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बद्धकोणासन करने की विधि


बद्धकोणासन करने की विधि और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ

बद्धकोणासन को बटरफ्लाई पोज भी कहते हैं। यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही शरीर में रक्त के परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है।




बद्धकोणासन आसन को कोबलर पोज या बटरफ्लाई पोज भी कहते हैं। यह आसन अन्य आसनों की तुलना में ज्यादा सरल है और इसे आसानी से किया जा सकता है। अक्सर मोची इसी मुद्रा में बैठकर अपना काम करते हैं। इस आसन में कूल्हों को खोलकर पैरों को जोड़कर बैठा जाता है और तितली की तरह ऊपर नीचे हिलते हैं। इस मोशन को बटरफ्लाई मोशन कहते हैं। तो आइए इस आसन को करने की सही विधि और इससे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। [

बद्धकोणासन करने से पहले याद रखें यह बातें: यह आसन सुबह जल्दी उठकर किसी अन्य आसन के साथ किया जाता है। लेकिन अगर आप सुबह जल्दी नहीं उठ पाते हैं तो आप यह आसन शाम को भी कर सकते हैं। बस ध्यान रहे आपके आसन करने और आपके भोजन में कम से कम 4-6 घंटे का अंतर हो। ताकि आसन करने तक आपका भोजन पूरी तरह से पच जाए।

बद्धकोणासन करने के तरीके:
सीधा बैठे और अपने पैरों को स्ट्रैच करें। अब सांस लें और अपने घुटनों को इस तरह से मोड़ें की आपकी एड़ी पेल्विस की तरफ हो।
आप अपनी एड़ियों को पेल्विस के पास जितना ला सकते हैं लाएं। अब अपने हाथ के अंगूठे और पहली अंगुली का इस्तेमाल करते हुए अपने पैर के अंगूठे को पकड़ें। ध्यान रहे अपने पैरों के बाहरी किनारों को हमेशा फर्श पर दबाएं।
एक बार जब आप इस मुद्रा में सहज हो जाएं तो जल्दी से जांच लें कि क्या आपकी प्यूबिस और टेलबोन फर्श से समान दूरी पर हैं। पेल्विस सामान दूरी पर होनी चाहिए और पेराइनम(मूलाधार) फर्श के समानांतर होना चाहिए। ध्यान रहे आपके कंधे और कमर सीधे होने चाहिए।
हमेशा ध्यान रखें कि आपके घुटने जमीन की तरफ ना झुकें। अपने जांघ की हड्डियों को जमीन से स्पर्श कराने की कोशिश करें। ऐसा करने से अपने आप आपके घुटने जरुरत के हिसाब से नीचे झुकेंगे। इस मुद्रा में 1-5 मिनट तक रहें। सांस लें और अपने घुटनों को उठाएं और पैरों को फैलाएं। [
बद्धकोणासन करने के फायदे:
यह आसन प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह करने से डिलिवरी के समय आराम मिलता है।
बद्धकोणासन करने से महिलाओं के प्रजनन सिस्टम के कार्य में वृद्धि होती है।
यह पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण का सुधार करने में मदद करता है।
यह आसन तनाव दूर करने में लाभदायक है साथ ही थकान को दूर करने में भी मदद करता है।
इस आसन को करने से अस्थमा, इनफर्टिलिटी और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से राहत मिलती है।
यह एक अच्छी मुद्रा है तो रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाती है।

बद्धकोणासन करते समय बरते यह सावधानियां:
अगर आपके घुटने में चोट लगी हुई है तो यह आसन नहीं करना चाहिए।
मासिक धर्म के दौरान यह आसन ना करें।
अगर आप साइऐटिकै से पीड़ित हैं तो इस आसन को करने के लिए तकीये पर बैठे
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योगा
जानिए बकासन करने की विधि और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ

इस आसन में आपका शरीर क्रेन की शेप में आ जाता है। इस आसन को करने से पहले आपका पेट खाली होना चाहिए अगर आपने भोजन कर लिया है तो इस योग को कम से कम 5-6 घंटे बाद करें।




बकासन को काकासन भी कहते हैं। इन दोनों आसन में सिर्फ हल्का सा अंतर होता है। बकासन में शरीर की मुद्रा क्रेन जैसी होती है तो वहीं काकासन में आपकी मुद्रा एक बैठे हुए कौवे जैसी होती है। यह आसन एक से ही होते हैं बस हाथों में थोड़ा सा झुकाव होता है ताकि आपके घुटने ट्राईसेप्स के पास आ सकें। तो आइए आपको बकासन करने की विधि और इससे होने वाले फायदों के बारे में बताते हैं।

बकासन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान:
यह आसन को करने से पहले आपका पेट खाली होना चाहिए। इसे करने से 4-6 घंटे पहले भोजन कर लें। ताकि जब आप यह आसन करें तो आपका भोजन पच चुका हो। साथ ही आपको आसन करने के लिए ऊर्जा मिल सके। यह योगा करने का सबसे अच्छा समय सुबह होता है। लेकिन अगर किसी काम की वजह से यह सुबह नहीं कर पाते हैं तो शाम को भी यह आसन कर सकते हैं।



बकासन करने का तरीका:
यह आसन करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैर पास लाएं और अपने दोनों हाथ मजबूती से जमीन पर रखें। एक बात याद रखें आपके हाथ और कंधे अलग चौड़ाई पर हों।
अब अपने नितंब को उठाएं और सुनिश्चित करें की आपकी मुख्य मांसपेशियां इस तरह हो कि आपके घुटने आपके ट्राईसेप्स के पास आ जाएं। अगर आप काकासन कर रहे हैं तो अपनी ऊपरी बाहों के साथ एक शेल्फ बनाएं जैसा कि आप अपनी कोहनी मोड़ते हैं।
आगे की तरफ देखते हुए आराम से अपने पैरों को उठाएं। अपने शरीर का वजन अपने हाथों पर ले आएं। इस मुद्रा में थोड़ी देर के लिए रहें। बकासन करने के लिए अपने हाथों को सीधा रखें।
थोड़ी देर के लिए इस मुद्रा में रहने के बाद अपने पैर नीचे करें और उत्तानासन की मुद्रा में आ जाएं। 
बकासन करने के फायदे:


यह आसन आपकी कलाई और हाथ को मजबूत रखता है।
आपकी कमर अच्छी तरह स्ट्रैच होती है।
यह आसन आपके संतुलन और फोकस की समझ में सुधार करता है।
आपका शरीर किसी भी चुनौती के लिए तैयार होता है।
आपके आंतरिक जांघ मजबूत होते हैँ।
इस आसन को रोज करने से आप मजबूत और आत्म विश्वास से भरा महसूस करते हैं।

बकासन करते समय बरते यह सावधानियां:
अगर आप प्रेग्नेंट है तो यह आसन ना करें।
अगर आपकी कलाई में दर्द है तो इस आसन को ना करें।


बकासन के पीछे विज्ञान:
यह आसन करने के लिए आपके हाथ मजबूत होने चाहिए ताकि यह आपका वजन उठा सके। लेकिन सबसे पहले आपको इस डर से बाहर आना चाहिए की इस आसन को करते समय आप मुंह के बल गिर जाएंगे। यह आसन आपको अपने घुटनों को उठाने में मदद करता है और उन्हें आपके ऊपरी बांह के करीब लाने में मदद करता है। इस शान को करने के लिए शारीरिक और मानसिक तौर तैयार होना जरुरी होता है
ग की मदद से बनाए शानदार फ्लैट एब्स

कुछ ऐसे योगासन हैं जिनके जरीये एब्स बनाया जा सकता है। ये योगासन पेट की मांसपेशियों पर प्रभाव डालकर एब्स बनाने में मदद करते हैं।


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एब्स बनाने के लिए जरुरत है सही और उचित और डाइट और परिश्रम की। अगर इन तीन चीजों को सही तरीके से उपयोग किया जाए तो एब्स बनाना मुश्किल नहीं है। वो लोग जो एब्स बनाने के लिए जिम नहीं जाना चाहते हैं वो लोग भी योग की मदद से एब्स बना सकते हैं। ये योगासन पेट की मांसपेशियों पर जोर डालकर पेट की चर्बी कम करते हैं। 
वृक्षासन(ट्री पोज):
यह आसन पेट की मांसपेशियों और पेट के हिस्सों पर प्रभाव डालता है इसलिए इस आसन को करने से पेट की चर्बी नष्ट होती है और पेट सपाट होता है। नियमित रूप से इस योगासन को करने से एब्स भी प्रभावशाली तरीके से बनते हैं। इसके अलावा इस आसन से शरीर का संतुलन भी बेहतर बनता है तथा एकाग्रता बढ़ती है।


तरीका:
*दायें पैर को मोड़कर अपने बाएं जांघ पर टिका लें और शरीर का सारा भार अपने बाएं पैर पर केन्द्रित करें।
*एक बार जब शरीर का भार संतुलित हो जाए तो गहरी सांसें लें और अपने दोनों हाथों को अपने सिर के ऊपर ले जाकर नमस्ते की मुद्रा बनाएं।
*इस अवस्था में रहें और सामने किसी चीज पर ध्यान केन्द्रित करें।
*इस बात का ध्यान रखें की आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो और आप गहरी सांसें ले रहे हों।
* धीरे-धीरे सांसे छोड़ते हुए अपने हाथ नीचे गिराएं साथ ही साथ अपने दायें पैर को भी नीचे जमीन पर रख लें। इस प्रक्रिया को दूसरे पैर से भी दोहराएं। [

वैरियर लंज ट्विस्ट: 

यह योगासन न केवल आपके पेट की मांसपेशियों को प्रभावित कर पेट को सपाट बनाता है बल्कि शरीर के पोस्चर को भी सही करता है। इस योगासन को नियमति रूप से करने पर एब्स का भी निर्माण होता है।

तरीका: 
*सबसे पहले हाथों से प्रार्थना करने की मुद्रा बनायें। आगे की तरफ झुकें और अपने अगले पैर को आगे लायें घुटने को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें और पिछले पैर को सीधा रखें।
*अपने शरीर को उस तरफ घुमाएं जिस तरफ आपका पैर मुड़ा हुआ हो।
*अपने बाएं पैर की तरफ झुकते हुए अपने रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और अपने दायें कोहनी को बाएं पैर से दूर रखें।
*अपने सिर को घुमाएं और ऊपर की तरफ देखें।
*इस अवस्था में 10 गहरी सांसें लें और वापस पहले की अवस्था में आ जाएं।
*इस योगासन को दूसरी तरफ से करें।
मकरासन करने की विधि और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ

मकरासन योगा सेशन के अंत में किया जाने वाला योगासन है। इससे शरीर को आराम पहुंचता है साथ ही यह दूसरे योगासनों करने से होने वाले खिंचाव को दूर करता है।



मकरासन जिसे क्रोकोडाइल पोज अर्थात मगरमच्छ आसन भी कहते हैं शरीर को रिलैक्स करने वाला योगासन है। यह योगासन कमर और कंधे के लिए बहुत ही बेहतर योगासन है। इस योगासन के दौरान शरीर पानी में आराम करते मगरमच्छ जैसा दिखता है इसलिए इस आसन का नाम मकरासन है। इस योगासन का मुख्य काम दूसरे योगासनों करने से होने वाले खिंचाव को दूर करना होता है। यह योगासन योग के अंत में किया जाने वाला योगासन है। आईये जानते हैं की सी योगासन के क्या फायदे होते हैं तथा इसके करने का क्या तरीका होता है। 

मकरासन करने से पहले मकरासन के बारे में जानें ये बातें:
मकरासन योग सबसे अंत में किया जाने वाला आसन है। यह योगासन शरीर को शांत और ठंडा करने के लिए किया जाता है। मकरासन योगासन हमेशा सुबह-सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर किसी कारणवश आप ये व्यायाम सुबह में नहीं कर पाते हैं तो आप इस व्यायाम को शाम को करें। बस ये ध्यान रहे की इस व्यायाम को करने से पहले कम से कम 4-5 घंटे पहले भोजन किया हो।

मकरासन करने का तरीका:
1. पेट के बल जमीन पर लेट जाएं।
2. अपने हाथों को अपने सिर के पास कोहनी के बल टिकाएं और हाथ जोड़ लें।
3. अपने कंधे और सिर को उठायें। अपनी गर्दन को सीधा ही रखें और सामने देखें।
4. अपने सिर को आगे की तरफ थोड़ा मोड़ें और अपने ठुड्डी को अपने हथेलियों पर टिकाएं।
5. पैरों को स्ट्रेच करें और जमीन को अपने पैरों की अंगुलियों से स्पर्श कराएं।
6. धीरे-धीरे सांसें लें और अपने मांसपेशियों को रिलैक्स करें।
7. इस आसन में तब तक रहें जब तक आप पूरी तरह से रिलैक्स न हो जाएं।
8. इस अवस्था से हटने के लिए धीरे-धीरे अपनी हथेलियों को अपने ठुड्डी से हटायें और अपने कंधे और सर को नीचे लायें और उठ जाएं। [

मकरासन के फायदे: 
*मकरासन से कंधे और रीढ़ को आराम मिलता है।
*इस आसन से घुटने का दर्द, फेफड़े की समस्या तथा अस्थमा की समस्या दूर होती है।
*यह आसन स्लिप डिस्क, स्पोनडीलाइटिस की समस्या को भी दूर करता है।
*यह शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करता है।
*मकरासन हाइपरटेंशन, हृदय रोग और मानसिक समस्याओं को दूर करता है।
*यह आसन पेट की मांसपेशियों, हृदय रोगों तथा मानसिक विकारों को दूर रखता है।
* मकरासन करने से सांसों पर नियंत्रण बनता है।
*यह आसन करने से व्यक्ति के अन्दर सक्रियता बढ़ती है तथा दिमाग हमेशा सचेत रहता है।
*मकरासन करने से शरीर में मौजूद गांठें खुल जाती है जिससे शरीर और भी ज्यादा लचीला हो जाता है।

मकरासन करते समय बरतें ये सावधानियां: 
*मकरासन करते समय यह ध्यान रखें की आपका शरीर सहज है।
*अगर पीठ में गहरी चोट लगी हो तो इस आसन को ना करें।
*जिन लोगों के गर्दन में चोट लगी हो वो लोग भी इस योगासन को ना करें।

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