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शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों?


शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों? 



शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों?

ससुराल में जाकर सबका मन जीत लेना… धीरे-धीरे मीठी आवाज़ में सबसे बात करना… ज़ोर से मत हंसना और न ही ऊंची आवाज़ में बात करना… घर के कामकाज में हाथ बंटाना… इस तरह की तमाम हिदायतें उस लड़की को ज़रूर दी जाती हैं, जिसकी शादी होनेवाली होती है… यह हर घर में आम है, लेकिन क्या कभी इस बात पर हम ग़ौर करते हैं कि इतनी हिदायतों के बीच सेक्स को लेकर हम बेटी को या बेटे को कितना एजुकेट करते हैं? नहीं न? क्योंकि इस स्तर पर बात करना तो दूर, हम सोचते भी नहीं. हमें यह ज़रूरी ही नहीं लगता. वैसे भी सेक्स (Sex) को लेकर आज भी हम उतना खुलकर बात नहीं करते. हमारे समाज में आज भी सेक्स को गंदा या ग़लत ही माना जाता है, लेकिन बात जब शादी-ब्याह की हो, तब भी हम इसे ज़रूरी क्यों नहीं मानते? 
ये किस तरह का समाज है?
क्या यह समाज का दोगलापन नहीं है कि हमारे यहां शादी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है और शादी का जो सबसे महत्वपूर्ण आधार है, उस पर ही बात करने से परहेज़ भी किया जाता है.
शादी के बाद गुड न्यूज़ की सबको जल्दी रहती है, लेकिन उससे पहले सेक्स से जुड़ी ज़रूरी बातें बताना किसी को ज़रूरी नहीं लगता.
जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है यानी सेक्स करने से किसी को परहेज़ नहीं, लेकिन इस पर एजुकेट करना बेहद शर्मनाक माना जाता है.
टीवी कमर्शियल्स में कंडोम, कॉन्ट्रासेप्शन या फिर इससे जुड़ी चीज़ें दिखाए जाने पर परिवार के लोग इस कदर शर्मिंदगी महसूस करते हैं, जैसे यह कोई आपराधिक या शर्मनाक बात हो.
क्या होते हैं दुष्परिणाम?
सेक्स एजुकेशन की कमी के चलते सेक्स को लेकर कोई जागरूकता हमारे समाज में नहीं है.
नए शादीशुदा जोड़े भी उतना ही जान पाते हैं, जितना उनके यार-दोस्त उन्हें बताते-समझाते हैं.
किस तरह से सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचाव करना चाहिए, किस तरह से फैमिली प्लानिंग और कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल करना चाहिए, पर्सनल हाइजीन का क्या महत्व है… इस तरह की तमाम बातों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है.
यही वजह है कि अधिकांश लड़कियां सेक्स को लेकर एक फैंटसी में जीती हैं और सुहागरात को किसी फिल्मी सीन की तरह देखती हैं. लेकिन जब उनका सामना हक़ीक़त से होता है, तो उनके सपने बिखर जाते हैं.
बात स़िर्फ लड़कियों की ही नहीं, लड़कों को भी यह सीख नहीं दी जाती कि पहली रात को सेक्स करना ज़रूरी नहीं. सबसे ज़रूरी होता है एक-दूसरे को कंफर्टेबल महसूस कराना, क्योंकि सेक्स एक क्रिया नहीं, भावना है और आपके रिश्ते की नींव का महत्वपूर्ण आधार भी.
हमारे यहां दोस्तों की बातें या फिर पोर्नोग्राफी ही सेक्स एजुकेशन का सबसे बड़ा आधार व ज़रिया होती है, जिससे बहुत ही ग़लत जानकारियां हासिल कर कपल्स अपनी-अपनी सोच के साथ एक-दूसरे के क़रीब आते हैं.
इसके अलावा अधिकांश लड़कियों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि सेक्स बेहद शर्मनाक और गंदी चीज़ होती है, जिससे वो शादी के बाद भी स़िर्फ पति की इच्छा मानकर इस क्रिया को अंजाम देती हैं. वो न तो अपनी चाहतें बयां कर पाती हैं और न ही अपनी सोच. यहां तक कि वो पति को सहयोग भी नहीं दे पातीं, क्योंकि यहां उनके चरित्र से जोड़कर इसे देखा-परखा जाता है.


नो सेक्स एजुकेशन का मतलब नो सेक्स नहीं है…
यह तो हम सभी जानते हैं कि सेक्स एजुकेशन नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति सेक्स नहीं करेगा, लेकिन इसका यह मतलब ज़रूर है कि वो सेक्स को लेकर कम संवेदनशील होगा, कम जानकार होगा और सेक्स के प्रति उसमें भ्रांतियां अधिक होंगी.
सेक्स एजुकेशन न होने का मतलब यह भी है कि यौन शोषण के मामले अधिक होंगे.
यह मान लेते हैं और शोध भी इसी ओर इशारा करते हैं कि लगभग 70-80% पैरेंट्स सेक्स एजुकेशन के लिहाज़ से भी बच्चों से सेक्स पर बात ही नहीं करते, लेकिन एडल्ट होने के बाद, शादी से पहले तो कम से कम उन्हें इस विषय पर ज़रूर बात करनी चाहिए, ताकि उनकी शादी की नींव मज़बूत हो.
बच्ची को यह तो सिखाया जाता है कि पति को ख़ुश रखना ही तेरा फ़र्ज़ है, लेकिन उसे यह नहीं बताया जाता कि अपनी सेक्सुअल हेल्थ के प्रति सतर्कता बरतना भी ज़रूरी है.
कॉन्ट्रासेप्शन क्यों और कितना ज़रूरी है, मेडिकल टेस्ट्स कितने ज़रूरी हैं, इस विषय पर पति से बात करना कितना ज़रूरी है… ये तमाम बातें कभी किसी नई-नवेली दुल्हन को नहीं सिखाई जातीं और न ही दूल्हे को भी इस संदर्भ में एजुकेट किया जाता है.
उन्हें इस विषय पर बात करने से भी डर लगता है कि कहीं उन्हें चरित्रहीन न समझ लिया जाए या उनके बारे में कोई राय न कायम कर ली जाए.
यही वजह है कि सेक्सुअल हाइजीन को लेकर देश की शहरी महिलाएं तक बहुत पिछड़ी हुई हैं.
नई-नवेली दुल्हन के वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर जितनी जागरूकता हमारा समाज दिखाता है, क्या उतनी ही जागरूकता लड़के की सेक्सुअल एक्टिविटीज़, सेक्सुअल हेल्थ और सेक्सुअल जानकारी के प्रति दर्शाई जाती है?

प्रोफेशनल की लें मदद
यदि पैरेंट्स से सेक्स एजुकेशन नहीं मिली, तो कपल्स को चाहिए प्रोफेशनल की मदद लें.
काउंसलर के पास जाएं. प मन में छिपे डर, भ्रांतियों और आशंकाओं पर खुलकर आपस में बात करें.
पैरेंट्स की मानें, तो उनका यही तर्क होता है कि हमें तो किसी ने नहीं दी सेक्स एजुकेशन, फिर भी हमारी ज़िंदगी बेहतर है, लेकिन समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदला है, आज एक्सपोज़र ज़्यादा है, सेक्स को लेकर सवाल ज़्यादा हैं, डर ज़्यादा हैं, भ्रांतियां ज़्यादा हैं.
समय के साथ बदलाव होना ज़रूरी है, हमारी सोच में भी और हमारे तरीक़ों में भी.
कपल्स शादी से पहले ख़ुद भी बात कर सकते हैं और उन्हें जो सही लगे, वो ऐक्शन ले सकते हैं, ताकि उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बेहतर हो और उनका जीवन ख़ुशहाल. प पैरेंट्स भी यह ख़्याल रखें कि संस्कारों के साथ-साथ सेक्स एजुकेशन भी उतनी ही ज़रूरी है, ताकि आपकी बेटी का जीवन बेहतर हो.
दूसरी ओर ससुरालपक्ष को भी जानना ज़रूरी है कि नई दुल्हन से उम्मीदें, अपेक्षाएं करना, उसे ज़िम्मेदरियां देना, उसके कर्त्तव्यों की जानकारी देना तो ठीक है, साथ ही अपने बेटे को बेडरूम एटीकेट्स और सेक्स एटीकेट्स की जानकारी देनी भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि यह आख़िर उसकी बेहतरी के लिए ही है.

जानें हैप्पी लव लाइफ का रोमांटिक साइंस 

कहते हैं, अपोज़िट अट्रैक्ट्स, मगर शादी के बाद ये अट्रैक्शन कहीं खो जाता है. कपल्स के रिश्ते कई बार इतने जटिल हो जाते हैं कि उसमें प्यार की गुंजाइश ही नहीं रह जाती. यदि आप अपने रिश्ते की नाज़ुक डोर को उम्रभर थामे रखना चाहते हैं, तो कौन से लव रूल्स फॉलो करें? बता रही हैं कंचन सिंह.

ख़र्च करने की आदत

यदि आपको हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड और फैशन के मुताबिक़ अपना वॉर्डरोब चेंज करने की आदत है और पति बस चार जोड़ी शर्ट और दो जोड़ी जूतों में ही रहना पसंद करते हैं, तो ज़ाहिर है आपकी ये अति ख़र्चीली आदत पति को बिल्कुल रास नहीं आएगी. वो आपके ख़र्च पर उंगली उठाएंगे, जिससे आपके बीच मनमुटाव हो सकता है. सुनैना कहती हैं, “मुझे ऑनलाइन शॉपिंग की बुरी लत है, जिससे कई बार मैं ज़रूरत न होने पर भी चीज़ें मंगा लेती हूं, ये सोचकर कि अभी न सही, बाद में काम आएंगी, मगर मेरी ये आदत पति को बिल्कुल पसंद नहीं. इस बात को लेकर उनका मुझसे कई बार झगड़ा भी हो चुका है. वो बिना ज़रूरत के एक पैसा भी ख़र्च नहीं करना चाहते.”
क्या कहती है स्टडी?

एक जैसी ख़र्च की आदत न होने पर कपल्स के बीच मनमुटाव ज़्यादा होता है, वो अपने रिश्ते से संतुष्ट नहीं होते. इसके विपरीत यदि पति-पत्नी दोनों ख़र्चीले हैं या फिर दोनों बहुत किफ़ायती हैं, तो उनके बीच मनमुटाव की गुंजाइश बहुत कम रहती है.
मैं नहीं हम

शादी के बाद भले ही आपकी अलग-अलग पहचान हो, मगर बतौर कपल आप एक हो जाते हैं. जो कपल ‘मैं’ से ऊपर नहीं उठ पाते उनके रिश्ते में मुश्किलें आ ही जाती हैं और वो अपने रिश्ते से ख़ुश नहीं रहते. बातचीत या बहस के दौरान मैं की बजाय हम जैसे शब्दों का इस्तेमाल करनेवाले पति-पत्नी अन्य कपल्स की तुलना में ज़्यादा संतुष्ट और ख़ुश रहते हैं. रिश्तों की सफलता के लिए अब से आप भी मैं की बजाय हम कहना सीख जाइए.

क्या कहती है स्टडी?

जो कपल्स हम, हमारा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उनके बीच प्यार ज़्यादा होता है. उनके रिश्ते में ग़ुस्से और नेगेटिव बिहेवियर के लिए जगह नहीं होती. किसी मुद्दे पर सहमत न होने की स्थिति में उनका साइकोलॉजिकल स्ट्रेस लेवल भी कम होता है. वहीं यदि कपल्स मैं, तुम, मैंने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो ये उनके बीच अलगाव और असंतुष्टि को दर्शाता है.


सकारात्मक सोच

ज़िंदगी के हर मोर्चे पर सफलता के लिए सकारात्मक सोच जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी रिश्ते की सफलता के लिए भी है. पॉज़िटिव इंसान ये नहीं सोचता कि उसके पास क्या नहीं है, बल्कि जो है उसके लिए वो भगवान का शुक्रिया अदा करके ख़ुश रहता है. अपने रिश्ते को पॉज़िटिव बनाए रखने के लिए पार्टनर के प्रति आभार व्यक्त करें, एक-दूसरे की क़ामयाबी का साथ मिलकर जश्‍न मनाएं, फन एक्टिविटी साथ में एन्जॉय करें, पार्टनर को स्पेशल फील कराएं.

क्या कहती है स्टडी?

सकारात्मक सोच रखने वाले कपल्स के रिश्ते मज़बूत बनते हैं और वो पार्टनर से संतुष्ट भी रहते हैं. सकारात्मक सोच का मतलब ये नहीं है कि वो समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हैं, बल्कि सकारात्मक सोच से उनके विचारों को विस्तार मिलता है, जिससे दोनों मिलकर किसी भी समस्या का आसानी से हल निकाल लेते हैं.
बेड पर रहें बेस्ट
हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए एक्टिव सेक्स लाइफ बेहद ज़रूरी है. जो कपल्स सेक्सुअली कम एक्टिव होते हैं, वो अपने रिश्ते से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते. वहीं दूसरी ओर सेक्सुअली एक्टिव पति-पत्नी का रिश्ता मज़बूत व संतुष्ट रहता है. कुछ लोगों को लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ सेक्स लाइफ का रोमांच कम हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं है. इसके विपरीत ‘प्रैक्टिस मेक्स मैन परफेक्ट’ की तर्ज पर कपल्स की सेक्स लाइफ बढ़ती उम्र के साथ और परफेक्ट होती जाती है.

क्या कहती है स्टडी?

30, 40 की बजाय 50 साल की उम्र में पुरुष अपनी सेक्स लाइफ को ज़्यादा एन्जॉय करते हैं, जिससे पार्टनर के साथ उनका रिश्ता भी मज़बूत बनता है.
थैंक्यू कहना भी है ज़रूरी

छोटा-सा शब्द थैंक्यू आपके रिश्ते के लिए बहुत अहम् साबित हो सकता है. ज़रा याद करिए, शादी के शुरुआती दिनों में पार्टनर द्वारा कोई काम करने पर जब आप उन्हें थैंक्यू कहते थे, तो कैसे उनके चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती थी. पति-पत्नी यदि एक-दूसरे की मदद की एवज़ में एक-दूसरे के प्रति आभार प्रकट करें, तो निश्‍चय ही ये उनके रिश्ते को सकारात्मक दिशा में ले जाता है और उनके बीच बॉन्डिंग गहरी होती है. अतः इस छोटे शब्द को छोटा समझने की भूल न करें और झट से हमसफ़र को थैंक्यू कहकर स्पेशल फील कराएं.

क्या कहती है स्टडी?

दिल से पार्टनर को कहा गया थैंक्यू शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशहाल और नई ऊर्जा से भर देता है. जब कपल्स के बीच किसी तरह का मनमुटाव होता है, तो ऐसे नकारात्मक माहौल में किसी छोटी-सी बात के लिए भी दिल से बोला गया थैंक्यू रिश्ते के लिए मरहम का काम करता है.
साथ हंसना भी है फ़ायदेमंद

हंसना भला कौन नहीं चाहता और हंसी से तनाव भी घटता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पार्टनर के साथ किसी बात/जोक पर हंसना आपके रिश्ते की सेहत के लिए भी अच्छा है? अतः अकेले में कोई जोक/मैसेज पढ़कर मुस्कुराने की बजाय उसे पार्टनर के साथ शेयर करें और दोनों दिल खोलकर हंसें. इससे सेहत और रिश्ता दोनों बने रहेंगे.

क्या कहती है स्टडी?
साथ हंसने वाले कपल्स का रिश्ता मधुर और मज़बूत होता है. अध्ययन के अनुसार, ऐसे कपल्स एक-दूसरे के प्रति ज़्यादा समर्पित और संतुष्ट रहते हैं. कपल्स का एक साथ हंसना उनके रिश्ते की गहराई और अपनेपन को बढ़ाने के लिए टॉनिक का काम करता है. अध्ययन से ये भी साबित हुआ है कि जो पुरुष पार्टनर अपनी हमसफ़र को हंसने के लिए प्रेरित करते हैं उनका पार्टनर से गहरा लगाव होता है.

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