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मुँह के छाले- कारण और निवारण


मुँह के छाले- कारण और निवारण 


मुंह के छालों की परेशानी के सबके ढेरों किस्से होंगे. कोई त्यौहार हो, किसी सम्बन्धी के यहाँ से निमंत्रण हो या दोस्तों के साथ अचानक प्लान की गयी पार्टी हो, हम इन छालों की वजह से पूरा लुत्फ़ नहीं उठा पाते. बात सिर्फ यहीं नहीं रूकती, कई बार इससे हमारी बहुत दिनों से योजित किसी मीटिंग या प्रेजेंटेशन में हमें नुक्सान उठाना पड़ता है. हम बार-बार ये ख्याल करते हैं की आखिर ये कौन सी बाला है जो बिन बुलाये जब ना तब टपकते रहती है. दरअसल, मुंह के छालों का होना किसी एक कारण पर निर्भर नहीं है. इसके लिए कई सारी वजहें हो सकती हैं.


मुंह के छालों की कुछ कारण- 
ब्रश करते वक़्त रगड़ जाना, खेलते वक़्त चोट लगना, अपने ही दांतों से कट जाना. 
बैक्टीरियल, वायरल या फंगल इन्फेक्शन 
दांतों में लगाये गए ब्रेसेज 
मुंह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से एलर्जी हो जाना 
जिंक, आयरन, विटामिन बी-12 जैसे जरूरी मिनरल्स और विटामिन की कमी 
भावनात्मक परेशानी या नींद की कमी 
ऐसे टूथपेस्ट या माउथ-वाश जिसमे सोडियम लौरय्ल सलफेट हो, उसका इश्तेमाल करना 
कुछ फल, चॉकलेट या कॉफ़ी जैसे एसिडिक पदार्थों से संवेदनशीलता 
माहवारी के दौरान होर्मोनेस में बदलाव 


कई बार कुछ सप्ताह तक टिक गए छाले कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं- जैसे- एड्स, पेट की गंभीर बिमारी, डायबिटीज या इम्यून सम्बन्धी बड़ी बीमारी.


आम तौर पर तीन तरह के छाले होते हैं-


माइनर, मेजर तथा हेर्पेटीफॉर्म.

इन सबमें, माइनर जैसा की नाम से ही लग रहा है, एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाता है. हेर्पेटीफॉर्म ज्यादातर वयस्कों में होता है. इसमें दस से लेकर सौ तक के गुच्छों में छले हो जाते हैं. ये बिलकुल पिन की तरह छोटे-छोटे होते हैं और मसूड़ों के नीचे या तालु में पाए जाते हैं. ये भी एक से दो हफ्ते के अन्दर स्वतः ठीक हो जाते हैं. मेजर में ये छले बड़े होते हैं तथा आम तौर पर छ सप्ताह भी इनके उपचार में लग जाता है. ऐसे छालों के उपचार हेतु कुछ घरेलु नुस्खे आजमाए जा सकते हैं. 
साल्टवाटर या बेकिंग वाटर से कुल करें. 
अपने छालों के ऊपर गीली चाय की पट्टी रखें. 
छालों पर हल्के-हल्के बर्फ रगड़ें. 
छालों के ऊपर बेकिंग सोडा का लेप लगा दें फिर इसके ऊपर मिल्क ऑफ़ मग्नेसिया रखें. मिल्क ऑफ़ मग्नेसिया, इसी नाम से आपको बाज़ार में मिल जाएगा. 
कुछ जरूरी विटामिन्स जैसे B 6, B 12 और मिनरल्स जैसे की जिंक के टेबलेट्स भी लिए जा सकते हैं. 


इन उपचारों के अलावा इस बात की भी जरूरत है की आप इस चीज़ की पहचान करें की किस प्रकार के खानों से आपको इनके होने की संभावना ज्यादा होती है. आम तौर पर एसिडिक आहार से दूरी बनायें. मुंह के संपूर्ण स्वास्थय का रोजाना ख्याल, तनाव से दूरी, अच्छी नींद तथा कब्जियत का निदान भी आपको मुख छालों या मुख व्रण से दूर रख सकता है. अपने आहार में जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स का भरपूर ख्याल रखें.

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