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तनाव किस तरह आप को बीमारियों का शिकार बना रहा है,

तनाव किस तरह आप को बीमारियों का शिकार बना रहा है, जानिए जरूर
तनाव शरीर में कैमिकल प्रतिक्रिया करता है, जिस से एडरेनालाइल और अन्य हारमोन हृदय की और सांस लेने की गति को बढ़ा देते हैं जिस से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है और इस प्रतिक्रिया को पूरा करने के लिए दिल को ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है.



विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार तनाव में रहने से कई तरह की बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लडप्रैशर इत्यादि हो सकती हैं जिन के परिणामस्वरूप हार्ट की बीमारी होने तक का खतरा हो सकता है. जानते हैं, तनाव कैसे दिल का मर्ज बढ़ाता है:
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कई दिनों बाद जब श्रेया की दोस्त औफिस पहुंची तो उस ने श्रेया को उस के बढ़ते वजन के लिए टोका. यह सुन श्रेया को भी लगा कि वह भी वजन बढ़ना महसूस कर रही है. दरअसल, 48 साल की श्रेया अंतर्राष्ट्रीय कंपनी के मार्केटिंग विभाग में काम करती है जिस में उसे अपने टार्गेट पूरे करने होते हैं. टार्गेट पूरा करने के चक्कर में वह सारा दिन तनाव में रहती है. उस की जिंदगी इतनी ज्यादा व्यस्त है कि कसरत करना तो दूर की बात है, उसे खानेपीने का भी होश नहीं रहता.
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हाई ब्लडप्रैशर से पीडि़त श्रेया का न सिर्फ वजन बढ़ रहा है, बल्कि उसे खुद में कई बदलाव भी महसूस हो रहे हैं. जैसे चलने से उस की सांस फूलने लगती है और कभीकभी तो उसे सांस लेने में तकलीफ तक होने लगती है. कई लोगों ने उसे इन लक्षणों का कारण ढलती उम्र बताया तो कोई कहता है कि हाई बीपी के कारण उसे यह समस्या होती है.

अंतत: श्रेया अपनी फैमिली डाक्टर से मिली तो उन्होंने लक्षणों को समझ कर उसे हृदयरोग विशेषज्ञ से मिलने की सलाह दी. यह सुन कर श्रेया को काफी हैरानी हुई, क्योंकि उसे कभी नहीं लगा कि वह हृदयरोग से पीडि़त हो सकती है. लेकिन फैमिली डाक्टर के कहने पर आखिरकार वह कार्डियोलौजिस्ट से मिली. उस की जांच के बाद पता चला कि वह हार्ट फेल्योर की समस्या से ग्रस्त है. डाक्टर ने बताया कि सारा दिन तनाव में रहने अैर अस्वस्थ जीवनशैली के चलते उसे यह समस्या हुई है.
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तनाव शरीर में कैमिकल प्रतिक्रिया करता है, जिस से एडरेनालाइल और अन्य हारमोन हृदय की और सांस लेने की गति को बढ़ा देते हैं जिस से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है और इस प्रतिक्रिया को पूरा करने के लिए दिल को ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है ताकि ज्यादा मात्रा में औक्सीजन शरीर को दी जा सके. अगर यह प्रतिक्रिया रोजाना लगातार होती है तो हृदय के लिए लगातार इतनी तेजी से पंप करना मुश्किल हो जाता है और औक्सीजन उचित तरीके से शरीर में नहीं पहुंच पाती.

श्रेया जैसे न जाने कितने लोग हैं जो सारा दिन तनाव में बिताते हैं. सेहतमंद खाना नहीं खाते और कसरत नहीं करते. नतीजतन उन्हें हार्ट फेल्योर जैसी बीमारियां होने का खतरा होने की संभावना हो सकती है.

हार्ट फेल्योर से जुड़े लक्षणों को पहचान कर तुरंत डाक्टर से उपचार शुरू कराएं, क्योंकि समय रहते दवा व अन्य थेरैपी की मदद से इसे मैनेज किया जा सकता है.

हार्ट फेल्योर की पहचानना करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इस की पहचान मैडिकल हिस्ट्री की जांच कर के, लक्षणों की पहचान, शारीरिक जांच, रिस्क फैक्टर जैसे उच्च रक्तचाप, कोरोनरी आर्टिरी बीमारी या डायबिटीज आदि होने और लैबोरटरी टैस्ट से की जा सकती है. इकोकार्डियोग्राम छाती का एक्स रे कार्डिएक स्ट्रैस टैस्ट, हार्ट कैथेरेटराइजेशन और एमआरआई से इस समस्या की सही पहचान की जा सकती है.

इस के अलावा हार्ट फेल्योर से बचने के लिए इस के रिस्क कारणों को मैनेज करना बहुत जरूरी है, जिन में सब से महत्त्वपूर्ण तनाव है, क्योंकि तनाव से ही कई बीमारियां जैसे डायबिटीज, वजन बढ़ना, हाई बीपी आदि होती हैं.

हार्ट फेल्योर को मैनेज करने के तरीके
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स्वस्थ खानपान: सब से जरूरी यह है कि अपने खानेपीने का ध्यान दें. सेहतमंद खाना ही काफी नहीं है, बल्कि समय पर खाना भी बहुत जरूरी है.

धूम्रपान व शराब को त्यागें : धूम्रपान और शराब का सेवन तुरंत बंद कर दें. निकोटिन जैसे कैमिकल तनाव के लक्षणों को अधिक बढ़ाते हैं. इसलिए दिल संबंधी बीमारियों को मैनेज करने के लिए इन्हें तुरंत बंद कर दें.

कसरत करें : डाक्टर से परामर्श ले कर सुबहशाम सैर करें.

तनाव कम करने के तरीके
बहुत से लोग अपनी जिंदगी में बहुत सारे सपने बुन लेते हैं, पर जब उन्हें पूरा करना उन के बस में नहीं होता, तो वह तनाव में जीने लगते हैं. कई लोग अपनी जौब में बेहतर करने के लिए सारा दिन तनाव में रहते हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि परिवार के साथ समय बिताएं. परिवार के लोगों से अपने दिल की बातें शेयर करें ताकि तनाव कम हो सके.

काम करते रहना ही जिंदगी नहीं है. कुछ समय अपने लिए भी निकालना बहुत जरूरी है ताकि दिमाग को शांति मिले. दिमाग को शांत करने के लिए अपने शौक जैसे रीडिंग, डांस या बागबानी को समय दें.
फिट रहने के लिए आज से ही आजमाएं ये क्विक हैल्थ टिप्स
दूध कैल्सियम का अच्छा स्रोत है. अत: इसे अपने आहार में जरूर शामिल करें. आप दूध से शेक, स्मूदी बना कर इस के स्वाद को कई गुना बढ़ा सकती हैं.



– फिट रहने के लिए आउटडोर वर्कआउट की बजाय इनडोर ऐक्सरसाइज को प्राथमिकता दें. घर में जुंबा ऐक्सरसाइज करें या फिर जिम जौइन करें.
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– वाटर ऐरोबिक क्लासेज जौइन कर सकती हैं. फ्रैशनेस भी मिलेगी और ऐक्सट्रा कैलोरी भी बर्न होगी.

– शरीर में नमी बनाए रखने और त्वचा को यूवी रेज से सुरक्षित रखने में औलिव औयल की बड़ी भूमिका है. अपनी डाइट में इसे शामिल करें.

– फ्रोजन योगर्ट या आइसक्रीम बेस्ड स्मूदी से बचें. इन में कैलोरी ज्यादा होती है. फ्रैश फ्रूट जूस, नीबूपानी, नारियल पानी और वाटरी व सिट्रसी बेहतर रहेंगे.

– रैड मीट को बायबाय कहें. चिकन भी कम ही लें तो बेहतर होगा. स्टीम्ड या सैलो फ्राईड फिश ले सकती हैं.

– अपने आहार में दही और योगर्ट शामिल करें. लस्सी, छाछ भी अच्छे विकल्प हैं. ये स्वादिष्ठ होने के अलावा सहेत के लिए भी फायदेमंद हैं. स्वाद के लिए इन में थोड़ी पुदीनापत्ती डालें. धूप में जाने से पहले 1 गिलास लस्सी या छाछ लें. इस से आप डीहाइड्रेशन से बचे रहेंगे.

– दूध कैल्सियम का अच्छा स्रोत है. अत: इसे अपने आहार में जरूर शामिल करें. आप दूध से शेक, स्मूदी बना कर इस के स्वाद को कई गुना बढ़ा सकती हैं.
सिंगल वूमन के लिए जरूरी हैं ये 7 मैडिकल टैस्ट
जो महिलाएं शादी नहीं करतीं या तलाक अथवा पति की मृत्यु के कारण अकेली रह जाती हैं उन में उम्र बढ़ने पर अकेलेपन की भावना घर करने लगती है. हैल्दी लाइफ जीने के लिए अकेली रह रही महिलाओं को इन स्वास्थ्य जांचों के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए.




जो महिलाएं शादी नहीं करतीं या तलाक अथवा पति की मृत्यु के कारण अकेली रह जाती हैं उन में उम्र बढ़ने पर अकेलेपन की भावना घर करने लगती है, क्योंकि जब तक वे 40 की होती हैं, उन के भाईबहनों, कजिंस और दोस्तों की शादियां हो जाती हैं और वे अपनेअपने परिवार में व्यस्त हो जाते हैं, जिस से वे एकदम अकेली पड़ जाती हैं. इस से उन में तनाव का स्तर बढ़ने लगता है, जो उन्हें कई बीमारियों का शिकार बना देता है. उन में वजन कम या अधिक होने, उच्च रक्त दाब, हृदय रोग, तंत्रिकातंत्र से संबंधित समस्याएं यहां तक कि कई प्रकार के कैंसर होने की आशंका तक बढ़ जाती है.



एकल जीवन बिता रही महिलाओं को अपनी सेहत का और अधिक खयाल रखना चाहिए. वे यह न सोचें कि हैल्थ चैकअप समय और पैसों की बरबादी है. चूंकि कई गंभीर बीमारियों के लक्षण प्रथम चरण में नजर नहीं आते, इसलिए मैडिकल टैस्ट जरूरी है ताकि बीमारी का पता चलने पर उस का समय रहते उपचार करा लिया जाए.

प्रमुख मैडिकल चैकअप

ओवेरियन सिस्ट टैस्ट: अगर आप को पेट के निचले हिस्से में दर्द हो या अनियमित मासिक धर्म हो अथवा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग हो तो ओवेरियन सिस्ट का टैस्ट कराएं. अगर सामान्य पैल्विक परीक्षण के दौरान सिस्ट का पता चलता है, तो ऐब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है. छोटे आकार के सिस्ट तो अपनेआप ठीक हो जाते हैं पर यदि ओवेरियन ग्रोथ या सिस्ट का आकार 1 इंच से बड़ा हो तो आप को ओवेरियन कैंसर होने की आशंका है. इस स्थिति में डाक्टर कुछ और टैस्ट कराने की सलाह देते हैं.

मैमोग्राम: यह महिलाओं के लिए सब से महत्त्वपूर्ण टैस्ट है. जब कैंसर हो जाने पर भी कोई बाहरी लक्षण दिखाई न दे तब यह टैस्ट कैंसर होने का पता लगा लेता है. क्लीनिकल ब्रैस्ट ऐग्जामिनेशन (सीबीई) किसी डाक्टर द्वारा किया जाने वाला ब्रैस्ट का फिजिकल ऐग्जामिनेशन है. इस में स्तनों के आकार में बदलाव जैसे गठान, निपल का मोटा हो जाना, दर्द, निपल से डिस्चार्ज बाहर आना और स्तनों की बनावट में किसी प्रकार के बदलाव की जांच की जाती है.

कितने अंतराल के बाद: सीबीई साल में 1 बार और मैमोग्राम 2 साल में 1 बार.

कोलैस्ट्रौल स्क्रीनिंग टैस्ट: कोलैस्ट्रौल एक तरह का फैटी ऐसिड होता है. यह जांच यह बताने के लिए जरूरी है कि आप के दिल की बीमारियों की चपेट में आने की कितनी संभावना है. कोलैस्ट्रौल 2 प्रकार के होते हैं-एचडीएल या हाई डैंसिटी लिपोप्रोटीन्स और एलडीएल या लो डैंसिटी लिपोप्रोटीन्स. इस टैस्ट में रक्त में दोनों के स्तर की जांच होती है.

कितने अंतराल के बाद: 3 वर्ष में 1 बार. लेकिन अगर जांच में यह बात सामने आती है कि आप के रक्त में कोलैस्ट्रौल का स्तर सामान्य से अधिक है या आप के परिवार में दिल की बीमारी का पारिवारिक इतिहास रहा है तो डाक्टर आप को हर 6 से 12 महीनों में यह जांच कराने की सलाह देते हैं.

ब्लड प्रैशर टैस्ट: नियमित रूप से ब्लड प्रैशर की जांच शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. अगर आप का ब्लड प्रैशर 90/140 से अधिक या कम है तो आप के दिल पर दबाव पड़ता है, जिस से ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी फेल होने की आशंका बढ़ जाती है.

कितने अंतराल के बाद: साल में 1 बार, लेकिन अगर आप का ब्लड प्रैशर सामान्य से अधिक या कम है तो डाक्टर आप को 6 महीने में 1 बार कराने की सलाह देंगे.

ब्लड शुगर टैस्ट और डायबिटीज स्क्रीनिंग: ब्लड शुगर टैस्ट में यूरिन की जांच कर रक्त में शुगर के स्तर का पता लगाया जाता है. डायबिटीज स्क्रीनिंग में शरीर के ग्लूकोज के अवशोषण की क्षमता की जांच की जाती है.

कितने अंतराल के बाद: 3 साल में 1 बार. पारिवारिक इतिहास होने पर प्रति वर्ष.

बोन डैंसिटी टैस्ट: बोन डैंसिटी टैस्ट में एक विशेष प्रकार के ऐक्स रे के द्वारा स्पाइन, कलाइयों, कूल्हों की हड्डियों की डैंसिटी माप कर इन की शक्ति का पता लगाया जाता है ताकि हड्डियों के टूटने से पहले ही उन का उपचार किया जा सके.

कितने अंतराल में कराएं: हर 5 साल बाद.
पैप स्मीयर टेस्ट के लिए इमेज परिणाम
पैप स्मियर टैस्ट: इस के द्वारा गर्भाशय के कैंसर की जांच की जाती है. अगर समय रहते इस के बारे में पता चल जाए तो इस का उपचार आसान हो जाता है. इस में योनि में एक यंत्र स्पैक्युलम डाल कर सर्विक्स की कुछ कोशिकाओं के नमूने लिए जाते हैं. इन कोशिकाओं की जांच की जाती है कि कहीं इन में कोई असमानता तो नहीं है.

कितने अंतराल के बाद: 3 साल में 1 बार.
10 व्यायाम बढ़ाएं सैक्सुअली अट्रैक्शन
अगर आप चाहती हैं कि हर युवक आप की ओर आकर्षित हो या फिर आप जौब, मौडलिंग आदि क्षेत्रों में अपने सैक्सुअल आकर्षण के बल पर सफलता अर्जित करें…



जवान होती युवतियों के लिए उन के शरीर की बनावट व कसावट बडे़ माने रखती है, जिस की बदौलत कोई भी युवती किसी युवक को अपनी तरफ न केवल आकर्षित कर सकती है, बल्कि उस के कैरियर को भी प्रभावित करती है. ऐसे में युवतियों के शरीर की कसावट ही उन की सुंदरता का निर्धारण करती है. किसी भी युवती की सुंदरता उस के नितंब के आकार व कसावट, त्वचा, कमर व स्तनों के चुस्तदुरुस्त होने से ही आंकी जा सकती है. शरीर के इन अंगों में ढीलापन किसी भी युवती के लिए दूसरे को अपनी ओर सैक्सुअली अट्रैक्ट करने में बाधक बनता है.
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ज्यादातर युवतियां आकर्षक दिखने के लिए भारीभरकम पैसा खर्च कर फिटनैस विशेषज्ञों का सहारा लेती हैं. कई जगह जौब पर ऐसी ही युवतियों को रखा जाता है, जिन की फिगर देखने में जीरो साइज यानी उन के शरीर की बनावट ऐसी हो जो आसानी से किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता रखती हो. इस के लिए युवती के स्तनों में कसाव, नितंबों का भरा होना, चेहरे पर निखार, चरबी मुक्त पतली कमर होना बहुत जरूरी है. फिटनैस विशेषज्ञ निरुपम श्रीवास्तव का कहना है कि सैक्सुअली आकर्षक दिखने वाली युवतियों के शरीर के कुछ अंग ऐसे होते हैं जिन के लोग दीवाने होते हैं. इन में कसे व उठे नितंब वाली युवतियों की न केवल फैशन में बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी डिमांड है. वे आम जीवन में भी काफी लोकप्रिय होती हैं. पतली कमर, कसे स्तन व छरहरा बदन हर किसी को अपना दीवाना बना सकते हैं. सैक्सुअली अट्रैक्ट मानी जाने वाली फिगर को 36-24-36 इंच में मापा जाता है यानी युवती के सब से सैक्सी अंगों का यह आकार स्तन, कमर व नितंबों से मापा जाता है. वहीं अब ग्लैमर, फैशन व फिल्म इंडस्ट्री में 31-23-32 का आकार अच्छा समझा जाने लगा है.
10 व्यायाम बढ़ाएं सैक्सुअली के लिए इमेज परिणाम
फिटनैस विशेषज्ञ अनुराधा दूबे का कहना है कि सैक्सुअली आकर्षण बढ़ाने के लिए हर युवती को शरीर के इन अंगों का खासा ध्यान रखना पड़ता है. इस के लिए संतुलित खानपान से ले कर व्यवस्थित दिनचर्या की जरूरत होती है. लेकिन जिस की सब से ज्यादा जरूरत होती है, वह है फिगर को सैक्सी बनाए रखने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण व्यायाम, जिन से हर युवती खुद को आकर्षक बना सकती है. इस से न केवल मसाज पार्लर व फिटनैस सैंटर जाने से छुटकारा मिलेगा बल्कि आप अपने बदन को सैक्सी व छरहरा भी बना पाएंगी. सैक्सी दिखने के लिए त्वचा में कसाव के साथ निखार आना भी बेहद जरूरी है. वहीं नितंबों व स्तनों में कसाव, सुडौलता व कमर का पतला होना भी जरूरी होता है. ऐसी फिगर के लिए यहां बताए जा रहे 10 व्यायाम कर आप खुद को सैक्सुअली अट्रैक्ट बना सकती हैं.

एयर बाइक

यह व्यायाम त्वचा में कसावट लाने व निखार बढ़ाने के लिए किया जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए सब से पहले आप पीछे की तरफ कमर के बल लेटें. इस के बाद दोनों कुहनियों को मोड़ते हुए हथेलियों को सिर के नीचे लगाएं. इस के बाद घुटनों को अपनी तरफ खींचें. फिर पुन: व्यायाम की दूसरी स्थिति में जाने के लिए आप कंधों को दूसरी तरफ ऊपर उठा कर अपनी दाईं कुहनी को बाएं घुटने की तरफ तब तक खींचें जब तक कि दोनों आपस में मिल न जाएं. इस के बाद इसी प्रक्रिया को बाईं कुहनी और दाएं घुटने के साथ करें. इस व्यायाम को कई बार करने से ढीली त्वचा में कसावट व चमक दोनों बढ़ जाती हैं.
लैग्स अप स्ट्रैट आर्म क्रंच

इस व्यायाम को करने से आप के ऐब्स व त्वचा दोनों में निखार आता है. इस को करने के लिए सब से पहले आप जमीन पर कमर के बल लेट जाएं और टांगों को 90 डिग्री तक ऊपर की तरफ उठाएं. टांगों को उठाते समय अपने दोनों हाथों में डंबल पकड़ना न भूलें. टांगों को ऊपर उठाने के दौरान डंबल्स भी धीरेधीरे हाथों से ऊपर उठाएं. डंबल्स को जहां तक आसानी से उठा पाएं वहां तक उठाने के बाद उस स्थिति को कुछ सैकंड तक ऐसे ही रहने दें. इस के बाद धीरेधीरे कंधों को ढीला छोड़ दें. इस प्रक्रिया को आप बारबार दोहराएं.

लाइंग लैग रेसेज

यह व्यायाम पेट की मांसपेशियों में कसावट लाने के लिए सब से उपयुक्त माना जाता है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सब से पहले आप कमर के बल जमीन पर लेट कर अपनी टांगों व हाथों को टाइट करें. टांगों को फर्श से ऊपर 90 डिग्री पर उठाएं. इस दौरान जितना हो सके टांगों को टाइट रखें. इस के बाद टांगों को टाइट अवस्था में ही धीरेधीरे नीचे लाएं जब तक कि फर्श से सट न जाएं. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराने से पेट व त्वचा में कसावट आती है.

सीजर जंप्स

नितंबों को सुडौल बनाने के लिए यह व्यायाम सब से अच्छा माना जाता है. इस के लिए आप को सीधे खड़े हो कर पैरों को फैलाना होता है, जिस से कि बीच में बहुत गैप हो. अब अपने पैरों की उंगलियों को एक तरफ मोड़ कर बैठने की कोशिश करें, लेकिन पूरी तरह बैठें नहीं. हाफ वे सिटिंग की मुद्रा में जितनी देर संभव हो, रहें. अब दोबारा उठ कर इसे करने की कोशिश करें. इस व्यायाम को बारबार करने से नितंबों की मांसपेशियों में कसावट आती है और नितंब आकर्षक दिखने लगते हैं.

वौल सिट

यह व्यायाम भी नितंबों को सैक्सी लुक देने के लिए किया जाता है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सब से पहले अपनी पीठ को दीवार की तरफ ले जाएं और इस तरह बैठें जैसे कुरसी पर बैठते हैं. परंतु इस कसरत के दौरान सचमुच कुरसी का प्रयोग न करें, क्योंकि इस से आप को कोई फायदा नहीं होगा. इस प्रक्रिया के दौरान भी आप को अपना पेट कड़ा रखना होगा और आप का सारा भार पैरों पर होना चाहिए. अगर आप इस कसरत की आदी हो गई हैं तो अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए अपना एक पैर आगे कर के रखें. दर्द कम करने के लिए हर 15 सैकंड में पैरों को स्विच करते रहें. इस से आप के नितंब अट्रैक्टिव नजर आएंगे.

स्ट्रेट लैग पल्स

इस व्यायाम को करने के लिए चलने की मुद्रा में कुछ इस तरह खड़े हों कि आप का दायां पैर आगे और बायां पीछे हो. अब बारबार पैर को जमीन से छूने की कोशिश करते हुए बैठें और एकसाथ अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखें. इस मुद्रा में 2-3 मिनट रहने के बाद खड़ी हो जाएं. इस कसरत को जितनी देर हो सके उतनी देर करें. इस प्रक्रिया में आप की रीढ़ की हड्डी सीधी और आप का पेट कड़ा होना चाहिए.

गर्भ के दौरान इन सेहतमंद आदतों का हमेशा रखें ध्यान

स्तनों को आकर्षक बनाने के लिए यह सब से अच्छा व्यायाम माना जाता है. इस व्यायाम में शरीर को हवा में उठाया जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए समतल जगह का चुनाव करना जरूरी होता है, पुशअप्स करने से पहले थोड़ा वार्मअप करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह स्ट्रैंथ ट्रेनिंग ऐक्सरसाइज का एक प्रकार भी है, जो बिना जिम के किया जाता है. वार्मअप करने से आप का शरीर इस ऐक्सरसाइज के लिए थोड़ा तैयार हो जाता है. वार्मअप करने के बाद पुशअप्स की शुरुआत कीजिए. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए पेट के बल सीधे हो कर मैट पर लेट जाइए. इस दौरान आप का पूरा शरीर सीधा होना चाहिए. पुशअप्स के दौरान सब से महत्त्वपूर्ण भूमिका आप के हाथपैरों की होती है, क्योंकि आप के पूरे शरीर का भार इन पर होता है. पुशअप्स से पहले शरीर का भार हाथों और पैरों के पंजों पर रखिए. घुटने भी सीधे रहें.

फिर अपने पूरे शरीर को हवा में कीजिए. अगर आप ने पुशअप्स के दौरान सांस अंदरबाहर करने का सही तरीका अपनाया तो पुशअप्स की गिनती आसानी से बढ़ा सकती हैं. शरीर को नीचे ले जाते वक्त सांस बाहर छोड़ें और उठाते वक्त सांस को अंदर की तरफ खींचिए. यदि पुशअप्स की शुरुआत करने जा रही हैं तो एक बार में ही ज्यादा करने से बचें. इस के 3 सैट बना लीजिए, 10-10 के 3 सैट से इस की शुरुआत कीजिए. बाद में अपनी क्षमतानुसार इस की संख्या बढ़ाइए.

डंबल्स

स्तनों को सुडौल बनाने के लिए यह व्यायाम सब से उपयुक्त माना जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए सर्वप्रथम आप चटाई पर लेट जाएं और दोनों हाथों में एकएक डंबल ले लें. इस के बाद हाथों को सीधा करें. इस से आप की मांसपेशियों को बल मिलेगा. 2 मिनट तक ऐसा करने के बाद हाथों को अपने शरीर के दोनों तरफ ले जाएं. इस दौरान कुहनी को मोड़ें नहीं और न ही फर्श या चटाई पर टिकाएं. इस के बाद हाथों को फर्श से कुछ इंच ऊपर ही रखें. 10 मिनट तक इसी अवस्था में रहें और फिर हाथों को नीचे की तरफ लें. इस व्यायाम को प्रतिदिन 10 बार करने से स्तनों में आकर्षण के साथ कसावट आती है.

स्क्वैट्स

कमर के लिए यह सब से सरल व्यायाम है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सीधी खड़ी हो जाएं और हाथों को अपने सामने की तरफ सीधे लेते हुए बिना घुटनों को ढीला छोड़ें, धीरेधीरे फिर वापस उसी स्थिति में आएं. यह ऐक्सरसाइज न केवल आप के हिप्स के फैट को कम करने में मदद करती है बल्कि पैरों की मांसपेशियों को भी टोन करती है.

साइकिलिंग

यह एक तरह से कमर, जांघों, कूल्हों और पिंडलियों की मांसपेशियों की कसरत होती है, जिस में इस्तेमाल होने वाली साइकिल पर रोजाना 2 से 3 मिनट तक व्यायाम करने से आप काफी कैलोरी बर्न कर सकती हैं. 45 मिनट की साइकिलिंग करें या फिर बाहर भी साइकिल चला कर कसरत कर सकती हैं. इस व्यायाम को करने से आप के शरीर का फैट कम हो जाता है.
प्रेग्नेंसी है कैजुअलिटी, इश्यू नहीं
जैसे ही किसी लड़की की विवाह की उम्र होने लगती है, वह उससे यह पूछ पूछ कर उसका दिमाग ख़राब कर देता है कि शादी कब कर रही हो?



हमारा समाज भी बड़ा अजीब है न? उसे अपने से ज्यादा दूसरों के मामले में तांकने झांकने में ज्यादा इंटरेस्ट होता है. एक सामान्य सा उदाहरण ही लीजिये, जैसे ही किसी लड़की की विवाह की उम्र होने लगती है, वह उससे यह पूछ पूछ कर उसका दिमाग ख़राब कर देता है कि शादी कब कर रही हो? सेटल कब हो रही हो? किसी तरह इन के सवालों से पीछा छुड़ाने के लिए शादी कर लो, तो नया राग अलापना शुरू कर देते हैं, खुशखबरी कब सुना रही हो? अरे भाई थोड़ा तो सांस लेने दीजिये, हमें अपनी ज़िन्दगी अपने तरह से जीने का कोई तो मौका दीजिये. आपकी अपनी जिंदगी में अपने लिए सोचने लायक क्या कुछ भी नहीं है, जो हमारे फटे में अपनी टांग घुसाते रहते है और चलो अगर हमने उनके कहे अनुसार सो कॉल्ड सेटल होने का डिसीजन ले भी लिया और उनकी भेदती आँखों और जासूसी निगाहों ने भांप लिया कि विवाह के बाद हम दो से तीन होने वाले हैं तो सच मानिए वे अपनी नसीहतों का पुलिंदा दे देकर आपको पूरी तरह पका देंगे और अच्छे भले इंसान को बीमार बना देंगे. हम बात कर रहे हैं गर्भावस्था के दौरान मिलने वाली एक्सपर्ट एडवाईजेज की.


गर्भ के दौरान इन सेहतमंद आदतों का हमेशा रखें ध्यान

अरे भई, गर्भावस्था कोई बीमारी थोड़े न है जो आप लोग बिना मांगे अपनी एक्सपर्ट हिदायतें देकर अच्छी भली महिला को जिसके लिए मातृत्व एक सुखद अनुभव होना चाहिए, आप उसे बीमार बना देते हैं. आम लोगों के साथ तो ऐसा होता ही रहता है लेकिन जब ऐसा ही कुछ फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर के साथ हुआ और बार बार अपनी प्रेग्नेंसी पर मीडिया के अटेंशन के कारण जब उनके बर्दाश्त की सीमा खत्म हो गयी तो उन्होंने जमकर अपनी भड़ास निकाली और गुजारिश की कि मीडिया उनकी प्रेग्नेंसी को नेशनल कैजुअलिटी इश्यू न बनाए.

दरअसल, करीना इन दिनों प्रेग्नेंसी के बावजूद रिया कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की शूटिंग कर रही हैं. इस बात पर जब उनसे पूछा गया था कि वे मेटरनिटी लीव क्यों नहीं ले रहीं? तो सवाल सुनते ही करीना को गुस्सा आ गया जो वाजिब भी था और वे भड़क उठीं. और बोलीं, “मैं प्रेग्नेंट हुई हूं, मरी नहीं हूं. और किस बात की मेटरनिटी लीव? बच्चा पैदा करना धरती पर नॉर्मल सी बात है. और हां, मुझे उससे अलग दिखाना बंद करें, जैसी मैं पहले थी. जिसे परेशानी है, वह मेरे साथ काम न करे. लेकिन मेरा काम हमेशा की तरह चलता रहेगा. हम 2016 में जी रहे हैं, 1800 में नहीं. करीना ने यह भी कहा कि मैं लोगों से तंग आ चुकी हूं, जो प्रेग्नेंसी को किसी तरह की डेथ बना रहे हैं. इन फैक्ट, लोगों के लिए मेरा मैसेज है कि शादी करना या फैमिली बनाना, मेरे करियर के आड़े नहीं आ सकता.” वाह करीना जी आखिर आपने एक आम महिला की समस्या को समझा और उसका मुंहतोड़ जवाब भी दिया जिसके लिए समाज उसे बार बार परेशान करता रहता है.

आपको बता दें जिस तरह करीना कपूर ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की शूटिंग को जारी रखने का फैसला किया है, उसी तरह फिल्म इंडस्ट्री में अनेक एक्ट्रेसेस हैं जिन्होंने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान बेबी बंप के साथ अपना काम जारी रखा था. जैसे काजोल ने ‘वी आर फैमिली’ की शूटिंग प्रेग्नेंसी के दौरान की थी. जूही चावला फिल्म ‘झंकार’ की शूटिंग के दौरान 7 महीने की गर्भवती थीं. नंदिता दास जिस समय निर्माता ओनीर की फिल्म ‘आई एम’ की शूटिंग आकर रहीं थी, वे पांच महीने की गर्भवती थीं. अभिनेत्री जया बच्चन फिल्म ‘शोले’ की शूटिंग दौरान तीन महीने की गर्भवती थीं.

साथ ही उन लोगों की जानकारी के लिए भी बता दें जो गर्भावस्था को कैजुअलिटी इश्यू बना देते हैं कि गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं है यह एक सुखद एहसास है और इस अवधि में एक महिला को खुश और फिट रहना चाहिए न कि खुद को बीमार मानकर सारे कामकाज छोड़कर बैठ जाना चाहिए और बेवजह की शंकाओं से खुद को डिप्रेस करना चाहिए क्योंकि आने वाले बच्चे का स्वास्थ्य व भावनात्मक स्थिति गर्भवती महिला के स्वास्थ्य व मूड पर निर्भर करता है.

गर्भावस्था किसी भी महिला के शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के परिवर्तनों कारण बनता है, और कोई भी महिला (किसी भी स्थिति में) इन बदलावों के लिए अच्छी तरह से तैयार होती है. अपने बच्चे के बारे में एक मां से बेहतर ओर कोई नहीं सोच नहीं सकता लेकिन जैसे ही कोई महिला गर्भवती होती है, लोग सलाह या नसीहतें देना शुरू कर देते हैं. ऐसे नहीं बैठो ,ये खाओ, ये नहीं नहीं खाओ, ज्यादा काम नहीं करो ,आराम करो आदि आदि…ऐसे में गर्भवती महिला को भी समझ नहीं आता कि वह इन बातों को माने या नहीं, क्योंकि कई बार ये सलाह अटपटी या उलझन पैदा करने वाली भी होती हैं.

गर्भवती महिला को इन दिनों में तनाव से दूर रहना चाहिए लेकिन बार-बार की रोक-टोक उसे चिंता में डाल देती है.. सच्चाई तो ये है कि इन सलाह और नसीहतों में से ज्यादातर सुनी-सुनाई बातों पर या अंधविश्वासों पर आधारित होती हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता.कुछ लोग तो महिला की चालढाल और उसके खाने पीने की आदतों को देखकर यह भी अनुमान लगाना शुरू कर देते हैं कि होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की? जहाँ तक गर्भावस्था में अधिक से अधिक आराम करना चाहिए वाली जो सोच है यह बिलकुल गलत है .अमेरिका में हुई एक स्टडी के अनुसार गर्भावस्था के दौरान सक्रिय रहने वाली महिलाओं में बैचेनी की शिकायत कम होती है और उन्हें प्रसव के दौरान भी कम परेशानी का सामना करना पड़ता है .
बढ़ता बीएमआई प्रैगनैंसी के लिए साबित हो सकता है खतरा
गर्भावस्था की कुछ सामान्य जटिलताएं मोटी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं, जिन में सम्मिलित हैं- गर्भपात. स्वस्थ गर्भावस्था का आनंद उठाने के लिए बढ़ते वजन को काबू में करें कुछ इस तरह.





गर्भावस्था की कुछ सामान्य जटिलताएं मोटी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं, जिन में सम्मिलित हैं- गर्भपात. जैस्टेशनल डायबिटीज, उच्च रक्त दाब (इसे जैस्टेशनल हाइपरटैंशन भी कहा जाता है), प्रीऐक्लैंप्सिया, प्रसव के दौरान सामान्य से अधिक रक्तस्राव आदि. हालांकि ये समस्याएं किसी भी गर्भवती महिला को हो सकती हैं. इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह मोटापे की शिकार है या नहीं, लेकिन बीएमआई (बौडी मास इन्डैक्स) अधिक होने से खतरा बढ़ जाता है.

मोटोपे का डायग्नोसिस बीएमआई की गणना कर के किया जाता है, जो वजन और लंबाई पर आधारित होता है. बीएमआई 30 या उस से अधिक होना यकीनन मोटापे को परिभाषित करता है.

बीएमआई जितना अधिक होगा, उतना ही गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं होने का खतरा अधिक होगा. अगर किसी महिला का बीएमआई 30 या उस से अधिक है, तो इस की संभावना है कि उसे प्रसव पीड़ा के लिए प्रेरित करना पड़ेगा या उसे सिजेरियन सैक्शन का विकल्प चुनना होगा. अगर किसी महिला का बीएमआई 40 से अधिक है, तो डाक्टरों के लिए बच्चे के विकास के बारे में जानकारी प्राप्त करना कठिन हो जाएगा.

बच्चे के लिए खतरा

अगर गर्भावस्था के दौरान आप का वजन अधिक है, तो आप के बच्चे को कुछ निश्चित खतरे होने की आशंका बढ़ जाएगी. इन में सम्मिलित हैं:

– समयपूर्व प्रसव (37 सप्ताह के पहले).

– जन्म के समय वजन अधिक होना.

– मृत बच्चे का जन्म.

– दुर्लभ जन्मजात विकृतियां.

– क्रौनिक कंडीशंस जो मस्तिष्क, स्पाइनल कार्ड, हृदय से संबंधित होती हैं, का खतरा या फिर आगे चल कर डायबिटीज की चपेट में आना.

गर्भावस्था से पहले वेट लौस

अगर आप ने पहले ही वेट लौस सर्जरी करा ली है, तो यह जरूरी सुझाव है कि गर्भधारण के लिए कम से कम 18 महीने प्रतीक्षा करें. मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में वजन कम करने से गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है. अगर वेट लौस सर्जरी के बाद गर्भधारण की योजना बनाई जाए तो यह मां और-बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित हो सकती है. इस से मोटापे के कारण गर्भावस्था से जुड़े खतरे कम हो जाते हैं.

गर्भावस्था के बाद वेट लौस

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना आम बात है, लेकिन बहुत सी महिलाओं को इसे कम करना बहुत मुश्किल लगता है. जिन महिलाओं का वजन गर्भावस्था के पहले अधिक था उन के लिए प्रसव के बाद वजन कम करना और अधिक कठिन हो सकता है. इस के कारण जैवविज्ञानी, हारमोनल या पर्यावर्णीय हो सकते हैं.

उन महिलाओं के लिए जिन का बीएमआई 40 या उस से अधिक है, यह एक बहुत ही गंभीर समस्या हो सकती है. इसलिए बैरिएट्रिक सर्जरी उन महिलाओं के लिए जो अत्यधिक मोटी हैं, एक बहुत ही अच्छा विकल्प है. लेकिन बच्चे के जन्म के बाद उन्हें कम से कम 12 महीने इंतजार करना चाहिए. बच्चे के जन्म के बाद जितने अधिक समय तक वे प्रतीक्षा करेंगी, रिकवरी के लिए उतना ही बेहतर रहेगा. स्वस्थ भार प्राप्त करने और मोटापे से संबंधित स्थितियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग व कैंसर के खतरे से बचने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी सुरक्षित और सब से बेहतरीन उपाय है.


कुछ सामान्य स्टैप्स जैसे स्वस्थ खाने, नियमित ऐक्सरसाइज करने और वजन न बढ़न के लिए दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करने वाली महिला अपने बच्चे के स्वास्थ्य की सुरक्षा कर सकती है.

गर्भवती होने पर वजन कम करने लिए डाइटिंग करना बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इस दौरान रोज खूब पानी पीएं, सब्जियां और फल अधिक मात्रा में खाएं. नियमित अंतराल पर पोषक भोजन का सेवन थोड़ीथोड़ी मात्रा में करे. फास्ट फूड, फ्राइड फूड, पैकेज्ड फूड सोडा, पेस्ट्री आदि का सेवन न करें.

स्वस्थ डाइट लेने के साथसाथ सप्लिमैंट्स लेने की भी जरूरत होती है, जिन में विटामिन डी और फौलिक ऐसिड आदि सम्मिलित होते हैं.

अपने शरीर को गर्भवस्था में हो रहे बदलावों से निबटने लिए तैयार करने के लिए गर्भावस्था में नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है. यह आप के भार का प्रबंधन करने के सब से अधिक प्रभावी उपायों में से एक है. अगर आप गर्भावस्था से पहले ऐक्सरसाइज नहीं कर रही थीं, तो यह सही समय नहीं है कि आप कड़ी ऐक्सरसाइज शुरू कर दें.

आप प्रतिदिन 5 या 10 मिनट तक ऐक्सरसाइज करने से शुरूआत करें. सब से महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर की सुनें. अगर आप को कोई परेशानी हो रही है तो वर्कआउट करना बंद कर दें. अगर कोई इमरजैंसी हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.

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