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#योगासन:

 #योगासन: अर्धबद्ध पद्मोत्तानासन ( दूर होगी पेट और याददाश्त की समस्या)

आसन विधि:


इस आसन की विधि जटिल नहीं है। खड़े होकर दोनों पंजों को मिलाएं। गर्दन सीधी रखते हुए सामने की ओर देखें। अब बाएं पैर पर शरीर का भार डालते हुए सांस भरें और दाएं पैर के पंजे को बाईं जांघ पर ऊपर की ओर रखें। दाहिने हाथ को पीठ की तरफ से ले जाते हुए दाएं पंजे की उंगलियों को पकड़ लें। इस स्थिति में दो बार सहज रूप से सांस लें और छोड़ें। फिर, सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे,कूल्हे से आगे की ओर झुकें और बाएं हाथ को जमीन पर टिका दें। नाक को घुटने से सट जाने दें।




इस अवस्था में लगभग एक मिनट तक सहज सांस लेते रहें। इसके बाद, पहले दाएं हाथ को सामान्य स्थिति में लाएं। फिर सांस भरते हुए,धड़ को ऊपर उठाएं। एकदम सीधे खड़े हो जाने पर दाहिने पैर पंजे को छोड़ दें। दायां पैर भी नीचे कर लें और दोनों हाथों को सहज रखते हुए दोनों पैरों पर समान वजन देकर खड़े हो जाएं। कुछ पल बाद,यही प्रक्रिया दाएं पैर पर शरीर का भार डालते हुए दोहराएं जिसमें बाएं पैर का पंजा दायीं जांघ पर हो। दोनों पैरों से यह प्रक्रिया दो-दो बार करें।


आसन के लाभ:


- नाभि के संकुचन के कारण कब्ज समाप्त होता है और हाजमा मजबूत होता है।
- शरीर और मन की बोझिलता समाप्त होती है।
- गैस बनने सहित अन्य वायुजनित रोगों से मुक्ति मिलती है।
- पैर शक्तिशाली होते हैं और उनकी कंपकंपी दूर होती है।
- शरीर समग्र रूप से संतुलित होता है।
- घुटनों और कंधों की जकड़न समाप्त होती है और वे लचीले बनते हैं।
- सीने और कंधे की मांसपेशियां खुलने से सांस संबंधी रोगों में राहत मिलती है।
- एकाग्रता बढ़ती है।


बरतें ये सावधानियां


- आप चाहें, तो हाथ को मोड़कर पीठ पर रखने के बजाए, दोनों हाथों को ऊपर कर उंगलियों को इंटरलॉक भी कर सकते हैं, बशर्ते आपको हाई ब्लड प्रेशर न हो।
- यदि पैर इतना ऊपर न जा पाए कि हाथ को पीछे की तरफ से ले जाकर पंजे को पकड़ा जा सके, तो पंजे को जबरन ऊपर न लाएं और हाथ को पीठ पर ही रख लें और इसी स्थिति में झुकें।
- कूल्हों के जोड़ों से ही झुकें और फिर सीधे खड़े हों।
- अगर कान संबंधी रोग हों, चक्कर आते हों या संतुलन संबंधी कोई अन्य परेशानी हो तो किसी दीवार के पास ही इसका अभ्यास करें।
- पीठदर्द, गर्दनदर्द, सियाटिका, हैमस्ट्रिंग (मांसपेशियों में खिंचाव), स्लिप डिस्क,रीढ़ से जुड़ी परेशानियों में और गर्भावस्था के दौरान यह आसन वर्जित है।






आज का #योगासन: फेस योग ( झुर्रियां होगी हमेशा के लिए दूर)


चेहरे को झुर्रियों से बचने और लंबे समय तक युवा दिखने के लिए एंटी रिंकल्स फेस योग आपके लिए बहुत मददगार हो सकता है। अगर आप भी चेहरे के दाग-धब्‍बों या झुर्रियों से परेशान हैं, तो इसे दूर करने में फेशियल योग आपकी मदद कर सकता है। फेस योग न केवल चेहरे पर चमक लाता है बल्कि इससे तनाव भी दूर होता है और तो और फेस योग से धब्बे, झाइयां और कालापन दूर किया जा सकता है।


फेस के लिए #योग करने का तरीका




- सांस भरके मुंह में रखें फिर इसे एक गाल से दूसरे गाल में लेकर जाएं। ऐसा 5 बार करें।


- अपना मुंह खोलकर गर्दन को ऊपर की तरफ करें। यह गर्दन के लिए बहुत ही अच्‍छी एक्‍सरसाइज है। इससे गर्दन की झुर्रियां और डबल चिन दूर करने में मदद मिलती है। ऐसा दो तीन बार करें। फिर साइड में फेस करके भी इस एक्‍सरसाइज को करें। फिर दूसरी साइड से भी इस एक्‍सरसाइज को करें।


- अब अपने हाथों की मुठ्ठी बंद करके अपने माथे पर बहुत ही आराम से मसाज करें। कम से कम ऐसा 5 बार करें। फिर रिलैक्‍स हो जाएं। ऐसा करने के लिए आप अपनी उंगालियों का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं। इस एक्‍सरसाइज को करने से आपके माथे की महीन रेखाएं कम हो जाएंगी।


- इस योग को करना बेहद ही आसन है। जी हां इस योग को करने के लिए आपको अपनी जीभ को जितनी हो सके उतनी बाहर निकालकर, 60 सेकंड के लिए ऐसी ही अवस्‍था में रखना है। इस योग आसन को 3 बार दोहराएं।


- आखिर में अपनी आंखों के नीचे दोनों साइड अपनी उंगलियों को रखें और थोड़ा सा दबाव दें। और आंखों को जितना बड़ा कर सकते हैं उतना करें। फिर हल्‍दी से मुस्‍कान देकर अपनी एक्‍सरसाइज को खत्‍म करें।








खर्राटे आना बंद हो जाएंगे, अगर करेंगे ये 2 योग


खर्राटे आप लेते हैं और सोने में परेशानी दूसरे को होती है। खुद तो चैन से सोते हैं जबकि आपके साथ मौजूद व्‍यक्ति की नींद खराब हो जाती है। अगर आप भी सोते समय खर्राटे लेते हैं तो इस आदत में सुधार कीजिए। खर्राटे अक्‍सर हमारे नाक, मुंह और गले में वसन मार्ग छोटा होने के कारण भी आते हैं। इसके अलावा नाक में किसी तरह की तकलीफ होने के कारण भी खर्राटे आते हैं। जब सांस लेने में किसी तरह का अवरोध उत्‍पन्‍न होता है तो खर्राटे आने लगते हैं। कुछ लोगों में धूम्रपान करने, मोटापा और हाई ब्‍लडप्रेशर से पीडि़त व्‍यक्तियों को भी इसकी समस्‍या होती है।




#योग से करें खर्राटे का समाधान


योग खर्राटे की समस्या से निजात दिलाने के लिए सबसे फायदेमंद है। जब तक व्यक्ति योग का अभ्यास करता है, योग के फायदे उस व्यक्ति में नजर आते है। यदि कोई व्यक्ति योग को बहुत लम्बे समय तक अभ्यास करता है तो उसका रिजल्ट बहुत प्रभावी होता है। योग लंग की कार्य क्षमता को बढाता है और हवा को पास करने के रास्ता हमेशा खुला रखता है, जिससे खर्राटे की समस्या कम होती है। खर्राटे की समस्‍या से निपटने के लिए आज हम आपको 2 ऐसे योग के बारे में बता रहे हैं।


सिंहासन
#सिंहासन का अभ्यास करते वक्त हमारे शरीर का आकार सिंह के समान हो जाता है, इसलिए इसे सिंहासन नाम दिया गया है। इसे करने के लिए सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखे और हाथों की अंगुलियां पीछे की ओर करके पैरों के बीच सीधा रखें। लम्बी गहरी सांस ले और जीभ को बाहर की ओर निकालिए। दोनों आँखों को खोलकर भूमध्य की और देखिये। मुख को यथासंभव खोल दें। उसके बाद श्वास को बाहर निकालते हुए सिंह की तरह दहाड़ें। इस क्रिया को दहाड़ के साथ 10 से 15 बार अभ्यास करें। यह आसन खर्राटे की समस्‍या से छुटकारा दिलाने में आपकी मदद करेगा।
भ्रामरी प्राणायाम


#भ्रामरी प्राणायाम को करते वक्त भंवरे जैसी गुंजन होती है, इसीलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता हैं। इसे करने से मन शांत होता है वहीं इसके नियमित अभ्यास से और भी बहुत से लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन की मुद्रा में बैठ जाये और अपने दोनों हाथो के अंगूठे से कानो को बंद करें। तर्जनी को सर पर रखे बाकी बची हुई उंगलियों को आंखों पर रखे फिर श्वास को धीमी गति से गहरा खींचकर अंदर कुछ देर रोककर रखें और फिर उसे धीरे-धीरे आवाज करते हुए नाक के दोनों छिद्रों से निकालें। श्वास छोड़ते वक्त भंवरी जैसी आवाज निकालने की कोशिश करे। यह भी खर्राटे को दूर करता है

आज का #योगासन: #मरीचिआसन (कमरदर्द को दूर करने में कैसे मददगार है)
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मरिचिआसन की विधि

मरिचिआसन न केवल कमरदर्द को दूर करता है बल्कि यह शरीर की दूसरी समस्‍याओं के लिए भी फायदेमंद होता है। यह आसन किसी पेनकिलर से अधिक प्रभावी होता है और इससे तुरंत आराम मिलता है। यह मन को भी शांत करता है जिससे तनाव नहीं होता। इसके नियमित अभ्‍यास से कमर मजबूत होती है और कमरदर्द की समस्‍या हमेशा के लिए दूर हो जाती है। इस आसन का नाम मरिची नामक संयासी के नाम से लिया गया है, जिसका मतलब रोशनी की किरण है।


कैसे करें मरिचिआसन

इसे करने के लिए सीधे जमीन में किसी चटाई पर बैठ जायें। आपके दानों पैर सामने की तरफ सटे हुए होने चाहिए। दोनों हाथ साइड में रखें और अपनी सिर और कमर को सीधा रखें। अब एक पैर को ऊपर की तरफ मोडि़ये, इस स्थिति में आपके मुड़े हुए पैर का घुटना सीने को छूना चाहिए। दूसरा पैर सीधा होना चाहिए। फिर अपने कमर के ऊपरी हिस्‍से को दबाव के साथ मुड़े हुए पैर के विपरीत दिशा में ले जायें। दोनों हाथों से मुड़े हुए पैर को जकड़ लीजिए। और गहरी सांस लेकर एक मिनट तक इसी स्थिति में रहें। इस स्थिति को 4-5 बार दोहरायें। अब दूसरे पैर से भी इस क्रिया को दोहरायें। कमरदर्द छूमंतर हो जायेगा।

मरिचिआसन के दूसरे फायदे

- इससे रीढ़ की हड्डी और कमर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- हाथों की मांसपेशियों को स्‍ट्रेच कर मजबूत करता है।
- इससे पाचन क्रिया मजबूत होती है, यह पाचन की दूसरी समस्‍याओं को भी दूर करता है।
- महिलायें इस आसान से मासिक धर्म की समस्‍या और दर्द दूर होता है।
- इससे दिमाग शांत रहता है और तनाव भी दूर होता है।

सावधानी

जिसे कमर में चोट लगी हो या फिर सिर में दर्द हो इस आसन को न करें। हाइपरटेंशन और माइग्रेन में भी इस आसन को करें। इस आसन को करने से पहले योग के शिक्षक से सलाह जरूर लें।


आज का #योगासन: मार्जरासन

इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डियों में पर्याप्त खिंचाव होता है जो शरीर को लचीला बनाये रखने में कारगर होता है। इस आसन से पाचन क्रिया अच्छी होती है और रक्त संचार अच्छे से बना रहता है। 

#मार्जरासन का अभ्यास करने की विधि
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- टेबल मुद्रा के समान हथेलियों और घुटनों पर शरीर को स्थापित कर दीजिए। इस अवस्था में कलाई कंधे के नीचे और घुटने हिप्स के नीचे होने चाहिए। इसके बाद हथेलियों को फैलाइए, इस क्रिया में मध्यमा (पांचों उंगलियों के बीच की उंगली) को एकदम सीधा रखिए।

- मेरूदंड (पीठ की हड्डी), गर्दन और सिर को एक सिधाई में रखिए। इस अवस्था में मेरूदंड को बिलकुल भी झुकाना नहीं चाहिए।इस आसन क्रिया में शरीर का पूरा भार हथेलियों और घुटनों पर एक समान रूप से डालिए। हिप्स को अंदर की ओर लीजिए और कमर को छत के ऊपर की तरफ उठाइए।

- इसके बाद ठुड्डी को सीने से लगाइए। गहरी सांस अंदर खींचते हुए पेट को नीचे की तरफ ले आकर कमर को ऊपर की ओर ले जाइए। सिर को छत की दिशा में उठाते हुए सामने की तरफ देखिए। इस मुद्रा को कम से कम 5-7 बार दोहराइए।

- आसन के दौरान हड्डियों में पूरा खिंचाव हो इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस अवस्था में शरीर के पिछले भाग में दबाव नहीं हो इसका ख्याल रखना चाहिए। जब कमर को उठा रहे हों और पीठ को घुमा रहे हों तब उस समय कंधे तनाव रहित होने चाहिए।

- मार्जरासन करने से शारीर का तनाव दूर होता है। इस आसन को करके शरीर को चुस्त और दुरुस्त बनाया जा सकता है। इस योग मुद्रा से शरीर में रक्त-संचार सुचारू तरीके से होता है। मार्जरासन से कंधों, कमर और हिप्स में जिस प्रकार से खिंचाव होता है वह शरीर को सक्रिय बनाए रखने के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

- इस आसन से पाचनतंत्र मजबूत होता है जिससे पेट की बीमारियां जैसे- कब्ज, एसिडिटी आदि नहीं होती है। अन्य कठिन योगासनों का अभ्यास करने के पश्चात शरीर को आराम देने के लिए इस आसन का अभ्या‍स बहुत ही लाभकारी होता है।

- मार्जरासन का अभ्यास उस स्थिति में नहीं करना चाहिए जबकि कमर में किसी प्रकार की कोई भी परेशानी हो। घुटनों एवं कलाईयों में मोच अथवा दर्द की स्थिति में भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस आसन को करते समय शरीर को जितना सहज और लचीला बनाएंगे उतना ही अच्छा होगा।


घरेलु उपचार: हाई ब्‍लड प्रेशर पर प्रभावशाली घरेलू उपाय
हाई ब्लड प्रेशर में रोगी को चक्कर आने और सिर घूमने की समस्‍या होती है। रोगी का किसी काम में मन नहीं लगता। उसमें शारीरिक काम करने की क्षमता नहीं रहती और रोगी अनिद्रा का शिकार रहता है। घरेलू उपचार के सावधानीपूर्वक इस्तेमाल से बिना दवाई लिए इस भयंकर बीमारी पर पूर्णत: नियंत्रण पाया जा सकता है। जरूरत है संयमपूर्वक नियम पालन की। 

आइए जानें हाई ब्लड प्रेशर के लिए घरेलू उपाय।

नमक का कम प्रयोग

नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला सबसे प्रमुख कारक है। इसलिए यह बात सबसे महत्‍वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए।


लहसुन

उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होने की स्थिति का समाधान करती है।

प्याज

प्याज के नियमित सेवन से ब्‍ल्‍ड प्रेशर नियंत्रण में रहता है और अगर आपका ब्‍लड प्रेशर बढ़ गया है तो उसे तुरंत करने के लिए प्‍याज का सेवन करें। इसके सेवन से शरीर से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी नियंत्रित होती है। इसमें क्योरसेटिन पाया जाता है, यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है। प्‍याज को खाने के साथ और सलाद के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।

अदरक

प्याज और लहसुन की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रॉल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्‍शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटी-ऑक्सीडेटस होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रॉल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।

नींबू का रस

नींबू के रस से रक्‍त वाहिनियां कोमल व लचकदार हो जाती हैं। इससे रक्‍तचाप सामान्‍य बना रहता है। यह हृदयाघात के खतरे को भी कम करता है। एक-एक चम्‍मच शहद, अदरक और नींबू के रस को गुनगुने पानी में मिलाकर सप्‍ताह में दो-तीन बार पीना चाहिए। यह ब्‍लड प्रेशर के लिए बहुत अच्‍छा टॉनिक है। इसके अलावा बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। यह बहुत ही लाभकारी उपचार है।

तिल

तिल का सेवन करने से रक्‍तचाप सामान्‍य हो जाता है। तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह रक्‍तचाप कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर है। रक्‍तचाप बढ़ने पर इसका सेवन कीजिए।

तरबूज के बीज और खसखस

तरबूज के बीज को छीलकर उसके बीच की गिरी और खसखस दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें। एक महीने तक इसका सेवन करें। यह हाई ब्‍लड प्रेशर के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

अलसी

अलसी में अल्फा लिनोनेलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का ओमेगा 3 फैटी एसिड है। कई शोधों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने आहार में अलसी का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए। इस औषधि में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा भी कम होती है, और इसके सेवन से रक्‍तचाप भी कम हो जाता है।



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