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विभिन्न अंगों में कैसर के लक्षण एवं योग उपचार :


विभिन्न अंगों में कैसर के लक्षण एवं योग उपचार :
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1. जीभ और मुँह :
ठीक न होने वाला अलसर या धब्बा या रसौली बाद में जबड़े के नीचे या गर्दन की लसिका ग्रंथियों का सख्त हो जाना गला


2. स्वर यंत्र

आवाज़ का फट जाना, गर्दन में लसिका ग्रंथियों का सख्त हो जाना, खास तरह के शीशे से जांच करना ज़रूरी


3. श्वसनी

खाना निगलने में मुश्किल होना, गले में वृद्धि होना और गर्दन में लसिका ग्रंथियों का सख्त हो जाना


4. फेफड़े

चिरकारी खॉंसी व बलगम में खून आना। छाती की एक्स रे फिल्म में व्याधि विकास दिख जाता है
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5. ग्रासनली

खाना निगलने में मुश्किल होना और ऐसा लगना कि खाना छाती में अटक गया है


6. अमाशय

भूख न लगना, घंटों घंटों तक पेट भरा भरा सा लगता रहना, कभी कभी उल्टी आना, पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ या रसौली महसूस हो सकती है, उल्टी में खून आ सकता है


7. आंतें और मलाशय

मल में खून आना, मलत्याग की आदतों में बदलाव होना


8. स्तन

स्तन में सख्त सी गांठ होना, त्वचा में ठीक न होने वाला अल्सर या वृद्धि, बगलों में लसिका ग्रंथियों में सूजन


9. गर्भाशय

रक्तस्त्राव जो कि माहवारी से या गर्भावस्था से जुड़ा हुआ न हो, गर्भाशय ग्रीवा पर कोई असामान्य वृद्धि महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में कोई वृद्धि महसूस होना


10. खून

रक्तस्त्राव की प्रवृति, लिवर या तिल्ली का बढ़ जाना, बार बार संक्रमण होना


11. डिंबवाही ग्रंथियॉं

पेट के निचले हिस्से में गांठ होना


12. वृषण

वृषण या वृषण कोश में सूजन
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13. शिश्न

शिश्न की त्वचा पर मस्से जैसी या अनियमित वृद्धि और बीच बीच में खून निकलना


14. मूत्राशय

बीच बीच में पेशाबद्वारा खून निकलना
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15. पुरस्थ ग्रंथी

पेशाब करने में परेशानी, थोड़ी थोड़ी पेशाब निकलते रहना, पेशाब में पीप, पुरस्थ और मलाशय में सख्त वृद्धि होना


16. लिवर/ जिगर

बढ़ा हुआ लिवर, पीलिया या सफेद मल
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17. हड्डियॉं

हड्डियों से जुड़ी हुई सख्त वृद्धि, जल्दी जल्दी बढ़ती जाती है पर दर्द रहित होती है


18. लसिका ग्रंथियॉं

कई जगहों में लसिका ग्रंथियों में सूजन, रबर जैसी हो जाना, बुखार और वजन घटना


यदि प्रारंभिक अवस्था में किसी भी प्रकार के कैंसर का पता चलता है ‍तो सर्व प्रथम प्रतिदिन तीन से चार बारअनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए | रात्रि में भी सोने से पूर्व पांच मिनट अनुलोम-विलोम का अभ्यास करें तत्पश्चात प्रतिदिन क्रमश: कपालभाती, भस्त्रिका, नाड़ी शोधन प्राणायाम और पांच मिनट के ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बना लें।


इसके अतिरिक्त :
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** स्वच्छ हवा में रहें |
** पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करें |
** प्राकृतिक आहार लें।
** जितनी भूख हो उससे कम खाएं
** प्रातः खाली पेट 7 तुलसी पत्र + 4 नीम की कोमल पत्तियों के रस को 50 मिली. गेहूं के ज्वार (ज्वारा) या एलोविरा के साथ लें | (पत्तियों को चबाकर भी खा सकते हैं) इनका योग कीमोथेरेपी जैसा ही असर करेगा ।

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