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जिम है, फिट रहने का सबसे अनोखा और बेस्ट तरीका


जिम है, फिट रहने का सबसे अनोखा और बेस्ट तरीका
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जिम हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी है। इससे हमारा शरीर एकदम फिट रहता है। अगर आप फिट रहने के लिए फिटनेस उपायों की खोज कर रहे हैं, लेकिन आपका बजट बहुत कम है, तो हम आपकी इस परेशानी को दूर कर सकते है। हम आपके लिए बजट में रहकर स्‍वस्‍थ रहने के फिटनेस टिप्‍स लेकर आये हैं। 


आप फिट रहना चाहते है लेकिन जिम ना जाने की वजह से आप अपने आप को फिट नही रख पा रहे है इसके अतिरिक्त आपके पास यह बहाने है कि आपके पास पैसे नही है,आप थक जाते है,अभी बहुत टाइम पड़ा है या देर हो चुकी है अब आप जल्दी फिट नही हो सकते तो अब यह सभी बहाने छोड़ कर बिना जिम के बारें सोचे भी आप फिट रह सकते है।

जिम जाना शुरू करते हैं तो आप में जिमिंग को लेकर उत्साह आ जाता है. लेकिन इस उत्साह के चलते एक ही दिन में सारी एक्सरसाइज करने की कोशिश करना गलत है। आप जिमिंग से पहले वॉर्मअप जरूर कर लें. इससे आपको एक्सरसाइज करने में सहूलियत होगी। इसके लिए किसी मशीन की ज़रूरत नहीं होती, यानी बिना पैसे खर्च किए भी आप फिट रह सकते हैं। यही वजह है कि ये कई साल पहले से लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है , इन्हें कहीं भी किया जा सकता है और क्षमता के अनुसार इसका लेवल बढ़ाना या घटाना भी आसान है। पुश-अप्स और पुल-अप्स बॉडीवेट ट्रेनिंग के क्लासिक मूव्ज़ हैं। इसके अलावा स्क्वॉट्स, प्लैंक्स, क्रंच, रिवर्स ड्रॉप भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं। 


शुरूआती दिनों में आपको थोड़ी सी दिक्कत हो सकती है. मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्या हो सकती है. अगर आपको लगता है कि एक दिन का रेस्ट आपके लिए जरूरी है, तो आप एक दिन जिम न जाएं. लेकिन वर्कआउट करना बहुत जरूरी है। इसलिए हमे जिम में बातों का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है ताकि हमारे शरीर को कोई भी नुकसान ना पहुंचे।

क्या अापकाे भी अाती है बहुत नींद ताे ये 10 टिप्स अापके लिए

शरीर को नींद नहीं, विश्राम की आवश्यकता है। अधिकतर लोगों का अनुभव यही है कि नींद ही सबसे गहरा विश्राम है इसलिए वे हमेशा नींद की बात करते हैं। मैंने लोगों को देखा है, वे बाग में घूमते हुए भी तनाव में रहते हैं। इस तरह की सैर तो उन्हें आराम देने की बजाए और परेशान कर देगी। हर काम ऐसे न करें मानो आप युद्ध पर निकले हों। परंतु मूल रूप से, शरीर नींद नहीं विश्राम चाहता है। अगर रात को शरीर को आराम नहीं मिलेगा तो आपकी सुबह थकान से भरी होगी। यहाँ नींद की बजाए विश्राम का अधिक महत्व है। अगर आप अपने शरीर को सारा दिन विश्राम की अवस्था में रखेंगे, अगर आपका काम, व्यायाम और अन्य गतिविधियाँ विश्राम के साथ होंगी तो आपकी नींद के घंटे अपने-आप ही कम हो जाएंगे। 

दरअसल लोगों को यही सिखाया गया है कि हर काम परिश्रम के साथ गहरे तनाव के बीच होना चाहिए। मैंने लोगों को देखा है, वे बाग में घूमते हुए भी तनाव में रहते हैं। इस तरह की सैर तो उन्हें आराम देने की बजाए और परेशान कर देगी। हर काम ऐसे न करें मानो आप युद्ध पर निकले हों। भले ही आप सैर करें, जॉगिंग करें या व्यायाम कर रहे हों, आप इसे आराम से, पूरे आनंद से क्यों नहीं कर सकते?


जीवन के साथ युद्ध मत लड़ें। अपने-आप को फिट रखना कोई युद्ध नहीं है। खेलें, तैरें या सैर करें; आपको जो भी अच्छा लगे, वही करें। अगर आप चीज़केक ही खाना चाहेंगे, तो परेशानी हो सकती है! वरना किसी भी गतिविधि के साथ अच्छी सेहत बनाए रखना कोई मुश्किल काम नहीं है।

अगर आप कुछ निश्चित यौगिक अभ्यास कर सकें, जैसे अपने जीवन में शांभवी महामुद्रा को अपना सकें, तो सबसे पहले आप यह बदलाव देखेंगे कि आपकी नब्ज़ थोड़ी धीमी चलने लगी है।

अगर ऐसा हुआ तो आपकी नींद के घंटे नाटकीय रूप से घटेंगे, क्योंकि शरीर सारा दिन सहज रूप से आराम में बना रहेगा।मिसाल के लिए, अगर कोई इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम करने के बाद, शांभवी मुद्रा करता है, और डिनर के पहले और बाद में उसकी नाड़ी देखी जाए – और फिर उसके बाद छह हफ़्तों तक शाम्भवी का अभ्यास करता है, और अपनी नाड़ी देखता है – तो वह आठ से पंद्रह काउंट तक नीचे आ जाती है। अगर कोई सही मायनों में शांभवी महामुद्रा में गहरे विश्राम की अवस्था को पा लेता है, तो नाड़ी की गति और भी कम हो जाएगी।

अभ्यास के बारह से अठारह माह के भीतर, आप विश्राम की अवस्था में अपनी नाड़ी की गति पचास या साठ तक ला सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो आपकी नींद के घंटे नाटकीय रूप से घटेंगे, क्योंकि शरीर सारा दिन सहज रूप से आराम में बना रहेगा। आप भले ही जो भी काम करें, शरीर आपसे ज़्यादा नींद की माँग नहीं करेगा।


शरीर काे ठीक रखने के लिए भोजन के साथ साथ कसरत है बहुत जरुरी


नयी दिल्ली: भारतीयों पर हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि देश में खानपान के साथ कसरत को लेकर क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है और 60 प्रतिशत लोग सप्ताह में चार घंटे से अधिक वक्त शरीर की चुस्ती के लिए खर्च करते हैं।

‘फिट इंडिया’ नाम के इस सर्वे में बताया गया कि सर्वे में भाग लेने वाले 10 में से नौ लोगों को लगता है कि फिटनेस बहुत महत्व रखती है और 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग स्वस्थ जीवनशैली हासिल करने की प्रेरणा रखते हैं।


सर्वे में कहा गया है कि आठ शहरों में 20 से 35 साल की उम्र के करीब 1500 महिलाओं और पुरुषों पर सर्वे किया गया और उनमें से सभी प्रति सप्ताह कम से कम एक फिटनेस गतिविधि में शामिल रहते हैं।

सर्वे रीबोक कंपनी ने कराया है जिसमें फिटनेस के मामले में पुणे अव्वल रहा. इसके बाद चंडीगढ़ का नंबर आता है।

35 फीसदी कामकाजी माएं नहीं चाहती हैं दूसरा बच्चा: सर्वे




एक सर्वेक्षण में शुक्रवार को खुलासा किया गया कि देश में शहरी क्षेत्र की 35 फीसदी कामकाजी माएं दूसरा बच्चा नहीं चाहती हैं। इसकी वजह बच्चों के ज्यादा समय देने की जरूरत और दूसरे खर्चो को माना गया है। मदर्स डे (14 मई) से पहले औद्योगिक संगठन एसोचैम की सामाजिक विकास शाखा द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कहा गया, “आधुनिक विवाह के तनाव, रोजगार के दबाव और बच्चों को पालने में होने वाले खर्च की वजह से कई माताएं पहले बच्चे के बाद दूसरा बच्चा नहीं चाहती हैं और अपने परिवार को नहीं बढ़ाने का फैसला करती हैं।

यह सर्वेक्षण 1500 कामकाजी माताओं पर किया गया। सर्वेक्षण 10 शहरों में किया गया। इसमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, जयपुर, लखनऊ और मुंबई शामिल हैं। इसमें बीते एक महीने में कामकाजी माताओं ने अपने बच्चों को कितना समय दिया, उनकी दूसरे बच्चे के होने या नहीं होने की योजनाएं और इसके कारणों के बारे में पूछा गया। करीब 500 प्रतिभागियों ने कहा कि वे दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं। कई ने कहा कि दूसरा मातृत्व अवकाश लेने से उनकी नौकरी/पदोन्नति खतरे में पड़ने की आशंका के कारण वे दूसरे बच्चे को लेकर हिचकती हैं।

किसी एक बच्चे के प्रति झुकाव एक दूसरा महत्वपूर्ण कारण रहा जिसके कारण कई प्रतिभागियों ने कहा कि वे दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं ताकि उनका ध्यान नहीं बंटे। कइयों ने कहा कि वे बच्चा या बच्ची के लिंग के आधार पर भी इस बारे में फैसला करती हैं। 
अधिकांश प्रतिभागियों ने कहा कि एक ही बच्चा होने की सोच से उनके पति सहमत नहीं होते। 

करीब दो तिहाई (65 फीसदी) ने साथ ही यह भी कहा कि वे नहीं चाहतीं कि उनकी औलाद एकाकी जीवन जिए और वह चीजों को दूसरों के साथ बांटने की खुशी, अपने छोटे-भाई बहन से स्नेह की खुशी से वंचित रहे। लेकिन, जीवन की अन्य जरूरतें और स्थितियां उनकी इस चाह के रास्ते में बाधक बन जाती हैं।




फिट और हेल्‍दी रहने के लिए सिर्फ एक्‍सरसाइज ही नहीं है काफी...

मधुमेह के प्रमुख कारण हैं सफेद चीनी, मैदा और चावल: IMA


: भारत में मधुमेह, महामारी की तरह फैल रहा है और इस बीमारी की मुख्य वजह जीवनशैली और खानपान में बदलाव है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का मानना है कि इस बीमारी के प्रमुख कारणों में हमारे रोजमर्रा के भोजन में सफेद चीनी, मैदा और चावल जैसी खाद्य वस्तुओं की अधिकता है।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर के.के. अग्रवाल ने बताया, ‘रिफाइंड चीनी में कैलोरी की भारी मात्रा होती है, जबकि पोषक तत्व बिल्कुल नहीं होते। इसके उपयोग से पाचन तंत्र पर काफी बुरा असर पड़ सकता है और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी अनेकों बीमारियां होती हैं।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पैकेट बंद खाद्य पदार्थ हर घर में जगह बना चुके हैं। आटा का उदाहरण लें तो यदि आटा में मैदा न मिलाया जाये तो वह ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकता। इसी तरह, मैदे से बनी ब्रेड ने लगभग प्रत्येक परिवार में सुबह के नाश्ते में अपनी जगह बना ली है। सीधा गेहूं पिसवाकर प्राप्त आटे में चोकर होता है, जबकि बाजार के आटे में प्राय: मैदा मिला होता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डाक्टर संदीप मिश्र का कहना है, ‘रक्त में शर्करा की मात्रा तेजी से बढ़ाने में रिफाइंड काब्रोहाइड्रेट का अहम योगदान है जोकि मैदा जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। मीठी चीजों का यदि सेवन करना ही हो तो देशी गुड़ या शहद उपयुक्त विकल्प हैं।’ मिश्र ने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक, देश की आबादी में 30 वर्ष से ऊपर की आयु के करीब 10 प्रतिशत लोग मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त हैं या इसके करीब हैं।

अग्रवाल ने कहा कि इसी तरह, पहले सफेद चावल खाने की परंपरा नहीं थी, लेकिन आज छिलका उतरा हुआ सफेद चावल ही हर जगह खाया जाता है। ‘कुल मिलाकर कृत्रिम सफेद चीजों’ ने हमारे जीवन में जहर घोल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में व्रत आदि रखने की परंपरा के वैज्ञानिक कारण थे। अन्न दोष से बचने के लिए लोग सप्ताह में एक दिन उपवास रखते और उस दिन गेहूं से बनी चीजों का परित्याग करते थे। इसी तरह, महीने में एक दिन चावल का परित्याग करते थे। इससे उनकी इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती थी।नयी दिल्‍ली: फिट रहने के लिए लोग अकसर वॉक, एक्‍सरसाइज, जिम या फिर डाइट करते हैं, हजारों रुपए खर्च करते हैं. लेकिन कई बार इन तमाम चीजों को अपनाने के बावजूद आपका वजन कम नहीं हो पाता. इसका कारण है कि आप अपनी एक्‍सरसाइज या जिम को एंज्‍वॉय नहीं करते. अगर आप चाहते हैं कि इस एक्‍सरसाइज का आपको पूरा फायदा मिले, तो इन टिप्‍स को ट्राई करें और कमाल देखें.


यह आपको अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है. 
म्‍यूजिक की आवाज आपकी एक्‍सरसाइज की गति और अवधि को प्रभावित करती है.
नारियल तेल और घी वास्तव में वजन घटाने में काफी मददगार होते हैं. इसमें फैटी एसिड की मध्यम श्रृंखला होती है जो मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्‍त करता है. साथ ही इससे दिल की बीमारी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसी समस्‍या भी नहीं होती.
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0टिप्पणियांशहद को खनिज और विटामिन ये युक्‍त माना जाता है, कुछ लोग तो इसे कफ सिरप के रूप में भी इस्‍तेमाल करते हैं. इसे आप स्क्रब और कंडीशनर के रुप में घरेलू उपचार की तरह प्रयोग कर सकते हैं.
कॉड लिवर तेल इम्‍यूनिटी को दुरुस्‍त करने के लिए जाना जाता है. भोजन से जो जरूरी खनिज और विटामिन हमें नहीं मिल पाते, उसकी भरपाई यह आसानी से कर देता है. स्किन और बाल की समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए भी इसका इस्‍तेमाल किया जाता है.
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एक्‍सरसाइज के साथ-साथ जूस भी जरूर पीएं. पैक्‍ड जूस की बजाए ताजा फलों का निकाला हुआ जूस लें. यह आपको एनर्जी देने में मदद करेगा.
सही मात्रा में डार्क चॉकलेट आपके चयापचय को बढ़ावा देने और वजन कम करने में मदद कर सकती है. इतना ही नहीं डार्क चॉकलेट बॉडी में मौजूद एक्‍स्‍ट्रा वसा को भी काटती है. वर्कआऊट शुरू करने से पहले थाड़ी-सी चॉकलेट खाई जा सकती है. 
जैतून, कैसर से लड़ने के अलावा वजन कम करने में भी काफी फायदेमंद होता है. आप अपने खाने में प्रतिदिन जैतून का तेल लेने से 200 कैलोरी तक बर्न कर सकते हैं.





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