलिस संक्रामक नहीं है, लेकिन इसमें सबसे ज्‍यादा खतरा होता है।
सिफलिस के प्राथमिक लक्षण – Primary Symptoms of Syphilis in Hindi

प्राथमिक सिफलिस के लक्षण में चांसर्स (chancres) नामक एक या कई सिफिलिटिक घाव होते हैं। ये प्रारंभ होने के लगभग 3 सप्‍ताह बाद दिखाई देते हैं।

चांसर्स 3 से 6 सप्‍ताह के अंदर खुद ही गायब हो जाते हैं, लेकिन उपचार के बिना, यह रोग अपने अगले चरण में प्रगति कर सकता है।
सिफलिस के माध्‍यमिक लक्षण – Secondary symptoms of Syphilis in Hindi

माध्‍यमि सिफलिस के लक्षणों में शामिल हैं :
बिना खुजली वाले लाल चकते जो जननांग से प्रारंभ होते हैं और हाथों और पैरों के तलवों सहित पूरे शरीर में फैलते हैं। यह चकते रंग में गहरे लाल या भूरे होते हैं।
मुंह, गुप्‍तांग का मस्‍सा (genital wart), और गुदा आदि में घाव हो सकते हैं।
मांसपेशीय दर्द,
बुखार,
गले में खरास हो सकती है।
लसिका ग्रंथियों (lymph nodes) में सूजन
बालों का गिरना,
सिर दर्द
वजन कम होना,
थकान

ये लक्षण होने के कुछ सप्‍ताह बाद खुद ही ठीक हो सकते हैं लेकिन उपचार न किया जाए तो यह अगले चरण के रूप में फिर से बापिस आ सकते हैं।
उपदंश (सिफलिस) के अप्रकट लक्षण – Latent syphilis in Hindi

लोगों में यह रोग इस चरण में कई वर्षों तक चल सकता है। इस समय के दौरान बिना लक्षण (without symptoms) के यह रोग शरीर में बना रहता है। यह धीरे धीरे तृतीयक सिफलिस को विकसित कर सकता है। हालांकि टी. पैलिडम बैक्‍टीरिया शरीर में निष्क्रिय रहता है और इसके फिर से होने का खतरा बना रहता है।


सिलफिस के तृ‍तीयक लक्षण – Tertiary syphilis in Hindi

संक्रमण की शुरुआत के बाद तृतीयक सिफलिस 10 से 30 साल बाद हो सकता है, आमतौर पर इस अवधि के बीच इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

इसके लक्षणों में शामिल हैं :
दिल, रक्‍त वाहिकाओं, यकृत, हड्डियों और जोड़ों को नुकसान
गुमा (gummas) या ऊतकों में सूजन जो शरीर पर कहीं भी हो सकती है।
यह शरीर के अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है मतलब तृतीयक सिफलिस अक्‍सर घातक हो सकता है।


न्‍यूरोसिफलिस – Neurosyphilis in Hindi


न्‍यूरोसिफलिस एक ऐसी स्थिति है जहां बैक्‍टीरिया तंत्रिका तंत्र (nervous system) में फैल जाता है। यह अक्‍सर गुप्‍त और तृतीयक सिफलिस से जुड़ा होता है, लेकिन यह प्राथमिक चरण के बाद किसी भी समय प्रकट हो सकता है।

यह लंबे समय तक स्‍पर्शोन्‍मुख (asymptomatic) हो सकता है, या यह धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है।

इसके लक्षणों में शामिल हैं :
डिमेंशिया या बदली मानसिक स्थिति
असामान्‍य चाल
हाथ पैर सुन्‍न होना (numbness in the extremities)
एकाग्रता मे कमी, उलझन
सिरदर्द या दौरे
द्रष्टि की समस्‍याएं या दृष्टि हानि
दुर्बलता
जन्‍मजात सिफलिस – Congenital syphilis in Hindi


आपके जीवन के लिए जन्‍मजात सिफलिस बहुत ही गंभीर हो सकता है। जन्‍म प्रक्रिया के दौरान मां इस संक्रमण को प्‍लेसेंटा के माध्‍यम से अपने भ्रूण में स्‍थानांतरित कर सकती है।

रिकार्डों से पता चलता है‍ कि स्‍क्रीनिंग और उपचार के बिना, सिफलिस 70 प्रतिशत महिलाओं में गर्भावस्‍था के समय प्रतिकूल प्रभाव छोड़ता है।

नवजात बच्‍चों (newborns) मे सिफलिस के लक्षणों में शामिल हैं :
बुखार
वजन बढ़ाने में कठिनाई
जननांग, गुदा, और मुंह में लाल चकते
हाथों और पैरों पर छोटे छोटे फफोले (small blisters) जो तांबे के रंग के धब्‍बे में बदल जाते हैं और चेहरे पर फैलते हैं
नाक से पानी बहना।

छोटे बच्‍चों (young children) में होने वाले लक्षण इस प्रकार हैं :
असामान्‍य दांत, पेग के आकार के दांत
हड्डी में दर्द
दृष्टि खोना
बहरापन
जोड़ों में दर्द और सूजन
निचले पैरों में हड्डी की समस्‍या
जननांगों, गुदा और मुंह के आसपास की त्‍वचा में दाग हो सकते हैं।
बाहरी योनि और गुदा के चारों ओर भूरे रंग के दाग (patches) आ सकते हैं।
सिफलिस (उपदंश) की जांच और निदान – syphilis Tests and diagnosis in Hindi


सिफलिस की पुष्टि करने के लिए नैदानिक परीक्षण करने से पहले एक डॉक्‍टर शारीरिक परिक्षण (physical examination) करता है और रोगी के यौन संबंधों के बारे में पूछता है। यदि एसा लगता है कि आपको सिफलिस (syphilis) हो सकता है तो जितनी जल्‍दी हो सके डाक्‍टर के पास जाए। डाक्‍टर यह निर्धारित करने के लिए कुछ परिक्षण करेगा कि आपके शरीर में सिफलिस बैक्‍टीरिया (Bacteria) मौजूद है या नहीं। इन परिक्षणों में शामिल हैं :

रक्‍त परिक्षण (Blood tests) : वर्तमान या पिछले संक्रमण का पता लगाने के लिए रक्‍त परिक्षण किया जाता हैं, क्‍योंकि बीमारी के लिए एंटीबॉडी कई सालों तक आपके शरीर में उपस्थित रहते हैं।

शारीरिक तरल (bodily fluid) पदार्थ : प्राथमिक या माध्‍यमिक चरणों के दौरान फोड़ों से निकलने वाले द्रव (bodily fluid) का मूल्‍यांकन किया जा सकता है।

सेरेब्रोस्‍पाइनल तरल (Cerebrospinal fluid) पदार्थ : इसे रीढ़ की हड्डी के माध्‍यम से प्राप्‍त किया जा सकता है और तंत्रिका तंत्र पर किसी भी प्रभाव के परीक्षण के लिए जांच की जा सकती है। यदि सिफलिस का उपचार किया जाता है तो किसी भी यौन भागीदारों (sex partners) को बीमारी होने की संभावना के लिए प‍रीक्षण जरूर किया जाना चाहिए।

हेल्‍थकेयर प्रदाता एचआईवी परी‍क्षण की भी सलाह देते हैं।


सिफलिस (उपदंश) का परिक्षण कब किया जाए – When to get tested for syphilis in Hindi


बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता है कि उन्‍हें यौन संक्रमण (STI) है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए डॉक्‍टर से संपर्क करना ज्‍यादा बेहतर होता है। सामान्‍य रूप से आप इन परिक्षणों (testing) को उस समय करा सकते हैं जब
जब आप असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं।
अगर आप कई लोगों को सेक्‍स संबंध बनाते हैं।
अगर आपका यौन साथी सिफलिस रोग से ग्रसित है।
यदि आप ऐसे किसी पुरुष के साथ यौन संबंध बनाते हैं जो कई पुरुषों के साथ यौन संबंध रखता है।

यदि आपको सिफलिस है या इस तरह के यौन संबंधों की संभावना है तो जितनी जल्‍दी हो डॉक्‍टर से संपर्क करें, प्रारंभिक उपचार के द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है।


उपदंश (सिफलिस) का उपचार – Syphilis Treatment in Hindi


प्राथमिक और माध्‍यमिक सिफलिस का उपचार पेनिसिलिन इंजेक्‍शन (penicillin injection) के द्वारा किया जा सकता है। पेनिसिलिन सबसे व्‍यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एंटीबायोटिक्‍स में से एक है और आमतौर पर सिफलिस के इलाज में प्रभावी होते हैं। जो लोग पेनिसिलिन (penicillin) के लिए एलर्जी रखते हैं, उनके उपचार के लिए अन्‍य एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है जैसे कि डॉक्‍सीसाइक्लिन (doxycycline), अजिथ्रोमाइसिन(azithromycin) और सेफटरियक्षोणें (ceftriaxone) आदि।

यदि आपको न्‍यूरोसिफलिस (neurosyphilis) है तो आपको पेनिसिलिन की दैनिक खुराक लेना चाहिए। इसके लिए आपको अस्पताल में ठहरने की आवश्यकता होती है। सिफलिस से होने वाले नुकसान को रोका नहीं जा सकता है बल्कि उपचार करके आप इसके होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं जो दर्द और असुविधा को कम करने में मदद करता है।

उपचार के दौरान जब तक की आपके शरीर पर सिफलिस के सभी घाव ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक यौन संपर्क से बचना चाहिए। यदि आप यौन सक्रिय हैं, तो आपके साथी का भी इलाज किया जाना चाहिए। जब तक आप और आपके साथी का इलाज पूरा नहीं हो जाता है तब तक यौन गतिविधि को फिर से शुरु नहीं करना चाहिए।

सिफलिस के मौजूदा स्‍तर को जांचने में रक्‍त परी‍क्षण देखने में कई महीने लग सकते हैं जो उपचार की पुष्टि करता है।

सिफलिस (उपदंश) के बाद यौन संबंध कब सुरक्षित है – When is it safe to have sex in Hindi


यौन संबंधों से तब तक बचना चाहिए जब तक कि‍ :
आपके द्वारा कराया गया उपचार पूरा न हो जाए।
एक रक्‍त परीक्षण इस बात की पुष्टि करे कि बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई है।
सिफलिस के मौजूदा स्‍तर को जांचने में रक्‍त परी‍क्षण देखने में कई महीने लग सकते हैं जो उपचार की पुष्टि करता है।


सिफलिस की रोक थाम – Prevention for syphilis in Hindi


उपदंश (सिफलिस) के जोखिमों को कम करने के निवारक उपायों में शामिल हैं :
इस दौरान यौन संबंधों (sex) से दूर रहना चाहिए।
एक ही साथी के साथ यौन संबंध बनाए रखना चाहिए।
कंडोम का उपयोग करना चाहिए, हालांकि यह जननांग घावों की रक्षा करते हैं न कि शरीर के अन्‍य भागों की
सेक्‍स खिलौनों की अदला बदली नहीं करनी चाहिए।
शराब (alcohol) और दवाओं से परहेज करना चाहिए जो संभावित रूप से असुरक्षित यौन समस्‍याओं का कारण बन सकती है।

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